भूखी भाभी सोनाली और प्यासा देवर विक्रम
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विक्रम 24 साल का युवा लड़का था। वह अपनी पढ़ाई पूरी करके बड़े भाई के घर कुछ महीनों के लिए आया हुआ था। उसका भाई, अमित, एक मल्टीनेशनल कंपनी में हाई पोस्ट पर था और अक्सर विदेश या दूसरे शहरों में रहता था। घर में सिर्फ उसकी भाभी सोनाली रहती थी। सोनाली 29 साल की बेहद आकर्षक औरत थी – लंबे काले बाल, गोरी चमकदार त्वचा, 36D के बड़े-बड़े गोल स्तन, पतली कमर और मोटी-मोटी जांघों के साथ भारी नितंब। उसकी चाल में ही एक अजीब सी मस्ती थी जो किसी भी मर्द को पागल कर सकती थी।
विक्रम बचपन से ही सोनाली भाभी को बहुत पसंद करता था, लेकिन अब जवान होने के बाद उसकी नजरें भाभी के शरीर पर बार-बार अटक जाती थीं। खासकर जब भाभी घर में साड़ी या हल्के नाइट सूट में घूमती थी।
एक घुटटी हुई गर्मी की शाम थी। बिजली चली गई थी और पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था। विक्रम ऑफिस से लौटा तो देखा सोनाली लिविंग रूम में सोफे पर लेटी हुई थी। सिर्फ एक हल्का सा काला ट्रांसपेरेंट नाइट ड्रेस पहने हुए थी जिसमें उसकी गोरी जांघें और ब्रा की झलक साफ दिख रही थी। पसीने से उसकी देह चिपक गई थी। विक्रम का दिल जोर से धड़का।
“भाभी… आप ठीक हो?” विक्रम ने धीरे से पूछा।
सोनाली ने करवट बदलते हुए आह भरी, “विक्रम… तुम आ गए। गर्मी से हालत खराब हो रही है। तुम्हारा भाई तो फिर 15 दिन के लिए मुंबई चला गया। मैं अकेली कैसे रहूँ? दिन भर घर संभालना, रात को अकेलापन… शरीर तो जल रहा है।”
विक्रम पास बैठ गया। उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसने हिम्मत जुटाकर कहा, “भाभी, आप इतनी परेशान क्यों लग रही हो? कुछ तो बताओ। मैं आपकी हर मदद कर सकता हूँ।”
सोनाली ने शर्माते हुए लेकिन आँखों में चमक लेकर विक्रम की तरफ देखा, “विक्रम… तुम अभी जवान हो गए हो। लेकिन ये बात मैं तुमसे कैसे कहूँ… तुम्हारा भाई तो बस काम में लगा रहता है। महीनों से मेरी चूत सूखी पड़ी है। रात को नींद नहीं आती। हाथ से ही काम चलाती हूँ, लेकिन अब वो भी काफी नहीं।”
विक्रम का लंड सुनते ही पत्थर की तरह खड़ा हो गया। उसने सोनाली का हाथ अपने हाथ में ले लिया और धीरे से बोला, “भाभी… अगर आप चाहो तो मैं आपकी इस भूख को शांत कर सकता हूँ। कोई नहीं देखेगा। बस एक बार इजाजत दो।”
सोनाली थोड़ी देर चुप रही। फिर उसने विक्रम का हाथ अपनी जांघ पर रख दिया और फुसफुसाकर कहा, “विक्रम… ये गलत है, लेकिन मैं अब और नहीं सह सकती। तुम्हारी भाभी की चूत आज तुम्हारे लंड की भूखी है।”
विक्रम ने सोनाली को अपने सीने से लगा लिया। दोनों के होंठ गर्मी से मिल गए। लंबी और गहरी किस चलने लगी। सोनाली की जीभ विक्रम की जीभ को चूस रही थी। विक्रम ने एक हाथ से उसके बड़े स्तनों को निचोड़ा। सोनाली ने कराहते हुए कहा, “आह्ह्ह… विक्रम… और जोर से दबाओ… मेरे स्तन बहुत दिनों से छूने वाले को तरस रहे हैं।”
विक्रम ने सोनाली का नाइट ड्रेस ऊपर खींचना शुरू किया। ड्रेस उसके सिर के ऊपर से निकला तो सामने 36D के भरे-भरे स्तन ब्रा में कैद थे। विक्रम ने ब्रा के ऊपर से ही चूमा। सोनाली की साँसें तेज हो गई थीं। उसने विक्रम की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और उसके सीने पर किस करने लगी।
“विक्रम… तुम्हारा शरीर कितना मजबूत है… मुझे छूकर देखो कितनी गीली हो गई हूँ मैं,” सोनाली ने विक्रम का हाथ अपनी पैंटी की तरफ ले जाते हुए कहा।
विक्रम की उँगलियाँ सोनाली की पैंटी के ऊपर से चूत पर घूमने लगीं। पैंटी पूरी तरह भीगी हुई थी। सोनाली ने आह भरकर कहा, “उफ्फ्फ… अंदर डालो ना… मेरी चूत तुम्हारी उँगलियों के लिए तरस रही है।”
कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और कराहों की आवाजें गूँज रही थीं। विक्रम ने सोनाली को बेड पर लिटा दिया। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे। सोनाली ने विक्रम की पैंट का बेल्ट खोलना शुरू कर दिया।
अभी चुदाई शुरू होने ही वाली थी कि सोनाली ने रुककर विक्रम की आँखों में देखा, “विक्रम… आज पूरी रात तुम मुझे चोदोगे ना? मेरी सारी प्यास बुझा दोगे?”
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भूखी भाभी सोनाली और प्यासा देवर विक्रम – भाग 2
विक्रम ने सोनाली की बात सुनकर और ज्यादा उत्तेजित हो गया। उसने सोनाली को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। दोनों की साँसें तेज हो रही थीं। विक्रम ने सोनाली की आँखों में गहरी नजर डाली और बोला, “भाभी… आज मैं तुम्हें पूरी तरह चोदकर रख दूँगा।”
उसने सोनाली के पीछे हाथ डालकर ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली हुई और विक्रम ने उसे एक झटके में उतार दिया। सोनाली के दोनों बड़े-बड़े 36D स्तन छूटकर बाहर आ गए। गोरे, भरे हुए, गुलाबी चूचियों वाले। विक्रम ने दोनों स्तनों को हाथों में भर लिया और जोर-जोर से मसला।
“आह्ह्ह… विक्रम… जोर से… मेरे स्तन बहुत दिनों से दबने वाले को तरस रहे थे,” सोनाली ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा। उसका चेहरा खुशी और वासना से लाल हो रहा था।
विक्रम ने एक स्तन का गुलाबी चुचुक मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्का-हल्का काट भी रहा था। दूसरा स्तन हाथ से मसलता जा रहा था। सोनाली का शरीर तड़प उठा। वह विक्रम के बालों में हाथ फेरते हुए चीखी, “उफ्फ्फ… हाँ… काटो… चूसो… मेरे दोनों बोब्स को खा जाओ… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है।”
विक्रम 5-7 मिनट तक लगातार दोनों स्तनों को चूसता, चबाता और निचोड़ता रहा। सोनाली के मुँह से बार-बार कराह निकल रही थीं। उसकी चूत से रस बहने लगा था।
फिर विक्रम नीचे की तरफ सरका। उसने सोनाली की पैंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे उसे जांघों से नीचे खींचने लगा। पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। जब पैंटी पूरी तरह उतर गई तो सामने सोनाली की साफ, गुलाबी और भरी हुई चूत दिखी। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, रस चू रहा था।
विक्रम ने दोनों जांघें फैलाकर चेहरे को चूत के पास ले जाया। पहले तो उसने चूत की गंध सूँघी और बोला, “भाभी… आपकी चूत की खुशबू कितनी अच्छी है…”
फिर उसने जीभ बाहर निकालकर चूत की लकीर पर लंबा चाटा। सोनाली ने झटके से कमर उठाई और चिल्लाई, “आआआह्ह्ह… विक्रम… हाँ… चाटो… अपनी जीभ अंदर डालो… मेरी भूखी चूत को चाटो…”
विक्रम ने पूरी जीभ चूत के अंदर डाल दी और जोर-जोर से चाटने लगा। कभी क्लिटोरिस को चूसता, कभी अंदर की दीवारों को जीभ से रगड़ता। सोनाली के दोनों हाथ विक्रम के सिर को चूत पर दबा रहे थे। उसका चेहरा आनंद से विकृत हो रहा था। आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें फूल रही थीं।
“विक्रम… उफ्फ… और तेज… हाँ… यहीं… मेरी चूत फट जाएगी… आह्ह्ह… तुम्हारी जीभ जादू कर रही है… मैं झड़ने वाली हूँ…”
विक्रम ने तेजी बढ़ाई। उँगलियाँ भी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। सोनाली का शरीर तन गया। उसने जोर से चीखते हुए विक्रम के मुँह पर अपनी चूत दबाई और पहला झटका दिया। गर्म चूत का रस विक्रम के मुँह में भर गया। सोनाली काँपती रही करीब 30 सेकंड तक।
विक्रम ने उठकर सोनाली को चूम लिया। दोनों के मुँह में चूत का स्वाद था। सोनाली ने हाँफते हुए कहा, “विक्रम… तुमने तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया… लेकिन अब तुम्हारा लंड चाहिए… मेरी चूत अब तुम्हारे मोटे लंड की भूखी है।”
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विक्रम सोनाली को कुत्ते की तरह (डॉगी स्टाइल) में चोदता है, उसके बाल खींचते हुए।
सोनाली अभी भी झड़ने के बाद काँप रही थी। उसकी चूत से रस बह रहा था। विक्रम ने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “भाभी… अब मैं तुम्हें कुत्ते की तरह चोदूँगा। तैयार हो जाओ।”
सोनाली ने शर्माते हुए लेकिन उत्तेजना से भरी आँखों से मुस्कुराकर कहा, “हाँ विक्रम… मुझे कुत्ते की तरह चोदो… अपनी भाभी की चूत को फाड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी बनकर चुदना चाहती हूँ।”
विक्रम ने सोनाली को बेड पर घुटनों के बल मोड़ दिया। सोनाली डॉगी स्टाइल में हो गई – दोनों हाथ आगे, कमर ऊपर, मोटे गोल नितंब पीछे की तरफ। उसकी भीगी चूत और कसी हुई गांड बिल्कुल सामने थी। विक्रम ने अपने बाकी कपड़े भी पूरी तरह उतार दिए। उसका 7 इंच का मोटा, खड़ा लंड लटक रहा था।
उसने सोनाली के गोल-गोल नितंबों को दोनों हाथों से फैलाया और लंड की टिप को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। सोनाली अधीर होकर बोली, “मत तड़पाओ विक्रम… जल्दी डाल दो… मेरी चूत जल रही है।”
विक्रम ने एक जोरदार धक्का दिया। “धप्प!” आवाज के साथ आधा लंड सोनाली की भीगी चूत में घुस गया। सोनाली ने जोर से चीख मारी, “आआआह्ह्ह… विक्रम… बड़ा है तुम्हारा… धीरे… आह्ह्ह…”
विक्रम ने रुके बिना पूरा लंड एक और झटके में सोनाली की चूत में ठूँस दिया। अब पूरा लंड अंदर था। सोनाली की चूत पूरी तरह फैल गई थी। उसका चेहरा तकिए में दबा हुआ था, आँखें बंद, मुँह से लगातार कराह निकल रही थी – “उफ्फ्फ… मारो… फाड़ दो मेरी चूत… हाँ… गहरी…”
विक्रम ने सोनाली के लंबे बालों को एक हाथ में लपेट लिया और खींचते हुए तेज-तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के पर “धप धप धप” की आवाज गूँज रही थी। सोनाली के मोटे नितंब विक्रम की टांगों से टकरा रहे थे।
“भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गीली है… मेरा लंड पूरी तरह भीग गया है,” विक्रम ने बाल खींचते हुए कहा।
सोनाली ने पीछे मुड़कर विक्रम को देखा। उसकी आँखें वासना से भरी हुई थीं, मुँह खुला हुआ था, “जोर से चोदो विक्रम… बाल खींचो… मुझे रंडी समझकर चोदो… आह्ह्ह… हाँ… यहीं… मेरी चूत फट रही है… और तेज…”
विक्रम ने रफ्तार बढ़ा दी। वह पूरी ताकत से लंड अंदर-बाहर कर रहा था। कभी-कभी लंड पूरी तरह बाहर निकालकर फिर से जोर से ठोक देता। सोनाली के स्तन नीचे लटककर झूल रहे थे। विक्रम ने एक हाथ से आगे बढ़कर उन्हें जोर-जोर से दबाया।
5 मिनट तक लगातार डॉगी स्टाइल में चुदाई चली। सोनाली की चूत से सफेद रस निकलकर विक्रम के लंड और जांघों पर लग रहा था। कमरे में चूत चुदने की “चप चप चप” और “धप धप” की आवाजें भर गई थीं।
सोनाली चीख रही थी, “विक्रम… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… हाँ… और जोर से… आआआह्ह्ह… फाड़ दो…”
विक्रम ने बाल और जोर से खींचे और मशीन की तरह चोदने लगा। सोनाली का पूरा शरीर काँप उठा। उसने दूसरी बार जोरदार ऑर्गेज्म लिया। चूत ने विक्रम के लंड को कसकर दबाया। लेकिन विक्रम रुका नहीं। वह लगातार चोदता रहा।
“भाभी… अब मैं भी झड़ने वाला हूँ… कहाँ डालूँ?” विक्रम ने हाँफते हुए पूछा।
सोनाली ने अधूरी आवाज में कहा, “अंदर… मेरी चूत में भर दो अपना गर्म वीर्य…”
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विक्रम सोनाली की चूत में झड़कर फिर उसे मिशनरी पोजीशन में चोदता है और रात भर चुदाई जारी रखता है।
विक्रम ने सोनाली के बाल खींचे और आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे। उसका लंड सोनाली की चूत के अंदर फटने वाला था।
“भाभी… ले लो… भर रहा हूँ तुम्हारी चूत…” विक्रम ने गुर्राते हुए कहा।
सोनाली ने पीछे से कमर हिलाते हुए जवाब दिया, “हाँ… अंदर डाल दो… मेरी चूत को अपना माल बनाओ… आह्ह्ह…”
विक्रम का लंड फड़फड़ाया और गर्म-गर्म वीर्य की मोटी-मोटी धार सोनाली की चूत के अंदर छूट गई। विक्रम ने पूरा वीर्य सोनाली की चूत में उड़ेल दिया। सोनाली का शरीर एक बार फिर काँप उठा। दोनों एक साथ झड़ गए।
कुछ देर दोनों उसी पोजीशन में थके हुए पड़े रहे। विक्रम का लंड अभी भी सोनाली की चूत के अंदर था। वीर्य चूत से बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था।
विक्रम ने लंड निकाला और सोनाली को पलटकर मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। सोनाली की आँखें आनंद से बंद थीं, चेहरा पसीने से चमक रहा था, होंठ सूजे हुए थे। विक्रम ने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिए। उसकी चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी – लाल, सूजी हुई और विक्रम के वीर्य से भरी हुई।
“भाभी… अब मैं तुम्हें रात भर चोदूँगा,” विक्रम ने कहा और अपना लंड फिर से सोनाली की चूत पर रखा।
एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर चला गया। “धप्प!” सोनाली ने मुँह खोलकर चीख मारी, “आआह्ह्ह… विक्रम… फिर से भर गया… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है… चूत फट रही है…”
विक्रम ने दोनों हाथ सोनाली के बड़े स्तनों पर रखे और उन्हें जोर-जोर से दबाते हुए तेजी से चोदने लगा। हर धक्के पर सोनाली के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। विक्रम कभी उसके चुचुक चूसता, कभी गले पर किस करता, कभी होंठ चूसता।
सोनाली ने विक्रम की पीठ पर नाखून गड़ाते हुए कराह रही थी, “हाँ… और तेज… मेरी चूत को चोदो… रात भर चोदो मुझे… मैं तुम्हारी हूँ आज… आह्ह्ह… विक्रम… तुम बहुत अच्छे चोदते हो…”
लगभग 15 मिनट तक मिशनरी में चुदाई चली। विक्रम का पसीना सोनाली के शरीर पर गिर रहा था। दोनों के शरीर गर्मी से लाल हो चुके थे। विक्रम ने पोजीशन बदलते हुए सोनाली के पैर फैलाकर और चौड़े कर दिए और और गहराई से चोदने लगा।
सोनाली की तीसरी बार चूत फड़ गई। वह चीखी, “मैं फिर झड़ रही हूँ… विक्रम… साथ दो…”
विक्रम ने रफ्तार बढ़ाई और दूसरी बार सोनाली की चूत में वीर्य भर दिया।
लेकिन रात अभी बाकी थी।
विक्रम ने सोनाली को थोड़ी देर आराम दिया। फिर उसे पानी पिलाया और फिर से चूमने लगा। 10 मिनट बाद उसका लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार उसने सोनाली को उठाकर बेड के किनारे पर लिटाया और फिर से मिशनरी में घुस गया।
पूरी रात दोनों चुदाई में लगे रहे। कभी मिशनरी, कभी साइड पोजीशन, कभी विक्रम सोनाली को गोद में उठाकर चोदता। सोनाली की चूत विक्रम के वीर्य और अपने रस से पूरी तरह भर चुकी थी।
सुबह होने तक सोनाली थककर चूर हो चुकी थी। उसके पूरे शरीर पर चूसने और काटने के निशान थे। चूत सूज गई थी लेकिन चेहरा संतोष से चमक रहा था।
सोनाली ने विक्रम को चूमते हुए कहा, “विक्रम… आज तुमने मेरी सालों की भूख मिटा दी। अब तुम मेरे देवर नहीं… मेरे प्रेमी हो।”
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अगले दिन की चुदाई
अगली सुबह सूरज की पहली किरणें कमरे में घुस रही थीं। विक्रम अभी भी सोनाली के साथ लिपटा हुआ सो रहा था। सोनाली पहले उठी। उसका पूरा शरीर दर्द कर रहा था, लेकिन चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान थी। उसने विक्रम को चूमकर जगाया।
“उठो विक्रम… सुबह हो गई है। लेकिन मेरी चूत अभी भी तुम्हें पुकार रही है,” सोनाली ने कान में फुसफुसाया।
विक्रम मुस्कुराया। दोनों नंगे ही उठे। सोनाली ने कहा, “आओ नहाते हैं। मैं तुम्हें नहलाऊँगी।”
दोनों बाथरूम में गए। सोनाली ने शावर ऑन किया। गर्म पानी उनके शरीर पर गिरने लगा। सोनाली विक्रम के सीने पर साबुन लगाने लगी। विक्रम ने पीछे से सोनाली को पकड़ लिया। उसके हाथ सोनाली के बड़े-बड़े स्तनों पर थे। वह उन्हें गीले होने पर और भी जोर से मसल रहा था।
“आह्ह्ह… विक्रम… सुबह-सुबह ही शुरू कर दिया,” सोनाली ने कराहते हुए कहा। उसकी कमर विक्रम के लंड से रगड़ रही थी।
विक्रम का लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसने सोनाली को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। सोनाली ने दोनों हाथ दीवार पर टिका दिए और पीछे अपनी गांड निकाल दी। विक्रम ने गीले लंड को सोनाली की चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया।
“उफ्फ्फ… हाँ… गहरा… चोदो मुझे…” सोनाली चीख उठी।
विक्रम ने दोनों हाथ सोनाली की कमर पर रखे और तेज-तेज धक्के मारने लगा। गर्म पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था। हर धक्के पर पानी की छींटें उड़ रही थीं। “धप धप धप” की आवाज शावर के पानी की आवाज में मिल रही थी।
सोनाली की आँखें बंद थीं। उसके मुँह से लगातार कराह निकल रही थीं – “आह्ह… विक्रम… तुम्हारा लंड सुबह-सुबह कितना सख्त है… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… और तेज…”
विक्रम ने एक हाथ सोनाली के बाल खींच लिया और दूसरे हाथ से उसके स्तन को निचोड़ते हुए और तेज चोदने लगा। सोनाली के मोटे नितंब विक्रम की टांगों से टकरा रहे थे। बाथरूम में सिर्फ उनकी कराहें, पानी की आवाज और चुदाई की धप-धप की आवाज गूँज रही थी।
विक्रम ने पोजीशन बदली। उसने सोनाली को घुमाकर अपनी गोद में उठा लिया। सोनाली ने विक्रम की कमर में पैर लपेट लिए। विक्रम ने दीवार से सटाकर सोनाली को ऊपर-नीचे चोदना शुरू कर दिया।
“भाभी… तुम कितनी भूखी हो… रात भर चोदने के बाद भी नहीं मानी,” विक्रम ने हाँफते हुए कहा।
सोनाली ने विक्रम के गले में बाँहें डालकर जवाब दिया, “तुम्हारे लंड के बिना अब मुझे चैन नहीं… चोदते रहो… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”
कुछ ही मिनटों में सोनाली काँप उठी। उसकी चूत ने विक्रम के लंड को कसकर दबाया और वह झड़ गई। विक्रम ने भी कुछ और जोरदार धक्के मारकर सोनाली की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे रहे। पानी अभी भी उनके शरीर पर बह रहा था। सोनाली ने विक्रम को गहरी किस दी और बोली, “विक्रम… तुम अब मेरी आदत बन गए हो।”