रोहन की गर्लफ्रेंड स्नेहा की पहली चुदाई – सस्पेंस भरी रात
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मैं रोहन हूँ, 23 साल का लड़का। मेरी गर्लफ्रेंड स्नेहा 21 साल की है। हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और पिछले 10 महीनों से डेटिंग कर रहे हैं। शुरू में सिर्फ दोस्ती थी, फिर धीरे-धीरे प्यार हो गया। हमने बहुत किसिंग की थी, गले मिले थे, एक-दूसरे के स्तन और लंड को कपड़ों के ऊपर से छुआ था, लेकिन कभी पूरा सेक्स नहीं किया था। स्नेहा थोड़ी शर्मीली और कंजर्वेटिव फैमिली की लड़की थी, इसलिए हमेशा डरती रहती थी।
लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया।
शुक्रवार की सुबह स्नेहा ने मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज किया:
स्नेहा: रोहन, पापा-मम्मी आज सुबह 6 बजे शादी में जा रहे हैं। रविवार शाम को लौटेंगे। मतलब पूरा दो दिन घर खाली रहेगा… 😊 रोहन: सच में? तो आज शाम को आ जाऊँ? स्नेहा: हाँ… आ जाना। अकेली बहुत डर लग रहा है। रोहन: ठीक है बेबी, शाम 6 बजे आ रहा हूँ।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। क्या आज वो दिन आ गया जब हम पहली बार पूरा करेंगे? पूरा दिन मैं सोचता रहा – क्या स्नेहा तैयार होगी? क्या वो मना कर देगी? क्या दर्द होगा उसे? ये सस्पेंस मुझे अंदर से खा रहा था।
शाम को जब मैं उसके घर पहुँचा और दरवाजा खटखटाया, तो स्नेहा ने डोर खोला। वो एक टाइट ब्लैक टॉप और ब्लू जींस पहने हुए थी। टॉप का नेक थोड़ा डीप था, जिससे उसकी गोरी क्लीवेज हल्की-सी दिख रही थी। बाल खुले थे, हल्का मेकअप किया था। वो बेहद सेक्सी लग रही थी।
“आओ ना रोहन… अंदर आओ,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज में थोड़ी नर्वसनेस थी।
हम लिविंग रूम के सोफे पर बैठे। लाइट्स डिम की हुई थीं। घर में सिर्फ हम दोनों थे। सन्नाटा था।
“क्या पीओगे?” उसने पूछा। “तुम हो ना… बस यही काफी है,” मैंने flirt किया और उसका हाथ पकड़ लिया।
वो शर्मा गई। “रोहन… तुम हमेशा ऐसे ही बोलते हो।”
हम बातें करने लगे – कॉलेज, फ्रेंड्स, प्लान्स। लेकिन बीच-बीच में हमारी आँखें मिल रही थीं और साइलेंस में sexual tension बढ़ता जा रहा था। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके गाल पर किस किया।
“तुम आज बहुत खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो,” मैंने कान में फुसफुसाया।
स्नेहा ने आँखें नीची कर लीं। “थैंक्यू… तुम भी बहुत अच्छे लग रहे हो।”
फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। शुरू में धीरे-धीरे, फिर जोश के साथ। हम passionately किस कर रहे थे। उसकी साँसें तेज हो गईं। मेरी जीभ उसकी मुंह में घुस गई और वो भी अपनी जीभ से खेलने लगी।
“उम्म्म… रोहन…” वो हल्की-सी मूंगफली निकाल रही थी।
मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा। त्वचा बहुत मुलायम और गर्म थी। फिर मैंने उसके स्तनों को ऊपर से दबाया।
“आह…” उसने सिसकारी ली।
“कैसा लग रहा है बेबी?” मैंने पूछा। “बहुत अच्छा… लेकिन दिल बहुत तेज धड़क रहा है। डर भी लग रहा है,” उसने कहा।
“डरो मत। मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। अगर कुछ भी गलत लगे तो तुरंत बता देना,” मैंने आश्वासन दिया।
हम और गहरे किस करते रहे। मैंने उसे गोद में बिठा लिया। वो मेरे ऊपर बैठ गई। मैं उसके गले, कान, और गर्दन पर किस कर रहा था। वो “आह… रोहन… और करो…” बोल रही थी।
मेरे हाथ उसकी पीठ और कमर पर घूम रहे थे। मैंने उसके टॉप को ऊपर उठाने की कोशिश की।
“रोहन… रुको ना,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में कोई रोक नहीं थी। “क्यों? पसंद नहीं आ रहा?” “नहीं… पसंद तो बहुत आ रहा है… लेकिन पहली बार है ना।” “मैं समझता हूँ। हम बहुत धीरे-धीरे करेंगे।”
मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले जाया। बेड पर लेटते ही हम फिर एक-दूसरे पर टूट पड़े। मैंने उसका टॉप पूरी तरह उतार दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस ब्रा में थी। उसके गोरे स्तन ब्रा में फिट होकर बाहर आने को बेताब थे।
“वाह स्नेहा… तुम्हारे स्तन कितने सुंदर और बड़े हैं,” मैंने कहा।
वो हाथों से ढकने की कोशिश कर रही थी। “शर्म आ रही है यार…” “शर्माओ मत। तुम परफेक्ट हो।”
मैंने ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को चूमा और दबाया। वो और ज्यादा सिसकारियाँ निकालने लगी। “रोहन… मेरा पूरा शरीर गर्म हो रहा है…”
मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी। अब हम दोनों ऊपर से लगभग नंगे थे। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड जींस में खड़ा होकर उसकी जांघ से टकरा रहा था। वो भी इसे महसूस कर रही थी।
“ये क्या है?” उसने शरारत से पूछा और हाथ से छूकर देखा। “तुम्हारे लिए खड़ा हो गया है बेबी,” मैंने कहा।
वो हल्का सा हँस पड़ी। अब मैंने उसके जींस के बटन पर हाथ रखा।
“क्या मैं आगे बढ़ूँ?” मैंने पूछा। वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “हाँ… लेकिन बहुत धीरे-धीरे। मुझे दर्द ना हो।”
अब हम दोनों बहुत aroused थे। उसकी चूत से गर्माहट महसूस हो रही थी। मेरा लंड तड़प रहा था। सस्पेंस खत्म हो चुका था… अब असली खेल शुरू होने वाला था।
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रोहन ने गर्लफ्रेंड स्नेहा को पहली बार जमकर चोदा
हम दोनों बेड पर थे। स्नेहा सिर्फ ब्लैक लेस ब्रा में थी, मैं ऊपर से नंगा। मेरा लंड जींस में तंग होकर खड़ा था। मैंने उसके जींस के बटन पर हाथ रखा था और पूछा था — “क्या मैं आगे बढ़ूँ?”
स्नेहा ने मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा, “हाँ रोहन… लेकिन बहुत धीरे-धीरे। मुझे डर लग रहा है।”
मैंने उसे चूमा और कहा, “बिल्कुल बेबी, मैं बहुत सावधानी से करूंगा।”
अब स्नेहा ने खुद अपनी ब्रा उतारी। उसने दोनों हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोला। हुक खुलते ही ब्रा ढीली हो गई। उसने ब्रा की स्ट्रैप्स अपने कंधों से नीचे सरका दीं और ब्रा को पूरी तरह उतारकर बेड के किनारे फेंक दिया।
उसके गोरे, बड़े और गोल स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े हो चुके थे। ब्रा उतारते ही उसके स्तन हल्का सा उछले।
स्नेहा ने शर्मा कर कहा, “अब चूसो ना… मुझे अच्छा लगेगा।”
मैंने तुरंत उसके दाएं स्तन को मुंह में लिया। जीभ से निप्पल को चाटा, फिर होठों से कसकर चूसा। स्नेहा की कमर ऊपर उठ गई।
“आह… रोहन… और जोर से चूसो…” वो सिसकारते हुए बोली।
मैंने उसके निप्पल को दांतों से हल्का सा काटा। “उफ्फ… आह… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है…” उसने आँखें बंद कर लीं, होंठ काटने लगी। मैंने बाएं स्तन को भी मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। उसके स्तन नरम, गर्म और स्वादिष्ट थे। मैं एक हाथ से उसके दूसरे स्तन को दबा रहा था। स्नेहा की साँसें बहुत तेज हो गई थीं।
“रोहन… तुम्हारा मुंह बहुत गर्म है… आह…” उसका चेहरा पूरी तरह लाल हो चुका था। आँखें आधी बंद, होंठ काँप रहे थे।
अब मैं नीचे की तरफ गया। मैंने उसके जींस के बटन खोले और जिपर खींची। फिर दोनों तरफ से जींस को नीचे की तरफ खींचने लगा। स्नेहा ने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई ताकि जींस आसानी से उतर जाए। जींस उसके घुटनों तक आ गई, फिर मैंने पूरी तरह उतार दी और बेड से नीचे फेंक दी।
अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी। पैंटी के बीच में पहले से ही गीला धब्बा बन चुका था।
मैंने उसकी पैंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। जैसे ही पैंटी उसके जांघों से नीचे गई, उसकी चिकनी, गुलाबी और पूरी तरह गीली चूत मेरी आँखों के सामने आ गई। थोड़ी सी बाल थीं, लेकिन ज्यादातर साफ थी। चूत के होठ फूले हुए थे और बीच से चमकदार पानी टपक रहा था।
स्नेहा ने शर्मा कर अपनी जांघें बंद करने की कोशिश की, लेकिन मैंने उन्हें धीरे से खोल दिया।
“रोहन… शर्म आ रही है…” “मत शर्मा बेबी, तुम्हारी चूत बहुत खूबसूरत है।”
मैंने उसके चूत के होठों पर एक लंबा किस किया। फिर जीभ बाहर निकालकर उसकी चूत चाटने लगा। सबसे पहले ऊपर की तरफ क्लिट को चाटा। स्नेहा का शरीर काँप उठा।
“आह… रोहन… उफ्फ… क्या कर रहे हो…” उसने मेरे बालों में हाथ डाल लिया और जोर से पकड़ लिया।
मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाली और अंदर-बाहर करने लगा। फिर एक उंगली उसके चूत में डाली। चूत बहुत टाइट और गर्म थी। उंगली अंदर जाते ही स्नेहा की कमर ऊपर उठ गई।
“आह… रोहन… धीरे… उंगलियाँ मत डालो… दर्द हो रहा है…” लेकिन उसकी चूत का पानी मेरी उंगली पर बह रहा था। मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। साथ ही क्लिट को जीभ से चाटता रहा।
स्नेहा अब जोर-जोर से सिसकार रही थी। “आह… आह… रोहन… मेरा कुछ हो रहा है… उफ्फ…” उसका चेहरा पूरी तरह लाल, आँखें बंद, होंठ काटे हुए, सिर बेड पर इधर-उधर घुमा रही थी। उसके पैर काँप रहे थे।
“बेबी, तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गीली है,” मैंने कहा।
अब मैं ऊपर आ गया। मैंने अपनी जींस और अंडरवियर दोनों उतार दिए। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, लंबा और नसों से भरा हुआ। स्नेहा ने उसे देखा और डर गई।
“रोहन… ये… ये बहुत बड़ा है… अंदर कैसे जाएगा?” “धीरे-धीरे जाएगा बेबी।”
मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा। फिर धीरे-धीरे दबाव डालने लगा।
लंड का सिरा अंदर घुसा तो स्नेहा चीख पड़ी — “आह… रोहन… दर्द हो रहा है… रुको… उफ्फ…”
मैं रुक गया। “थोड़ा और… बस थोड़ा।” मैंने फिर दबाव डाला। लंड आधा अंदर चला गया। स्नेहा की आँखों से आँसू आ गए। वो मेरी पीठ में नाखून गड़ा रही थी।
“रोहन… बहुत दर्द हो रहा है… आह…” “बेबी, बस… अब दर्द कम हो जाएगा।”
मैंने थोड़ा और धकेला। पूरा लंड अंदर चला गया। स्नेहा की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
अब मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। शुरू में बहुत धीरे। स्नेहा का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था।
“आह… रोहन… अब… अब अच्छा लग रहा है…” उसने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं।
मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब जोर-जोर से चोदने लगा। “तुम्हारी चूत कितनी टाइट है बेबी… मुझे पागल कर रही है…” स्नेहा अब जोर-जोर से चीख रही थी — “आह… आह… रोहन… और जोर से… चोदो मुझे… उफ्फ… आह…”
उसका चेहरा लाल हो चुका था, आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ, सिर इधर-उधर घुमा रही थी। पसीना उसके पूरे शरीर पर आ गया था। उसके स्तन हर धक्के के साथ उछल रहे थे।
मैं झुककर उसके स्तनों को फिर से चूसने लगा और साथ ही जोर-जोर से चोदता रहा। स्नेहा की चूत अब और ज्यादा गीली हो गई थी। हर धक्के के साथ “पच… पच… पच…” की आवाज आ रही थी।
“रोहन… मैं… मैं कुछ होने वाली हूँ… आह… आह…” उसका शरीर अचानक कड़क गया। उसकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से कस लिया। वो जोर से चीखी — “रोहन… आह… आह… मैं झड़ रही हूँ…”
उसके झड़ते ही मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। कुछ जोरदार धक्कों के बाद मेरा भी निकल गया। मैंने अपना सारा माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे पर गिर पड़े। स्नेहा की साँसें बहुत तेज चल रही थीं। उसने मुझे कसकर गले लगा लिया।
“रोहन… ये… ये बहुत अच्छा लगा…” “मुझे भी बेबी… बहुत अच्छा लगा।”
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दूसरी बार मिशनरी में चुदाई
हम दोनों अभी भी एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मेरा लंड अभी भी स्नेहा की चूत के अंदर था। दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे। स्नेहा की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। स्नेहा ने हल्का सा “उफ्फ…” किया।
मैं उसके बगल में लेट गया और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। वो मेरे सीने से सट गई। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और उसके माथे पर किस किया।
“कैसा लगा बेबी?” मैंने धीरे से पूछा।
स्नेहा ने शर्मा कर मेरी छाती पर सिर रखा और बोली, “बहुत दर्द हुआ था शुरू में… लेकिन बाद में… बहुत अच्छा लगा रोहन। तुमने बहुत धीरे-धीरे किया। थैंक्यू…”
“तुम्हारी चूत कितनी टाइट थी… मुझे अभी भी याद है,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
वो और ज्यादा शर्मा गई। “रोहन… मत बोलो ऐसे…”
मैं हँस पड़ा और उसे और कसकर पकड़ लिया। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे। फिर मैं उठा और बेडसाइड टेबल से पानी की बोतल उठाई।
“पानी पियो बेबी।” स्नेहा ने बोतल ली और दो घूंट पी। फिर मुझे भी दी। मैंने भी पानी पिया।
अब हम दोनों थोड़ा तरोताजा हो गए थे। मैंने उसे वापस अपनी बाहों में लिया। इस बार हम आमने-सामने लेटे थे। मैं उसके होंठों पर धीरे-धीरे किस करने लगा। स्नेहा भी रिस्पॉन्ड कर रही थी। धीरे-धीरे किस गहरा होता गया।
मैंने उसके स्तन फिर से दबाए। निप्पल्स अभी भी सख्त थे। स्नेहा की साँसें फिर से तेज होने लगीं।
“रोहन… फिर से करोगे क्या?” उसने शरारत से पूछा।
“तुम्हें करना है?” मैंने पूछा।
वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “हाँ… अब दर्द नहीं लगेगा। अब… और जोर से करना।”
ये सुनकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। स्नेहा ने भी महसूस किया। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे से सहलाने लगी।
“देखो… फिर से खड़ा हो गया,” वो मुस्कुराई।
मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया। अब दूसरी बार शुरू करने का समय था।
मैं उसके दोनों पैरों को फैलाकर उसके ऊपर चढ़ गया। इस बार मेरा लंड बिना किसी दिक्कत के सीधा उसकी चूत में घुस गया क्योंकि वो पहले से ही बहुत गीली थी। स्नेहा ने हल्का सा “आह…” किया, लेकिन इस बार दर्द की जगह सिर्फ pleasure था।
“अब अच्छा लग रहा है ना?” मैंने पूछा। “हाँ रोहन… अब बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने मेरी कमर को अपनी टांगों से कस लिया।
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। इस बार रफ्तार पहले से ज्यादा थी। स्नेहा की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर धक्के के साथ “पच… पच…” की गीली आवाज आ रही थी।
स्नेहा अब खुलकर चीख रही थी — “आह… आह… रोहन… और जोर से… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…”
उसका चेहरा फिर से लाल हो रहा था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ, सिर बेड पर इधर-उधर घुमा रही थी। उसके स्तन हर जोरदार धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैं झुककर उसके एक स्तन को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
“रोहन… मेरे स्तन चूसो… आह… और जोर से चोदो मुझे…” उसने मेरी पीठ में नाखून गाड़ दिए।
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अब जोर-जोर से चोद रहा था। स्नेहा की चूत पहले से ज्यादा गीली और फूली हुई थी।
“तुम्हारी चूत अब और ज्यादा टाइट हो गई है बेबी… मुझे पागल कर रही है…” मैंने उसके कान में कहा।
स्नेहा की आँखें खुलीं और उसने सीधे मेरी आँखों में देखा। “रोहन… मुझे पसंद है… जब तुम मुझे चोदते हो… आह… आह…”
मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। अब एंगल और गहरा हो गया था। मेरा लंड उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक जा रहा था। स्नेहा अब जोर-जोर से चीख रही थी।
“आह… आह… रोहन… मैं फिर से… झड़ने वाली हूँ… उफ्फ… आह…”
उसका शरीर अचानक कड़क गया। उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया और वो दूसरी बार झड़ गई। इस बार उसका ऑर्गेज्म पहले से ज्यादा तेज था। वो मेरे ऊपर लिपट गई और जोर से काँप रही थी।
मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। कुछ जोरदार धक्कों के बाद मेरा भी निकल गया। मैंने फिर से अपना सारा गरम माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
इस बार हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। स्नेहा ने मुझे कसकर गले लगा लिया। दोनों की साँसें बहुत तेज चल रही थीं।
“रोहन… ये दूसरी बार और भी अच्छा लगा…” वो धीरे से बोली। “मुझे भी बेबी… तुम्हारी चूत मुझे दीवाना बना रही है।”
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे।
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अगले दिन की चुदाई
रात को दूसरी बार चुदाई के बाद हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। स्नेहा मेरे सीने से सटकर सो गई। मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया। दोनों नंगे थे। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज थी।
अगले दिन सुबह…
सुबह के 8 बजे के आसपास धूप कमरे में आ रही थी। स्नेहा अभी भी मेरी बाहों में सो रही थी। उसके बाल अस्त-व्यस्त थे, चेहरा शांत और सुंदर लग रहा था। मैं जाग चुका था। मेरा लंड सुबह की हार्डनेस से पूरी तरह खड़ा हो चुका था और वो सीधा स्नेहा की जांघ से टकरा रहा था।
मैंने धीरे से उसके गाल पर किस किया। फिर गर्दन पर। स्नेहा हल्की सी हिली और आँखें खोलीं। नींद में ही उसने मुस्कुराते हुए कहा, “रोहन… सुबह हो गई क्या?”
“हाँ बेबी…” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
उसने नीचे हाथ ले जाकर मेरा खड़ा लंड पकड़ लिया। जैसे ही उसने छुआ, उसकी आँखें थोड़ी खुल गईं।
“अरे… ये तो फिर से खड़ा हो गया है,” वो शरारत से बोली।
“तुम्हारे पास सोकर कैसे न खड़ा होगा?” मैंने कहा और उसके स्तन को हाथ में लिया। निप्पल्स सुबह की ठंडक में सख्त हो चुके थे।
स्नेहा ने मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया। अब हम आमने-सामने थे। मैंने उसके होंठों पर किस किया। सुबह की पहली किस धीमी और लंबी थी। स्नेहा भी जोश में आने लगी।
मैं उसके दोनों पैर फैलाकर उसके ऊपर आ गया। इस बार चुदाई सुबह की थी — थोड़ी धीमी, लेकिन गहरी।
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। अभी भी कल रात का माल और उसका पानी मिला हुआ था, इसलिए बहुत गीली थी। मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड आसानी से अंदर चला गया।
“आह…” स्नेहा ने हल्की सी सिसकारी ली।
“अभी दर्द तो नहीं हो रहा ना?” मैंने पूछा। “नहीं… अब सिर्फ अच्छा लग रहा है,” वो बोली।
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। सुबह की रोशनी में स्नेहा का पूरा नंगा शरीर साफ दिख रहा था। उसके गोरे स्तन, पिंक निप्पल्स, पसीने से चमकती त्वचा… सब कुछ बहुत सेक्सी लग रहा था।
स्नेहा ने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं। “रोहन… और जोर से… आह…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब जोर-जोर से चोद रहा था। स्नेहा की चूत कल रात से भी ज्यादा गीली और फूली हुई थी। हर धक्के के साथ गीली आवाज आ रही थी।
“आह… आह… रोहन… सुबह-सुबह इतना जोर से चोद रहे हो… उफ्फ…” उसका चेहरा लाल हो रहा था। आँखें आधी बंद, होंठ काँप रहे थे। वो मेरी पीठ में नाखून गाड़ रही थी।
मैं झुककर उसके स्तन चूसने लगा। एक हाथ से उसके दूसरे स्तन को जोर से दबा रहा था। “तुम्हारे स्तन कितने स्वादिष्ट हैं बेबी…” मैंने कहा।
स्नेहा अब खुलकर चीख रही थी — “आह… रोहन… मेरी चूत फाड़ दो… और जोर से… उफ्फ… आह…”
मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए। अब एंगल और गहरा हो गया था। मेरा लंड उसकी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था। स्नेहा की आँखें उल्टी हो रही थीं।
“रोहन… मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… आह… आह…” उसका शरीर अचानक कड़क गया। उसने जोर से मेरी पीठ पकड़ ली और चीखते हुए झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया।
मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। कुछ जोरदार धक्कों के बाद मेरा भी निकल गया। मैंने फिर से उसकी चूत के अंदर गरम माल छोड़ दिया।
इस बार भी हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। स्नेहा ने मुझे कसकर गले लगा लिया।
“रोहन… सुबह की चुदाई और भी मज़ेदार लगी,” वो धीरे से बोली। “मुझे भी बेबी… तुम्हारी चूत मुझे हर बार नया मजा दे रही है।”
हम दोनों अभी भी नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए बेड पर लेटे थे।
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पूरे दिन घर में नंगे घूमते हो और दिन में 2-3 बार और चुदाई करते हो (अलग-अलग पोजीशन)
सुबह की चुदाई खत्म होने के बाद हम दोनों अभी भी नंगे बेड पर लेटे थे। स्नेहा मेरे सीने पर सिर रखकर आराम कर रही थी।
“रोहन… आज पूरा दिन घर में नंगे घूमेंगे क्या?” उसने शरारत से पूछा।
“हाँ बेबी… आज कोई कपड़ा नहीं पहनना है। सिर्फ तुम और मैं,” मैंने उसके निप्पल को उंगली से छूते हुए कहा।
स्नेहा मुस्कुराई और उठ गई। उसके नंगे स्तन हिल रहे थे। हम दोनों नंगे ही किचन में गए।
किचन में दूसरी चुदाई (Standing Doggy)
स्नेहा चाय बनाने लगी। मैं उसके पीछे खड़ा हो गया और उसके नंगे शरीर को पीछे से पकड़ लिया। मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था और उसकी गांड के बीच में फँस रहा था।
“रोहन… चाय बन रही है…” वो बोली, लेकिन आवाज में जोश था।
मैंने उसे किचन काउंटर की तरफ झुका दिया। स्नेहा ने दोनों हाथ काउंटर पर रख दिए। अब उसकी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। मैंने उसके पैर थोड़े फैलाए और अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
“आह… रोहन…” वो सिसकारी ली।
मैंने उसके कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से चोदने लगा। किचन में “पच… पच… पच…” की आवाज गूँज रही थी। स्नेहा का चेहरा काउंटर पर टिका हुआ था, आँखें बंद, मुंह खुला।
“आह… आह… रोहन… और जोर से… मेरी गांड पकड़ के चोदो…” उसके स्तन काउंटर पर दब रहे थे और हर धक्के से हिल रहे थे।
मैंने उसकी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा। “तुम्हारी चूत आज और ज्यादा गीली है बेबी…” स्नेहा अब जोर-जोर से चीख रही थी — “आह… उफ्फ… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ…”
उसका शरीर काँपा और वो फिर से झड़ गई। मैंने भी कुछ जोरदार धक्के मारे और उसकी चूत के अंदर माल छोड़ दिया।
हम दोनों साँस लेते हुए काउंटर पर ही रुक गए।
सोफे पर तीसरी चुदाई (Cowgirl Position)
नाश्ता करके हम दोनों लिविंग रूम के सोफे पर नंगे बैठ गए। टीवी ऑन किया, लेकिन ध्यान टीवी पर नहीं था। स्नेहा मेरे ऊपर बैठ गई। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और अपनी चूत में डाल लिया।
“अब मैं ऊपर से करूंगी,” वो बोली।
स्नेहा धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे सामने उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़ लिया और जोर से दबाने लगा।
“आह… रोहन… तुम्हारे हाथ बहुत अच्छे लगते हैं…” उसने मेरे कंधों पर हाथ रखा और तेजी से उछलने लगी।
मैं नीचे से भी धक्के लगा रहा था। स्नेहा का चेहरा लाल हो चुका था। आँखें बंद, बाल बिखरे हुए, मुंह से लगातार moans निकल रहे थे।
“रोहन… मैं फिर से… आह… आह…” उसने जोर से मेरे लंड को अंदर लिया और तीसरी बार झड़ गई।
मैं भी उसके साथ ही झड़ गया।
पूरे दिन हम दोनों नंगे ही घर में घूमते रहे। कभी किचन में, कभी सोफे पर, कभी बेड पर। दोपहर में एक बार और quickie कर लिया (सोफे पर doggy)। शाम तक स्नेहा 5 बार झड़ चुकी थी और मैं 4 बार।
रात होने तक हम दोनों थक चुके थे, लेकिन बहुत satisfied थे।
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