राकेश ने अपनी बेटी कंचन को होटल में चोदा
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राकेश अपनी २२ साल की बेटी कंचन के साथ शहर से बाहर एक बिजनेस ट्रिप पर गया था। कंचन कॉलेज की आखिरी साल की स्टूडेंट थी, खूबसूरत, गोरी, लंबे बालों वाली और उसका फिगर इतना आकर्षक था कि आसपास के लोग बार-बार उसकी तरफ देखते थे। राकेश ४५ साल का था, लेकिन अभी भी फिट और ताकतवर। उसकी पत्नी पिछले कुछ सालों से बीमार रहती थी, जिसकी वजह से घर का माहौल ठंडा हो गया था।
ट्रेन की देरी के कारण वे रात को देर से पहुंचे। होटल में सिर्फ एक डबल बेड वाला रूम ही उपलब्ध था। राकेश ने सोचा था कि कंचन सोफे पर सो जाएगी, लेकिन कंचन थकी हुई थी और बोली, “पापा, इतनी ठंड है, एक बेड में ही सो लेंगे ना। आप तो मेरे पापा हो।”
राकेश ने हामी भर दी, लेकिन उसके मन में एक अजीब सा अहसास हो रहा था। पिछले कुछ महीनों से वह कंचन को अलग नजरों से देखने लगा था। उसकी चाल, उसकी हंसी, उसके टाइट टॉप्स में उभरता बदन… वो खुद को रोकता था, लेकिन आज होटल का ये सिंगल रूम, मद्धिम रोशनी और ठंडी हवा सब कुछ अलग महसूस हो रहा था।
दोनों ने डिनर किया। कंचन ने शॉर्ट नाइट सूट पहन लिया — एक पतला सा टॉप और शॉर्ट्स। उसके स्तन टॉप के अंदर से साफ झांक रहे थे। राकेश बाथरूम से निकला तो देखा कंचन बेड पर लेटी हुई थी, उसके पैर थोड़े खुले हुए।
“पापा, आप भी लेट जाइए ना। कल सुबह जल्दी उठना है,” कंचन ने मुस्कुराते हुए कहा।
राकेश बेड पर लेट गया।Lights बंद थे, लेकिन बाहर से आती हुई हल्की रोशनी में कंचन का चेहरा साफ दिख रहा था। कुछ देर चुप्पी रही। फिर कंचन ने करवट ली और अनजाने में उसका हाथ राकेश की छाती पर पड़ गया।
“पापा… आप गर्म हो रहे हो क्या?” कंचन ने धीरे से पूछा।
राकेश का दिल तेज धड़कने लगा। “नहीं बेटा, बस… ठंड है ना।”
लेकिन कंचन ने हाथ नहीं हटाया। बल्कि थोड़ा और करीब आ गई। “पापा, मुझे भी ठंड लग रही है। आप मुझे थोड़ा गले लगा लीजिए ना… जैसे बचपन में करते थे।”
राकेश ने हिचकिचाते हुए अपनी बाहें फैलाईं। कंचन सीधे उसके सीने से लग गई। उसकी नरम छातियां राकेश की छाती से दब रही थीं। राकेश को अपनी पैंट में हलचल महसूस होने लगी। उसने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन कंचन की सांसें उसके गले पर पड़ रही थीं।
“पापा… आपका दिल बहुत तेज धड़क रहा है,” कंचन ने फुसफुसाते हुए कहा और ऊपर देखा। उनकी नजरें मिलीं। उस पल में सस्पेंस था — न जाने क्या होने वाला था।
राकेश ने धीरे से कंचन के बालों में हाथ फिराया। “कंचन… तुम बड़ी हो गई हो।”
कंचन मुस्कुराई, “हां पापा… और बहुत कुछ समझने लगी हूं।”
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राकेश ने अपनी बेटी कंचन को होटल में चोदा (भाग २)
राकेश का दिल जोरों से धड़क रहा था। कंचन की वो बात और उसकी गर्म सांसें उसके होश उड़ा रही थीं। उसने धीरे से कंचन का चेहरा दोनों हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया।
कंचन ने आंखें बंद कर लीं। पहले तो हल्का सा किस था, लेकिन फिर राकेश ने उसके निचले होंठ को चूसना शुरू कर दिया। कंचन भी साथ देने लगी। उसकी जीभ राकेश की जीभ से टकराई और दोनों की सांसें एक हो गईं। कमरे में सिर्फ उनकी गर्म सांसों और होंठों की चपाक की आवाजें गूंज रही थीं।
“उम्म्म… पापा…” कंचन ने आह भरते हुए कहा और अपने हाथों से राकेश की पीठ को जकड़ लिया।
राकेश का एक हाथ कंचन की पीठ पर फिसला और धीरे-धीरे उसके टॉप के अंदर चला गया। उसकी उंगलियां नरम, गर्म त्वचा को छू रही थीं। कंचन ने हल्का सा कांप लिया। राकेश ने टॉप को ऊपर की तरफ खींचा। कंचन ने खुद उठकर हाथ ऊपर कर दिए ताकि टॉप आसानी से उतर जाए।
अब कंचन सिर्फ ब्रा और शॉर्ट्स में थी। उसकी बड़ी-बड़ी गोल छातियां काले रंग की लेस वाली ब्रा में कैद थीं। राकेश ने ब्रा के हुक पर हाथ लगाया और एक झटके में खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई। राकेश ने उसे दोनों तरफ से खींचकर उतार दिया।
कंचन की छातियां पूरी तरह आजाद हो गईं — गुलाबी निप्पल्स सख्त होकर खड़े थे। राकेश ने एक स्तन को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा। कंचन ने आंखें बंद करके सिर पीछे झुका दिया और कराह उठी, “आह… पापा… धीरे…”
राकेश ने दूसरे स्तन को मुंह में ले लिया। जीभ से निप्पल को चाटने और हल्का-हल्का काटने लगा। कंचन की कमर बार-बार उठ रही थी। उसका एक हाथ राकेश के बालों में था और दूसरे हाथ से वह अपनी शॉर्ट्स के अंदर हाथ डालकर खुद को सहला रही थी।
राकेश ने नीचे झुककर कंचन की शॉर्ट्स का नाडा खोला और उसे पैरों तक सरका दिया। अब कंचन सिर्फ एक पतली सी काली पैंटी में थी। पैंटी का कपड़ा पहले से ही भीगा हुआ था। राकेश ने पैंटी के किनारे पर उंगली फेरते हुए उसे नीचे सरकाना शुरू किया।
कंचन ने अपने पैर उठाकर मदद की। पैंटी पूरी तरह उतर गई। अब कंचन पूरी नंगी लेटी थी। उसकी चिकनी, साफ चूत पर हल्के बाल थे और वो पूरी तरह गीली चमक रही थी।
राकेश ने जल्दी से अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। उसका लंड पहले से ही पूरा खड़ा और मोटा हो चुका था। कंचन ने उसे देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई।
राकेश उसके ऊपर चढ़ गया। उसने कंचन की जांघों को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। कंचन ने कराहते हुए कहा, “पापा… अंदर डालिए ना… मुझे बहुत हो रहा है…”
राकेश ने धीरे से अपना लंड कंचन की चूत के मुंह पर रखा और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। कंचन ने जोर से आह भरी, “आह्ह्ह… पापा… बड़ा मोटा है… धीरे…”
राकेश ने और जोर लगाया। पूरा लंड कंचन की चूत के अंदर चला गया। दोनों के बीच कोई फासला नहीं बचा था। राकेश ने धीमी गति से पिस्टन मूवमेंट शुरू किया। कंचन की छातियां हर धक्के पर हिल रही थीं।
“उम्म्म… आह… पापा… जोर से… हां… ऐसे ही…” कंचन की आंखें आनंद से बंद थीं। उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था। राकेश का चेहरा भी लाल हो गया था। वह कंचन की गर्दन चूस रहा था, छातियां दबा रहा था और लगातार तेज धक्के दे रहा था।
कुछ मिनट बाद राकेश ने पोजीशन बदली। उसने कंचन को घुटनों के बल मोड़ दिया और पीछे से घुसा दिया। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। कंचन तकिए को मुंह से दबाए हुए चीख रही थी, “आआह… पापा… फट जाएगी… लेकिन मत रुकना…”
राकेश ने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोके मारने शुरू कर दिए। कमरे में चूत की चिकनी आवाजें और उनकी कराहें गूंज रही थीं।
अंत में राकेश ने जोर से धक्का दिया और कंचन के अंदर ही अपना सारा माल छोड़ दिया। कंचन भी उसी समय झड़ गई। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। कंचन के चेहरे पर संतोष और शर्म का मिश्रण था।
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राकेश ने अपनी बेटी कंचन को होटल में चोदा (भाग ३)
सुबह के करीब ७ बजे थे। रात की थकान के बावजूद दोनों की नींद जल्दी खुल गई। कंचन पापा की बाहों में लिपटी हुई थी। उसकी नंगी देह राकेश से सटी हुई थी। राकेश ने कंचन के माथे पर किस किया।
“चलो बेटा, नहा लेते हैं। आज बहुत काम है,” राकेश ने कहा।
दोनों नंगे ही बाथरूम में गए। होटल का शावर काफी बड़ा और लग्जरी था। राकेश ने शावर ऑन किया। गर्म पानी उनके शरीर पर गिरने लगा। कंचन ने पापा को पीछे से चिपककर अपनी छातियां उनकी पीठ से रगड़ीं।
“पापा… फिर से हो रहा है…” कंचन ने शरमाते हुए कान में फुसफुसाया।
राकेश मुड़ा और कंचन को दीवार से लगा दिया। दोनों के होंठ फिर से जुड़ गए। गर्म पानी उनके बीच बह रहा था। राकेश ने कंचन की छातियों को दोनों हाथों से मसला, निप्पल्स को उंगलियों से twists किया। कंचन कराह रही थी, “आह… पापा… काट लीजिए…”
राकेश ने झुककर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। कंचन की उंगलियां राकेश के बालों में खिंच गईं।
फिर कंचन ने खुद पहल की। उसने राकेश को शावर की दीवार से टिका दिया और नीचे झुककर उनके मोटे, खड़े लंड को हाथ में पकड़ लिया। उसने जीभ से टिप को चाटा, फिर पूरा मुंह में ले लिया। राकेश ने आह भरी, “कंचन… तुम्हारा मुंह कितना गर्म है…”
कंचन ने कुछ देर चूसने के बाद उठी। उसने पापा की गर्दन पर हाथ डाले और कूदकर उनकी कमर पर चढ़ गई। राकेश ने उसे सहारा दिया। कंचन ने खुद अपना हाथ नीचे ले जाकर लंड को अपनी चूत पर सेट किया और धीरे-धीरे बैठ गई।
“आआह्ह्ह… पापा… पूरा अंदर चला गया…” कंचन की आंखें बंद हो गईं। उसका चेहरा आनंद से लाल था। होंठ कांप रहे थे।
अब कंचन ऊपर-नीचे होने लगी। वह राइड कर रही थी। हर बार जब वह नीचे बैठती, लंड पूरी तरह अंदर चला जाता। पानी उनके शरीर पर गिर रहा था, जिससे चुदाई और चिकनी हो गई थी। कंचन की छातियां हर झटके पर ऊपर-नीचे उछल रही थीं। राकेश ने उन्हें मुट्ठी में भर लिया और दबाते हुए नीचे से धक्के देने लगा।
“हां पापा… जोर से… फाड़ दीजिए अपनी बेटी की चूत को…” कंचन ने बेसुध होकर कहा। उसकी सांसें फूल रही थीं। पसीना और पानी मिलकर उसकी देह चमक रही थी।
राकेश का चेहरा भी तनाव और खुशी से भरा था। वह कंचन की कमर पकड़े हुए था और नीचे से तेजी से ठोके मार रहा था। शावर की दीवार पर कंचन की पीठ टिकी हुई थी। आवाजें तेज हो गई थीं — चूत की छप-छप, पानी की धार और उनकी कराहें।
कंचन की स्पीड बढ़ गई। वह तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। “पापा… मैं आने वाली हूं… आह… आह… हां!” उसकी चूत सिकुड़ने लगी। वह जोर से कांपी और झड़ गई।
राकेश ने भी कुछ और गहरे धक्के दिए और कंचन के अंदर ही गरम वीर्य उंडेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। शावर का पानी अभी भी उनके शरीर को धो रहा था।
कंचन ने पापा के कान में फुसफुसाया, “पापा… अब तो यह हमारा सीक्रेट है… कभी मत भूलना।”
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राकेश ने अपनी बेटी कंचन को होटल में चोदा (भाग ४)
नहाने के बाद दोनों ने कपड़े पहने। कंचन ने एक टाइट फिटिंग वाली सफेद टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहनी थी, जिसमें उसकी जांघें और छातियां बहुत आकर्षक लग रही थीं। राकेश ने शर्ट और पैंट पहनी। दोनों ब्रेकफास्ट के लिए होटल के रेस्टोरेंट में गए।
वे एक कोने वाली टेबल पर बैठे। वेटर ने ऑर्डर ले लिया। जैसे ही वेटर चला गया, कंचन ने अपने पैर सीधे राकेश की जांघों के बीच रख दिए। उसका नरम पैर राकेश की पैंट पर रगड़ने लगा। राकेश चौंक गया।
“कंचन… यहां क्या कर रही हो?” राकेश ने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा।
कंचन मुस्कुराई और पैर को और ऊपर सरकाया। उसके पैर की उंगलियां राकेश के लंड को पैंट के ऊपर से दबा रही थीं। वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हिला रही थी। राकेश का चेहरा लाल हो गया। वह चारों तरफ देख रहा था कि कोई देख तो नहीं रहा।
“पापा… आपका लंड फिर से खड़ा हो गया है ना?” कंचन ने मीठी आवाज में कहा और पैर से दबाव बढ़ा दिया। राकेश ने मुंह से आह दबाई।
ब्रेकफास्ट आ गया, लेकिन दोनों की भूख कुछ और थी। कंचन ने पैर नहीं हटाया। वह चाय पीते हुए पैर से लगातार खेल रही थी। राकेश मुश्किल से खा पा रहा था।
“चलो जल्दी रूम चलते हैं,” राकेश ने अधीर होकर कहा।
जैसे ही वे रूम में पहुंचे, राकेश ने दरवाजा बंद करते ही कंचन को दीवार से लगा दिया। दोनों के होंठ भूखे जानवरों की तरह टकराए। राकेश ने कंचन का टॉप ऊपर किया और ब्रा सहित छातियों को बाहर निकाला। ब्रा को एक तरफ सरकाकर वह जोर-जोर से चूसने लगा।
कंचन ने पापा की पैंट का बटन खोला और जिपर नीचे की। लंड बाहर आते ही उसने हाथ में पकड़ लिया और मुठ मारने लगी।
“पापा… मुझे फिर से चोदिए… जल्दी…”
राकेश ने कंचन की स्कर्ट ऊपर की, पैंटी को एक तरफ सरकाया (पूरी उतारने का समय नहीं था) और सीधा खड़ा होकर लंड अंदर डाल दिया। कंचन की टांगें उसकी कमर में लिपट गईं।
“आह्ह्ह… पापा… गहरा… हां… ऐसे ही!” कंचन चीख उठी।
राकेश दीवार से लगाकर तेज-तेज धक्के मारने लगा। कंचन की छातियां हर धक्के पर उछल रही थीं। उसका चेहरा आनंद से विकृत हो रहा था — आंखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर।
फिर राकेश ने उसे बेड पर पटका। कंचन की स्कर्ट कमर तक चढ़ी हुई थी, पैंटी घुटनों तक। राकेश ने उसके पैर कंधों पर रखे और मिशनरी स्टाइल में जोरदार चुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ “पच-पच” की आवाज हो रही थी।
“पापा… मैं आपकी रंडी हूं… जोर से चोदिए… आह… आह… फट जाएगी मेरी चूत!” कंचन बिल्कुल बेसुध होकर चिल्ला रही थी।
राकेश का पसीना उसकी छातियों पर टपक रहा था। उसने कंचन के निप्पल्स को चुटकियां भरते हुए और तेज गति पकड़ ली। कुछ मिनट बाद कंचन ने अपनी चूत सिकोड़ते हुए जोर से झड़ दिया। उसकी देह कांप रही थी।
राकेश ने भी कुछ और गहरे ठोके मारे और कंचन के अंदर ही छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए बेड पर गिर पड़े।
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राकेश ने अपनी बेटी कंचन को होटल में चोदा (भाग ५)
चेकआउट का समय हो रहा था, लेकिन दोनों की भूख अभी बाकी थी। राकेश ने कंचन की तरफ देखा। कंचन ने शरमाते हुए मुस्कुराकर कहा, “पापा… एक बार और… शावर में… जल्दी।”
दोनों फिर बाथरूम में घुस गए। शावर ऑन करते ही गर्म पानी बहने लगा। इस बार कंचन ने खुद पीछे मुड़कर हाथ दीवार पर टिका दिए और अपनी कमर को पीछे की तरफ निकाल लिया। उसकी गीली, चिकनी गांड और चूत राकेश के सामने पूरी तरह खुले हुए थे।
राकेश ने पीछे से कंचन की कमर पकड़ी। उसने अपनी उंगलियों से कंचन की चूत को सहलाया — वो पहले से ही गीली और फूली हुई थी। फिर उसने अपना मोटा लंड चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया।
“आआआह्ह्ह… पापा…!” कंचन की जोरदार चीख निकल गई। पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। पानी की धार उनके जुड़े हुए शरीर पर गिर रही थी।
राकेश ने कंचन की कमर को मजबूती से पकड़ लिया और डॉगी स्टाइल में तेज-तेज ठोके मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ कंचन की छातियां आगे-पीछे झूल रही थीं। उसकी गांड राकेश के पेट से टकरा रही थी और “पच पच पच” की तेज आवाज शावर की आवाज के साथ मिल रही थी।
“जोर से पापा… अपनी बेटी को गांड मारो… आह… हां… फाड़ दो…!” कंचन बिल्कुल पागल हो गई थी। उसका चेहरा दीवार की तरफ था, लेकिन उसकी आवाज में सिर्फ वासना थी। आंखें बंद, मुंह खुला, लार पानी के साथ मिलकर बह रही थी।
राकेश ने एक हाथ से कंचन के बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उसकी छाती को मसलने लगा। वह तेज गति से लंड अंदर-बाहर कर रहा था। कभी-कभी पूरा बाहर निकालकर फिर से जोर से घुसा देता। कंचन हर बार चीख मारती।
“पापा… मैं फिर आने वाली हूं… तेज… तेज… आह्ह्ह!” कंचन की चूत सिकुड़ी और वह जोर से झड़ गई। उसकी टांगें कांप रही थीं, लेकिन राकेश नहीं रुका।
राकेश ने उसकी कमर और कस ली और आखिरी तेज धक्कों की बौछार कर दी। आखिरकार वह भी कंचन की चूत के अंदर गर्म-गर्म वीर्य छोड़ दिया। दोनों शावर के नीचे ही एक-दूसरे से लिपटकर हांफ रहे थे। पानी उनके पसीने को धो रहा था।
कंचन ने पीछे मुड़कर पापा के होंठों पर किस किया और फुसफुसाई, “पापा… यह सबसे बेहतरीन ट्रिप थी।”
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