देवर ने भाभी की शादीशुदा टाइट चूत को खून निकालकर फाड़ दिया
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सुनील का परिवार एक छोटे से शहर में रहता था। घर में उसकी भाभी प्रिया थी, जो उसकी बड़े भाई की पत्नी थी। प्रिया २८ साल की थी, उसका शरीर बेहद आकर्षक था – गोरा रंग, भरी हुई छातियां, पतली कमर और मोटी-मोटी जांघें। शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन उसके पति अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते थे। प्रिया घर संभालती थी और सुनील, जो २४ साल का था, अभी कॉलेज पूरा करके घर पर ही रहता था।
सुनील हमेशा से प्रिया की ओर आकर्षित था। उसकी नजरें प्रिया की साड़ी के नीचे छुपी उसकी टाइट कमर पर, उसके ब्लाउज से उभरती छातियों पर और चलते वक्त हिलती गांड पर टिक जाती थीं। प्रिया को भी अपने देवर की नजरों का अंदाजा था, लेकिन वह चुप रहती। कभी-कभी वह जानबूझकर साड़ी का पल्लू सरका कर अपनी गहरी नाभि दिखा देती या रात को हल्के कपड़ों में घूमती।
एक दिन भाई फिर से दो हफ्ते के लिए दिल्ली चला गया। घर में सिर्फ सुनील और प्रिया थे। शाम को प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। सुनील पीछे से आया और उसकी कमर पर हाथ रख दिया। प्रिया चौंक गई।
“देवर, क्या कर रहे हो? ये गलत है,” प्रिया ने कहा, लेकिन उसकी आवाज में हल्की कांपती हुई लज्जा थी।
सुनील ने उसे घुमाया और सीधे उसके होंठों पर किस कर दिया। प्रिया पहले तो विरोध करती रही, लेकिन कुछ पलों बाद उसका शरीर ढीला पड़ गया। सुनील ने उसे दीवार से सटाकर चूमना शुरू किया। उसके हाथ प्रिया की छातियों पर गए, ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा।
“भाभी, कितने दिनों से तुम्हें चाहता हूं। तुम्हारी ये टाइट चूत आज मेरी होगी,” सुनील फुसफुसाया।
प्रिया शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसका शरीर गर्म हो रहा था। सुनील ने उसे उठाकर बेडरूम में ले गया। वहां उसने प्रिया की साड़ी खोल दी। प्रिया अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। सुनील ने ब्लाउज के हुक खोले और उसकी भारी छातियां बाहर निकाल लीं। गुलाबी निप्पल्स को चूसने लगा। प्रिया कराह रही थी, “आह… देवर… धीरे…”
सुनील ने पेटीकोट भी उतार दिया। प्रिया की चूत साफ-सुथरी, हल्के बालों वाली और शादीशुदा होने के बावजूद काफी टाइट दिख रही थी। सुनील ने अपनी उंगली उसकी चूत पर फेरी। प्रिया कांप उठी।
“भाभी, तुम्हारी चूत तो अभी भी कुँवारी जैसी टाइट है। भैया ठीक से चोदते नहीं लगते क्या?” सुनील हंसा।
प्रिया शर्म से मुंह छुपा लेना चाहती थी, लेकिन सुनील ने उसके पैर फैलाए और अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दी। प्रिया जोर से चीखी, “उफ्फ… सुनील… क्या कर रहे हो… आहह!”
सुनील ने काफी देर तक उसकी चूत चाटी, क्लिटोरिस को चूसा, उंगलियां अंदर डालीं। प्रिया का पानी निकलने लगा। वह पहली बार इतना जोर से झड़ रही थी।
अब सुनील ने अपना ८ इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। प्रिया की आंखें फट गईं। “ये तो बहुत बड़ा है… मेरा पति का तो आधा भी नहीं…”
सुनील ने प्रिया को चारों खाने चित लिटाया, उसके पैर कंधों पर रखे और लंड की नोक उसकी चूत पर रखी। प्रिया डर रही थी, “धीरे करना देवर… मुझे दर्द होगा…”
लेकिन सुनील का मूड गर्म था। उसने एक जोरदार धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। प्रिया चीख उठी, “आआआह… फट गई… निकालो…!”
सुनील रुका नहीं। दूसरे झटके में पूरा लंड अंदर ठूंस दिया। प्रिया की टाइट चूत फटने लगी। खून की धार निकल आई क्योंकि उसकी चूत इतने सालों में इतना मोटा और लंबा लंड झेल नहीं पा रही थी।
“मर गई… देवर… तुमने मेरी चूत फाड़ दी… खून निकल रहा है… आहह!” प्रिया रो रही थी, लेकिन सुनील ने रुकना नहीं था।
वह जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर थप्पड़ में प्रिया की चूत से खून और पानी का मिश्रण निकल रहा था। बेडशीट खून से सन गई। सुनील प्रिया की छातियों को दबाते हुए, उसके होंठ चूसते हुए चोद रहा था।
“भाभी, तुम्हारी ये शादीशुदा टाइट चूत आज मेरी हो गई। मैं इसे रोज फाड़ूंगा,” सुनील कह रहा था।
प्रिया का दर्द धीरे-धीरे मजे में बदल रहा था। वह अब नीचे से कमर हिला रही थी। “और जोर से… देवर… फाड़ दो… आह… मुझे चोदो…”
सुनील ने पोजीशन बदली। प्रिया को घुटनों के बल खड़ा किया और पीछे से कुत्ता बनाकर चोदा। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। प्रिया की चूत पूरी तरह फट चुकी थी, लेकिन वह अब चीखों के साथ चुदाई का आनंद ले रही थी।
दो घंटे तक लगातार चुदाई चली। सुनील ने तीन बार प्रिया की चूत में झड़ दिया। प्रिया पांच बार झड़ चुकी थी। आखिर में दोनों थककर लेट गए। प्रिया की चूत सूज गई थी, खून बह रहा था, लेकिन वह सुनील को चिपककर सो गई।
अगले दिन सुबह प्रिया उठी तो उसकी चाल लड़खड़ा रही थी। चूत में तेज दर्द था। वह आईने में देखकर शर्म से लाल हो गई। उसकी चूत पूरी तरह फटी हुई, सूजी हुई और लाल थी।
सुनील पीछे आया और उसे गले लगाया। “भाभी, आज फिर चोदूंगा।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन आज धीरे करना… कल तो तुमने मेरी चूत खून निकालकर फाड़ ही दी।”
इसके बाद उनके बीच रोजाना चुदाई होने लगी। सुनील प्रिया को अलग-अलग पोजीशन में चोदता – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वह खुद ऊपर बैठकर। कभी-कभी वह प्रिया की गांड भी फाड़ता। प्रिया अब पूरी तरह देवर की रखैल बन चुकी थी।
एक दिन भाई के आने से पहले उन्होंने पूरे घर में चुदाई की। रसोई में, बालकनी में, बाथरूम में। प्रिया अब खुलकर कहती, “देवर, मेरी टाइट चूत को फिर फाड़ दो… खून निकाल दो… मुझे तुम्हारा लंड चाहिए।”
सुनील हर बार उसकी चूत को और गहराई से चोदता, उसके अंदर अपना माल भरता। प्रिया गर्भवती भी हो गई, लेकिन उसने भाई को बताया कि उसका है। असल में तो सुनील का ही था।
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देवर ने भाभी की शादीशुदा टाइट चूत को खून निकालकर फाड़ दिया – भाग २
अगले कुछ दिनों तक प्रिया की चूत पूरी तरह सूजी हुई रह गई। चलते वक्त भी उसे दर्द होता, लेकिन अंदर से एक अजीब सी खुजली और चाहत जाग रही थी। सुनील हर रात उसके कमरे में घुस आता। कभी-कभी तो वह सोते हुए प्रिया को चुपके से चाटने लगता।
तीसरे दिन शाम को प्रिया नहा कर आई। उसके बाल गीले थे, शरीर पर हल्का सा तौलिया लिपटा हुआ था। सुनील ने तुरंत उसे पकड़ लिया और तौलिया खींच दिया। प्रिया अब पूरी नंगी थी। उसकी चूत अभी भी हल्की लाल और सूजी हुई थी, लेकिन खून का निशान सूख चुका था।
“देवर, आज धीरे करना… अभी ठीक नहीं हुई है,” प्रिया ने शर्माते हुए कहा।
सुनील ने मुस्कुराते हुए उसे बिस्तर पर लिटाया। उसने प्रिया की जांघें फैलाईं और अपनी जीभ से धीरे-धीरे चूत को चाटना शुरू किया। प्रिया की आहें निकलने लगीं। “आह… सुनील… तुम्हारी जीभ जादू करती है…”
सुनील ने काफी देर तक उसे चाटा, उंगलियों से अंदर-बाहर किया। प्रिया का पानी निकलने लगा। जब वह पूरी गीली हो गई, तब सुनील ने अपना मोटा लंड निकाला। इस बार उसने प्रिया को अपनी गोद में बिठाया – काउगर्ल पोजीशन में।
“भाभी, आज तुम ऊपर हो… अपनी चूत खुद मेरे लंड पर डालो,” सुनील ने हुक्म दिया।
प्रिया शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी चूत तरस रही थी। उसने लंड पकड़ा और अपनी सूजी चूत पर रखा। धीरे-धीरे बैठने लगी। आधा लंड घुसते ही वह कांप उठी। “उफ्फ… फिर फट रही है… लेकिन मजा भी आ रहा है…”
उसने आंखें बंद करके पूरा लंड अंदर ले लिया। खून की हल्की सी धार फिर निकली, लेकिन इस बार दर्द कम था। प्रिया खुद हिलने लगी – ऊपर-नीचे, आगे-पीछे। उसके भारी स्तन उछल रहे थे। सुनील उन्हें मसल रहा था, निप्पल्स को काट रहा था।
“हां भाभी… जोर से चुदो… अपनी टाइट चूत फाड़वाओ…” सुनील उत्तेजित होकर बोल रहा था।
प्रिया तेजी से हिल रही थी। कमरे में चुटकी बजाने और चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं। आखिरकार वह जोर से चीखकर झड़ गई। सुनील ने भी उसके अंदर अपना गर्म माल भर दिया।
इसके बाद उनके रिश्ते और गहरे होते गए। सुनील ने प्रिया को नई-नई चीजें सिखाईं।
एक हफ्ते बाद…
भाई के आने में अभी भी एक हफ्ता बाकी था। सुनील ने प्रिया को घर के अंदर ही नंगी घूमने का आदेश दिया। प्रिया दिन भर सिर्फ एक हल्की साड़ी पहनती, जिसके अंदर कुछ नहीं होता। सुनील कभी भी कहीं भी उसे पकड़कर चोद लेता।
एक दिन दोपहर में प्रिया रसोई में बर्तन धो रही थी। सुनील ने पीछे से उसे झुकाया, साड़ी ऊपर की और सीधे लंड घुसा दिया। प्रिया चीखी, “आह… देवर… कोई देख लेगा…”
“कौन देखेगा? सिर्फ हम दो हैं,” कहते हुए सुनील ने जोर-जोर से धक्के मारे। प्रिया की चूत फिर से फटने लगी। पानी और थोड़ा खून मिलकर जांघों पर बह रहा था। सुनील ने उसे वहीं किचन काउंटर पर चोदा और अंदर ही झड़ गया।
रात को सुनील ने प्रिया को बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे चोदा। गीले शरीर पर पानी बह रहा था, सुनील प्रिया की गांड पर थप्पड़ मारता हुआ पीछे से चोद रहा था। उसने प्रिया की गांड भी फाड़ी। पहले उंगली, फिर लंड। प्रिया दर्द से चीख रही थी, “नहीं… गांड मत फाड़ो… बहुत दर्द हो रहा है…”
लेकिन सुनील ने पूरा लंड गांड में ठूंस दिया। प्रिया की गांड भी फट गई, खून की पतली धार निकली। वह रोते हुए भी चुदाई का आनंद ले रही थी।
दो हफ्ते बाद – भाई के आने से पहले अंतिम रात
सुनील ने प्रिया को पूरा घर सजाया। मोमबत्तियां जलाईं, फूल बिछाए। प्रिया को लाल रंग की पारदर्शी बेबी डॉल पहनाई, जिसमें उसके स्तन और चूत साफ दिख रहे थे।
उस रात सुनील ने प्रिया को घंटों चोदा। पहले मिशनरी स्टाइल में, फिर डॉगी में, फिर स्टैंडिंग में। वह प्रिया की चूत, गांड और मुंह तीनों जगह अपना लंड डाल रहा था।
प्रिया अब पूरी तरह उसकी हो चुकी थी। वह चिल्ला रही थी, “देवर… मेरी चूत फाड़ दो… खून निकाल दो… मुझे रोज चोदो… मैं तुम्हारी रंडी हूं… भाभी नहीं, तुम्हारी चूत हूं…”
सुनील ने आखिरी दौर में प्रिया को बेड पर लिटाया, उसके पैर कानों तक मोड़ दिए और इतनी तेजी से चोदा कि प्रिया बेहोश हो गई। उसकी चूत बुरी तरह फट गई, खून की धार बिस्तर पर बह रही थी। सुनील ने छह बार अंदर झड़ दिया।
सुबह प्रिया उठी तो उसकी चूत इतनी सूजी हुई थी कि बैठ भी नहीं पा रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था।
भाई आ गया। प्रिया ने सामान्य व्यवहार किया, लेकिन जब भी सुनील की नजर पड़ती, उसकी चूत गीली हो जाती। रात को भाई के साथ सोते हुए भी वह देवर के लंड की याद में अपनी चूत में उंगली डालती।
तीन महीने बाद…
प्रिया गर्भवती हो गई। डॉक्टर ने कन्फर्म किया। भाई खुश था, लेकिन प्रिया और सुनील जानते थे कि यह बच्चा सुनील का है।
गर्भावस्था के दौरान भी सुनील प्रिया को चोदता रहा। अब प्रिया की छातियां और भी भारी हो गई थीं, चूत और ज्यादा गीली और संवेदनशील। सुनील उसे पेट पर लिटाकर साइड से चोदता, कभी-कभी मुंह में भी।
प्रिया अब कहती, “देवर, बच्चा होने के बाद भी मेरी चूत तुम्हारी रहेगी। तुम इसे जितना चाहो फाड़ सकते हो।”
इस तरह देवर और भाभी की चुदाई की कहानी सालों तक चलती रही। भाई को कभी शक नहीं हुआ। प्रिया खुश थी – एक तरफ पति की पत्नी, दूसरी तरफ देवर की गर्म चूत।
सुनील ने प्रिया की हर इच्छा पूरी की – कभी होटल में, कभी कार में, कभी छत पर। एक बार तो उन्होंने पड़ोस की छत पर भी रात भर चुदाई की।
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- दीदी के सामने जीजा ने जबरदस्ती तोड़ी मेरी कुँवारी सील
- प्रिया भाभी को होटल में जमकर चोदा
- माँ बेटे की असली चुदाई की कहानी
- 20 साल की रानी को ट्रेन में चोदने में आया खूब मज़ा
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देवर ने भाभी की शादीशुदा टाइट चूत को खून निकालकर फाड़ दिया – भाग ३
प्रिया के गर्भावस्था के नौ महीने पूरे होने वाले थे। उसके पेट में सुनील का बच्चा पल रहा था। प्रिया की छातियां अब बहुत भारी और दूध से भरी हुई थीं। उसकी चूत गर्भावस्था के कारण और भी ज्यादा गीली, नरम और संवेदनशील हो गई थी। सुनील उसे दिन-रात चोदने का बहाना ढूंढता रहता।
एक शाम भाई ऑफिस से लौटा तो थका हुआ था। वह जल्दी सो गया। सुनील चुपके से प्रिया के कमरे में घुस गया। प्रिया गर्भवती पेट के साथ लेटी हुई थी। सुनील ने उसकी साड़ी ऊपर की और धीरे से उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी।
“आह… देवर… बच्चा है पेट में… फिर भी तुम नहीं मानते,” प्रिया कराह रही थी, लेकिन उसकी उंगलियां सुनील के बालों में फंसी हुई थीं।
सुनील ने उसकी चूत को अच्छे से चाटा, फिर अपना लंड निकालकर साइड पोजीशन में घुसा दिया। प्रिया की चूत अब इतनी गीली थी कि लंड आसानी से अंदर चला गया, लेकिन गहराई में धक्का लगते ही वह कांप उठती। सुनील ने धीरे-धीरे चोदा और उसके मुंह में झड़ गया ताकि कोई निशान न रहे।
बच्चा पैदा होने के बाद
बच्चा (लड़का) पैदा हुआ। पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। भाई ने नाम रखा – आर्यन। लेकिन प्रिया और सुनील जानते थे सच्चाई। बच्चे के जन्म के सिर्फ ४५ दिन बाद ही सुनील अधीर हो गया।
रात को जब बच्चा सो गया, सुनील प्रिया को बालकनी में ले गया। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। प्रिया अभी भी थोड़ी कमजोर थी, लेकिन उसकी चूत पहले से ज्यादा टाइट हो गई थी।
सुनील ने प्रिया को बालकनी की रेलिंग पर झुकाया, उसकी साड़ी ऊपर की और पीछे से एक झटके में पूरा लंड घुसा दिया।
“आआआह… देवर… फट गई… अभी दर्द हो रहा है…!” प्रिया दबे स्वर में चीखी।
सुनील ने एक हाथ से उसकी छाती दबाई (जिसमें दूध भरा हुआ था) और दूसरे हाथ से कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मारे। प्रिया की चूत फिर से फट गई। खून की हल्की धार निकली क्योंकि जन्म के बाद चूत संवेदनशील थी। लेकिन प्रिया अब रो नहीं रही थी, बल्कि गांड हिला-हिलाकर चुदवा रही थी।
“हां देवर… फाड़ दो… मेरी चूत तुम्हारी है… जितना चाहो खून निकालो…”
उस रात सुनील ने बालकनी में ही दो बार झाड़ा। प्रिया की जांघें खून और पानी से सन गईं।
छह महीने बाद
अब बच्चा छह महीने का हो गया था। प्रिया की बॉडी पहले से भी ज्यादा आकर्षक हो गई थी – छातियां और भारी, कमर पतली, गांड और मोटी। सुनील अब उसे और खुलकर चोदता।
एक दिन भाई फिर से १० दिन के लिए बाहर गया। सुनील ने मौका देखते ही प्रिया को पूरे घर में नंगी घुमाया। वह प्रिया को कुर्सी पर, टेबल पर, फर्श पर, हर जगह चोदता।
एक खास शाम को सुनील ने प्रिया को बेड पर बांध दिया। उसके हाथ और पैर बेड के चारों कोनों से बंधे हुए थे। प्रिया पूरी तरह लाचार और खुली हुई अवस्था में थी। सुनील ने पहले उसकी चूत में उंगलियां डालीं, फिर दो उंगलियां, फिर तीन। प्रिया चीख रही थी।
फिर उसने अपना मोटा लंड निकाला और प्रिया की चूत पर रगड़ने लगा। “आज मैं तुम्हारी चूत को पूरी तरह नष्ट कर दूंगा भाभी।”
एक जोरदार झटका। पूरा लंड एक ही बार में अंदर। प्रिया की आंखें बाहर निकल आईं। “मर गई… फट गई… खून… बहुत खून निकल रहा है…!”
सुनील रुका नहीं। वह पागलों की तरह चोदने लगा। हर धक्के में प्रिया का पूरा शरीर हिल रहा था। चूत से खून की धार लगातार बह रही थी। बेडशीट लाल हो गई। प्रिया दर्द और मजे के मिले-जुले आंसू रो रही थी।
सुनील ने घंटों चोदा – कभी तेज, कभी धीरे। उसने प्रिया की गांड भी उसी बंधी हुई हालत में फाड़ी। दोनों जगह खून बह रहा था। आखिरकार सुनील ने प्रिया के मुंह में, चूत में और छातियों पर झाड़ दिया।
प्रिया बेहोश हो गई। जब होश आया तो सुनील उसे नहला रहा था। प्रिया ने कमजोर आवाज में कहा, “देवर… तुमने आज मेरी चूत को सच में तबाह कर दिया… लेकिन मुझे अच्छा लगा।”
एक साल बाद – नया ट्विस्ट
अब बच्चा एक साल का हो गया। भाई की तरक्की हो गई और वह ज्यादा समय घर पर रहने लगा। लेकिन प्रिया और सुनील की भूख कम नहीं हुई। अब वे रिस्क लेने लगे।
एक रात भाई बेडरूम में सो रहा था। प्रिया और सुनील पास वाले कमरे में थे। सुनील ने प्रिया को दीवार से सटाकर खड़ा करके चोदा। प्रिया मुंह पर हाथ रखकर दबे स्वर में कराह रही थी। भाई के इतने पास चुदाई का रोमांच और बढ़ गया था।
धीरे-धीरे वे दिन में भी करने लगे। जब भाई ऑफिस होता, सुनील प्रिया को बाथरूम में, किचन में, यहां तक कि बच्चे के कमरे के बगल में भी चोदता।
प्रिया अब पूरी तरह देवर पर फिदा थी। वह कहती, “सुनील, अगर भाई को पता चल भी गया तो मैं तुम्हारे साथ भाग जाऊंगी। तुम्हारा लंड छोड़कर मैं नहीं रह सकती।”
सुनील ने प्रिया को नई चीजें सिखाईं – सेक्स टॉयज का इस्तेमाल, रोल प्ले, और कभी-कभी हल्की स्मैकिंग। प्रिया अब चोदते वक्त चिल्लाती, “फाड़ दो देवर… मेरी शादीशुदा चूत को हमेशा के लिए अपना बना लो…”
दो साल बाद
परिवार अब बड़ा हो गया था। लेकिन सुनील और प्रिया की चुदाई नहीं रुकी। अब प्रिया दूसरी बार गर्भवती थी – फिर सुनील का ही बच्चा।
वे अब और ज्यादा खतरनाक जगहों पर चुदाई करते – कार में हाईवे पर, सिनेमा हॉल के पिछले कोने में, यहां तक कि भाई की मौजूदगी में भी कभी-कभी छुपकर।
प्रिया की चूत अब सुनील के लंड की आदी हो चुकी थी। हर बार फटती, खून निकलता, लेकिन फिर ठीक होकर और ज्यादा गीली हो जाती।
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