एग्जाम पेपर के लिए सर ने मेरी टाइट चूत फाड़ दी
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अंजलि बी.ए. फाइनल ईयर की 21 साल की छात्रा थी। वो कॉलेज में बहुत ही तेज और खूबसूरत लड़की थी – गोरी, लंबे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और एक आकर्षक फिगर जिसे देखकर कई लड़के दीवाने थे। लेकिन अंजलि का फोकस सिर्फ पढ़ाई पर था।
प्रोफेसर विक्रम शर्मा कॉलेज के सबसे स्ट्रिक्ट और हैंडसम टीचर थे। उम्र 38 साल, ऊंचे कद-काठी वाले, मर्दाना चेहरा। पूरा कॉलेज उनसे डरता था, लेकिन लड़कियाँ चुपके-चुपके उन पर फिदा भी रहती थीं।
अंजलि का आखिरी सेमेस्टर एग्जाम था। लेकिन इकोनॉमिक्स का पेपर बहुत कठिन था। अंजलि ने बहुत मेहनत की थी, फिर भी उसे डर था कि पासिंग मार्क्स नहीं आएंगे।
एक दिन क्लास के बाद अंजलि प्रोफेसर विक्रम के चैंबर में गई।
“सर… सर प्लीज… मैं आपसे एक मदद चाहती हूँ,” अंजलि ने घबराते हुए कहा।
विक्रम सर ने चश्मा उतारते हुए पूछा, “क्या बात है अंजलि? इतनी परेशान क्यों हो?”
अंजलि ने सिर झुकाकर कहा, “सर, इकोनॉमिक्स का पेपर… मुझे बहुत डर लग रहा है। अगर मैं फेल हो गई तो मेरा साल बर्बाद हो जाएगा। सर, प्लीज कोई रास्ता निकालिए। मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ।”
विक्रम सर कुछ देर तक चुप रहे। उनकी नजर अंजलि के खुली हुई शर्ट की ऊपरी बटन और उसके उभरे हुए स्तनों पर घूम गई।
“कुछ भी?” सर ने गहरी आवाज में पूछा।
अंजलि ने शर्मा कर सिर हिलाया, “जी सर… कुछ भी।”
विक्रम सर मुस्कुराए। उन्होंने दरवाजा बंद किया और लॉक कर दिया।
“अंजलि, तुम बहुत होशियार लड़की हो। लेकिन एग्जाम में मदद लेने के लिए कुछ तो कीमत चुकानी पड़ेगी। समझीं?”
अंजलि की साँसें तेज हो गईं। वो समझ गई थी कि सर क्या चाहते हैं। लेकिन उसके पास कोई और रास्ता नहीं था।
“सर… मैं समझ गई हूँ,” अंजलि ने धीमी आवाज में कहा।
विक्रम सर उनके सामने आए और अंजलि के चेहरे को ऊपर उठाया। “डर मत। मैं तुझे अच्छे मार्क्स दूँगा… लेकिन आज तुझे मुझे खुश करना होगा।”
अंजलि की आँखों में शर्म, डर और थोड़ी उत्तेजना थी। उसने धीरे से कहा, “सर… मैं पहली बार हूँ… बहुत डर लग रहा है।”
सर ने उसके गाल पर हाथ फेरा, “पहली बार है तो मैं धीरे से करूँगा। लेकिन पूरी तरह मेरी बात माननी पड़ेगी।”
अंजलि ने हाँ में सिर हिला दिया।
सर ने अंजलि को अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर किस किया। अंजलि पहले तो काँपी, लेकिन फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगी।
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सर चैंबर में ही अंजलि के कपड़े उतारना शुरू करते हैं
विक्रम सर ने अंजलि को चैंबर के अंदर वाले सोफे की तरफ ले जाया। दरवाजा पहले ही लॉक था। कमरे में सिर्फ टेबल लैंप जल रहा था, जिससे माहौल और भी गर्म हो गया था।
“सर… यहाँ… कॉलेज में ही?” अंजलि ने काँपती आवाज में पूछा।
“हाँ अंजलि, यहीं। कोई नहीं आएगा। अब चुपचाप मेरी बात मान,” सर ने सख्त लेकिन कामुक स्वर में कहा।
सर ने अंजलि की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। एक-एक करके सारे बटन खुल गए। शर्ट दोनों तरफ खुली तो अंजलि की गोरी छातियाँ हल्के गुलाबी ब्रा में कैद दिख रही थीं। सर ने शर्ट उसके कंधों से उतारकर फेंक दी।
अंजलि शर्म से सिकुड़ गई। “सर… प्लीज…”
सर ने मुस्कुराते हुए ब्रा के हुक पर हाथ लगाया। एक क्लिक के साथ ब्रा खुल गई। अंजलि की दो नुकीली, टाइट और गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। विक्रम सर की आँखें चमक उठीं। उन्होंने दोनों हाथों से चूचियों को दबाया।
“आह्ह्ह… सर…” अंजलि की सिसकारी निकल गई।
सर ने एक चूची मुँह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगे। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहे थे। अंजलि की कमर टेढ़ी हो गई। वो सर की पीठ पकड़कर कराह रही थी।
थोड़ी देर बाद सर ने अंजलि की स्कर्ट की जिप खोली और उसे नीचे उतार दिया। अब अंजलि सिर्फ हल्की गुलाबी पैंटी में खड़ी थी। पैंटी पर पहले से ही हल्का गीला निशान दिख रहा था।
सर ने पैंटी के अंदर हाथ डालकर अंजलि की चूत को सहलाया। “बहुत टाइट है तेरी चूत अंजलि। आज मैं इसे फाड़ने वाला हूँ,” सर ने कहा।
अंजलि ने डरते हुए कहा, “सर… धीरे करना… मैं कुंवारी हूँ।”
सर ने पैंटी को उसके जांघों तक खींचकर पूरी तरह उतार दिया। अंजलि अब पूरी तरह नंगी खड़ी थी। सर ने भी अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। उनका मोटा, खड़ा लंड बाहर आ गया। अंजलि ने देखकर आँखें फैला लीं।
सर ने अंजलि को सोफे पर लिटा दिया। उसकी जांघें फैलाकर बीच में बैठ गए। पहले उन्होंने अपनी जीभ से अंजलि की चूत चाटी। अंजलि जोर से कराह उठी – “उम्म्म… सर… क्या कर रहे हैं… आह्ह्ह…”
जब चूत पूरी तरह गीली हो गई, सर ने अपना लंड अंजलि की चूत के छेद पर रखा और धीरे से दबाया।
“आआआह्ह्हhhh… सर… बहुत दर्द हो रहा है… निकालिए…” अंजलि चीख उठी। आँसू उसकी आँखों से बहने लगे।
सर ने एक और जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अंजलि की टाइट कुंवारी चूत फट रही थी। खून की हल्की धार निकली।
“बस थोड़ा सा और बेटी… अच्छे मार्क्स चाहिए ना?” सर ने कहा और आखिरी जोरदार झटका दिया। पूरा मोटा लंड अंजलि की चूत में समा गया।
अंजलि दर्द से तड़प रही थी। सर ने कुछ देर रुककर उसे चूमना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे चुदाई शुरू कर दी। हर धक्के के साथ अंजलि की चीख “आह… सर… धीरे… आह्ह्ह…” में बदलने लगी।
धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और मज़ा बढ़ने लगा। सर की रफ्तार तेज हो गई। वो अंजलि की चूचियों को दबाते हुए, उसके होंठ चूसते हुए और गर्दन पर काटते हुए पूरी ताकत से चोद रहे थे।
“सर… बहुत अच्छा लग रहा है… और जोर से… आह्ह्ह…” अंजलि अब खुद कह रही थी।
सर ने आखिरी कुछ तेज धक्के मारे और अंजलि की चूत के अंदर ही झड़ गए। दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से चिपके पड़े थे।
अंजलि की आँखें बंद थीं। चेहरे पर दर्द और संतोष का मिश्रण था।
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सर अपना लंड अंजलि के मुंह में डालकर साफ कराते है
अंजलि अभी भी सोफे पर लेटी हुई थी। उसकी चूत से सर का वीर्य और हल्का खून रिस रहा था। वो दर्द से कराह रही थी। विक्रम सर उसके ऊपर झुके हुए थे। उनका लंड अभी भी अंजलि की चूत में से बाहर निकला हुआ था – चूत के रस, वीर्य और खून से लथपथ।
सर ने अपना लंड निकाला और अंजलि के चेहरे के पास ले आए। लंड अभी भी आधा खड़ा था और चिपचिपा हो रहा था।
“अंजलि, अपना मुँह खोल। अपना काम पूरा कर,” सर ने सख्त आवाज में कहा।
अंजलि ने घिन और डर से सिर हिलाया। “नहीं सर… प्लीज… ये गंदा है… मैं नहीं कर सकती…” उसकी आँखों में आँसू आ गए। वो मुँह बंद करके सिर दूसरी तरफ करने लगी।
सर ने अंजलि के बालों को मुठ्ठी में पकड़ लिया और उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमा दिया। “मना कर रही है? मार्क्स चाहिए या नहीं? खोल मुँह!” सर ने गुस्से से कहा।
अंजलि डर गई। उसने धीरे-धीरे मुँह खोला। सर ने तुरंत अपना गंदा लंड उसके मुँह में ठेल दिया।
“उम्म्म्म… घ्… घ्…” अंजलि की आँखें फैल गईं। वो उल्टी जैसा महसूस कर रही थी। सर का लंड पूरा मुँह भर गया था।
सर ने उसके बाल पकड़कर लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। “चूस… अच्छे से साफ कर… अपनी चूत का रस और मेरा वीर्य चाटकर साफ कर!” सर ने हाँफते हुए कहा।
अंजलि रोते हुए, गला घुटने के बावजूद लंड चूसने लगी। उसकी जीभ अनजाने में सर के लंड को साफ कर रही थी। सर का लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया।
सर ने कुछ देर तक अंजलि का मुँह चोदा। लंड उसके गले तक जा रहा था। अंजलि की आँखों से आँसू बह रहे थे, थूक उसके मुँह के किनारे से निकल रहा था।
“बहुत अच्छी लड़की है तू… अब देख, मैं फिर से तैयार हो गया हूँ,” सर ने कहा।
सर ने अंजलि को फिर से सोफे पर लिटाया और उसकी जांघें फैला दी। लंड अब पहले से भी ज्यादा सख्त था। उन्होंने एक झटके में पूरा लंड अंजलि की चूत में घुसा दिया।
“आआआह्ह्हhhh… सर… फिर दर्द हो रहा है…” अंजलि चीख उठी।
सर ने इस बार और तेजी से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ सोफा हिल रहा था। अंजलि की चूचियाँ उछल रही थीं। सर उन्हें दबाते हुए, काटते हुए और चूसते हुए पूरी ताकत से चोद रहे थे।
“सर… धीरे… आह्ह्ह… मैं मर जाऊँगी…” अंजलि रो-रोकर कह रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी चीखें मजे की सिसकारियों में बदल गईं।
सर ने लगभग 10 मिनट तक जोर-जोर से चुदाई की और फिर दूसरी बार अंजलि की चूत में वीर्य भर दिया।
अंजलि थककर बेजान सी पड़ी थी। उसके मुँह में सर के लंड का स्वाद और चूत में दर्द अभी भी था।
सर ने उसके बालों पर हाथ फेरते हुए कहा, “अच्छे से किया तूने।
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सर पूरी रात अंजलि को याद करके पागल हो जाते हैं
रात को घर जाकर विक्रम सर को अंजलि की याद आ रही थी। उन्होंने सोने की कोशिश की लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बार-बार अंजलि की टाइट कुंवारी चूत, उसकी चीखें, उसके आँसू और उसके नंगे शरीर की याद आ रही थी। उनका लंड बार-बार खड़ा हो रहा था।
सर ने रात में तीन बार मुठ मार ली, फिर भी अंजलि की चूत की याद उन्हें पागल कर रही थी। “बहुत टाइट और मीठी चूत है उसकी… रोज चोदना है मुझे,” सर ने खुद से कहा।
अगले दिन सुबह सर कॉलेज पहुँचे तो सबसे पहले अंजलि को मैसेज किया:
“अंजलि, आज शाम 5 बजे मेरे चैंबर में आना। जरूरी है। देर मत करना।”
अंजलि ने मैसेज पढ़ा तो उसका दिल धड़कने लगा। वो समझ गई कि फिर वही बात है। लेकिन कल के बाद उसकी हिम्मत भी बढ़ गई थी।
शाम 5 बजे अंजलि चैंबर में पहुँची। सर पहले से ही इंतजार कर रहे थे। उन्होंने दरवाजा बंद किया और लॉक कर दिया।
“आ गईं मेरी जान,” सर ने मुस्कुराते हुए कहा। उन्होंने टेबल पर एक सुंदर पैकेट रखा था।
“सर… ये क्या है?” अंजलि ने पूछा।
सर ने पैकेट खोलकर दिखाया – एक महंगा iPhone 14 और एक सोने की छोटी सी नेकलेस।
“ये तेरे लिए गिफ्ट है अंजलि। कल तूने मुझे बहुत मज़ा दिया। अब मैं रोज तुझे चाहता हूँ। तेरी वो टाइट चूत मुझे पागल कर रही है।”
अंजलि शर्मा गई। “सर… इतना महंगा गिफ्ट…?”
सर ने अंजलि को अपनी तरफ खींच लिया और जोर से चूमने लगे। “ये कुछ भी नहीं है। अगर तू रोज मेरे पास आएगी तो और भी बहुत कुछ दूँगा। अब कपड़े उतार।”
सर ने खुद अंजलि की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। शर्ट उतारकर फेंक दी। फिर ब्रा का हुक खोला। अंजलि की गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। सर ने उन्हें जोर से दबाया और चूसने लगे।
अंजलि की सिसकारियाँ निकलने लगीं – “आह्ह्ह… सर…”
सर ने अंजलि की स्कर्ट और पैंटी भी उतार दी। अब अंजलि पूरी तरह नंगी थी। सर ने भी अपने कपड़े उतारे। उनका लंड पहले से ही पूरा खड़ा था।
सर ने अंजलि को सोफे पर लिटाया और उसकी जांघों के बीच बैठ गए। उन्होंने अपना लंड अंजलि की चूत पर रगड़ना शुरू किया।
“सर… धीरे… कल भी बहुत दर्द हुआ था…” अंजलि ने कहा।
लेकिन सर को अब कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उन्होंने जोर से धक्का मारा और आधा लंड अंदर कर दिया। अंजलि चीख उठी।
सर ने पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ बोल रहे थे – “तेरी चूत बहुत स्वादिष्ट है अंजलि… रोज चोदूँगा तुझे… आह्ह्ह… बहुत टाइट है…”
अंजलि दर्द और मजे के मिश्रण में कराह रही थी। सर इस बार और ज्यादा wild थे। उन्होंने अंजलि की चूचियों पर काट लिया, बाल खींचे और लगातार 15 मिनट तक जोर-जोर से चोदा।
आखिर में सर ने अंजलि की चूत में ही झड़ दिया।
दोनों थककर लेट गए। सर ने अंजलि को गले लगाते हुए कहा, “कल फिर आना। रोज आना। समझी? तेरी चूत के बिना अब मुझे चैन नहीं है।”
अंजलि चुपचाप लेटी रही। अब वो समझ चुकी थी कि सर उस पर पागल हो चुके हैं।
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चुदाई के बाद सर अंजलि की और अंजलि की चूत की जमकर तारीफ करते हैं
चुदाई के बाद दोनों थककर सोफे पर लेटे हुए थे। अंजलि की चूत अभी भी सर के वीर्य से भरी हुई थी और हल्की-हल्की फड़क रही थी। विक्रम सर ने अंजलि को अपनी बाहों में भर लिया।
सर ने अंजलि के बालों को सहलाते हुए कहा:
“अंजलि… तू सच में बहुत खास है। तेरी उम्र की लड़कियों में इतनी टाइट और मीठी चूत मैंने आज तक नहीं देखी।”
अंजलि शर्मा गई और सर के सीने से चिपक गई।
सर अपनी तारीफ जारी रखते हुए बोले, “देख… कितनी सुंदर है तेरी चूत। गुलाबी, बिना बाल वाली, बहुत टाइट। जब मैंने पहली बार घुसाया था, लग रहा था जैसे कोई लोहे की मुठ्ठी मेरे लंड को दबा रही हो। फट गई थी तेरी कुंवारी चूत, फिर भी कितना मज़ा आया। अब भी जब मैं अंदर डालता हूँ तो वो मेरे लंड को ऐसे निचोड़ती है जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती।”
सर ने नीचे हाथ डालकर अंजलि की चूत को सहलाया और जारी रखा:
“तेरी चूत न सिर्फ टाइट है, बल्कि बहुत गर्म और गीली भी हो जाती है। जब मैं चोद रहा था, तेरी चूत से रस निकल-निकल कर मेरे लंड और जांघों को भिगो रहा था। कितनी प्यासी है तेरी चूत… सच कहूँ तो आजकल मुझे तेरी चूत के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा। दिन-रात बस यही याद आता है कि कैसे तेरी टाइट चूत को फाड़ूँ।”
अंजलि शर्म से लाल हो गई। सर ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा:
“तेरी चूचियाँ भी बहुत बढ़िया हैं – नुकीली, गोरी और बिल्कुल सख्त। जब मैं इन्हें चूसता हूँ तो तू जो सिसकारियाँ भरती है, वो मेरे लंड को और खड़ा कर देती हैं। तेरा पूरा शरीर ही चोदने लायक है। कमर पतली, गांड गोल और चूत तो जैसे स्वर्ग है।”
सर ने अंजलि की चूत पर हाथ फेरते हुए फिर बोले, “कल से रोज आना। मैं तुझे हर पेपर के लिए अच्छे मार्क्स दूँगा। बस तेरी ये टाइट चूत मुझे रोज देती रहना। मैं तेरी चूत का दीवाना हो चुका हूँ अंजलि।”
अंजलि ने धीरे से सर की छाती पर सिर रखते हुए कहा, “सर… आप बहुत wild हो गए हैं… लेकिन… मैं आऊँगी।”
सर खुश होकर मुस्कुराए और अंजलि को फिर से चूमने लगे।
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अंजलि अब सर की तारीफ सुनकर खुद आक्रामक हो जाती है और सर का लंड चूसते हुए ऊपर बैठकर riding position में चुदाई करती है।
सर की तारीफ सुनकर अंजलि के अंदर कुछ बदल गया। शर्म के साथ-साथ एक नई हिम्मत और उत्तेजना जाग उठी। उसने सर की तरफ देखा, आँखों में अब शर्म कम और चाहत ज्यादा थी।
“सर… आपने मेरी चूत की इतनी तारीफ की है… तो आज मैं आपको खुश करूँगी,” अंजलि ने धीमी लेकिन आक्रामक आवाज में कहा।
विक्रम सर हैरान रह गए। अंजलि ने खुद सर को सोफे पर लिटा दिया। वो सर के पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गई। सर का मोटा, चिपचिपा लंड उसके सामने खड़ा था।
अंजलि ने पहले सर के लंड को हाथ में पकड़ा, फिर झुककर उसका सिर चाटा। सर ने सिसकारी भरी।
“अंजलि… क्या कर रही है तू…”
अंजलि ने जवाब नहीं दिया। उसने अपना मुँह खोला और सर का लंड मुँह में ले लिया। पहले हल्का-हल्का चूस रही थी, फिर धीरे-धीरे गहराई तक ले जाने लगी। सर का लंड उसके गले तक जा रहा था। अंजलि की आँखों से पानी आ रहा था, लेकिन वो रुकी नहीं।
“आह्ह्ह… बहुत अच्छा… चूस… तेरी जीभ जादू कर रही है…” सर कराह रहे थे।
अंजलि ने 4-5 मिनट तक सर का लंड चूसा, थूक से चिकना किया और फिर खड़ी हो गई।
अब वो सर के ऊपर चढ़ गई। सर का लंड अपनी चूत के ठीक ऊपर रखा और धीरे से बैठने लगी।
“आह्ह्ह… सर… बहुत मोटा है…” अंजलि ने दाँत भींचते हुए कहा।
धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। अंजलि की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था। उसने दोनों हाथ सर की छाती पर रखे और ऊपर-नीचे होने लगी।
राइडिंग पोजीशन में अंजलि अब पूरी तरह आक्रामक हो चुकी थी। वो तेजी से उछल-उछलकर चुदाई कर रही थी। उसकी टाइट चूत सर के लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी।
“सर… आपकी तारीफ सही है… मेरी चूत बहुत टाइट है ना?” अंजलि ने हाँफते हुए कहा।
सर नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर जोर से ऊपर धक्के दे रहे थे। “हाँ बेटी… बहुत टाइट… बहुत अच्छी… फाड़ डाल चूत… आह्ह्ह…”
अंजलि की चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। सर उन्हें दबा रहे थे। कमरे में चूत और लंड की टकराहट की “पच पच पच” आवाज गूंज रही थी। अंजलि की चूत से रस निकलकर सर की जांघों को भिगो रहा था।
अंजलि की रफ्तार और तेज हो गई। वो सर के लंड पर पूरी ताकत से बैठ रही थी। “सर… बहुत मज़ा आ रहा है… आपकी चीज बहुत गहरी जा रही है… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”
सर भी काबू खो चुके थे। उन्होंने अंजलि की कमर पकड़कर नीचे से तेज-तेज धक्के मारे।
कुछ ही देर बाद अंजलि जोर से चीखी और झड़ गई। उसकी चूत सर के लंड को जोर-जोर से निचोड़ रही थी। सर भी कुछ सेकंड बाद अंजलि की चूत के अंदर ही गरम वीर्य उछालने लगे।
दोनों थककर एक-दूसरे से चिपट गए। अंजलि सर की छाती पर सिर रखे हुए थी।
सर ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “तू आज बहुत wild हो गई थी अंजलि… तेरी चूत ने मुझे फिर से पागल कर दिया।”
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