32 साल की आंटी ने 21 साल के युवक से बाथरूम में जमकर चुदाई कराई
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मैं रोहन, 21 साल का कॉलेज स्टूडेंट। शहर में पढ़ाई के लिए आया था और एक घर में PG का कमरा ले लिया था। घर की मालकिन थीं सीमा आंटी — उम्र 32 साल, बेहद खूबसूरत, गोरी चमड़ी, भरी-भरी काया। उनके पति ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे।
शुरू से ही आंटी की तरफ मेरा ध्यान चला गया। रोज शाम को जब वे नहाकर बाहर आतीं, तो सिर्फ एक तौलिया कमर के नीचे लपेटे हुए होतीं। पानी की बूंदें उनके गोरे और भारी स्तनों पर टपकती रहतीं, गीले बाल कंधों पर चिपके हुए। तौलिया थोड़ा छोटा होने की वजह से उनकी मोटी जांघें और गांड का ऊपरी हिस्सा साफ दिख जाता। मैं चुपके से देखता और रात को उनके बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करता। कई बार खिड़की से झांकने की कोशिश भी करता, लेकिन पकड़े जाने का डर रहता।
सस्पेंस की असली शुरुआत उस शाम हुई जब बारिश बहुत तेज हो रही थी। मैं भीगकर घर लौटा। आंटी ने कहा, “रोहन, नहा लो वरना सर्दी लग जाएगी।” मैं बाथरूम की तरफ गया। दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर से पानी की आवाज आ रही थी। मैंने दस्तक दी।
आंटी की आवाज आई — “अंदर आ जाओ रोहन, दरवाजा खुला है। मुझे तौलिया दे दो, मैं भूल गई।”
मैं अंदर घुसा। आंटी शॉवर के नीचे खड़ी थीं। पानी उनके शरीर पर बह रहा था। जैसे ही मैं तौलिया उठाने लगा, आंटी ने मुड़कर देखा। पानी की वजह से उनका पूरा शरीर नंगा दिख रहा था — बड़े-बड़े स्तन, गीले और खड़े निप्पल, पतली कमर और चमकदार चूत। आंटी ने तौलिया नहीं लिया, बल्कि मुस्कुराते हुए कहा, “रोहन… तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?”
मैं घबरा गया। “आंटी… वो… तौलिया…”
आंटी ने शॉवर बंद किया लेकिन पानी की बूंदें अभी भी उनके शरीर से टपक रही थीं। उन्होंने तौलिया उठाया लेकिन कमर के नीचे लपेटने की बजाय सिर्फ सामने से पकड़ लिया। उनके स्तन और चूत का ज्यादातर हिस्सा अभी भी नंगा था।
“रोहन, मैं जानती हूं तुम रोज मुझे नहाते हुए देखने की कोशिश करते हो। खिड़की से झांकते हो ना?” आंटी ने सीधा सवाल किया।
मैं शर्मा गया। “आंटी… sorry…”
आंटी हंस पड़ीं। “Sorry की क्या बात? तुम्हारी उम्र है। मैं भी तो 32 साल की औरत हूं। पति महीनों बाहर रहते हैं। नहाते वक्त कभी-कभी मुझे भी तुम्हारा ख्याल आता है।”
उन्होंने तौलिया और नीचे गिरा दिया। अब वे पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थीं। पानी की बूंदें उनके स्तनों से टपककर चूत तक जा रही थीं।
“आज बारिश है… बाथरूम में अकेले मत जाने दो। अंदर आ जाओ।” आंटी ने कहा और दरवाजा बंद करके ताला लगा दिया।
मैं अंदर चला गया। आंटी ने शॉवर फिर से ऑन कर दिया। गुनगुना पानी दोनों के शरीर पर गिरने लगा। आंटी मेरे करीब आ गईं। उनके गीले स्तन मेरी टी-शर्ट से छू गए।
“रोहन… तुम्हारा लंड खड़ा हो रहा है ना?” आंटी ने मेरी पैंट पर हाथ रखा।
“आंटी… ये गलत है…”
“गलत क्या है? दोनों अकेले हैं। बारिश हो रही है। बाथरूम में कोई नहीं आएगा।” आंटी ने मेरे कान में फुसफुसाया। “आज हम दोनों यहीं अपनी प्यास बुझाते हैं।”
आंटी ने मेरी टी-शर्ट गीली होने के बावजूद ऊपर खींचना शुरू किया। पानी दोनों के शरीर पर बह रहा था। आंटी के गीले बाल मेरे चेहरे पर लग रहे थे। उन्होंने मेरी पैंट का बटन खोल दिया।
अब हम दोनों बाथरूम में अकेले, पानी के नीचे, नंगे होने वाले थे। सेक्स की शुरुआत होने वाली थी।
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बाथरूम में स्टैंडिंग डॉगी चुदाई
शॉवर का पानी दोनों के शरीर पर बह रहा था। आंटी पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थीं। पानी की बूंदें उनके भारी स्तनों से टपककर चमकदार चूत तक जा रही थीं।
आंटी ने मुझे करीब खींचा और फुसफुसाई, “रोहन… पहले अपना लंड मेरे मुंह में डालो।”
ब्लोजॉब की डिटेल (शॉवर के नीचे):
आंटी घुटनों के बल बैठ गईं। पानी उनके सिर पर गिर रहा था। उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवीयर को पूरी तरह नीचे खींच दिया। मेरा लंड छलांग मारकर बाहर आ गया — सख्त, मोटा और पानी से भीगा हुआ।
आंटी ने लंड को दोनों हाथों से पकड़ा और पहले सिरे पर जीभ फेरा। “उम्म्म…” फिर उन्होंने पूरा लंड मुंह में ले लिया। पानी उनके मुंह और मेरे लंड पर गिर रहा था। वे जोर से चूसने लगीं। जीभ लंड के नीचे घुमा रही थीं, गाल अंदर खींचकर सक्शन दे रही थीं। लार और पानी मिलकर उनके ठोड़ी से टपक रहा था।
“रोहन… तेरा लंड… कितना मोटा है…” आंटी ने कहा और फिर गले तक ले गईं। “गग… गग…” की आवाज पानी की आवाज में दब रही थी। वे आँखें बंद करके चूस रही थीं, कभी-कभी ऊपर देखकर मुस्कुरातीं।
मैं दीवार से टेक लगाए खड़ा था। “आंटी… क्या कर रही हो… मेरा लंड फट जाएगा…” मेरे मुंह से निकल रहा था।
आंटी ने लंड को मुंह से निकाला, लार टपक रही थी। “अब पीछे से चोदो मुझे…”
स्टैंडिंग डॉगी चुदाई की पूरी डिटेल:
आंटी मुड़ गईं। उन्होंने दोनों हाथ दीवार पर रख दिए, कमर थोड़ी झुकाई और गांड पीछे की तरफ निकाल दी। पानी उनकी पीठ और मोटी गांड पर बह रहा था। चूत पूरी तरह गीली और फूली हुई थी।
मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। एक हाथ से उनकी गीली कमर पकड़ी, दूसरे हाथ से लंड को पकड़कर उनकी चूत के होठों पर रगड़ा। फिर जोर का धक्का मारा।
लंड का सिरा अंदर घुसा। “आह्ह्ह्ह… रोहन…” आंटी चीख पड़ीं।
मैंने दूसरा धक्का लगाया। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। चूत बहुत टाइट और गर्म थी। पानी के कारण और भी फिसलन भरी हो गई थी।
जोरदार धक्के:
मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। “थप-थप-थप!” की तेज आवाज पानी की आवाज के साथ मिलकर गूंज रही थी। लंड पूरी तरह बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर घुसता। आंटी की गांड हिल रही थी। पानी उनकी पीठ से बहकर मेरे पेट पर टकरा रहा था।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, मुंह खुला, “आह्ह्ह… आह्ह्ह… रोहन… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… उउउउम्म्म… तेरे लंड ने मेरी चूत को भर दिया…” वे बार-बार चीख रही थीं। कभी-कभी एक हाथ पीछे लाकर मेरी जांघ पकड़ लेतीं। पानी उनके बालों से बहकर स्तनों पर जा रहा था। शरीर कांप रहा था।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं उनकी गीली कमर कसकर पकड़े हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। “आंटी… आपकी चूत… पानी में भी इतनी गर्म और टाइट है… आह्ह्ह…” मेरे हाथ उनकी मोटी गांड पर फिसल रहे थे। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके स्तन पकड़ लिए और निप्पल दबाने लगा। पानी दोनों के शरीर को और ज्यादा गर्म और फिसलन भरा बना रहा था।
मैं और तेज हो गया। लंड उनकी चूत में घुसते समय जोर का झटका लग रहा था। आंटी की चूत लंड को कसकर पकड़ रही थी।
“आह्हhhhhhhhh रोहन… मैं झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह… तेरे लंड से… आह्ह्ह्ह!” आंटी का शरीर जोर से कांपा। चूत ने लंड को कस लिया। गर्म रस निकला और पानी के साथ बहने लगा।
मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “आंटी… मैं भी… आह्ह्ह्ह!” लंड फड़का और अंदर ही गर्म वीर्य छूटने लगा। आंटी ने पीछे धक्का दिया ताकि पूरा वीर्य अंदर चला जाए। कुछ वीर्य बाहर निकलकर पानी के साथ बह गया।
हम दोनों वहीं खड़े रहे, लंड अभी भी अंदर, पानी दोनों के शरीर पर बह रहा था। आंटी ने पीछे मुड़कर मुझे चूमा।
“रोहन… बाथरूम वाली चुदाई… सबसे गंदी और मजेदार थी…”
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अगले दिन सुबह टब में लंबी और धीमी चुदाई
रात भर की बाथरूम वाली चुदाई के बाद हम दोनों थककर सो गए थे। सुबह करीब 7 बजे आंटी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया।
“रोहन… उठो। चलो, सुबह-सुबह साथ में नहा लेते हैं।” आंटी की आवाज नरम और लुभावनी थी।
मैं उठा और उनके साथ बाथरूम चला गया। आंटी ने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। उन्होंने टब में गुनगुना पानी भरना शुरू कर दिया। भाप पूरे बाथरूम में फैलने लगी।
आंटी ने अपना नाइटगाउन उतार दिया। वे पूरी तरह नंगी हो गईं। मैंने भी अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स उतार दिए। अब हम दोनों नंगे थे। आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और टब में उतर गईं। मैं भी उनके पीछे टब में चला गया।
पानी गुनगुना था। आंटी मेरे सामने बैठ गईं, मेरी गोद में आ गईं। उनके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। पानी हमारे शरीर को ढक रहा था।
टब में लंबी और धीमी चुदाई की पूरी डिटेल:
आंटी ने मेरे लंड को हाथ में लिया और धीरे से ऊपर-नीचे हिलाया। पानी के अंदर लंड धीरे-धीरे खड़ा हो गया। फिर आंटी ने उठकर अपने घुटने मेरे दोनों तरफ रखे और मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा।
वे बहुत धीरे से नीचे बैठीं। लंड का सिरा उनकी चूत में घुसा। “उम्म्म…” आंटी ने आँखें बंद करके धीरे से सांस ली।
वे और नीचे बैठीं। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। चूत गर्म और नरम थी। पानी के अंदर लंड पूरी तरह अंदर था।
आंटी ने मेरी आँखों में देखते हुए बहुत धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होना शुरू किया।
हर बार जब वे नीचे बैठतीं, लंड गहराई तक जाता। फिर वे धीरे से ऊपर उठतीं। पानी हल्का-हल्का छलक रहा था। कोई जल्दबाजी नहीं थी। सिर्फ धीमी, गहरी और लंबी चुदाई।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं। वे धीरे-धीरे सांस ले रही थीं। “रोहन… धीरे… और गहरा… उउउम्म्म…” उनके होंठ कभी-कभी काँपते। कभी-कभी वे आगे झुककर मेरे होंठों को चूम लेतीं। पानी उनकी छाती पर लहरा रहा था। उनके स्तन पानी में डूबे-उभरे हो रहे थे। आँखों में धीमी लेकिन गहरी खुशी थी।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं आंटी को पकड़े हुए धीरे-धीरे ऊपर से धक्के लगा रहा था। “आंटी… आपकी चूत… इतनी गर्म और नरम है… पानी में भी…” मैं उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए था। कभी-कभी उनके गीले बालों को पीछे करता और उनके गले पर किस करता। लंड उनकी चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ मुझे गहरी संतुष्टि मिल रही थी।
आंटी ने मेरे कंधों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई, लेकिन फिर भी बहुत धीमी रखी। लंड पूरी गहराई तक जाता और फिर बाहर आता। चूत लंड को कसकर पकड़ रही थी। पानी में लहरें बन रही थीं।
“रोहन… आज सुबह… बहुत अच्छा लग रहा है…” आंटी ने मेरे कान में फुसफुसाया।
हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए धीरे-धीरे चुदाई कर रहे थे। कभी-कभी आंटी रुक जातीं, लंड पूरा अंदर रखतीं और मेरे होंठ चूमतीं। फिर फिर से धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगतीं।
लंबे समय तक यही सिलसिला चला। धीमी चुदाई से दोनों की सांसें भारी हो गई थीं। आंटी का शरीर हल्का-हल्का काँपने लगा।
“रोहन… मैं झड़ने वाली हूं… धीरे… उउउम्म्म…” आंटी ने मेरे कंधे कसकर पकड़ लिए। चूत ने लंड को और कस लिया। गर्म रस निकला और पानी में घुल गया।
मैं भी धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करते हुए झड़ गया। “आंटी… मैं भी…” वीर्य उनकी चूत में छूटा। आंटी ने लंड को पूरा अंदर रखा और मेरे ऊपर लेट गईं। पानी में हम दोनों गले मिले हुए थे।
आंटी ने मेरे गाल पर धीरे से किस किया। “रोहन… ये वाली चुदाई… सबसे प्यारी थी…”
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अंकल दो दिन बाद लौटने वाले थे, इसलिए पूरी रात बाथरूम और बेडरूम में चुदाई
अंकल दो दिन बाद लौटने वाले थे। आंटी को पता था कि अब समय बहुत कम बचा है। उसी शाम से उन्होंने फैसला कर लिया — पूरी रात मुझे चोदना और चुदवाना है।
रात 10 बजे के आसपास आंटी ने मुझे अपने बेडरूम में बुलाया।
“रोहन, आज से कल रात तक… हम दोनों रुकेंगे नहीं। अंकल दो दिन बाद आएंगे। आज पूरी रात तू मुझे चोदेगा।” आंटी ने सीधा कहा।
पहला राउंड — बेडरूम में जोरदार मिशनरी (रात 10:30 बजे)
आंटी ने मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया। दोनों पूरी तरह नंगे थे। आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं, लेकिन इस बार उन्होंने मुझे नीचे लिटाकर खुद मेरे ऊपर बैठने की बजाय मुझे ऊपर आने दिया।
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। आंटी ने अपने दोनों पैर फैला दिए। मैंने लंड को उनकी चूत पर रखा और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया।
“आह्हhhhh… रोहन… आज रात तू मुझे फाड़ देना…” आंटी चीख पड़ीं।
मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। बिस्तर हिल रहा था। आंटी के स्तन उछल रहे थे। मैं उनके दोनों पैर अपने कंधों पर रखकर गहराई से चोद रहा था।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, मुंह खुला, “आह्ह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… उउउम्म्म…”
मेरे एक्सप्रेशन: “आंटी… आज रात मैं आपको नहीं छोड़ूंगा…” मैं उनकी कमर पकड़े जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।
पहला राउंड 15-20 मिनट चला। आंटी दो बार झड़ चुकी थीं। मैंने अंदर ही वीर्य छोड़ा।
दूसरा राउंड — बाथरूम में स्टैंडिंग (रात 12 बजे)
थोड़ी देर आराम करने के बाद आंटी ने मुझे बाथरूम खींच लिया। शॉवर ऑन किया। पानी दोनों पर गिरने लगा।
आंटी मुड़ गईं, दीवार पर हाथ रखा और गांड पीछे निकाली। “पीछे से चोदो मुझे… जोर से…”
मैंने लंड अंदर घुसाया और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। पानी की आवाज और चूत की गीली आवाज मिल रही थी। आंटी चीख-चीखकर बोल रही थीं — “आह्ह्ह रोहन… और जोर से… मेरी गांड मारो… चूत फाड़ दो…”
मैं उनकी गीली कमर पकड़े हुए जोर-जोर से चोद रहा था। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। आंटी तीन बार झड़ चुकी थीं जब तक मैंने दूसरी बार अंदर वीर्य नहीं छोड़ा।
तीसरा राउंड — बेडरूम में काउगर्ल + डॉगी (रात 2 बजे)
बाथरूम से लौटकर आंटी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं — काउगर्ल। इस बार वे बहुत तेज ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनके स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे।
“आह्ह्ह… रोहन… तेरा लंड… मेरी चूत में… कितना अच्छा लग रहा है…”
फिर आंटी ने पोजीशन बदली। वे घुटनों के बल हो गईं — डॉगी स्टाइल। मैं पीछे से चोदने लगा। उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।
आंटी चीख रही थीं — “आह्ह्ह… और जोर से… मेरी गांड लाल कर दो… चोद मुझे…”
इस राउंड में आंटी चार बार झड़ चुकी थीं। मैंने तीसरी बार वीर्य छोड़ा।
चौथा राउंड — बाथरूम में टब में धीमी चुदाई (सुबह 4 बजे)
थक चुके थे, लेकिन आंटी ने फिर बाथरूम बुलाया। टब में गुनगुना पानी भरा। हम दोनों टब में लेट गए।
इस बार चुदाई बहुत धीमी और गहरी थी। आंटी मेरे ऊपर लेटी हुई थीं। लंड अंदर था। हम धीरे-धीरे हिल रहे थे। पानी हल्का-हल्का छलक रहा था।
“रोहन… आखिरी दो दिन… मुझे इतना चोदना कि याद रखूं…” आंटी ने मेरे होंठ चूमते हुए कहा।
हम दोनों धीरे-धीरे झड़ गए।
पूरी रात का हिसाब:
- 4 बड़े राउंड
- बाथरूम में 2 बार
- बेडरूम में 2 बार
- आंटी कम से कम 10 बार झड़ चुकी थीं
- मैं 4 बार झड़ चुका था
सुबह 6 बजे जब हम दोनों थककर बिस्तर पर लेटे थे, आंटी ने मेरे सीने पर सिर रखा और कहा — “रोहन… अंकल कल शाम को आ जाएंगे। आज रात भी हमारी आखिरी रात है…”
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आखिरी रात: आंटी का पूरा कंट्रोल + गांड चुदाई
अंकल कल शाम को लौटने वाले थे। आंटी को पता था कि ये हमारी आखिरी पूरी रात है।
रात 9 बजे आंटी ने मुझे बेडरूम में बुलाया। उन्होंने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया।
“रोहन, आज रात तू मेरा है। मैं जो कहूंगी, वही करेगा। कोई मना नहीं।” आंटी ने सख्त लेकिन कामुक आवाज में कहा।
आंटी का पूरा कंट्रोल (पहला राउंड — बेडरूम)
आंटी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं। पहले तो उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लेकर धीरे से हिलाया, फिर जोर से चूसने लगीं।
“आज रात तेरा लंड सिर्फ मेरा है।”
आंटी ने मेरे ऊपर बैठकर काउगर्ल में चोदवाना शुरू किया। वे बहुत तेज और जोरदार ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनके स्तन उछल रहे थे।
“आह्ह्ह… रोहन… आज रात तू मुझे इतना चोद कि कल याद आए…”
वे मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख रही थीं। मैं उनके स्तन दबा रहा था और वे जोर-जोर से राइड कर रही थीं।
आंटी दो बार झड़ चुकी थीं जब तक मैंने पहली बार अंदर वीर्य छोड़ा।
दूसरा राउंड — जोरदार डॉगी + मिशनरी
आंटी ने मुझे उठाया और खुद घुटनों के बल हो गईं। “पीछे से जोर से चोदो मुझे।”
मैंने लंड अंदर घुसाया और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी की मोटी गांड हिल रही थी। मैं उनकी कमर पकड़े हुए जोर-जोर से चोद रहा था।
“आह्ह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… उउउम्म्म… रोहन… आज रात तू मुझे मार डाल…” आंटी चीख रही थीं।
फिर आंटी ने पोजीशन बदली। वे पीठ के बल लेट गईं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। उनके दोनों पैर मेरे कंधों पर रखकर गहराई से चोदने लगा।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें आधी बंद, मुंह खुला, “आह्ह्ह… रोहन… आज रात तू मेरा राजा है… चोद मुझे… फाड़ दे मेरी चूत को…”
मेरे एक्सप्रेशन: “आंटी… आपकी चूत… आज रात कितनी गर्म है… मैं आपको नहीं छोड़ूंगा…”
इस राउंड में आंटी तीन बार झड़ चुकी थीं।
तीसरा राउंड — गांड चुदाई (आंटी का सबसे बड़ा सरप्राइज)
थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझे रोका। वे उठकर अलमारी से एक छोटी सी बोतल (लubricant) लेकर आईं।
“रोहन… आज रात आखिरी है। मैं चाहती हूं कि तू मेरी गांड भी चोदे।”
आंटी ने खुद चारों तरफ होकर गांड ऊपर उठा दी। “पहले धीरे से… फिर जोर से।”
मैंने लubricant लगाया। पहले एक उंगली डाली, फिर दो। आंटी सांस ले रही थीं।
“अब लंड डालो… धीरे से…”
मैंने लंड को उनकी गांड पर रखा और बहुत धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। आंटी ने दांत काट लिए।
“आह्ह्ह… रोहन… धीरे… उउउम्म्म…”
मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर डाला। गांड बहुत टाइट थी। जब आधा लंड अंदर गया तो आंटी ने कहा, “अब जोर से… आज रात तू मुझे बर्बाद कर दे।”
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी की गांड लाल हो रही थी। वे चीख रही थीं —
“आह्ह्ह… रोहन… मेरी गांड फाड़ दी… उउउम्म्म… और जोर से… आज रात तू मुझे अपनी बना ले…”
मैं उनकी कमर पकड़े हुए जोर-जोर से चोद रहा था। पानी जैसा पसीना दोनों के शरीर पर था।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें आंसू से भरी, मुंह खुला, “आह्ह्ह… रोहन… गांड में… इतना मोटा लंड… मैं पागल हो जाऊंगी…”
मेरे एक्सप्रेशन: “आंटी… आपकी गांड… कितनी टाइट है… आज रात मैं आपको पूरी तरह ले रहा हूं…”
आंटी दो बार झड़ चुकी थीं जब तक मैंने उनकी गांड में वीर्य नहीं छोड़ा।
रात का अंत (सुबह 5 बजे)
हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। आंटी मेरे सीने पर लेटी हुई थीं।
“रोहन… कल शाम अंकल आ जाएंगे। आज रात… तूने मुझे सच में बर्बाद कर दिया।” आंटी ने धीरे से कहा।
मैंने उन्हें गले लगा लिया।
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अंकल के लौटने के बाद जोखिम भरी चुपके से चुदाई
अंकल तीन दिन पहले लौट चुके थे। घर में अब नॉर्मल माहौल था। दिन में आंटी सामान्य व्यवहार करती थीं, लेकिन रात को उनकी नजरें मेरी तरफ कुछ और कहती थीं।
तीसरे दिन रात 1 बजे मेरे मोबाइल पर मैसेज आया:
आंटी: “अंकल सो चुके हैं। 5 मिनट में मेरे कमरे के बाहर आ जाना। दरवाजा खुला छोड़ूंगी। चुपचाप आना।”
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
पहला जोखिम भरा राउंड — बेडरूम में (रात 1:10 बजे)
मैं चुपके से आंटी के बेडरूम में घुसा। अंकल पास के कमरे में सो रहे थे। दरवाजा बंद करते ही आंटी ने मुझे दीवार से लगा लिया और जोर से चूम लिया।
“रोहन… बहुत दिनों बाद तेरा लंड चाहिए था…” आंटी ने कान में फुसफुसाया।
आंटी ने तुरंत अपनी नाइटी ऊपर खींच ली और पैंटी नीचे उतार दी। मैंने भी अपनी पैंट नीचे खींची। लंड पहले से खड़ा था।
आंटी ने मुड़कर दीवार पर हाथ रखा। “जल्दी से पीछे से चोदो… और चुपचाप…”
मैंने लंड अंदर घुसाया और जोर-जोर से लेकिन बिना आवाज किए धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी ने अपना मुंह तकिये में दबा लिया था ताकि moans न निकलें।
“उउउम्म्म… रोहन… और जोर से… लेकिन चुपचाप…” आंटी फुसफुसा रही थीं।
हर धक्के के साथ बिस्तर हल्का हिल रहा था। आंटी की चूत बहुत गीली थी। मैं उनकी कमर पकड़े हुए तेजी से चोद रहा था।
आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें डर और एक्साइटमेंट से चमक रही थीं। मुंह तकिये में दबाया हुआ, लेकिन होंठ काँप रहे थे। कभी-कभी वे पीछे मुड़कर मुझे देखतीं — “जल्दी… जल्दी झड़ जा… अंकल उठ सकते हैं…”
मेरे एक्सप्रेशन: दिल जोर से धड़क रहा था। जोखिम का मजा मुझे और ज्यादा हॉट कर रहा था। “आंटी… आपकी चूत… आज और ज्यादा टाइट लग रही है…” मैं भी फुसफुसा रहा था।
10 मिनट में ही आंटी झड़ गईं। मैंने भी अंदर वीर्य छोड़ा।
दूसरा जोखिम भरा राउंड — बाथरूम में (रात 2 बजे)
आंटी ने मुझे बाथरूम में बुलाया। अंकल अभी भी सो रहे थे।
बाथरूम में आंटी ने शॉवर ऑन नहीं किया। सिर्फ लाइट जलाई।
“खड़े-खड़े चोदो मुझे… जल्दी।”
आंटी दीवार से लग गईं। मैंने उनके पीछे से लंड अंदर डाला और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
आंटी ने एक हाथ से अपना मुंह बंद कर लिया था। दूसरा हाथ दीवार पर था।
“आह्ह्ह… रोहन… आज रात तू मुझे मार डालेगा… उउउम्म्म…” वे बहुत धीमी आवाज में चीख रही थीं।
मैं उनकी गांड पकड़े हुए जोर-जोर से चोद रहा था। हर धक्के के साथ डर भी लग रहा था कि कहीं अंकल उठ न जाएं।
आंटी दो बार झड़ चुकी थीं जब तक मैंने दूसरी बार अंदर वीर्य नहीं छोड़ा।
रात का अंत
दोनों राउंड खत्म होने के बाद आंटी ने मुझे जल्दी से अपने कमरे से बाहर निकाल दिया।
“कल फिर आना… लेकिन बहुत सावधानी से।” आंटी ने आखिरी बार मुझे चूमा।
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