ससुर जी का मोटा लंड देखकर बहू पागल हो गई
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अमित की शादी को दो साल हो चुके थे। उसकी पत्नी नेहा, 24 साल की जवान, गोरी-चिट्टी, भरे-भरे शरीर वाली बहू थी। घर में अमित के माता-पिता रहते थे। ससुर जी, हरिशंकर सिंह, 46 साल के थे लेकिन अभी भी बहुत तगड़े और मर्दाना लगते थे। चौड़े सीने, मोटी मूंछें और हमेशा लुंगी-बनियान में रहते थे। अमित अक्सर नौकरी के सिलसिले में बाहर रहता था, इसलिए नेहा ज़्यादातर ससुर-सास के साथ ही घर संभालती थी।
नेहा अच्छी बहू थी, लेकिन अंदर ही अंदर वो बहुत उदास और शारीरिक रूप से असंतुष्ट रहती थी। अमित जब घर आता तो थकान के कारण बस सो जाता।
एक गर्म दोपहर की बात है। सास जी मंदिर गई हुई थीं। नेहा ऊपर कपड़े सुखा रही थी। नीचे से हरिशंकर सिंह की आवाज आई, “नेहा बेटा, एक ग्लास पानी देना।”
नेहा नीचे गई। ससुर जी नहाकर बाथरूम से निकल रहे थे। उनकी लुंगी कमर पर ढीली बंधी थी। नेहा ने ग्लास थमाया। ठीक उसी पल लुंगी थोड़ी सरक गई।
नेहा की नजर उनके मोटे, काले, नसों वाले लंड पर पड़ गई। वो आधा खड़ा और बहुत मोटा था। नेहा सांस रोककर रह गई। उसने पहले कभी इतना भारी और मोटा लंड नहीं देखा था।
उस दिन से नेहा का मन अस्थिर हो गया। वो बार-बार उसी दृश्य को याद करके भीग जाती। रात को अकेले में अपनी चूत में उँगलियाँ डालकर ससुर जी के लंड की कल्पना करने लगी। वो पागल हो रही थी।
एक शाम को सास जी अपनी बहन के यहाँ चली गईं। घर में सिर्फ हरिशंकर सिंह और नेहा थे। बारिश हो रही थी और बिजली चली गई।
नेहा मोमबत्ती लेकर ससुर जी के कमरे में गई।
“बाबूजी… कुछ चाहिए आपको?”
बातों-बातों में नेहा ने हिम्मत करके कहा, “बाबूजी… उस दिन… मैंने देख लिया था।”
हरिशंकर सिंह मुस्कुराए, “क्या देखा था बेटी?”
नेहा शर्माते हुए बोली, “आपका… वो… बहुत बड़ा और मोटा है।”
माहौल गर्म हो गया। ससुर जी ने नेहा को अपनी गोद में खींच लिया और जोरदार किस किया। फिर उन्होंने नेहा की साड़ी खोलनी शुरू कर दी…
हरिशंकर सिंह ने नेहा को बिस्तर पर लिटा दिया। उन्होंने नेहा के पैर फैलाए और उसके पेटीकोट को भी उतार दिया। नेहा की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और पहले से ही रस से तर थी। ससुर जी ने अपनी जीभ से चूत की फांक को चाटना शुरू किया। नेहा तड़प उठी, “आह… बाबूजी… क्या कर रहे हो… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”
वे अपनी मोटी जीभ से चूत के ऊपरी हिस्से (क्लिटोरिस) को चूस रहे थे, फिर पूरी फांक पर लिक्विड की तरह चाट रहे थे। नेहा की कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी। कुछ ही देर में नेहा का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उसका पूरा शरीर काँप उठा और चूत से गर्म रस निकलकर ससुर जी के मुंह में चला गया।
“अब असली खेल शुरू होता है बेटी…”
ससुर जी ने अपने घुटनों के बल बैठकर लंड का मोटा सिरा नेहा की चूत पर रखा। उन्होंने धीरे से रगड़ा। नेहा काँप गई। “बाबूजी… डर लग रहा है… ये अंदर कैसे जाएगा… बहुत मोटा है…”
“आराम से बेटी… पहले सिरा अंदर करूँगा।”
ससुर जी ने हल्का दबाव डाला। मोटा सिरा नेहा की तंग चूत की फांक को फैलाते हुए अंदर घुसने लगा। नेहा की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी आह निकली — “आह्ह्ह्ह… धीरे… फट रही है… उफ्फ…”
लंड का सिर्फ सिरा ही अंदर गया था लेकिन नेहा को लगा जैसे कोई मोटा खंबा घुस रहा हो। ससुर जी रुक गए, फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे। हर इंच के साथ नेहा की चूत की दीवारें पूरी तरह फैल रही थीं। नेहा के नाखून ससुर जी की पीठ में गड़ रहे थे।
“आधा घुस गया है बेटी… देख कितना गर्म और टाइट है तेरी चूत…”
नेहा दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी। “और अंदर… बाबूजी… पूरा डाल दीजिए… मुझे अपना बनाइए…”
ससुर जी ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरे 9 इंच का मोटा लंड एक ही झटके में नेहा की चूत के सबसे अंदर तक चला गया। नेहा जोर से चीख पड़ी, “माँ… मार डाला… बहुत गहरा चला गया… आह्ह्ह…”
अब ससुर जी रुक नहीं रहे। उन्होंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर उनका मोटा लंड नेहा की चूत को पूरी तरह फाड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। पेल्विक बोन की टक्कर की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी — चप… चप… चप… पट… पट…
नेहा पागल हो गई थी। “जोर से… बाबूजी… और जोर से चोदिए… फाड़ दीजिए अपनी बहू की चूत… हां… यही… यही मजा है… आह… उफ्फ… कितना मोटा है आपका लंड… मेरी चूत भर गई है…”
ससुर जी ने नेहा के पैर अपने कंधों पर रख दिए और और भी गहराई से चोदने लगे। लंड हर बार गर्भाशय तक टकरा रहा था। नेहा की आँखें ऊपर चढ़ गई थीं। वो लगातार झड़ रही थी — दूसरा, तीसरा, चौथा ऑर्गेज्म।
फिर उन्होंने पोजीशन बदला। नेहा को कुत्ते की तरह मोड़ा और पीछे से घुसा दिया। इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था। ससुर जी ने नेहा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह चोदा। नेहा की चूत से सफेद फेन निकलने लगा।
“बाबूजी… मैं मर जाऊँगी… इतना मजा कभी नहीं आया… आपका लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर देता है… हर धक्के में झनझनाहट हो रही है…”
आखिरी दौर में ससुर जी ने नेहा को अपनी गोद में उठा लिया (स्टैंडिंग फकिंग) और जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगे। नेहा उनके गले से लिपटी हुई चीख रही थी।
आखिरकार ससुर जी ने चिल्लाते हुए कहा, “ले बेटी… ले मेरे वीर्य…”
उन्होंने नेहा को बिस्तर पर लिटाया और मुंह में लंड ठूंस दिया। गाड़े, गर्म, मोटे वीर्य की कई धारें नेहा के गले में गईं। नेहा ने लप-लप करके पूरा पी लिया।
दोनों पसीने से तर-बतर होकर लेट गए। नेहा ससुर जी की छाती पर सिर रखकर बोली, “बाबूजी… अब मैं आपकी हूँ… जब चाहे चोद लीजिए…”
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अगले दिन चुपके से जमकर चोदा
अगले दिन सुबह सास जी घर पर ही थीं। नेहा दिन भर ससुर जी को देखकर शरमा रही थी। दोनों की नजरें मिलती तो नेहा की चूत फिर से गीली हो जाती। ससुर जी ने दिन में ही मौका ढूंढकर नेहा के कान में फुसफुसाया, “शाम को सास सो जाएं तो मेरे कमरे में चुपके से आना… आज तुझे सच में रंडी बनाऊंगा।”
शाम होते ही सास जी थककर सो गईं। नेहा चुपके से अपने कमरे से निकली और हरिशंकर सिंह के कमरे में घुस गई। दरवाजा बंद करते ही ससुर जी ने नेहा को दीवार से सटा दिया और जोरदार किस किया।
“आज रात भर तुझे बांधकर चोदूंगा… तैयार है ना मेरी छोटी रंडी?”
नेहा शर्म से लाल हो गई लेकिन सिर हिला दिया।
ससुर जी ने अलमारी से पुरानी साड़ी की पट्टियाँ निकालीं। उन्होंने नेहा के दोनों हाथ पीछे बांध दिए और फिर उसके पैर भी फैलाकर बिस्तर के सिराने से बांध दिए। नेहा अब पूरी तरह बंधी हुई, बेजुबान और खुली हुई अवस्था में थी। सिर्फ उसकी साड़ी कमर तक सरकी हुई थी।
कठोर चुदाई का विस्तृत वर्णन:
ससुर जी ने नेहा की साड़ी पूरी तरह उठा दी। उनकी उँगलियाँ नेहा की चूत में घुस गईं। पहले दो, फिर तीन उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर करने लगे। नेहा तड़प रही थी, “बाबूजी… धीरे… आह…”
“चुप… आज तेरी हर जगह चोदूंगा।”
उन्होंने अपना मोटा लंड निकाला और नेहा की चूत पर रगड़ा। फिर एक झटके में पूरा लंड अंदर ठेल दिया। बंधी हुई नेहा जोर से चीखी, “आह्ह्ह… मोटा… फट गई…”
ससुर जी ने बिना रुके तेज-तेज धक्के मारे। बंधे हाथ-पैरों की वजह से नेहा कुछ नहीं कर पा रही थी। हर धक्का बहुत गहरा और जोरदार था। नेहा की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी।
“कैसा लग रहा है मेरी रंडी… बंधकर चुदने में मजा आ रहा है ना?”
“हां… बाबूजी… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से चोदिए… मैं आपकी रंडी हूँ…”
कुछ देर चूत चोदने के बाद ससुर जी ने लंड निकाला। नेहा की चूत से रस बह रहा था। उन्होंने लंड को नेहा की गांड पर रखा।
“अब तेरी गांड लूँगा…”
नेहा डर गई, “बाबूजी… नहीं… वो तो बहुत छोटी है… आपका लंड नहीं जाएगा…”
लेकिन ससुर जी ने अपनी उँगलियों पर थूक लगाया और नेहा की गांड के छेद में घुसाने लगे। पहले एक उंगली, फिर दो। नेहा कराह रही थी। फिर उन्होंने लंड का मोटा सिरा गांड पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डाला।
नेहा की आँखें फट गईं। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… निकालिए… बहुत मोटा है…”
धीरे-धीरे मोटा सिरा गांड में घुस गया। नेहा दांत भींच रही थी। ससुर जी ने धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में उतार दिया। नेहा की गांड पूरी तरह फट चुकी थी।
“अब असली मजा शुरू होता है…”
ससुर जी ने नेहा की गांड में जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ नेहा चीख रही थी। दर्द धीरे-धीरे भारी मजा में बदल रहा था।
“बाबूजी… अब मजा आ रहा है… गांड मारिए… पूरी गांड फाड़ दीजिए… आह… हां… गहरा…”
वे लगातार गांड चोदते रहे। कभी चूत में, कभी गांड में लंड बदलते रहे। नेहा कई बार झड़ चुकी थी। उसका पूरा शरीर पसीने और रस से भीग गया था।
फिर उन्होंने नेहा के बंधन खोले और उसे कुत्ते की तरह मोड़ा। बाल पकड़कर घोड़े की तरह चोदा — कभी चूत, कभी गांड। कमरे में चप-चप, थप-थप की आवाजें और नेहा की चीखें गूंज रही थीं।
आखिरी दौर में ससुर जी ने नेहा को घुटनों के बल बिठाया और मुंह में पूरा लंड ठूंस दिया। गले तक चोदते हुए उन्होंने मोटा-मोटा वीर्य नेहा के मुंह में भर दिया। नेहा सब पी गई।
रात भर दोनों इसी तरह चुदाई करते रहे। नेहा पूरी तरह थककर ससुर जी की बाहों में सो गई।
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गर्भवती होने का संकेत…
दो हफ्ते बीत गए थे। नेहा के शरीर में अजीब बदलाव आने लगे थे। सुबह उठते ही उल्टी जैसा महसूस होता, स्तन भारी और संवेदनशील हो गए थे, और सबसे बड़ी बात — उसकी चूत हमेशा गीली और गर्म रहती।
एक दिन दोपहर में नेहा ने घरेलू प्रेग्नेंसी टेस्ट किट से जांच की। दो लाल रेखाएं साफ दिख रही थीं। नेहा का दिल जोर से धड़कने लगा। वो जानती थी कि ये अमित का नहीं, बल्कि ससुर जी का बच्चा था।
उस शाम जब सास जी मंदिर गईं, नेहा चुपके से ससुर जी के पास गई। उसने उनके हाथ में टेस्ट किट थमा दी और शर्माते हुए सिर झुका लिया।
हरिशंकर सिंह ने देखा तो उनकी आँखें चमक उठीं। उन्होंने नेहा को गले से लगा लिया और बोले, “मेरी बहू… मेरे बच्चे की माँ बन गई है। अब तो तुझे और ज्यादा चोदना पड़ेगा।”
नेहा ने शरमाते हुए कहा, “बाबूजी… लेकिन अब तो सावधानी से…”
ससुर जी मुस्कुराए, “चिंता मत कर… मैं जानता हूँ। लेकिन तेरी चूत अब भी मेरी है।”
उसी रात की कठोर चुदाई:
रात को सास जी सो जाने के बाद नेहा फिर से ससुर जी के कमरे में चुपके से आ गई। इस बार ससुर जी और भी उत्तेजित थे। उन्होंने नेहा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी साड़ी ऊपर कर दी। नेहा के स्तन अब पहले से ज्यादा भरे और निप्पल गहरे रंग के हो गए थे।
ससुर जी ने दोनों स्तनों को चूसना शुरू किया। नेहा कराह उठी, “आह… बाबूजी… बहुत संवेदनशील हो गए हैं… धीरे चूसिए… उफ्फ…”
उन्होंने नेहा की चूत पर हाथ रखा। “देख, कितनी गीली है… गर्भवती होकर भी मेरे लंड की भूखी है।”
ससुर जी ने अपना मोटा लंड निकाला और नेहा की चूत पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। नेहा की चूत अब पहले से थोड़ी ज्यादा नरम और गीली थी। लंड आसानी से लेकिन पूरी गहराई तक चला गया।
“आह्ह्ह… बाबूजी… बहुत गहरा जा रहा है… बच्चे को कुछ नहीं होगा ना?”
“नहीं बेटी… बस तुझे मजा दूँगा।”
ससुर जी ने धीमे लेकिन गहरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर उनका मोटा लंड नेहा की चूत की सबसे अंदर तक टकरा रहा था। नेहा की आँखें बंद थीं और मुँह से लगातार कराह निकल रही थी।
“जोर से… बाबूजी… डर नहीं लग रहा… मुझे चोदिए… अपनी गर्भवती बहू को चोदिए…”
ससुर जी ने रफ्तार बढ़ा दी। नेहा के भारी स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। उन्होंने एक स्तन मुंह में लेकर चूसते हुए चुदाई जारी रखी। नेहा की चूत से सफेद रस निकलकर बिस्तर गीला कर रहा था।
फिर उन्होंने नेहा को घुटनों के बल मोड़ा और पीछे से घुसा। इस पोजीशन में लंड और भी गहरा जा रहा था। नेहा तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी, “हां… यही… और तेज… मेरी चूत फाड़ दीजिए… गर्भवती चूत चोदिए… आह…”
ससुर जी ने नेहा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह चोदा। कमरे में चप-चप की आवाजें भर गईं। नेहा कई बार झड़ चुकी थी। उसके गर्भवती शरीर को ये कठोर चुदाई और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी।
आखिर में ससुर जी ने नेहा को करवट दिलाई और एक पैर ऊपर उठाकर जोर-जोर से चोदा। उनका मोटा लंड पूरी गति से अंदर-बाहर हो रहा था।
“ले मेरी रंडी… ले मेरे बच्चे की माँ…”
ससुर जी ने आखिरी झटके में नेहा की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। नेहा भी उसी के साथ झड़ गई। दोनों पसीने से तर होकर लिपटे पड़े रहे।
नेहा ने ससुर जी की छाती पर सिर रखते हुए कहा, “बाबूजी… अब मैं पूरी तरह आपकी हूँ… चाहे गर्भवती हूँ, फिर भी जब चाहे चोद लीजिए।”
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अमित घर वापस आ गया…
तीन दिन बाद अमित अचानक मुंबई से वापस आ गया। नेहा को देखते ही वो खुश हो गया, लेकिन नेहा के मन में घबराहट थी। उसका पेट अभी हल्का-हल्का दिखने लगा था और वो जानती थी कि ससुर जी के बच्चे की वजह से उसकी चूत अब और भी ज्यादा भूखी रहती है।
रात को अमित ने नेहा के साथ सोने की कोशिश की। उसने नेहा को चूमना शुरू किया लेकिन नेहा को कोई मजा नहीं आ रहा था। अमित का छोटा-सा लंड अब उसे कुछ भी महसूस नहीं करा पा रहा था। वो मन ही मन ससुर जी के मोटे लंड को याद कर रही थी।
अगले दिन सुबह अमित ऑफिस चला गया। घर में सास जी, ससुर जी और नेहा थे। ससुर जी ने मौका देखकर नेहा को रसोई में खींच लिया।
“क्या हुआ मेरी रंडी? पति आ गया तो भूल गई मुझे?”
नेहा ने डरते हुए कहा, “बाबूजी… अमित घर पर है… कहीं देख लिया तो…”
लेकिन ससुर जी ने नेहा की साड़ी ऊपर करके उसकी चूत में उँगली डाल दी। नेहा काँप गई। “आह… बाबूजी… बहुत गीली हो रही हूँ…”
चुपके से खतरनाक चुदाई:
दोपहर में सास जी आराम करने चली गईं। अमित शाम को लौटने वाला था। ससुर जी ने नेहा को अपने कमरे में बुलाया। दरवाजा सिर्फ आधा बंद किया।
उन्होंने नेहा को दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से साड़ी उठा दी। बिना ज्यादा बात किए अपना मोटा लंड निकाला और एक ही झटके में नेहा की चूत में घुसा दिया।
“आह्ह्ह… बाबूजी… धीरे… अमित के आने का समय हो रहा है…” नेहा दबे स्वर में बोली।
ससुर जी ने नेहा के मुंह पर हाथ रखा और तेज-तेज धक्के मारने लगे। मोटा लंड पूरी गहराई तक जा रहा था। नेहा की चूत का रस टपक रहा था।
“तेरी चूत तो और भी टाइट हो गई है गर्भवती होकर… मेरा लंड कितना अच्छा लग रहा है ना?”
नेहा सिर हिलाती रही, “हां… बहुत मजा आ रहा है… लेकिन जल्दी कीजिए…”
ससुर जी ने नेहा को झुकाकर डॉगी स्टाइल में चोदा। कमरे में हल्की चप-चप की आवाज हो रही थी। नेहा तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थी। ठीक उसी समय नीचे से आवाज आई — अमित घर आ गया था!
“माँ… नेहा… कहाँ हो?”
नेहा डर गई लेकिन ससुर जी ने रुकने की बजाय और तेज चोदना शुरू कर दिया। नेहा का शरीर काँप रहा था। ससुर जी ने आखिरी झटके में नेहा की चूत के अंदर वीर्य छोड़ दिया और जल्दी से लंड निकाल लिया।
नेहा ने फटाफट साड़ी ठीक की और नीचे भागी। उसके पैर अभी भी काँप रहे थे। अमित ने पूछा, “क्या हुआ? चेहरा लाल क्यों है?”
नेहा ने हाँफते हुए कहा, “बस… ऊपर काम कर रही थी।”
रात का दूसरा खतरा:
रात को अमित नेहा के साथ बिस्तर पर था। लेकिन नेहा को नींद नहीं आ रही थी। आधी रात को जब अमित गहरी नींद में सो गया, नेहा चुपके से उठी और ससुर जी के कमरे में चली गई।
ससुर जी जाग रहे थे। उन्होंने नेहा को बिस्तर पर लिटाया और इस बार उसकी गांड चोदने का मन बनाया। नेहा ने विरोध नहीं किया।
ससुर जी ने थूक लगाकर अपना मोटा लंड नेहा की गांड में धीरे-धीरे घुसाया। नेहा दांत भींचकर सह रही थी। पूरा लंड अंदर जाने के बाद उन्होंने धीमे लेकिन गहरे धक्के मारे।
“आह… बाबूजी… अमित बगल वाले कमरे में है… फिर भी आप मेरी गांड चोद रहे हैं… मैं कितनी गंदी हूँ…”
ससुर जी ने नेहा के स्तनों को मलते हुए गांड चोदते रहे। नेहा ने तकिए में मुँह दबा रखा था ताकि आवाज न निकले। आखिरकार दोनों झड़ गए।
इस तरह अगले कई दिनों तक नेहा दिन-रात ससुर जी के साथ चुपके से चुदाई करती रही। कई बार बाल-बाल बचते — कभी सास जी के आने से, कभी अमित के अचानक कमरे में आने से। लेकिन ये खतरा नेहा को और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था।