दोस्त की वर्जिन गर्लफ्रेंड को पटाकर जमकर चोदा उसे पता भी नहीं चला | dost ki virgin girlfriend ki chudai

दोस्त की वर्जिन गर्लफ्रेंड को पटाकर जमकर चोदा उसे पता भी नहीं चला

dost ki virgin girlfriend ki chudai

अर्जुन और विक्रम बचपन के सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और शहर के बाहर एक छोटे से अपार्टमेंट में साथ रहते थे। विक्रम शांत, पढ़ाकू और थोड़ा सीरियस स्वभाव का लड़का था, जबकि अर्जुन फिट, मस्तमौला और लोगों से जल्दी घुल-मिल जाने वाला। विक्रम की गर्लफ्रेंड का नाम था स्नेहा। वह कॉलेज की ही थी, दूसरे डिपार्टमेंट में। स्नेहा बेहद खूबसूरत थी — गोरी चमकदार त्वचा, लंबे काले घने बाल, बड़ी expressive आँखें, पतला कमर और नाजुक शरीर जो देखते ही आकर्षित कर लेता था। वह सिर्फ 19 साल की थी और विक्रम के साथ उसकी रिलेशनशिप अभी 6-7 महीने पुरानी थी।

विक्रम अक्सर कहता, “यार स्नेहा बहुत innocent और शरीफ है। हम बस हाथ पकड़कर घूमते हैं, कुछ ज्यादा नहीं हुआ अभी।” अर्जुन चुपचाप सुनता और अंदर ही अंदर स्नेहा उसके मन में बसने लगी थी। स्नेहा वर्जिन थी — यह बात विक्रम ने एक दिन शराब पीकर बता दी थी। अर्जुन ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह अपने दोस्त की गर्लफ्रेंड की तरफ आकर्षित हो जाएगा, लेकिन स्नेहा का व्यवहार उसके साथ अलग होता था। वह अर्जुन के सामने ज्यादा खुलकर बात करती, हँसती-मजाक करती और कभी-कभी उसकी आँखों में देखकर शरमा जाती।

एक दिन विक्रम को उसके घर से अर्जेंट काम पड़ गया। उसे चार-पांच दिन के लिए गांव जाना पड़ा। उसने अर्जुन से कहा, “भाई स्नेहा को अकेला मत छोड़ना। शाम को कभी-कभी चेक कर लिया करना, वह थोड़ी डरपोक है।” अर्जुन ने हामी भर दी।

अगले दिन शाम को स्नेहा कॉलेज से लौटी तो तेज बारिश हो रही थी। वह पूरी भीग चुकी थी। अर्जुन ने दरवाजा खोला तो स्नेहा काँप रही थी। “अंदर आ जाओ स्नेहा, भीग गई हो।” उसने तौलिया दिया और उसे सोफे पर बिठाया। दोनों ने चाय बनाई, बिस्किट खाए। स्नेहा हँस-हँसकर अपनी कॉलेज की छोटी-छोटी कहानियाँ सुनाने लगी। अर्जुन ने महसूस किया कि स्नेहा की आँखों में उसके लिए एक खास चमक थी। “तुम विक्रम से अलग हो,” स्नेहा ने कहा, “वह तो बस पढ़ाई और करियर की बातें करता रहता है। तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगता है।”

उस रात दोनों देर तक बातें करते रहे — फिल्में, गाने, सपने, परिवार। जब स्नेहा जाने लगी तो अर्जुन ने उसे छोड़ने की पेशकश की। स्नेहा मुस्कुराई लेकिन चली गई, जाते वक्त पलटकर एक बार जरूर देखा।

अगले कुछ दिनों में दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी कॉलेज कैंटीन में, कभी पार्क में, कभी अपार्टमेंट पर। अर्जुन स्नेहा को छोटी-छोटी चीजें गिफ्ट करने लगा — उसकी पसंद की चॉकलेट, एक सुंदर नोटबुक, फूल। विक्रम को जब फोन पर बताया तो वह बहुत खुश हुआ कि अर्जुन उसकी गर्लफ्रेंड का ख्याल रख रहा है। लेकिन असल में अर्जुन के इरादे बदल चुके थे।

स्नेहा धीरे-धीरे अर्जुन के करीब आ रही थी। वह अपनी छोटी-छोटी परेशानियाँ बताती — घर की, पढ़ाई की, और विक्रम के साथ कितना कम समय मिल पाता है। एक शाम दोनों छत पर बैठे थे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। स्नेहा ने कहा, “मुझे लगता है विक्रम मुझे पूरी तरह समझता ही नहीं। तुम सब समझ लेते हो।” अर्जुन ने धीरे से उसका हाथ थाम लिया। स्नेहा ने हाथ नहीं छुड़ाया। उनकी उँगलियाँ आपस में फंस गईं। अर्जुन ने उसके गाल पर हल्का हाथ फेरा। स्नेहा काँप उठी लेकिन पास ही रही।

उसके बाद मुलाकातें और रोमांटिक होने लगीं। एक दिन अर्जुन ने स्नेहा को मूवी देखने ले गया। अंधेरे हॉल में उसने स्नेहा का हाथ पकड़ लिया। स्नेहा ने विरोध नहीं किया। इंटरवल में आइसक्रीम खाते वक्त अर्जुन ने उसके होंठ पर लगी क्रीम अपनी उँगली से साफ की। स्नेहा की आँखें बंद हो गईं।

फिर तो दोनों अक्सर बाहर घूमने लगे — पार्क में लंबी वॉक, कैफे में कॉफी, अर्जुन की बाइक पर सैर। स्नेहा अब खुलकर अर्जुन के कंधे पर सिर रख देती। एक दिन उसने कहा, “मुझे विक्रम के साथ वैसा फील नहीं होता जितना तुम्हारे साथ होता है।” अर्जुन ने उसे गले लगा लिया। स्नेहा का नाजुक शरीर उसके सीने से सट गया। उसने उसके बालों में हाथ फेरा और माथे को प्यार से चूमा।

विक्रम अभी भी गांव में था। स्नेहा अब अक्सर अपार्टमेंट आने लगी थी। दोनों साथ खाना बनाते, फिल्म देखते। एक रात भारी बारिश हुई और लाइट चली गई। मोमबत्ती की रोशनी में स्नेहा अर्जुन के पास आई और बोली, “मुझे डर लग रहा है।” अर्जुन ने उसे गोद में बिठा लिया। उनके होंठ बेहद करीब थे। धीरे-धीरे पहली किस हुई — नरम, गहरी और लंबी। स्नेहा पहली बार किसी को इस तरह किस कर रही थी। किस के बाद वह शर्म से अर्जुन की छाती में मुँह छिपा लेती।

अगले दिन स्नेहा ने खुद मैसेज किया कि शाम को आ रही है। वह एक खूबसूरत हल्के रंग का फ्रॉक पहनकर आई थी जो उसके कर्व्स को हल्का-हल्का दिखा रहा था। बातें करते-करते फिर किस हुई। इस बार ज्यादा गहरी। अर्जुन के हाथ स्नेहा की पीठ पर थे। स्नेहा काँप रही थी लेकिन रोक नहीं रही थी।

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स्नेहा पूरी तरह तैयार हो जाती है और अर्जुन उसे बेडरूम ले जाता है,और उसकी चूत को पूरी तरह तैयार करके पहली बार लंड अंदर डालता है।

स्नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में उसका चेहरा लाल हो रहा था। मैंने धीरे से उसके होंठों को फिर से चूमा। इस बार किस ज्यादा गहरी और भूखी थी। मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई और उसकी जीभ से खेलने लगी। स्नेहा की सांसें तेज हो गईं। उसने मेरी शर्ट को कसकर पकड़ लिया।

मैंने फुसफुसाते हुए कहा, “स्नेहा, अगर तुम नहीं चाहती तो अभी रुक सकते हैं।” स्नेहा ने शर्माते हुए मेरी आँखों में देखा और धीरे से बोली, “नहीं अर्जुन… मैं चाहती हूँ। आज मुझे पूरा महसूस कराओ।”

मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले गया। कमरे में सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। मैंने स्नेहा को बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया। उसके ऊपर झुककर मैंने उसके गले को चूमना शुरू किया। वह काँप रही थी। मेरे होंठ धीरे-धीरे नीचे आए। मैंने उसके फ्रॉक की ज़िप खोली और उसे ऊपर से उतार दिया। अब स्नेहा सिर्फ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी।

उसके गोरे स्तन ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने ब्रा के हुक खोले और दोनों कप खींचकर हटा दिए। स्नेहा के गुलाबी-गुलाबी, निप्पल वाले दूध जैसे स्तन सामने थे। मैंने एकदम से मुँह लगाकर बायें स्तन को चूसना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह…” स्नेहा की एक लंबी सिसकारी निकली। मैं दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए पहले वाले को जोर-जोर से चूस रहा था। उसके निप्पल सख्त हो गए थे। मैं बारी-बारी दोनों स्तनों को चूसता, चाटता और हल्का-हल्का काटता रहा। स्नेहा मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और आहें भर रही थी।

“अर्जुन… बहुत अच्छा लग रहा है…”

मेरे हाथ नीचे सरक गए। मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाला। स्नेहा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उँगली से उसके क्लिटोरिस को हल्का-हल्का रगड़ा। स्नेहा बुरी तरह काँप उठी। मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। अब स्नेहा पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी चूत गुलाबी और बिल्कुल साफ थी — सिर्फ हल्के बाल थे।

मैं उसके पैर फैलाकर बीच में बैठ गया। पहले तो मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया। स्नेहा जोर से चीख पड़ी, “अर्जुन… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह!” मैंने उसकी चूत की दोनों फाकें खोलकर अंदर जीभ घुसाई और चूसने लगा। उसका रस मीठा और गाढ़ा था। मैं लगातार चाटता रहा, उँगली अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। स्नेहा का शरीर तड़प रहा था। वह बार-बार कमर उठा रही थी।

जब वह पूरी तरह भीग गई और चीखने लगी तब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरा सख्त और मोटा हो चुका था। स्नेहा ने उसे देखकर थोड़ा डरते हुए कहा, “ये… अंदर जाएगा?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “धीरे-धीरे जाएगा बेबी।”

मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रखा और लंड का सिरा उसकी चूत पर रगड़ने लगा। स्नेहा की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा। स्नेहा ने जोर से चीख मारी, “आआआह्ह्ह… दर्द हो रहा है!”

मैं रुक गया। उसके माथे को चूमा, स्तनों को चूसते हुए धीरे-धीरे और अंदर धकेला। आधा लंड अंदर चला गया। स्नेहा की आँखों में आँसू थे लेकिन वह मेरी पीठ को कसकर पकड़े हुए थी। मैंने एक और जोरदार धक्का दिया। पूरा मोटा लंड उसकी virgin चूत में पूरी तरह घुस गया।

“आआआह्ह्ह्ह… अर्जुन… निकालो… बहुत मोटा है!” स्नेहा चीख रही थी।

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पंपिंग शुरू कर दी। पहले स्लो स्ट्रोक, फिर तेज। स्नेहा की चूत बहुत टाइट थी। हर धक्के पर वह चीखती लेकिन धीरे-धीरे उसके चीखने में कराह और मजे की आवाजें मिलने लगीं।

“अह्ह्ह… अर्जुन… धीरे… आह्ह्ह… हाँ… और अंदर…”

मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब जोर-जोर से चोद रहा था। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं एक हाथ से स्तन मसलता और दूसरे से क्लिट रगड़ता हुआ लंड अंदर-बाहर कर रहा था। स्नेहा का शरीर अब मेरे साथ ताल मिला रहा था। वह अपनी कमर उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

“बहुत मजा आ रहा है अर्जुन… और जोर से… चोदो मुझे…”

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से लंड डालकर जोर-जोर से ठोकने लगा। स्नेहा तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर और तेज चोदा। उसकी चूत से पानी निकल रहा था।

आखिर में मैंने उसे मिशनरी में लिटाया और आखिरी तेज धक्कों के साथ अपना पूरा माल उसके अंदर छोड़ दिया। स्नेहा भी काँपते हुए झड़ गई। दोनों पसीने से तर थे।

स्नेहा मेरी छाती से लगकर लेटी रही। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। उसने धीरे से कहा, “ये… इतना मजा आएगा… मुझे नहीं पता था।”

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स्नेहा और अर्जुन की पूरी रात की दूसरी राउंड चुदाई + ओरल सेक्स

कुछ देर दोनों एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। स्नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। उसकी सांसें अभी भी अनियमित थीं। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था। थोड़ी देर बाद स्नेहा ने ऊपर देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई।

“अर्जुन… मुझे अभी भी बहुत गर्मी हो रही है,” उसने धीरे से कहा।

मैंने मुस्कुराते हुए उसे चूम लिया और बोला, “तो फिर आज पूरी रात हमारी है।”

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैर फैला दिए। इस बार मैं सीधे उसकी चूत पर मुंह ले गया। पहली बार की चुदाई के बाद उसकी चूत अब और ज्यादा गीली और नरम हो गई थी। मैंने जीभ से पूरी चूत चाटनी शुरू की — ऊपर से नीचे तक, क्लिटोरिस को चूसते हुए, अंदर जीभ घुसाकर। स्नेहा दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर जोर से कराह रही थी।

“आह्ह्ह… अर्जुन… वहाँ… हाँ… चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है!”

मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में क्लिट को जीभ से रगड़ता रहा। स्नेहा का शरीर तड़पने लगा। कुछ ही मिनटों में वह जोर से चीखते हुए पहली बार झड़ गई। उसका चूत का रस मेरे मुँह में आ गया। मैंने सब चाट लिया।

स्नेहा अभी भी काँप रही थी जब मैंने उसे उठाकर बैठाया। “अब तुम्हारी बारी है,” मैंने कहा।

स्नेहा शर्मा रही थी लेकिन उत्सुक भी थी। मैंने उसके हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। वह धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी। फिर मैंने उसे नीचे दबाया। स्नेहा घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को देखने लगी।

“मुँह में ले लो बेबी,” मैंने प्यार से कहा।

स्नेहा ने पहली बार झिझकते हुए लंड का सिरा मुँह में लिया। उसकी गर्म और नरम जीभ लंड पर घूमने लगी। मैंने उसके सिर को हल्का दबाया। वह धीरे-धीरे ज्यादा अंदर लेने लगी। हालाँकि पूरा नहीं ले पा रही थी लेकिन जितना ले रही थी, उसमें जोश था। वह ऊपर-नीचे मुंह चला रही थी, कभी चूसती, कभी जीभ से चाटती। मैं उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का धक्के दे रहा था।

“हाँ स्नेहा… बहुत अच्छा कर रही हो… चूसो और जोर से…”

कुछ मिनट बाद मैंने उसे रोका। अब मैं उसे फिर से चोदना चाहता था।

मैंने स्नेहा को चारों खाने चित लिटाया, उसके पैर कंधों पर रखे और एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। “पार्ट 3

कुछ देर दोनों एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। स्नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। उसकी सांसें अभी भी अनियमित थीं। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था। थोड़ी देर बाद स्नेहा ने ऊपर देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई।

“अर्जुन… मुझे अभी भी बहुत गर्मी हो रही है,” उसने धीरे से कहा।

मैंने मुस्कुराते हुए उसे चूम लिया और बोला, “तो फिर आज पूरी रात हमारी है।”

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैर फैला दिए। इस बार मैं सीधे उसकी चूत पर मुंह ले गया। पहली बार की चुदाई के बाद उसकी चूत अब और ज्यादा गीली और नरम हो गई थी। मैंने जीभ से पूरी चूत चाटनी शुरू की — ऊपर से नीचे तक, क्लिटोरिस को चूसते हुए, अंदर जीभ घुसाकर। स्नेहा दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर जोर से कराह रही थी।

“आह्ह्ह… अर्जुन… वहाँ… हाँ… चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है!”

मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में क्लिट को जीभ से रगड़ता रहा। स्नेहा का शरीर तड़पने लगा। कुछ ही मिनटों में वह जोर से चीखते हुए पहली बार झड़ गई। उसका चूत का रस मेरे मुँह में आ गया। मैंने सब चाट लिया।

स्नेहा अभी भी काँप रही थी जब मैंने उसे उठाकर बैठाया। “अब तुम्हारी बारी है,” मैंने कहा।

स्नेहा शर्मा रही थी लेकिन उत्सुक भी थी। मैंने उसके हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। वह धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी। फिर मैंने उसे नीचे दबाया। स्नेहा घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को देखने लगी।

“मुँह में ले लो बेबी,” मैंने प्यार से कहा।

स्नेहा ने पहली बार झिझकते हुए लंड का सिरा मुँह में लिया। उसकी गर्म और नरम जीभ लंड पर घूमने लगी। मैंने उसके सिर को हल्का दबाया। वह धीरे-धीरे ज्यादा अंदर लेने लगी। हालाँकि पूरा नहीं ले पा रही थी लेकिन जितना ले रही थी, उसमें जोश था। वह ऊपर-नीचे मुंह चला रही थी, कभी चूसती, कभी जीभ से चाटती। मैं उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का धक्के दे रहा था।

“हाँ स्नेहा… बहुत अच्छा कर रही हो… चूसो और जोर से…”

कुछ मिनट बाद मैंने उसे रोका। अब मैं उसे फिर से चोदना चाहता था।

मैंने स्नेहा को चारों खाने चित लिटाया, उसके पैर कंधों पर रखे और एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। “आआआह्ह्ह!” स्नेहा जोर से चीखी। अब दर्द कम था, सिर्फ भरपूर मजा था। मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। कमरा उसके कराहने और चुदाई की आवाजों से भर गया — फच-फच-फच।

मैंने पोजीशन बदली। उसे साइड में लिटाया, एक पैर ऊपर उठाया और उस तरफ से चोदा। फिर उसे घुटनों के बल बैठाकर डॉगी स्टाइल में लिया। उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से ठोका। स्नेहा चीख रही थी — “हाँ… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… अर्जुन… मैं तुम्हारी हूँ आज!”

मैंने उसे फिर से मिशनरी में लिटाया। अब बहुत तेज रफ्तार थी। उसके स्तनों को चूसता हुआ, काटता हुआ, और लंड से जोरदार चुदाई करता हुआ। स्नेहा कई बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत लंड के चारों तरफ सिकुड़ रही थी।

आखिरकार मैं भी झड़ने वाला था। “स्नेहा… अंदर डालूँ?” “हाँ… अंदर ही… भर दो मुझे…”

मैंने आखिरी तेज धक्कों के साथ अपना सारा माल उसके अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए।

लेकिन रात अभी बाकी थी।

थोड़ी देर आराम करने के बाद स्नेहा खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। अब वह काउगर्ल पोजीशन में थी। उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत में बैठा लिया। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को पकड़कर मसला और निप्पल चूसने लगा। स्नेहा की रफ्तार बढ़ती गई। वह अब पूरी तरह आवेश में थी।

“अर्जुन… तुम्हारा लंड बहुत गहरा जा रहा है… आह्ह्ह… मुझे पसंद है!”

मैंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। पूरी रात हम अलग-अलग पोजीशन में चुदाई करते रहे — कभी स्टैंडिंग, कभी वॉल के सहारे, कभी 69 में एक-दूसरे को चूसते हुए। स्नेहा पूरी तरह खुल चुकी थी। वह अब बेझिझक गंदी-गंदी बातें कर रही थी और मुझसे और ज्यादा माँग रही थी।

सुबह होने तक हम तीन बार और झड़ चुके थे। आखिर में दोनों थककर सो गए। स्नेहा मेरी बाँहों में लिपटी हुई थी, उसकी चूत अभी भी मेरे माल से भरी हुई थी।

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सुबह शावर में सेक्स + स्नेहा की चूत चुदाई के बाद दर्द और मजे का मिश्रण

सुबह की धूप कमरे में आ रही थी। मैं आँख खोलकर देखा तो स्नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा शरीर मेरे सीने से सटा हुआ था। रात की चुदाई के निशान उसके शरीर पर थे — स्तनों पर हल्के दांत के निशान, गर्दन पर किस मार्क्स और जांघों के बीच हल्की लाली।

मैंने धीरे से उसके माथे को चूमा। स्नेहा की आँखें खुलीं। वह शरमाकर मुस्कुराई लेकिन फिर अपना चेहरा मेरी छाती में छिपा लिया।

“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा। स्नेहा ने धीरे से कहा, “अंदर बहुत जलन और दर्द हो रहा है… लेकिन साथ में अजीब सा मजा भी आ रहा है।”

मैंने मुस्कुराते हुए उसे उठाया और बोला, “चलो शावर लेते हैं।”

दोनों नंगे ही बाथरूम गए। गर्म पानी का शावर ऑन किया। पानी के नीचे दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। मैंने स्नेहा को दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसके होंठों को चूसने लगा। पानी दोनों के शरीर पर बह रहा था।

मेरे हाथ उसके स्तनों पर गए। मैंने उन्हें जोर से मसलना शुरू किया। स्नेहा कराह उठी। फिर मैं नीचे झुका और उसके स्तनों को चूसने लगा। पानी के साथ उसके निप्पल और ज्यादा सख्त हो गए थे।

“आह्ह्ह… अर्जुन… धीरे… कल रात बहुत जोर से चोदा था…”

लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसे घुमाकर पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। मैंने उसे उसके बीच में रखकर रगड़ना शुरू किया। स्नेहा ने दीवार पकड़ ली।

मैंने लंड का सिरा उसकी चूत पर लगाया और धीरे से दबाया। रात भर की चुदाई के बाद उसकी चूत अभी भी सूजी हुई और संवेदनशील थी। जैसे ही लंड आधा अंदर गया, स्नेहा जोर से चीख पड़ी — “आआह्ह्ह… दर्द हो रहा है… बहुत जलन है!”

मैं रुक गया। लेकिन स्नेहा ने खुद पीछे कमर मारी और बोली, “नहीं… मत निकालो… दर्द के साथ मजा भी आ रहा है… पूरा डाल दो।”

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर कर दिया। पानी के शोर के बीच स्नेहा की चीखें और कराहें गूँज रही थीं। मैंने स्लो स्ट्रोक शुरू किए। हर धक्के पर स्नेहा काँप रही थी — दर्द और लुत्फ का मिश्रण।

धीरे-धीरे उसकी चूत फिर गीली होने लगी। अब दर्द कम हो रहा था और मजा बढ़ रहा था। मैंने रफ्तार बढ़ाई। शावर के पानी के साथ फच-फच की आवाजें हो रही थीं। मैंने एक हाथ से उसके स्तन मसलते हुए और दूसरे हाथ से उसकी क्लिट रगड़ते हुए तेजी से चोदा।

स्नेहा चीख रही थी, “हाँ… और जोर से… भले दर्द हो रहा हो… चोदो मुझे… तुम्हारी रंडी बन गई हूँ मैं!”

मैंने उसे घुमाकर अपनी गोद में उठा लिया। दीवार से सटाकर दोनों पैर अपनी कमर पर रखे और खड़े-खड़े जोर-जोर से चोदने लगा। स्नेहा मेरी गर्दन में मुँह छिपाकर चीख रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे।

कुछ मिनट बाद स्नेहा झड़ गई। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर दबा रही थी। मैंने भी कुछ और जोरदार धक्के मारकर अपना माल उसके अंदर छोड़ दिया।

दोनों पानी के नीचे थककर एक-दूसरे से लिपटे रहे। स्नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया, “कल रात और आज सुबह… मुझे लग रहा है मैं अब विक्रम के पास वापस नहीं जा पाऊँगी।”

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स्नेहा अब और बोल्ड हो जाती है — घर पर, कॉलेज में छुपकर चुदाई

शावर से निकलकर दोनों ने कपड़े पहने। स्नेहा अब पहले से कहीं ज्यादा खुल चुकी थी। उसकी शर्म अब पूरी तरह गायब हो गई थी। वह मेरे पास आई, मेरी शर्ट की कॉलर पकड़कर खींचा और जोर से किस किया।

“अब से मैं तुम्हारी हूँ, अर्जुन। जितना चाहो, जब चाहो,” उसने मेरी आँखों में देखकर कहा।

उस दिन से स्नेहा पूरी तरह बोल्ड हो गई।

घर पर छुपकर चुदाई:

विक्रम अभी भी गांव में था। स्नेहा रोज शाम को अपार्टमेंट आने लगी। एक दिन वह कॉलेज से सीधे आई। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, उसने अपनी ड्रेस ऊपर उठाई और ब्रा-वाली छाती दिखाते हुए बोली, “जल्दी से चोदो मुझे।”

मैंने उसे सोफे पर झुका दिया। पैंटी खींचकर नीचे की और पीछे से एक झटके में लंड अंदर डाल दिया। स्नेहा जोर से चीखी, “हाँ… फाड़ दो… आज बहुत जोर से चाहिए!” मैंने उसके बाल पकड़कर तेज-तेज ठोकना शुरू किया। पूरा अपार्टमेंट उसकी चीखों और चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था।

रात को वह रुक गई। हमने किचन में भी सेक्स किया — काउंटर पर बैठाकर, फिर फर्श पर। स्नेहा अब गंदी बातें करने लगी थी — “मेरी चूत फाड़ दो… अपना मोटा लंड अंदर भर दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ।”

कॉलेज में छुपकर चुदाई:

अगले दिन कॉलेज में स्नेहा ने मुझे मैसेज किया — “लाइब्रेरी के पीछे वाले पुराने ब्लॉक में आओ।”

जब मैं पहुँचा तो स्नेहा पहले से वहाँ थी। उसने मुझे खींचकर एक खाली क्लासरूम में ले गई। दरवाजा बंद किया और मेरी पैंट खोल दी। घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुँह में ले लिया। वह अब बहुत अच्छे से ब्लो जॉब दे रही थी — गहरी गला तक ले जा रही थी, थूक से चिकना कर रही थी।

मैंने उसे डेस्क पर लिटाया, स्कर्ट ऊपर की, पैंटी साइड में की और खड़े-खड़े चोदना शुरू कर दिया। स्नेहा मुंह पर हाथ रखकर दबा रही थी ताकि चीख न निकले। लेकिन फिर भी उसकी कराह सुनाई दे रही थी। “जल्दी… और जोर से… कोई आ जाएगा…” कहते हुए भी वह अपनी कमर हिला रही थी।

मैंने उसे झुकाकर पीछे से चोदा। क्लासरूम में फच-फच की आवाजें हो रही थीं। स्नेहा झड़ गई और मैंने भी उसके मुँह में माल डाल दिया। वह सब निगल गई।

उसके बाद तो दोनों का सिलसिला रोज का हो गया। कभी कॉलेज की छत पर, कभी पार्किंग में कार के अंदर, कभी घर पर बालकनी में खड़े-खड़े। स्नेहा अब इतनी बोल्ड हो गई थी कि वह खुद मुझसे कहती — “आज मेरी गांड भी ट्राई करो,” या “मुझे बाँधकर चोदो।”

एक शाम अपार्टमेंट में वह आई तो सिर्फ एक लंबी शर्ट पहने थी, अंदर कुछ नहीं। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, उसने शर्ट उतारी और नंगी होकर मेरे ऊपर चढ़ गई। हम पूरे घर में घूम-घूमकर चुदाई करते रहे — सोफा, बेड, टेबल, यहाँ तक कि बाथरूम में फिर से।

रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे स्नेहा ने कहा, “अब मुझे विक्रम के साथ बिल्कुल मन नहीं करता। तुम्हारे बिना एक दिन भी नहीं रह सकती।”

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