दीदी के सामने जीजा ने साली की कुँवारी सील तोड़ी | Jija Sali Virgin Sex Story

दीदी के कमरे से आई गंदी आवाजें… जीजा ने साली की कुँवारी सील तोड़ने की साजिश रची

मेरा नाम अंजलि है। उम्र १८ साल। मैं कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हूँ। पढ़ाई में अच्छी हूँ, शर्मीली हूँ और कभी किसी लड़के से बात तक नहीं की। सेक्स के बारे में तो मैं सोचती भी नहीं थी।

दो हफ्ते पहले मेरे पापा-मम्मी अपने रिश्तेदार की शादी में दूसरे शहर गए। शादी में १० दिन लगने वाले थे। घर पर मैं अकेली न रहूँ इसलिए मेरी बड़ी दीदी प्रिया और जीजा राहुल हमारे घर आ गए। दीदी की शादी को तीन साल हो चुके थे। जीजा २९ साल के थे, कद में लंबे और शरीर तगड़ा।

पहले दो दिन सब नॉर्मल था। दीदी खाना बनाती, जीजा ऑफिस जाते। मैं अपनी पढ़ाई में लगी रहती।

तीसरी रात… Jija Sali Virgin Sex Story

रात के करीब १२ बजे मुझे नींद नहीं आ रही थी। अचानक दीदी के कमरे से आवाजें आने लगीं। पहले तो मुझे लगा दीदी को कोई दर्द हो रहा है, लेकिन फिर आवाजें साफ सुनाई देने लगीं।

“आह्ह… राहुल… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” दीदी की आवाज कमरे से बाहर आ रही थी।

मेरा दिल तेज़ धड़कने लगा। मैं धीरे-धीरे उठी और उनके कमरे के पास गई। दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर से रोशनी आ रही थी।

अंदर से जीजा की आवाज आई — “तेरी बहन की चूत अभी तक किसी ने नहीं छुई ना? सच बता।”

दीदी हँसते हुए बोली, “हाँ राहुल… अंजलि अभी पूरी सिल पैक है। उसने कभी किसी लड़के को छुआ तक नहीं। उसकी चूत इतनी टाइट होगी कि तेरा लंड फट जाएगा।”

जीजा बोले, “तो फिर कब चोदूँ उसे? मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता। तेरी चूत तो ढीली हो गई है। मुझे नई और तंग चूत चाहिए।”

दीदी बोली, “कल से प्लान शुरू करते हैं। मैं उसे धीरे-धीरे तैयार करूंगी। पहले उसे नंगे कपड़े पहनाऊंगी, फिर शराब पिलाकर नशा कर दूंगी। फिर तू उसके कमरे में जा। मैं भी साथ रहूंगी… देखूंगी कि तू मेरी बहन की सील कैसे तोड़ता है।”

जीजा हँसे, “अच्छा प्लान है। लेकिन अगर वो रोए या भागे तो?”

दीदी बोली, “रोने दो… थप्पड़ मार देना। आखिर में वो भी मजा लेने लगेगी। मेरी तरह ही रंडी बन जाएगी।”

मैं बाहर खड़ी काँप रही थी। मेरे पूरे शरीर में पसीना आ गया था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं समझ नहीं पा रही थी कि दीदी ऐसा क्यों बोल रही है। मैं उनकी अपनी बहन हूँ… और वो मुझे जीजा को देने की बात कर रही है?

मैं चुपके से अपने कमरे में लौट आई। पूरी रात नींद नहीं आई। अगले दिन सुबह से ही दीदी का व्यवहार बदल गया था।

चौथे दिन — दोपहर दीदी मुझे बाजार ले गई। वहाँ उसने मेरे लिए एक पारदर्शी नीली नेग्लीजी और काली ब्रा-पैंटी खरीदी। दीदी बोली, “अंजलि… ये पहन के देख। तू बहुत प्यारी लगेगी।”

मैं शर्मा गई, “दीदी… ये तो बहुत पतला है… सब दिख जाएगा।” दीदी मुस्कुराई, “हाँ… दिखना भी चाहिए। तू बड़ी हो गई है अब।”

रात को दीदी ने मुझे जबरदस्ती नहाने के लिए कहा और दरवाजा खुला रखने को बोला। नहाते समय वो अंदर आ गई और मेरी नंगी बॉडी को देखने लगी। “तेरी चुचियाँ कितनी कड़क हैं… और चूत के बाल भी कितने घने हैं। अच्छा है, मत काटना इन्हें।”

मैं डर गई थी। मुझे समझ आ रहा था कि दीदी और जीजा कुछ प्लान कर रहे हैं।

पाँचवें दिन — रात रात के खाने के बाद दीदी ने एक ग्लास में शराब डाली और मुझे पिलाने की कोशिश की। “थोड़ी सी पी ले… थकान दूर हो जाएगी।”

मैंने मना कर दिया। दीदी ने गुस्से से कहा, “पी ले… वरना जीजा को बुरा लगेगा।”

मैं डर के मारे थोड़ी सी पी गई। सिर घूमने लगा।

उस रात मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी। बाहर से जीजा और दीदी की हँसी की आवाजें आ रही थीं। मुझे पता था कि वो मेरे बारे में ही बात कर रहे हैं।

मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। मैं कंबल ओढ़कर लेटी हुई थी और सोच रही थी — “क्या सच में जीजा आज मेरे पास आएंगे? क्या दीदी सच में मुझे उनके सामने नंगी करवाएंगी? मेरी सील तोड़ देंगे?”

मैं डर भी रही थी… और अंदर से कुछ अजीब सा भी महसूस कर रही थी। Jija Sali Virgin Sex Story

अगले दिन दीदी ने मुझे जीजा जी से चुदवाया

दीदी प्रिया ने मुझे आवाज दी, “अंजलि… हमारे कमरे में आ जा।” उनकी आवाज में कुछ अजीब सा था। मैं डरते-डरते उनके कमरे में गई। कमरे में हल्की रोशनी थी। जीजा राहुल बिस्तर पर बैठे थे और दीदी उनके पास खड़ी थी।

दीदी ने मेरे हाथ पकड़कर बिस्तर के पास ला कर बैठा दिया। फिर जीजा ने एक ग्लास में शराब डाली और मेरे हाथ में थमा दिया। “पी ले… आज रात तुझे नशा करना है,” जीजा बोले।

मैंने मना किया तो दीदी ने मेरे नाक बंद करके जबरदस्ती ग्लास मुंह में डाल दिया। शराब गले से नीचे उतरते ही मेरा सिर घूमने लगा। आँखें भारी होने लगीं।

दीदी मुस्कुराते हुए मेरे कान में बोली, “आज तेरी सील टूटने वाली है बहन… और मैं सामने बैठकर देखूंगी।”

दीदी ने सबसे पहले मेरे सूट के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खोलते हुए वो बोली, “शर्म मत कर… आज से तू भी औरत बनने वाली है।” सूट के बटन खुलते ही सूट मेरे कंधों से नीचे सरक गया। दीदी ने दोनों हाथों से मेरी बाहें पकड़कर सूट पूरी तरह उतार दिया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

जीजा राहुल मेरी गोरी त्वचा को भूखी नजरों से देख रहे थे। उनकी आँखें मेरी उभरी हुई चुचियों पर टिकी हुई थीं।

दीदी ने मेरी पीठ के पीछे हाथ डाला और ब्रा का हुक खोला। हुक खुलते ही ब्रा ढीली हो गई। दीदी ने धीरे से ब्रा की स्ट्रैप्स मेरे कंधों से नीचे खिसकाईं। जैसे ही ब्रा हटी, मेरी दोनों कड़क चुचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स ठंडी हवा में सख्त हो गए थे।

मैं शर्मा के दोनों हाथों से अपनी चुचियाँ ढकने लगी। “नहीं दीदी… प्लीज…” मेरी आवाज काँप रही थी, आँखों में आँसू आ गए थे।

दीदी ने मेरे हाथ पकड़कर अलग किए और बोली, “छुपा क्यों रही है? जीजा को तो देखना है ना तेरी नई चूत।”

फिर दीदी ने मेरी पैंटी के दोनों तरफ से हाथ डाला और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचना शुरू किया। पैंटी मेरी जांघों से सरकती हुई घुटनों तक आ गई। दीदी ने एक झटके में पैंटी पूरी उतार दी और फेंक दी।

अब मैं पूरी तरह नंगी थी। मेरी घनी चूत के बाल साफ दिख रहे थे। जीजा राहुल की आँखें चमक उठीं। उन्होंने मेरी टांगें जबरदस्ती फैलाईं और मेरी चूत को देखने लगे।

“वाह… सच में सिल पैक है,” जीजा बोले। उनकी आवाज में भूख साफ थी। Jija Sali Virgin Sex Story

चुदाई शुरू: Jija Sali Virgin Sex Story

जीजा ने अपने कपड़े उतारे। उनका लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था — मोटा, लंबा और नसों से भरा हुआ। दीदी ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरी दोनों टांगें फैला दीं। जीजा मेरे बीच में आ गए।

उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ना शुरू किया। गर्म और सख्त लंड मेरी टाइट चूत की फांकों पर दब रहा था। मैं काँप रही थी। “जीजा जी… दर्द होगा… मत कीजिए… प्लीज…”

जीजा ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर सेट किया और धीरे से दबाव डालना शुरू किया। लंड का सिरा अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन मेरी चूत बहुत टाइट थी।

दीदी ने मेरे दोनों हाथ पकड़ रखे थे। जीजा ने कमर को जोर से आगे बढ़ाया। एक जोरदार धक्का…

“आह्ह्ह्ह!!!” मैं चीख पड़ी। मेरी कुँवारी झिल्ली फट गई। चूत से गर्म खून बहने लगा। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखों से आँसू छलक पड़े। मेरा शरीर काँप उठा।

“मर गई… निकालो… दर्द हो रहा है…” मैं रोते हुए चिल्ला रही थी।

जीजा की आँखें बंद थीं, मुंह से सांसें तेज निकल रही थीं। उन्हें मजा आ रहा था। उन्होंने और जोर से धक्का मारा। आधा लंड मेरी चूत में घुस गया। खून और मेरे रस से उनका लंड गीला हो रहा था।

दीदी मेरे कान में बोली, “देख… तेरी सील टूट गई… अब तू औरत बन गई।”

जीजा ने अब तेज धक्के शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ लंड अंदर-बाहर हो रहा था। चूत से “पुच… पुच… चप्पाक…” की आवाजें आ रही थीं। खून मेरी जांघों पर बह रहा था।

मेरा चेहरा दर्द से सिकुड़ गया था। आँखें बंद थीं, होठ काँप रहे थे। मैं बार-बार “नहीं… छोड़ दो… दीदी बचाओ…” बोल रही थी, लेकिन दीदी सिर्फ मुस्कुरा रही थी और मेरे चुचियों को दबा रही थी।

जीजा की सांसें भारी हो गई थीं। वे मुझे घूर रहे थे जैसे कोई जानवर शिकार को देखता है। उनका चेहरा पसीने से भीग गया था।

“बहुत टाइट है रे… मादरचोद… आज तुझे अच्छे से चोदूंगा,” जीजा बड़बड़ा रहे थे।

वे और तेज हो गए। पूरे लंड को अंदर तक घुसा रहे थे। मैं दर्द से तड़प रही थी। मेरे मुंह से निकल रही थीं — “आह्ह… उफ्फ… मर गई रे…”

दीदी ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया ताकि ज्यादा आवाज न हो। जीजा ने लगातार १०-१२ मिनट तक मुझे चोदा। आखिर में उन्होंने जोर से एक अंतिम धक्का मारा और मेरी चूत में गरम-गरम रस छोड़ दिया।

जैसे ही उन्होंने लंड बाहर निकाला, मेरी चूत से खून और सफेद रस दोनों बहने लगे।

मैं थककर बिस्तर पर लेटी हुई थी। आँखों से आँसू बह रहे थे। शरीर काँप रहा था।

राहुल जीजा ने मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा — दीदी ने जबरदस्ती मुंह में लंड ठूंस दिया

पहली चुदाई के बाद मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। मेरी चूत से खून और रस दोनों बह रहे थे। शरीर दर्द से सुन्न हो रहा था। आँखें अभी भी आँसुओं से भीगी हुई थीं।
जीजा राहुल अभी भी संतुष्ट नहीं हुए थे। उन्होंने मेरी कमर पकड़कर मुझे अचानक घुमा दिया। अब मैं घोड़ी बनकर चौके के बल खड़ी हो गई थी। मेरी गांड ऊपर उठ गई थी और चूत पीछे की तरफ खुल गई थी।
“अभी और चोदना बाकी है रे साली,” जीजा बोले। उनकी आवाज में भूख और गुस्सा दोनों थे।
दीदी प्रिया मेरे सामने आ गईं। उन्होंने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर ऊपर उठाया और बोलीं,
“मुंह खोल… आज रात तुझे दोनों तरफ से चोदेंगे।”
मैं डर के मारे मुंह बंद किए हुए थी। दीदी ने मेरे गाल पर जोर से थप्पड़ मारा।
“मुंह खोल हरामजादी… वरना और मारूंगी!”
मैं डर के मारे मुंह खोलने लगी। दीदी ने तुरंत अपना एक पैर बिस्तर पर रखा और अपने पति का लंड पकड़कर मेरे मुंह के पास ले आईं। और मुँह में डाल दिया मैंने लंड चूसने से मना कर दिया

जीजा ने पीछे से एक्शन शुरू किया:


राहुल जीजा ने मेरी कमर दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया। उनका लंड अभी भी खड़ा था और खून से सना हुआ था। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर लगाया और बिना किसी रुकावट के जोर से धक्का मारा।
“आह्ह्ह्ह!!”
मेरे मुंह से चीख निकली लेकिन दीदी ने तुरंत ब्रा मेरी मुँह में डालकर मुँह बंद कर दिया
जीजा पीछे से तेज-तेज धक्के लगा रहे थे। हर धक्के के साथ उनका पूरा लंड मेरी चूत में जाता और बाहर आता। चूत से “चप्पाक-चप्पाक” की तेज आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरी गांड पर उनकी जांघें टकरा रही थीं।
मेरी आँखें बंद थीं। आँसू बह रहे थे। मुंह में दीदी का लंड होने की वजह से मैं ठीक से चीख भी नहीं पा रही थी। सिर्फ “उम्म्फ… उफ्फ…” जैसी आवाजें निकल रही थीं।
दीदी मेरे बाल पकड़े हुए थे और मेरे मुंह में आगे-पीछे लंड चला रही थीं।
“चूस… अच्छे से चूस… आज से तू हमारी रंडी है,” दीदी बोलीं। उनकी आँखों में शैतानी मुस्कान थी।
जीजा राहुल पीछे से मुझे जोर-जोर से चोद रहे थे। उनका चेहरा पसीने से भीग गया था। वे मेरी कमर को कसकर पकड़े हुए थे और बार-बार बोल रहे थे —


“कितनी टाइट चूत है… मादरचोद… आज तुझे फाड़ दूंगा…”
मेरा शरीर आगे-पीछे हिल रहा था। मेरी चुचियाँ नीचे लटककर हिल रही थीं। हर धक्के के साथ दर्द और कुछ अजीब सा एहसास दोनों हो रहा था। मेरी आँखों से आँसू गिर रहे थे लेकिन मुंह से अनजाने में हल्की-हल्की कराह भी निकल रही थी।
दीदी ने मेरे निप्पल को उंगलियों से नोच लिया। दर्द से मेरा शरीर काँप उठा।
लगभग १५ मिनट तक जीजा ने मुझे घोड़ी बनाकर चोदा। आखिर में उन्होंने जोर से मेरी कमर को अपनी तरफ खींचा और पूरी ताकत से अंतिम धक्का मारा। गर्म-गर्म रस फिर से मेरी चूत में भर दिया।
जैसे ही उन्होंने लंड बाहर निकाला, मेरी चूत से सफेद रस और खून की धार बहने लगी।
मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी। मुंह से लार और रस टपक रहा था। आँखें आधी बंद थीं। शरीर काँप रहा था।
दीदी मेरे बाल सहलाते हुए बोलीं,
“अब से रोज ऐसे ही जीजा चोदेंगे तुझे… समझ गई?”

अगले दिन सुबह से शुरू हुआ नया रूटीन — जीजा ने मुझे नंगी हालत में चोदा


रात भर की चुदाई के बाद मैं थककर बेहोश सी हो गई थी। सुबह के करीब ७ बजे जब मेरी आँँखें खुलीं तो मैंने देखा कि मैं अभी भी दीदी-जीजा के कमरे में नंगी पड़ी हुई हूँ। मेरी चूत सूज गई थी और दर्द हो रहा था।

अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी टांगें फैला रहा है। मैंने आँखें खोलीं तो जीजा राहुल मेरे ऊपर चढ़े हुए थे। उनका लंड पहले से ही खड़ा था और वो मेरी चूत पर रगड़ रहे थे।

“उठ गई साली?” जीजा ने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी आँखों में वही भूख थी जो कल रात थी।

मैं डरते हुए बोली, “जीजा जी… दर्द हो रहा है… प्लीज आज मत कीजिए…”

लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनी ही नहीं। उन्होंने सीधे मेरी टांगें अपने कंधों पर रख दीं और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह…” मेरे मुंह से हल्की कराह निकली। कल रात जितना तेज दर्द नहीं था, लेकिन फिर भी चूत में जलन हो रही थी।

जीजा ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ उनका पूरा लंड अंदर जाता और बाहर आता। सुबह की रोशनी में मेरी नंगी बॉडी साफ दिख रही थी। मेरी चुचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं।

दीदी प्रिया बिस्तर के पास बैठी मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने मेरे बाल सहलाते हुए कहा, “देख… अब से हर सुबह जीजा तुझे ऐसे ही चोदेंगे। आदत डाल ले।”

जीजा ने मेरी कमर को कसकर पकड़ रखा था। उनका चेहरा पसीने से भीग रहा था। वे मुझे घूर रहे थे और बोल रहे थे — “कितनी मस्त चूत है तेरी… रोज चोदने लायक है…”

मैं शर्मा के दोनों हाथों से अपना मुंह ढक रही थी। आँखें बंद थीं। हर धक्के के साथ मेरे शरीर में हल्का-हल्का झटका लग रहा था। दर्द के साथ-साथ अब कुछ और एहसास भी हो रहा था। मेरे मुंह से अनजाने में हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं।

“उफ्फ… आह्ह… जीजा जी…” मेरी आवाज काँप रही थी।

लगभग १० मिनट बाद जीजा ने जोर से धक्का मारा और मेरी चूत में फिर से गरम रस छोड़ दिया। फिर उन्होंने लंड बाहर निकाला और मेरे ऊपर गिर पड़े।

सुबह ९ बजे:

दीदी ने मुझे नहाने के लिए कहा। नहाते समय भी जीजा अंदर आ गए। उन्होंने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से फिर चोदना शुरू कर दिया। पानी गिर रहा था और जीजा मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोद रहे थे।

मैं दीवार से सटी हुई थी। मेरे हाथ दीवार पर टिके हुए थे। पानी मेरी नंगी बॉडी पर बह रहा था। जीजा के हर धक्के के साथ मेरी चुचियाँ दीवार से टकरा रही थीं।

“आज से तू नंगी ही घूमेगी घर में,” दीदी ने बाहर से आवाज दी।

दोपहर:

खाने के समय भी जीजा ने मुझे अपनी गोद में बैठाकर चोदा। मैं उनकी गोद में बैठी थी और वो नीचे से धक्के लगा रहे थे। दीदी सामने बैठी खाना खा रही थीं और मुस्कुरा रही थीं।

रात तक मैं कम से कम ४ बार चुद चुकी थी।

शाम को दीदी ने मुझे फिर से उनके कमरे में बुला लिया।

जीजा ने मुझे घोड़ी बनाकर पहली बार गांड मारने की कोशिश की — दीदी ने मुझे जबरदस्ती पकड़कर रखा


शाम के करीब ७ बजे दीदी ने मुझे उनके कमरे में बुला लिया। मैं नंगी ही कमरे में गई क्योंकि अब घर में नंगे घूमने की आदत डाल दी गई थी।

जीजा राहुल बिस्तर पर बैठे थे। जैसे ही मैं कमरे में घुसी, उन्होंने मुझे बिस्तर पर घुमा दिया और बोले, “आज तेरी गांड मारने का मन है।”

मेरा चेहरा पीला पड़ गया। “नहीं जीजा जी… गांड मत मारना… बहुत दर्द होगा… प्लीज…” मैं डरते हुए बोली।

लेकिन दीदी प्रिया ने मेरी बात सुनी ही नहीं। उन्होंने मुझे जबरदस्ती घोड़ी बनाने के लिए कह दिया। “चुप बैठ… आज गांड ही मारेगा तुझे राहुल।”

मैं डर के मारे बिस्तर पर चौके के बल खड़ी हो गई। मेरी गांड ऊपर उठ गई और सिर नीचे झुक गया। दीदी ने मेरे दोनों हाथ पीछे की तरफ खींचकर पकड़ लिए। अब मैं पूरी तरह असहाय हो गई थी।

गांड मारने की कोशिश:

जीजा राहुल मेरे पीछे आ गए। उन्होंने मेरी गांड के दोनों हिस्सों को हाथों से अलग किया और मेरी गांड के छेद को देखने लगे। “बहुत टाइट है… आज फाड़ देंगे इसकी गांड,” उन्होंने कहा।

उन्होंने पहले अपनी उंगली मेरी चूत में डाली और कुछ रस निकालकर मेरी गांड पर लगाया। फिर अपना मोटा लंड मेरी गांड के छेद पर सेट किया।

जैसे ही लंड का सिरा मेरी गांड पर दबा, मैं काँप उठी। “नहीं… नहीं जीजा जी… मत कीजिए… मर जाऊंगी!” मैं रोते हुए चिल्लाई।

दीदी ने मेरे हाथ और भी कसकर पकड़ लिए और बोलीं, “चुप बैठ… आज गांड मारनी ही है।”

जीजा ने कमर को आगे बढ़ाया। लंड का मोटा सिरा मेरी गांड की टाइट रिंग पर दबाव डालने लगा। गांड की मांसपेशियाँ लंड को अंदर जाने नहीं दे रही थीं।

“आह्ह्ह्ह!!!” मैं जोर से चीख पड़ी। दर्द इतना तेज था कि मेरे पूरे शरीर में पसीना आ गया। आँखों से आँसू बहने लगे।

जीजा ने और जोर लगाया। लंड का सिरा थोड़ा-सा अंदर घुसा। मैं तड़प उठी। “मर गई… निकालो… दर्द हो रहा है रे… दीदी छोड़ दो मुझे!” मैं चिल्ला रही थी।

दीदी ने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर नीचे दबा दिया और बोलीं, “चुप… ज्यादा नखरे मत कर… वरना और जोर से मारेगा।”

जीजा राहुल की सांसें तेज हो गई थीं। उनका चेहरा लाल हो रहा था। वे मेरी कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए थे और बार-बार धक्के लगा रहे थे। हर धक्के के साथ लंड थोड़ा-थोड़ा अंदर घुस रहा था।

मेरी गांड जल रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई गर्म लोहे की रॉड अंदर डाली जा रही हो। मैं जोर-जोर से रो रही थी। मेरे शरीर में पसीना बह रहा था। हाथ काँप रहे थे।

“बहुत टाइट है रे… मादरचोद…” जीजा बड़बड़ा रहे थे। उनकी आँखें बंद थीं और वे पूरा जोर लगा रहे थे।

लगभग ५-६ मिनट की कोशिश के बाद लंड का आधा हिस्सा मेरी गांड में घुस गया। मैं अब सिर्फ कराह रही थी — “आह्ह… उफ्फ… मर गई… छोड़ दो…”

दीदी मेरे बाल पकड़े हुए मुस्कुरा रही थीं। “देख… कितना मजा आ रहा है राहुल को तेरी गांड में।”

जीजा ने अब धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ मैं काँप जाती थी। आँखें बंद थीं, होठ काँप रहे थे और आँसू लगातार बह रहे थे।

आखिर में जीजा ने जोर से एक अंतिम धक्का मारा और मेरी गांड में रस छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने लंड बाहर निकाला, मेरी गांड से सफेद रस बहने लगा।

मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी। गांड में तेज जलन हो रही थी। मैं रोते हुए लेटी रही।

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