भाभी की गोरी चूत का पहला स्वाद
मेरा नाम अमन है। उम्र 23 साल। मैं आपको अपनी एक नई और बहुत ही गंदी कहानी सुनाने जा रहा हूँ। भाभी का नाम नेहा था। उनकी उम्र 28 साल थी। भाभी की खूबसूरती का कोई जवाब नहीं था। खासकर उनकी गोरी-गोरी त्वचा… जैसे दूध की तरह चमकती थी। जब वे हँसतीं तो उनके गालों पर गड्ढे पड़ जाते थे। लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षक उनकी वो गोरी चूत थी, जिसका स्वाद मुझे पहली बार लेने का मौका मिला।
मैं गर्मियों की छुट्टियों में मामा के गाँव वाले घर गया था। मामा और मामी शहर गए हुए थे। घर में सिर्फ भाभी और मैं अकेले थे। भाई (मेरा मामा का लड़का) ऑफिस में दिन भर रहता था।
पहले दो-तीन दिन तो नॉर्मल बीते। भाभी खाना बनातीं, मैं मदद करता। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। भाभी बहुत हँसमुख थीं। एक दिन बातों-बातों में मैंने कहा,
“भाभी, आपकी गोरी त्वचा देखकर कोई भी दीवाना हो जाए।”
भाभी शर्मा गईं और बोलीं, “चुप रहो अमन… ऐसी बातें मत करो।”
लेकिन उनकी आँखों में कुछ और ही चमक थी।
चौथे दिन भाई सुबह 8 बजे ऑफिस चले गए। मामा-मामी अभी भी शहर में थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी अकेले थे। भाभी किचन में सब्जी काट रही थीं। मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और धीरे से उनकी कमर पर हाथ रख दिया।
भाभी ने कहा, “अमन… क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।”
मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “आज घर में कोई नहीं है भाभी।”
भाभी ने चाकू रख दिया और मेरी तरफ घूम गईं। मैंने तुरंत उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर किस कर दिया। पहले तो भाभी ने थोड़ा विरोध किया, लेकिन 10 सेकंड बाद वे भी मेरे होंठ चूसने लगीं। उनकी साँसें गर्म हो गई थीं।
हम दोनों बेडरूम में चले गए। मैंने भाभी का सूट उतार दिया। अंदर हल्का गुलाबी ब्रा और पैंटी थी। भाभी की गोरी छाती ब्रा में बहुत सुंदर लग रही थी। मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों गोरे-गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल हल्के गुलाबी थे। मैंने एक चूची मुंह में भर ली और चूसने लगा। भाभी की साँसें भारी हो गईं।
“आह… अमन… धीरे से…” भाभी फुसफुसा रही थीं।
मैंने उनकी नाभि पर किस किया, फिर नीचे की तरफ बढ़ा। भाभी की पैंटी के ऊपर से ही मैंने उनकी चूत पर मुंह रख दिया। भाभी ने मेरे बाल पकड़ लिए।
“नहीं अमन… वो मत करो…” भाभी बोलीं, लेकिन उनकी आवाज में कोई ताकत नहीं थी।
मैंने उनकी पैंटी धीरे से नीचे खींची। सामने आई उनकी वो गोरी चूत… बिल्कुल साफ, बिना बालों वाली, हल्की गुलाबी फाँकें और ऊपर से चमकदार। पहली बार किसी भाभी की चूत इतनी करीब से देख रहा था।
मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और मुंह लगा दिया। जीभ से पहली बार भाभी की गोरी चूत चाटी। स्वाद… मीठा-सा, हल्का नमकीन और बहुत ही नशा करने वाला। मैंने जीभ को उनकी चूत की फाँकों के बीच घुमाया। भाभी की कमर ऊपर उठ गई।
“आह… अमन… क्या कर रहे हो… आह…” भाभी की आवाज काँप रही थी।
मैंने उनकी चूत के ऊपरी हिस्से पर क्लिट को चूस लिया। भाभी ने जोर से साँस ली। मैंने जीभ अंदर डालकर चाटना शुरू किया। भाभी अब मेरे सिर को दोनों हाथों से दबा रही थीं। उनकी गोरी जाँघें मेरे गालों से सट गई थीं।
“रोको मत… और चाटो… आह… पहली बार किसी ने ऐसा किया है…” भाभी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।
मैंने 10-12 मिनट तक लगातार उनकी गोरी चूत चाटी। भाभी दो बार जोर से काँपकर झड़ चुकी थीं। उनकी चूत से पानी निकल रहा था। मैंने सब कुछ पी लिया।
अब भाभी ने मुझे ऊपर खींच लिया। उन्होंने मेरे कपड़े उतारे और मेरा खड़ा लोड़ा हाथ में लिया।
“अब मुझे भी स्वाद दो…” भाभी ने कहा और मेरे लोड़े को मुंह में ले लिया।
लेकिन मुझे भाभी की चूत का स्वाद अभी और लेना था। मैंने उन्हें फिर से लिटा दिया और दूसरी बार उनकी गोरी चूत पर मुंह लगा दिया। इस बार भाभी खुद अपनी टाँगें चौड़ी करके रख रही थीं।
“अमन… आज मुझे अपनी चूत का पहला स्वाद दे दो… पूरी तरह…” भाभी सिसक रही थीं।
मैंने कंडोम लगाया और भाभी की गोरी चूत में अपना लोड़ा घुसा दिया। भाभी की चूत बहुत तंग थी। पहला धक्का लगाते ही भाभी चीख पड़ीं। मैंने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी।
हर धक्के के साथ भाभी की गोरी चूत मेरे लोड़े को निचोड़ रही थी। मैंने भाभी के दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और जोर-जोर से चोदने लगा।
“आह… आह… अमन… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ…” भाभी चीख रही थीं।
हमने तीन राउंड किए। हर बार नया कंडोम। दूसरा राउंड डॉगी स्टाइल में किया। भाभी की गोरी गांड मेरे सामने थी और मैं पीछे से उनकी चूत में लोड़ा मार रहा था।
तीसरा राउंड भाभी ने ऊपर बैठकर किया। उनकी गोरी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने झूल रही थीं।
रात को भाई जब लौटे तो भाभी का चेहरा अभी भी लाल था। भाई को कुछ शक हुआ, लेकिन कुछ बोला नहीं।
उस दिन से भाभी की गोरी चूत का स्वाद मेरे मुंह में बस गया था। जब भी मौका मिलता, मैं भाभी की चूत चाटता और फिर कंडोम लगाकर चोदता।
भाभी अब खुद कहतीं —
“अमन… आज फिर से मेरी गोरी चूत का स्वाद ले लो…”
भाभी की गोरी चूत का पहला स्वाद (आगे की कहानी)
उस दिन के बाद भाभी की गोरी चूत का स्वाद मेरे मुंह में बस गया था। रात को जब भाई सो गए, भाभी ने मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज किया — “अमन… आज रात मुझे फिर से अपनी गोरी चूत चटवानी है। भाई गहरी नींद में हैं। चुपके से आ जाना।”
मैं रात के 1 बजे चुपके से भाभी के कमरे में घुस गया। भाभी पहले से ही नंगी लेटी हुई थीं। उनकी गोरी टाँगें खुली हुई थीं और चूत हल्की-हल्की चमक रही थी। जैसे ही मैं बेड पर चढ़ा, भाभी ने मुझे सीधा अपनी चूत पर खींच लिया।
“पहले स्वाद ले लो… फिर कुछ और करना,” भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने उनकी गोरी चूत पर मुंह लगा दिया। आज स्वाद पहले से भी ज्यादा मीठा लग रहा था। मैंने जीभ से उनकी चूत की फाँकें चाटीं, फिर क्लिट को चूस लिया। भाभी ने मेरे बालों में उँगलियाँ फँसा लीं और कमर ऊपर उठाने लगीं।
“आह… अमन… और गहराई से चाटो… हाँ… मेरी चूत तुम्हारी है…” भाभी अब खुलकर बोल रही थीं।
मैंने उनकी गोरी जाँघों को फैलाकर रखा और 15 मिनट तक लगातार उनकी चूत चाटता रहा। भाभी दो बार जोर से काँपकर झड़ चुकी थीं। उनकी चूत से निकला पानी मेरी जीभ पर फैल रहा था। भाभी ने मुझे ऊपर खींचा और बोलीं, “अब कंडोम लगा और अंदर डालो… लेकिन पहले एक बार और चाट लो।”
मैंने फिर से मुंह लगाया। इस बार भाभी खुद मेरे सिर को दबा रही थीं। उनकी गोरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
कंडोम लगाने के बाद मैंने भाभी की टाँगें अपने कंधों पर रखीं और एक जोरदार धक्के में लोड़ा अंदर घुसा दिया। भाभी की चीख निकल गई। “आह… अमन… आज और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…”
हमने उस रात तीन राउंड किए। हर बार भाभी पहले अपनी गोरी चूत चटवाती थीं, फिर चुदवाती थीं। दूसरा राउंड उन्होंने खुद ऊपर बैठकर किया। उनकी गोरी छातियाँ मेरे मुँह के सामने झूल रही थीं और मैं उन्हें चूस रहा था।
तीसरा राउंड डॉगी स्टाइल में हुआ। भाभी घुटनों के बल हो गईं और मैं पीछे से उनकी गोरी चूत में लोड़ा मार रहा था। हर धक्के के साथ भाभी की गोरी गांड हिल रही थी।
सुबह 5 बजे जब मैं अपने कमरे में लौट रहा था, तभी भाई की आवाज आई — “अमन… इतनी देर से कहाँ थे?”
मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने कहा, “पानी पीने गया था।”
भाई ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी नजर संदिग्ध थी।
अगले दिन भाई ऑफिस गए तो भाभी ने मुझे किचन में बुलाया। जैसे ही मैं गया, भाभी ने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से लगा लिया। “आज दिन में ही करना है… भाई शक कर रहे हैं, इसलिए जल्दी खत्म करना।”
मैंने भाभी का सूट ऊपर खींचा और ब्रा के ऊपर से ही उनकी छातियाँ दबाने लगा। भाभी ने मेरी पैंट खोली और मेरा लोड़ा हाथ में ले लिया। लेकिन मुझे सबसे ज्यादा उनकी गोरी चूत चाटनी थी।
मैंने भाभी को किचन के स्लैब पर बैठा दिया, उनकी पैंटी नीचे खींची और मुंह लगा दिया। भाभी ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। “आह… अमन… दिन में भी चाट रहे हो… कितना नशा है तुम्हें मेरी चूत का…”
मैंने 8-10 मिनट तक उनकी गोरी चूत चाटी। भाभी जोर से काँप रही थीं। फिर मैंने कंडोम लगाया और खड़े-खड़े ही भाभी को चोदने लगा। भाभी ने मेरी कमर को दोनों टाँगों से जकड़ लिया था।
अचानक बाहर से भाई की गाड़ी की आवाज आई। भाई जल्दी लौट आए थे!
भाभी घबरा गईं। मैंने तुरंत कंडोम उतारा और कपड़े पहने। भाभी ने भी सूट ठीक किया। भाई अंदर आए तो हम दोनों किचन में खड़े थे। भाई ने भाभी से पूछा, “तुम्हारा चेहरा इतना लाल क्यों है?”
भाभी ने घबराकर कहा, “गैस जल रही थी… धुआँ लग गया।”
भाई ने मुझे देखा और कुछ बोले बिना ऊपर चले गए।
रात को भाई ने भाभी से झगड़ा किया। मैंने सुना — भाई बोले, “तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है… मुझे सब पता है।”
भाभी ने जोर से मना किया, लेकिन भाई का शक अब साफ दिख रहा था।
उस रात भाभी मेरे कमरे में नहीं आ सकीं। लेकिन अगले दिन जब भाई ऑफिस गए, भाभी ने मुझे मैसेज किया — “आज शाम को छत पर मिलना… भाई को शक है, इसलिए सुरक्षित जगह चाहिए। और हाँ… पहले मेरी गोरी चूत का स्वाद लेना।”
दिन के समय खतरनाक चुदाई (भाई घर पर)
भाई ने उस दिन छुट्टी ले ली थी। पूरा दिन घर पर ही थे। भाभी बहुत घबराई हुई थीं। वो बार-बार मुझे आँखों से इशारा कर रही थीं कि आज कुछ मत करना। लेकिन मुझे भाभी की गोरी चूत का स्वाद लेने की इतनी तलब हो रही थी कि मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा था।
दोपहर के करीब 1 बजे भाई लिविंग रूम में सोफे पर लेटकर मोबाइल देख रहे थे। भाभी किचन में खाना बना रही थीं। मैं चुपके से किचन में घुस गया। भाभी ने मुझे देखते ही सिर हिलाया — “मत करो… भाई घर पर हैं।”
मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “बस एक बार… जल्दी से। मैं सहन नहीं कर पा रहा।”
भाभी ने मना किया, लेकिन जब मैंने उनके स्तन पर हाथ रखा तो उनकी साँसें बदल गईं। मैंने तुरंत उनके सूट का नाड़ा खोला और पैंटी अंदर हाथ डाल दिया। भाभी की चूत पहले से ही गीली थी।
“अमन… रुक जाओ… भाई जाग सकते हैं…” भाभी फुसफुसा रही थीं।
मैंने उन्हें किचन के स्लैब से लगा दिया और घुटनों के बल बैठ गया। भाभी की पैंटी नीचे खींच दी। सामने थी उनकी वो गोरी चूत… दिन की रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी। मैंने बिना समय गवाए मुंह लगा दिया।
जीभ से पहली बार चाटते ही भाभी ने जोर से साँस ली। “आह… अमन… मत करो… भाई आ जाएंगे…”
लेकिन मैंने उनकी गोरी चूत चाटना शुरू कर दिया। जीभ को उनकी फाँकों के बीच घुमाया और क्लिट को चूस लिया। भाभी की टाँगें काँप रही थीं। उन्होंने एक हाथ से मेरा सिर दबाया और दूसरे हाथ से मुंह बंद किया ताकि आवाज न निकले।
मैं 5-6 मिनट तक उनकी चूत चाटता रहा। भाभी का पानी मेरी जीभ पर आ रहा था। तभी बाहर से भाई की आवाज आई — “प्रिया! पानी ला दो ना!”
भाभी का चेहरा सफेद पड़ गया। मैंने तुरंत उठकर खड़ा हो गया। भाभी ने जल्दी से पैंटी और सूट ठीक किया। हाथ धोकर पानी का गिलास लेकर भाई के पास गईं।
भाई ने गिलास लेकर कहा, “तुम्हारा चेहरा इतना लाल क्यों है?”
भाभी ने हँसकर कहा, “गैस पर खाना बना रही थी… गर्मी लग गई।”
भाई ने कुछ शक भरी नजर से देखा लेकिन कुछ नहीं बोले।
जैसे ही भाई फिर से सोफे पर लेट गए, भाभी किचन में वापस आईं। उन्होंने मुझे गुस्से से देखा, लेकिन आँखों में हवस भी थी। मैंने फिर से उन्हें स्लैब से लगा लिया। इस बार भाभी ने खुद मेरी पैंट खोली।
“जल्दी करो… 2 मिनट में खत्म करना है,” भाभी ने फुसफुसाया।
मैंने कंडोम लगाया और भाभी की एक टांग उठाकर लोड़ा उनकी गोरी चूत में घुसा दिया। भाभी ने तुरंत मेरे होंठों पर किस कर लिया ताकि उनकी आवाज बाहर न जाए।
मैं तेज-तेज धक्के लगा रहा था। किचन में सिर्फ “पचक-पचक” की हल्की आवाज आ रही थी। भाभी की गोरी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। भाभी ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
अचानक भाई की आवाज फिर आई — “प्रिया! तुम किचन में क्या कर रही हो इतनी देर?”
भाभी घबरा गईं। मैंने लोड़ा बाहर निकाला और तुरंत कंडोम उतारकर पैंट ऊपर खींच ली। भाभी ने भी सूट ठीक किया।
भाई किचन की तरफ आ रहे थे। भाभी ने मुझे फ्रिज के पीछे छुपा दिया। भाई अंदर आए और बोले, “क्या हो रहा है? आवाजें आ रही थीं…”
भाभी ने घबराकर कहा, “कुछ नहीं… पानी का नल खुला था… बंद कर रही थी।”
भाई ने चारों तरफ देखा। फ्रिज के पीछे मेरी एक चप्पल थोड़ी बाहर निकली हुई थी। भाई ने उसे देखा और भाभी से पूछा, “ये चप्पल किसकी है?”
भाभी कुछ बोल नहीं पाईं। तभी मैंने बाहर से जोर से छींक दी। भाई बाहर चले गए।
जैसे ही भाई चले गए, भाभी ने मुझे बाहर खींचा। उनके हाथ काँप रहे थे। “अमन… आज के लिए बस… बहुत डर लग रहा है। भाई शक कर रहे हैं।”
लेकिन मैंने भाभी को फिर से दीवार से लगा लिया। “एक बार और… बहुत जल्दी।”
भाभी ने मना किया, लेकिन जब मैंने उनकी चूत पर हाथ रखा तो वे फिर से पिघल गईं। इस बार हमने बाथरूम में जाकर ताला लगा लिया। भाभी ने मुझे बैठा दिया और खुद मेरे मुँह पर बैठ गईं। मैंने उनकी गोरी चूत चाटनी शुरू कर दी।
भाभी ने दोनों हाथों से दीवार पकड़ रखी थी। “आह… अमन… आज तो सच में पकड़े जाएंगे…”
मैंने 4 मिनट तक तेजी से चाटा। भाभी झड़ गईं। फिर भाभी ने कंडोम लगवाया और 3 मिनट में ही मुझे झड़ा दिया।
बाहर निकलते समय भाई हॉल में ही खड़े थे। उन्होंने हमें एक साथ देखा। भाई की नजर संदिग्ध थी।
उस दिन के बाद भाई ने भाभी से सीधा सवाल किया — “तुम और अमन के बीच क्या चल रहा है? मुझे सब पता है।”
भाभी ने जोर से मना किया, लेकिन भाई का शक अब साफ था।
