कंडोम पहनकर भाभी को चोदा पूरा रात
मेरा नाम रोहन है। उम्र 24 साल। मैं आपको अपनी एक सच्ची और बहुत ही गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ। भाभी का नाम प्रिया है। उनकी उम्र उस समय 29 साल थी। भाभी बेहद खूबसूरत थीं। गोरी चमड़ी, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ और सबसे खास बात उनकी भरी-भरी, उभरी हुई छातियाँ। उनका शरीर इतना आकर्षक था कि देखते ही मन खींच लेता था।
मैं अक्सर मामा के घर जाता था। पहले तो भाभी से सिर्फ नॉर्मल बातें होती थीं। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। मजाक, हँसी-मजाक और फिर धीरे-धीरे गहरी बातें। भाभी भी मुझे पसंद करने लगी थीं, लेकिन दोनों डरते थे। भाई (मेरा मामा का लड़का) अक्सर नाइट शिफ्ट पर रहता था।
एक शाम भाई ड्यूटी पर चला गया। मामा और मामी भी रिश्तेदारों के यहाँ चले गए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी अकेले थे। रात के करीब 10 बजे हम दोनों लिविंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे। बातें करते-करते मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन ज्यादा नहीं रोकी।
मैंने कहा, “भाभी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। बहुत दिनों से मन में है।”
भाभी कुछ देर चुप रहीं, फिर बोलीं, “रोहन, मैं शादीशुदा हूँ। ये गलत है।”
मैंने उन्हें अपने करीब खींच लिया और उनके गाल पर किस कर दिया। भाभी ने आँखें बंद कर लीं। फिर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो भाभी ने मना किया, लेकिन 2-3 मिनट बाद उन्होंने भी किस करना शुरू कर दिया। उनकी साँसें तेज हो गईं।
हम दोनों बेडरूम में चले गए। मैंने भाभी को बेड पर लिटा दिया। धीरे-धीरे उनके सूट का बटन खोलने लगा। भाभी बोलीं, “रोहन, रुक जाओ… कोई आ जाएगा।”
मैंने कहा, “आज पूरी रात है भाभी। कोई नहीं आएगा।”
मैंने उनका सूट उतार दिया। अंदर काला कलर का ब्रा और पैंटी थी। भाभी की छातियाँ ब्रा में बहुत टाइट लग रही थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों छातियाँ आजाद हो गईं। मैं एक चूची मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरी को हाथ से मसलने लगा। भाभी की साँसें भारी हो गईं।
“आह… रोहन… धीरे से…” भाभी की आवाज काँप रही थी।
मैंने उनकी नाभि पर किस किया, फिर पैंटी की तरफ बढ़ा। भाभी ने दोनों हाथों से पैंटी पकड़ रखी थी। मैंने धीरे से खींचा। भाभी की चिकनी, गीली चूत सामने आ गई। मैंने उनके पैर फैलाए और मुंह लगा दिया। जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। भाभी की कमर ऊपर उठने लगी।
“रोहन… आह… बहुत अच्छा लग रहा है…” भाभी अब मेरा सिर दबा रही थीं।
करीब 10 मिनट तक चूत चाटने के बाद भाभी का पहला ऑर्गेज्म हो गया। वे जोर से काँप उठीं।
अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लोड़ा खड़ा हो चुका था। भाभी ने उसे देखा और शर्मा गईं।
मैंने कहा, “भाभी, कंडोम लगाऊँ?”
भाभी ने कहा, “हाँ… भाई के अलमारी में रखे हैं। ले आओ।”
मैं अलमारी से पूरा पैकेट कंडोम ले आया। एक कंडोम निकालकर अपने लोड़े पर चढ़ा लिया। भाभी की टाँगें फैला दीं। लोड़े का सिरा उनकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया।
भाभी बोलीं, “रोहन… धीरे… दर्द हो रहा है…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लोड़ा अंदर डाल दिया। भाभी की चूत बहुत तंग थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
“आह… आह… रोहन… और जोर से…” भाभी अब पूरी तरह से मजे में आ चुकी थीं।
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। कमरे में सिर्फ “पचक-पचक” की आवाजें आ रही थीं। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।
पहला राउंड करीब 15 मिनट चला। भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म हुआ और मैं भी झड़ गया। कंडोम में ही मेरा पानी निकल गया।
हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे से लिपट गए। 10-15 मिनट बाद भाभी ने खुद मेरे लोड़े को हाथ में लिया और सहलाने लगीं। मेरा लोड़ा फिर से खड़ा हो गया।
भाभी बोलीं, “एक और कंडोम लगा लो… आज पूरी रात है।”
मैंने दूसरा कंडोम लगाया। इस बार भाभी ने खुद ऊपर आकर बैठना चाहा। वे मेरे ऊपर सवार हो गईं। उनका वजन मेरे ऊपर पड़ रहा था। भाभी ने मेरे लोड़े को अपनी चूत में उतारा और ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने झूल रही थीं। मैं उन्हें चूस रहा था।
इस पोजीशन में करीब 20 मिनट चुदाई हुई। भाभी तीन बार झड़ चुकी थीं।
फिर हमने डॉगी स्टाइल में किया। भाभी घुटनों के बल खड़ी हो गईं। मैं पीछे से आया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। भाभी का मोटा गोल गांड मेरे सामने था। मैं एक हाथ से उनकी गांड मार रहा था और दूसरे से छाती दबा रहा था।
“आह… रोहन… मेरा राजा… आज तो मुझे फाड़ डालोगे…” भाभी चीख रही थीं।
रात के 2 बजे तक हमने तीन राउंड कर लिए थे। हर बार नया कंडोम लगाया। बीच-बीच में हम चूमते रहे, बातें करते रहे। भाभी ने मुझे गले लगाकर कहा, “आज के बाद मैं तुम्हारी हो गई हूँ।”
सुबह 5 बजे तक हमने कुल 5 राउंड पूरे किए। आखिरी राउंड में भाभी इतनी थक चुकी थीं कि बस लेटी हुई थीं और मैं ऊपर से धीरे-धीरे चोद रहा था।
सुबह होने से पहले भाभी ने कहा, “चलो अब सो जाओ अपने कमरे में। सुबह कोई शक न करे।”
मैंने आखिरी बार भाभी के होंठों पर लंबा किस किया और अपने कमरे में चला आया।
वो रात मेरे जीवन की सबसे यादगार रात थी। कंडोम पहनकर भाभी को पूरा रात चोदा… और भाभी भी पूरी तरह से संतुष्ट हुईं।
उस रात के बाद सुबह जब मैं उठा तो दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कल रात की यादें बार-बार आँखों के सामने घूम रही थीं। भाभी की नंगी body, उनकी चीखें, और मेरे लोड़े पर उनका पानी… सब कुछ अभी भी ताजा था।
मैं नाश्ते के लिए नीचे गया। भाभी किचन में रोटी बना रही थीं। उनका चेहरा अभी भी लाल था। जैसे ही मैं किचन में गया, भाभी ने मेरी तरफ देखा और शर्मा गईं। मैंने चुपके से उनके पास जाकर कान में फुसफुसाया, “भाभी, कल रात बहुत मजे आए।”
भाभी ने डाँटते हुए कहा, “चुप रहो रोहन! मम्मी-पापा आ गए हैं। कोई सुन लेगा।”
लेकिन उनकी आँखों में वो चमक थी जो कल रात की थी। मैंने मौका देखते हुए उनके हाथ पर हल्का सा हाथ फेर दिया। भाभी ने हाथ झटका लेकिन मुस्कुरा भी दीं।
पूरे दिन हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहते थे। भाभी जब भी अकेली मिलतीं, मैं उनके स्तन दबा लेता या गांड पर हाथ मार देता। भाभी डाँटतीं लेकिन रोतीं नहीं।
शाम को भाई ड्यूटी से लौट आए। रात को खाना खाने के बाद भाई फिर से नाइट शिफ्ट पर चले गए। मम्मी-पापा अपने कमरे में सो गए। अब घर में फिर से सिर्फ मैं और भाभी अकेले थे।
रात के 11 बजे के करीब भाभी अपने कमरे में गईं। मैं चुपके से उनके पीछे चला गया। दरवाजा बंद करते ही भाभी ने मुझे दीवार से लगा लिया और खुद मेरे होंठों पर किस करने लगीं। आज भाभी ज्यादा आक्रामक थीं।
“रोहन… आज फिर से पूरा रात करना है।” भाभी ने साँस लेते हुए कहा।
मैंने तुरंत उनका सूट ऊपर खींचा और ब्रा के ऊपर से ही उनकी छातियाँ दबाने लगा। भाभी की साँसें तेज हो गईं। मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और इस बार पहले उनकी चूत चाटने लगा। भाभी ने मेरे बालों में उंगलियाँ फँसा लीं और कमर ऊपर उठाने लगीं।
“आह… रोहन… जीभ और अंदर डालो…” भाभी अब बिल्कुल खुलकर बोल रही थीं।
करीब 10 मिनट तक चूत चाटने के बाद भाभी का पहला झड़ाव हो गया। फिर मैंने कंडोम लगाया और भाभी के ऊपर चढ़ गया। इस बार धक्के और जोरदार थे। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।
“और जोर से… हाँ… ऐसे ही… मेरी चूत फाड़ दो आज…” भाभी चीख रही थीं।
हमने पहले राउंड में ही भाभी को दो बार झड़ा दिया। उसके बाद भाभी ने खुद मुझे लिटा दिया और ऊपर आकर बैठ गईं। उन्होंने मेरा लोड़ा अपनी चूत में उतारा और तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी छातियाँ मेरे मुंह के सामने झूल रही थीं। मैं एक-एक करके दोनों चूचियाँ चूस रहा था।
दूसरा राउंड करीब 25 मिनट चला। भाभी का पसीना मेरे शरीर पर टपक रहा था।
थोड़ी देर आराम करने के बाद भाभी ने कहा, “आज डॉगी स्टाइल में करो… मुझे पीछे से चोदो।”
भाभी घुटनों के बल हो गईं। मैंने पीछे से आकर कंडोम लगाया और एक ही जोरदार धक्के में पूरा लोड़ा अंदर घुसा दिया। भाभी की चीख निकल गई। मैं उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। हर धक्के के साथ भाभी का मोटा गांड हिल रहा था। मैंने एक हाथ से उनकी गांड पर थप्पड़ भी मारे।
“आह… रोहन… और मारो… हाँ… ऐसे ही…” भाभी पागल हो रही थीं।
रात के 3 बजे तक हमने चार राउंड पूरे कर लिए थे। हर बार नया कंडोम। भाभी अब पूरी तरह थक चुकी थीं। आखिरी राउंड में भाभी लेटी हुई थीं और मैं धीरे-धीरे उनको चोद रहा था। भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया और मेरे कान में फुसफुसाया, “रोहन… मैं तुम्हारी हो गई हूँ। जब चाहो आ जाना… मेरी चूत तुम्हारी है।”
सुबह 5:30 बजे हम दोनों नहा-धोकर तैयार हो गए। भाभी ने मुझे आखिरी बार चुपके से किस किया और बोलीं, “आज शाम को फिर आना… भाई ड्यूटी पर होंगे।”
उसके बाद से हमारी मुलाकातें और भी गुप्त और ज्यादा हो गईं। कभी किचन में, कभी छत पर, कभी भाई के कमरे में भी… लेकिन सबसे मजे की चुदाई वो रातें थीं जब भाई नाइट शिफ्ट पर होता था।
हर बार कंडोम लगाकर ही चोदता था मैं भाभी को… और भाभी भी अब बिना कंडोम के मना कर देती थीं।
भाग 3 – भाई को शक और रिस्की चुदाई
उस रात के बाद से भाभी और मेरी मुलाकातें और भी ज्यादा खतरनाक हो गई थीं। भाई अब पहले से ज्यादा ध्यान दे रहा था। कभी भाभी के गले पर किस का निशान देख लेता, कभी रात को देर से मेरे कमरे से आवाजें सुन लेता। एक दिन भाई ने सीधे भाभी से पूछ लिया, “तुम्हारा चेहरा आजकल बहुत चमक रहा है… कोई बात है क्या?”
भाभी ने हँसकर टाल दिया, लेकिन रात को मुझे चुपके से व्हाट्सएप पर मैसेज किया — “रोहन, भाई को शक हो रहा है। अब बहुत सावधानी से मिलना।”
लेकिन हम दोनों कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे।
एक शाम भाई जल्दी ड्यूटी से लौट आए। मम्मी-पापा बाजार गए हुए थे। भाभी और मैं दोनों ऊपर भाभी के कमरे में थे। मैं भाभी की चूत चाट रहा था और भाभी मेरे सिर को दबा रही थीं। अचानक नीचे से भाई की आवाज आई — “प्रिया! तुम ऊपर हो?”
भाभी का चेहरा सफेद पड़ गया। मैंने तुरंत मुंह ऊपर उठाया। भाभी ने जल्दी से सूट ठीक किया और सीढ़ियों की तरफ गईं। मैं बेड के नीचे छुप गया।
भाई कमरे में आ गए। “क्या कर रही थी ऊपर?” “कुछ नहीं… कपड़े बदल रही थी,” भाभी ने घबराकर जवाब दिया।
भाई ने कमरे में चारों तरफ देखा। मेरी एक चप्पल बेड के पास पड़ी थी। भाई ने उसे उठाया और भाभी से पूछा, “ये रोहन की चप्पल कैसे यहाँ?”
भाभी घबरा गईं। तभी मैंने बाहर से जोर से खाँसा। भाई नीचे चले गए। भाभी ने मुझे इशारे से बाहर निकलने का संकेत दिया। मैं चुपके से अपने कमरे में चला आया।
उस रात भाई ने भाभी से झगड़ा किया। मैंने सब सुना। भाई बोला, “तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है… मुझे पता है।”
भाभी ने जोर से मना किया, लेकिन भाई शक में ही सोए।
अगले दिन भाई फिर नाइट शिफ्ट पर चले गए। रात को 12 बजे के बाद भाभी मेरे कमरे में चुपके से आईं। उनका चेहरा डरा हुआ था। “रोहन… भाई को शक हो गया है। आज रिस्क बहुत ज्यादा है।”
मैंने उन्हें बेड पर खींच लिया। “एक बार तो कर लें भाभी… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।”
भाभी ने पहले मना किया, लेकिन जब मैंने उनके स्तन दबाए तो वे भी पिघल गईं। हम दोनों नंगे हो गए। मैंने कंडोम लगाया और भाभी को दीवार से लगा दिया। खड़े-खड़े ही चुदाई शुरू कर दी। भाभी की एक टांग मैंने उठा रखी थी।
“आह… रोहन… धीरे… भाई आ सकते हैं…” भाभी फुसफुसा रही थीं।
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। भाभी का मुंह बंद करने के लिए मैंने उन्हें किस कर लिया। तभी नीचे से दरवाजे की घंटी बजी।
भाई जल्दी लौट आए थे!
भाभी घबरा गईं। मैंने कंडोम वाला लोड़ा अभी भी उनकी चूत में डाला हुआ था। “भाभी… क्या करें?” मैंने फुसफुसाया।
भाभी ने मुझे धक्का देकर अलग किया। जल्दी से ब्रा-पैंटी पहनी और सूट ठीक किया। मैं भी कपड़े पहनकर बेड के नीचे छुप गया।
भाई ऊपर आए और दरवाजा खटखटाया। “प्रिया! दरवाजा खोलो!”
भाभी ने दरवाजा खोला। भाई अंदर आए और चारों तरफ देखा। “तुम्हारा चेहरा लाल क्यों है?”
भाभी ने कहा, “नीचे से आ रही थी… भागते हुए आई हूँ।”
भाई ने बेड के चारों तरफ देखा। मेरी एक जर्सी बेड पर पड़ी थी। भाई ने उसे उठाया। “ये रोहन की जर्सी है?”
भाभी कुछ बोल नहीं पाईं। तभी मैंने बाहर से जोर से फोन पर बात करने की आवाज दी। भाई नीचे चले गए।
जैसे ही भाई नीचे गए, भाभी ने मुझे बाहर निकाला। हम दोनों काँप रहे थे। भाभी ने कहा, “आज के लिए बस… बहुत डर लग रहा है।”
लेकिन मैंने भाभी को फिर से दीवार से लगा लिया। “एक बार और… जल्दी से।”
भाभी ने मना किया लेकिन मैंने जबरदस्ती उनका सूट ऊपर खींच लिया। इस बार बिना कंडोम के ही लोड़ा उनकी चूत में घुसा दिया। भाभी ने जोर से साँस ली। “रोहन… कंडोम नहीं लगाया!”
“आज जल्दी खत्म कर देंगे,” मैंने कहा और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
भाभी की साँसें बहुत तेज थीं। उन्हें डर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था। करीब 5 मिनट में ही भाभी झड़ गईं और मैं भी उनके अंदर ही झड़ गया।
जैसे ही हम अलग हुए, नीचे से भाई की आवाज आई — “प्रिया! पानी ला दो!”
भाभी ने जल्दी से कपड़े ठीक किए और नीचे चली गईं। मैं बेड के नीचे छुपकर लेटा रहा।
उस रात भाई ने भाभी से फिर पूछताछ की। भाभी ने बहुत मना किया, लेकिन भाई का शक अब और गहरा हो गया था।
अगले दिन भाभी ने मुझे व्हाट्सएप पर लिखा — “रोहन… अब कुछ दिनों के लिए रुक जाना। भाई बहुत शक कर रहा है। अगर पकड़े गए तो सब खत्म हो जाएगा।”
लेकिन हम दोनों जानते थे कि हम रुक नहीं पाएंगे…
