नेहा भाभी मेरी जान बन गई – देवर का मोटा लंड चूस लिया | bhabhi neha devar sex story

नेहा भाभी मेरी जान बन गई – देवर का मोटा लंड चूस लिया

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मेरा नाम राहुल है। मैं २४ साल का हूँ और दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरे बड़े भाई विक्रम की शादी हुए तीन साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी नेहा भाभी २८ साल की हैं। नेहा बहुत ही खूबसूरत हैं – गोरा रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और एक मुस्कान जो किसी को भी पागल कर दे। उनका फिगर ३४-२८-३६ का है, जो साड़ी में और भी आकर्षक लगता है। भैया अक्सर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते हैं, इसलिए घर में ज्यादातर मैं और भाभी ही होते हैं।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। मैं भाभी को बहुत सम्मान देता था। वो मुझे छोटे भाई की तरह प्यार करती थीं। सुबह उठकर वो चाय बनातीं, मेरे लिए टिफिन पैक करतीं, शाम को जब मैं थका-हारा घर आता तो मेरे लिए खाना गर्म रखतीं। धीरे-धीरे हम दोनों की बातें बढ़ने लगीं। रात को भैया के न होने पर हम दोनों टीवी देखते, पुरानी यादें शेयर करते, और कभी-कभी हल्की-फुल्की मजाक भी करते। नेहा भाभी पढ़ी-लिखी थीं, वो किताबें पढ़ना पसंद करती थीं और मुझे भी साहित्य की अच्छी समझ थी। हम दोनों घंटों बातें करते रहते।

एक दिन बारिश का मौसम था। मैं ऑफिस से भीगता हुआ घर आया। भाभी ने दरवाजा खोला तो उनकी साड़ी भी थोड़ी भीग गई थी। उनका ब्लाउज थोड़ा चिपक गया था, जिससे उनकी गोरी त्वचा झलक रही थी। मैंने नजरें फेर लीं। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे देवर जी, इतनी बारिश में भीग गए? जल्दी नहा लो, वरना ठंड लग जाएगी।” उन्होंने मेरे लिए गर्म पानी तैयार किया और एक तौलिया दिया।

उस रात भैया फिर बाहर गए थे। हम दोनों डिनर के बाद बैठे थे। लाइट चली गई। अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर हम बातें करने लगे। भाभी ने बताया कि भैया के काम के चक्कर में वो अकेली महसूस करती हैं। मैंने उन्हें दिलासा दिया। “भाभी, मैं हूँ ना आपके पास।” उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में कुछ अलग चमक थी। उस दिन हम देर रात तक बातें करते रहे। मैंने पहली बार महसूस किया कि भाभी मेरे लिए सिर्फ भाभी नहीं, कुछ ज्यादा हैं।

धीरे-धीरे हमारे बीच का रिश्ता बदलने लगा। मैं उनकी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने लगा – वो कैसे हँसती हैं, कैसे बाल संवारती हैं, कैसे साड़ी पहनती हैं। भाभी भी मुझे “राहुल” कहकर बुलातीं, देवर जी नहीं। एक शाम हम दोनों बालकनी में बैठे चाय पी रहे थे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। भाभी ने कहा, “राहुल, तुम्हारे भैया तो हमेशा व्यस्त रहते हैं। तुम ही मेरी जान बन गए हो।” उनके शब्दों में गर्माहट थी। मैंने उनका हाथ थाम लिया। वो नहीं हटाया।

फिर एक रात हुआ वो पल। भैया विदेश गए हुए थे, पूरे हफ्ते के लिए। घर में सिर्फ हम दोनों। रात का खाना खत्म करने के बाद हम लिविंग रूम में बैठे फिल्म देख रहे थे। फिल्म में रोमांटिक सीन आया तो माहौल गर्म हो गया। भाभी मेरे कंधे पर सिर टिका कर बैठी थीं। मैंने हिम्मत करके उनका चेहरा अपनी तरफ घुमाया। उनकी साँसें तेज हो रही थीं। “भाभी…” मैंने धीरे से कहा। उन्होंने आँखें बंद कर लीं।

हमारी होंठ मिल गए। पहली बार किस था, धीमा, गहरा। नेहा भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिया। उनके होंठ नरम और गर्म थे। किस लंबा होता गया। मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूमने लगे। वो सिहर उठीं। “राहुल… तुम मेरी जान हो,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

धीरे-धीरे हम बेडरूम में पहुँचे। भाभी ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरी शर्ट उतारने लगीं। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। उनकी गोरी कमर नजर आई। मैंने उन्हें चूमना शुरू किया – गर्दन, कंधे, और फिर… भाभी ने मेरी पैंट की चेन खोली। मेरे मोटा और सख्त लंड बाहर आ गया। नेहा भाभी की आँखें चौड़ी हो गईं। “इतना मोटा… राहुल…” उन्होंने धीरे से कहा।

भाभी ने घुटनों पर बैठकर मेरे लंड को हाथ में लिया। उन्होंने पहले चूम लिया, फिर जीभ से चाटा। मैं कराह उठा। “भाभी… अह्ह्ह…” नेहा ने पूरा मुंह खोलकर मेरे मोटे लंड को चूसना शुरू कर दिया। वो ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, कभी गहरी ले रही थीं, कभी सिर्फ टिप चूस रही थीं। उनकी गर्म और नम जुबान मेरे लंड को पूरी तरह लपेट रही थी। मैं उनके बालों को पकड़े हुए था। भाभी नेहा मेरी जान बन गई थीं – वो बिना रुके, पूरी लगन से मेरा मोटा लंड चूस रही थीं। उनकी आँखों में वासना और प्यार दोनों थे।

मैंने उन्हें ऊपर खींचा और फिर…

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राहुल नेहा भाभी को पूरी तरह चोदता है

मैंने नेहा भाभी को ऊपर खींचा। उनकी साड़ी अब पूरी तरह खुल चुकी थी। ब्लाउज के हुक मैंने एक-एक करके खोले। उनका गोरा ब्रा से ढका हुआ ३४ साइज का बूब्स बाहर आ गया। मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला और उनके स्तनों को हाथों में भर लिया। नेहा भाभी की साँसें बहुत तेज हो रही थीं। “राहुल… धीरे…” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आँखों में भूख थी।

मैंने एक-एक करके उनके दोनों स्तनों को चूमा, चाटा और हल्के से काटा भी। भाभी कराह उठीं – “आह्ह्ह… राहुल… तुम मुझे पागल कर दोगे।” उनके निप्पल सख्त हो चुके थे। मैं उन्हें चूसता रहा। मेरे हाथ उनकी कमर, नाभि और नीचे की तरफ सरक गए। मैंने उनकी पेटीकोट की नाड़ा खींची। पेटीकोट और पैंटी एक साथ नीचे सरक गई। नेहा भाभी अब पूरी तरह नंगी थीं – उनकी चिकनी, गोरी चूत पर हल्के बाल थे, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी।

मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। उनकी टांगें फैला दीं और घुटनों के बल बैठ गया। पहले तो मैंने उनकी चूत को चूम लिया। नेहा भाभी ने कमर उठा दी – “उफ्फ्फ… राहुल… मत करो… शर्म आ रही है।” लेकिन मैं रुका नहीं। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूमने लगी। मैंने अंदर तक जीभ डाली और चूसने लगा। भाभी दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर दबा रही थीं। उनकी चूत से रस निकल रहा था। “राहुल… मैं… आह्ह्ह…”

जब वो पूरी तरह गीली और तैयार हो गईं, तो मैं उठा। मेरा मोटा, खड़ा लंड पहले से ही फटने को तैयार था। नेहा भाभी ने उसे हाथ में पकड़ा, थोड़ा और चूसा, फिर बोलीं, “अंदर डाल दो राहुल… मुझे अपनी बनाओ।”

मैंने उनकी टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपना मोटा लंड उनकी चूत के मुंह पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे दबाव डाला। “आह्ह्ह… इतना मोटा… धीरे राहुल…” भाभी की आँखें बंद हो गईं। मैंने एक जोरदार धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। नेहा भाभी चीख पड़ीं – “माँ… राहुल… फट जाएगी…” लेकिन मैं रुका नहीं। दो-तीन और धक्कों में मेरा पूरा मोटा लंड उनकी गर्म, तंग चूत में समा गया।

फिर मैंने रफ्तार बढ़ा दी। धीमे-धीमे तेज। कमरे में चूत-चूत की आवाज़ और हम दोनों की कराहें गूंज रही थीं। “भाभी… तुम बहुत टाइट हो… अह्ह्ह…” मैं उनके स्तनों को दबाता हुआ जोर-जोर से चोद रहा था। नेहा भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। उनकी कमर मेरे हर धक्के के साथ उठ रही थी।

“राहुल… और तेज… फाड़ दो मुझे… मैं तुम्हारी हूँ…” उन्होंने कहा। मैंने पोजीशन बदली। उन्हें घुटनों पर करवाया और पीछे से डाला। इस पोजीशन में मेरा लंड और भी गहरा जा रहा था। मैं उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकरें मार रहा था। भाभी का पूरा शरीर हिल रहा था। उनके स्तन लटककर झूल रहे थे।

कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया (काउगर्ल पोजीशन)। नेहा भाभी अब खुद ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा पसीने से तर, और मुंह से सिर्फ आहें निकल रही थीं। “राहुल… मैं आने वाली हूँ… अह्ह्ह…”

मैंने भी तेजी बढ़ा दी। आखिरकार नेहा भाभी जोर से चीखीं और उनका शरीर सख्त हो गया। उनकी चूत मेरे लंड को जकड़ ली। वो पहली बार इतने जोर से झड़ गईं। उनके रस ने मेरे लंड को पूरी तरह भीगा दिया। मैं भी कुछ ही देर बाद रुक नहीं पाया। “भाभी… मैं निकाल रहा हूँ…” लेकिन भाभी ने मुझे कसकर जकड़ लिया – “अंदर ही डाल दो… मेरी जान…”

मैंने उनके अंदर ही अपना पूरा माल छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। नेहा भाभी मेरे सीने पर सिर रखे हुए थीं। “राहुल… तुमने मुझे आज जिंदा कर दिया। तुम मेरी जान बन गए हो।”

रात भर हम दो बार और प्यार करते रहे। सुबह होने से पहले हमने सब साफ किया, लेकिन हमारे बीच का ये नया रिश्ता अब छुपाना मुश्किल था।

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वीकेंड ट्रिप

भैया के आने में अभी तीन दिन बाकी थे। नेहा भाभी ने मुझे सुबह चाय देते हुए कान में फुसफुसाया, “राहुल, इस वीकेंड हम कहीं बाहर चलते हैं। सिर्फ तुम और मैं।” उनकी आँखों में शरारत थी। मैंने तुरंत हामी भर दी। हमने प्लान बनाया – जिम्मी फॉल के पास एक रिसॉर्ट में दो दिन का वीकेंड ट्रिप। भाभी ने अपने दोस्तों को बताया कि वो अपनी सहेली के साथ जा रही हैं, और मैंने ऑफिस में लीव ले ली।

शनिवार सुबह हम दोनों कार से निकल पड़े। नेहा भाभी ने सलवार सूट पहना था, जो उनकी खूबसूरती को और निखार रहा था। पूरे रास्ते हम गाने सुनते रहे, हँसते-बोलते रहे। कभी-कभी मैं उनका हाथ थाम लेता। रिसॉर्ट पहुँचते-पहुँचते शाम हो गई। हमारा रूम हिल टॉप पर था – खूबसूरत व्यू, प्राइवेट बालकनी और बड़ा सा किंग साइज बेड।

रूम में घुसते ही नेहा भाभी ने दरवाजा लॉक किया और मेरे गले लग गईं। “अब कोई डर नहीं, राहुल। पूरी रात सिर्फ तुम्हारे हूँ।” हमारी होंठ फिर मिल गए। इस बार किस बहुत जंगली था। मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया और उनके सूट का टॉप उतार दिया। ब्रा के अंदर उनके स्तन फड़क रहे थे। मैंने ब्रा खोली और दोनों स्तनों को मसलते हुए चूसने लगा। भाभी कराह रही थीं – “आह्ह्ह… राहुल…”

हम बेड पर पहुँचे। इस बार मैंने उन्हें पूरी तरह नंगा किया। नेहा भाभी भी मेरी सारी कपड़े उतार रही थीं। मेरे मोटा लंड देखकर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं तुम्हें सब कुछ दूँगी।” उन्होंने मुझे लिटाया और ६९ पोजीशन में आ गईं। उनकी चूत मेरे मुंह के ऊपर थी और उनका मुंह मेरे लंड पर। हम दोनों एक साथ एक-दूसरे को चूस रहे थे। भाभी मेरे मोटे लंड को गले तक ले जा रही थीं, जबकि मैं उनकी चूत चाट-चाट कर उनका रस पी रहा था।

कुछ देर बाद नेहा भाभी ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। “उफ्फ्फ… कितना भर गया है…” वो खुद ही ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन झूल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर जोर से नीचे दबाया। पूरी रात हम अलग-अलग पोजीशन ट्राई करते रहे:

  • डॉगी स्टाइल में बालकनी के दरवाजे के पास – बाहर की ठंडी हवा और अंदर की गर्मी।
  • मिशनरी में लाइट जलाकर – मैं उनकी आँखों में देखते हुए गहरा-गहरा चोद रहा था।
  • स्टैंडिंग में शावर के नीचे – गर्म पानी के साथ हम दोनों भीगते हुए एक-दूसरे को चोद रहे थे।

भाभी ने नई चीज भी ट्राई की। उन्होंने मुझे बोला, “राहुल, मेरी गांड भी आज आजमाओ।” मैं हैरान था। उन्होंने लुब्रिकेंट (रिसॉर्ट में उपलब्ध) लगाया। मैंने बहुत धीरे से अपना मोटा लंड उनकी टाइट गांड में डाला। नेहा भाभी दर्द और मजे से चीख रही थीं – “आह्ह्ह… धीरे… लेकिन मत निकालो…” धीरे-धीरे पूरी तरह अंदर गया। फिर मैंने उनकी गांड भी पूरी तरह चोदी। भाभी को इतना मजा आया कि वो दो बार झड़ गईं।

रात के दो बजे तक हम थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए। सुबह उठकर फिर से राउंड हुआ – इस बार सूरज की रोशनी में, बालकनी में खड़े होकर (रिस्की लेकिन रोमांटिक)।

दो दिन हमने जंगल घूमने, नेचर वॉक करने और खूब सेक्स करने में बिताए। नेहा भाभी अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। “राहुल, तुम्हारे बिना अब मैं नहीं रह सकती,” उन्होंने जाते वक्त कहा।

लेकिन घर लौटते ही हमें पता चला कि भैया एक दिन पहले आ गए हैं…

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घर में रिस्की सेक्स

ट्रिप से लौटने के बाद घर का माहौल बदल गया था। भैया (विक्रम) एक दिन पहले आ गए थे। उन्होंने हमें दोनों को देखा तो कुछ पल के लिए रुके। “क्या बात है, तुम दोनों इतने खुश लग रहे हो?” उन्होंने पूछा। नेहा भाभी ने तुरंत संभाला, “अरे, राहुल ने मुझे घुमाने ले गया था। तुम तो हमेशा बिजी रहते हो।” मैंने भी हँसकर टाल दिया। लेकिन भैया की नजरें थोड़ी शक्की हो गई थीं। वो अब ज्यादा ध्यान से देखते थे।

हम दोनों अब बहुत सावधानी बरत रहे थे। दिन में नजर मिलाते भी कम, लेकिन रात को भैया के सो जाने के बाद नेहा भाभी मेरे कमरे में चुपके से आ जातीं। एक-दो चुम्मे, छूना-छाती, बस इतना ही। लेकिन हम दोनों को ये काफी नहीं था। हमारी भूख बढ़ती जा रही थी।

फिर एक दिन मौका मिल गया। भैया सुबह ऑफिस गए थे और शाम को लौटने वाले थे। नेहा भाभी ने मुझे मैसेज किया – “राहुल, जल्दी आओ। आज पूरा दिन हमारा है।”

जैसे ही मैं घर पहुँचा, भाभी ने मुझे किचन में खींच लिया। वो सिर्फ एक हल्की नाइट गाउन पहने थीं, जिसके अंदर कुछ नहीं था। हमने एक-दूसरे को जोर से चूम लिया। “जल्दी करो राहुल… कहीं भैया जल्दी न आ जाए।” मैंने उन्हें किचन काउंटर पर बिठा दिया, गाउन ऊपर किया और घुटनों पर बैठकर उनकी चूत चाटने लगा। भाभी मेरे सिर को दबा रही थीं – “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ जादू है…” उनकी चूत पहले से ही गीली थी।

कुछ ही मिनटों में मैंने अपनी पैंट उतारी और खड़े-खड़े ही अपना मोटा लंड उनकी चूत में ठेल दिया। किचन में चप-चप की आवाज़ हो रही थी। नेहा भाभी काउंटर पकड़े हुए कराह रही थीं। “तेज… और तेज… फाड़ दो आज…” मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदा। उनके स्तन गाउन से बाहर निकल आए थे, जो हर धक्के के साथ हिल रहे थे। भाभी झड़ गईं, लेकिन मैं रुका नहीं। आखिर में मैंने भी उनके अंदर ही छोड़ दिया।

फिर हम बालकनी में गए। वहाँ दिन के उजाले में थोड़ा रिस्क था, लेकिन हम नहीं रुके। भाभी रेलिंग पकड़कर खड़ी हो गईं। मैंने पीछे से उनकी गांड में लंड डाला। धीरे-धीरे पूरा अंदर। “राहुल… कोई देख लेगा तो…” लेकिन उनकी आवाज में डर के साथ मजा भी था। मैंने उनकी गांड को जोर से चोदा, एक हाथ से उनकी चूत में उंगली डालते हुए। बालकनी में खुली हवा और नीचे गली का नजारा… ये रिस्क हमें और उत्तेजित कर रहा था।

आखिरी राउंड छत पर हुआ। शाम ढल रही थी। हमने चटाई बिछाई। नेहा भाभी इस बार मेरे ऊपर आईं। वो मेरे मोटे लंड पर बैठकर तेजी से कूद रही थीं। उनके बाल हवा में उड़ रहे थे, स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। “राहुल… मैं फिर से तुम्हारी हो गई… अह्ह्ह…” मैंने नीचे से जोर से धक्के दिए। छत पर खुलकर चोदने का मजा ही कुछ और था। हम दोनों लगभग साथ ही झड़ गए।

जैसे ही हम कपड़े पहनकर नीचे आए, भैया का फोन आ गया। “मैं १० मिनट में पहुँच रहा हूँ।” हम दोनों हड़बड़ाकर सब साफ करने लगे। लेकिन अब ये रिस्की गेम हम दोनों को और भी लुभा रहा था।

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पूरे हफ्ते का खुला खेल

भैया को फिर से अचानक दुबई जाना पड़ा – पूरे एक हफ्ते के लिए। जैसे ही उनकी गाड़ी घर से बाहर निकली, नेहा भाभी ने मुझे गले लगाकर जोर से चूम लिया। “अब सात दिन सिर्फ तुम और मैं, राहुल। कोई रोक-टोक नहीं।”

उसी शाम भाभी ने सरप्राइज दिया। उन्होंने ऑनलाइन कुछ सेक्स टॉयज मंगवा रखे थे – एक वाइब्रेटर, लिंग रिंग, क्लिटोरिस सक्शन और कुछ लुब्रिकेंट। “आज से हम सब ट्राई करेंगे,” उन्होंने शरमाते हुए कहा।

पहला दिन – किचन और लिविंग रूम सुबह से ही हम नंगे घूम रहे थे। ब्रेकफास्ट बनाते वक्त भाभी काउंटर पर झुकी हुई थीं। मैंने पीछे से उन्हें चोदा। फिर वाइब्रेटर उनकी चूत में डालकर मैंने उन्हें चाय बनवाया। भाभी काँप रही थीं – “राहुल… ये… बहुत तेज है… आह्ह्ह…” लिविंग रूम में उन्होंने मुझे सोफे पर लिटाया और अपना मुंह मेरे लंड पर रख दिया। पूरा हफ्ता शुरू हुआ ही धमाकेदार तरीके से।

दूसरा दिन – डॉक्टर-पेशेंट रोल प्ले (बेडरूम) भाभी ने व्हाइट शर्ट और स्कर्ट पहनी (डॉक्टर वाली ड्रेस)। मैं पेशेंट बना। “देवर जी, आज आपकी पूरी चेकअप करनी है,” कहकर उन्होंने मुझे नंगा किया। पहले उन्होंने मेरे लंड को मुँह से चूसा, फिर वाइब्रेटर मेरी गांड में धीरे से डाला। मैं कराह उठा। फिर उन्होंने खुद को “पेशेंट” बनाया। मैं डॉक्टर बना और उन्हें बिस्तर पर फैलाकर उनकी चूत और गांड दोनों में उंगली + वाइब्रेटर से चोदा। भाभी उस दिन तीन बार झड़ गईं।

तीसरा दिन – मालकिन और नौकर (छत और बालकनी) भाभी मालकिन बनीं। साड़ी में बहुत हॉट लग रही थीं। “नौकर, आज मेरी सेवा कर।” मैं घुटनों पर बैठकर उनकी चूत चाट रहा था। फिर उन्होंने मुझे आदेश दिया – बालकनी में खड़े होकर उन्हें चोदने का। छत पर उन्होंने मुझे लिटाया और ऊपर से कूद-कूदकर चोदी। लिंग रिंग पहनकर मैं उनको लगातार ४० मिनट तक चोदता रहा। भाभी चीख-चीखकर बोल रही थीं – “नौकर… और जोर से… अपनी मालकिन को संतुष्ट कर!”

चौथा और पाँचवा दिन – घर के हर कोने

  • बाथरूम में शावर सेक्स + वॉल पर चोदना
  • स्टडी रूम में टेबल पर भाभी को लिटाकर
  • गेस्ट रूम में नई पोजीशन ट्राई करना
  • सीढ़ियों पर रिस्की क्विकी (कहीं भाभी गिर न जाएं)

हर रात हम टॉयज यूज करते। कभी भाभी वाइब्रेटर लगाकर मेरे सामने मस्तurbate करतीं, तो मैं देखकर पागल हो जाता। कभी मैं उन्हें बेड पर बाँधकर (स्कार्फ से) घंटों tease करता।

छठा दिन – सबसे वाइल्ड भाभी ने कहा, “आज पूरा दिन नंगे रहेंगे।” हमने घर के हर कमरे में कम से कम एक बार सेक्स किया। शाम को उन्होंने अपनी गांड में लिंग रिंग वाला लंड लेकर मुझे चोदा (स्ट्रैप-ऑन जैसा फील)। फिर मैंने उनकी दोनों जगहों को एक साथ टॉयज और अपने लंड से भरा। भाभी उस दिन पूरी तरह थक गई थीं लेकिन खुश थीं – “राहुल… तुमने मुझे औरत बना दिया है।”

सातवाँ दिन – भावुक और इंटेंस भैया के आने से पहले आखिरी रात हम धीरे-धीरे प्यार करते रहे। बिना टॉयज, सिर्फ बॉडी टू बॉडी। मैं उनकी आँखों में देखते हुए गहराई तक चोद रहा था। “नेहा… तुम मेरी जान हो,” मैंने पहली बार उनका नाम लेकर कहा। भाभी की आँखों में आँसू आ गए – “राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… हमेशा।”

भैया आने वाले थे, लेकिन अब हमारा रिश्ता पहले से भी ज्यादा मजबूत और खतरनाक हो चुका था।

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