लेट नाइट काम के बहाने बॉस ने मेरी चूत में लंड घुसाया
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रात के 10:15 बज रहे थे। ऑफिस की लाइट्स ज्यादातर बंद हो चुकी थीं। सिर्फ़ 7th फ्लोर पर बॉस करण मल्होत्रा के केबिन की लाइट जल रही थी। मैं (अनन्या) उनकी पर्सनल सेक्रेटरी हूँ। 23 साल की, फेयर स्किन, अच्छी फिगर वाली लड़की। आज भी लेट नाइट काम के बहाने करण सर ने मुझे रुकने को कहा था।
करण सर 42 साल के हैं, लंबे कद-काठी वाले, दबंग लेकिन आकर्षक। पिछले कुछ हफ्तों से उनकी नजर मुझ पर अलग ढंग से पड़ रही थी। आज प्रोजेंटेशन की फाइल्स तैयार करने का बहाना था।
मैं उनके केबिन में टेबल पर झुकी हुई थी। मेरी ब्लैक टाइट स्कर्ट थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी और सफेद ब्लाउज से ब्रा का आउटलाइन साफ़ दिख रहा था।
“सर, ये स्लाइड्स ठीक हैं?” मैंने पूछा।
करण सर मेरे पीछे आकर खड़े हो गए। उनकी साँस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। “अनन्या, तुम बहुत मेहनती हो। लेकिन ये काम कल भी हो सकता था… फिर भी तुम रुकी।”
मैं मुड़ी। “सर, आपने कहा था urgent है।”
करण सर ने मुस्कुराते हुए मेरी कमर पर हाथ रख दिया। “urgent तो है… लेकिन शायद कुछ और भी। तुम्हें पता है न अनन्या, ऑफिस में सब सो चुके हैं। सिर्फ हम दोनों।”
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। “सर… क्या कह रहे हैं आप?”
करण सर ने मेरे कान के पास फुसफुसाकर कहा, “जो तुम भी चाहती हो। मैंने देखा है कैसे तुम मेरी तरफ देखती हो। आज मौका है। कोई नहीं आएगा।”
मैं शरमा गई, लेकिन हटी नहीं। “सर… ये गलत है… अगर किसी ने देख लिया तो?”
करण सर ने मेरी कमर को और पास खींचा। “कोई नहीं देखेगा। बस एक बार बोल दो… तुम तैयार हो?”
मैंने नीचे देखा, फिर धीरे से सिर हिलाया। “सर… मैं डर रही हूँ… लेकिन… हाँ।”
करण सर की आँखों में भूख चमक उठी। उन्होंने मुझे घुमाकर केबिन की डेस्क पर झुका दिया। मेरी स्कर्ट ऊपर चढ़ाने लगे…
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आदित्य और प्रिया की गर्म रात – भाग 2
करण सर ने मुझे घुमाकर अपने केबिन की बड़ी डेस्क पर लिटा दिया। मेरी पीठ ठंडे शीशे वाली डेस्क पर लगी तो सिहरन सी दौड़ गई। करण सर मेरे ऊपर झुक गए। उनकी आँखों में भूख साफ़ दिख रही थी।
“सर… धीरे… पहली बार है…” मैंने काँपती आवाज़ में कहा।
करण सर ने मुस्कुराते हुए मेरे ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर बटन खुलते ही मेरा साँस तेज़ होता जा रहा था। ब्लाउज पूरी तरह खुल गया। अंदर हल्के गुलाबी रंग की लेस वाली ब्रा थी, जो मेरे गोरे और भरे हुए स्तनों को मुश्किल से छुपा पा रही थी।
करण सर ने ब्रा के हुक पीछे से खोले और ब्रा को दोनों तरफ़ फेंक दिया। मेरे गुलाबी निप्पल्स हवा में सख्त होकर खड़े हो गए। करण सर ने एक स्तन को हाथ में दबाया और दूसरे को मुँह में ले लिया।
“आह्ह्ह… सर…!” मैंने आँखें बंद कर लीं। मेरे मुँह से अनचाही सिसकारी निकल गई।
करण सर ने मेरी स्कर्ट का बटन खोला और ज़िपर नीचे किया। स्कर्ट को मेरी जांघों से उतारकर फर्श पर फेंक दिया। अब मैं सिर्फ़ मैचिंग गुलाबी पैंटी में लेटी हुई थी। पैंटी का कपड़ा पहले से ही भीग चुका था।
करण सर ने पैंटी के दोनों तरफ़ की पट्टियों को पकड़कर धीरे-धीरे नीचे सरकाया। मेरी चिकनी, साफ़ और गीली चूत अब पूरी तरह नंगी हो गई। करण सर ने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। उनका मोटा, लंबा और तना हुआ लंड बाहर आ गया।
मैंने शरमाते हुए आँखें फेर लीं। “सर… ये बहुत बड़ा है… दर्द होगा…”
करण सर मेरे ऊपर लेट गए। उन्होंने मेरी दोनों टांगें फैलाकर अपने कंधों पर रख लीं। अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। फिर धीरे से दबाव डाला।
“आआह्ह्ह… सर… धीरे…!” मैंने जोर से कराहते हुए कहा। मेरा चेहरा दर्द से सिकुड़ गया, आँखों में आँसू आ गए। लेकिन करण सर ने आधा लंड अंदर कर दिया।
फिर एक जोरदार धक्का। पूरा मोटा लंड मेरी टाइट चूत में घुस गया। “मम्मी… फट गई… सर… बहुत मोटा है…!” मैं चीख पड़ी। मेरे नाखून करण सर की पीठ में गड़ गए।
करण सर ने तेज़ रफ्तार से धक्के मारना शुरू कर दिया। डेस्क हिलने लगी। हर धक्के पर मेरे स्तन उछल रहे थे। मेरी चूत से “पच-पच” की आवाज़ आने लगी।
“अनन्या… तेरी चूत कितनी टाइट और गर्म है… ले… पूरी ले मेरी जान…” करण सर हाँफते हुए बोले। उनका चेहरा पसीने से तर था, आँखें बंद थीं।
मैं अब दर्द के बाद मजा लेने लगी थी। “हाँ सर… और जोर से… चोदिए मुझे… मेरी चूत आपकी है आज… अह्ह्ह… हाँ… यहीं…!”
करण सर की स्पीड बढ़ गई। वो मेरे स्तनों को दबाते हुए जोर-जोर से चोद रहे थे। कुछ मिनट बाद मेरा शरीर काँपने लगा। “सर… मैं आ गई… आह्ह्ह्ह!” मेरी चूत सिकुड़ गई और मैं पहली बार झड़ गई।
करण सर भी कुछ देर बाद जोर से हाँफते हुए मेरी चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। मेरी चूत से उनका वीर्य बाहर निकल रहा था।
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करण और अनन्या की गर्म रात – भाग 3
कुछ मिनट आराम करने के बाद करण सर ने मुझे उठाकर केबिन के कोने में रखे बड़े सॉफे पर ले गए। मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे। चूत से उनका वीर्य टपक रहा था।
“सर… बस… बहुत हो गया…” मैंने हाँफते हुए कहा।
करण सर मुस्कुराए, “अभी तो मजा शुरू हुआ है अनन्या।” उन्होंने मुझे सॉफे पर चौथे पैरों पर बैठा दिया। मेरी गांड ऊपर की तरफ़ थी और चूत पूरी तरह खुली हुई।
करण सर ने मेरी दोनों गांड की चपेटों को हाथों से फैलाया। उनकी उँगलियाँ मेरी चूत पर फिर घूमने लगीं।
“सर… क्या कर रहे हैं…” मैंने शरमाते हुए पीछे मुड़कर कहा।
करण सर ने जवाब में मेरी चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। फिर अचानक अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
“आह्ह्ह… सर… फिर से…!” मैंने सॉफे को जोर से पकड़ लिया।
करण सर ने तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए। डॉगी स्टाइल में लंड बहुत गहराई तक जा रहा था। मेरे स्तन नीचे लटककर झूल रहे थे। हर धक्के पर “पच-पच” की आवाज़ पूरे केबिन में गूंज रही थी।
“अनन्या… तेरी चूत बहुत स्वादिष्ट है… ले… पूरा लंड ले…” करण सर ने मेरी कमर पकड़कर और जोर से चोदना शुरू किया। उनका चेहरा लाल था, पसीना टपक रहा था।
मैं पागल हो गई थी। “हाँ सर… फाड़ दीजिए… और तेज़… मुझे चोदिए… अह्ह्ह… आपका लंड बहुत मोटा है…!”
करण सर ने कुछ देर चूत चोदने के बाद लंड निकाला और अब उसे मेरी गांड के छेद पर रख दिया।
“सर… नहीं… वहाँ मत… पहली बार है… दर्द होगा…!” मैंने डरते हुए कहा।
लेकिन करण सर ने मेरी कमर पकड़कर धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में घुसाना शुरू कर दिया। इंच-इंच करके पूरा लंड अंदर चला गया।
“आआआह्ह्ह… सर… फट गई… बहुत दर्द हो रहा है…!” मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मैंने सॉफे को कसकर पकड़ रखा था।
करण सर ने धीमी गति से गांड चोदना शुरू किया। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और जगह पर अजीब सा मजा आने लगा।
“अब… अच्छा लग रहा है सर… हाँ… चोदिए मेरी गांड भी… मैं आपकी हूँ… पूरी तरह… अह्ह्ह!” मैंने कराहते हुए कहा।
करण सर की स्पीड बढ़ गई। वो मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मार रहे थे। एक हाथ से मेरी चूत में उँगलियाँ डालकर साथ-साथ उत्तेजित कर रहे थे।
मेरा शरीर फिर से काँपने लगा। “सर… मैं फिर आ गई… आह्ह्ह्ह!” मेरी चूत से रस निकला और मैं झड़ गई।
करण सर भी कुछ मिनट बाद जोर से हाँफते हुए मेरी गांड के अंदर ही अपना गर्म वीर्य भर दिया।
दोनों थककर सॉफे पर लेट गए। मैं करण सर की छाती से चिपकी हुई थी। मेरी चूत और गांड दोनों ही सूजी हुई थीं और वीर्य से भरी हुई थीं।
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मैं घुटनों के बल बैठकर उनका लंड चूसती हूँ और ब्लो जॉब देती हूँ, फिर वो मेरे मुँह में झड़ते हैं।
सॉफे पर लेटे-लेटे करण सर ने मेरे बालों को सहलाया और धीरे से बोले, “अनन्या, अब मेरे लंड को साफ़ कर दो।”
मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। शरीर अभी भी थका हुआ था, लेकिन उनकी बात मानकर मैं सॉफे से नीचे उतरकर घुटनों के बल बैठ गई। करण सर सॉफे पर बैठ गए और टांगें फैला लीं।
उनका लंड अभी भी आधा खड़ा था, मेरी चूत और गांड का रस उस पर लगा हुआ था। मैंने दोनों हाथों से लंड को पकड़ा। गर्म और मोटा महसूस हो रहा था।
“सर… ये कितना गंदा है…” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
करण सर ने मुस्कुराकर मेरे सिर को आगे धकेला। मैंने जीभ निकालकर लंड की नोक को चाटना शुरू किया। नमकीन और चिपचिपा स्वाद था। धीरे-धीरे मैंने पूरा लंड मुँह में ले लिया।
“अह्ह… अच्छा है अनन्या… और गहरा ले…” करण सर ने कराहते हुए कहा।
मैं जोर-जोर से चूसने लगी। मेरा सिर आगे-पीछे हो रहा था। “ग्लप… ग्लप… ग्लप…” की आवाज़ आने लगी। कभी-कभी लंड को गले तक ले जाती, तो उबकाई सी आने लगती। मेरी आँखों से पानी आ रहा था, लेकिन मैं रुकी नहीं।
करण सर ने मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह को फकिंग स्टाइल में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। “तेरा मुँह भी तेरी चूत जितना टाइट है… ले… पूरा ले…”
मैंने लंड को मुँह से निकालकर नीचे अंडकोष चूसने लगी और हाथ से लंड सहलाती रही। फिर फिर से मुँह में ले लिया। मेरे होंठ लंड के चारों तरफ़ फैले हुए थे, गाल अंदर धंस गए थे।
करण सर की साँसें तेज़ हो गईं। उनका लंड मेरे मुँह में और सख्त हो गया। “अनन्या… मैं आने वाला हूँ… मुँह खोल…”
मैंने आँखें ऊपर कीं और मुँह खोल दिया। करण सर ने लंड को मेरे मुँह में ही जोर से दबाया और गर्म-गर्म वीर्य की कई धारें मेरे गले में छोड़ दीं।
“ग्लप… ग्लप…” मैंने जितना हो सका निगल लिया। कुछ वीर्य मेरे होंठों के किनारे से बाहर निकलकर ठोड़ी पर गिर गया।
करण सर ने संतुष्ट होकर सिर पीछे टिका लिया। मैं अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थी, मुँह में उनका स्वाद भरा हुआ था। मेरी आँखें लाल हो गई थीं और साँस फूल रही थी।
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अगले दिन की चुदाई
अगले दिन ऑफिस में सब कुछ नॉर्मल लग रहा था। लेकिन मेरे अंदर कल रात की याद अभी भी ताज़ा थी। मेरी चूत और गांड में हल्का दर्द था। मैंने आज भी साड़ी पहनी थी – ब्लू साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट।
दोपहर के 2 बजे थे। करण सर ने मुझे केबिन में बुलाया। जैसे ही मैं अंदर गई, उन्होंने दरवाज़ा लॉक कर दिया।
“सर… दिन में?” मैंने चौंककर कहा।
करण सर मेरे पास आए, मेरी कमर पकड़ी और मुझे दीवार से सटा दिया। “कल रात के बाद अब दिन में भी नहीं रुक सकता अनन्या।”
उन्होंने मेरी साड़ी की पल्लू खींची और ब्लाउज के हुक तेज़ी से खोल दिए। ब्रा ऊपर सरकाकर मेरे स्तनों को बाहर निकाला और जोर से चूसने लगे। मैंने कराहते हुए उनके बालों में हाथ फेरा।
“सर… कोई आ जाएगा… अह्ह…”
करण सर ने मेरी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठाया, पैंटी को घुटनों तक उतार दिया। मेरी चूत पहले से गीली हो चुकी थी। उन्होंने अपनी पैंट उतारी, लंड बाहर निकाला और मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े ही लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
“आआह्ह… सर… पूरा घुस गया…!” मैंने दीवार को पकड़कर कहा।
करण सर ने तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरी साड़ी कमर पर लिपटी हुई थी। हर धक्के पर मेरे स्तन उछल रहे थे। करण सर एक हाथ से मेरे स्तन दबा रहे थे और दूसरे से कमर पकड़े हुए थे।
“अनन्या… तेरी चूत दिन में भी कितनी टाइट है… ले… ले मेरी जान…” करण सर हाँफ रहे थे।
मैंने अपनी टांग एक तरफ़ उठाकर और फैला दी ताकि लंड और गहरा जाए। “हाँ सर… चोदिए… दिन में भी अपनी सेक्रेटरी की चूत चोदिए… अह्ह्ह… और तेज़…!”
करण सर ने मुझे घुमाकर डेस्क पर झुका दिया और पीछे से डॉगी स्टाइल में चोदने लगे। उनकी थपकियों की आवाज़ केबिन में गूंज रही थी।
कुछ मिनट बाद मैं काँप उठी। “सर… मैं निकल रही हूँ… आह्ह्ह!” मेरी चूत सिकुड़ी और मैं झड़ गई।
करण सर ने भी तेज़ी से धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य भर दिया।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक गए। मेरी साड़ी पूरी तरह बिखरी हुई थी।
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शाम को ऑफिस खाली होने के बाद करण सर मुझे मीटिंग रूम की टेबल पर लिटाकर लंबी चुदाई करते हैं।
शाम के 8:30 बज चुके थे। ऑफिस अब लगभग खाली हो चुका था। करण सर ने मुझे मैसेज किया – “मीटिंग रूम में आ जाओ। Urgent काम है।”
जैसे ही मैं मीटिंग रूम में पहुँची, करण सर ने दरवाज़ा बंद किया और पर्दे खींच दिए। उन्होंने मुझे बिना कुछ बोले बड़ी कॉन्फ्रेंस टेबल पर लिटा दिया।
“सर… यहाँ? इतनी बड़ी टेबल पर…” मैंने शरमाते हुए कहा।
करण सर ने मेरी साड़ी की पल्लू पूरी तरह खींच ली। ब्लाउज के सारे हुक खोलकर ब्रा सहित ऊपर कर दिया। मेरे दोनों गोरे स्तन बाहर आ गए। उन्होंने दोनों स्तनों को जोर से मसला और निप्पल्स को चूसने लगे।
“आह्ह… सर… धीरे…” मैं कराह उठी।
करण सर ने मेरी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठा दिया। पैंटी को पूरी तरह उतारकर टेबल के एक कोने पर फेंक दिया। मेरी चूत और गांड पूरी तरह नंगी थीं। उन्होंने अपनी सारी कपड़े उतार दीं। उनका लंड पहले से ही सख्त और नसों वाला खड़ा था।
करण सर ने मेरी दोनों टांगें फैलाकर टेबल के किनारे पर रखीं और लंड को मेरी चूत पर रगड़ा। फिर एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आआआह्ह्ह… सर… बहुत गहरा…!” मैंने टेबल को दोनों हाथों से पकड़ लिया। मेरी आँखें ऊपर चढ़ गईं।
करण सर ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़कर तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए। बड़ी टेबल हिलने लगी। हर धक्के पर मेरे स्तन उछल रहे थे और “पच-पच-पच” की आवाज़ रूम में गूंज रही थी।
“अनन्या… तेरी चूत दिन भर याद आ रही थी… ले… आज रात भर चोदूँगा तुझे…” करण सर हाँफते हुए बोले। उनका चेहरा पसीने से चमक रहा था।
मैं पागल हो गई थी। “हाँ सर… फाड़ दीजिए मेरी चूत… जितना मन करे चोदिए… अह्ह्ह… मैं आपकी रंडी हूँ…!”
करण सर ने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी गहराई तक धक्के मारने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने मुझे पलटकर पेट के बल लिटाया और पीछे से गांड में लंड घुसा दिया।
“आह्ह्ह… सर… गांड फट रही है… लेकिन मत निकालिए…!” मैंने दाँत भींचकर कहा।
करण सर ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से चोदना शुरू किया। मेरी चूत से रस टपक रहा था। उन्होंने एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी चूत में उँगलियाँ डाल दीं।
मेरा शरीर अचानक काँप उठा। “सर… मैं आ गई… आआह्ह्ह!” मैंने जोर से चीख मारी और झड़ गई।
करण सर भी कुछ ही देर बाद मेरी गांड के अंदर गर्म वीर्य भर दिया।
दोनों थककर टेबल पर ही लेट गए। मेरी साड़ी बिखरी पड़ी थी, शरीर पसीने और वीर्य से चिपचिपा हुआ था।
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- प्रिया भाभी को होटल में जमकर चोदा
- माँ बेटे की असली चुदाई की कहानी
- 20 साल की रानी को ट्रेन में चोदने में आया खूब मज़ा
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रात को करण सर मुझे अपने फार्महाउस ले जाते हैं और वहाँ पूरी रात चुदाई होती है।
मीटिंग रूम वाली चुदाई के बाद करण सर ने मुझे कहा, “आज रात घर मत जाना। मैं तुझे अपने फार्महाउस ले जा रहा हूँ। वहाँ कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।”
मैंने हामी भर दी। ऑफिस से निकलकर हम सीधे शहर से बाहर उनके फार्महाउस पहुँचे। सुंदर बंगला, चारों तरफ खेत और पूर्ण सन्नाटा।
जैसे ही हम अंदर गए, करण सर ने मुझे उठाकर बेडरूम के बड़े डबल बेड पर फेंक दिया। उन्होंने मेरी साड़ी एक-एक करके पूरी उतार दी। ब्लाउज, ब्रा, पेटीकोट और पैंटी – सब फर्श पर बिखेर दिए। मैं पूरी तरह नंगी लेटी थी।
करण सर भी नंगे हो गए। उनका लंड फिर से खड़ा था।
पहली राउंड (मिशनरी): करण सर मेरे ऊपर चढ़ गए। मेरी टांगें फैलाकर लंड मेरी चूत में घुसा दिया। धीरे-धीरे गहरे धक्के मार रहे थे। “आह्ह… सर… बहुत गहरा जा रहा है…” मैंने उनकी पीठ पर नाखून गड़ाते हुए कहा। करण सर मेरे स्तनों को चूसते हुए तेज़ होते गए। “तेरी चूत आज पूरी रात मेरी है अनन्या।”
दूसरी राउंड (डॉगी स्टाइल): उन्होंने मुझे घुटनों के बल किया। पीछे से लंड घुसाकर जोर-जोर से चोदने लगे। मेरी गांड पर थप्पड़ पड़ रहे थे। “फाड़ दीजिए सर… मेरी गांड और चूत दोनों चोदिए…!” मैं चीख रही थी। करण सर ने मेरी चूत और गांड दोनों में बारी-बारी लंड डाला।
तीसरी राउंड (काउगर्ल): मैं ऊपर आ गई। करण सर के लंड पर बैठकर जोर-जोर से हिलने लगी। मेरे स्तन उछल रहे थे। करण सर नीचे लेटे मेरे स्तनों को दबा रहे थे। “हाँ सर… आपका लंड बहुत मोटा है… पूरी चूत भर गई है…” मैं हाँफते हुए बोली।
चौथी राउंड (69): हम 69 पोजीशन में लेट गए। मैं उनका लंड चूस रही थी और वो मेरी चूत चाट रहे थे। दोनों एक-दूसरे का रस पी रहे थे।
आखिरी राउंड (स्टैंडिंग): करण सर ने मुझे दीवार से सटाया, टांग उठाकर खड़े-खड़े चोदा। मैं उनकी गर्दन में लिपटी हुई थी। “अनन्या… मैं झड़ने वाला हूँ…” “अंदर डालिए सर… मेरी चूत भर दीजिए…”
करण सर ने जोर से धक्का मारा और मेरी चूत में गर्म वीर्य उछाल दिया।
पूरी रात हमने 5 बार सेक्स किया। सुबह होते-होते मेरी चूत और गांड सूज गई थीं, शरीर पर चूसने के निशान थे। मैं करण सर की बाहों में नंगी लेटी हुई थी।
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