आंटी की मोटी गांड में बिना तेल लगाए पूरा लंड ठोक दिया | aunty ki moti gaand mari

आंटी की मोटी गांड में बिना तेल लगाए पूरा लंड ठोक दिया

aunty ki moti gaand mari

संध्या आंटी हमारे मोहल्ले की सबसे हॉट औरत थीं। उम्र करीब ४२ साल, लेकिन शरीर देखकर किसी को भी यकीन नहीं होता। ५ फीट ६ इंच की हाइट, गोरा रंग, भारी-भारी स्तन जो हर सांस के साथ हिलते, और सबसे खास उनकी मोटी, गोल-गोल गांड। साड़ी पहनकर जब वो चलतीं तो वो गांड ऐसे लहराती कि पूरे मोहल्ले के लड़के और मर्द पीछे मुड़-मुड़ के देखते। उनके पति ज्यादातर समय बाहर रहते थे, बिजनेस के सिलसिले में। घर में सिर्फ वो और उनकी १९ साल की बेटी रहती थी।

मैं पड़ोस में ही रहता था। आंटी मुझे बहुत प्यार करती थीं। “बेटा” कहकर बुलातीं, कभी-कभी मुझे चाय-नाश्ता खिलातीं। लेकिन अंदर ही अंदर मुझे उनकी उस मोटी गांड का दीवाना बना दिया था। रात को सोते वक्त अक्सर कल्पना करता कि कैसे उनकी उस सफेद, मोटी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर चोदूं।

एक दिन मौका मिल गया। बारिश का मौसम था। आंटी के पति बाहर गए हुए थे और उनकी बेटी कॉलेज चली गई थी। मैं छत पर कपड़े सुखाने गया तो देखा आंटी भी छत पर हैं। उनकी साड़ी भीग गई थी। ब्लाउज का कपड़ा पसीने और पानी से चिपक गया था, जिससे उनके भारी स्तन और काली ब्रा की झलक साफ दिख रही थी। गांड पर साड़ी का पल्लू लिपटा हुआ था जो उनकी गांड की गोलाई को और उभार रहा था।

“आंटी, भीग रही हैं आप। अंदर चलिए,” मैंने कहा।

आंटी हंसीं। “तुम भी तो भीग गए हो बेटा। आओ, अंदर आकर कपड़े बदल लो।”

मैं उनके घर चला गया। उन्होंने मुझे टॉवल दिया। लेकिन जैसे ही मैंने टॉवल लिया, आंटी ने मेरी नजर अपनी गांड पर पकड़ ली। वो मुस्कुराईं। “क्या देख रहे हो?”

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने हिम्मत करके कहा, “आंटी, आपकी गांड… बहुत सुंदर है।”

आंटी चौंक गईं लेकिन शरमाने की बजाय उनकी आंखों में शरारत आ गई। “अरे वाह! इतनी बड़ी हो गईं तुम्हारी बातें? आंटी की गांड देखते हो?”

मैं पास गया और उनके कमर पर हाथ रख दिया। “आंटी, मुझे बहुत दिनों से आपकी ये मोटी गांड चोदने का मन है।”

आंटी ने मेरे हाथ को अपनी गांड पर दबाया। “तो चोदो ना… लेकिन आज बिना तेल के ही ठोकना है। देखती हूं कितना हिम्मती हो तुम।”

मैंने उन्हें घुमाया और साड़ी का पल्लू खींच लिया। ब्लाउज के हुक खोले। उनके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने एक को मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी कराह रही थीं, “उम्म्म… हां बेटा… और जोर से।”

फिर मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। वो सिर्फ काली पैंटी में खड़ी थीं। उनकी मोटी गांड पैंटी में फंसी हुई थी, दोनों तरफ से मांस उभरा हुआ। मैंने पैंटी नीचे खींची।

वाह! क्या नजारा था। सफेद, चिकनी, मोटी-मोटी गांड। बीच में गुलाबी छेद। मैंने दोनों हाथों से चपटा मारा। “धड़ाक!” आवाज हुई। आंटी कांपी। “मारो और… मुझे पसंद है।”

मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ उनकी गांड की दरार में घुसा दी। आंटी चीख पड़ीं, “आआह्ह्ह… क्या कर रहे हो… उफ्फ़…”

मैंने अच्छे से चाटा, थूक लगाया, लेकिन तेल नहीं। लंड पहले से ही लोहे जैसा कड़ा था। मैंने पैंट उतारी। मेरा ८ इंच का मोटा लंड बाहर आ गया।

आंटी ने पीछे मुड़कर देखा। “वाह बेटा… कितना मोटा है। आज इसे मेरी गांड में पूरा ठोकना है।”

मैंने उन्हें सोफे पर घुटनों के बल झुकाया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड की नोक उनके गांड के छेद पर रखी और दबाव डाला।

“आआआह्ह्ह… धीरे… बिना तेल के बहुत दर्द होगा…” आंटी कराह रही थीं।

लेकिन मैं रुका नहीं। जोर का धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। आंटी चीख पड़ीं। “मार डाला… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है!”

मैंने उनकी कमर पकड़ ली और और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड उनकी मोटी गांड में घुस गया। बिना तेल के, सूखा-सूखा। उनकी गांड बहुत टाइट थी।

“उफ्फ़… पूरा अंदर चला गया… तुम्हारा लंड मेरी गांड फाड़ रहा है…” आंटी रो रही थीं लेकिन उनकी आवाज में मस्ती भी थी।

मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। “धप-धप-धप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। उनकी मोटी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैंने उनके बाल पकड़कर खींचे और और तेज चोदा।

आंटी अब दर्द की जगह चीख-चीख कर मजा ले रही थीं। “हां… और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है… आह्ह्ह… चोदो मुझे… आंटी की गांड तुम्हारी है आज!”

मैंने १०-१५ मिनट तक उनकी गांड मारी। बीच-बीच में उनकी गांड पर थप्पड़ मारता, चिकनी त्वचा लाल हो गई थी। फिर मैंने उन्हें पलटा और पैर ऊपर करके फिर से गांड में घुसा दिया। इस बार और गहराई तक।

आंटी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला था, स्तन हिल रहे थे। मैंने उनके एक स्तन को दबाते हुए चोदा।

“मैं आने वाला हूं आंटी…” मैंने कहा।

“अंदर ही छोड़ दो… मेरी गांड में अपना माल भर दो…” आंटी ने कराहते हुए कहा।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और अंत में पूरा माल उनकी गांड के अंदर उछाल दिया। गर्म वीर्य उनकी गांड में भर गया।

आंटी कांप उठीं। उनका भी ऑर्गेज्म हो गया था।

हम दोनों थककर लेट गए। उनकी गांड से मेरा वीर्य निकल रहा था। मैंने फिर से उनकी गांड को सहलाया।

“आंटी, आज से ये गांड मेरी है।”

आंटी मुस्कुराईं। “हां बेटा… जब चाहो, बिना तेल के ही ठोक देना। लेकिन अगली बार और बड़ी कहानी लिखवाऊंगी तुमसे।”

उस दिन के बाद हम दोनों अक्सर मौका ढूंढते। कभी उनके घर, कभी मेरे घर। उनकी मोटी गांड को मैंने कई बार बिना तेल, बिना रुकावट चोदा। हर बार वो चीखतीं, लेकिन मजा भी लेतीं।

एक बार तो वो खुद मेरे पास आईं और बोलीं, “आज मेरी गांड में दो बार भर देना।”

मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, पैर कंधे पर रखे और पूरा लंड एक ही झटके में ठोक दिया। आंटी चीखीं लेकिन गांड ऊपर उठाकर लेने लगीं।

“हां… फाड़ दो… मेरी मोटी गांड चोदो… तुम्हारा लंड मेरी जान है…”

उस रात हमने तीन राउंड लिए। हर बार बिना तेल। उनकी गांड लाल हो गई थी, लेकिन वो संतुष्ट थीं।

ये कहानी सिर्फ शुरुआत थी। आंटी की मोटी गांड की भूख मुझे कभी नहीं मिटी। वो भी हर बार नई-नई तरीके से चुदना चाहतीं। कभी खड़े-खड़े, कभी बालकनी में, कभी रात को छत पर।

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