भाभी को देवर ने अपना पर्सनल रंडी बना लिया
bhabhi ko randi banaya
सुबह के सात बजे थे। पूजा घर में अगरबत्ती जल रही थी। नेहा भाभी रसोई में चाय बना रही थीं। उनकी उम्र २८ साल थी, लेकिन शरीर इतना आकर्षक था कि कोई भी देखकर ललचा जाए।
गोरा रंग, भारी-भारी स्तन, पतली कमर और मोटी-मोटी जांघें। शादी को पांच साल हो चुके थे, लेकिन उनके पति अमित ज्यादातर दिल्ली में जॉब के सिलसिले में रहते थे। घर में सिर्फ नेहा, उनकी सास और छोटा देवर विक्रम रहते थे।
विक्रम २२ साल का था। कॉलेज खत्म करके घर पर ही बिजनेस सीख रहा था। लंबा कद, चौड़ा सीना और हमेशा जिम जाता था, इसलिए उसका शरीर काफी फिट था। नेहा को देखते ही उसका मन अजीब हो जाता। भाभी की कसी हुई साड़ी में नितंबों की लहर, ब्लाउज से फटने वाले स्तन और जब वह झुककर कुछ उठाती तो उभरी हुई गांड… विक्रम रोज रात को इन ख्यालों से हस्तमैथुन करता।
एक दिन अमित फिर दिल्ली चला गया। सास भी मंदिर में पूजा के लिए दो दिन के लिए गांव चली गईं। घर में सिर्फ नेहा और विक्रम रह गए।
रात का समय था। नेहा रसोई में बर्तन धो रही थीं। विक्रम पीछे से आया और बोला, “भाभी, पानी पिला दो ना।” नेहा मुड़ीं तो उनका ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा थोड़ा खुला हुआ था। विक्रम की नजर सीधे उनके गहरे cleavage पर पड़ गई।
“ले लो,” नेहा ने गिलास थमाया।
विक्रम ने जानबूझकर गिलास पकड़ते वक्त नेहा की उंगलियों को छू लिया। नेहा ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराईं।
उस रात विक्रम सो नहीं पा रहा था। वह नेहा के कमरे के बाहर गया। दरवाजा थोड़ा खुला था। अंदर नेहा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में लेटी हुई थीं। उनके स्तन सांस लेने के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। विक्रम का लंड खड़ा हो गया।
वह धीरे से अंदर घुसा।
“भाभी…” उसने धीमी आवाज में पुकारा।
नेहा चौंककर उठीं, “विक्रम? तू यहां क्या कर रहा है?”
“भाभी, मुझे आपसे कुछ कहना है।” विक्रम ने पास आकर कहा।
“क्या?” नेहा थोड़ी घबराई हुई थीं।
“मुझे आप बहुत पसंद हैं। आपकी बॉडी… आपका ये रूप… मैं रोज सोचता हूं कि आप मेरी हो जाओ।” विक्रम ने सीधे कहा।
नेहा शर्म से लाल हो गईं। “विक्रम, मैं तेरी भाभी हूं। ये गलत है।”
“भाभी, भैया तो महीने में सिर्फ दो-तीन दिन आते हैं। आपकी जवानी सूख रही है। मैं आपको रोज खुश रख सकता हूं।” कहते हुए विक्रम ने नेहा का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया।
नेहा ने हाथ खींचने की कोशिश की, लेकिन विक्रम मजबूत था। “विक्रम… छोड़…”
लेकिन विक्रम ने नेहा को जोर से चूम लिया। नेहा पहले विरोध करती रहीं, लेकिन कुछ ही देर में उनके होंठ भी जवाब देने लगे। विक्रम ने ब्लाउज के हुक खोल दिए। भारी-भारी स्तन बाहर आ गए। गुलाबी चूचियां सख्त हो चुकी थीं।
विक्रम ने एक स्तन मुंह में ले लिया और चूसने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “आह… विक्रम… मत कर…”
लेकिन उनका शरीर बोल रहा था कुछ और। विक्रम ने पेटीकोट ऊपर किया। नेहा की चूत पर सिर्फ पतली पैंटी थी, जो पहले से गीली हो चुकी थी। विक्रम ने पैंटी उतारी और उंगलियां अंदर डाल दीं।
“भाभी, आपकी चूत तो बहुत टाइट है। भैया आपको ठीक से चोदते नहीं लगते।”
नेहा शर्म से आंखें बंद कर लीं। विक्रम ने अपना लंड निकाला। करीब ७ इंच लंबा, मोटा लंड। उसने नेहा की जांघें फैलाईं और एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया।
“आआआह… विक्रम… धीरे…” नेहा चीख पड़ीं।
विक्रम ने जोर-जोर से ठोके मारने शुरू कर दिए। कमरे में चूत की चप-चप और नेहा की आहें गूंज रही थीं।
“भाभी, अब से आप मेरी पर्सनल रंडी हो। समझी? रोज मैं आपको चोदूंगा। जहां चाहूं, जब चाहूं।”
नेहा बस कराह रही थीं, “हां… हां… चोद मुझे… तेरी रंडी हूं मैं…”
उस रात विक्रम ने नेहा को तीन बार चोदा। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में और आखिर में नेहा को ऊपर बिठाकर। नेहा की चूत विक्रम के वीर्य से भर गई।
अगले दिन सुबह नेहा उठीं तो शरीर दर्द कर रहा था। लेकिन मन में एक अजीब सी तृप्ति थी। विक्रम रसोई में आया और नेहा को पीछे से जकड़ लिया।
“सुबह-सुबह रंडी को चोदना है।” कहकर उसने नेहा की साड़ी ऊपर की और सीधे खड़े-खड़े चोद दिया। नेहा किचन के काउंटर पर झुककर चीख रही थीं।
इसके बाद तो रोज का सिलसिला शुरू हो गया।
रोज सुबह का रूटीन: नेहा नहाकर निकलतीं तो विक्रम बाथरूम में घुस जाता। नेहा को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदता। कभी नेहा की गांड में उंगली डालकर, कभी स्तनों को मसलते हुए।
दिन में: अगर सास घर पर होती तो भी विक्रम मौका ढूंढ लेता। नेहा को पूजा घर में ले जाकर ब्लाउज खोलकर चूचियां चूसता। या फिर छत पर सुखाने के लिए गए कपड़ों के पीछे नेहा को घुटनों पर बिठाकर मुंह में लंड चुसवाता।
शाम को: जब सास सो जातीं तो विक्रम नेहा को अपने कमरे में बुलाता। नेहा को पूरी तरह नंगी करके घंटों चोदता। कभी-कभी नेहा को बांधकर, आंखों पर पट्टी बांधकर। नेहा अब पूरी तरह विक्रम की गुलाम बन चुकी थीं।
एक दिन विक्रम ने नेहा को कहा, “आज से तू मेरी रंडी है। घर के हर कमरे में तुझे चोदूंगा।”
उस दिन विक्रम ने नेहा को लिविंग रूम में सोफे पर चोदा, फिर बालकनी में, फिर स्टोर रूम में। रात को नेहा को सिर्फ हाई हील्स और ब्लैक लेस लिंगेरी पहनाकर पूरे घर में घुमाया। हर जगह रुककर चोदा।
नेहा अब खुद मांगने लगी थी। “देवर जी… आज मेरी गांड भी मार दो ना…”
विक्रम ने नेहा की गांड भी तैयार की। पहले उंगलियों से, फिर लंड से। नेहा दर्द से चीखी लेकिन मजा भी आया। अब विक्रम रोज नेहा की तीनों जगहों में अपना वीर्य भरता।
एक महीने बाद अमित आया तो भी नेहा और विक्रम का खेल चलता रहा। अमित सोने के बाद विक्रम नेहा के कमरे में चला जाता। नेहा अमित के बगल में लेटी रहती और विक्रम नीचे से चोदता। नेहा मुंह पर तकिया रखकर कराहती।
धीरे-धीरे नेहा पूरी तरह विक्रम की प्रॉपर्टी बन गई। वह विक्रम के लिए खास-खास कपड़े पहनने लगी। छोटी-छोटी स्कर्ट, डीप नेक ब्लाउज, ट्रांसपेरेंट साड़ी। विक्रम जब चाहता, नेहा तुरंत घुटनों पर बैठकर लंड चूसने लगती।
एक शाम विक्रम ने नेहा को कार में बिठाया और बाहर घुमाने ले गया। कार पार्क करके नेहा को पीछे की सीट पर चोदा। नेहा चीख रही थी, “हां देवर… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… मैं तेरी रंडी हूं… तेरी पर्सनल सीक्रेट रंडी…”
रात घर आकर विक्रम ने नेहा को छत पर ले जाकर पूरे चांदनी रात में नंगी करके चोदा। नेहा की चीखें आसमान तक जा रही थीं।
इस तरह महीनों बीत गए। नेहा अब गर्भवती भी हो गई, लेकिन वह जानती थी कि बच्चा विक्रम का है। फिर भी वह खुश थी। क्योंकि उसकी जवानी अब सूख नहीं रही थी। विक्रम रोज उसे चोदता, उसे रंडी बनाकर रखता।
विक्रम ने नेहा को एक कॉलर भी बनवा दिया था जिसमें लिखा था – “विक्रम की पर्सनल रंडी”। नेहा उसे घर के अंदर पहनकर रहती।
जब भी सास या अमित घर पर होते, नेहा चुपके से विक्रम को मैसेज करती – “देवर जी… जल्दी आओ… मेरी चूत बहुत जल रही है…”
और विक्रम आकर नेहा को कहीं न कहीं चुपके से चोद देता।
नेहा अब पूरी तरह बदल चुकी थी। पहले शर्मीली भाभी, अब विक्रम की नॉनस्टॉप रंडी।
विक्रम रोज सुबह उठकर सबसे पहले नेहा की चूत या मुंह में अपना लंड डालता। कहता, “रंडी, आज का पहला डोज ले ले।”
और दिन भर अलग-अलग पोजीशन में, अलग-अलग जगहों पर नेहा को चोदता रहता।
ये सिलसिला आज भी जारी है… और जारी रहेगा।
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