पड़ोस की रंडी आंटी की बुर फाड़ दी, मोटा लंड घुसाकर चीखे निकाल दिए | aunty hardcore chudai

पड़ोस की रंडी आंटी की बुर फाड़ चुदाई

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मेरा नाम आर्यन है। मैं 28 साल का हूँ, फिट बॉडी, जिम जाता हूँ और मेरा लंड 8 इंच लंबा और मोटा है। हमारी सोसाइटी में एक खूबसूरत आंटी रहती थीं – नाम था श्वेता। उम्र 42 साल, लेकिन लगती थीं 35 की। गोरी चिकनी त्वचा, भारी-भारी गांडे, मोटे मोटे स्तन और कमर इतनी पतली कि देखते ही मन करता था कि पकड़कर जोर-जोर से ठोकूँ।

श्वेता आंटी की शादी को 18 साल हो चुके थे, लेकिन उनके पति ज्यादातर बाहर रहते थे। घर में अकेली रहती थीं, और सोसाइटी में सब उन्हें “रंडी आंटी” कहकर पुकारते थे क्योंकि उनकी नजरें हमेशा जवान लड़कों पर टिकी रहती थीं।

एक दिन शाम को मैं जिम से लौट रहा था। श्वेता आंटी बालकनी में खड़ी थीं। उन्होंने टाइट ब्लैक टॉप और बहुत छोटी स्कर्ट पहनी हुई थी। उनकी मोटी जांघें साफ दिख रही थीं। मुझे देखते ही मुस्कुराईं और बोलीं, “आर्यन बेटा, अंदर आओ ना। कुछ काम है।”

मैं सीधा उनके घर चला गया। दरवाजा बंद करते ही उन्होंने मुझे दीवार से सटाकर चूमना शुरू कर दिया। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी। “बहुत दिनों से तेरे मोटे लंड का सपना देख रही हूँ,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने भी उनका टॉप फाड़ा और उनके भारी स्तन बाहर निकाल दिए। चूचे इतने बड़े थे कि दोनों हाथों में भी पूरी तरह नहीं आ रहे थे। मैंने एक चूची मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसना शुरू किया। श्वेता आंटी कराहने लगीं – “आह्ह्ह… चूसो बेटा… और जोर से… काट दो मेरे चूचे…”

मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया। उनकी स्कर्ट ऊपर कर दी। कोई पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी बुर पूरी तरह गीली और सूजी हुई थी। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी जांघों को चौड़ा किया और अपनी जीभ से उनकी क्लिट चाटना शुरू किया। श्वेता आंटी पागल हो गईं। “फाड़ दो मेरी बुर… आर्यन… अपनी जीभ अंदर डालो…”

मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी की चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। “हाय माँ… मार डाला… और तेज… मैं जल रही हूँ…”

मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा मोटा लंड लोहे की तरह खड़ा था। श्वेता आंटी ने देखा तो उनकी आँखें फैल गईं। “इतना मोटा… आज मेरी बुर फट जाएगी… लेकिन मुझे फाड़ दो… पूरी तरह चोद दो मुझे…”

मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और लंड का सुपारा उनकी बुर पर रखा। एक जोरदार धक्का। आधा लंड अंदर चला गया। श्वेता आंटी चीख उठीं – “आआआह्ह्ह… फट गई… धीरे… मोटा है ना…”

लेकिन मैं रुका नहीं। दूसरा जोरदार धक्का। पूरा 8 इंच का मोटा लंड उनकी बुर में घुस गया। उनकी आँखें ऊपर चढ़ गईं। मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर उनका बेड हिल रहा था। “चोदो… जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी रंडी बुर को… हाँ… हाँ… और तेज…”

मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और स्तनों को मसलते हुए पूरे जोर से ठोकता रहा। श्वेता आंटी की बुर से पानी निकल रहा था। उन्होंने पहली बार झड़ दिया। लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। उन्हें घुटनों के बल मोड़ा और पीछे से घुसा दिया। डॉगी स्टाइल में उनकी गांड पकड़कर मैं लंड पूरे जोर से अंदर-बाहर कर रहा था। हर थप्पड़ पर उनकी चीखें निकल रही थीं – “मारो… फाड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… रोज चोदना मुझे…”

लगभग 25 मिनट तक इस पोजीशन में चोदा। फिर उन्हें फिर से सीधा करके मिशनरी में लिया। उनके पैर कंधों पर रखकर इतना गहरा चोदा कि लंड की गेंदें भी उनकी गांड से टकरा रही थीं। श्वेता आंटी बार-बार झड़ रही थीं। उनकी आँखों से पानी निकल रहा था – “बस… नहीं सह पा रही… लेकिन मत निकालना… अंदर ही भर दो…”

मैंने आखिरी जोर लगाया। पूरा लंड अंदर डालकर उनके अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उनकी बुर में भर गया। इतना ज्यादा कि जब मैं लंड निकाला तो उनके बुर से मेरा वीर्य और उनका पानी दोनों बहने लगे। उनकी बुर पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी।

लेकिन यह शुरुआत थी।

रात भर हमने कई राउंड लिए। दूसरे राउंड में मैंने उन्हें बालकनी में ले जाकर खड़े-खड़े चोदा। कोई भी देख सकता था। तीसरे राउंड में शावर के नीचे। चौथे में उन्होंने खुद ऊपर बैठकर मेरे लंड पर कूद-कूद कर चुदाई की। उनकी गांड हर बार मेरी गोद में जोर से पटक रही थी।

सुबह तक उनकी बुर इतनी फूल गई थी कि चलने में भी दर्द हो रहा था। लेकिन वो मुस्कुरा रही थीं। “कल फिर आना… मैं तुम्हारी पक्की रंडी हूँ अब।”

इसके बाद तो रोज शाम को उनका घर मेरे लंड का अड्डा बन गया। कभी किचन में बेंड करके, कभी सोफे पर, कभी छत पर। श्वेता आंटी हर बार नई-नई चुदाई मांगतीं। कभी आइस क्यूब्स डालकर, कभी ऑयल लगाकर, कभी बांधकर। उनकी बुर मेरे मोटे लंड की आदी हो चुकी थी।

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दोनों रंडी आंटियों की जोरदार थ्रीसम चुदाई

श्वेता आंटी के साथ मेरी रोज की हार्डकोर चुदाई चल रही थी। एक शाम मैं उनके घर पहुंचा तो दरवाजा खुला था। अंदर से हल्की हंसी और गहरी सांसों की आवाज आ रही थी। मैं अंदर गया तो देखा श्वेता आंटी बेड पर लेटी हुई थीं और उनके बगल में एक और औरत बैठी थी – राखी आंटी।

राखी आंटी श्वेता की सबसे अच्छी सहेली थीं। उम्र 44 साल, लेकिन बॉडी श्वेता से भी ज्यादा खतरनाक – 40 इंच के भारी-भारी चूचे, मोटी-मोटी गांड और मोटी जांघें। उन्होंने टाइट सलवार सूट पहना हुआ था जिसमें उनकी चूतड़ें साफ उभर रही थीं।

श्वेता आंटी मुस्कुराईं और बोलीं, “आर्यन आ गया… आज तेरी किस्मत खुल गई है बेटा। राखी को बहुत दिनों से तेरे मोटे लंड के बारे में बता रही थी। आज दोनों को एक साथ चोदना है।”

राखी आंटी शरमाते हुए लेकिन आँखों में शरारत लिए बोलीं, “सुन रखा है तेरा लंड बहुत मोटा और जिद्दी है… आज मेरी बुर भी फाड़ देना।”

मैंने दोनों को देखा और लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने शर्ट उतारी। श्वेता आंटी ने मेरी पैंट खोली और मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। राखी आंटी की आँखें फैल गईं। “वाह… इतना मोटा तो मैंने कभी नहीं देखा… श्वेता तू रोज कैसे सह लेती है?”

दोनों आंटियों ने मिलकर मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। श्वेता आंटी लंड का सुपारा मुंह में लेकर चूस रही थीं और राखी आंटी अंडों को चाट रही थीं। दोनों की जीभें मेरे लंड पर घूम रही थीं। मैंने उनके बाल पकड़े और दोनों के मुंह में बारी-बारी से लंड ठोका। “चूसो रंडियों… अच्छे से चूसो…”

फिर मैंने दोनों को नंगा किया। श्वेता आंटी की बुर पहले से गीली थी। राखी आंटी की बुर थोड़ी टाइट थी लेकिन बहुत रसीली। मैंने दोनों को बेड पर बिठाया और बारी-बारी उनकी बुर चाटी। दोनों आंटियाँ कराह रही थीं।

“आह्ह आर्यन… चाटो… अपनी जीभ अंदर डालो…” – राखी आंटी चीखीं।

मैंने पहले श्वेता आंटी को घुटनों के बल मोड़ा और पीछे से एक झटके में पूरा लंड घुसा दिया। “आआआह्ह… फाड़ दिया…” वो चीखीं। मैंने 10-15 जोरदार धक्के मारे फिर लंड निकालकर राखी आंटी में घुसा दिया। उनकी बुर थोड़ी टाइट थी, लेकिन मैंने जोर लगाकर पूरा लंड ठोक दिया। राखी आंटी पागल हो गईं – “हाय भगवान… फट गई मेरी बुर… मोटा लंड… धीरे… आह्ह्ह…”

मैंने दोनों को alternating करके चोदा। कभी श्वेता, कभी राखी। फिर दोनों को एक साथ लिटाया और दोनों की टांगें फैलाकर बारी-बारी अंदर-बाहर करने लगा। कमरे में सिर्फ चीखें और चूत की चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं।

“दोनों रंडियों की बुर फाड़ दूंगा आज,” मैंने कहा और जोर-जोर से ठोकने लगा।

राखी आंटी पहली बार झड़ गईं। उनका पानी मेरे लंड पर बह निकला। श्वेता आंटी ने मुझे पीछे खींचा और खुद ऊपर बैठ गईं। उन्होंने मेरे लंड पर कूद-कूदकर चुदाई शुरू की। उनकी भारी गांड हर बार मेरी गोद में जोर से गिर रही थी। राखी आंटी मेरे मुंह पर बैठ गईं और मैं उनकी बुर चाटने लगा।

थ्रीसम पूरी तरह जाम हो चुका था।

मैंने दोनों को डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। बगल-बगल। दोनों की मोटी गांडें उठी हुई थीं। मैंने पहले श्वेता की बुर में 2-3 मिनट ठोका, फिर राखी की। दोनों की चीखें एक साथ निकल रही थीं। “फाड़ दो… मारो… और जोर से… हम तुम्हारी रंडियाँ हैं…”

मैंने राखी आंटी की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे और उनके बाल खींचे। श्वेता आंटी नीचे लेटकर मेरे अंडों को चूस रही थीं।

फिर मैंने दोनों को 69 पोजीशन में लिटाया। श्वेता ऊपर, राखी नीचे। मैंने श्वेता की बुर में लंड घुसाया और राखी की चूत चाटी। दोनों आंटियाँ एक दूसरे की चूत चाट रही थीं। नजारा देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया।

मैंने उन्हें बदल-बदलकर कई पोजीशन में चोदा –

  • दोनों को एक साथ चूचों पर लिटाकर टिट फक किया
  • श्वेता की गांड में उंगली डालकर राखी को चोदा
  • दोनों को किनारे पर खड़ा करके खड़े-खड़े ठोका

आखिरी राउंड में मैंने दोनों को घुटनों के बल बिठाया। दोनों मुंह खोलकर मेरे लंड का इंतजार कर रही थीं। मैंने जोर-जोर से दोनों के मुंह में ठोका और आखिर में दोनों के चेहरों और चूचों पर अपना गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। दोनों आंटियाँ मुंह खोलकर मेरे वीर्य को चाट रही थीं।

राखी आंटी हांफते हुए बोलीं, “आज तक इतनी जोरदार चुदाई नहीं हुई थी… तू हम दोनों की पक्का मालिक है अब।”

श्वेता आंटी मुस्कुराईं, “कल फिर आएगा ना? हम दोनों तैयार रहेंगे।”

उस दिन के बाद तीनों का थ्रीसम नियमित हो गया। कभी उनके घर, कभी छत पर, कभी कार में। दोनों रंडी आंटियाँ मेरे मोटे लंड की गुलाम हो चुकी थीं। उनकी बुरें मेरे लंड के बिना अधूरी रहने लगी थीं।

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आंटी की मोटी गांड की बिना तेल वाली फाड़ चुदाई

मेरा नाम आर्यन है। श्वेता आंटी के साथ मेरी चुदाई का सिलसिला अब काफी दिनों से चल रहा था। वो पूरी तरह मेरी हार्डकोर रंडी बन चुकी थीं। लेकिन आज उन्होंने कुछ अलग मांग किया।

शाम को मैं उनके घर पहुंचा। श्वेता आंटी ने बहुत सेक्सी लाल रंग की ट्रांसपेरेंट नाइट सूट पहना हुआ था। उनके भारी 40 इंच के चूचे और मोटी-मोटी गांड साफ दिख रही थी। उन्होंने मुझे अंदर खींचा और सीधे किस करने लगीं।

“आज मेरी गांड मारनी है आर्यन… पूरी मोटी गांड में अपना मोटा लंड बिना किसी तेल या लुब्रिकेंट के ठोक देना। मुझे दर्द चाहिए… बहुत जोर से फाड़ दो मेरी गांड को,” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने उनकी नाइट सूट फाड़ दी। उनके गोरे-गोरे, मोटे-मोटे, गोल-गोल गांड बाहर निकल आए। दोनों गांड इतनी मोटी थीं कि हाथों में भर भी नहीं आ रही थीं। मैंने उनकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए।

“रंडी… आज तेरी गांड फाड़ दूंगा,” कहते हुए मैंने उन्हें चारों खाने चित बेड पर लिटाया। उनके पैर ऊपर करके उनकी गांड को पूरी तरह फैला दिया। उनकी गांड की सुराख छोटी और टाइट दिख रही थी। कोई तेल, कोई जेल, कुछ नहीं। सिर्फ मेरी थूक।

मैंने लंड पर थोड़ी थूक लगाई और सुपारा उनकी गांड पर रखा। श्वेता आंटी ने तकिए को कसकर पकड़ लिया।

एक जोरदार धक्का।

“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई!!! निकालो… बहुत दर्द हो रहा है!!!” श्वेता आंटी जोर से चीख उठीं।

मेरा मोटा सुपारा ही अंदर घुसा था, पूरा लंड नहीं। लेकिन मैं रुका नहीं। दूसरा और जोर का धक्का। आधा लंड उनकी मोटी गांड में घुस गया। उनकी गांड की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। बिना लुब्रिकेंट के घर्षण इतना था कि जलन हो रही थी, लेकिन मजा भी दोगुना।

“माँ मार गई… फाड़ दी मेरी गांड… दर्द हो रहा है… लेकिन मत निकालना…” आंटी रोते हुए भी कह रही थीं।

मैंने उनके कूल्हों को मजबूती से पकड़ा और एक और जोरदार झटका मारा। पूरा 8 इंच का मोटा लंड उनकी गांड में उतर गया। श्वेता आंटी की आँखें ऊपर चढ़ गईं, मुंह से सिर्फ चीखें निकल रही थीं। “हाय भगवान… पूरी गांड फट गई… तेरे लंड ने मेरी गांड चीर दी…”

मैंने रुककर कुछ सेकंड उन्हें सांस लेने दी, फिर धीरे-धीरे पंपिंग शुरू कर दी। हर धक्के पर उनकी मोटी गांड हिल रही थी। चप-चप की आवाज के साथ उनकी चीखें भी निकल रही थीं।

धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। अब मैं पूरी ताकत से उनकी गांड में लंड ठोक रहा था। बिना तेल के घर्षण के कारण लंड और गांड दोनों जल रहे थे, लेकिन आंटी अब दर्द के साथ मजा भी ले रही थीं।

“जोर से… फाड़ दो… मेरी मोटी गांड तुम्हारी है… मारो… और तेज…”

मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में मोड़ा। उनकी कमर पकड़कर घोड़े की तरह चोदने लगा। हर थप्पड़ पर उनकी मोटी गांड लहरा रही थी। मैंने उनके बाल खींचे और गांड पर लगातार थप्पड़ बरसाए। लाल-लाल हो गई थी उनकी सफेद गांड।

लगभग 20 मिनट तक मैंने उनकी गांड फाड़ी। फिर उन्हें अपनी गोद में उठाकर खड़े-खड़े गांड में लंड डाल दिया। उनकी टांगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था। श्वेता आंटी मेरे गले से लिपटकर चीख रही थीं – “आह्ह्ह… बस… नहीं सह पा रही… लेकिन चोदते रहो… मेरी गांड फाड़ दो…”

मैंने उन्हें बेड पर पटका और मिशनरी स्टाइल में गांड मारना शुरू किया। उनके पैर कंधों पर रखकर इतना गहरा ठोक रहा था कि मेरी गेंदें उनकी गांड से टकरा रही थीं।

आंटी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी बुर से पानी बह रहा था भले ही मैं गांड मार रहा था। आखिरकार मैं भी झड़ने वाला था। मैंने पूरा लंड अंदर डालकर उनकी गांड के अंदर ही गर्म वीर्य उछाल दिया। इतना वीर्य कि जब लंड निकाला तो उनकी गांड से सफेद वीर्य बाहर निकल रहा था। गांड पूरी तरह लाल, सूजी हुई और फटी हुई लग रही थी।

लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी।

रात भर मैंने उनकी गांड के तीन और राउंड लिए। दूसरे राउंड में मैंने उन्हें बालकनी में ले जाकर खड़े-खड़े गांड मारी। तीसरे में शावर के नीचे बिना तेल के ही जोर-जोर से। चौथे राउंड में उन्होंने खुद अपनी गांड फैलाकर मुझसे मांगा – “फिर से फाड़ दो… आज पूरी रात मेरी गांड तुम्हारी है।”

सुबह होते-होते उनकी गांड इतनी फूल गई थी कि बैठ भी नहीं पा रही थीं। लेकिन वो खुश थीं। “कल राखी आंटी को भी बुलाऊंगी… तुम दोनों की गांड एक साथ फाड़ना…”

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राखी आंटी की मोटी गांड की बिना तेल वाली हार्डकोर फाड़ चुदाई

राखी आंटी श्वेता आंटी की सबसे करीबी सहेली थीं। 44 साल की उम्र, लेकिन बॉडी का जादू देखकर कोई भी पागल हो सकता था। 42 इंच के भारी-भारी चूचे, पतली कमर और सबसे खास – उनकी मोटी-मोटी, गोल-गोल, निचली गांड। इतनी मोटी कि चलते समय दोनों तरफ लहराती थी। श्वेता आंटी ने उन्हें मेरे बारे में सब कुछ बता दिया था।

एक शाम श्वेता आंटी ने मुझे मैसेज किया – “आज राखी अकेली है। उसकी मोटी गांड फाड़ने का मन है उसका। बिना तेल के ही पूरा लंड ठोक देना, वो दर्द वाली चुदाई पसंद करती है।”

मैं सीधा राखी आंटी के घर पहुंच गया। दरवाजा खोलते ही उन्होंने मुझे अंदर खींच लिया। उन्होंने सिर्फ एक काला ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल पहना हुआ था। उनकी मोटी गांड आधा बाहर झांक रही थी।

“श्वेता ने बताया है तू बहुत जोरदार चोदता है… आज मेरी मोटी गांड में बिना कुछ लगाए अपना मोटा लंड घुसा दे। मुझे चीखना है, रोना है, लेकिन पूरा लंड अंदर चाहिए,” राखी आंटी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।

मैंने उन्हें दीवार से सटाकर चूमना शुरू किया। उनके भारी चूचों को जोर-जोर से मसलते हुए नीचे हाथ ले गया। उनकी गांड पकड़कर दोनों हाथों से निचोड़ी। इतनी सॉफ्ट और मोटी थी कि उंगलियां धंस रही थीं।

मैंने उन्हें बेडरूम ले जाकर चारों खाने चित लिटाया। उनकी टांगें ऊपर करके पूरी मोटी गांड फैला दी। गांड की सुराख देखकर मेरा 8 इंच का मोटा लंड और भी सख्त हो गया। बिना तेल, बिना जेल, सिर्फ थूक।

मैंने लंड पर थूक लगाया और सुपारा उनकी गांड पर रखा। राखी आंटी ने तकिए को मुंह में दबा लिया।

धक्का!

“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! निकालो!!! फट गई मेरी गांड!!!” राखी आंटी जोर से चीख पड़ीं। सिर्फ सुपारा अंदर गया था, लेकिन उनकी टाइट गांड पहले ही फटने लगी थी।

मैंने कमर पकड़ी और दूसरा जोरदार धक्का मारा। आधा लंड घुस गया। राखी आंटी का पूरा शरीर कांप रहा था। “हाय माँ… दर्द हो रहा है… बहुत मोटा है… आह्ह्ह…”

तीसरा जोर का झटका। पूरा मोटा लंड उनकी मोटी गांड में समा गया। उनकी आँखें बाहर निकलने वाली थीं। गांड की दीवारें मेरे लंड को इतने जोर से दबा रही थीं कि दर्द के साथ अनोखा मजा आ रहा था।

“फाड़ दी… मेरी मोटी गांड फाड़ दी तुमने… रो रही हूँ… लेकिन मत निकालना…”

मैंने धीरे-धीरे पंपिंग शुरू की। हर धक्के पर राखी आंटी की चीखें पूरे घर में गूंज रही थीं। बिना लुब्रिकेंट के घर्षण इतना था कि लंड जल रहा था, लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। स्पीड बढ़ाते गए। अब जोर-जोर से उनकी मोटी गांड ठोक रहा था।

“जोर से आर्यन… फाड़ दो… मेरी गांड तुम्हारी है… मारो… और तेज…” दर्द के बाद अब वो भी मजा ले रही थीं।

मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में मोड़ा। उनकी मोटी गांड पूरी तरह उठी हुई थी। दोनों हाथों से गांड फैलाकर मैं लंड पूरे जोर से अंदर-बाहर कर रहा था। हर थप्पड़ पर उनकी गांड लहरा रही थी। मैंने उनकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल-लाल हो गईं दोनों गांड।

“चोदो… मेरी मोटी रंडी गांड चोदो… हाय… फट रही है… लेकिन और जोर से…”

लगभग 25 मिनट तक लगातार उनकी गांड मारी। फिर उन्हें उठाकर खड़े-खड़े पोजीशन में ले गया। उनकी एक टांग ऊपर करके दीवार से सटाकर पूरी ताकत से गांड में ठोकने लगा। इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था। राखी आंटी मेरे कंधे पर सिर रखकर चीख रही थीं।

तीसरे राउंड में मैंने उन्हें बेड पर उल्टा लिटाकर (prone bone) उनकी मोटी गांड पर चढ़ गया। पूरा वजन देकर लंड ठोक रहा था। उनकी मोटी गांड मेरे पेट से चिपकी हुई थी।

आखिरी राउंड में राखी आंटी खुद ऊपर आ गईं। उन्होंने अपनी मोटी गांड मेरे लंड पर बैठकर कूद-कूदकर चुदाई शुरू कर दी। हर बार उनकी गांड मेरे लंड पर पूरी तरह बैठ जाती। “अंदर तक… पूरा घुसा दो… मेरी गांड फाड़ दो…”

मैंने उनके चूचों को जोर से पकड़कर नीचे से धक्के मारे। आखिरकार मैं उनकी गांड के अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उनकी गांड में भर गया। जब लंड निकाला तो उनकी गांड से वीर्य और थोड़ा खून मिला बाहर निकला। गांड पूरी तरह सूजी हुई, लाल और फटी हुई थी।

राखी आंटी हांफते हुए मुस्कुराईं – “श्वेता सही कह रही थी… तू सच में गांड फाड़ने में माहिर है। अब से दोनों आंटियों की मोटी गांड तुम्हारी है। जब चाहे बिना तेल के फाड़ देना।”

उसके बाद राखी आंटी की गांड मेरी नियमित चीज बन गई। कभी श्वेता के साथ, कभी अकेले – उनकी मोटी गांड रोज मेरे मोटे लंड का शिकार होती।

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