जेठ ने देवरानी की कुँवारी चूत को जमकर चोदा | devarani jeth chudai kahani

जेठ ने देवरानी की कुँवारी चूत को जमकर चोदा

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एक छोटे से गाँव में, रामपुर नाम की जगह पर, शर्मा परिवार रहता था। परिवार में बड़े भाई रमेश, उसकी पत्नी सुनीता, छोटा भाई अजय और अजय की नई-नवेली दुल्हन राधा थी। रमेश को सब जेठ कहकर बुलाते थे और राधा को देवरानी।

रमेश ३५ साल का था, मजबूत कद-काठी वाला, खेती-बाड़ी और गाँव की छोटी-मोटी दुकान संभालता था। उसकी पत्नी सुनीता थोड़ी बीमार रहती थी, इसलिए घर के ज्यादातर काम राधा ही करती थी। अजय २८ साल का था, शहर में नौकरी करता था और हफ्ते में सिर्फ दो-तीन दिन घर आ पाता था। राधा अभी सिर्फ १९ साल की थी। उसकी शादी को महज तीन महीने हुए थे।

राधा बेहद खूबसूरत थी—गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आँखें, लंबे काले बाल और एक नाजुक-सी काया। गाँव की लड़कियों की तरह वह साड़ी में बहुत सुंदर लगती थी। शादी के बाद से वह घर की हर जिम्मेदारी खुशी-खुशी निभा रही थी। सुबह जल्दी उठकर चूल्हा जलाती, गाय-भैंस को चारा देती, पानी भरती और रसोई संभालती। जेठ रमेश उसे हमेशा प्यार से देखता था।

शुरू-शुरू में तो सब कुछ सामान्य था। लेकिन धीरे-धीरे रमेश का मन राधा की ओर खिंचने लगा। अजय के शहर जाने के बाद घर में सिर्फ तीन लोग रहते—रमेश, सुनीता और राधा। सुनीता अक्सर दवा खाकर सो जाती थी। राधा शाम को आँगन में बैठकर चूल्हा जलाती या कपड़े सीती तो रमेश चुपचाप दरवाजे से उसे देखा करता। कभी-कभी वह मदद के बहाने पास आ जाता।

“राधा, आज पानी का घड़ा भारी है ना? मैं उठा दूँ?”

राधा शर्म से मुस्कुराती, “नहीं जेठजी, मैं कर लूंगी। आप आराम करें।”

रमेश की नजरें राधा के नाजुक कमर, उभरे स्तनों और चलते वक्त हिलते कूल्हों पर अटक जातीं। वह खुद को रोकता, लेकिन रात को अकेले लेटे-लेटे राधा के बारे में सोचता रहता। राधा अभी तक कुंवारी थी—अजय की व्यस्तता और थकान की वजह से उनका रिश्ता पूरा नहीं हो पाया था। राधा को भी अंदर ही अंदर कुछ कमी महसूस होती, लेकिन वह किसी से कह नहीं सकती थी।

एक दिन गाँव में तेज बारिश हुई। बिजली चली गई। सुनीता दवा लेकर सो चुकी थी। राधा रसोई में मिट्टी का दिया जलाकर खाना बना रही थी। रमेश बाहर से भीगा हुआ आया।

“जेठजी, कपड़े बदल लीजिए, नहीं तो ठंड लग जाएगी,” राधा ने चिंता से कहा।

रमेश ने अपनी भीगी कमीज उतारी। उसका चौड़ा सीना, भुजाएँ और पसीने से चमकता शरीर राधा की नजरों के सामने था। राधा शर्मा गई और नजरें झुका ली। लेकिन उसका दिल तेज धड़क रहा था। रमेश ने तौलिया माँगा। राधा पास आई तो उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया। रमेश की आँखें उसके गले और उभरे स्तनों पर ठहर गईं।

“राधा… तुम बहुत सुंदर हो,” उसने धीरे से कहा।

राधा ने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया। हवा में तनाव था। बारिश की आवाज, अंधेरा और अकेलापन… सब कुछ मिलकर एक अजीब-सी गर्माहट पैदा कर रहा था।

रमेश ने आगे बढ़कर राधा का हाथ पकड़ लिया।

“जेठजी… ये गलत है,” राधा ने काँपती आवाज में कहा, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया।

“अजय तुम्हें खुश नहीं रख पा रहा है ना? मैं देखता हूँ… तुम्हारी आँखों में प्यास है,” रमेश ने उसके कान में फुसफुसाया।

राधा का शरीर काँप उठा। सालों की दबी हुई इच्छा, शर्म और डर सब एक साथ उभर आए। रमेश ने उसे धीरे से अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर किस किया। राधा पहली बार किसी की छुअन महसूस कर रही थी। उसके शरीर में बिजली-सी दौड़ गई।

धीरे-धीरे किस गहरा होता गया। रमेश ने राधा को गोद में उठाया और अंदर वाले कमरे में ले गया, जहाँ सुनीता सो रही थी, लेकिन उस कमरे से अलग एक छोटा सा कमरा था, जहाँ कभी-कभी मेहमान सोते थे।

वहाँ रमेश ने राधा को बिस्तर पर लिटाया। उसने राधा की साड़ी का पल्लू सरकाया। राधा की नाजुक छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। रमेश ने उसके ब्लाउज के हुक खोले। उसके गोरे, नर्म स्तन बाहर आ गए। रमेश ने उन्हें चूमना शुरू किया। राधा की साँसें तेज हो गईं।

“जेठजी… धीरे… मैं डर रही हूँ,” वह काँपते हुए बोली।

रमेश ने उसे आश्वासन दिया, “डरो मत… मैं तुम्हें बहुत प्यार से खुश करूँगा।”

उसने राधा की साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। राधा अब सिर्फ अपनी छोटी-सी चूड़ीदार पैंटी में थी। रमेश ने अपनी लुंगी भी उतार दी। उसका मोटा, खड़ा लिंग राधा की नजरों के सामने था। राधा शर्मा कर आँखें बंद कर ली।

रमेश ने राधा की जाँघों को फैलाया। उसकी कुंवारी चूत पूरी तरह साफ और गुलाबी थी। उसने पहले अपनी उँगलियों से छुआ, फिर जीभ से चाटना शुरू किया। राधा के मुँह से पहली बार चीख निकली, “आह… जेठजी… क्या कर रहे हैं…”

उसकी चूत गीली होने लगी। रमेश ने अपनी उँगली अंदर डालनी शुरू की। राधा दर्द और मजे के मिश्रण में कराह रही थी। जब वह पूरी तरह गीली हो गई, तब रमेश ने अपना मोटा लिंग उसके चूत के मुंहाने पर रखा।

धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। राधा की कुंवारी चूत पहली बार किसी लिंग को अंदर ले रही थी। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सुख भी था।

“आह… जेठजी… धीरे… फट जाएगी…” राधा रोते हुए बोली।

रमेश ने उसे चूमते हुए पूरा लिंग एक झटके में अंदर कर दिया। राधा चीख पड़ी। खून की हल्की धार निकली, लेकिन रमेश रुका नहीं। वह धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा।

धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और मजे की लहरें आने लगीं। रमेश तेजी से चोदने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं—चप-चप, थप-थप। राधा अब खुद अपने कूल्हे उठा-उठा कर जवाब दे रही थी।

“जेठजी… और जोर से… आह… मुझे अच्छा लग रहा है…”

रमेश ने राधा को कई पोजीशन में चोदा—मिशनरी, डॉगी स्टाइल, और ऊपर बैठाकर भी। राधा कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में रमेश भी उसके अंदर ही झड़ गया।

दोनों थककर लेट गए। राधा रमेश के सीने से लगकर सो गई। उस रात के बाद उनके रिश्ते की एक नई शुरुआत हुई।

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जेठ की आग और देवरानी की प्यास – भाग 2

उस रात के बाद राधा का जीवन पूरी तरह बदल गया था। सुबह जब वह उठी तो उसका शरीर दर्द से भरपूर था, लेकिन अंदर से एक अनोखी तृप्ति महसूस हो रही थी। वह चुपचाप उठी, नहाई और रोज की तरह रसोई में काम करने लगी। जेठ रमेश भी सामान्य व्यवहार कर रहा था, लेकिन जब भी उनकी नजरें मिलतीं, तो राधा शर्मा जाती और रमेश की आँखों में एक चिंगारी नजर आती।

सुनीता अभी भी अपनी बीमारी की वजह से ज्यादातर समय बिस्तर पर रहती थी। डॉक्टर ने कहा था कि उसे आराम की जरूरत है। अजय शहर से फोन पर बात करता तो राधा सामान्य स्वर में जवाब देती, लेकिन अब उसके मन में अपराधबोध और उत्तेजना दोनों थे।

दो दिन बाद शाम को अचानक मौसम फिर से खराब हो गया। तेज हवा चल रही थी और बारिश की बूँदें गिरने लगी थीं। रमेश खेत से लौटा तो पूरी तरह भीगा हुआ था। राधा ने तुरंत गर्म पानी रखा और उसके लिए चाय बनाई।

“जेठजी, जल्दी कपड़े बदल लीजिए, नहीं तो बुखार आ जाएगा,” राधा ने कहा। उसकी आवाज में अब पहले जैसी शर्म के साथ थोड़ी मिठास भी थी।

रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारे हाथ का गर्म पानी और चाय ही मेरी दवा है।”

राधा ने चाय का कप देते हुए उसकी उँगलियों को छुआ। दोनों के शरीर में करंट-सा दौड़ गया। सुनीता उस वक्त गहरी नींद में थी। रमेश ने राधा का हाथ पकड़ लिया और उसे पास खींचा।

“राधा, उस रात के बाद से मैं तुम्हें भूल नहीं पा रहा हूँ। तुम्हारी वो कुंवारी चूत… आज भी याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है।”

राधा ने शर्माते हुए सिर झुका लिया, लेकिन उसने विरोध नहीं किया। रमेश ने उसे रसोई के कोने में दीवार से सटा दिया और जोरदार किस करने लगा। राधा भी अब जवाब दे रही थी। उसकी जीभ रमेश की जीभ से उलझ गई।

रमेश ने उसकी साड़ी ऊपर सरकाई और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा। राधा की साँसें भारी हो गईं।

“जेठजी… यहाँ नहीं… कोई देख लेगा,” राधा ने हाँफते हुए कहा।

रमेश ने उसे गोद में उठाया और सीधे उस छोटे कमरे में ले गया जहाँ उन्होंने पहली बार प्यार किया था। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी। रमेश ने धीरे-धीरे राधा की साड़ी खोली। उसका गोरा, नाजुक शरीर पूरी तरह नंगा हो गया। राधा ने भी रमेश की शर्ट और लुंगी उतार दी।

रमेश ने राधा को बिस्तर पर लिटाया और उसके पूरे शरीर को चूमने लगा—गले से लेकर स्तनों तक, पेट तक, और फिर जाँघों के बीच। राधा कराह रही थी, “आह… जेठजी… आप मुझे पागल कर दोगे…”

रमेश ने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटा। राधा की चूत अब पहले से ज्यादा गीली और तैयार थी। उसने दो उँगलियाँ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। राधा अपने कूल्हे उठा-उठाकर मदद कर रही थी।

जब राधा पहली बार झड़ गई, तब रमेश ने अपना मोटा, लंबा लंड निकाला। राधा ने झिझकते हुए उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी।

“जेठजी… ये तो बहुत बड़ा है…”

रमेश मुस्कुराया, “और आज ये तुम्हारी चूत को और अच्छे से चोदेगा।”

उसने राधा को चारों खाने चित लिटाया, जाँघें फैलाईं और धीरे से अपना लंड अंदर डाला। इस बार दर्द कम था। राधा ने आह भरते हुए उसे अंदर ले लिया। रमेश ने लय बनाई—धीमे-धीमे गहरे धक्के। कमरे में “थप-थप” और “चप-चप” की आवाजें भर गईं।

राधा अब पूरी तरह खुल चुकी थी। “जेठजी… जोर से चोदिए… आपकी देवरानी की चूत आपकी हो गई है… आह… हाँ… और तेज…”

रमेश ने रफ्तार बढ़ा दी। वह राधा के स्तनों को दबाते हुए, उसके होंठ चूसते हुए जमकर चोद रहा था। कुछ देर बाद उसने राधा को घुटनों के बल करवाया और पीछे से डॉगी स्टाइल में घुसा। राधा के बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। राधा का पूरा शरीर हिल रहा था।

“मैं फिर झड़ने वाली हूँ… जेठजी… साथ में…”

दोनों एक साथ झड़ गए। रमेश ने राधा की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य उड़ेल दिया।

उसके बाद दोनों थककर लेट गए। राधा रमेश के सीने पर सिर रखकर बोली, “जेठजी, ये गलत है… लेकिन मुझे अच्छा लगता है। अजय भैया से कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ।”

रमेश ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा, “ये हमारा राज रहेगा। जब भी अजय शहर जाएगा, हम अपना सुख लेंगे। लेकिन सावधानी बरतना पड़ेगा।”

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जेठ की आग और देवरानी की प्यास – भाग 3

अगले कुछ हफ्तों में जेठ रमेश और देवरानी राधा के बीच मुलाकातें तेजी से बढ़ती गईं। अब राधा खुद इन गुप्त मुलाकातों की शुरुआत करने लगी थी। वह पहले से कहीं ज्यादा खुल गई थी। उसकी शर्म अब एक उत्तेजक हाव-भाव में बदल चुकी थी। अजय के शहर जाने के बाद घर की दीवारें भी उनके प्यार की गवाह बन रही थीं।

पहली मुलाकात खेत में हुई। सुबह-सुबह रमेश खेत में पानी लगाने गया था। राधा ने बहाना बनाया कि वह घास काटकर गायों के लिए ले जाएगी। खेत के बीच में पुराना मिट्टी का छोटा झोपड़ा था, जो बारिश से बचने के लिए बनाया गया था। राधा वहाँ पहुँची तो रमेश पहले से इंतजार कर रहा था।

राधा ने मुस्कुराते हुए कहा, “जेठजी, आज मैं आपको सरप्राइज देने आई हूँ।” उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। उसके गोरे स्तन ब्लाउज के अंदर से उभर रहे थे। रमेश ने उसे झोपड़े के अंदर खींच लिया। वहाँ घास का बिस्तर बिछा था। रमेश ने राधा को घास पर लिटाया और उसकी साड़ी कमर तक चढ़ा दी। राधा ने खुद अपनी पैंटी उतारकर जेठजी के लंड पर हाथ फेरा।

रमेश का मोटा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसने राधा की जाँघें फैलाकर एक ही झटके में अपनी पूरी लंबाई अंदर डाल दी। खेत की हवा और पक्षियों की चहचहाहट के बीच “थप-थप” की आवाज गूँजने लगी। राधा अपने मुँह पर हाथ रखकर दबे स्वर में चीख रही थी, “जेठजी… आज बहुत जोर से… आपकी देवरानी की चूत को फाड़ दीजिए… आह… हाँ… गहरा…”

रमेश ने उसे जमकर चोदा। खेत की मिट्टी की खुशबू और उनके पसीने की गंध मिलकर माहौल और गर्म कर रही थी। दोनों लगभग साथ ही झड़ गए। राधा ने जेठजी का वीर्य अपनी चूत में लेकर संतोष की साँस ली।

दूसरी मुलाकात रात को छत पर हुई। सुनीता सो चुकी थी। पूरा गाँव शांत था। राधा ने चुपके से छत पर चादर बिछा दी। रमेश ऊपर आया तो राधा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी। चाँदनी रात में उसका नाजुक शरीर और भी आकर्षक लग रहा था।

राधा ने इस बार पहल की। वह रमेश के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसका लंड मुँह में ले लिया। रमेश हैरान था। “राधा… तुम… आज इतनी शरारती हो गई हो?”

राधा ने जवाब में सिर्फ उसका लंड चूसना तेज कर दिया। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। रमेश के मुँह से कराह निकल गई। कुछ देर चूसने के बाद राधा खुद ऊपर चढ़ गई और रमेश के लंड पर बैठकर चुदाई शुरू कर दी। वह अपने कूल्हे ऊपर-नीचे करके तेजी से उछल रही थी। उसके स्तन हिल रहे थे। रमेश नीचे लेटे-लेटे उन्हें मसल रहा था।

“जेठजी… आपका लंड मेरी चूत में कितना अच्छा लगता है… मैं रोज चाहती हूँ…” राधा हाँफते हुए बोली।

रात के अंधेरे में दोनों कई बार झड़ गए। राधा की चूत से वीर्य और अपनी चूड़ियों की झनकार की आवाज छत पर गूँज रही थी।

तीसरी मुलाकात दिन में घर के अंदर हुई। दिन के समय सुनीता दवा खाकर सो रही थी। राधा ने रमेश को इशारा किया। दोनों रसोई के पीछे वाले छोटे स्टोर रूम में घुस गए। जगह बहुत कम थी, इसलिए दोनों खड़े-खड़े ही करने लगे।

रमेश ने राधा को दीवार से सटाकर पीछे से चोदा। राधा ने मुंह दीवार पर टिका रखा था ताकि आवाज न निकले। रमेश ने उसकी चूत में लंड घुसाते हुए उसके बाल खींचे और कान में फुसफुसाया, “मेरी रंडी देवरानी… कितनी टाइट चूत है तेरी… आज भी कुंवारी जैसी लगती है।”

राधा ने दबे स्वर में कहा, “जी… मैं आपकी रंडी हूँ जेठजी… जब चाहो चोद लो… मेरी चूत हमेशा आपके लिए गीली रहती है…”

इस बार चुदाई बहुत तेज और छोटी रही। दोनों जल्दी झड़ गए क्योंकि सुनीता के उठने का खतरा था। राधा की जाँघों पर वीर्य की धार बह रही थी। उसने जल्दी से साड़ी ठीक की और बाहर निकल गई।

इन मुलाकातों से राधा पूरी तरह बदल चुकी थी। वह अब जेठजी को देखते ही अपनी चूत में गर्माहट महसूस करने लगी थी। कभी-कभी वह रमेश को दिन में भी इशारा कर देती — जैसे आँख मारना, पल्लू सरकाना या उसके पास से गुजरते हुए छू जाना।

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पति बहार काम से थे जेठ जी ने रात को जमकर चोदा

अजय इस बार काम के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ था। वह पूरे पाँच दिन बाहर रहने वाला था। घर में सिर्फ जेठ रमेश, सुनीता और राधा थे। सुनीता की तबीयत पिछले कुछ दिनों से और खराब थी, इसलिए वह शाम को ही दवा खाकर सो जाती थी। राधा को पता था कि ये पाँच दिन उसके लिए खास होने वाले हैं।

उस दिन शाम को राधा ने खास तैयारी की। उसने अपनी सबसे पतली और पारदर्शी लाल साड़ी पहनी, जिसमें उसका गोरा शरीर झलकता था। ब्लाउज भी बहुत कसा हुआ था, जिससे उसके स्तन और भी उभरकर दिख रहे थे। उसने हल्का-सा काजल लगाया और बाल खुले छोड़ दिए।

रात के नौ बजे थे। सुनीता गहरी नींद में सो चुकी थी। राधा ने रसोई साफ करके जेठजी के कमरे की ओर इशारा किया। रमेश समझ गया। उसने दरवाजा बंद किया और राधा को देखते ही उसकी कमर पकड़ ली।

“आज तो मेरी देवरानी पूरी रंडी बनकर आई है,” रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा और राधा को जोर से चूम लिया।

राधा ने भी उसकी गर्दन में बाहें डाल दीं। “जेठजी… पति जी पाँच दिन के लिए गए हैं… आज रात पूरी तरह आपकी हूँ… जितना मन करे चोदिए… मेरी कुंवारी चूत अब आपकी हो चुकी है।”

रमेश ने राधा को बिस्तर पर धकेल दिया। उसने राधा की साड़ी का पल्लू झटके से खींचा। ब्लाउज के हुक तोड़े और दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। वह एक-एक करके दोनों स्तनों को चूसने और काटने लगा। राधा कराह रही थी, “आह… जेठजी… काटिए… दर्द के साथ मज़ा आता है…”

रमेश ने राधा की साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह उतार दिया। राधा अब सिर्फ पतली सी लाल पैंटी में थी, जो पहले से ही भीग चुकी थी। रमेश ने पैंटी भी उतार दी और राधा की चूत को देखा — गुलाबी, गीली और पूरी तरह तैयार। उसने जीभ से चाटना शुरू किया। राधा ने अपने दोनों हाथों से रमेश का सिर दबाया और जाँघें फैला दी।

“जेठजी… आपकी जीभ से मेरी चूत पागल हो रही है… अंदर डालिए… अपनी उँगलियाँ…”

रमेश ने दो उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। राधा झड़ गई। उसका पानी रमेश के मुँह पर आ गया।

अब रमेश ने अपना मोटा, खड़ा लंड निकाला। राधा ने लेटे-लेटे उसे मुँह में ले लिया और अच्छे से चूसा। रमेश का लंड राधा के थूक से चमक रहा था।

फिर रमेश ने राधा को चारों खाने चित किया, जाँघें कंधों पर रखीं और एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया।

“आआह… जेठजी… बहुत गहरा… फाड़ दीजिए मेरी चूत…” राधा चीख पड़ी।

रमेश ने रफ्तार तेज कर दी। पूरे जोर से धक्के लगा रहा था। कमरे में चुदाई की जोरदार आवाजें गूँज रही थीं — “पच-पच… थप-थप…”. राधा के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। रमेश उन्हें मसलता हुआ लगातार चोद रहा था।

कुछ देर बाद उसने राधा को घुटनों के बल करवाया और पीछे से डॉगी स्टाइल में घुसा। बाल खींचकर, कमर पकड़कर जमकर चोदने लगा।

“मेरी रंडी देवरानी… तेरी चूत बहुत टाइट है… आज पूरी रात चोदूँगा…”

राधा चिल्ला रही थी, “हाँ जेठजी… चोदिए… और जोर से… मैं आपकी हूँ… अजय भैया की नहीं… आपकी देवरानी की चूत सिर्फ जेठ के लंड के लिए बनी है… आह… हाँ… मैं फिर झड़ रही हूँ…”

राधा लगातार तीन बार झड़ चुकी थी। रमेश ने पोजीशन बदली — अब वह राधा को अपने ऊपर बिठाकर चोद रहा था। राधा खुद ऊपर-नीचे कूद रही थी। उसके स्तन रमेश के मुँह के पास थे। रमेश उन्हें चूस रहा था।

आखिरकार रात के करीब दो बजे रमेश ने राधा की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य उड़ेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से चिपटकर लेट गए। राधा रमेश के सीने पर सिर रखे हुए बोली, “जेठजी… आज आपने मुझे स्वर्ग पहुँचा दिया… पाँच दिन हैं… रोज ऐसी ही चुदाई चाहिए।”

रमेश ने मुस्कुराते हुए उसके गाल चूमे, “हाँ मेरी जान… ये पाँच दिन हमारा हनीमून है।”

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