टीचर ने ट्यूशन में मेरी चूत में उंगली डालकर चोदने की माँग की
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मैं रिया, २२ साल की कॉलेज स्टूडेंट। घर पर ट्यूशन ले रही थी सर राजेश की। सर ३५ साल के थे, शादीशुदा लेकिन बहुत आकर्षक और स्मार्ट। उनकी क्लासेस हमेशा शाम को ७ बजे होती थीं। आज भी मैं उनके घर ट्यूशन के लिए पहुँची। मेरा परिवार ऊपर वाले फ्लोर पर रहता था, इसलिए आसानी से आ जाती थी।
आज क्लास में सिर्फ मैं अकेली थी क्योंकि बाकी स्टूडेंट्स टेस्ट के लिए छुट्टी पर थे। सर ने दरवाजा खोला तो उनकी आँखों में कुछ अलग चमक थी। “आज सिर्फ तू ही है रिया, अच्छा है। आज हम थोड़ा एक्स्ट्रा प्रैक्टिस करेंगे,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
क्लास शुरू हुई। सर मेरे बगल में बैठे थे। गणित की समस्या सॉल्व करते-करते उनकी उँगलियाँ मेरे हाथ पर रगड़ने लगीं। मैं थोड़ा असहज हुई लेकिन कुछ नहीं बोली। फिर उन्होंने किताब नीचे रखी और मेरी जाँघ पर हाथ रख दिया। “रिया, तुझे पता है ना, तू बहुत खूबसूरत है। ट्यूशन में इतने दिन से देख रहा हूँ, तेरी आँखें, तेरी हल्की सी मुस्कान… दिल नहीं मानता।”
मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। “सर… ये क्या कह रहे हैं?” मैंने घबराते हुए कहा, लेकिन मेरी आवाज़ काँप रही थी।
सर ने मेरी जाँघ पर हल्का दबाव बढ़ाया और धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगे। “डर मत रिया। मैं जानता हूँ तू भी अंदर से कुछ चाहती है। तेरी साँसें तेज हो रही हैं।” उनकी उँगलियाँ मेरी स्कर्ट के अंदर घुस गईं। मैंने हल्का सा विरोध किया लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। सर ने मेरी पैंटी के ऊपर से चूत पर हाथ फेरा। “गर्म है… भीगी हुई है रिया।”
मैं शर्म से लाल हो गई। “सर प्लीज… कोई आ जाएगा।” लेकिन सर ने मेरी पैंटी को एक तरफ सरका दिया और सीधे अपनी मोटी उँगली मेरी चूत में डाल दी। “आह्ह्ह…” मैंने दबे स्वर में कराहते हुए कहा। सर ने उँगली अंदर-बाहर करने शुरू कर दीं, दूसरा हाथ मेरी ब्रेस्ट पर रखकर दबाने लगे।
“रिया, बहुत टाइट है तेरी चूत। मैं इसे चोदना चाहता हूँ। आज पूरी तरह मेरी बन जा। तेरे बिना मेरा मन नहीं लगता।” सर ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा, उँगली तेज करते हुए। मेरी चूत से आवाजें आने लगीं। मैं साँसें फुला रही थी, आँखें बंद कर ली थीं। सस्पेंस था कि कहीं कोई आ न जाए, लेकिन सर की उँगलियाँ मुझे पागल कर रही थीं।
सर ने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। “बोल रिया, माँगती है मेरे लंड को अपनी चूत में?”
मैंने शर्माते हुए सिर हिलाया।
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सर मुझे उठाकर बेडरूम ले जाते हैं, कपड़े पूरे उतारकर धीरे-धीरे फोरप्ले करते हैं और फिर मिशनरी पोजीशन में चोदते हैं।
सर ने मेरी चूत में उँगली डालते हुए मेरी आँखों में गहरी नजर डाली। “रिया, आज तुझे पूरी तरह अपना बना लूँगा।” उन्होंने अचानक मुझे गोद में उठा लिया। मेरी स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी और उनकी उँगली अभी भी मेरी भीगी चूत के अंदर थी। मैंने उनके गले में हाथ डाल लिए, शर्म और उत्तेजना से साँसें तेज हो रही थीं।
सर मुझे बेडरूम में ले गए। कमरा हल्का अंधेरा था, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गए। “सर… धीरे कीजिए ना,” मैंने शर्माते हुए कहा, लेकिन मेरी चूत उनकी उँगलियों से और भी गीली हो चुकी थी।
सर ने मुस्कुराते हुए मेरी स्कर्ट को कमर तक ऊपर किया और फिर धीरे-धीरे मेरी टॉप उतारने लगे। “तेरी ये नाजुक बॉडी… कितनी परफेक्ट है रिया।” उन्होंने मेरी टॉप निकालकर फेंक दी। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। सर ने मेरी ब्रा के हुक खोलते हुए मेरी गर्दन पर किस किया। ब्रा के स्ट्रैप्स को धीरे-धीरे कंधों से सरकाया, मेरी गुलाबी निप्पल्स हवा में खड़े हो गए। सर ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगे, दूसरा हाथ मेरी दूसरी ब्रेस्ट को मसल रहा था। “आह्ह सर… उफ्फ…” मैं कराह उठी, मेरी आँखें आधी बंद थीं, हाथों से उनके बालों को नोच रही थी।
फिर सर नीचे सरके। उन्होंने मेरी पैंटी को दोनों हाथों से पकड़ा और बहुत धीरे-धीरे घुटनों तक उतारा। मेरी चिकनी, गीली चूत अब पूरी तरह नंगी थी। “वाह रिया… कितनी पिंक और टाइट।” सर ने अपनी जीभ से मेरी चूत की क्लिटोरिस चाटना शुरू किया। मैं बिस्तर पर तड़पने लगी, कमर ऊपर-नीचे करने लगी। “सर… अह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… प्लीज मत छोड़िए।”
सर ने अपनी शर्ट, पैंट और अंडरवियर उतार दिए। उनका मोटा, लंबा लंड पूरा खड़ा था, टॉप पर प्री-कम चमक रहा था। उन्होंने मेरी जाँघें फैलाईं और मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर लेट गए। लंड की टिप को मेरी चूत पर रगड़ते हुए बोले, “देख रिया, अब तुझे अपनी चूत में ले। बोल, चाहती है ना?”
“हाँ सर… चोदिए मुझे… अपनी बनाइए,” मैंने उत्तेजना से काँपते हुए कहा।
सर ने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला। पहले सिर्फ टिप अंदर गई, मेरी टाइट चूत ने उसे कसकर पकड़ लिया। “उफ्फ… बहुत टाइट है रिया… आह्ह!” सर की आँखें बंद हो गईं, चेहरे पर आनंद का भाव था। मैंने दाँत भींच लिए, हल्का दर्द और भरपूर मजे का एहसास हो रहा था। “सर… धीरे… अंदर पूरा… आह्ह्ह!”
सर ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। अब वे रुक-रुक कर तेजी से धक्के मारने लगे। हर धक्के पर मेरी ब्रेस्ट हिल रही थीं, मैं सर की पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “चोदिए सर… जोर से… मेरी चूत फाड़ दीजिए!” मेरे मुँह से अनियंत्रित शब्द निकल रहे थे। सर का चेहरा पसीने से तर था, वे मेरी गर्दन चूसते हुए, कभी निप्पल काटते हुए, तेज-तेज पेल रहे थे।
“रिया… तेरी चूत कितनी गर्म है… मैं बहुत दिन से चाहता था इसे।” सर की साँसें भी तेज हो चुकी थीं। मैंने अपनी जाँघें उनके कमर पर लपेट लीं और कमर ऊपर उठाकर उनका साथ देने लगी। कमरे में चूत-लंड की चप-चप की आवाजें और हम दोनों की कराहें गूंज रही थीं।
लगभग १५-२० मिनट तक वे मुझे मिशनरी में चोदते रहे। मेरी चूत पूरी तरह उनकी रफ्तार से तालमेल बिठा चुकी थी। सर की गति और तेज हुई, “रिया… मैं आने वाला हूँ…” उन्होंने कहा। मैं भी कसकर चूत को सिकोड़ते हुए झड़ गई, “सर… मैं भी… आह्ह्ह्ह!”
सर ने अंत में मेरी चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ा। हम दोनों थके हुए एक-दूसरे से लिपटे पड़े थे, साँसें अभी भी तेज थीं। सर ने मेरे माथे पर किस किया।
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सर मुझे डॉगी स्टाइल में चोदते हैं, बाल पकड़कर और थप्पड़ मारते हुए।
हम दोनों कुछ देर तक बेड पर लेटे रहे। सर की उँगलियाँ मेरी पीठ पर घूम रही थीं। मेरी चूत अभी भी उनके वीर्य और अपनी च्यूट से गीली थी। सर ने मेरे कान में फुसफुसाया, “रिया, अभी खत्म नहीं हुआ। मैं तेरी चूत को और मज़ा देना चाहता हूँ।”
उन्होंने मुझे पेट के बल घुमा दिया। मैं चारों हाथ-पैरों के बल डॉगी स्टाइल में हो गई। मेरी गोल गाँड ऊपर थी, चूत पूरी तरह दिख रही थी। सर मेरे पीछे आ गए। उन्होंने अपनी हथेली से मेरी गाँड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। “चटाक!”
“आह्ह सर!” मैं चौंककर कराह उठी। गाँड पर लाल निशान पड़ गया था, लेकिन मज़ा भी आ रहा था। सर ने दूसरी गाँड पर भी थप्पड़ लगाया। “तेरी ये मोटी गाँड… कितनी नर्म है रिया।” उन्होंने मेरे बालों को एक हाथ में लपेट लिया और खींचा। मेरी गर्दन पीछे झुक गई।
सर ने अपना लंड, जो फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था, मेरी चूत पर रगड़ा। “भीगी हुई है अभी भी… ले अब।” एक तेज धक्के के साथ पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। “उफ्फ्फ… सर… बहुत गहरा जा रहा है!” मैंने दाँत भींचते हुए कहा। मेरी आँखों में आँसू आ गए थे लेकिन चेहरे पर लालिमा और आनंद था।
सर ने मेरे बाल खींचे हुए तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर मेरी गाँड उनकी जाँघों से टकरा रही थी, “चप-चप-चप” की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। सर की साँसें गरम थीं, वे बीच-बीच में मेरी गाँड पर थप्पड़ मार रहे थे। “चटाक! चटाक!”
“रिया… बोल… मज़ा आ रहा है ना? तेरी चूत मेरा लंड चूस रही है।” सर ने बाल खींचते हुए पूछा। उनकी आवाज़ में घोर कामुकता थी, पसीना उनकी छाती से टपक रहा था।
“हाँ सर… जोर से चोदिए… मेरी गाँड लाल कर दीजिए… आह्ह्ह… फाड़ दीजिए मेरी चूत!” मैंने कराहते हुए कहा। मेरी ब्रेस्ट बेड पर रगड़ रही थीं, निप्पल्स सख्त थे। हर थप्पड़ और बाल खींचने पर मेरी चूत और सिकुड़ जाती थी, सर का लंड और गहराई तक जा रहा था।
सर ने रफ्तार बढ़ा दी। वे एक हाथ से मेरी कमर पकड़े हुए थे, दूसरे से बाल खींचे हुए पूरी ताकत से पीछे से पेल रहे थे। “तेरी चूत बहुत टाइट है रिया… मैं फिर से भर दूँगा इसे।” उनका चेहरा तनाव और मजे से भरा था, आँखें बंद, होंठ कटे हुए।
मैं भी कमर पीछे करके उनका साथ दे रही थी। “सर… तेज… मैं फिर आने वाली हूँ… आह्ह्ह!” मेरी चूत सिकुड़ी और मैं जोर से झड़ गई। शरीर थरथरा रहा था। सर ने भी कुछ ही देर बाद मेरी चूत के अंदर गर्म-गर्म वीर्य छोड़ दिया। “ले रिया… ले पूरा… आह्ह्ह!”
हम दोनों बेड पर गिर पड़े। मेरी गाँड लाल हो चुकी थी, बाल बिखरे हुए थे, चेहरा पसीने और संतुष्टि से चमक रहा था। सर ने मुझे अपनी बाहों में लिया और किस किया।
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सर मुझे अपनी गोद में बिठाकर राइडिंग पोजीशन में चोदते हैं, मैं ऊपर-नीचे करती हूँ।
सर ने मुझे अपनी बाहों में उठाया और बेड पर पीठ के बल लेट गए। उनका लंड अभी भी अर्ध-खड़ा था। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मेरी जाँघें उनके दोनों तरफ फैली हुई थीं, चूत ठीक उनके लंड के ऊपर थी। मेरी लाल-लाल गाँड उनके जाँघों पर दब रही थी।
“रिया, अब तू ऊपर है। अपनी चूत से मेरे लंड को चूस।” सर ने मेरी कमर पर हाथ रखते हुए कहा। उनकी आँखों में भूख थी।
मैंने सर के कंधों पर हाथ रखा, दूसरा हाथ नीचे ले जाकर उनके मोटे लंड को पकड़ा और अपनी भीगी चूत पर रगड़ा। “सर… बहुत मोटा है… धीरे से अंदर लूँगी,” मैंने शर्माते हुए कहा। मेरे चेहरे पर लालिमा थी, होंठ सूजे हुए थे, आँखें कामुकता से भरी हुई थीं।
धीरे-धीरे मैं नीचे बैठी। सर का लंड मेरी टाइट चूत में घुसने लगा। “आह्ह्ह… सर… पूरा भर गया…” मैंने आँखें बंद करते हुए कराहा। पूरा लंड अंदर चला गया तो मेरी कमर थरथरा उठी। सर की आँखें आनंद से बंद हो गईं। “उफ्फ रिया… कितनी गर्म और टाइट… अब चुदाई शुरू कर।”
मैंने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। पहले स्लो राइडिंग, मेरी ब्रेस्ट उनके चेहरे के सामने हिल रही थीं। सर ने दोनों ब्रेस्ट पकड़ लीं और निप्पल्स को चूसने-काटने लगे। “चूसिए सर… आह्ह… जोर से!” मैंने उनकी गर्दन पर किस करते हुए तेजी से ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया।
हर बार नीचे बैठने पर सर का लंड मेरी चूत की सबसे गहराई तक जा रहा था। “चप-चप-चप” की आवाजें तेज हो गईं। मेरी चूत का रस उनके लंड और जाँघों पर बह रहा था। सर ने मेरी कमर पकड़कर नीचे से जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए। “रिया… तेज… अपनी चूत से मेरा लंड रगड़… हाँ ऐसे ही!”
मेरा चेहरा पसीने से तर था। बाल बिखरे हुए थे, मुँह खुला था, कराहें निकल रही थीं — “सर… मारिए… मेरी चूत फाड़ दीजिए… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है!” मैं तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी, कभी-कभी घुमाकर भी बैठ रही थी ताकि लंड पूरी तरह अंदर रगड़े।
सर का चेहरा लाल हो चुका था। वे मेरी ब्रेस्ट को जोर से मसल रहे थे, कभी गाँड पर थप्पड़ मार रहे थे। “तेरी चूत अद्भुत है रिया… मैं तेरी सवारी पसंद आ रही है।” उनकी साँसें फूल रही थीं, पेट पर पसीना चमक रहा था।
लगभग १०-१२ मिनट तक मैं उनकी गोद में राइड करती रही। मेरी जाँघें थक गई थीं लेकिन मज़ा इतना था कि रुक नहीं पा रही थी। आखिरकार मैं कसकर उनकी गोद में बैठ गई और जोर से झड़ गई। “सर… मैं आ गई… आह्ह्ह्ह!” मेरी चूत उनके लंड को निचोड़ रही थी।
सर ने भी मुझे कसकर पकड़ लिया और नीचे से तेज धक्के मारते हुए अपनी दूसरी लोड मेरी चूत में भर दी। “ले रिया… पूरा ले… उफ्फ्फ!”
हम दोनों थके हुए एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। सर ने मेरे बालों को सहलाया और बोले, “तू आज से मेरी प्राइवेट स्टूडेंट है।”
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अगले दिन की चुदाई
अगले दिन शाम ७ बजे मैं फिर सर के घर ट्यूशन के लिए पहुँची। कल की चुदाई के बाद मेरी चूत में हल्का दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी लालसा थी। मैंने आज थोड़ी छोटी स्कर्ट और टाइट टॉप पहना था।
सर ने दरवाजा खोला तो मुस्कुराए। “आ गई मेरी प्राइवेट स्टूडेंट?” उन्होंने मुझे अंदर खींचा और तुरंत किस करने लगे। “कल रात भर तेरी याद आ रही थी रिया। आज फिर तेरी चूत लेनी है।”
आज भी क्लास में सिर्फ मैं अकेली थी। सर ने किताबें एक तरफ रख दीं और मुझे सीधे बेडरूम ले गए। “आज थोड़ा और वाइल्ड खेलेंगे।”
सर ने मेरी स्कर्ट ऊपर करके पैंटी उतार दी। मैं पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और अपनी पैंट उतारकर लंड दिखाया। “देख, तेरे लिए तैयार है।”
मैंने सर को बेड पर लिटाया और उनकी गोद में बैठकर राइडिंग पोजीशन में फिर से शुरू किया। लेकिन सर ने मुझे रोक दिया और बोले, “आज पहले कुछ और।”
नई चुदाई (अगले दिन की मुख्य सीन):
सर ने मुझे चारों हाथ-पैरों के बल खड़ा किया (डॉगी स्टाइल) और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। “आह्ह सर… कल से भी ज्यादा मोटा लग रहा है आज!” मैंने कराहते हुए कहा।
सर ने मेरे बाल खींचे और जोर-जोर से धक्के मारने लगे। “चटाक! चटाक!” मेरी गाँड पर लगातार थप्पड़ पड़ रहे थे। मेरी चूत पूरी तरह उनकी रफ्तार पकड़ चुकी थी। “रिया… तेरी चूत आज और टाइट हो गई है… मेरा लंड चूस रही है पूरी।”
मैंने कमर पीछे करके उनका साथ दिया। “जोर से सर… फाड़ दीजिए… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है!” मेरी ब्रेस्ट लटक रही थीं, पूरे शरीर पर पसीना था। सर ने एक हाथ से मेरी ब्रेस्ट पकड़कर मसलनी शुरू कर दी, दूसरे हाथ से बाल खींचे हुए तेजी से चोद रहे थे।
लगभग १० मिनट बाद सर ने पोजीशन बदली। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया (राइडिंग)। “अब तू चल।” मैंने तेजी से ऊपर-नीचे होना शुरू किया। सर नीचे से धक्के दे रहे थे। मेरी चूत उनके लंड को पूरा निगल रही थी। “सर… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह!” मैं कसकर उनके लंड पर बैठ गई और झड़ गई।
सर ने मुझे गोद में ही उठाकर दीवार से सटा दिया और खड़े-खड़े चोदना शुरू कर दिया। “ले रिया… पूरा ले!” उनकी तेज रफ्तार से मेरी चूत फटने वाली थी। आखिरकार सर ने भी मेरी चूत के अंदर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया।
हम दोनों हाँफ रहे थे। सर ने मेरे होंठों पर किस किया और बोले, “अब रोज़ ऐसे ही ट्यूशन होगा।”
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मैं सर को ब्लो जॉब देती हूँ और वे मेरे मुँह में वीर्य छोड़ते हैं, फिर नई चुदाई।
सर की गोद में बैठे-बैठे ही मैंने नीचे झुककर उनका लंड हाथ में लिया। अभी भी मेरी चूत से उनका वीर्य निकल रहा था। सर ने मेरे बालों को प्यार से सहलाते हुए कहा, “रिया, आज अपना मुँह भी दे मुझे।”
मैं घुटनों के बल बैठ गई। सर के सामने उनका मोटा, गाढ़ा लंड खड़ा था, मेरी चूत का रस उस पर चमक रहा था। मैंने पहले जीभ से लंड के टॉप को चाटा। “मmm… सर… स्वाद अच्छा है,” मैंने शर्माते हुए कहा। सर की आँखें बंद हो गईं, वे आनंद से कराहे — “आह्ह रिया… अच्छा लग रहा है।”
मैंने धीरे-धीरे अपना मुँह खोला और सर का लंड मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ टॉप, फिर आधा लंड अंदर। मेरे होंठ उनके लंड को कसकर चूस रहे थे। मैं ऊपर-नीचे सिर हिला रही थी, कभी-कभी गला तक ले जाती थी। “ग्लक… ग्लक…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
सर ने मेरे बाल पकड़ लिए और हल्का दबाव डालते हुए बोले, “हाँ रिया… गहरी ले… तेरे मुँह की गर्मी कमाल है।” उनका चेहरा तनाव और मजे से भरा हुआ था, होंठ कटे हुए, साँसें तेज। मैं अपनी आँखों से ऊपर देख रही थी, आँखों में आँसू थे लेकिन मैं रुक नहीं रही थी। मेरी जीभ लंड के नीचे की नसों को चाट रही थी।
“रिया… तेज… मैं आने वाला हूँ!” सर की पकड़ मेरे बालों पर मजबूत हो गई। मैंने और तेजी से चूसना शुरू किया, हाथ से उनके अंडकोष को सहलाते हुए। आखिरकार सर ने जोर से कराहते हुए अपना गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… ले पूरा… निगल जा रिया!”
मैंने जितना हो सका निगल लिया, कुछ मेरे होंठों के कोने से बह गया। स्वाद नमकीन और गाढ़ा था। मैंने लंड को चाटकर साफ किया। सर संतुष्टि से हाँफ रहे थे।
फिर नई चुदाई:
सर ने मुझे उठाकर बेड पर पटक दिया। वे मेरे ऊपर आए और सीधे मिशनरी पोजीशन में अपना लंड मेरी चूत में ठेल दिया। “अब फिर से चोदता हूँ तुझे।”
वे तेज-तेज धक्के मार रहे थे। मेरी चूत पहले से गीली और ढीली हो चुकी थी, इसलिए लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। “सर… जोर से… आह्ह्ह… फाड़ दीजिए!” मैंने अपनी जाँघें उनके कमर पर लपेट लीं।
सर ने मेरी एक टाँग कंधे पर रख दी और गहरे-गहरे धक्के मारने लगे। उनकी आँखें मेरी आँखों में थीं, चेहरा पसीने से चमक रहा था। “तेरी चूत मेरी हो गई है रिया… रोज भरूँगा इसे।” हर धक्के पर मेरी ब्रेस्ट उछल रही थीं। मैंने उनकी पीठ पर नाखून गाड़ दिए, कराह रही थी — “हाँ सर… मेरी चूत आपकी है… चोदिए मुझे!”
लगभग १५ मिनट की जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। सर ने फिर मेरी चूत के अंदर वीर्य भर दिया। हम थके हुए लिपटे पड़े रहे।