भैया नपुंसक था इसलिए मैंने भाभी की टाइट चूत की सील तोड़ दी
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मेरा नाम राहुल है। मैं 24 साल का हूँ और घर पर छोटा भाई हूँ। मेरे बड़े भैया, विक्रम, 32 साल के हैं और दो साल पहले शादी हुई थी। भाभी का नाम प्रिया है, उम्र 28 साल। प्रिया बहुत खूबसूरत है – गोरा रंग, घने काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, और एक फिगर जो किसी को भी पागल कर दे – 36-28-38। घर में सब उन्हें बहुत प्यार करते थे, लेकिन मुझे हमेशा एक बात अजीब लगती थी। भैया-भाभी की शादी को दो साल हो गए थे, लेकिन कोई बच्चा नहीं हुआ था। भाभी कभी-कभी उदास रहती थीं।
एक दिन शाम को मैं ऑफिस से जल्दी घर आ गया। भाभी अकेली थीं, भैया अभी नहीं आए थे। मैंने देखा कि भाभी रसोई में खड़े होकर चुपचाप रो रही थीं। उनकी आँखें सूजी हुई थीं। मैंने पूछा, “भाभी, क्या हुआ? क्यों रो रही हो?”
प्रिया ने आँखें पोंछते हुए कहा, “कुछ नहीं राहुल… बस ऐसे ही।” लेकिन उनकी आवाज़ में दर्द था। मैंने जिद की तो उन्होंने धीरे से बताया, “राहुल, तुम्हारे भैया… वो… वो नपुंसक हैं। शादी के बाद से कभी भी… वो मेरे साथ कुछ नहीं कर पाए। डॉक्टर ने भी कन्फर्म कर दिया। मैं क्या करूँ? मुझे बच्चा चाहिए, परिवार चाहिए… लेकिन…”
मेरा दिल जोर से धड़का। भाभी जैसी सुंदर औरत, टाइट जवान शरीर, और दो साल से भूखी? मैंने उन्हें सांत्वना देते हुए कंधे पर हाथ रखा। “भाभी, तुम अकेली नहीं हो। मैं हूँ ना।” मेरी आवाज़ में कुछ और ही मतलब छिपा था। प्रिया ने मेरी तरफ देखा, उनकी नजर में हैरानी और शर्म दोनों थे।
उसके बाद कुछ दिन गुजरे। मैं भाभी के पास ज्यादा समय बिताने लगा। छोटी-छोटी बातों में मदद करता, उनकी उदासी दूर करने की कोशिश करता। एक रात भैया बाहर शहर गए हुए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। रात के 11 बजे थे। मैं उनके कमरे में गया। वे हल्के नेग्लिजी में लेटी हुई थीं। उनका गहरा कट वाला ब्लाउज और साड़ी का पल्लू हटकर उनकी नाभि दिखा रही थी।
“भाभी, नींद नहीं आ रही?” मैंने पूछा।
प्रिया ने करवट बदलते हुए कहा, “नहीं राहुल। मन बहुत बेचैन है। तुम भैया की जगह थोड़ा साथ देते हो तो अच्छा लगता।”
मैं उनके बिस्तर के किनारे बैठ गया। “भाभी, मैं तुम्हें खुश रख सकता हूँ… अगर तुम चाहो।” मेरी उँगलियाँ धीरे से उनकी जाँघ पर फिसल गईं। प्रिया काँप गईं लेकिन हटाईं नहीं। उनकी साँसें तेज हो गईं। “राहुल… ये गलत है… तुम मेरे देवर हो…” लेकिन उनकी आँखों में इच्छा साफ दिख रही थी।
मैंने धीरे से उन्हें अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया पहले तो सकपका गईं, फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगीं। “राहुल… दो साल से कोई छुआ तक नहीं… मुझे बहुत प्यास लगी है…” उन्होंने फुसफुसाकर कहा।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू सरकाया, ब्लाउज के हुक खोलने लगा। उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ ब्रा में कैद थीं। मैंने ब्रा का हुक खोलकर उन्हें आजाद किया। प्रिया की साँसें और तेज हो गईं। “अम्मा… राहुल… धीरे…”
“राहुल… ये गलत है…” प्रिया ने कमजोर स्वर में कहा, लेकिन उनकी आँखों में भूख साफ दिख रही थी। मैंने बिस्तर पर चढ़कर उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया।
“भाभी, दो साल से तुम सूख रही हो। आज मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊँगा।”
मैंने पहले उनके होंठ चूसने शुरू किए। प्रिया पहले झिझकी, फिर धीरे-धीरे मेरे होंठों को चूसने लगीं। उनकी साँसें गरम हो रही थीं। मैंने नेग्लिजी के पट्टे कंधों से सरकाए। नेग्लिजी नीचे फिसल गई। भाभी अब सिर्फ काली लेस वाली ब्रा और पैंटी में थीं। उनकी गोरी देह चाँदनी में चमक रही थी।
मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा ढीली हुई और उनकी 36 साइज की भारी, गोल छातियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
“आह्ह्ह… राहुल… धीरे… उफ्फ…” प्रिया की आँखें बंद हो गईं। उनका एक हाथ मेरे बालों में था, दूसरे हाथ से वे मेरी पीठ नोच रही थीं।
मैंने नीचे हाथ डाला और उनकी पैंटी पर उँगलियाँ फेरनी शुरू कीं। पैंटी पहले से ही भीगी हुई थी। “भाभी, तुम्हारी चूत तो पहले ही टपक रही है,” मैंने कान में फुसफुसाया।
प्रिया शर्म से लाल हो गईं लेकिन बोलीं, “राहुल… मुझे बहुत दिनों से राहत नहीं मिली… जल्दी करो ना…”
मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। अब भाभी पूरी नंगी लेटी थीं। उनकी चूत बिल्कुल टाइट, साफ शेव की हुई, हल्के गुलाबी रंग की थी। मैंने अपनी उँगलियाँ उनकी चूत की दरार पर फेरीं। प्रिया ने कमर उठाकर मेरी उँगलियों का स्वागत किया।
“अम्मा… राहुल… अंदर डालो…”
मैंने पैंट उतारी। मेरा 7 इंच का मोटा लंड पहले से ही लोहे की तरह खड़ा था। प्रिया ने उसे देखा तो उनकी आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा… धीरे से राहुल… मेरी सील अभी तक टूटी नहीं है…”
मैंने उनके पैर फैलाए, अपने लंड की नोक उनकी चूत पर रखी और धीरे-धीरे दबाव डाला।
“आआआह्ह्ह… उफ्फ… दर्द हो रहा है राहुल…” प्रिया की आँखों में आँसू आ गए। उनकी भौंहें सिकुड़ गईं, लेकिन उन्होंने कमर ऊपर उठाई।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया। “फट्” की आवाज के साथ मेरा लंड आधा अंदर चला गया। प्रिया जोर से चीखीं – “आआआह्ह्ह… मर गई… राहुल… धीरे…”
खून की हल्की धार उनकी जाँघों पर बह निकली। मैंने उन्हें चूमते हुए कहा, “भाभी, अब तुम मेरी हो गईं। सील टूट गई।”
प्रिया की आँखें आँसुओं से भरी थीं लेकिन चेहरे पर आनंद भी था। मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर थ्रस्ट के साथ उनकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी।
“अह्ह… राहुल… और जोर से… हाँ… फाड़ दो मेरी चूत को…” प्रिया अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं। उनकी छातियाँ उछल रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी छाती दबाई, दूसरे से कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मारने लगा।
कमरा उनकी चीखों और मेरी थप-थप की आवाज से भर गया था।
“भाभी, तुम्हारी चूत बहुत टाइट है… मैं झड़ने वाला हूँ…”
प्रिया ने मेरी कमर अपने पैरों से जकड़ ली। “अंदर ही झड़ो राहुल… मुझे गर्भवती कर दो…”
मैंने आखिरी जोरदार थ्रस्ट मारा और उनके अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। प्रिया भी काँपती हुई झड़ गईं। उनकी आँखें उलट गईं, मुँह से लार टपक रही थी।
हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। प्रिया ने मेरे कान में फुसफुसाया, “राहुल… आज के बाद तुम रोज मेरी चूत चोदोगे ना?”
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छत पर खुली हवा में चुदाई
पहली चुदाई के बाद हम दोनों थोड़ी देर आराम कर रहे थे। रात के करीब 2 बजे थे। प्रिया भाभी मेरे सीने से चिपकी हुई थीं, उनकी देह अभी भी पसीने से चिपचिपा रही थी। अचानक उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया, “राहुल… नीचे कमरे में डर लग रहा है… छत पर चलें? वहाँ खुली हवा में…”
मैं मुस्कुराया और उन्हें उठाकर छत पर ले गया। छत पर ठंडी हवा चल रही थी। चारों तरफ अंधेरा था, सिर्फ दूर कहीं स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी आ रही थी। मैंने भाभी को छत की दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया।
“भाभी, आज मैं तुम्हें कुत्ते की तरह चोदूँगा,” मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए कहा।
प्रिया शर्म से लाल हो गईं लेकिन उनकी आँखों में उत्तेजना थी। “जो मन करे करो… बस मुझे फिर से भर दो…”
मैंने उनकी नेग्लिजी पूरी तरह उतार दी। अब भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला, उनकी भारी छातियाँ हवा में लहरा गईं। निप्पल ठंडी हवा से और सख्त हो गए। फिर मैं घुटनों के बल बैठ गया और उनकी पैंटी नीचे खींची। पैंटी उनकी जाँघों से फिसलकर पैरों में आ गई। भाभी ने खुद पैर उठाकर पैंटी पूरी तरह उतार दी।
अब भाभी पूरी तरह नंगी खड़ी थीं। हवा उनकी चूत पर लग रही थी। मैंने उन्हें मोड़कर कुत्ते की मुद्रा में खड़ा किया – दोनों हाथ दीवार पर टिकाए, कमर नीचे झुकाई, गोल गाँड ऊपर उठाई। उनकी टाइट चूत अभी भी मेरे वीर्य और खून के मिश्रण से चिपचिपा रही थी।
मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ा। “भाभी, देखो कितना खड़ा है तुम्हारे लिए…”
प्रिया ने पीछे मुड़कर देखा, उनकी आँखें भरी हुई थीं। “राहुल… जल्दी डालो ना… हवा में मेरी चूत जल रही है…”
मैंने एक जोरदार धक्का मारा। “धप्प्!” पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया।
“आआआह्ह्ह… माँ… फट गई… राहुल… बहुत गहरा जा रहा है…” प्रिया जोर से चीखीं। उनकी उँगलियाँ दीवार को नोच रही थीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ ली और तेज-तेज थपाके मारने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गोल गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी – पच-पच… पच-पच… की आवाज हवा में फैल रही थी। भाभी की छातियाँ झूल रही थीं।
“हाँ… और जोर से… फाड़ दो मेरी टाइट चूत को… भैया कभी ऐसा नहीं कर पाया… तुम मेरे असली पति हो राहुल…” प्रिया अब पूरी तरह गंदी बातें करने लगी थीं। उनकी आवाज काँप रही थी।
मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी क्लिट पर उँगलियाँ घुमाईं। प्रिया काँपने लगीं। “उफ्फ… मैं झड़ने वाली हूँ… तेज… तेज…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। मेरे लंड की नोक उनकी गर्भाशय तक जा रही थी। कुछ ही मिनटों में प्रिया जोर से काँपीं और उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ती हुई झड़ गई। गर्म पानी जैसा रस मेरी जाँघों पर बह निकला।
लेकिन मैं अभी नहीं रुका। मैंने उन्हें घुमाकर दीवार से सटाया और फिर से अंदर डाला। अब आमने-सामने खड़े-खड़े चोद रहा था। उनकी टाँगें मेरी कमर पर थीं।
“भाभी, मुँह खोलो…” आखिरी समय में मैंने उन्हें नीचे झुकाया। प्रिया घुटनों के बल बैठ गईं। मैंने अपना लंड उनके मुँह में ठूँस दिया।
“ग्लग… ग्लग…” प्रिया ने पूरा लंड मुँह में ले लिया। उनकी आँखें पानी से भर गईं। कुछ ही सेकंड बाद मैंने उनके मुँह में ही जोर-जोर से वीर्य छोड़ा। गाढ़ा वीर्य उनके गले में उतर गया। कुछ बाहर निकलकर उनकी ठोड़ी और छातियों पर गिरा।
प्रिया ने सब चाट लिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “स्वादिष्ट है तुम्हारा… अब रोज छत पर आना…”
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अगले दिन की कहानी – दिन में रसोई और कमरे का हॉट सेशन
अगले दिन सुबह भैया ऑफिस चले गए। घर में सिर्फ मैं और प्रिया भाभी थे। रात की छत वाली चुदाई के बाद भाभी का चेहरा पूरी तरह चमक रहा था। मैं ब्रेकफास्ट के लिए किचन में गया तो भाभी चाय बना रही थीं। वे सिर्फ एक हल्की साड़ी और ब्लाउज पहने थीं। पल्लू नीचे सरक गया था, उनकी कलाई और पेट की गोरी त्वचा साफ दिख रही थी।
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने पीछे से आकर उनकी कमर पकड़ ली और गर्दन पर किस किया।
प्रिया काँप गईं। “राहुल… दिन में मत… भैया अभी गए हैं… कोई आ सकता है।” लेकिन उनकी आवाज में विरोध कम और इच्छा ज्यादा थी।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह खींचकर फर्श पर गिरा दिया। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने लगा। ब्लाउज उतरते ही उनकी काली लेस ब्रा बाहर आ गई। मैंने ब्रा के हुक खोल दिए। भाभी की भारी छातियाँ आज और भी सख्त लग रही थीं। निप्पल पहले से ही खड़े थे।
“उफ्फ राहुल… तुम्हारे हाथों में आग है…” प्रिया ने आँखें बंद करते हुए कहा।
मैंने उन्हें रसोई के काउंटर पर झुकाया। साड़ी की चुन्नट ऊपर उठाई और पैंटी नीचे खींच दी। उनकी टाइट चूत कल रात की चुदाई के बाद भी थोड़ी सूजी हुई थी, लेकिन पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी।
“आआह्ह… राहुल… जीभ अंदर डालो… हाँ… चूसो मेरी चूत को…” प्रिया की टाँगें काँप रही थीं। उन्होंने मेरे सिर को अपनी जाँघों के बीच दबा लिया। उनकी साँसें बहुत तेज हो गई थीं।
जब वे झड़ने वाली थीं, मैं उठा और अपना लंड बाहर निकाला। बिना कोई रुकावट के एक जोरदार धक्के से पूरा लंड उनकी चूत में उतार दिया।
“मम्मी… फट गई… राहुल… बहुत मोटा है आज…” प्रिया की चीख पूरे किचन में गूँज गई।
मैंने उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज थपाके मारे। काउंटर पर उनके शरीर का आगे-पीछे होना, उनकी छातियाँ झूलना, और “पच पच पच” की आवाज़… सब कुछ बेहद उत्तेजक था।
“भाभी, तुम्हारी चूत आज और भी टाइट लग रही है… कल रात की वजह से सूज गई है क्या?” मैंने हाँफते हुए पूछा।
“हाँ… लेकिन मुझे पसंद है… और जोर से चोदो… मुझे अपना बनाओ…” प्रिया ने दीवार पकड़कर कमर पीछे की तरफ किया।
मैंने उन्हें घुमाया, एक टाँग काउंटर पर चढ़ाई और साइड में चोदना शुरू किया। इस पोजीशन में मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था। प्रिया की आँखें उलट गईं, मुँह खुला था, लार टपक रही थी।
“मैं आ गई… राहुल… झड़ रही हूँ…” वे जोर से काँपीं और उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ने लगी।
मैं भी रुक नहीं सका। मैंने उन्हें नीचे झुकाया और मुँह में लंड दे दिया। प्रिया ने आँखें बंद करके पूरा लंड चूस लिया। कुछ सेकंड बाद मैंने उनके मुँह में गर्म-गर्म वीर्य भर दिया। भाभी ने बिना गिराए सब निगल लिया और मेरे लंड को चाटकर साफ कर दिया।
“चलो अब कमरे में…” मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम ले जाया।
वहाँ हमने पूरे कपड़े उतार दिए। भाभी ऊपर बैठकर (काउगर्ल पोजीशन) मेरे लंड पर बैठ गईं। उनकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैं उन्हें चूसता रहा और वे तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।
“राहुल… मुझे फिर से भर दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज से…”
इस बार हम दोनों साथ ही झड़े। भाभी मेरे ऊपर गिर पड़ीं। हम दोनों पसीने से तर थे।
प्रिया ने मेरे सीने पर सिर रखकर कहा, “अब रोज ऐसे ही… भैया के जाते ही तुम मेरी चूत लो…”
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- दीदी के सामने जीजा ने जबरदस्ती तोड़ी मेरी कुँवारी सील
- प्रिया भाभी को होटल में जमकर चोदा
- माँ बेटे की असली चुदाई की कहानी
- 20 साल की रानी को ट्रेन में चोदने में आया खूब मज़ा
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भैया घर पर होने पर रिस्की चुदाई
अगले दिन शाम को भैया ऑफिस से जल्दी आ गए। घर का माहौल सामान्य था, लेकिन मेरी और भाभी की नजरें बार-बार मिल रही थीं। भैया टीवी देख रहे थे और हम दोनों रसोई में थे। प्रिया भाभी ने मुझे इशारा किया।
“राहुल… बाथरूम में आ… जल्दी…” उन्होंने फुसफुसाकर कहा।
मैं चुपके से बाथरूम में घुस गया। भाभी पहले से अंदर थीं। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। बाहर भैया बैठे हुए थे, सिर्फ एक दीवार के फासले पर।
“भाभी… बहुत रिस्क है…” मैंने कहा लेकिन मेरे हाथ उनकी साड़ी पर थे।
“मुझे अब रिस्क पसंद आने लगा है… जल्दी करो राहुल… मेरी चूत जल रही है…” प्रिया ने मेरी पैंट की चेन खोल दी और मेरा सख्त लंड बाहर निकाल लिया।
मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठाई। पल्लू गिर गया। ब्लाउज के हुक मैंने जल्दी-जल्दी खोले। ब्रा को ऊपर सरका दिया। उनकी भारी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने एक छाती मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगा। प्रिया ने अपना मुँह दबाया ताकि आवाज न निकले।
“उम्म्म… राहुल… धीरे… भैया सुन लेंगे…” उनकी साँसें तेज थीं।
मैंने उनकी पैंटी खींचकर घुटनों तक उतार दी। उनकी चूत पहले से टपक रही थी। मैंने उन्हें दीवार की तरफ मोड़ दिया, थोड़ा झुकाया और पीछे से लंड रख दिया।
एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… फट गई…” प्रिया ने मुँह दबाकर कहा। उनकी आँखें बंद थीं, दाँत होंठों में दबे हुए थे।
मैंने धीरे-धीरे लेकिन गहरे थ्रस्ट मारने शुरू किए। बाहर भैया टीवी का वॉल्यूम बढ़ा रहे थे। हर धक्के के साथ भाभी की छातियाँ दीवार से टकरा रही थीं।
“पच… पच… पच…” हल्की आवाज हो रही थी।
“राहुल… तेज… लेकिन चुपके से… हाँ… फाड़ दो… भैया के पास बैठकर भी मैं तुम्हारी हूँ…” प्रिया फुसफुसा रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को बहुत जोर से पकड़ रही थी।
मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी क्लिट रगड़ी। भाभी पूरी तरह पागल हो रही थीं। उनकी टाँगें काँप रही थीं।
“मैं आने वाली हूँ… राहुल… दबा के पकड़ो…”
मैंने उनकी कमर कसकर पकड़ी और तेजी से चोदने लगा। बाहर भैया उठकर पानी पीने आए। हम दोनों सांस रोके खड़े थे, मेरा लंड पूरी तरह भाभी की चूत के अंदर था। भैया वापस चले गए तो मैंने फिर तेजी से धक्के मारे।
प्रिया जोर से काँपीं और झड़ गईं। उनकी चूत का रस मेरी जाँघों पर बह निकला। मैं भी तैयार था। मैंने उन्हें घुमाया, घुटनों पर बिठाया और मुँह में लंड ठूँस दिया।
“भाभी… पी लो…”
प्रिया ने आँखें ऊपर करके पूरा लंड मुँह में लिया। मैंने उनके मुँह में ही वीर्य छोड़ दिया। वे बिना गिराए सब निगल गईं और लंड चूस-चूसकर साफ कर दिया।
हम दोनों जल्दी से कपड़े ठीक करके बाहर निकले। भैया कुछ नहीं समझ पाए। प्रिया ने मुझे देखकर शरारती मुस्कान दी।
“रात को फिर आएगा ना?” उन्होंने कान में फुसफुसाया।
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