दीदी की बुर फाड़ दी तो झर झर पानी निकलने लगा

दीदी की बुर फाड़ दी तो झर झर पानी निकलने लगा

मेरा नाम विकास है। उम्र 22 साल। मेरी बड़ी दीदी का नाम नेहा है। उम्र 25 साल। दीदी की शादी हो चुकी है, लेकिन वो अक्सर मायके आती रहती है। दीदी की बॉडी बहुत सेक्सी है — गोरी, भरी हुई छातियाँ और मोटी-मोटी गांड।

एक बार दीदी 10 दिन के लिए मायके आई थी। मम्मी-पापा गांव गए हुए थे। घर में सिर्फ मैं और दीदी अकेले थे।

पहले दो दिन तो नॉर्मल बीते। तीसरे दिन शाम को दीदी नहाकर नाइटी पहनकर बाहर आई। नाइटी थोड़ी छोटी थी, इसलिए उनकी मोटी जांघें साफ दिख रही थीं। मैं सोफे पर लेटा टीवी देख रहा था। दीदी मेरे पास आकर बैठ गई।

दीदी ने कहा, “विकास, आज बहुत गर्मी है ना?”

मैंने कहा, “हाँ दीदी।”

दीदी हँसकर बोली, “तू तो देख रहा है ना… मेरी जांघें?”

मैं शर्मा गया। दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा, “शर्मा मत… मैंने देख लिया था कि तू मेरी गांड और चूचियाँ कैसे देखता है।”

फिर दीदी ने सीधे कहा, “आज रात तू मुझे चोदेगा।”

मैं चौंक गया। दीदी ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया। लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। दीदी ने कहा, “कितना मोटा है तेरा… आज मेरी बुर फाड़ देना।”

रात को जब हम दोनों कमरे में गए, दीदी ने नाइटी उतार दी। वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मैंने भी कपड़े उतार दिए। मेरा लंड तना हुआ खड़ा था।

दीदी बेड पर लेट गई और टाँगें फैला दीं। मैं उनके बीच में आ गया। दीदी बोली, “कंडोम मत लगा… आज मुझे रॉ चोदना।”

मैंने अपना मोटा लंड दीदी की चूत पर रखा और जोर से धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। दीदी चीख पड़ी —
“आह्ह… विकास… बहुत मोटा है… धीरे…”

लेकिन मैंने नहीं सुना। मैंने एक और जोरदार झटका लगाया। पूरा लंड दीदी की बुर में घुस गया। दीदी की आँखें फट गईं।

“आह्ह्ह… मर गई… फट गई मेरी बुर… आह्ह…”

मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था। जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। दीदी की बुर मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर धक्के के साथ दीदी की छातियाँ उछल रही थीं।

दीदी चीख रही थी —
“आह… विकास… मेरी बुर फाड़ दी… आह… बहुत जोर से मार रहा है…”

मैंने दीदी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और तेजी से चोदने लगा। दीदी की बुर से चिकना पानी निकल रहा था और मेरे लंड पर फैल रहा था।

10 मिनट तक लगातार जोरदार चुदाई के बाद दीदी का शरीर अचानक अकड़ गया। उसकी आँखें बंद हो गईं और वह जोर से काँपने लगी।

“आह्ह्ह्ह… विकास… रुक… आह्ह… मैं… आह्ह्ह…”

उसी वक्त दीदी की बुर से झर झर पानी की तेज धार निकलने लगी। गर्म और चिपचिपा पानी मेरे लंड, पेट और बेड पर छिटक रहा था। दीदी का पूरा शरीर काँप रहा था। वह जोर-जोर से साँस ले रही थी।

दीदी बोली, “आह… विकास… पहली बार इतना पानी निकला… तूने मेरी बुर सच में फाड़ दी…”

लेकिन मैं रुका नहीं। मैं और जोर से धक्के लगाने लगा। दीदी की बुर अब और ज्यादा गीली और फूली हुई थी। हर धक्के के साथ “पचक-पचक” की तेज आवाज आ रही थी।

दीदी फिर से काँपने लगी। दूसरी बार भी उसकी बुर से पानी की धार निकली। इस बार और ज्यादा जोर से।

“आह्ह्ह… रुक… मर जाऊँगी… आह्ह… विकास…”

मैं भी अब रुक नहीं पाया। लंड दीदी की बुर से निकालकर उसके पेट और छातियों पर माल छोड़ दिया। गाढ़ा वीर्य दीदी के पूरे ऊपर फैल गया।

दीदी थककर लेटी रही। उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थीं। थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे गले लगा लिया और कहा —

“विकास… तूने आज मेरी बुर सच में फाड़ दी। इतना पानी कभी नहीं निकला था।”

उस रात हमने तीन राउंड और किए। हर बार दीदी की बुर से पानी निकलता रहा।

अगले दिन से दीदी खुद कहने लगी —
“आज फिर मेरी बुर फाड़ दे… मुझे फिर से उस पानी की धार निकालनी है।”

अगले दिन और ज्यादा चुदाई की

पिछली रात दीदी की बुर से दो बार पानी की धार निकल चुकी थी। दीदी पूरी तरह थक चुकी थी, लेकिन सुबह होते ही उसका मूड फिर बदल गया।

सुबह 8 बजे

दीदी नहाकर सिर्फ नाइटी पहनकर मेरे कमरे में आई। मैं अभी सो रहा था। दीदी ने मेरी चादर हटाई और सीधे मेरे लंड पर मुंह लगा दिया। 2 मिनट में ही मेरा लंड तना हुआ खड़ा हो गया।

दीदी ने नाइटी ऊपर की और मेरे ऊपर बैठ गई। बिना कुछ बोले उसने मेरे लंड को अपनी बुर में उतार लिया।

“आज सुबह से ही शुरू करते हैं विकास,” दीदी बोली और जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी।

मैंने दीदी की कमर पकड़ ली और नीचे से जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए। दीदी की भारी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैं उन्हें जोर से चूस रहा था।

10 मिनट बाद दीदी फिर से काँपने लगी। “आह्ह… विकास… फिर आ रहा है… आह्ह…”

उसी वक्त दीदी की बुर से झर-झर गर्म पानी निकलकर मेरे लंड और पेट पर गिरने लगा। दीदी का शरीर ऐंठ गया और वह मेरे ऊपर गिर पड़ी।

दोपहर 1 बजे – किचन में

हम दोनों नाश्ता कर रहे थे। दीदी ने अचानक मेरी तरफ देखा और बोली, “विकास… मेरी बुर फिर से फड़फड़ा रही है।”

मैंने दीदी को किचन के स्लैब पर बैठा दिया। उसकी नाइटी ऊपर कर दी और उसके पैर फैला दिए। बिना देर किए मैंने लंड दीदी की बुर में घुसा दिया।

इस बार मैं और जोर से चोद रहा था। दीदी स्लैब को दोनों हाथों से पकड़े हुए थी। हर धक्के के साथ स्लैब हिल रहा था।

“आह… विकास… और जोर से… आज मेरी बुर फाड़ दे… आह्ह…”

15 मिनट की तेज चुदाई के बाद दीदी फिर से झड़ गई। इस बार पानी की धार और तेज थी। दीदी की बुर से पानी निकलकर फर्श पर गिर रहा था। दीदी जोर से काँप रही थी।

शाम 5 बजे – बाथरूम में

दीदी नहाने गई थी। मैं भी अंदर चला गया। दीदी दीवार से सटी खड़ी थी। मैंने पीछे से आकर उसकी नाइटी ऊपर कर दी और एक ही जोरदार धक्के में लंड अंदर घुसा दिया।

बाथरूम में गूँज रही थी दीदी की आवाज — “आह्ह… विकास… पीछे से और जोर से… मेरी बुर फट रही है…”

मैंने दीदी के बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। दीदी की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। 10 मिनट बाद दीदी फिर से झड़ गई। इस बार उसकी बुर से पानी इतना निकला कि मेरी जांघें भी भीग गईं।

रात 10 बजे – बेड पर लंबी चुदाई

रात को हम दोनों नंगे बेड पर थे। दीदी खुद ही डॉगी स्टाइल में हो गई। “आज रात मुझे अच्छे से चोदना… पूरा 15-20 मिनट तक।”

मैंने दीदी की कमर पकड़ ली और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। दीदी की बुर पहले से ही सूजी हुई और गीली थी। हर धक्के के साथ दीदी की चीख निकल रही थी।

“आह… विकास… मेरी बुर फाड़ दी… आह… और मार… हाँ…”

मैंने दीदी के बाल खींचे और और तेजी से धक्के लगाए। दीदी का शरीर आगे-पीछे हो रहा था। 18 मिनट तक लगातार चोदने के बाद दीदी फिर से काँपने लगी।

इस बार दीदी की बुर से तीन बार पानी की धार निकली। पहली धार मेरे लंड पर, दूसरी बेड पर, और तीसरी दीदी के पैरों पर। दीदी इतनी जोर से काँपी कि उसकी टाँगें लड़खड़ा गईं।

दीदी बोली, “विकास… आज तूने मुझे सच में मार डाला… मेरी बुर में आग लग रही है…”

उस रात हमने कुल चार राउंड पूरे किए। हर बार दीदी की बुर से पानी निकलता रहा। आखिरी राउंड में दीदी मेरे ऊपर बैठकर चुदवाई और तीन बार झड़ी।

सुबह 4 बजे दीदी थककर मेरे ऊपर ही सो गई। उसकी बुर अभी भी मेरे लंड के ऊपर टिकी हुई थी।

दीदी ने आँख बंद करते हुए कहा, “विकास… कल फिर से इतना ही जोर से चोदना… मेरी बुर अब तेरे बिना नहीं रह पाती।”

दीदी की गांड की चुदाई

रात के 11 बजे दीदी नहाकर आई। सिर्फ एक पतली नाइटी पहने हुए थी। वह सीधे मेरे पास आकर लेट गई और मेरे कान में फुसफुसाई —

“विकास… आज मेरी बुर नहीं, मेरी गांड फाड़ दे।”

मैं चौंक गया। दीदी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “कल से मेरी बुर में दर्द हो रहा है… आज सिर्फ गांड मारना। जितना जोर से मारना हो, मार ले।”

मैंने दीदी को पेट के बल लिटा दिया। नाइटी ऊपर कर दी। दीदी की मोटी, गोरी और भारी गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उसकी गांड के चीरे को फैलाया। दीदी की गांड का छेद छोटा और तंग दिख रहा था।

मैंने थोड़ा सा तेल लगाया और अपनी उंगली धीरे से उसके गांड के छेद में डाली। दीदी ने साँस ली।

“आह… विकास… धीरे… आज पहली बार गांड मार रहा है ना?”

मैंने कहा, “हाँ दीदी।”

दीदी बोली, “तो आज मेरी गांड को अपनी बुर बना दे।”

मैंने कंडोम लगाया और थोड़ा और तेल लगाया। फिर मैंने अपना मोटा लंड दीदी की गांड पर रखा। दीदी ने तकिया मुंह में दबा लिया।

एक धीमा लेकिन जोरदार दबाव दिया। लंड का टोपा अंदर घुस गया। दीदी का शरीर अकड़ गया।

“आह्ह… विकास… दर्द हो रहा है… आह… बहुत मोटा है तेरा लंड…”

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे और दबाव बढ़ाया। आधा लंड अंदर चला गया। दीदी की गांड की अंदरूनी दीवारें मेरे लंड को इतनी जोर से निचोड़ रही थीं कि मुझे भी दर्द होने लगा।

“आह… दीदी… तेरी गांड बहुत तंग है…” मैं बोला।

दीदी तकिये में मुंह दबाए बोली, “पूरा अंदर डाल… आज मेरी गांड फाड़ दे…”

मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया। पूरा लंड दीदी की गांड में घुस गया। दीदी जोर से काँप गई।

“आह्ह्ह… मर गई… फट गई मेरी गांड… आह्ह… विकास…”

अब मैं धीरे-धीरे बाहर निकालकर फिर अंदर करने लगा। दीदी की गांड मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी। हर धक्के के साथ दीदी की साँसें भारी हो रही थीं।

10 मिनट बाद दीदी ने खुद पीछे धकेलना शुरू कर दिया।

“अब और जोर से मार… विकास… मेरी गांड अब सहन कर रही है…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब मैं जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। दीदी की मोटी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। “पचक-पचक” की तेज आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।

दीदी चीख रही थी — “आह… विकास… मेरी गांड फाड़ दी… आह… और जोर से… हाँ… ऐसे ही…”

मैंने दीदी के बाल पकड़ लिए और और तेजी से चोदने लगा। दीदी का सिर पीछे खिंच रहा था। उसकी गांड लाल हो चुकी थी।

15 मिनट तक लगातार गांड मारने के बाद दीदी फिर से काँपने लगी। इस बार उसकी बुर से भी पानी निकलने लगा, जबकि मैं उसकी गांड मार रहा था।

“आह्ह्ह… विकास… मेरी गांड और बुर दोनों फट रही हैं… आह्ह…”

मैंने दीदी को घुमाकर डॉगी स्टाइल में कर दिया। अब मैं और गहरे धक्के लगा रहा था। दीदी की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी। मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

दीदी बोली, “विकास… आज मेरी गांड तेरी हो गई… जब चाहे मार लेना…”

करीब 25 मिनट तक लगातार गांड चोदने के बाद मैं दीदी की गांड में ही झड़ गया। गर्म वीर्य दीदी की गांड में भर गया। दीदी का शरीर अभी भी हल्का काँप रहा था।

जब मैंने लंड निकाला तो दीदी की गांड का छेद थोड़ा खुला हुआ था और उसमें से मेरा वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।

दीदी थककर बेड पर गिर पड़ी। उसने मुड़कर मुझे देखा और बोली —

“विकास… आज तूने मेरी गांड सच में फाड़ दी। इतना मजा पहले कभी नहीं आया था।”

मैंने दीदी को गले लगाते हुए कहा, “कल फिर से तेरी गांड मारूंगा दीदी।”

दीदी हँसकर बोली, “हाँ… लेकिन कल सुबह से शुरू करना। आज रात मुझे तेरे लंड के साथ सोना है।”

Leave a Comment