गर्लफ्रेंड अनिका की सील तोड़ी पूरी रात चोदा | girlfriend sex story in hindi

गर्लफ्रेंड अनिका की सील तोड़ी पूरी रात चोदा

girlfriend sex story in hindi

मैं कबीर हूँ, 24 साल का। मेरी गर्लफ्रेंड अनिका 22 साल की है। हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और 7 महीने पहले एक कल्चरल फेस्ट में मिले थे। शुरू में दोस्ती थी, फिर धीरे-धीरे प्यार हो गया। हमने बहुत किसिंग की थी, गले मिले थे, एक-दूसरे के शरीर को छुआ था, लेकिन कभी भी पूरा सेक्स नहीं किया था।

अनिका ने मुझे पहले ही बता दिया था कि वो virgin है। उसे दर्द का बहुत डर था। मैंने हमेशा कहा था कि जब वो पूरी तरह तैयार होगी, तभी करेंगे।

एक शनिवार को अनिका ने मुझे कॉल किया। उसकी आवाज में थोड़ी घबराहट और उत्साह दोनों थे।

अनिका: कबीर, मेरी फ्लैटमेट पूरे हफ्ते के लिए अपने घर चली गई है। मैं अकेली हूँ। आज रात को आ जाना… खाना भी बना लूंगी। कबीर: ठीक है बेबी, शाम 8 बजे आ रहा हूँ।

मेरा दिल तेज धड़कने लगा। क्या आज वो रात आने वाली है? क्या अनिका आज अपनी सील तोड़वाने के लिए तैयार है?

शाम को जब मैं उसके फ्लैट पहुँचा, अनिका ने डोर खोला। वो एक लाइट पिंक टॉप और ब्लैक लेगिंग्स पहने हुए थी। बाल खुले थे और उसने हल्का सा परफ्यूम लगाया था। वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।

“आओ कबीर… अंदर आओ,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों में nervousness साफ दिख रही थी।

उसने मेरे लिए खाना बनाया था। हम दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने लगे। खाते-खाते हम बातें करने लगे।

“कबीर… आज मैं बहुत nervous हूँ,” अनिका ने अचानक कहा।

“क्यों बेबी?” मैंने पूछा।

“क्योंकि… आज मैं सोच रही हूँ कि हम… पूरा कर लें। लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा है। दर्द होगा ना? और खून भी निकलेगा?” उसने शर्मा कर पूछा।

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। “होगा थोड़ा दर्द, लेकिन मैं बहुत धीरे-धीरे करूंगा। अगर ज्यादा दर्द हो तो तुरंत बता देना। मैं रुक जाऊंगा।”

खाना खत्म करने के बाद हम सोफे पर बैठ गए। मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और गाल पर किस किया। अनिका ने आँखें बंद कर लीं। हम धीरे-धीरे गहरे किस करने लगे। मेरी जीभ उसकी मुंह में घुस गई और वो भी जोश में आने लगी।

“उम्म्म… कबीर…” वो हल्की सी आवाज निकाल रही थी।

मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला और उसकी नंगी कमर सहलाई। फिर उसके स्तनों को ऊपर से दबाया। अनिका की साँसें तेज हो गईं।

“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा। “अच्छा… लेकिन दिल बहुत तेज धड़क रहा है।”

मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले जाया। बेड पर लेटते ही हम फिर से एक-दूसरे पर टूट पड़े। मैंने उसका टॉप उतार दिया। अब वो ब्रा में थी। मैंने ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को चूमा। अनिका ने मेरे बालों में हाथ डाल लिया।

“कबीर… आज सच में करोगे ना?” उसने पूछा। “अगर तुम तैयार हो तो हाँ।” “मैं तैयार हूँ… लेकिन बहुत धीरे से। मुझे बहुत डर लग रहा है।”

अब मैंने उसकी लेगिंग्स उतार दी। वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई। मैंने भी अपनी शर्ट और जींस उतार दी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। अनिका ने उसे देखा और थोड़ा डर गई।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी पैंटी के किनारे पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचने लगा। पैंटी उतरते ही उसकी चिकनी, गुलाबी और virgin चूत सामने आ गई।

मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। अनिका का शरीर काँप रहा था।

“कबीर… डर लग रहा है… बहुत दर्द होगा ना?” “थोड़ा होगा बेबी, लेकिन मैं तुम्हें बहुत प्यार करूंगा।”

अब हम सील तोड़ने के बिल्कुल कगार पर थे।

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सील तोड़ने वाली चुदाई:


अनिका बेड पर लेटी हुई थी। मैं उसके ऊपर था। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा हुआ था। वो बहुत nervous थी।

“कबीर… डर लग रहा है,” उसने धीरे से कहा।

मैंने उसे चूमा और बोला, “पहले मैं तुम्हें अच्छे से तैयार करूंगा बेबी।”

मैं उसके ऊपर से नीचे की तरफ सरक गया। अब मेरा चेहरा उसकी चूत के ठीक सामने था। अनिका ने शर्मा कर अपनी जांघें बंद करने की कोशिश की, लेकिन मैंने धीरे से उन्हें खोल दिया।

उसकी चूत पूरी तरह virgin थी — गुलाबी, छोटी और बिल्कुल साफ। मैंने पहले उसके चूत के होठों पर एक लंबा किस किया। फिर जीभ बाहर निकालकर उसकी चूत चाटने लगा।

“आह… कबीर…” अनिका ने हल्की सी सिसकारी ली।

मैंने उसकी चूत के ऊपर की तरफ क्लिट को जीभ से चाटा। अनिका का शरीर हल्का सा काँप गया। मैंने जीभ से उसकी चूत के होठों को अलग किया और अंदर तक चाटने लगा। उसका स्वाद हल्का मीठा और ताज़ा था।

“उम्म्म… कबीर… ये क्या कर रहे हो…” वो शर्मा कर बोली, लेकिन उसकी आवाज में pleasure था।

अब मैंने एक उंगली उसके चूत के मुंह पर रखी और धीरे से अंदर डालने लगा। अनिका की चूत बहुत टाइट थी। उंगली अंदर जाते ही उसने “उफ्फ…” किया।

“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा। “थोड़ा… लेकिन अच्छा भी लग रहा है,” उसने कहा।

मैंने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। साथ ही जीभ से उसकी क्लिट चाटता रहा। अनिका अब जोर-जोर से साँस ले रही थी।

“आह… आह… कबीर… उफ्फ…” उसका चेहरा लाल हो रहा था। आँखें बंद, होंठ काँप रहे थे। उसने मेरे बालों में हाथ डाल लिया और जोर से पकड़ लिया।

मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी। अब दो उंगलियाँ उसके अंदर थीं। अनिका की चूत धीरे-धीरे गीली होने लगी। मेरी उंगलियाँ उसके अंदर आसानी से घूमने लगीं।

“कबीर… मेरा शरीर गर्म हो रहा है…” वो बोली।

मैं ऊपर आ गया। अनिका की आँखें खुली हुई थीं। वो मुझे देख रही थी। मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और ब्रा उतार दी। उसके गोरे और सुंदर स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर से चूसा। अनिका ने सिर पीछे झुका लिया।

“आह… कबीर…”

अब मैंने अपना लंड फिर से उसकी चूत पर रखा। इस बार वो पहले से ज्यादा गीली थी।

“अब डाल रहा हूँ बेबी… बहुत धीरे से,” मैंने कहा।

अनिका ने आँखें बंद कर लीं और सिर हिलाया।

मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा उसकी चूत में घुसने लगा। अनिका ने “उफ्फ…” किया।

“दर्द हो रहा है?” “हाँ… थोड़ा… लेकिन आगे बढ़ो,” वो बोली।

मैंने और दबाव डाला। लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया। अनिका की आँखों में आँसू आ गए।

“आह… कबीर… दर्द हो रहा है… रुको…” मैं रुक गया। “ठीक है बेबी, रुक गया।”

मैंने उसे चूमा और उसके स्तन दबाए। कुछ सेकंड बाद उसने कहा, “अब आगे बढ़ो… धीरे से।”

मैंने फिर दबाव डाला। पूरा लंड अंदर चला गया। अनिका चीख पड़ी — “आह… उफ्फ… कबीर… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने देखा कि मेरे लंड पर थोड़ा सा खून लगा हुआ था। उसकी सील टूट गई थी।

“बेबी, सील टूट गई है। अब दर्द धीरे-धीरे कम होगा,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

अनिका ने मुझे कसकर गले लगा लिया। आँसू उसके गालों से बह रहे थे।

मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। शुरू में बहुत धीरे। अनिका का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था।

“आह… कबीर… अब… अब थोड़ा अच्छा लग रहा है…” उसने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं।

मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। अब लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। अनिका की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।

“तुम्हारी चूत कितनी टाइट है अनिका… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है,” मैंने उसके कान में कहा।

अनिका का चेहरा अब दर्द से ज्यादा pleasure में था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ, लगातार “आह… आह… कबीर…” निकाल रही थी।

मैंने झुककर उसके स्तनों को चूसा और जोर से चोदने लगा। अनिका अब खुलकर चीख रही थी।

“आह… आह… कबीर… और जोर से… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…”

कुछ देर बाद अनिका का शरीर काँपने लगा। “कबीर… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ… आह… आह…”

उसने जोर से मुझे पकड़ लिया और तीखी चीख के साथ झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया।

मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी और कुछ जोरदार धक्कों के बाद उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया।

हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे पर गिर पड़े। अनिका अभी भी मुझे कसकर गले लगाए हुए थी।

“कबीर… ये… ये बहुत दर्द भरा था… लेकिन अंत में अच्छा लगा,” वो धीरे से बोली।

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दूसरी बार missionary में चुदाई:


पहली बार चुदाई के बाद हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। मेरा लंड अभी भी अनिका की चूत के अंदर था। अनिका मेरे सीने से सटी हुई थी। उसकी साँसें अभी भी तेज चल रही थीं।

मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। अनिका ने हल्का सा “उफ्फ…” किया। मैं उसके बगल में लेट गया और उसे अपनी बाहों में खींच लिया।

“कैसा लगा बेबी?” मैंने पूछा।

अनिका ने मेरी छाती पर सिर रखा और बोली, “शुरू में बहुत दर्द हुआ… आँसू भी आ गए थे। लेकिन बाद में… थोड़ा अच्छा लगा।”

मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और माथे पर किस किया। “अब दूसरी बार दर्द बहुत कम होगा। पहले से ज्यादा अच्छा लगेगा।”

हम कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। मैं उसके स्तनों को धीरे-धीरे सहला रहा था। अनिका भी मेरे लंड को हाथ से छू रही थी। धीरे-धीरे मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। अनिका ने महसूस किया और मुस्कुरा दी।

“फिर से खड़ा हो गया?” उसने शरारत से पूछा।

“तुम्हारे पास कैसे न खड़ा होगा?” मैंने कहा और उसे चूमा।

कुछ मिनट बाद हम दोनों फिर से जोश में आ गए। मैं अनिका के ऊपर चढ़ गया। इस बार वो पहले से ज्यादा relaxed लग रही थी।

मैंने उसके दोनों पैर फैलाए और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। पहली बार की तुलना में अब उसकी चूत ज्यादा गीली और थोड़ी खुली हुई थी।

“अब डाल रहा हूँ…” मैंने कहा।

अनिका ने आँखें बंद कर लीं और सिर हिलाया।

मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड आसानी से अंदर चला गया। अनिका ने सिर्फ हल्का सा “आह…” किया। पहली बार जितना दर्द नहीं हुआ।

“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा। “नहीं… अब बहुत कम है। आगे बढ़ो,” वो बोली।

मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। इस बार लंड आसानी से घूम रहा था। अनिका की चूत पहले से ज्यादा गीली थी।

“आह… कबीर… अब अच्छा लग रहा है…” उसने कहा।

मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। अनिका अब खुलकर साँस ले रही थी। मैं झुककर उसके स्तनों को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। अनिका ने मेरे बालों में हाथ डाल लिया।

“आह… कबीर… मेरे स्तन चूसो… और जोर से चोदो…”

मैंने और तेजी से चोदना शुरू किया। अब हर धक्के के साथ “पच… पच…” की गीली आवाज आ रही थी। अनिका का चेहरा pleasure से लाल हो रहा था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ और लगातार moans निकल रहे थे।

“आह… आह… कबीर… और जोर से… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

उसने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर कसकर लपेट लीं। मैं नीचे से भी जोरदार धक्के लगा रहा था। अनिका अब पूरी तरह खुल चुकी थी।

“कबीर… मेरी चूत अब पहले से ज्यादा गीली है ना?” उसने पूछा। “हाँ बेबी… बहुत गीली और टाइट है। मुझे बहुत मज़ा आ रहा है,” मैंने उसके कान में कहा।

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए। अब एंगल और गहरा हो गया था। मेरा लंड उसकी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था। अनिका अब जोर-जोर से चीख रही थी।

“आह… आह… कबीर… मैं फिर से… झड़ने वाली हूँ… उफ्फ… आह…”

उसका शरीर अचानक कड़क गया। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और तीखी चीख के साथ दूसरी बार झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया।

मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। कुछ जोरदार धक्कों के बाद मैं भी उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

हम दोनों फिर से थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। अनिका अभी भी साँस ले रही थी। मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा।

“कबीर… दूसरी बार बहुत अच्छा लगा… दर्द भी कम था,” वो धीरे से बोली।

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अगले दिन सुबह की चुदाई:


दूसरी बार चुदाई के बाद हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। मैं अनिका के ऊपर से हटकर उसके बगल में लेट गया। अनिका ने तुरंत मुझे कसकर गले लगा लिया। दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे।

मैंने बेडसाइड टेबल से पानी की बोतल उठाई और पहले उसे पिलाई, फिर खुद पिया।

“कैसा लगा आज?” मैंने पूछा।

अनिका ने मेरी छाती पर सिर रखा और बोली, “पहली बार बहुत दर्द हुआ था… लेकिन दूसरी बार बहुत अच्छा लगा। अब डर भी कम हो गया है।”

मैंने उसे और कसकर पकड़ लिया। हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था और वो मेरे सीने पर हल्के-हल्के किस कर रही थी।

धीरे-धीरे हमारी आँखें बंद हो गईं। अनिका मेरी बाहों में सो गई। मैंने भी उसे कसकर पकड़े हुए सो गया।


अगले दिन सुबह…

सुबह के 8:30 बजे धूप कमरे में आ रही थी। अनिका अभी भी मेरी बाहों में सो रही थी। मैं जाग चुका था। मेरा लंड सुबह की हार्डनेस से पूरी तरह खड़ा हो चुका था और वो अनिका की जांघ से सटा हुआ था।

मैंने धीरे से उसके गाल पर किस किया। फिर गर्दन पर। अनिका हल्की सी हिली और आँखें खोलीं। नींद में ही उसने मुस्कुराते हुए कहा, “कबीर… सुबह हो गई?”

“हाँ बेबी…” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

उसने नीचे हाथ ले जाकर मेरा खड़ा लंड पकड़ लिया। जैसे ही छुआ, उसकी आँखें थोड़ी खुल गईं।

“अरे… फिर से खड़ा हो गया है,” वो बोली।

“तुम्हारे पास सोकर कैसे न खड़ा होगा?” मैंने कहा और उसे चूमा।

अनिका ने मेरे लंड को धीरे से सहलाना शुरू किया। मैंने उसके स्तन को हाथ में लिया और निप्पल को उंगली से घुमाने लगा। वो साँस तेज करने लगी।

कुछ मिनट बाद हम दोनों फिर से जोश में आ गए। मैं अनिका के ऊपर चढ़ गया। इस बार वो पहले से कहीं ज्यादा relaxed और confident लग रही थी।

मैंने उसके दोनों पैर फैलाए और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। कल रात की तुलना में अब उसकी चूत और ज्यादा गीली और खुली हुई थी।

“अब डाल रहा हूँ…” मैंने कहा।

अनिका ने आँखें बंद कर लीं और बोली, “धीरे से… लेकिन आज ज्यादा दर्द नहीं होगा।”

मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड आसानी से अंदर चला गया। अनिका ने सिर्फ हल्का सा “आह…” किया।

“दर्द हो रहा है?” “नहीं… अब बिल्कुल कम है। आगे बढ़ो,” वो बोली।

मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। इस बार लंड बहुत आसानी से घूम रहा था। अनिका की चूत पहले से ज्यादा गीली और गर्म थी।

“आह… कबीर… आज बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने कहा।

मैंने रफ्तार बढ़ाई। अनिका अब खुलकर साँस ले रही थी। मैं झुककर उसके स्तनों को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। अनिका ने मेरे बालों में हाथ डाल लिया।

“आह… कबीर… मेरे स्तन चूसो… और जोर से चोदो मुझे…”

मैंने और तेजी से चोदना शुरू किया। अब हर धक्के के साथ गीली आवाज आ रही थी। अनिका का चेहरा pleasure से लाल हो रहा था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ और लगातार moans निकल रहे थे।

“आह… आह… कबीर… और जोर से… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

उसने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर कसकर लपेट लीं। मैं नीचे से भी जोरदार धक्के लगा रहा था। अनिका अब पूरी तरह खुल चुकी थी।

“कबीर… मेरी चूत कितनी गीली है आज…” वो बोली।

“बहुत गीली है बेबी… मुझे बहुत मज़ा आ रहा है,” मैंने उसके कान में कहा।

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए। अब एंगल और गहरा हो गया था। अनिका अब जोर-जोर से चीख रही थी।

“आह… आह… कबीर… मैं फिर से… झड़ने वाली हूँ… उफ्फ… आह…”

उसका शरीर अचानक काँपने लगा। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और जोर से चीखते हुए तीसरी बार झड़ गई।

मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी और कुछ जोरदार धक्कों के बाद उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

हम दोनों फिर से थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। अनिका अभी भी साँस ले रही थी।

“कबीर… सुबह की चुदाई और भी अच्छी लगी,” वो धीरे से बोली।

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दोपहर में डॉगी स्टाइल में पूरी डिटेल वाली चुदाई:


सुबह की चुदाई के बाद हम दोनों फिर से थक गए थे। अनिका मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी हुई थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

“अब थोड़ा आराम करते हैं,” मैंने कहा।

अनिका ने सिर हिलाया। हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटे हुए बेड पर लेट गए। कुछ देर बातें कीं। अनिका ने बताया कि अब दर्द बिल्कुल कम हो गया है और वो और करना चाहती है। हमने हल्का नाश्ता किया और फिर दोनों सो गए।


दोपहर 1:30 बजे…

हम दोनों जाग चुके थे। अनिका मेरी बाहों में थी। मैं उसके नंगे शरीर को सहला रहा था। धीरे-धीरे हम दोनों फिर से excited होने लगे।

अनिका ने मेरे कान में फुसफुसाया, “कबीर… आज दोपहर में कुछ नया करना है क्या?”

“क्या करना है बेबी?” मैंने पूछा।

“मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो… मैंने सुना है इसमें और गहरा जाता है,” वो शर्मा कर बोली।

ये सुनकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

मैं अनिका को पीठ के बल से घुमा दिया। अब वो अपने घुटनों और कोहनियों के बल खड़ी हो गई। उसकी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। मैं उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया।

अनिका की चूत पहले से ही गीली थी। मैंने उसके कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा।

“तैयार हो?” मैंने पूछा। “हाँ… लेकिन धीरे से शुरू करना,” वो बोली।

मैंने धीरे से दबाव डाला। लंड आसानी से अंदर चला गया। अनिका ने “आह…” किया।

“दर्द तो नहीं हो रहा ना?” “नहीं… अब बिल्कुल नहीं। आगे बढ़ो,” वो बोली।

मैंने उसके कमर को मजबूती से पकड़ा और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। डॉगी स्टाइल में लंड और गहरा जा रहा था। अनिका की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।

“आह… कबीर… ये पोजीशन बहुत अच्छी है…” वो सिसकारते हुए बोली।

मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब जोर-जोर से चोद रहा था। हर धक्के के साथ अनिका की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। “पच… पच… पच…” की आवाज कमरे में गूँज रही थी।

अनिका का चेहरा बेड पर टिका हुआ था। वो “आह… आह… कबीर…” निकाल रही थी। मैंने उसके बालों में हाथ डाला और हल्का सा खींचा।

“आह… कबीर… मेरे बाल मत खींचो… उफ्फ…” लेकिन उसकी आवाज में दर्द नहीं, pleasure था।

मैंने उसके दोनों हाथ पीछे खींच लिए और और जोर से चोदने लगा। अनिका अब जोर-जोर से चीख रही थी।

“आह… आह… कबीर… और जोर से… मेरी गांड पकड़ के चोदो मुझे… उफ्फ…”

मैंने उसकी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा। अनिका का शरीर काँप गया।

“आह… फिर से मारो…” वो बोली।

मैंने फिर थप्पड़ मारा और साथ ही तेजी से चोदता रहा। अनिका का चेहरा बेड पर दबा हुआ था, आँखें बंद, मुंह खुला हुआ और लगातार moans निकल रहे थे। उसके स्तन हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिल रहे थे।

“कबीर… मेरी चूत फट रही है… लेकिन बहुत अच्छा लग रहा है… आह… आह…”

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अब बहुत जोर- जोर से चोद रहा था। अनिका की चूत पहले से कहीं ज्यादा गीली हो चुकी थी।

कुछ देर बाद अनिका का शरीर अचानक कड़क गया। “कबीर… मैं झड़ने वाली हूँ… आह… आह… उफ्फ…”

उसने जोर से चीखते हुए झड़ दी। उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया।

मैंने भी कुछ जोरदार धक्के मारे और उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। अनिका अभी भी घुटनों के बल थी, साँसें बहुत तेज चल रही थीं। मैं उसके पीछे लेट गया और उसे पीछे से गले लगा लिया।

“कैसा लगा बेबी?” मैंने पूछा। “बहुत अच्छा लगा… ये पोजीशन सबसे अच्छी है,” वो बोली।

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उसकी टाइट चूत चोदने में बहुत मजा आया

दोपहर की डॉगी स्टाइल चुदाई के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेट गए। अनिका अभी भी साँस ले रही थी। मैं उसके पीछे लेटा हुआ था और उसे गले लगाए हुए था।

कुछ देर बाद अनिका ने मेरी तरफ मुड़कर कहा, “कबीर… अभी भी मन नहीं भरा है।”

मैंने उसे चूमा और बोला, “तो फिर से करें?”

वो शर्मा कर बोली, “हाँ… लेकिन इस बार missionary में।”

मैं अनिका को पीठ के बल लिटा दिया। वो पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था।

अनिका ने अपने पैर फैला दिए। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा।

जैसे ही मैंने दबाव डाला, अनिका की सील पैक चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कस लिया कि अंदर जाना मुश्किल हो रहा था।

“उफ्फ… कबीर… ये बहुत टाइट है ना?” अनिका ने कहा।

“बहुत टाइट है बेबी… तेरी चूत मेरे लंड को इतनी जोर से पकड़ रही है कि घुसने में बहुत जा रहा है,” मैंने कहा।

मैंने थोड़ा और जोर लगाया। लंड का सिरा अंदर घुसा तो अनिका ने “आह…” किया। मेरे लंड को उसकी चूत इतनी टाइट पकड़ रही थी कि हर इंच अंदर डालने में मुझे जोर लगाना पड़ रहा था।

धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। अनिका की चूत मेरे लंड को चारों तरफ से इतनी मजबूती से कस रही थी कि मैं आसानी से अंदर-बाहर नहीं कर पा रहा था।

“कबीर… तेरे लंड को मेरी चूत कितनी जोर से पकड़ रही है?” अनिका ने आँखें बंद करके पूछा।

“बहुत जोर से बेबी… तेरी सील पैक चूत इतनी टाइट है कि हर धक्के में मुझे पूरा जोर लगाना पड़ रहा है। लग रहा है जैसे चूत फट जाएगी,” मैंने उसके कान में कहा।

मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। लेकिन अनिका की चूत इतनी टाइट थी कि लंड निकालते समय भी वो जोर से कस रही थी। हर बार जब मैं अंदर धकेलता, तो मुझे लगता जैसे चूत मुझे अंदर खींच रही है।

अनिका का चेहरा लाल हो चुका था। आँखें बंद, होंठ काटे हुए, और लगातार सिसकारियाँ निकल रही थीं।

“आह… आह… कबीर… बहुत टाइट है… उफ्फ… लेकिन अच्छा लग रहा है…”

मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब जोर-जोर से चोद रहा था, लेकिन फिर भी उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड आसानी से नहीं घूम पा रहा था। हर धक्के में मुझे पूरा बल लगाना पड़ रहा था।

“तेरी चूत कितनी टाइट है अनिका… मेरे लंड को फसा रही है… आह…” मैंने कहा।

अनिका ने मेरी पीठ में नाखून गाड़ दिए। “कबीर… और जोर से… मेरी टाइट चूत को फाड़ दो… आह… आह…”

मैं अब पूरा जोर लगा रहा था। अनिका की चूत मेरे लंड को इतनी जोर से कस रही थी कि मुझे लग रहा था जैसे चूत मुझे निगल रही है। हर बार जब मैं बाहर निकालता, तो चूत मुझे वापस अंदर खींच लेती।

अनिका अब जोर-जोर से चीख रही थी। “आह… आह… कबीर… मेरी चूत फट रही है… लेकिन मत रुको… और जोर से चोदो…”

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और और जोर से चोदने लगा। अनिका की चूत अब भी पहले जितनी ही टाइट थी।

कुछ देर बाद अनिका का शरीर काँपने लगा। “कबीर… मैं झड़ने वाली हूँ… आह… आह… उफ्फ…”

उसने जोर से चीखते हुए झड़ दी। उसकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कस लिया कि मुझे भी रुकना पड़ा।

मैंने भी कुछ जोरदार धक्के मारे और उसकी टाइट चूत के अंदर झड़ गया।

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