पड़ोस वाली आंटी की टाइट चूत की पुकार
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मेरा नाम विक्रम है। उम्र 24 साल। मैं अपने मोहल्ले में एक छोटे से घर में रहता हूं। ठीक बगल वाले घर में रहती हैं रेखा आंटी। उम्र 38 साल, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का पागल हो जाए। गोरा रंग, लंबे काले बाल, भारी-भारी दूध जैसे स्तन, पतली कमर और मोटी गोल गधा। उनके पति ज्यादातर बाहर रहते थे।
कुछ महीनों से आंटी मुझे खास नजरों से देख रही थीं। बालकनी में खड़े होकर मुस्कुरातीं, कपड़े सुखाते वक्त झुककर अपनी गहरी गर्दन और स्तनों की लाइन दिखातीं। मैं शर्मा जाता, लेकिन रात को उनके बारे में सोचकर लंड हिलाता।
एक शाम अचानक आंटी का फोन आया।
“हेलो विक्रम बेटा…” उनकी आवाज नरम और थोड़ी शरारती थी। “जी आंटी।” “घर पर अकेली हूं। लाइट का स्विच बोर्ड खराब हो गया है। तुम आकर देख सकते हो क्या?”
मुझे शक हुआ, लेकिन मैं चला गया। दरवाजा खुला था। अंदर घुसते ही मीठी खुशबू आई। आंटी हल्के गुलाबी सलवार सूट में थीं। दुपट्टा जानबूझकर नीचे सरका हुआ था। उनके भारी स्तन सूट के अंदर से उभरे दिख रहे थे।
“आओ विक्रम, अंदर आ जाओ।” उन्होंने मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद कर दिया। “स्विच बोर्ड कहाँ है आंटी?” वे मेरे बहुत करीब आ गईं। उनकी सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। “बहाना था बेटा…”
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। “क्या?” “तुम्हें नहीं पता? मैं कितने दिनों से तुम्हें देख रही हूं। तुम भी मुझे छुप-छुप कर घूरते हो।” उनकी उंगलियां मेरी छाती पर घूम रही थीं। “बहुत दिनों से अकेली हूं… कोई छूता तक नहीं।”
मैं चुप खड़ा था। वे मेरे कान में फुसफुसाईं, “विक्रम… मुझे चाटना है। मेरी चूत बहुत टाइट और गीली हो रही है। तुम अपनी जीभ से मुझे चाटोगे ना?”
उनकी बात सुनकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। आंटी ने ट्रैक पैंट के ऊपर से उसे दबाया और शरारत से मुस्कुराईं। “चल बेडरूम में।”
बेडरूम में मद्धम लाइट थी। आंटी बेड पर लेट गईं और सलवार का नाड़ा खोल दिया। उन्होंने सलवार को धीरे-धीरे उतारा। सफेद जांघें चमक रही थीं। पैंटी पहले से गीली थी।
“पास आओ विक्रम…”
मैं उनके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गया। आंटी ने पैंटी को एक तरफ सरका दिया। उनकी चूत बिल्कुल टाइट, गुलाबी, चिकनी और थोड़े बालों वाली थी।
“चाटो बेटा… अपनी आंटी की टाइट चूत को अच्छे से चाटो।”
मैंने जीभ निकालकर उनकी चूत की ऊपरी हिस्से पर फेरा। आंटी ने कराहते हुए कमर उठा दी। “आह्ह्ह… हां विक्रम… और अंदर… जीभ डालो अंदर…”
मैं पूरी तरह से उनकी चूत चाटने लगा। जीभ अंदर बाहर कर रहा था, क्लिटोरिस को चूस रहा था। आंटी दोनों हाथों से मेरे सिर को दबाए हुए थीं।
“उफ्फफ… बहुत अच्छा चाट रहे हो… मेरी चूत को चूसो… हां ऐसे ही… तेज…”
उनकी चूत से मीठा पानी निकल रहा था। मैं उसे चूस-चूस कर पी रहा था। आंटी का शरीर तड़प रहा था। उनकी आंखें बंद, मुंह खुला, और बार-बार कराह रही थीं – “हां विक्रम… और जोर से… अपनी आंटी की चूत खा जा…”
कुछ ही देर में उनकी सांसें बहुत तेज हो गईं। शरीर अकड़ गया। “विक्रम… मैं आने वाली हूं… मत रुकना… हां… आह्ह्ह्ह…”
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आंटी मेरी पैंट उतारकर लंड चूसती हैं और फिर खुद ऊपर बैठकर चुदाई शुरू करती हैं।
आंटी अभी भी झाड़ के बाद हांफ रही थीं। उनकी टाइट चूत से रस टपक रहा था। उन्होंने आंखें खोलीं, मुझे ऊपर खींचा और जोर से किस करने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस रही थी।
“विक्रम… तूने तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया…” उन्होंने हांफते हुए कहा। फिर मेरी ट्रैक पैंट की नाड़ा पकड़कर एक झटके में नीचे खींच दी। मेरा 7 इंच का मोटा, खड़ा लंड उनकी आंखों के सामने लहराया।
आंटी की आंखें चमक उठीं। “वाह बेटा… इतना मोटा और खड़ा… आज तो मेरी टाइट चूत फट जाएगी।”
वे बैठ गईं और ब्रा का हुक खुद पीछे से खोल दिया। उनके भारी, गोल स्तन बाहर आ गए। ब्राउन कलर के निप्पल सख्त होकर खड़े थे। उन्होंने पैंटी भी पूरी उतार फेंकी। अब आंटी पूरी नंगी थीं – गोरा शरीर, भारी स्तन, टाइट चूत और मोटा गधा।
वे मेरे लंड को हाथ में पकड़कर सहलाने लगीं। फिर मुंह खोलकर नोक चूसने लगीं। “मम्म्म… स्वाद तो अच्छा है…” उन्होंने पूरी लंड मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगीं। गला तक ले जा रही थीं। उनकी लार मेरे लंड पर गिर रही थी। मैं कराह उठा – “आह्ह आंटी… बहुत अच्छा चूस रही हो…”
कुछ देर चूसने के बाद आंटी ने मुझे बेड पर लिटा दिया। उनकी आंखों में शरारत और भूख थी। उन्होंने मेरे ऊपर बैठने की पोजिशन ली। एक हाथ से अपना स्तन दबाती हुईं और दूसरे हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुंह पर रखा।
“देख विक्रम… तेरी आंटी की टाइट चूत तेरे मोटे लंड को निगल रही है…”
वे धीरे-धीरे नीचे बैठीं। लंड का सिरा उनकी टाइट चूत में घुसा। आंटी की आंखें बंद हो गईं, मुंह से लंबी सांस निकली – “उफ्फ्फ… बड़ा मोटा है… धीरे बेटा…”
मैंने उनके कूल्हों को पकड़ लिया। आंटी ने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। उनकी चूत बहुत टाइट थी, जैसे मेरे लंड को जकड़ रही हो।
“आह्ह्ह विक्रम… पूरी भर गई… हां… और अंदर…”
एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड उनकी चूत में चला गया। आंटी चीख पड़ीं – “मां… फट गई मेरी चूत… लेकिन मजा भी आ रहा है…”
फिर उन्होंने तेजी से ऊपर-नीचे हिलना शुरू कर दिया। उनके भारी स्तन उछल-उछल कर मेरे चेहरे पर पड़ रहे थे। मैं उन्हें चूसने लगा। आंटी की चूत मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी। हर बार नीचे बैठने पर “पचाक-पचाक” की आवाज आ रही थी।
“हां विक्रम… जोर से… अपनी आंटी को चोद… मेरी टाइट चूत फाड़ डाल… आह्ह… हां… ऐसे ही…”
उनका चेहरा लाल हो गया था। पसीना टपक रहा था। मैं भी नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उनके स्तनों को मसल रहा था, निप्पल खींच रहा था।
आंटी की रफ्तार तेज होती गई। “विक्रम… मैं फिर आने वाली हूं… साथ में झाड़ना… मेरी चूत में भर दो अपना माल…”
मेरा भी दम निकल रहा था। कुछ ही देर में आंटी जोर से चीखीं और उनकी चूत सिकुड़ने लगी। मैं भी झड़ गया – गर्म-गर्म वीर्य उनकी चूत के अंदर भर दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। आंटी मेरे सीने पर सिर रखे हुए थीं।
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आंटी ब्रेक के बाद अपनी पैंटी पहनकर मुझे tease करती हैं
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े थे। आंटी का नंगा शरीर मेरे ऊपर चिपका हुआ था। उनकी चूत से हमारा मिश्रित रस टपक रहा था। करीब 10 मिनट बाद आंटी उठीं। उनकी आंखों में अभी भी भूख बाकी थी।
वे मुस्कुराईं और बेड से उतरकर अपनी गीली पैंटी उठा ली। जानबूझकर धीरे-धीरे पहनीं। पैंटी उनकी टाइट चूत पर चिपक गई। फिर उन्होंने ब्रा भी पहन ली, लेकिन हुक नहीं लगाया। स्तन आधे बाहर झांक रहे थे।
“अभी इतनी जल्दी मत समझ लेना विक्रम… आंटी अभी थकी नहीं है।”
वे मेरे पास आईं, मेरे लंड को हाथ में लेकर हल्का सहलाने लगीं। लंड फिर से खड़ा होने लगा। आंटी ने झुककर उसकी नोक चूम ली और शरारत से बोलीं, “देख… तेरा लंड फिर तैयार हो रहा है मेरी चूत के लिए।”
वे मुझे tease करने लगीं। पैंटी के ऊपर से अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने लगीं। “मम्म… कितनी गीली है फिर से… तूने तो मेरी चूत को जागृत कर दिया है।”
मैंने उनके स्तनों को पकड़कर मसला। आंटी कराह उठीं – “आह्ह… हां दबा… जोर से…”
कुछ देर tease करने के बाद आंटी ने अपनी पैंटी फिर से उतार दी। अब सिर्फ ब्रा (खुली हुई) पहने हुए थीं। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं। Cowgirl स्टाइल में। एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी टाइट चूत पर सेट किया।
“इस बार लंबी चुदाई होगी बेटा… तैयार है ना?”
धीरे-धीरे वे नीचे बैठीं। “उफ्फ्फ… फिर से भर गया… तेरे मोटे लंड से मेरी चूत फूल रही है…”
पूरा लंड अंदर चला गया। आंटी ने दोनों हाथ मेरी छाती पर रखे और हिलना शुरू कर दिया। पहले धीरे-धीरे, फिर रफ्तार बढ़ाते हुए। उनके भारी स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। ब्रा कंधे से सरक गई थी।
मैं नीचे से उनके कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से ऊपर धक्के मार रहा था। “पचाक… पचाक… पचाक…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
आंटी की आंखें बंद थीं। मुंह खुला था। वे जोर-जोर से कराह रही थीं – “हां विक्रम… और तेज… फाड़ डाल मेरी टाइट चूत को… आह्ह्ह… कितना गहरा जा रहा है… मेरी चूत तेरे लंड की दीवानी हो गई है… चूस मेरे स्तन… हां… काट ले निप्पल…”
मैंने उनका ब्रा पूरी तरह उतार फेंका और दोनों स्तनों को मुंह में ले लिया। चूसता, काटता और चबाता। आंटी और तेजी से कूद रही थीं। उनका पसीना मेरे शरीर पर गिर रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को बहुत जोर से जकड़ रही थी।
इस बार चुदाई काफी लंबी चली। करीब 15-20 मिनट तक वे ऊपर-नीचे, आगे-पीछे घूम-घूमकर चुदवा रही थीं। कभी तेज, कभी धीमी। बीच-बीच में झुककर मुझे किस करतीं और गंदी बातें बोलतीं – “तेरा लंड मेरी चूत में घुसा के रख… आज रात भर चोदना है मुझे…”
मेरा भी जोर आ रहा था। मैंने उनके कूल्हों को मजबूती से पकड़ा और नीचे से तेज धक्के मारने लगा।
आंटी चीखीं – “विक्रम… फिर आ रहा है… साथ में झाड़… भर दे अपनी आंटी की चूत को… हां… आह्ह्ह्ह्ह…”
दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने उनकी चूत के अंदर गर्म वीर्य उछाल दिया। आंटी मेरे ऊपर गिर पड़ीं। दोनों हांफ रहे थे। उनकी चूत अभी भी मेरे लंड पर सिकुड़ रही थी।
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आंटी मुझे doggy style में ले जाती हैं और मैं उनके गधे को चाटते हुए उनकी चूत में जोरदार ठुकाई करता हूं।
हम दोनों थककर लेटे हुए थे। आंटी मेरे सीने पर सिर रखे हुए थीं। उनकी चूत से हमारा वीर्य अभी भी रिस रहा था। करीब 15-20 मिनट बाद आंटी ने मेरे लंड को हाथ में पकड़कर हिलाया।
“विक्रम… अभी मत सो जा… आंटी को अभी और चाहिए।”
वे मुस्कुराईं और चारों खाने चित्त होकर घुटनों के बल हो गईं। उनका मोटा, गोल, गोरा गधा मेरी तरफ उठा हुआ था। पैंटी पहले ही फेंक चुकी थीं, ब्रा भी कहीं गिरा हुआ था। पूरी तरह नंगी, सिर्फ पसीने से चमकता शरीर।
“आ… doggy style में चोद मुझे। लेकिन पहले अपना मुंह लगा मेरे गधे पर।”
मैं उनके पीछे बैठ गया। उनके दोनों गालों को हाथों से फैलाया। गुलाबी, साफ गधे का छेद और नीचे टपकती हुई चूत दिख रही थी। मैंने मुंह लगाकर उनकी चूत चाटी, फिर जीभ ऊपर ले जाकर गधे के छेद पर फेरा।
आंटी कांप उठीं – “आह्ह्ह विक्रम… हां… चाटो… अपनी आंटी के गधे को चाटो… उफ्फ… जीभ अंदर डाल…”
मैं जोर-जोर से चाटने लगा। उनकी चूत और गधा दोनों भीग गए थे। आंटी आगे-पीछे हिल रही थीं और कराह रही थीं – “तेरी जीभ जादू कर रही है… हां… और जोर से…”
काफी देर चाटने के बाद मैं उठा। अपना मोटा लंड पकड़ा और उनकी चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार धक्का मारा।
“पचाक!” पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। आंटी चीख पड़ीं – “मां… फट गई… इतना गहरा… हां विक्रम… जोर से चोद… फाड़ डाल मेरी चूत…”
मैं उनके कमर को दोनों हाथों से पकड़कर तेज-तेज ठुकाई करने लगा। हर धक्के पर उनके मोटे गधे की चपत मेरी जांघों से टकरा रही थी। “पचाक-पचाक-पचाक” की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।
आंटी का सिर नीचे झुका हुआ था। बाल बिखरे हुए थे। वे जोर-जोर से चिल्ला रही थीं – “हां… और तेज… मेरी चूत को चीर डाल… तेरा लंड बहुत मोटा है… आह्ह्ह… मार… और मार… मेरी टाइट चूत आज तेरे लंड की हो गई…”
मैं एक हाथ से उनके बाल पकड़कर खींचता और दूसरे हाथ से उनके गधे पर थप्पड़ मारता। फिर आगे झुककर उनके स्तनों को नीचे से मसलने लगा। निप्पल खींचता।
रफ्तार और तेज कर दी। आंटी की चूत अब पूरी तरह ढीली हो चुकी थी लेकिन फिर भी मेरे लंड को जकड़े हुए थी। उनका पूरा शरीर हर धक्के के साथ हिल रहा था।
“विक्रम… मैं फिर झड़ने वाली हूं… तेज… हां… आह्ह्ह्ह…”
मैंने भी आखिरी स्पीड पकड़ ली। उनके गधे को दोनों हाथों से पकड़कर जान लगाकर चोदने लगा। आंटी चीखती रहीं और फिर जोर से झड़ गईं। उनकी चूत सिकुड़ी और मेरे लंड पर वीर्य निकाला।
मैं भी कुछ ही सेकंड बाद उनके अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया।
दोनों बेड पर गिर पड़े। आंटी मेरी तरफ मुड़ीं, मुंह पर पूरी संतुष्टि थी। उन्होंने मेरे लंड को प्यार से सहलाया और बोलीं, “आज तूने अपनी आंटी को पूरी तरह से चोद दिया…”
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अगले दिन की चुदाई
अगले दिन दोपहर के करीब 2 बजे का समय था। आंटी के पति फिर से 2 दिन के लिए बाहर गए हुए थे। मैंने आंटी को सुबह फोन करके बताया था कि मैं आ रहा हूं।
जैसे ही मैं उनके घर पहुंचा, आंटी ने दरवाजा खोला। इस बार वे बहुत सेक्सी लग रही थीं — काला ट्रांसपेरेंट नाइट सूट पहना हुआ था, जिसके अंदर कुछ नहीं था। उनके भारी स्तन और काली ब्रा की झलक साफ दिख रही थी।
“आ गया मेरा चोदने वाला विक्रम…” उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे अंदर खींचा और तुरंत किस करने लगीं।
“कल रात की चुदाई के बाद भी मेरी चूत में अभी तक तेरे वीर्य की खुशबू है।”
वे मुझे सीधे बेडरूम ले गईं। इस बार कोई देरी नहीं की। आंटी ने खुद अपना नाइट सूट उतार दिया। सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में खड़ी हो गईं। फिर ब्रा का हुक खोलकर भारी-भारी स्तन बाहर निकाल दिए।
“आज पूरे दिन चोदना है मुझे… कल वाली चुदाई से भी ज्यादा जोर से।”
मैंने भी अपनी सारी कपड़े उतार दीं। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। आंटी ने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी पैंटी उतारी, मेरे लंड को पकड़ा और एक झटके में अपनी टाइट चूत में बिठा लिया।
“आह्ह्ह… फिर से भर गया… कितना मोटा है तेरा लंड…”
इस बार आंटी ने बहुत तेज रफ्तार से cowgirl स्टाइल में चुदाई शुरू की। उनके स्तन उछल-उछलकर मेरे मुंह में आ रहे थे। मैं उन्हें चूस रहा था और नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था।
“हां विक्रम… मार… मेरी चूत फाड़ डाल… कल से भी तेज चोद… आह्ह… हां… ऐसे ही…”
कुछ देर बाद मैंने आंटी को पलटा और doggy style में लिया। उनके मोटे गधे को थप्पड़ मारते हुए लंड घुसाया।
“पचाक-पचाक-पचाक…”
आंटी चीख रही थीं – “जोर से… मेरे गधे पर थप्पड़ मार… हां… तेरी आंटी की चूत आज तुझे पूरी तरह से खा जाएगी…”
हमने अगले 40 मिनट तक अलग-अलग पोजिशन में चुदाई की — missionary, doggy, फिर आंटी को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े। आंटी की चूत लाल हो चुकी थी, लेकिन वे रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।
आखिर में मैंने उन्हें missionary स्टाइल में लिटाया। उनकी जांघें अपने कंधे पर रखीं और बहुत गहरी, तेज चुदाई की।
आंटी की आंखें उलट गई थीं। मुंह से झाग निकल रहा था। “विक्रम… मैं मर जाऊंगी… हां… भर दे… अपनी आंटी की चूत में अपना गर्म माल भर दे…”
दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने उनकी चूत में बहुत सारा वीर्य उछाल दिया।
आंटी थककर मेरे सीने से लिपट गईं और बोलीं, “अब तू मेरा पति बन गया है… जब चाहूं तुझे बुलाऊंगी और चुदवाऊंगी।”