देवर ने वो दिया जो पति कभी नहीं दे पाया
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राहुल और प्रिया की शादी को तीन साल हो चुके थे। दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में रहते थे। राहुल एक अच्छी IT कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, लेकिन उसकी व्यस्तता और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से उनकी वैवाहिक जिंदगी में वो आग नहीं थी जो नई-नई शादीशुदा जोड़ों में होती है। प्रिया, जो 26 साल की बेहद खूबसूरत, गोरी और आकर्षक महिला थी, अपने अंदर की इच्छाओं को दबाए रखती। उसकी नजरें हमेशा उदास रहतीं। घर के कामों में व्यस्त रहकर वो अपनी तन्हाई भुलाने की कोशिश करती।
राहुल का छोटा भाई, विक्रम (देवर), 24 साल का था। वो अभी कॉलेज पूरा करके घर पर ही एक स्टार्टअप की तैयारी कर रहा था। विक्रम हमेशा से परिवार का चहेता था – मस्त, हंसमुख, मददगार और प्रिया के प्रति सम्मानजनक। प्रिया उसे “विक्की” कहकर बुलाती थी। विक्रम प्रिया भाभी को बहुत मानता था। वो अक्सर कहता, “भाभी, आपकी मुस्कान देखकर दिन अच्छा हो जाता है।”
धीरे-धीरे परिवार में कुछ बदलाव आए। राहुल की कंपनी में प्रोजेक्ट बढ़ गया, वो रात-रात भर काम करने लगा। कई बार तो हफ्ते भर के लिए बाहर भी चला जाता। प्रिया अकेली पड़ गई। एक शाम जब राहुल फिर से ऑफिस से लेट आया और थका-हारा सो गया, प्रिया बालकनी में बैठी चुपचाप रो रही थी। विक्रम नीचे से आया और उसे देख लिया।
“भाभी, क्या हुआ? आप रो क्यों रही हैं?” विक्रम ने चिंतित स्वर में पूछा।
प्रिया ने आँसू पोंछे और मुस्कुराने की कोशिश की। “कुछ नहीं विक्की… बस थोड़ा सा मन उदास है। राहुल इतना व्यस्त रहता है न…”
विक्रम उसके पास बैठ गया। दोनों देर तक बातें करते रहे। प्रिया ने पहली बार अपने दिल की बात खोली – कि वो कितनी अकेली महसूस करती है, कि राहुल उसकी भावनाओं और शारीरिक जरूरतों को समझ नहीं पाता। विक्रम ने चुपचाप सुना, उसका हाथ प्रिया के कंधे पर रखा और बोला, “भाभी, आप अकेली नहीं हैं। मैं हूँ ना। जो भी चाहिए, बताइए।”
इसके बाद दोनों के बीच की बातचीत बढ़ने लगी। विक्रम प्रिया को घुमाने ले जाता, उसके पसंदीदा खाने लाता, रात को जब राहुल सो जाता तो दोनों छत पर बैठकर गप्पें मारते। प्रिया को विक्रम की कंपनी में सुकून मिलने लगा। वो विक्रम को अपने सपनों के बारे में बताती – यात्रा करने की इच्छा, नाचने की, और वो सब जो राहुल कभी पूरा नहीं कर पाया।
एक दिन परिवार के साथ पहाड़ी इलाके में घूमने का प्लान बना। राहुल को अचानक ऑफिस का काम आ गया, वो नहीं जा सका। प्रिया, विक्रम और विक्रम की दोस्त नेहा (जो परिवार की जान-पहचान थी) साथ गए। नेहा एक खुशमिजाज लड़की थी, जो प्रिया की अच्छी सहेली बन चुकी थी। ट्रिप के दौरान विक्रम और प्रिया बहुत करीब आए। रात में कैंपफायर के पास बैठे हुए विक्रम ने प्रिया का हाथ थाम लिया। “भाभी, आप बहुत खूबसूरत हैं। राहुल भैया lucky हैं, लेकिन… वो आपको वो खुशी नहीं दे पा रहे जो आप deserve करती हैं।”
प्रिया का दिल तेज धड़का। उसने कुछ नहीं कहा, बस विक्रम की आँखों में देखती रही।
घर लौटने के बाद एक रात राहुल फिर से बाहर था। घर में सिर्फ प्रिया और विक्रम थे। बारिश तेज हो रही थी। बिजली चली गई। प्रिया डरी हुई थी। विक्रम मोमबत्ती लेकर उसके कमरे में आया।
“भाभी, डरो मत। मैं हूँ ना।”
दोनों बातें करते-करते पास आ गए। प्रिया की साँसें तेज हो रही थीं। विक्रम ने धीरे से उसकी ठोड़ी उठाई और बोला, “भाभी, अगर आप चाहें तो… मैं वो दे सकता हूँ जो भैया नहीं दे पाए।”
प्रिया ने एक पल सोचा, फिर उसकी आँखों में इच्छा देखकर विक्रम ने उसे पास खींच लिया। उनके होंठ मिले। पहला किस लंबा और गहरा था। प्रिया के शरीर में बिजली दौड़ गई। विक्रम ने उसे बिस्तर पर लिटाया और धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगा।
अब चुदाई का हिस्सा शुरू होता है:
प्रिया का गोरा, नरम शरीर मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहा था। उसके बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और मोटी जांघें विक्रम को पागल कर रही थीं। विक्रम ने उसके ब्लाउज के हुक खोले, ब्रा उतारी और उसके स्तनों को चूसने लगा। प्रिया की चीख निकल गई, “आह्ह विक्की… धीरे…”
विक्रम नीचे उतरा। उसने प्रिया की साड़ी और पेटीकोट समेत पैंटी उतार दी। प्रिया की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और पहले से ही भीगी हुई थी। विक्रम ने अपनी उँगलियाँ उसकी चूत की फाक पर फेरीं। प्रिया तड़प उठी। “विक्की… मत तड़पाओ… प्लीज…”
विक्रम ने अपनी जीभ से प्रिया की चूत चाटना शुरू किया। वो पूरी चूत को चाट रहा था – क्लिटोरिस को चूसता, अंदर जीभ डालता, और दोनों हाथों से उसके स्तनों को मसलता। प्रिया जोर-जोर से कराह रही थी, “आह्ह… उफ्फ… विक्की… तुम्हारी जीभ… जन्नत है… हां… और चूसो मेरी चूत को…”
प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आ गया। वो विक्रम के सिर को अपनी जांघों में दबाए हुए चीखी, “मैं आ गई… आह्हह!”
लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने अपना 7 इंच का मोटा, सख्त लंड बाहर निकाला। प्रिया ने उसे देखा और लार टपकाने लगी। “इतना बड़ा… राहुल का तो कभी खड़ा भी नहीं होता…”
विक्रम ने प्रिया की टांगें फैलाईं और धीरे से अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्का। “आआआह्ह!” प्रिया चिल्लाई। पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। विक्रम ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ प्रिया की चूत से “पच-पच” की आवाज आ रही थी।
“जोर से विक्की… फाड़ दो मेरी चूत… हां… जो राहुल नहीं दे सका वो तुम दे रहे हो… चोदो मुझे… तुम्हारा देवर लंड मेरी चूत का मालिक है आज से!”
विक्रम पागल होकर चोद रहा था। कभी मिशनरी में, कभी डॉगी स्टाइल में। प्रिया की गांड थपथपा रहा था। वो उसके बाल पकड़कर पीछे से जोर-जोर से ठोक रहा था। प्रिया की चूत लाल हो गई थी, लेकिन वो और मांग रही थी। विक्रम ने उसे गोद में उठाकर चोदा, स्तनों को चूसते हुए। आखिरकार विक्रम ने अंदर ही झड़ दिया। गर्म वीर्य प्रिया की चूत में भर गया।
दोनों थककर लेट गए। प्रिया विक्रम के सीने पर सिर रखे मुस्कुरा रही थी। “तुमने वो दिया जो पति कभी नहीं दे पाया… अब ये चूत सिर्फ तुम्हारी है।”
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परिवार की नजर बचाकर नियमित चुदाई
राहुल अगले दिन शाम को वापस आ गया। थका-हारा, लेकिन प्रिया को देखकर मुस्कुराया। प्रिया ने भी नॉर्मल एक्टिंग की, लेकिन उसके शरीर में अब विक्रम की चुदाई का नशा था। रात को राहुल ने कोशिश की, लेकिन जैसे हमेशा होता था – बस कुछ मिनटों की बेकार कोशिश और फिर सो जाना। प्रिया का मन विक्रम के मोटे लंड और जोरदार धक्कों को याद करके तरस रहा था।
अगले कुछ दिन दोनों ने बहुत सावधानी बरती। दिन में सामान्य व्यवहार, लेकिन रात को मौका मिलते ही विक्रम प्रिया के कमरे में घुस जाता। कभी बाथरूम में, कभी छत पर, कभी राहुल ऑफिस गया तो पूरा घर उनके लिए।
एक दोपहर जब राहुल ऑफिस गया, विक्रम प्रिया को रसोई में पीछे से पकड़ लिया। “भाभी, मैं अब आपकी चूत के बिना नहीं रह सकता।” प्रिया ने हंसते हुए कहा, “तो ले लो अपनी भाभी की चूत…” विक्रम ने प्रिया को किचन काउंटर पर झुकाया, साड़ी ऊपर की, पैंटी एक तरफ सरकाई और खड़े-खड़े ही अपना लंड अंदर ठेल दिया। प्रिया मुंह पर हाथ रखकर दबे स्वर में चीख रही थी, “आह्ह विक्की… तेज… फाड़ दो…” विक्रम ने 10 मिनट तक जोर-जोर से चोदा और अंदर ही झड़ गया। दोनों जल्दी से कपड़े ठीक करके अलग हो गए।
इस तरह उनकी गुप्त चुदाई नियमित हो गई। कभी-कभी विक्रम प्रिया को व्हाट्सएप पर अपने लंड की फोटो भेजता और प्रिया अपनी भीगी चूत की सेल्फी भेजकर जवाब देती। दोनों का नशा बढ़ता जा रहा था।
नेहा का एंट्री
नेहा विक्रम की कॉलेज टाइम की अच्छी दोस्त थी। वो अक्सर घर आती-जाती रहती थी। 25 साल की, गोरी, सेक्सी बॉडी वाली लड़की – बड़े स्तन, गोल गांड। वो प्रिया को भी बहुत पसंद करती थी और “भाभी” कहकर बुलाती थी।
एक शाम राहुल ऑफिस में था। विक्रम प्रिया को उसके बेडरूम में चोद रहा था। प्रिया डॉगी स्टाइल में थी, विक्रम पीछे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। कमरे में चुदाई की “पच-पच” आवाज और प्रिया की कराहें गूंज रही थीं – “हां विक्की… मारो… मेरी चूत फाड़ दो… तुम्हारा लंड ही मेरा असली पति है… आह्हह!”
तभी दरवाजा हल्का खुला। नेहा बिना नॉक किए अंदर आई (क्योंकि वो पहले भी आ चुकी थी) और फ्रीज हो गई। उसके सामने प्रिया भाभी नंगी, गांड ऊपर करके चुद रही थी और विक्रम उसकी चूत में लंड डालकर ठोक रहा था।
“क्या… क्या हो रहा है ये?!” नेहा चौंककर बोली।
प्रिया डर गई, विक्रम भी रुक गया। लेकिन नेहा के चेहरे पर गुस्सा नहीं, बल्कि उत्तेजना थी। उसने दरवाजा बंद किया और बोली, “तो ये चल रहा है घर में… भाभी आप भी…?”
प्रिया शर्म से लाल हो गई। विक्रम ने लंड बाहर निकालकर कहा, “नेहा, प्लीज किसी को मत बताना…”
नेहा मुस्कुराई, अपनी टॉप उतारते हुए बोली, “बताऊंगी क्यों? मैं भी शामिल होना चाहती हूँ। बहुत दिनों से विक्रम को चोदने का मन था, और भाभी… आप तो बहुत हॉट हो।”
तीनों की चुदाई – विस्तार से
नेहा ने बाकी कपड़े भी उतार दिए। उसकी बॉडी देखकर प्रिया और विक्रम हैरान रह गए – बिल्कुल पॉर्न स्टार जैसी। तीनों बेड पर थे। सबसे पहले विक्रम ने नेहा को चूम लिया, फिर प्रिया को। दोनों महिलाएं एक-दूसरे को चूमने लगीं। प्रिया ने नेहा के बड़े स्तनों को चूसना शुरू किया। नेहा कराह रही थी, “भाभी… आपकी जीभ जादू है…”
विक्रम ने प्रिया को लिटाया और उसकी चूत में फिर से लंड डाल दिया। साथ ही नेहा प्रिया के मुंह पर बैठ गई। प्रिया नेहा की चूत चाट रही थी जबकि विक्रम प्रिया को जोर-जोर से चोद रहा था। कमरा कराहनों, चुदाई की आवाजों और “आह्ह… हां… चूसो… फाड़ दो…” से भर गया था।
फिर पोजीशन बदला। विक्रम नेहा को चोदने लगा। नेहा कुत्ते की तरह बैठी थी, विक्रम पीछे से उसकी चूत में लंड ठेल रहा था। प्रिया नेहा के नीचे लेट गई और नेहा की चूत से निकलते लंड को चूस रही थी। नेहा चीख रही थी, “विक्रम… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है… भाभी आप भी चूसो… मैं पागल हो रही हूँ…”
विक्रम ने प्रिया को भी डॉगी में चोदा। नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी। फिर विक्रम दोनों को बारी-बारी चोदता रहा। प्रिया की चूत लाल हो चुकी थी, नेहा की चूत से भी रस बह रहा था।
आखिर में विक्रम ने दोनों को घुटनों पर बिठाया। दोनों महिलाएं विक्रम के लंड को बारी-बारी चूस रही थीं – प्रिया गोलियाँ चूस रही थी, नेहा शाफ्ट चाट रही थी। विक्रम ने दोनों के मुंह में बारी-बारी वीर्य छोड़ा। प्रिया और नेहा ने वीर्य एक-दूसरे को चूमकर शेयर किया।
तीनों थककर लेट गए। प्रिया ने कहा, “अब हम तीनों का राज है… लेकिन बहुत सावधानी से।”
नेहा हंसी, “हां भाभी… अब हम दोनों आपकी चूत की सेवा करेंगे।”
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घर में और खतरा
राहुल के माता-पिता, यानी सास-ससुर, अचानक पंजाब से दिल्ली आ गए। सास, शीला (५२ साल) बहुत सख्त और पारंपरिक थीं, जबकि ससुर, रमेश (५५ साल) थोड़े शांत लेकिन हर बात पर नजर रखने वाले। उन्होंने कहा, “बेटा, तुम दोनों की शादी को तीन साल हो गए, अब पोता-पोती की उम्मीद है। हम कुछ दिनों के लिए यहीं रहेंगे।”
घर का माहौल अचानक बदल गया। प्रिया, विक्रम और नेहा तीनों घबरा गए। अब चुपके-चुपके मिलना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन खतरे का रोमांच भी बढ़ गया था।
रात को सब सो जाते तो विक्रम और नेहा प्रिया के कमरे में चुपके से आने लगे। एक रात सास शीला बाथरूम जाने के लिए उठीं। प्रिया के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर का नजारा देखकर उनकी आँखें फट गईं – लेकिन वो चुपचाप वापस चली गईं (बाद में पता चलेगा)।
छुपकर चुदाई का रोमांच
अगली दोपहर सास-ससुर बाजार गए और राहुल ऑफिस। घर में सिर्फ तीनों थे, लेकिन सिर्फ १ घंटे का समय था। विक्रम ने प्रिया को जल्दी से अपनी गोद में उठाया और सोफे पर बिठाया। नेहा ने प्रिया की साड़ी ऊपर की और उसकी चूत चाटने लगी। प्रिया दबी हुई आवाज में कराह रही थी, “आह्ह… नेहा… तेज… विक्की जल्दी अपना लंड दो…”
विक्रम ने अपना मोटा लंड निकाला और प्रिया के मुंह में ठेल दिया। प्रिया गहरी गले तक चूस रही थी जबकि नेहा उसकी चूत में दो उँगलियाँ डालकर अंदर-बाहर कर रही थी। अचानक बाहर कार की आवाज आई। तीनों चौंक गए।
“जल्दी!” प्रिया ने कहा। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने प्रिया को कुर्सी पर झुकाया, पीछे से एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया और तेज-तेज धक्के मारने लगा। “पच… पच… पच…” की आवाज पूरे हॉल में गूंज रही थी। प्रिया मुंह पर हाथ रखकर दबे स्वर में चीख रही थी, “विक्की… फाड़ दो… खतरे में भी तुम्हारा लंड कितना अच्छा लग रहा है… आह्हह!”
नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी। विक्रम ने नेहा को भी बारी दी – उसकी चूत में लंड डाला और जोर-जोर से ठोका। नेहा कसमसा रही थी, “भाभी… देखो… विक्रम कितना जोर से चोद रहा है… मैं झड़ने वाली हूँ…”
सभी तीनों ने जल्दी-जल्दी ऑर्गेज्म लिया। विक्रम ने प्रिया की चूत में और नेहा के मुंह में वीर्य छोड़ा। ठीक उसी समय मुख्य दरवाजे की घंटी बजी। तीनों कपड़े ठीक करके सामान्य बन गए। सास-ससुर अंदर आए। शीला ने प्रिया को देखा जो अभी भी साँसें हाँफ रही थी और मुस्कुराते हुए बोली, “क्या हुआ बेटी, चेहरा लाल क्यों है?”
प्रिया शरमा गई, “बस… थोड़ी गर्मी है माँजी।”
रात को खतरा और बढ़ गया। सास-ससुर बगल वाले कमरे में सो रहे थे। विक्रम ने प्रिया और नेहा को छत पर बुलाया। वहाँ अंधेरा था। तीनों ने कपड़े उतारे। विक्रम लेट गया। प्रिया उसके लंड पर बैठकर चुदने लगी – ऊपर-नीचे उछल रही थी। उसके बड़े स्तन उछल रहे थे। नेहा विक्रम के मुंह पर बैठकर अपनी चूत चटवा रही थी।
प्रिया फुसफुसाई, “विक्की… धीरे… नीचे सास-ससुर सो रहे हैं… अगर आवाज गई तो…” लेकिन यही खतरा उन्हें और उत्तेजित कर रहा था। विक्रम ने प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से ऊपर से धक्के दिए। प्रिया का दूधिया शरीर चाँदनी में चमक रहा था।
फिर नेहा ने प्रिया को चाटा। प्रिया ६९ पोजीशन में नेहा की चूत चूस रही थी जबकि विक्रम नेहा को पीछे से चोद रहा था। तीनों की कराहें दबी हुई थीं लेकिन रोमांच इतना था कि सब जल्दी-जल्दी झड़ गए।
अगले दिन सास शीला ने प्रिया से अकेले में बात की, “बेटी, कुछ तो गड़बड़ है। रात को मैंने आवाजें सुनी थीं।” प्रिया डर गई लेकिन कुछ नहीं बोली। अब खतरा और बढ़ गया था।
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तीनों की रात की छुपी पार्टी
सास-ससुर के आने के बाद तनाव तो बढ़ गया था, लेकिन तीनों का नशा भी कम नहीं हुआ था। एक रात राहुल भी थककर जल्दी सो गया। सास शीला और ससुर रमेश बगल वाले कमरे में गहरी नींद में थे। रात के १ बजे थे।
विक्रम ने प्रिया और नेहा को व्हाट्सएप पर मैसेज किया: “अब या कभी नहीं। पूरे घर में आज हम नंगे घूमेंगे।”
तीनों चुपके से प्रिया के कमरे में मिले। कपड़े एक-एक करके उतार दिए। अब तीनों पूरी तरह नंगे थे। प्रिया की गोरी चूत अभी से चमक रही थी, नेहा के बड़े स्तन उभरे हुए थे और विक्रम का लंड आधा खड़ा हो चुका था।
पार्टी शुरू – लिविंग रूम
सबसे पहले लिविंग रूम। सोफे पर विक्रम बैठ गया। प्रिया उसके लंड पर उल्टी बैठकर चुदने लगी। उसकी मोटी गांड विक्रम की जांघों पर हर धक्के पर तड़प रही थी। “आह्ह विक्की… गहरा… पूरा घुसा दो…” नेहा प्रिया के सामने घुटनों पर बैठकर उसकी क्लिटोरिस चूस रही थी। प्रिया दोनों हाथों से अपने स्तनों को दबा रही थी।
विक्रम ने प्रिया को उठाकर सोफे पर लिटाया और मिशनरी स्टाइल में जोर-जोर से चोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ सोफा हिल रहा था। “पच-पच-पच” की तेज आवाज गूंज रही थी। प्रिया दबी हुई चीखें मार रही थी, “फाड़ दो मेरी चूत… सास-ससुर बगल में सो रहे हैं… और तुम मुझे इस तरह ठोक रहे हो… हां… और जोर से!”
नेहा विक्रम के पीछे आ गई और उसकी गांड चाटने लगी। विक्रम पागल हो गया। उसने नेहा को भी सोफे पर लिटाया और उसकी चूत में लंड ठेल दिया। प्रिया नेहा के मुंह पर बैठ गई। नेहा प्रिया की चूत को जोर-जोर से चाट रही थी। तीनों का पसीना एक हो रहा था।
किचन में चुदाई
फिर तीनों नंगे ही किचन में गए। प्रिया काउंटर पर बैठ गई। विक्रम ने उसकी टांगें फैलाकर खड़े-खड़े चोदा। प्रिया पीछे झुककर काउंटर पकड़े हुए थी। विक्रम का लंड पूरी गहराई तक जा रहा था। “आआह्ह… विक्की… तुम्हारा लंड मेरी चूत का राजा है… चोदो… रस निकाल दो…”
नेहा पीछे से विक्रम को चूम रही थी और उसकी गांड में उंगली डाल रही थी। फिर विक्रम ने नेहा को काउंटर पर चढ़ाया और उसकी गांड में लंड घुसाने की कोशिश की। नेहा दर्द और मजे से चीखी, “धीरे… पहली बार गांड में… आह्ह… पूरा घुस गया!” विक्रम ने नेहा की गांड जमकर चोदी। प्रिया नीचे बैठकर विक्रम की गोलियों को चूस रही थी।
किचन में बर्तनों की हल्की आवाज के साथ चुदाई की आवाजें मिल रही थीं।
बाथरूम में वाइल्ड सेक्स
सबसे रोमांचक था बाथरूम। तीनों शावर जलाकर नहाने लगे। गीले शरीरों पर पानी बह रहा था। विक्रम ने प्रिया को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी की धार के साथ उसके धक्के और तेज हो गए। प्रिया की चीखें शावर की आवाज में छुप रही थीं। “हां… चोदो… मेरी चूत को पानी के साथ भर दो…”
नेहा प्रिया के पीछे आ गई। उसने प्रिया की गांड में उंगली डाली और स्तनों को मसलने लगी। फिर विक्रम ने दोनों को बारी-बारी शावर के नीचे ठोका। प्रिया नेहा की चूत चाट रही थी जबकि विक्रम नेहा को पीछे से चोद रहा था। तीनों के मुंह से बस “आह्ह… फक… हां… और…” निकल रहा था।
आखिरकार विक्रम ने प्रिया की चूत में, नेहा की गांड में और दोनों के मुंह में वीर्य छोड़ा। तीनों थककर फर्श पर लेट गए। पानी अभी भी बह रहा था।
रात भर तीनों ने पूरे घर में घूम-घूमकर चुदाई की – बालकनी में खड़े होकर, सीढ़ियों पर, यहां तक कि सास-ससुर वाले कमरे के ठीक बाहर वाले कॉरिडोर में भी एक क्विकी। खतरे का रोमांच उन्हें बार-बार झड़वा रहा था।
सुबह होने से पहले तीनों अपने-अपने कमरों में चले गए। लेकिन अब ये खेल और खतरनाक हो गया था।
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