मेरी गर्लफ्रेंड स्नेहा को उसके घर में चोदा – रिस्की और सस्पेंसफुल सेक्स स्टोरी
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मेरा नाम अर्जुन है। मैं 25 साल का हूँ और दिल्ली में जॉब करता हूँ। 7 महीने पहले मेरी मुलाकात स्नेहा से हुई थी। स्नेहा 22 साल की है, मेरे कॉलेज के पास वाली लाइब्रेरी में पढ़ने आती थी। पहली बार जब मैंने उसे देखा तो मन मोह लिया। गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ और कमाल का फिगर — 34-27-36। जब वो टाइट कुर्ती और जींस पहनती थी तो उसके बड़े स्तन और गोल गांड देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता था।
हमारी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। हम डेट पर जाते, मूवी देखते, पार्क में घूमते। पहला किस बहुत रोमांटिक था — लाइब्रेरी के पीछे वाले गली में। उसके बाद हमारे बीच इंटिमेसी बढ़ गई। हम चूमते, गले मिलते, मैं उसके स्तनों को कुर्ती के ऊपर से दबाता, वो मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाती। लेकिन जब भी मैं आगे बढ़ने की कोशिश करता, वो मेरा हाथ रोक लेती।
एक शाम हम उसके घर के पास बैठे थे। मैंने पूछा, “स्नेहा, तुम मुझे इतना क्यों नहीं करने देती? मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”
स्नेहा शर्मा गई और बोली, “अर्जुन, मैं वर्जिन हूँ। मेरे मम्मी-पापा बहुत स्ट्रिक्ट हैं। अगर उन्होंने कुछ पता चल गया तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी। मैं शादी के बाद ही सब कुछ करना चाहती हूँ।”
मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “जानू, मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा। लेकिन तुम मेरी रियल गर्लफ्रेंड हो, मैं तुम्हें कभी हर्ट नहीं करूँगा।”
फिर एक दिन स्नेहा ने फोन किया। उसकी आवाज में कुछ खास था। “अर्जुन, आज मम्मी-पापा दोस्त के घर गए हैं। शाम 7 बजे तक वापस आएंगे। घर पर मैं अकेली हूँ। क्या तुम आ सकते हो? मैं बहुत अकेली feel कर रही हूँ।”
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। घर पर अकेली… ये मौका बहुत अच्छा था। मैंने तुरंत हाँ कर दी। शाम 5 बजे मैं उसके घर पहुँचा। फूल लेकर। जब उसने दरवाजा खोला तो मैं देखता ही रह गया। स्नेहा ने नीला रंग का बहुत टाइट टॉप पहना था, जिसमें उसके ब्रा के निशान साफ दिख रहे थे, और नीचे छोटा सा शॉर्ट्स था। उसकी गोरी जाँघें चमक रही थीं।
“वाओ स्नेहा! आज तो तुम बिल्कुल हॉट लग रही हो,” मैंने कहा। स्नेहा मुस्कुराते हुए बोली, “थैंक्यू बेबी। आज घर पर अकेली हूँ इसलिए स्पेशल तैयार हुई हूँ। आओ अंदर… लेकिन जल्दी से अंदर आ जाओ, कोई देख न ले।”
मैं अंदर गया। उसने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। हम लिविंग रूम में बैठे। थोड़ी देर बातें करने के बाद स्नेहा ने कहा, “अर्जुन, चल मेरे बेडरूम में चलते हैं। वहाँ ज्यादा प्राइवेट है।”
हम उसके बेडरूम में गए। कमरा साफ था, बेड पर नई चादर बिछी हुई थी। उसने लाइट्स डिम कर दीं। हम बेड पर बैठ गए। मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके होठों पर किस किया। वो भी जोश से किस करने लगी। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं।
मेरा हाथ उसके टॉप के अंदर चला गया। मैंने ब्रा के ऊपर से उसके नरम स्तनों को दबाया। स्नेहा सिसकारियाँ लेने लगी, “आआह्ह… अर्जुन… अच्छा लग रहा है। लेकिन जल्दी मत करना… मम्मी-पापा जल्दी आ सकते हैं।”
मैंने कहा, “जानू, थोड़ी देर के लिए तो हम अकेले हैं। मुझे तुझे छूने दो।”
मैंने उसका टॉप ऊपर खींचकर उतार दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक ब्रा में थी। उसके स्तन ब्रा से बाहर आने को बेकरार थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और ब्रा उतार दी। उसके दोनों बड़े, गोरे स्तन मेरे सामने थे। पिंक निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। स्नेहा की आँखें बंद हो गईं। “ओह्ह अर्जुन… तुम बहुत अच्छा चूस रहे हो… आआह्ह… लेकिन सावधानी से… कोई आ गया तो बहुत बुरा होगा।”
वो मेरी शर्ट के बटन खोलकर शर्ट उतारने लगी। मेरी छाती चूमती हुई नीचे गई। उसने मेरी जींस का जिप खोला और अंदर हाथ डालकर मेरा 7 इंच मोटा लंड पकड़ लिया। “वाह अर्जुन… इतना बड़ा… मैं डर रही हूँ।”
मैंने कहा, “ये सब तुम्हारे लिए है जान। आज मैं तुम्हारी सील तोड़ दूँगा… लेकिन बहुत धीरे से।”
फिर मैंने उसे लिटा दिया और उसके शॉर्ट्स का बटन खोला। शॉर्ट्स उतार दिया। अब स्नेहा सिर्फ ब्लैक पैंटी में लेटी हुई थी। पैंटी के बीच में गीला धब्बा साफ दिख रहा था। मैंने पैंटी के ऊपर हाथ फेरा और उसकी चूत को रगड़ने लगा। स्नेहा की कमर ऊपर उठने लगी। “आआह्ह… अर्जुन… वहाँ मत छुओ… मुझे बहुत अजीब सा लग रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है। मम्मी-पापा आ गए तो क्या होगा?”
मैंने पैंटी के किनारे से उँगली डाली और उसकी गीली, गर्म चूत को छुआ। धीरे से एक उँगली अंदर डाली तो स्नेहा चीख सी पड़ी, “आआह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुको मत… बस जल्दी मत करना।”
अब हम दोनों की साँसें बहुत तेज थीं। मेरा लंड पैंटी के ऊपर से उसकी चूत से रगड़ रहा था। स्नेहा ने मुझे गले लगाया और कान में फुसफुसाया, “अर्जुन, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। आज मैं तैयार हूँ… लेकिन बहुत सावधानी से करना। अगर मम्मी-पापा आ गए तो बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी।”
मैंने कहा, “हाँ स्नेहा, मैं बहुत सावधानी से करूँगा।
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स्नेहा को उसके घर के बेड पर पहली बार चोदा – रिस्की चुदाई
“अब आगे क्या करें?” — मेरे ये शब्द सुनते ही स्नेहा ने मुझे और टाइट गले लगाया। उसकी साँस बहुत तेज चल रही थी। उसने धीरे से कहा, “अर्जुन… अब मत रुको। मेरी सील तोड़ दो। लेकिन बहुत सावधानी से… मम्मी-पापा कभी भी आ सकते हैं।”
मैंने उसे चूमा और कहा, “ठीक है मेरी जान… आज मैं तेरी वर्जिन चूत में अपना लंड डालूँगा। लेकिन बहुत धीरे-धीरे। अगर दर्द हो या कोई आ जाए तो बोल देना।”
मैंने स्नेहा को उसके बेड पर लिटा दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में लेटी हुई थी। मैं उसके पैरों के पास घुटनों के बल बैठ गया। पहले मैंने उसकी नरम जाँघों को दोनों हाथों से सहलाया। फिर धीरे-धीरे अपने हाथ ऊपर ले गया। मैंने पैंटी के दोनों तरफ उँगलियाँ डालीं। पैंटी का इलास्टिक उसकी गोरी त्वचा पर हल्का सा दब रहा था।
मैंने पैंटी को बहुत धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। पैंटी उसके कूल्हों से उतरती हुई उसकी जाँघों तक आ गई। स्नेहा ने अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाई ताकि पैंटी आसानी से उतर जाए। अब पैंटी उसकी गोरी जाँघों के बीच से खिसक रही थी। मैंने और नीचे खींचा — पैंटी उसके घुटनों तक पहुँच गई। स्नेहा ने अपने पैर थोड़े फैलाए और मैंने पैंटी को पूरी तरह उसके पैरों से निकालकर साइड में फेंक दिया।
अब स्नेहा बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी मेरे सामने। उसकी वर्जिन चूत पहली बार मेरी आँखों के सामने थी। बिल्कुल टाइट, छोटी सी, गुलाबी रंग की। ऊपर हल्का सा ट्रिम किया हुआ छोटा सा जंगल था। चूत के होठ बिल्कुल बंद थे, लेकिन बीच से चमक रही थी क्योंकि वो बहुत गीली हो चुकी थी।
स्नेहा शर्मा के अपने हाथ से चेहरा छुपाने लगी। “मत देखो ऐसे अर्जुन… शरम आ रही है… और जल्दी मत करना, मम्मी-पापा आ सकते हैं।”
मैंने उसके हाथ हटाए और कहा, “स्नेहा, तेरी चूत बहुत सुंदर है जान।” मैंने उसके पैर फैलाए और उसके चूत के पास मुँह ले गया। पहले मैंने चूत के ऊपर हल्का सा किस किया। फिर जीभ से उसके चूत के होठ चाटने लगा। स्नेहा की कमर ऊपर को उछल गई। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… ये क्या कर रहे हो… ओह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… लेकिन धीरे से… कोई आ गया तो?”
मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाली और अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत का स्वाद थोड़ा नमकीन और मीठा था। मैंने क्लिट को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। स्नेहा अब जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थी। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मत रोको… और चूसो… लेकिन आवाज मत निकालना… मम्मी-पापा आ गए तो बहुत बुरा होगा…”
थोड़ी देर बाद मैं ऊपर आया। मैंने उसकी जाँघों को फैलाया और अपना 7 इंच मोटा लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा। लंड का सुपाड़ा उसकी गीली चूत से रगड़ रहा था। स्नेहा ने मेरी तरफ देखा और डरते हुए कहा, “अर्जुन… अब डाल दो… लेकिन बहुत धीरे से… मुझे डर लग रहा है।”
मैंने धीरे से दबाव डाला। सिर्फ सुपाड़ा अंदर गया। स्नेहा की आँखें फट गईं। “आआआह्ह्ह! अर्जुन… दर्द हो रहा है बहुत! रुको…” उसकी आँखों में पानी आ गया। उसने मेरे कंधे पकड़ लिए।
मैं रुक गया। मैंने उसके होठों पर किस किया और कहा, “श्श… मेरी जान… मैं रुक गया हूँ। तेरी चूत कितनी टाइट है… बहुत टाइट… घबराओ मत।” मैं उसके गाल पर किस करता रहा और उसके स्तन दबाता रहा ताकि वो रिलैक्स हो।
थोड़ी देर बाद स्नेहा ने कहा, “अब धीरे से आगे बढ़ो… मैं ट्राई करती हूँ।”
मैंने फिर थोड़ा सा दबाव डाला। लंड का सुपाड़ा और अंदर गया। स्नेहा की चूत ने मेरा लंड बहुत टाइट पकड़ लिया था। फिर मैंने और थोड़ा सा धक्का दिया — और अचानक रेजिस्टेंस टूट गई। उसकी हाइमन (सील) टूट गई। थोड़ा सा खून निकल आया।
स्नेहा ने जोर से चिल्लाया, “आआआह्ह्ह! दर्द… बहुत दर्द हो रहा है अर्जुन… रुक जाओ… प्लीज!” उसकी आँखों से आँसू आ गए। वो मेरे बालों में हाथ डाल के खींच रही थी। उसका चेहरा दर्द से लाल हो गया था, होंठ काट रही थी, आँखें बंद थीं।
मैंने तुरंत रुक जाते हुए उसे चूमा और कहा, “स्नेहा मेरी जान… हो गया। तेरी सील टूट गई। अब धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। मैं रुक गया हूँ। तुम ठीक हो?”
स्नेहा ने आँसू पोंछते हुए कहा, “हाँ… थोड़ा दर्द है लेकिन… अब आगे बढ़ो। मैं तुमसे प्यार करती हूँ। चोदो मुझे… लेकिन जल्दी मत करना… मम्मी-पापा आ सकते हैं।”
अब मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया। मेरा पूरा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत में उतरता गया। जब पूरा लंड अंदर चला गया तो स्नेहा की चूत ने मेरा पूरा लंड ग्रिप कर लिया था। वो इतनी टाइट थी कि मुझे लग रहा था मेरा लंड फट जाएगा।
मैंने उसके चेहरे को देखा — दर्द, डर और थोड़ा सुकून का मिश्रण था। उसने आँखें खोली और मुझे देखा। “अर्जुन… पूरा अंदर आ गया क्या? मुझे बहुत फुल फील हो रहा है… लेकिन डर भी लग रहा है।”
मैंने कहा, “हाँ जान… पूरा लंड तेरी चूत में है। तेरी चूत मेरा लंड इतना टाइट पकड़ रही है कि मैं जल्दी झड़ जाऊँगा। तू कितनी टाइट है मेरी जान… घबराओ मत, मैं सावधानी से कर रहा हूँ।”
अब मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जब मैं बाहर निकलता तो थोड़ा खून लंड पर लग जाता। स्नेहा की चूत गीली हो चुकी थी। धीरे-धीरे उसका दर्द कम होने लगा और उसे मजा आने लगा।
“आआआह्ह्ह… अर्जुन… अब अच्छा लग रहा है… धीरे से चोदो… ओह्ह्ह… और अंदर… लेकिन आवाज मत निकालना… मम्मी-पापा आ गए तो?” स्नेहा अब अपनी कमर ऊपर उठा के मेरा लंड अंदर ले रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने उसके एक स्तन को मुँह में लिया और चूसते हुए चुदाई कर रहा था।
स्नेहा के एक्सप्रेशन बदल रहे थे — पहले दर्द और डर, अब प्लेजर। वो अपनी आँखें बंद करके मुँह खोल के सिसकारियाँ ले रही थी। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो… मेरी चूत तुम्हारा लंड निगल रही है… ओह्ह्ह… और तेज… लेकिन सावधानी से… मैं तुम्हारी हो गई…”
मैं भी अपने एक्सप्रेशन कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। मेरा चेहरा सुकून से भर गया था। “स्नेहा… तेरी चूत कितनी गरम और टाइट है… मैं पागल हो रहा हूँ… ले मेरी जान… ले पूरा लंड… आज मैं तुझे उसके घर में अपनी बना रहा हूँ…” मैं उसके होठों पर किस करता, उसके स्तन दबाता और धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाता गया।
अब स्नेहा के मून्स तेज हो गए। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मैं आ रही हूँ… ओह्ह्ह गॉड… कुछ हो रहा है… आआआह्ह्ह!” उसका पूरा शरीर काँपने लगा। उसकी चूत ने मेरा लंड और टाइट पकड़ लिया। वो ऑर्गेज्म ले रही थी। उसकी आँखें पीछे को हो गईं, मुँह खुला था।
मैंने भी स्पीड बढ़ा दी। अब जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। स्नेहा चीख रही थी, “आआआह्ह्ह… अर्जुन… और जोर से… मैं तुम्हारी हूँ… चोदो मुझे… लेकिन जल्दी मत करना…”
आखिर में मैंने जोर से चिल्लाया, “स्नेहा… मैं निकल रहा हूँ!” और उसकी चूत में ही अपना सारा गरम वीर्य छोड़ दिया। लंड के अंदर ही झड़ रहा था। स्नेहा ने मुझे और टाइट पकड़ा।
दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर लेट गए। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था। मैंने उसे चूमा और कहा, “स्नेहा… तू ठीक है ना?”
स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ अर्जुन… अब बिल्कुल ठीक हूँ। पहले बहुत दर्द था लेकिन बाद में बहुत मजा आया। तुमने बहुत प्यार से किया। मैं तुमसे और ज्यादा प्यार करती हूँ अब… लेकिन अब जल्दी से कपड़े पहन लो, मम्मी-पापा आ सकते हैं।”
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अगली रात स्नेहा ने मुझे फिर अपने घर बुलाया – और भी रिस्की चुदाई
पहली रात के बाद जब मैं घर पहुँचा तो स्नेहा का मैसेज आया — “अर्जुन… आज रात फिर आना। मम्मी-पापा कल सुबह तक बाहर जाएंगे। मैं अकेली हूँ… और मुझे फिर से तुम चाहिए।”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। अगली रात 8 बजे मैं उसके घर पहुँचा। इस बार स्नेहा ने दरवाजा खोला तो उसने सिर्फ एक पतला सा नाइट सूट पहना हुआ था। उसके स्तन साफ दिख रहे थे और वो बिना ब्रा के थी।
“जल्दी अंदर आओ,” उसने फुसफुसाते हुए कहा और मुझे अंदर खींच लिया। दरवाजा बंद करते ही उसने मुझे दीवार से टिका लिया और जोर से चूमने लगी।
“कल रात के बाद से मैं सो नहीं पाई,” स्नेहा ने मेरे कान में कहा। “तेरा लंड मेरी चूत में घुसा हुआ महसूस हो रहा था पूरी रात। आज फिर चोदो मुझे… लेकिन इस बार थोड़ा और हार्ड।”
हम सीधे उसके बेडरूम में गए। इस बार कमरे की लाइटें बंद थीं, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। स्नेहा ने अपना नाइट सूट उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पहले से ही सख्त खड़ा था।
स्नेहा बेड पर लेट गई और अपने पैर फैला दिए। “आज पहले से ज्यादा गीली हूँ,” उसने शरमा के कहा।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया। पहले मैंने उसके दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से दबाया। फिर एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा। स्नेहा सिर पीछे झुकाकर सिसकारियाँ लेने लगी। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… कल रात के बाद से मेरे स्तन भी तेरे स्पर्श के लिए तरस रहे थे…”
मैंने नीचे जाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया। कल रात की तुलना में आज वो और ज्यादा गीली थी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर किया। स्नेहा की कमर ऊपर उठ रही थी। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मत रोको… मुझे और चाहिए…”
थोड़ी देर बाद मैं ऊपर आया। मेरा लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा था। स्नेहा ने मेरी तरफ देखा और कहा, “आज धीरे से मत करना… मुझे हार्ड चाहिए। लेकिन आवाज कम निकालना… पड़ोस में लोग हैं।”
मैंने एक जोर का धक्का मारा। मेरा पूरा लंड एक ही बार में उसकी चूत में घुस गया। स्नेहा ने तकिये में मुँह दबाकर चीखा, “आआआह्ह्ह्ह! अर्जुन… बहुत गहरा… ओह्ह्ह फक…”
आज मैंने रुकने का इंतजार नहीं किया। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ा और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। “थप-थप-थप” की आवाज कमरे में गूँज रही थी। स्नेहा दोनों हाथों से तकिया दबा रही थी ताकि उसकी आवाज बाहर न जाए।
“आआआह्ह्ह… अर्जुन… और जोर से… हाँ… ऐसे ही चोदो… मेरी चूत कल रात से तेरे लंड के लिए तरस रही थी…” उसके एक्सप्रेशन देखते ही बन रहे थे — आँखें बंद, मुँह खुला, चेहरा लाल, और बीच-बीच में वो मुझे गले लगाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने उसकी एक टाँग उठाकर अपने कंधे पर रख दी। इस पोजीशन में मेरा लंड और गहरा जा रहा था। स्नेहा अब जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थी। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मुझे लग रहा है मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… ओह्ह्ह… और तेज…”
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। अब बहुत हार्ड चुदाई कर रहा था। स्नेहा का शरीर काँप रहा था। “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मैं आ रही हूँ… आआआह्ह्ह!” उसने मुझे और टाइट पकड़ लिया और जोर से ऑर्गेज्म लिया। उसकी चूत ने मेरा लंड इतना टाइट पकड़ लिया कि मुझे भी लग रहा था मैं अभी झड़ जाऊँगा।
मैंने भी अंतिम जोर के धक्के मारे और उसकी चूत में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर लेट गए।
स्नेहा ने मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा, “अर्जुन… आज और भी अच्छा लगा। कल रात से आज ज्यादा मजा आया। लेकिन अब मुझे डर लग रहा है… अगर मम्मी-पापा को कुछ शक हो गया तो?”
मैंने उसे चूमा और कहा, “घबराओ मत। हम सावधानी से करेंगे।”
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स्नेहा ने मुझे ब्लो जॉब दिया और हम 69 पोजीशन में ओरल सेक्स किए
दूसरे राउंड के बाद हम दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर लेटे थे। स्नेहा की साँस अभी भी तेज चल रही थी। मैंने उसे गले लगाया और उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा, “स्नेहा… आज तूने बहुत अच्छा किया।”
स्नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखा और थोड़ी देर चुप रही। फिर उसने धीरे से कहा, “अर्जुन… आज मैं तुम्हें कुछ और देना चाहती हूँ।”
“क्या देना चाहती है जान?” मैंने पूछा।
वो शर्मा के मुस्कुराई और मेरे लंड की तरफ देखते हुए बोली, “मैं तुम्हारा लंड मुँह में लेना चाहती हूँ… ब्लो जॉब देना चाहती हूँ। कल रात के बाद से मन कर रहा था।”
मेरा लंड फिर से हिलने लगा। मैंने उसे चूमा और कहा, “ठीक है मेरी जान… आज तू मेरी लंड चूस ले। मैं तुझे गाइड करूँगा।”
स्नेहा ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया। मैं बेड पर लेटा हुआ था। वो मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गई। उसने पहले मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ा। उसके हाथ काँप रहे थे।
“इतना मोटा और गर्म है…” उसने फुसफुसाया।
उसने पहले लंड के सुपाड़े पर हल्का सा किस किया। फिर जीभ निकालकर सुपाड़े को चाटने लगी। उसकी गर्म और गीली जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। मैंने सिर पीछे झुकाया और कहा, “आआह्ह… स्नेहा… बहुत अच्छा लग रहा है जान…”
स्नेहा ने अब पूरा सुपाड़ा मुँह में ले लिया और धीरे से चूसने लगी। “चूस-चूस” की आवाज आ रही थी। उसकी लार मेरे लंड पर बह रही थी। उसने आँखें उठाकर मुझे देखा — उसकी आँखों में शरम और उत्तेजना दोनों थीं। मैंने उसके बालों में हाथ डाला और कहा, “और अंदर ले… अच्छा कर रही है तू…”
स्नेहा ने और कोशिश की। उसने लंड को और गहरा मुँह में लिया। उसका मुँह फैल गया। लंड उसकी जीभ पर दब रहा था। वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। उसकी लार मेरे अंडकोष तक बह रही थी। कभी-कभी लंड उसके गले तक पहुँच जाता और वो हल्का सा काँप जाती। उसकी आँखों में आँसू आ गए लेकिन वो रुकी नहीं।
“वाह स्नेहा… तू बहुत अच्छा ब्लो जॉब दे रही है…” मैंने कहा। स्नेहा ने लंड को मुँह से निकालकर कहा, “अच्छा लग रहा है ना? मैं और अच्छा करूँगी…” फिर उसने लंड को फिर से मुँह में लिया और इस बार और गहरा लिया। उसका गला कस गया। वो कुछ सेकंड ऐसे ही रखे रही, फिर बाहर निकाला और खाँसी आई। लार उसके होंठों से टपक रही थी।
मैंने उसे ऊपर खींचा और गहरा किस किया। “बहुत अच्छा किया तूने जान… अब मैं भी तुझे कुछ दूँगा।”
मैंने स्नेहा को लिटा दिया और खुद उसके पैरों के पास आ गया। अब हम 69 पोजीशन में थे। स्नेहा मेरे ऊपर थी — उसका मुँह मेरे लंड के पास और मेरी जीभ उसकी चूत के पास।
स्नेहा ने फिर से मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। इस बार और जोश से। मैंने उसकी चूत के पास मुँह लगाया। कल रात की चुदाई के बाद भी वो बहुत गीली थी। मैंने जीभ से उसके चूत के होठ चाटे। स्नेहा ने लंड मुँह में रखे हुए ही जोर से सिसकारी ली, “आआआह्ह्ह…”
मैंने उसकी क्लिट को चूसना शुरू किया। साथ ही दो उँगलियाँ उसकी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। स्नेहा का सिर हिल रहा था। वो मेरे लंड को जोर-जोर से चूस रही थी। उसकी लार मेरे पूरे लंड और अंडकोष पर लग रही थी।
मैंने उसकी चूत को और जोर से चाटा। उसकी क्लिट को दाँतों से हल्का सा काटा। स्नेहा का शरीर अकड़ गया। वह लंड मुँह में रखे हुए ही चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह… अर्जुन… मत रोको… और चूसो… मैं आ रही हूँ…”
उसकी चूत ने मेरी जीभ पर जोर से दबाव डाला। वह जोर से ऑर्गेज्म ले रही थी। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। वो मेरे लंड को और जोर से चूसने लगी।
मैं भी कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। “स्नेहा… मैं भी झड़ने वाला हूँ… अगर मुँह में नहीं लेना तो बाहर निकाल ले…”
स्नेहा ने लंड को और गहरा मुँह में लिया और हिलाने लगी। मैंने जोर से चिल्लाया, “स्नेहा… आ रहा हूँ!” और उसके मुँह में ही अपना गरम वीर्य छोड़ दिया। स्नेहा ने सब कुछ निगल लिया। कुछ वीर्य उसके होंठों से बाहर निकल आया। वो लंड को चूसते हुए सारा वीर्य साफ कर रही थी।
दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर लेट गए। स्नेहा ने मेरे लंड को चूमते हुए कहा, “अर्जुन… तुम्हारा स्वाद बहुत अच्छा था… मैंने सब निगल लिया।”
मैंने उसे गले लगाया और कहा, “स्नेहा… तूने बहुत अच्छा किया। अब हम दोनों एक हो गए हैं।”
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