सेक्सी प्रिया आंटी की डोगी स्टाइल में चोदा | aunty doggy style story

सेक्सी आंटी की डोगी स्टाइल चुदाई – बारिश वाली रात का सस्पेंस

aunty doggy style story

मेरा नाम राहुल है। उम्र 23 साल। मैं मुंबई के अंधेरी में एक हाईसोसायटी अपार्टमेंट के 7वें फ्लोर पर 2BHK फ्लैट में अकेला रहता हूं। जॉब करता हूं एक प्राइवेट कंपनी में। मेरे बगल वाले फ्लैट में प्रिया आंटी रहती थीं। प्रिया आंटी की उम्र 37 साल थी, लेकिन शरीर ऐसा कि कोई भी 25-26 साल की लड़की उनसे हार जाए। गोरी-चिट्टी चमड़ी, 36D साइज की भारी-भारी छातियां, पतली कमर और सबसे खतरनाक उनकी मोटी, गोल, उछलती हुई गांड। पति श्री शर्मा जी बड़े बिजनेसमैन थे – ज्यादातर समय दुबई, सिंगापुर या लंदन में। महीने में सिर्फ 8-10 दिन घर आते। बच्चे दोनों बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे।

शुरू से ही मुझे प्रिया आंटी पर दीवानगी थी। जब भी वो मॉर्निंग वॉक के लिए टाइट लेगिंग्स + क्रॉप टॉप में निकलतीं, उनकी गांड लहराती हुई, छातियां उछलती हुई… मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता। कई बार बालकनी में खड़े होकर मैं उन्हें देखता रहता। एक बार आंटी ने मुझे सीधा देख लिया था। उन्होंने कुछ नहीं बोला, बस हल्का सा मुस्कुरा दी थीं। उस दिन से मेरे मन में सस्पेंस था – क्या आंटी भी मुझे नोटिस करती हैं? क्या वो भी कुछ चाहती हैं?

एक शाम तेज मॉनसून की बारिश हो रही थी। बिजली गुल हो गई थी। पूरा बिल्डिंग अंधेरा था। मैं अकेला फ्लैट में मोबाइल की टॉर्च जलाकर बैठा था। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मैंने खोला तो प्रिया आंटी खड़ी थीं।

वो सिर्फ एक पतली सफेद सिल्क की नाइटी पहने हुई थीं। बारिश से नाइटी पूरी तरह भीग चुकी थी और उनके शरीर से चिपक गई थी। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके काले ब्रा के निशान, निप्पल्स के उभार और पैंटी का सिल्हूट साफ दिख रहा था। उनकी मोटी गांड नाइटी में पूरी तरह साफ थी। पानी की बूंदें उनके बालों से टपक रही थीं और नाइटी से चिपककर शरीर की हर कर्व दिखा रही थीं।

आंटी: (थोड़ी घबराई हुई लेकिन आँखों में कुछ और चमक) अरे राहुल बेटा… दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों लगाई? मेरे फ्लैट में बिजली नहीं आ रही और इन्वर्टर भी खराब हो गया है। पति जी तो दुबई में हैं। अकेले बहुत डर लग रहा है… क्या तुम आकर थोड़ी देर बैठोगे? या मदद करोगे?

मैं: (उनके गीले शरीर को देखकर लंड खड़ा हो चुका था) हां आंटी… बिल्कुल। अंदर आइए।

(वे अंदर आईं। नाइटी से पानी टपक रहा था। मैंने उन्हें सोफे पर बैठाया। खुद उनके सामने कुर्सी पर बैठ गया। आंटी की नाइटी जांघों तक चढ़ गई थी।)

आंटी: राहुल बेटा, तुम अब बड़े हो गए हो। जॉब कर रहे हो ना?

मैं: हां आंटी, पिछले साल से जॉब कर रहा हूं।

आंटी: अच्छा… कोई गर्लफ्रेंड है? कोई स्पेशल फ्रेंड?

मैं: नहीं आंटी, अभी नहीं बनी।

आंटी: (हंसते हुए और मेरे घुटने पर हाथ रखते हुए) क्यों बेटा? इतना तगड़ा, हैंडसम और जवान लड़का… कोई लड़की नहीं फंसाई? या शायद आंटी जैसी कोई पसंद आती है?

मैं: (शरमाते हुए) आंटी… आप मजाक कर रही हैं।

आंटी: (हाथ मेरी जांघ पर घुमाते हुए, पास झुककर) मजाक नहीं बेटा। आंटी सच बोल रही है। देखो ना… आंटी अकेली रहती है। पति महीनों नहीं आते। रातें बहुत लंबी और ठंडी लगती हैं। कभी-कभी मन करता है कि कोई जवान, तगड़ा लड़का पास हो… जो आंटी के शरीर को छुए, चूमे और अपनी ताकत से आंटी को खुश करे।

मैं: आंटी… ये गलत है ना? अगर किसी को पता चल गया… पति जी…

आंटी: (और पास आकर, उनकी भारी छातियां मेरी बांह से टकरा रही थीं, सांस मेरे चेहरे पर) कौन बताएगा बेटा? हम दोनों के बीच की बात। पति जी को कभी पता नहीं चलेगा। और अगर चला भी गया तो… मुझे परवाह नहीं। आज मैं तुम्हारी हूं। मैंने देखा है तुम मुझे कैसे देखते हो – बालकनी से, खिड़की से। आंटी को भी तुम अच्छे लगते हो। आज बारिश का मौका है… कोई नहीं आएगा।

(उन्होंने मेरे गाल पर हाथ फेरा। फिर धीरे से मेरे कान के पास फुसफुसाई।)

आंटी: राहुल… आज रात आंटी को अकेला मत छोड़ो। क्या तुम आंटी को अपनी बना लोगे? क्या तुम आंटी की तड़प मिटा दोगे? आंटी की चूत को अपना मोटा लंड दोगे? लेकिन… डोगी स्टाइल में… जैसा तुम्हें पसंद है।

मैं: (सांस फूल रही थी, लंड पैंट में तम्बू बना हुआ, दिल धड़क रहा था) आंटी… मैं… हां… लेकिन…

आंटी: शश… अब कोई शब्द नहीं। आओ मेरे साथ। आज से तुम मेरे हो।

(उन्होंने मेरे हाथ पकड़कर खींचा। उनका गीला, गर्म शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था। नाइटी से उनकी निप्पल्स मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे।)

कहानी यहीं सस्पेंस और टेंशन के चरम पर रुकती है। अब आगे क्या होता है? चुदाई शुरू होती है या और इंतजार?

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डोगी स्टाइल चुदाई

मैंने प्रिया आंटी को सोफे पर जोर से झुकाया। उनका ऊपरी शरीर सोफे के आर्मरेस्ट पर टिका हुआ था, पीठ मेरी तरफ, और मोटी-मोटी गांड पीछे की तरफ उभरकर मेरे सामने थी। अंधेरे कमरे में मैंने अपना मोबाइल निकाला और फ्लैशलाइट ऑन कर दी। अब आंटी का नंगा शरीर हल्की रोशनी में चमक रहा था – पानी से भीगी त्वचा, कमर का गहरा गड्ढा और वह खतरनाक मोटी गांड।

मैंने उनकी नाइटी को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर से ऊपर खींचा। “रिप्प!” की आवाज आई – नाइटी फट गई और उनकी कमर तक चढ़ गई। अब उनकी पूरी नंगी पीठ, पतली कमर और गोल-गोल मोटी गांड सामने थी।

फिर मैंने ब्रा के दोनों स्ट्रैप्स को उनके कंधों से नीचे खिसकाया। पीछे से हाथ डालकर ब्रा के हुक को दबाया – “क्लिक” की आवाज हुई। ब्रा ढीली हो गई। मैंने उसे उनके शरीर से खींचकर उतार दिया। उनकी भारी-भारी 36D छातियां नीचे लटक गईं, निप्पल्स सख्त और खड़े हो चुके थे। रोशनी में उनके निप्पल्स गुलाबी दिख रहे थे।

उसके बाद उनकी पैंटी की बारी आई। मैंने दोनों तरफ से पैंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे उतारना शुरू किया। पैंटी उनकी मोटी जांघों से रगड़ती हुई घुटनों तक आई, फिर मैंने उसे पूरी तरह पैरों से निकालकर सोफे के पास फेंक दिया। अब प्रिया आंटी पूरी तरह नंगी थी – सोफे पर डोगी स्टाइल में झुकी हुई। उनकी चूत के होठ गीले और चमकदार थे, और बीच में से चमकता हुआ छेद साफ दिख रहा था।

मैंने भी जल्दी से अपना टी-शर्ट उतारा, जींस का बटन खोला और नीचे खिसकाया। अंडरवियर के साथ ही मेरा मोटा 7 इंच का लंड बाहर आ गया – नसों से भरा, सिरा चमक रहा था और पहले से ही पानी टपक रहा था।

मैं उनके ठीक पीछे खड़ा हो गया। एक हाथ से उनकी पतली कमर पकड़ी, दूसरे हाथ से लंड को उनकी चूत के गीले होठों पर रगड़ने लगा। लंड उनकी चूत पर घिसता रहा।

मैं: (भारी सांस लेते हुए) आंटी… देखो तुम्हारी चूत कितनी गीली हो गई है… मेरा लंड पूरा पानी से भीग रहा है…

आंटी: (सांस फूलते हुए, पीछे मुड़कर देखते हुए) राहुल… अब मत तड़पाओ बेटा… अपना मोटा लंड घुसा दो… आंटी की चूत फाड़ दो… आह्ह…

मैंने लंड का मोटा सिरा उनकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। “आह्हhh…” दोनों की सांस एक साथ निकली। लंड धीरे-धीरे उनकी टाइट और गीली चूत में घुसने लगा। चूत की गर्म दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। पूरा लंड अंदर जाने के बाद मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ ली।

फिर शुरू किया असली चुदाई।

पहला धक्का – धीमा लेकिन गहरा। दूसरा धक्का – थोड़ा जोर से। तीसरा धक्का – पूरा जोर लगाकर।

“थप्प… थप्प… थप्प… थप्प…” की आवाज पूरे अंधेरे कमरे में गूंजने लगी। मेरी जांघें उनकी मोटी गांड से टकरा रही थीं, गांड लहरा रही थी। हर धक्के के साथ आंटी की भारी छातियां आगे-पीछे झूल रही थीं। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का चिपचिपा पानी मेरे लंड पर चमक रहा था और नीचे सोफे पर टपक रहा था।

आंटी: (जोर-जोर से चीखते हुए) आह्ह्ह… राहुल… और जोर से… मेरा लंड… गहरा… चोदो आंटी की चूत को… फाड़ दो बेटा… आह्ह ओह्ह… हाँ… ऐसे ही… गांड मारो…

उनका चेहरा सोफे की तरफ मुड़ा हुआ था। आँखें आधी बंद, मुंह पूरा खुला, जीभ बाहर निकली हुई, पसीने की बूंदें उनके माथे और गालों पर। कभी-कभी वो पीछे मुड़कर मुझे देखतीं – आँखों में पूरा lust, मुंह से निकल रहा था “जोर से… और जोर से चोदो… आंटी की चूत ले लो…” उनका शरीर काँप रहा था, गांड पीछे की तरफ धकेल रही थीं ताकि लंड और गहरा जाए।

मैं: (ग्रंट करते हुए, पसीने से भीगा हुआ) आंटी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है… लंड पूरा अंदर जा रहा है… ले लो… ले लो मेरा पूरा लंड… तुम्हारी मोटी गांड मार रहा हूं…

मैंने उनकी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा – “थप्प!” लाल निशान पड़ गया। आंटी और जोर से चीख पड़ीं। फिर मैंने उनके बाल पकड़कर पीछे खींचा। उनकी पीठ आर्क हो गई, छातियां और ज्यादा बाहर निकल आईं। अब धक्के और गहरे और तेज हो गए।

“थप्प थप्प थप्प थप्प” की रफ्तार बढ़ गई। लंड पूरी तरह अंदर जाता, फिर बाहर आता, फिर जोर से घुसता। आंटी की चूत का पानी मेरी जांघों तक बह रहा था।

आंटी: (चिल्लाते हुए) राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… और जोर से… आह्ह्ह… चोदो… चोदो मुझे… मेरी चूत में झड़ो… आह्ह ओह्ह…

मैं: (दाँत किटकिटाते हुए) आंटी… मैं भी… तुम्हारी चूत में पूरा झड़ जाऊंगा… ले लो… ले लो सारा…

आखिरकार दोनों साथ झड़े। मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा – लंड पूरा अंदर घुसा दिया और रुक गया। मेरा गर्म-गर्म पानी उनकी चूत के अंदर फूट-फूट कर निकला। आंटी का शरीर ऐंठ गया, चूत ने मेरे लंड को कस लिया जैसे निचोड़ रही हो। उनकी आँखें बंद हो गईं, मुंह खुला रहा, लंबी साँस “आह्हhh…” निकली।

मैंने लंड धीरे-धीरे बाहर निकाला। चूत से मेरा मोटा पानी और उनका पानी मिलकर बह रहा था, नीचे सोफे पर गिर रहा था। आंटी सोफे पर ढेर हो गईं, सांस फूल रही थी, शरीर पसीने से तर। मैं भी उनके पीछे बैठ गया, उनकी पीठ पर हाथ फेरता हुआ।

आंटी: (धीरे से, मुस्कुराते हुए) राहुल… तूने आंटी को सच में खुश कर दिया बेटा… इतने साल बाद इतना जोरदार चुदाई…

मैं: (उनकी गांड सहलाते हुए) आंटी… तुम्हारी चूत और गांड दोनों कमाल की हैं… मैं अभी भी खड़ा है…

(हम दोनों कुछ देर ऐसे ही सांस लेते रहे, गर्म सांसें एक-दूसरे पर पड़ रही थीं।

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पूरा लंड मुंह में ले लिया

सोफे पर चुदाई खत्म होने के बाद आंटी अभी भी सांस फूलते हुए मेरे सामने बैठ गईं। मेरी गोद में मेरा लंड अभी भी खड़ा था, चमकदार और आंटी की चूत का मोटा पानी + मेरा गर्म पानी दोनों से भीगा हुआ।

आंटी ने धीरे से मेरी जांघों पर हाथ रखा और घुटनों के बल सोफे पर बैठ गईं। उनकी भारी छातियां लटक रही थीं, निप्पल्स अभी भी सख्त। उन्होंने मेरे चेहरे की तरफ देखा – आँखों में अभी भी भूख थी।

आंटी: (फुसफुसाते हुए) राहुल… आंटी का मुँह साफ कर दो बेटा…

उन्होंने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ा। पहले तो उन्होंने लंड के सिरे पर जमी चमकदार चूत के पानी को अपनी जीभ से चाटा। फिर पूरा लंड मुंह में ले लिया। गर्म-गर्म मुँह ने मेरे लंड को पूरी तरह घेर लिया। आंटी ने आँखें ऊपर उठाकर मुझे देखा – उनकी आँखें पानी से भरी हुई थीं, लेकिन lust से चमक रही थीं।

आंटी: (मुँह में लंड लेकर) म्म्म्म… स्लर्प… स्लर्प…

उन्होंने लंड को गले तक अंदर लिया। गला अंदर तक जाने से उनकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन उन्होंने रुकना नहीं। जीभ से नीचे से ऊपर तक चाटा, फिर मेरे अंडकोष (बॉल्स) को भी मुंह में लिया और चूसा। लार उनके मुंह से निकलकर मेरे लंड और अंडों पर बह रही थी।

मैं: (सिर पीछे झुकाकर, हाथ उनके बालों में) आंटी… आह्ह… तुम्हारा मुँह कितना गर्म है… चूसो… और गहरा…

आंटी ने लंड को बाहर निकाला, लार की लंबी लाइन टूट रही थी। फिर उन्होंने लंड को दोनों हाथों से मसलते हुए फिर से मुंह में लिया। इस बार तेजी से ऊपर-नीचे करने लगीं। “ग्लुक… ग्लुक… ग्लुक…” की आवाज आ रही थी। उनकी लार मेरी जांघों तक टपक रही थी।

आंटी: (लंड को चूसते हुए) म्म्म… राहुल… तुम्हारा लंड कितना स्वादिष्ट है… आंटी की चूत का स्वाद मिला हुआ…

मैंने उनके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे से आगे-पीछे करने लगा। आंटी ने आँखें बंद कर लीं और पूरी तरह समर्पण कर दिया। 4-5 मिनट तक उन्होंने मेरे लंड को चूसा। आखिर में जब मैं फिर से झड़ने वाला था, उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और बोलीं:

आंटी: अभी नहीं… बेडरूम में जाकर पूरा अंदर डालना।

आंटी उठीं, मेरे हाथ को पकड़कर खींचा। हम दोनों नंगे ही उनके बेडरूम में चले गए। बेडरूम में भी अंधेरा था, लेकिन आंटी ने बेडसाइड टेबल पर रखी एक मोमबत्ती जला दी। हल्की रोशनी में उनका नंगा शरीर और भी सेक्सी लग रहा था।

बिस्तर पर आंटी ने मुझे लिटा दिया। फिर खुद मेरे ऊपर आ गईं। लेकिन मैंने उन्हें पलट दिया। अब आंटी बिस्तर पर लेट गईं, दोनों टाँगें खोलकर। मैं उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया।

मैंने उनकी दोनों टाँगें अपनी कंधों पर रख दीं। लंड फिर से उनकी चूत के पास ले आया। अब चूत पहले से ज्यादा गीली थी।

मैं: आंटी… अब मिशनरी में चोदता हूं… तुम्हारी आँखों में देखते हुए…

आंटी: (टाँगें फैलाते हुए) हाँ बेटा… घुसा दो… आंटी की चूत फिर से लेने को तैयार है…

मैंने लंड का सिरा उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। “आह्हhh!” दोनों की आवाज एक साथ निकली। लंड पूरा अंदर घुस गया। अब मैं उनके ऊपर झुक गया, उनकी छातियों को अपने सीने से दबाया और तेज-तेज धक्के मारने लगा।

“थप्प… थप्प… थप्प…” की आवाज बिस्तर पर गूंज रही थी। हर धक्के के साथ आंटी की छातियां मेरे सीने से रगड़ खा रही थीं। मैंने उनकी एक टाँग और ऊपर उठाई ताकि लंड और गहरा जाए।

आंटी: (मेरे कंधे में नाखून गड़ाते हुए) आह्ह… राहुल… और गहरा… मेरा लंड… चोदो मुझे… आंटी की चूत फाड़ दो… हाँ… ऐसे ही…

उनकी आँखें मेरी आँखों में थीं। मैंने झुककर उनके होठों पर जोर से किस किया। हम दोनों किस करते हुए चुदाई कर रहे थे। मेरी जीभ उनकी जीभ से लड़ रही थी। आंटी की साँस मेरे मुंह में जा रही थी।

मैं: (किस तोड़ते हुए) आंटी… तुम कितनी गर्म हो… चूत कितनी टाइट… ले लो… ले लो मेरा लंड…

मैंने उनकी टाँगें और ऊपर कीं, घुटनों को उनके सीने तक ला दिया। अब पोजीशन और गहरी हो गई। लंड उनकी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था। आंटी चीख रही थीं:

आंटी: आह्ह ओह्ह… राहुल… मर गई… इतना गहरा… चोदो… चोदो आंटी को… मैं झड़ने वाली हूं…

उनका शरीर काँपने लगा। चूत ने मेरे लंड को कस लिया। आंटी जोर से चीखीं और झड़ गईं। उनकी चूत से पानी निकलकर मेरे लंड और बिस्तर पर फैल गया।

लेकिन मैंने रुकना नहीं। मैंने और जोर से धक्के मारे। 2 मिनट बाद मैं भी झड़ गया – दूसरी बार उनकी चूत में गर्म पानी छोड़ा।

आंटी ने मुझे अपनी बाहों में कस लिया। हम दोनों पसीने से तर, सांस फूलते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे।

आंटी: (मेरे बाल सहलाते हुए) राहुल… तूने आंटी को दो बार झड़ा दिया… अब आंटी तुम्हारी है…

मैं: आंटी… अभी खत्म नहीं हुआ…

(हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, मेरे लंड अभी भी उनकी चूत में आधा अंदर था।)

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अगले दिन आंटी ने बुलाया – पूरी डिटेल वाली कहानी

पिछली रात की जोरदार चुदाई के बाद मैं अपने फ्लैट में लौट आया था। पूरा शरीर थका हुआ था, लेकिन मन अभी भी आंटी के नंगे शरीर, उनकी चूत और गांड की यादों से भरा हुआ था। सुबह 10 बजे तक मैं सोता रहा।

दोपहर 1 बजे मेरे मोबाइल पर आंटी का फोन आया।

आंटी: (फुसफुसाते हुए) राहुल… बेटा, कहाँ हो?

मैं: आंटी… घर पर ही हूं।

आंटी: आज शाम को 6 बजे मेरे घर आ जाना। पति जी दुबई से 2 दिन बाद आ रहे हैं। आज पूरा दिन और रात… हम दोनों अकेले हैं। कुछ जरूरी काम है। (आवाज में हंसी और शरारत)

मैं: (लंड खड़ा हो गया) हां आंटी… आ जाऊंगा।

आंटी: अच्छा… और हाँ, आज साड़ी पहन के तैयार रहना। आंटी को साड़ी में देखकर तेरा लंड और ज्यादा खड़ा होगा। (हंसते हुए फोन काट दिया)

मेरा दिल तेज धड़कने लगा। पूरा दिन बेचैनी में बीता। शाम 5:45 बजे मैं नहा-धोकर आंटी के फ्लैट पर पहुँच गया। घंटी बजाई।

दरवाजा खुला। आंटी सामने खड़ी थीं।

आज आंटी ने गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी। ब्लाउज टाइट था, जिसमें उनकी भारी छातियां उभर रही थीं। पेटीकोट कमर तक बंधा था। बाल खुले, लिपस्टिक लगाई हुई, और आँखों में वो ही lust भरी चमक।

आंटी: (मुस्कुराते हुए मुझे अंदर खींचते हुए) अंदर आओ बेटा… दरवाजा बंद करो।

मैंने दरवाजा बंद किया। आंटी ने तुरंत मुझे दीवार से टिकाया और जोर से किस किया। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैंने भी उनकी कमर पकड़ ली।

आंटी: (किस तोड़ते हुए) कल रात के बाद से आंटी की चूत फिर से गीली हो रही है… आज पूरा दिन तू आंटी को चोदेगा ना?

मैं: हां आंटी… आज मैं तुम्हें और जोर से चोदूंगा।

आंटी ने मेरा हाथ पकड़कर सोफे के पास ले गईं। फिर उन्होंने खुद को सोफे पर झुका दिया – ठीक उसी पोजीशन में जैसे कल थीं। लेकिन आज साड़ी पहनी हुई थी।

आंटी: आज साड़ी में ही चोदो मुझे… पहले कपड़े उतारना।

मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। सबसे पहले साड़ी का पल्लू उनके कंधे से खींचा। पल्लू गिर गया। फिर ब्लाउज के हुक खोलने लगे। एक-एक हुक खोलता गया। ब्लाउज ढीला हो गया। मैंने ब्लाउज उतार दिया। अब उनकी काली ब्रा सामने थी। ब्रा के हुक पीछे से खोले – “क्लिक”। ब्रा उतार दी। उनकी भारी छातियां लटक गईं।

फिर पेटीकोट का नाड़ा खोला। पेटीकोट नीचे गिर गया। अब आंटी सिर्फ ब्लैक पैंटी में थीं। मैंने पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर धीरे से नीचे उतारा। पैंटी उनकी मोटी जांघों से होती हुई घुटनों तक आई, फिर मैंने उसे पूरी तरह उतार दिया।

अब आंटी पूरी तरह नंगी थी – साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पेटीकोट और पैंटी सब सोफे के पास पड़े थे।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था।

आंटी ने सोफे पर झुककर अपनी मोटी गांड पीछे की तरफ बढ़ा दी।

आंटी: अब चोदो… डोगी स्टाइल में… कल रात जैसा ही जोर से…

मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। लंड को उनकी चूत पर रगड़ा। चूत पहले से ही गीली थी। एक जोरदार धक्का मारा। लंड पूरा अंदर घुस गया।

आंटी: आह्ह्ह… राहुल… हाँ… ऐसे ही…

मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ ली और तेज-तेज धक्के मारने लगा। “थप्प… थप्प… थप्प…” की आवाज पूरे फ्लैट में गूंज रही थी। आंटी की मोटी गांड लहरा रही थी। हर धक्के के साथ उनकी छातियां आगे-पीछे झूल रही थीं।

आंटी: (चीखते हुए) आह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आंटी की गांड मारो… हाँ बेटा… चोदो मुझे…

मैं: (ग्रंट करते हुए) आंटी… तुम्हारी चूत आज और ज्यादा टाइट लग रही है… ले लो… ले लो मेरा लंड…

मैंने उनकी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। आंटी और जोर से चीख पड़ीं। फिर उनके बाल पकड़कर पीछे खींचा। उनकी पीठ आर्क हो गई। अब धक्के और गहरे हो गए।

आंटी का चेहरा सोफे की तरफ था। आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर, पसीना बह रहा था। कभी-कभी वो पीछे मुड़कर मुझे देखतीं – आँखों में आंसू और lust दोनों।

आंटी: राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… और जोर से… आह्ह ओह्ह…

मैंने और तेजी से चोदा। 10 मिनट तक लगातार धक्के मारे। आखिर में आंटी जोर से चीखीं और झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी रुक नहीं सका – दूसरी बार उनकी चूत में गर्म पानी छोड़ दिया।

हम दोनों थककर सोफे पर गिर पड़े। आंटी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।

आंटी: (सांस फूलते हुए) राहुल… तूने आंटी को सच में पागल कर दिया है… अब रोज आना पड़ेगा।

मैं: आंटी… जब तक पति जी नहीं आते, मैं रोज आऊंगा।

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