सर ने फीस के बदले क्लास में ही मेरी गुलाबी बुर को फाड़ दिया | teacher student chudai

सर ने फीस के बदले क्लास में ही मेरी गुलाबी बुर को फाड़ दिया

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कॉलेज का आखिरी पीरियड चल रहा था। क्लास में सिर्फ मैं और सर रह गए थे। बाकी स्टूडेंट्स पहले ही निकल चुके थे। मैं आखिरी बेंच पर बैठी हुई थी, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सर, रजत सर, 38 साल के थे, लंबे, फिट बॉडी वाले, और क्लास में हमेशा सख्त नजर आते थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी नजरें मुझ पर अजीब तरीके से टिक रही थीं।

मैंने फीस जमा नहीं की थी। घर की हालत खराब थी। सर ने मुझे तीन बार याद दिलाया था, लेकिन मैं हर बार टाल जाती थी। आज उन्होंने क्लास के बाद मुझे रुकने को कहा था।

“प्रिया, तुम्हारी फीस अभी तक पेंडिंग है। कॉलेज में रूल सख्त हैं,” सर ने गंभीर स्वर में कहा, अपनी कुर्सी पर बैठते हुए। उनकी आंखें मेरी टाइट स्कर्ट और व्हाइट शर्ट पर घूम रही थीं।

मैंने सिर झुकाया, “सर… प्लीज… घर पर पापा की तबीयत ठीक नहीं है। अगले महीने तक दे दूंगी।”

सर मुस्कुराए, लेकिन वो मुस्कान सामान्य नहीं थी। “प्रिया, तुम जानती हो मैं तुम्हें पसंद करता हूं। तुम मेरी सबसे स्मार्ट और… खूबसूरत स्टूडेंट हो। लेकिन रूल्स तो रूल्स हैं।”

मेरा चेहरा लाल हो गया। मैंने हिम्मत करके पूछा, “सर… तो क्या करूं? कोई रास्ता नहीं है क्या?”

सर उठे, दरवाजे की तरफ गए और उसे अंदर से बंद कर दिया। क्लिक की आवाज सुनकर मेरा बदन कांप गया। उन्होंने धीरे से मेरे पास आकर बेंच पर टिका दिया।

“रास्ता है… लेकिन तुम्हें मेरा शर्त मानना पड़ेगा।” उनकी आवाज भारी हो गई थी। उन्होंने मेरे चेहरे को ऊपर उठाया, “तुम बहुत प्यारी हो प्रिया। तुम्हारी ये गुलाबी होंठ, ये नाजुक शरीर… मैं तुम्हें फीस माफ कर सकता हूं। बस… आज क्लास में ही मुझे वो सब दो जो मैं चाहता हूं।”

मैं घबरा गई, लेकिन अंदर से एक अजीब सा रोमांच भी महसूस कर रही थी। “सर… यहां? क्लास में? कोई आ जाएगा तो…”

“कोई नहीं आएगा। मैंने प्रिंसिपल को बोल दिया है कि एक्स्ट्रा क्लास है।” सर ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा। “तुम्हें डर लग रहा है ना? लेकिन देखो, तुम्हारी सांसें कितनी तेज हो रही हैं।”

उन्होंने मेरी शर्ट का पहला बटन खोला। मैंने विरोध में हाथ पकड़ा, लेकिन सर ने धीरे से मेरे हाथ को हटाया। “शर्त मान लो प्रिया। वरना फीस के साथ एग्जाम में भी प्रॉब्लम हो सकती है।”

मैंने आंखें बंद कर लीं। सर ने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिए। मेरी सफेद ब्रा सामने थी। उन्होंने ब्रा के ऊपर से मेरी छातियों को दबाया। “उफ्फ… कितनी मुलायम हैं।”

मैं हांफ रही थी। “सर… प्लीज… धीरे…”

सर ने ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी गुलाबी-गुलाबी छातियां बाहर आ गईं। उन्होंने एक को मुंह में ले लिया और चूसने लगे। मैं कराह उठी, “आह्ह सर… उम्म…”

उनका दूसरा हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर सरक गया। पैंटी पर उंगलियां फेरते हुए बोले, “तुम्हारी बुर तो पहले से ही गीली हो रही है प्रिया।”

मैं शर्म से मर रही थी, लेकिन शरीर साथ दे रहा था। सर ने मुझे बेंच पर लिटा दिया। स्कर्ट ऊपर की, पैंटी उतारने लगे…

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सर मेरी पैंटी पूरी तरह उतारकर अपनी उंगलियों से मेरी गुलाबी बुर को चाटना शुरू करते हैं

सर ने मेरी स्कर्ट को कमर तक चढ़ा दिया और मेरी सफेद पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाने लगे। पैंटी मेरी जांघों से होते हुए घुटनों तक उतर गई। मैं शर्म से आंखें बंद किए हुए थी, लेकिन मेरी गुलाबी बुर पहले से ही चिकनी हो चुकी थी। सर ने पैंटी को पूरी तरह उतारकर अपनी जेब में रख लिया।

“प्रिया… कितनी सुंदर है तुम्हारी ये गुलाबी बुर,” सर ने फुसफुसाते हुए कहा। उन्होंने मेरी जांघों को फैलाया और अपना चेहरा मेरी बुर के पास ले गए। उनकी गर्म सांस मेरी संवेदनशील जगह पर पड़ रही थी।

मैं कांप उठी, “सर… नहीं… आह्ह… क्या कर रहे हो…”

सर ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने अपनी जीभ निकाली और मेरी बुर की ऊपरी लकीर पर एक लंबी चाट लगाई। मेरी पूरी देह सिहर गई। “उम्म्म… सर… आह्हह!” मैंने मुंह से अनियंत्रित कराह निकाल दी। सर ने मेरी बुर को चाटना शुरू कर दिया — ऊपर से नीचे, फिर अंदर की तरफ। उनकी जीभ मेरी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। मैं बेंच को दोनों हाथों से पकड़े हुए थी, मेरे निप्पल सख्त हो गए थे और छातियां ऊपर-नीचे हो रही थीं।

“सर… प्लीज… बहुत… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह… मैं… मैं सह नहीं पाऊंगी…” मेरे एक्सप्रेशन में शर्म, डर और बढ़ता हुआ मजा साफ दिख रहा था। आंखें आधी बंद, होंठ कांप रहे थे।

सर ने अपनी दो उंगलियां मेरी बुर में डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगे, साथ में जीभ से चूसते रहे। “तुम्हारी बुर तो बहुत टाइट है प्रिया… आज मैं इसे अच्छे से फाड़ दूंगा।”

मैं जोर से कराह रही थी। कुछ ही मिनटों में मेरा पहला ऑर्गेज्म आ गया। मेरी बुर सिकुड़ी और सर के मुंह पर रस निकल गया। “आआह्ह सर… मैं… आ गई…”

सर मुस्कुराए। उन्होंने अपनी पैंट का जिप खोला और अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाला। वो पूरा खड़ा और नसों वाला था। “अब तुम्हें इसका स्वाद चखाना है।”

सर ने मुझे बेंच से नीचे उतारा और खड़ा कर दिया। फिर मेरे सिर को नीचे दबाकर अपना लंड मेरे होंठों पर रख दिया। “मुंह खोलो प्रिया… अच्छे से चूसो।”

मैंने डरते-डरते मुंह खोला। सर ने धीरे से लंड अंदर डाला। मेरे मुंह में वो गर्म और मोटा महसूस हो रहा था। मैंने अपनी जीभ घुमानी शुरू की। सर ने मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुंह में चोदना शुरू कर दिया। “हां… अच्छा… गहरी ले… उफ्फ प्रिया… तुम बहुत अच्छी हो।”

मेरी आंखों में आंसू आ गए थे, लेकिन मैं चूसती रही। सर के चेहरे पर पूरी तृप्ति और कामुकता थी। कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उठाकर फिर बेंच पर लिटा दिया, मेरी टांगें फैलाईं और अपना लंड मेरी गुलाबी बुर पर रगड़ने लगे।

“अब असली मजा शुरू होता है…” सर ने कहा और एक जोरदार धक्का दिया। आधा लंड मेरी टाइट बुर में घुस गया। “आआआह्ह… सर… दर्द हो रहा है… निकालो… प्लीज…” मैं चीख पड़ी, मेरे नाखून सर की पीठ में गड़ गए।

सर रुके नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। “बस… हो गया… अब दर्द कम हो जाएगा… बस मजा लो।”

फिर सर ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ बेंच हिल रही थी। क्लासरूम में सिर्फ हमारी कराहें और चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं — “पक… पक… पक…” मेरी छातियां उछल रही थीं। सर उन्हें दबाते हुए तेज-तेज धक्के दे रहे थे।

“सर… आह्ह… गहरी… बहुत गहरी… मैं फिर… आ रही हूं…” मेरे चेहरे पर पूर्ण समर्पण और आनंद था।

सर भी तेज हो गए। “प्रिया… मैं भी… आ रहा हूं…” आखिरकार उन्होंने मेरी बुर के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया।

दोनों पसीने से तर, सांसें फूल रही थीं। सर ने मेरे माथे को चूमा। “फीस माफ… लेकिन ये सिर्फ शुरुआत है प्रिया।”

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सर मुझे टीचर टेबल पर लिटाकर दूसरी राउंड में मेरी बुर को फिर से चोदते हैं

सर ने कुछ देर तक मेरे शरीर को सहलाया। मेरी बुर से उनका वीर्य बाहर निकल रहा था। उन्होंने मुझे उठाया और क्लास के सामने वाली टीचर टेबल पर लिटा दिया। मेरी पूरी यूनिफॉर्म अब बिखरी हुई थी — शर्ट खुली, ब्रा कंधे पर लटकी हुई, स्कर्ट कमर पर सिमटी हुई। सर ने बाकी बची ब्रा भी पूरी तरह उतार दी और फर्श पर फेंक दिया। अब मैं टेबल पर पूरी तरह नंगी पड़ी थी, सिर्फ स्कर्ट कमर पर थी।

“दूसरी राउंड शुरू होती है प्रिया… अब मैं तुम्हें और भी गहराई से चोदूंगा,” सर ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा। उनकी छाती चौड़ी और बालों वाली थी। उन्होंने अपनी पैंट भी पूरी उतार दी। उनका लंड फिर से सख्त हो चुका था, चमकदार और मोटा।

सर ने मेरी दोनों टांगों को पकड़कर अपने कंधों पर रख लिया। मेरी गुलाबी बुर पूरी तरह खुली और ऊपर की तरफ थी। सर ने लंड की नोक मेरी बुर पर रखी और एक जोरदार धक्का मारा।

“आआआह्हह सर!!! बहुत गहरा… दर्द हो रहा है…” मैं जोर से चीख पड़ी। मेरी आंखें फट गईं, मुंह खुला रह गया। सर का पूरा मोटा लंड एक ही झटके में मेरी बुर के अंदर चला गया। मेरी बुर उनके लंड से पूरी तरह फैल गई थी।

सर ने रुककर मेरे चेहरे को देखा — मेरे चेहरे पर दर्द और आनंद का मिश्रण था, आंखों में आंसू थे, लेकिन होंठ कांप रहे थे। “अब दर्द नहीं होगा… बस मजा लो,” कहते हुए सर ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया।

पक… पक… पक… पक…

हर धक्का बहुत गहरा और तेज था। टेबल हिल रही थी। मेरी छातियां जोर-जोर से उछल रही थीं। सर ने एक हाथ से मेरी एक छाती को जोर से दबाया और निप्पल को चुटकी में कसा।

“सर… आह्ह… आह्ह… बहुत तेज… मैं मर जाऊंगी… उफ्फफ… गहरी… बहुत गहरी जा रही है आपकी…” मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी। मैं टेबल को दोनों हाथों से पकड़े हुए थी, मेरे नाखून टेबल पर गड़ रहे थे।

सर का चेहरा लाल हो गया था, पसीना टपक रहा था। “प्रिया… तुम्हारी बुर कितनी टाइट और गर्म है… हर धक्के में वो मेरे लंड को चूस रही है… उफ्फ… कितना मजा आ रहा है।”

सर ने मेरी टांगों को और ऊपर करके और गहराई से चोदना शुरू किया। अब उनका लंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक पहुंच रहा था। हर धक्के के साथ “चप… चप…” की आवाज हो रही थी क्योंकि मेरी बुर पहले ही बहुत गीली थी।

मैं बेकाबू हो गई। “सर… मैं फिर… आ रही हूं… आह्हह… रुकिए… नहीं… तेज… तेज करो…” मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी। मेरी आंखें उलट गईं, मुंह से लार टपकने लगी। दूसरा ऑर्गेज्म बहुत तेज आया। मेरी बुर सर के लंड को जोर से दबाने लगी।

सर ने भी रफ्तार बढ़ा दी। “मैं भी… आ रहा हूं प्रिया… लो… अंदर ही ले…”

सर ने आखिरी कुछ जोरदार धक्के दिए और मेरी बुर के गहरे में अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मेरी सांसें बहुत तेज थीं, पूरा शरीर कांप रहा था। सर ने मेरे होंठों को चूम लिया।

“आज से तुम मेरी हो प्रिया… फीस तो बस बहाना था,” सर ने मेरे कान में फुसफुसाया।

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सर मुझे टेबल पर ही घुटनों के बल मोड़कर पीछे से डॉगी स्टाइल में चोदते हैं,

सर ने मेरे शरीर को प्यार से सहलाया और फिर मुझे टेबल पर घुटनों के बल मोड़ दिया। मेरी दोनों कोहनियां टेबल पर टिकी हुई थीं, कमर नीचे झुकी हुई थी और मेरी गुलाबी बुर पीछे की तरफ पूरी तरह उभरी हुई थी। सर मेरे ठीक पीछे खड़े हो गए। उन्होंने मेरी स्कर्ट को भी पूरी तरह कमर से ऊपर चढ़ा दिया। अब मैं बिल्कुल कुत्ते की तरह उनकी दया पर थी।

“प्रिया… ये पोजीशन बहुत पसंद है मुझे,” सर ने मेरी नंगी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। चटाक्!

“आह्ह!” मैंने हल्की सी चीख मारी। मेरी सफेद गांड पर उनके हाथ का निशान लाल हो गया।

सर ने अपना मोटा लंड फिर से मेरी बुर पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया।

“उफ्फफ… सर… इतना गहरा… आह्हह!” मेरी आंखें बंद हो गईं। इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था। सर ने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और खींचा। मेरी गर्दन पीछे झुक गई।

फिर सर ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए।

पक… पक… पक… पक… पक…

क्लासरूम में चुदाई की तेज आवाज गूंज रही थी। हर धक्के के साथ मेरी छातियां आगे-पीछे लहरा रही थीं। सर की जांघें मेरी गांड से टकरा रही थीं।

“सर… धीरे… आह्ह… बहुत तेज… मैं सह नहीं पा रही…” मेरी आवाज रो-रोकर निकल रही थी। लेकिन मेरा शरीर झूठ बोल रहा था — मेरी बुर सर के लंड को और भी जोर से पकड़ रही थी।

सर ने दूसरा थप्पड़ मेरी दूसरी गांड पर मारा। चटाक्! “चुप कर प्रिया… आज मैं तुम्हें अच्छे से फाड़कर ही छोडूंगा।” उन्होंने मेरे बाल और जोर से खींचे और रफ्तार बढ़ा दी।

मेरे चेहरे पर आंसू, पसीना और कामुकता का मेल था। मुंह खुला हुआ था, जीभ बाहर निकलने लगी थी। “सर… मुझे… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह… और तेज… मारो मुझे… फाड़ दो मेरी बुर…”

सर का चेहरा पूरा लाल था। उन्होंने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से बाल खींचते हुए जानलेवा स्पीड से चोद रहे थे। हर धक्के में उनका लंड मेरी बुर के सबसे आखिरी हिस्से तक टकरा रहा था।

“प्रिया… तुम्हारी बुर कितनी अच्छी है… चूस रही है मेरे लंड को… उफ्फ… ले… ले… ले…”

मैं पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। “सर… मैं फिर आ रही हूं… आह्हहह… निकल रहा है…” मेरी बुर सिकुड़ी और सर के लंड पर वीर्य निकलने लगा।

सर ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर आखिरी 10-12 बहुत तेज धक्के मारे। “मैं भी… आ रहा हूं… अंदर ही लो सब…”

सर का गर्म वीर्य मेरी बुर के अंदर फूट पड़ा। उन्होंने लंड को अंदर ही दबाए रखा जब तक सारा वीर्य निकल न जाए।

मैं टेबल पर लेट गई, शरीर थर-थर कांप रहा था। मेरी बुर लाल हो गई थी और उन दोनों के रस से भरी हुई थी। सर ने झुककर मेरी पीठ को चूमा।

“तुम अब मेरी प्रॉपर्टी हो प्रिया… रोज क्लास के बाद ये होगा।”

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सर मुझे अपनी गोद में उठाकर काउगर्ल पोजीशन में बिठाते हैं, मैं ऊपर-नीचे होकर खुद चुदती हूं।

सर ने थोड़ी देर तक मेरी पीठ सहलाई और मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया। वो टीचर की कुर्सी पर बैठ गए और मैं उनकी गोद में उनकी तरफ मुंह करके बैठ गई। मेरी दोनों टांगें उनकी कमर के दोनों तरफ फैली हुई थीं। हमारा फेस टू फेस था। सर का लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था और मेरी बुर के ठीक नीचे दब रहा था।

“अब तुम खुद चुदोगी प्रिया… मुझे दिखाओ कितना मन है तुम्हें,” सर ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा।

मैंने शर्माते हुए अपना हाथ नीचे ले जाकर उनके मोटे लंड को पकड़ा। वो अभी भी गर्म और मेरे रस से चिपचिपा था। मैंने लंड को अपनी बुर पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।

“आह्हह… सर… फिर से भर गया…” पूरा लंड एक बार में मेरी बुर में चला गया। मैंने आंखें बंद कर लीं और होंठ काट लिए। मेरे चेहरे पर दर्द और खुशी का मिश्रण था।

सर ने मेरी कमर पर हाथ रखकर सहारा दिया। “हां… अच्छा… अब ऊपर-नीचे हो… खुद चुदो मेरे लंड पर।”

मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर ऊपर-नीचे करना शुरू किया। पहले धीमी गति से, फिर धीरे-धीरे तेज। मेरी छातियां सर के चेहरे के सामने उछल रही थीं। सर ने आगे बढ़कर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगे।

“उम्म्म… सर… आह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… मुझे अच्छा लग रहा है…” मैं हांफते हुए बोली। मेरी आवाज में अब शर्म कम और कामुकता ज्यादा थी।

सर ने मेरी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे दबाया, जिससे लंड और भी गहरा चला गया। “जोर से… तेज… प्रिया… अपनी बुर को मेरे लंड पर चोदो…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब मैं पूरी ताकत से ऊपर-नीचे हो रही थी। पक… पक… पक… की आवाज पूरे क्लास में गूंज रही थी। मेरी बुर सर के लंड को हर बार चूस रही थी। मेरे बाल बिखरे हुए थे, पसीना मेरी छातियों पर बह रहा था। मेरे चेहरे पर पूरी समर्पण की भावना थी — आंखें आधी बंद, मुंह खुला, होंठों से कराह निकल रही थी।

“सर… मैं… बहुत मजा आ रहा है… आपका लंड… मेरी बुर में… आह्हह… फिट हो रहा है…”

सर ने मेरी छातियों को जोर से दबाया और नीचे से भी धक्के देने शुरू कर दिए। अब हम दोनों साथ-साथ चुदाई कर रहे थे। मेरी बुर पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी, लेकिन मैं रुक नहीं रही थी।

“प्रिया… तुम बहुत हॉट हो… तेज… और तेज…” सर की सांसें भी तेज हो गई थीं।

कुछ ही देर बाद मैं फिर से झड़ गई। “सर… आ गई… आह्हहह… पूरा निकल गया…” मेरी बुर सिकुड़-सिकुड़कर उनके लंड को दबा रही थी।

सर ने मुझे जोर से पकड़ा और नीचे से तेज धक्के मारते हुए अपना तीसरा वीर्य भी मेरी बुर के अंदर छोड़ दिया। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, सांसें फूल रही थीं। मेरी बुर से दोनों का मिश्रित रस टपक रहा था।

सर ने मेरे कान में फुसफुसाया, “आज के बाद हर दिन क्लास के बाद तुम यहीं आओगी… समझी?”

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