घर में सील पैक साली को जमकर चोदा | Jija Sali Virgin Sex Story

मेरा नाम रवि है। उम्र 30 साल। पंजाब के एक गांव में रहता हूँ। शादी को 4 साल हो गए हैं। पत्नी का नाम मीना है। उसकी छोटी बहन स्नेहा 20 साल की है। कॉलेज में पढ़ती है और देखने में बहुत खूबसूरत है — गोरी, लंबी और फिगर 34-28-36।

मीना को बच्चा होने वाला था, इसलिए वो 18-20 दिन के लिए अपने मायके चली गई। घर पर अकेला मैं था। सासू माँ ने कहा कि स्नेहा को भेज देते हैं, वो घर संभाल लेगी और खाना बना देगी।

स्नेहा आ गई। पहले 3-4 दिन नॉर्मल चले। वो दिन में खाना बनाती, घर साफ करती और शाम को अपनी पढ़ाई करती। मैं ऑफिस से आता तो बातें होतीं, लेकिन कुछ ज्यादा नहीं।

पाँचवें दिन दोपहर को बारिश शुरू हो गई। तेज बारिश और आंधी आ गई। बिजली चली गई। घर में अंधेरा हो गया।

स्नेहा किचन में खाना बना रही थी। मैं घर पर ही था। बारिश इतनी तेज थी कि बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

स्नेहा ने कहा, “जीजू, बिजली चली गई है। अंधेरा हो रहा है।”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं, मोबाइल का फ्लैश ऑन कर लेते हैं।”

हम दोनों किचन में थे। स्नेहा ने हल्का सा सूट पहना था। बारिश की वजह से बाहर ठंडक आ गई थी। स्नेहा को ठंड लग रही थी।

मैंने कहा, “जरा पास आ जा, गर्मी मिलेगी।”

स्नेहा थोड़ी शर्मा कर मेरे पास आ गई। हम दोनों एक ही चारपाई पर बैठ गए। अंधेरा था, सिर्फ मोबाइल की हल्की रोशनी थी।

स्नेहा का शरीर मेरे हाथ से छू रहा था। उसकी साँसें तेज हो रही थीं।

कुछ देर बाद स्नेहा ने धीरे से कहा, “जीजू… दीदी के जाने के बाद आप अकेले रहते हो ना?”

मैंने कहा, “हाँ… थोड़ा अकेलापन लगता है।”

स्नेहा चुप रही। फिर बोली, “मुझे भी… कभी-कभी अकेलापन लगता है।”

मैंने उसकी तरफ देखा। अंधेरे में भी उसके होंठ साफ दिख रहे थे। मैंने धीरे से उसके गाल पर हाथ रखा।

स्नेहा ने आँखें बंद कर लीं।

मैंने उसके होंठों पर किस किया। पहले वो थोड़ी हिचकिचाई, लेकिन फिर उसने भी किस करना शुरू कर दिया।

किस करते-करते मेरा हाथ उसके दूध पर चला गया। स्नेहा सिसक उठी।

मैंने उसका सूट ऊपर खींच दिया। अंदर ब्रा थी। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसके दूध बाहर निकाल लिए। अंधेरे में भी उसके गोरे दूध चमक रहे थे।

मैंने एक दूध मुंह में लिया और चूसने लगा। स्नेहा मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी।

“जीजू… आह्ह्ह…”

मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे। मैंने उंगली डाली तो चूत पहले से ही गीली थी।

स्नेहा बोली, “जीजू… धीरे… मैं… पहली बार…”

मैं समझ गया कि वो वर्जिन है।

मैंने अपना लंड निकाला। स्नेहा ने डरते हुए उसे हाथ में लिया।

मैंने उसे चारपाई पर लिटाया और उसके पैर फैलाए। लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया।

स्नेहा दर्द से कराह उठी, “हाय… जीजू… दर्द हो रहा है…”

मैं रुका रहा और उसके दूध चूसता रहा। कुछ देर बाद जब वो थोड़ी रिलैक्स हुई तो मैंने दूसरा झटका दिया। आधा लंड अंदर चला गया।

स्नेहा की आँखों से आँसू निकल आए।

मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। 5-6 मिनट बाद स्नेहा की चीख “हाय-हाय” से “आह्ह्ह… जीजू…” में बदल गई।

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। स्नेहा नीचे से गांड उछालने लगी।

“मजा आ रहा है ना स्नेहा?” मैंने पूछा।

“हाँ जीजू… और जोर से… आह्ह्ह!”

मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। किचन में सिर्फ बारिश की आवाज और स्नेहा की चीखें गूंज रही थीं।

10 मिनट बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया और उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया।

हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे पर लेट गए।

स्नेहा ने मेरे गाल पर किस किया और बोली, “जीजू… अब तो मैं रुक नहीं पाऊँगी।”

दूसरा दिन – स्नेहा का bold कदम

रात को बारिश में किचन में चुदाई के बाद हम दोनों थककर अलग-अलग कमरों में सो गए थे।

सुबह 8 बजे की बात है।

मैं अभी भी बिस्तर पर लेटा हुआ था। अचानक मेरे कमरे का दरवाजा धीरे से खुला। स्नेहा अंदर घुस आई। उसने सिर्फ एक पतली नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। अंदर कुछ नहीं था।

वो चुपचाप मेरे बिस्तर पर आ गई और मेरे ऊपर चढ़ गई।

“जीजू… उठ गए?” उसने फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने आँखें खोलीं। स्नेहा मेरे ऊपर बैठी हुई थी। उसकी नाइट ड्रेस इतनी छोटी थी कि उसकी जांघें साफ दिख रही थीं।

“स्नेहा… सुबह हो गई है। कोई आ सकता है।” मैंने कहा।

स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई नहीं आएगा जीजू। गाँव में सब अपने खेतों में निकल गए हैं। आज पूरा दिन घर हमारा है।”

उसने मेरी पैंट का नाड़ा खोल दिया और लंड बाहर निकाल लिया। लंड अभी भी सुबह का खड़ा था। स्नेहा ने उसे हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर दिया।

“रात को बहुत मजा आया था…” वो बोली।

फिर उसने खुद अपनी नाइट ड्रेस ऊपर खींच ली और मेरे लंड को अपनी चूत पर रख दिया।

“आज मैं खुद करूंगी।”

स्नेहा ने धीरे से लंड अपनी चूत में डाला और बैठ गई।

“आह्ह्ह…” उसने सिसकार मारी।

पहले दिन की तुलना में आज वो ज्यादा confident थी। उसने खुद ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। उसके दूध नाइट ड्रेस के अंदर उछल रहे थे।

मैंने उसकी नाइट ड्रेस पूरी तरह उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी मेरे ऊपर बैठी थी।

स्नेहा जोर-जोर से उछलने लगी। “जीजू… आज और जोर से… आह्ह्ह!”

मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और उसके दूध मुंह में लिया। वो और तेजी से उछलने लगी।

कुछ देर बाद स्नेहा ने मुझे धक्का देकर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। अब वो पूरी तरह कंट्रोल में थी।

“आज मैं चोदूंगी आपको जीजू…” वो शैतानी से बोली।

वो मेरे लंड पर तेजी से उछल रही थी। उसके बाल खुले हुए थे। पसीना उसके शरीर पर चमक रहा था।

मैंने उसके कूल्हे पकड़कर ऊपर से धक्का देना शुरू किया। स्नेहा जोर-जोर से चीख रही थी।

“हाँ… जीजू… ऐसे ही… आह्ह्ह… और जोर से!”

10 मिनट बाद स्नेहा का शरीर काँपने लगा। “जीजू… मैं झड़ने वाली हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी नहीं रुक पाया और उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

स्नेहा मेरे ऊपर ही लेट गई। दोनों साँसें तेज थीं।

थोड़ी देर बाद स्नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया, “जीजू… आज दिन में फिर से करेंगे ना? किचन में… या छत पर?”

मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “पागल हो गई है क्या? दिन में?”

स्नेहा मुस्कुराई और बोली, “हाँ… मुझे दिन में चुदवाना है। कोई नहीं है घर पर।”

दोपहर – किचन काउंटर पर चुदाई

दोपहर के 1 बजे की बात है।

स्नेहा किचन में खाना बना रही थी। मैं बाहर बरामदे में लेटा हुआ था। अचानक स्नेहा ने आवाज लगाई, “जीजू… आइए ना! थोड़ी मदद करनी है।”

मैं किचन में गया। स्नेहा चूल्हे के सामने खड़ी थी। उसने फिर से वही हल्का सा सूट पहना था। पीछे से उसकी गांड साफ दिख रही थी।

जैसे ही मैं अंदर गया, स्नेहा ने चूल्हा बंद किया और मेरी तरफ मुड़ी।

“खाना तो बाद में बनेगा…” उसने शरारत से कहा।

उसने मेरा हाथ पकड़ा और खुद किचन काउंटर पर बैठ गई। पैर लटका दिए। फिर उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

“आज दिन में ही चोद दो मुझे जीजू…” वो बोली।

मैंने उसके सूट का नाड़ा खोला और पैंटी सहित नीचे उतार दी। स्नेहा ने खुद काउंटर पर पीछे की तरफ झुककर टाँगें फैला दीं।

उसकी चूत पहले से ही गीली थी।

मैंने अपना लंड निकाला और सीधे उसकी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह्ह… जीजू!” स्नेहा जोर से चीख पड़ी।

दिन का वक्त था। किचन का दरवाजा खुला था। कोई भी आ सकता था, लेकिन स्नेहा को इसकी परवाह नहीं थी।

मैं खड़े होकर उसे जोर-जोर से चोदने लगा। किचन काउंटर हिल रहा था। बर्तन खनखना रहे थे।

स्नेहा मेरे गले में हाथ डालकर चीख रही थी, “और जोर से… आह्ह्ह… दिन में चोद रहे हो मुझे… हाँ… और जोर से!”

मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरा चोदने लगा। स्नेहा का सिर पीछे की तरफ झुक गया था। उसके बाल खुले हुए थे।

“मजा आ रहा है ना स्नेहा?” मैंने पूछा।

“हाँ जीजू… बहुत… आह्ह्ह… किचन में ही चोद दो मुझे आज!”

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। स्नेहा के दूध सूट के अंदर उछल रहे थे। मैंने सूट ऊपर खींचा और ब्रा के ऊपर से ही दूध दबाने लगा।

स्नेहा ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से दबा दिए।

कुछ देर बाद स्नेहा का शरीर काँपने लगा। “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैं भी नहीं रुक पाया और उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया।

हम दोनों 1 मिनट तक उसी पोजीशन में रहे। स्नेहा की साँसें बहुत तेज थीं।

फिर उसने मुझे किस किया और बोली, “जीजू… आज रात को फिर से करेंगे ना? लेकिन इस बार छत पर।”

मैंने उसके गाल पर किस किया और कहा, “पागल है क्या? रात को छत पर?”

स्नेहा मुस्कुराई और बोली, “हाँ… मुझे रात को छत पर चुदवाना है।”

रात – छत पर खुली चुदाई

रात के करीब 11 बजे की बात है।

घर में बत्ती बंद कर दी गई थी। स्नेहा ने मुझे इशारे से बुलाया और छत की सीढ़ियों की तरफ ले गई।

“जीजू… चलो ना छत पर। आज रात वहीं सोते हैं।”

मैं समझ गया कि उसका क्या इरादा है।

हम दोनों छत पर चढ़ गए। ऊपर ठंडी हवा चल रही थी। आसमान साफ था और चाँदनी फैली हुई थी। गाँव में ज्यादातर लोग सो चुके थे, लेकिन फिर भी खुली जगह होने की वजह से थोड़ा डर भी लग रहा था।

स्नेहा ने एक पुरानी चारपाई छत पर बिछा दी थी। उसने मेरी तरफ देखा और धीरे से बोली, “आज मुझे खुले आसमान के नीचे चोदो जीजू…”

उसने खुद अपनी नाइट ड्रेस उतार दी। अंदर कुछ नहीं पहना था। चाँदनी में उसका नंगा शरीर चमक रहा था।

मैं भी अपने कपड़े उतारकर उसके पास आ गया। स्नेहा ने मुझे चारपाई पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई।

“आज मैं ऊपर रहूंगी…” उसने कहा।

उसने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे-धीरे बैठ गई।

“आह्ह्ह…” स्नेहा सिसक उठी।

वो ऊपर-नीचे होने लगी। चाँदनी में उसके दूध साफ दिख रहे थे। ठंडी हवा लग रही थी, लेकिन हम दोनों के शरीर से पसीना निकल रहा था।

स्नेहा जोर-जोर से उछल रही थी। “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है… खुले में चुदवाई… आह्ह्ह!”

मैंने उसके कूल्हे पकड़कर ऊपर से धक्का देना शुरू किया। स्नेहा की चीखें अब थोड़ी तेज हो गई थीं।

“श्श्श… आवाज कम करो…” मैंने कहा।

स्नेहा मुस्कुराई और बोली, “डरो मत जीजू… रात है। कोई नहीं देख रहा।”

उसने और तेजी से उछलना शुरू कर दिया। चारपाई हल्की-हल्की कड़कड़ाने लगी।

कुछ देर बाद स्नेहा ने पोजीशन बदली। वो चारपाई पर झुक गई (doggy) और बोली, “पीछे से चोदो मुझे… खुले आसमान के नीचे…”

मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और एक झटके में लंड अंदर घुसा दिया। स्नेहा जोर से चीख पड़ी।

अब मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था। ठंडी हवा उसके शरीर पर लग रही थी। चाँदनी में उसकी गांड साफ दिख रही थी।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “और जोर से… आह्ह्ह… आज रात मुझे अच्छे से चोदो जीजू… आहhhhh!”

मैंने उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और रफ्तार बढ़ा दी। स्नेहा की चीखें अब खुलकर निकल रही थीं।

10 मिनट बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी नहीं रुक पाया और उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया।

हम दोनों चारपाई पर लेट गए। स्नेहा मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “कितना अच्छा लगा जीजू… खुले में चुदवाई का मजा ही कुछ और है।”

मैंने उसे गले लगाया।

स्नेहा ने फिर से मेरे कान में फुसफुसाया, “कल फिर से करेंगे ना? लेकिन इस बार दिन में… खेत के पास?”

स्नेहा का नया नियम

छत पर चुदाई के बाद हम दोनों चारपाई पर लेटे हुए थे। ठंडी हवा चल रही थी। स्नेहा मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी थी।

कुछ देर चुप रहने के बाद स्नेहा ने धीरे से कहा, “जीजू… अब से हर रोज चुदवाना है मुझे।”

मैं चौंक गया। “हर रोज? स्नेहा… ये गलत हो सकता है।”

स्नेहा ने सिर उठाकर मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें चमक रही थीं।

“मुझे परवाह नहीं। दीदी 15-16 दिन बाद आएंगी। तब तक मुझे रोज चाहिए। दिन हो या रात… सुबह हो या दोपहर… कहीं भी… जैसे भी हो।”

उसने मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए कहा, “आपको भी तो अच्छा लगता है ना? तो फिर क्यों रोकें?”

मैं चुप रहा। स्नेहा ने आगे बढ़कर मेरे कान में फुसफुसाया, “कल सुबह से शुरू करेंगे। आप ऑफिस से लौटोगे तो मैं तैयार रहूंगी। दोपहर को किचन में, शाम को छत पर, रात को बेडरूम में… जहाँ मन करे।”

उसने मेरे लंड को और जोर से दबाया और बोली, “बोलो… राजी हो?”

मैंने सिर हिलाया। स्नेहा मुस्कुरा दी।

“अच्छा… तो आज रात को एक बार और कर लें?”

उसने खुद मेरे ऊपर चढ़कर लंड अपनी चूत में डाल लिया। अब वो धीरे-धीरे उछल रही थी।

“जीजू… अब से ये मेरा हक है। रोज चोदोगे ना मुझे?” “हाँ स्नेहा…” मैंने कहा।

स्नेहा और तेजी से उछलने लगी। “जोर से बोलो… रोज चोदोगे?”

“हाँ… रोज चोदूंगा तुझे।”

स्नेहा खुश होकर जोर से चीख पड़ी, “आह्ह्ह… अच्छा लगा सुनकर… और जोर से चोदो मुझे आज!”

मैंने उसे नीचे लिटाया और इस बार मैं ऊपर आ गया। स्नेहा की टाँगें फैलाईं और जोर-जोर से चोदने लगा।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “रोज… रोज चोदना… दिन में भी… रात में भी… आह्ह्ह!”

इस बार चुदाई पहले से ज्यादा passionate थी। स्नेहा पूरी तरह खुलकर चीख रही थी।

आखिर में जब मैं उसके अंदर झड़ने वाला था, स्नेहा ने मेरे बाल पकड़कर कहा, “अंदर ही झाड़ो… कल से रोज अंदर ही झाड़ना।”

मैंने उसकी चूत में झड़ दिया।

स्नेहा संतुष्ट होकर मेरे ऊपर लेट गई और बोली, “अब से तुम मेरे हो… और मैं तुम्हारी। दीदी आएंगी तब तक… हम दोनों का ये राज रहेगा।”

सुबह की चुदाई – स्नेहा का नया नियम

अगले दिन सुबह 6:30 बजे की बात है।

मैं अभी भी गहरी नींद में था। अचानक मुझे कुछ गर्माहट महसूस हुई। आँखें खोली तो देखा — स्नेहा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी। वो पूरी तरह नंगी थी।

उसने मेरी पैंट नीचे खींच दी थी और मेरा लंड हाथ में लेकर हिला रही थी।

“जीजू… उठ जाओ…” उसने धीरे से कहा।

मैं आँखें मलते हुए बोला, “स्नेहा… सुबह हो गई है…”

स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “नियम याद है ना? हर रोज… और सबसे पहले सुबह।”

उसने मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई।

“आह्ह्ह…” स्नेहा सिसक उठी।

सुबह की पहली रोशनी कमरे में आ रही थी। स्नेहा धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके बाल खुले हुए थे और सुबह की हल्की रोशनी में उसका नंगा शरीर बहुत सुंदर लग रहा था।

मैंने उसके कूल्हे पकड़ लिए। स्नेहा झुककर मेरे ऊपर आ गई और मेरे होंठों पर किस करने लगी।

“आज सुबह से शुरू करते हैं…” वो फुसफुसाई।

मैंने उसे नीचे लिटाया और खुद ऊपर आ गया। स्नेहा ने खुद अपनी टाँगें फैला दीं।

“जल्दी करो जीजू… मुझे सुबह-सुबह चोदो…”

मैंने लंड उसकी चूत में डाला और धीरे-धीरे चोदने लगा। स्नेहा की आँखें बंद थीं। वो सुबह की शांति में भी जोर-जोर से सिसकारें भर रही थी।

“आह्ह्ह… जीजू… कितना अच्छा लग रहा है सुबह चुदवाई… आह्ह्ह!”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। स्नेहा के दूध उछल रहे थे। मैंने एक दूध मुंह में लिया और चूसते हुए चोदता रहा।

स्नेहा मेरे बाल पकड़कर बोली, “और जोर से… आज पूरा दिन मुझे चोदना है… आह्ह्ह!”

10 मिनट बाद स्नेहा का शरीर काँपने लगा। “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी नहीं रुक पाया और सुबह-सुबह ही उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

स्नेहा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोली, “अब से हर सुबह यही होगा… समझ गए?”

मैंने सिर हिलाया।

स्नेहा मुस्कुराते हुए बोली, “अब उठो… नहा-धोकर नाश्ता कर लो। दोपहर को फिर मिलेंगे… किचन में।”

रात – एक कमरा, एक बिस्तर

रात के 10 बजे स्नेहा अपने सामान के साथ मेरे कमरे में आ गई। उसने नाइट ड्रेस पहनी हुई थी।

वो सीधे मेरे बिस्तर पर आकर लेट गई। मैं भी उसके पास लेट गया।

स्नेहा ने मेरी तरफ मुड़कर कहा, “अब से ये मेरा कमरा भी है।”

मैंने उसे गले लगाया। स्नेहा ने खुद मेरी पैंट का नाड़ा खोला और लंड बाहर निकाल लिया।

“रात को भी चोदोगे ना?” उसने पूछा।

“हाँ…” मैंने कहा।

स्नेहा ने लंड को चूमा और फिर मुंह में ले लिया। वो धीरे-धीरे चूसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर रखे।

कुछ देर बाद स्नेहा उठी और खुद नाइट ड्रेस उतार दी। फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गई।

“आज रात धीरे-धीरे चोदना… लंबे समय तक…” उसने कहा।

उसने लंड अपनी चूत में डाला और धीरे-धीरे उछलने लगी। कमरे में सिर्फ स्नेहा की हल्की सिसकारियाँ और बिस्तर की आवाज आ रही थी।

मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया। स्नेहा ने अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट लीं।

“जीजू… अब से हर रात यही होगा ना?” वो बोली।

“हाँ स्नेहा…” मैंने जवाब दिया।

मैं धीरे-धीरे लेकिन गहराई से चोद रहा था। स्नेहा मेरे गले में हाथ डालकर बार-बार किस कर रही थी।

करीब 20 मिनट तक हम धीरे-धीरे चुदाई करते रहे। आखिर में स्नेहा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोली, “अंदर झाड़ो… आज रात अंदर ही…”

मैंने उसकी चूत में झड़ दिया।

स्नेहा ने मुझे अपने ऊपर ही लेटा लिया और बोली, “अब सो जाओ… सुबह फिर से करेंगे।”

स्नेहा का नया रूप – “मैं ही तुम्हारी पत्नी हूँ”

रात के 11 बजे थे।

हम दोनों एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर थे। स्नेहा मेरे ऊपर बैठी हुई थी। उसने खुद मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया था और धीरे-धीरे उछल रही थी।

कमरे में सिर्फ हम दोनों की साँसें और बिस्तर की हल्की आवाज आ रही थी।

स्नेहा अचानक रुक गई। उसने मेरे बाल पकड़कर मेरी तरफ देखा और बोली —

“जीजू… जब तक दीदी नहीं है, तब तक मैं ही आपकी पत्नी हूँ।”

मैंने उसे देखा। स्नेहा की आँखें चमक रही थीं।

उसने आगे बढ़कर मेरे होंठों पर किस किया और फिर जोर से बोली, “जमकर चोदो मुझे… जैसे पत्नी को चोदते हो। आज रात मुझे अपनी बीवी समझकर चोदो।”

मैंने उसे नीचे लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया। स्नेहा ने खुद अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं।

“हाँ… ऐसे ही… अब और जोर से चोदो!” वो चीख पड़ी।

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब चुदाई पहले से कहीं ज्यादा तेज और गहरी हो गई थी। स्नेहा की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।

“आह्ह्ह… जीजू… और जोर से… आज रात मुझे अपनी पत्नी समझकर चोदो… आहhhhh!”

मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर दबा दिए और जोर-जोर से चोदने लगा। स्नेहा के दूध उछल रहे थे। मैंने एक दूध मुंह में लिया और जोर से चूसते हुए चोदता रहा।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “हाँ… और जोर से… मैं आज रात तुम्हारी पत्नी हूँ… चोदो मुझे… आह्ह्ह!”

मैंने उसे doggy position में कर दिया। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा। स्नेहा का मुंह खुला हुआ था और वो लगातार चीख रही थी।

“जीजू… आज रात मुझे अपनी बीवी समझकर चोदो… आहhhhh!”

मैं और जोर से चोदने लगा। स्नेहा की गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदता रहा।

करीब 15 मिनट तक लगातार तेज चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैं भी नहीं रुक पाया और जोर से उसकी चूत के अंदर झड़ गया।

स्नेहा थककर बिस्तर पर गिर पड़ी। मैं उसके पीछे लेट गया और उसे गले लगाया।

स्नेहा ने मेरे हाथ को अपने दूध पर रखते हुए धीरे से कहा, “अब से हर रात यही होगा… मैं तुम्हारी पत्नी हूँ जब तक दीदी नहीं आती।”

दिन में पति-पत्नी का खेल

दोपहर के 1 बजे की बात है।

स्नेहा किचन में खाना बना रही थी। मैं बाहर बरामदे में बैठा था। अचानक स्नेहा ने आवाज लगाई, “पति जी… खाना तैयार है। आइए ना।”

मैं चौंक गया। स्नेहा ने मुझे “पति जी” बोलकर बुलाया था।

मैं किचन में गया तो स्नेहा मुस्कुरा रही थी। उसने थाली सजा रखी थी। जैसे कोई पत्नी अपने पति के लिए खाना लगाती है।

“बैठिए पति जी…” उसने कहा और मुझे बैठा दिया।

खाना खाते समय स्नेहा मेरे पास बैठी रही। बीच-बीच में मेरे कंधे पर हाथ रखती और “पति जी” बोलकर बात करती।

खाना खत्म करने के बाद स्नेहा ने थाली उठाई और बोली, “पति जी… आज आप थक गए लग रहे हैं। चलिए, मैं आपको आराम कराती हूँ।”

वो मेरे हाथ में हाथ डालकर सीधे बेडरूम में ले गई।


बेडरूम में – पति-पत्नी वाली चुदाई

स्नेहा ने दरवाजा बंद किया और मेरे सामने खड़ी हो गई।

“पति जी… आज मैं आपकी पत्नी हूँ। जो मन करे, कर लीजिए।”

उसने खुद अपना सूट उतार दिया। अंदर ब्रा और पैंटी थी। फिर उसने मेरे कपड़े भी उतार दिए।

स्नेहा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई।

“पति जी… आज आपकी बीवी आपको बहुत खुश करेगी।”

उसने लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे से बैठ गई।

“आह्ह्ह… पति जी…” स्नेहा सिसक पड़ी।

वो ऊपर-नीचे होने लगी। बीच-बीच में वो “पति जी”, “शोहर जी” बोल रही थी।

“पति जी… आपका लंड बहुत अच्छा है… आह्ह्ह… आपकी बीवी को बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसे नीचे लिटाया और खुद ऊपर आ गया। अब मैं जोर से चोद रहा था।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “हाँ पति जी… और जोर से चोदिए… आपकी पत्नी को चोद रहे हैं… आह्ह्ह!”

मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और जोर से चोदने लगा।

स्नेहा की चीखें अब और ज्यादा आ रही थीं, “पति जी… आज मुझे अपनी बीवी समझकर चोदिए… आहhhhh!”

मैंने उसे doggy position में कर दिया। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा।

स्नेहा चीख-चीख कर बोल रही थी, “हाँ… पति जी… और जोर से… आपकी पत्नी को चोद रहे हैं… आह्ह्ह!”

करीब 12-15 मिनट तक लगातार चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “पति जी… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी उसके अंदर ही झड़ गया।

स्नेहा थककर बिस्तर पर लेट गई। मैं उसके पीछे लेट गया।

स्नेहा ने मेरे हाथ को अपने दूध पर रखते हुए धीरे से कहा, “पति जी… अब से दिन में भी मैं आपको ‘पति जी’ बोलकर बुलाऊंगी। और जब मन करे, चोद लीजिए… मैं तैयार रहूंगी।”

पति-पत्नी का पूरा रोल प्ले

दोपहर की चुदाई के बाद स्नेहा मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी थी।

कुछ देर चुप रहने के बाद उसने धीरे से कहा, “पति जी… अब से आप मुझे ‘बीवी’ बोलकर बुलाइए।”

मैंने उसे देखा। स्नेहा शरमा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में शरारत थी।

“बीवी?” मैंने पूछा।

स्नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ पति जी। जब तक दीदी नहीं आती, मैं आपकी बीवी हूँ। आप मुझे बीवी बोलिए… और मैं आपको पति जी बोलूंगी।”

उसने मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए कहा, “अब से घर में हम पति-पत्नी हैं।”


शाम की चुदाई – बीवी वाली बातें

शाम के 6 बजे स्नेहा ने मुझे कमरे में बुलाया।

जैसे ही मैं अंदर गया, स्नेहा ने दरवाजा बंद किया और मेरे पास आ गई।

“पति जी… बीवी आपकी सेवा करना चाहती है…” उसने धीरे से कहा।

उसने खुद मेरे कपड़े उतार दिए और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर वो खुद भी नंगी हो गई और मेरे ऊपर चढ़ गई।

स्नेहा ने लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे से बैठ गई।

“आह्ह्ह… पति जी…” वो सिसक पड़ी।

वो उछलते हुए बोली, “बीवी को चोद रहे हैं पति जी… कैसा लग रहा है?”

मैंने उसके कूल्हे पकड़कर कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है बीवी…”

स्नेहा खुश हो गई। उसने और तेजी से उछलना शुरू कर दिया।

“हाँ पति जी… और जोर से चोदिए अपनी बीवी को… आह्ह्ह!”

मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया। अब मैं जोर से चोद रहा था।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “पति जी… आपकी बीवी को और जोर से चोदिए… आह्ह्ह… बीवी बहुत खुश है… आहhhhh!”

मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और जोर से चोदते हुए कहा, “ले… ले बीवी… पति का लंड ले… आज रात भी तेरी चूत फाड़ दूंगा।”

स्नेहा और ज्यादा उत्तेजित हो गई। “हाँ पति जी… फाड़ दीजिए… आपकी बीवी की चूत फाड़ दीजिए… आह्ह्ह!”

मैंने उसे doggy position में कर दिया। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा।

स्नेहा चीख-चीख कर बोल रही थी, “पति जी… आपकी बीवी को चोद रहे हैं… आहhhhh… और जोर से… बीवी को चोदिए!”

करीब 12 मिनट तक तेज चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “पति जी… बीवी झड़ रही है… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी उसके अंदर झड़ गया।

स्नेहा थककर बिस्तर पर लेट गई। मैं उसके पीछे लेट गया और उसे गले लगाया।

स्नेहा ने मेरे हाथ को अपने दूध पर रखते हुए कहा, “पति जी… अब से मैं आपकी बीवी हूँ। दिन हो या रात… जब मन करे, चोद लीजिए।”

बीवी वाली सेवा – पैर दबाना और मालिश

दोपहर के बाद स्नेहा पूरी तरह पत्नी का रोल निभा रही थी।

वो मेरे पास आकर बोली, “पति जी… आप थक गए होंगे। मैं आपके पैर दबा दूँ?”

मैं बिस्तर पर लेटा था। स्नेहा ने मेरे पैर दबाने शुरू कर दिए। वो बड़े प्यार से दबा रही थी। बीच-बीच में वो मेरे पैरों को चूम भी रही थी।

“पति जी… आराम कीजिए। बीवी सेवा कर रही है।”

पैर दबाने के बाद स्नेहा ने कहा, “पति जी… अब मैं आपको मालिश कर दूँ?”

उसने तेल निकाला और मेरे सीने, हाथों और जांघों पर मालिश करने लगी। उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे मेरे लंड के पास जा रही थीं।

मैंने कहा, “बीवी… बहुत अच्छा लग रहा है।”

स्नेहा मुस्कुराई और बोली, “पति जी… बीवी को भी कुछ चाहिए।”

उसने तेल अपने हाथों में लिया और मेरे लंड पर मालिश करने लगी। धीरे-धीरे वो लंड को हाथों से हिला रही थी।

“पति जी… आपका लंड बहुत गरम है…” वो फुसफुसाई।


मालिश से चुदाई तक

स्नेहा ने खुद अपने कपड़े उतार दिए और मेरे ऊपर चढ़ गई। तेल लगे हाथों से उसने मेरे लंड को अपनी चूत पर रगड़ा।

“पति जी… अब बीवी को चोद दीजिए…” उसने कहा।

उसने लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे से बैठ गई।

“आह्ह्ह… पति जी…” स्नेहा सिसक पड़ी।

वो उछलते हुए बोली, “बीवी आपको सेवा कर रही थी… अब पति जी बीवी को चोद रहे हैं… आह्ह्ह!”

मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया। अब मैं जोर से चोद रहा था।

स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “हाँ पति जी… और जोर से… आपकी बीवी को चोदिए… आह्ह्ह!”

मैंने उसके दूध मुंह में लिया और चूसते हुए चोदता रहा। स्नेहा मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी।

“पति जी… बीवी बहुत खुश है… आहhhhh!”

मैंने उसे doggy position में कर दिया। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा।

स्नेहा चीख रही थी, “पति जी… आपकी बीवी की चूत फाड़ दीजिए… आह्ह्ह… और जोर से चोदिए!”

करीब 10-12 मिनट तक तेज चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “पति जी… बीवी झड़ रही है… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी उसके अंदर झड़ गया।

स्नेहा थककर मेरे ऊपर लेट गई।

मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “बीवी… आज बहुत अच्छी सेवा की।”

स्नेहा ने मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “पति जी… अब से रोज ऐसा ही होगा। सुबह पैर दबाऊंगी, दिन में मालिश करूंगी, और जब मन करे… चोद लीजिए।”

बीवी की नई सेवा – कपड़े उतारना और नहाना

दोपहर के बाद स्नेहा और भी ज्यादा पत्नी जैसा व्यवहार करने लगी।

वो मेरे पास आकर बोली, “पति जी… आप पसीने से तर हो गए हैं। बीवी आपको नहला देती है।”

मैं हैरान होकर देख रहा था। स्नेहा ने मेरे हाथ पकड़े और सीधे बाथरूम में ले गई।

बाथरूम में आकर स्नेहा ने सबसे पहले मेरी कमीज़ के बटन खोले। धीरे-धीरे उसने मेरी कमीज़ उतार दी। फिर उसने मेरी पैंट का नाड़ा खोला और पैंट नीचे उतार दी।

अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। स्नेहा ने घुटनों के बल बैठकर अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा लंड सामने आ गया।

स्नेहा ने लंड को हाथ में लेकर कहा, “पति जी… बीवी आपकी सेवा कर रही है।”

उसने पानी खोला और मुझे नहाने लगी। पहले तो वो साबुन लगाकर मेरे शरीर को धो रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ मेरे लंड पर जाने लगे।

स्नेहा ने लंड पर साबुन लगाया और धीरे-धीरे हिलाने लगी।

“पति जी… बीवी आपको साफ कर रही है…” वो फुसफुसाई।

मैंने उसे दीवार से लगा लिया और उसके सूट का नाड़ा खोल दिया। स्नेहा ने खुद सूट उतार दिया। अब वो भी नंगी थी।

मैंने पानी के नीचे ही उसे दीवार से लगाकर लंड उसकी चूत में डाल दिया।

“आह्ह्ह… पति जी…” स्नेहा चीख पड़ी।

पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। मैं जोर-जोर से उसे चोद रहा था। स्नेहा मेरे गले में हाथ डालकर चीख रही थी।

“पति जी… बीवी को शावर में चोद रहे हैं… आह्ह्ह!”

मैंने उसके बाल गीले करके पीछे खींचे और जोर से चोदने लगा। स्नेहा की चीखें बाथरूम में गूंज रही थीं।

“हाँ पति जी… और जोर से… आपकी बीवी को चोदिए… आहhhhh!”

करीब 10 मिनट तक शावर में चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “पति जी… बीवी झड़ रही है… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी उसके अंदर झड़ गया।

हम दोनों पानी के नीचे ही थोड़ी देर चिपके रहे।

स्नेहा ने मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “पति जी… अब से बीवी आपको नहलाएगी भी… और जब मन करे, शावर में ही चोद लेगी।”

दीदी आने वाली है… स्नेहा को जाना होगा

स्नेहा के मायके से फोन आया। दीदी (मीना) 2 दिन बाद घर लौट रही थी।

स्नेहा को यह बात सुनते ही बहुत बुरा लगा। वो चुपचाप कमरे में आकर मेरे पास बैठ गई।

“पति जी…” उसने धीरे से कहा, “दीदी 2 दिन बाद आ रही हैं। मुझे जाना होगा।”

मैं चुप रहा। स्नेहा ने मेरे हाथ पकड़ लिए।

“ये 18-19 दिन… बहुत अच्छे लगे। आपने मुझे अपनी बीवी जैसा महसूस कराया। अब सब खत्म हो जाएगा।”

उसकी आँखों में आँसू आ गए थे।

मैंने उसे गले लगाया और बोला, “बीवी… अभी 2 दिन बाकी हैं। आखिरी 2 दिन हम दोनों को याद रखने लायक बनाते हैं।”

स्नेहा ने सिर उठाकर मुझे देखा और बोली, “पति जी… आखिरी 2 दिन मुझे जमकर चोदना। दिन हो या रात… जहाँ मन करे। बीवी को याद रखने लायक चोदना।”


आखिरी 2 दिन – सबसे वाइल्ड चुदाई

पहला दिन (आखिरी दिन से पहले):

सुबह से लेकर रात तक हमने घर के हर कोने में चुदाई की।

  • सुबह बेडरूम में
  • दोपहर को किचन काउंटर पर
  • शाम को छत पर
  • रात को शावर में

स्नेहा हर बार “पति जी” और “बीवी” वाली बातें बोल रही थी। वो जानती थी कि ये आखिरी मौके हैं, इसलिए वो और ज्यादा खुलकर चीख रही थी और चोदवा रही थी।

आखिरी रात:

रात के 12 बजे थे। दीदी कल सुबह आ रही थी।

स्नेहा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई।

“पति जी… आज आखिरी रात है। बीवी को याद रखने लायक चोदना।”

उसने लंड को अपनी चूत में डाला और धीरे-धीरे उछलने लगी।

“आह्ह्ह… पति जी… बीवी को और जोर से चोदिए… आह्ह्ह!”

मैंने उसे नीचे लिटाया और जोर से चोदने लगा। स्नेहा बार-बार बोल रही थी, “पति जी… बीवी आपको कभी नहीं भूलेगी… आहhhhh!”

मैंने उसे doggy position में कर दिया। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा।

स्नेहा चीख रही थी, “पति जी… आखिरी बार… बीवी की चूत फाड़ दीजिए… आहhh!”

करीब 20 मिनट तक लगातार तेज चुदाई के बाद स्नेहा का शरीर काँप उठा। “पति जी… बीवी झड़ रही है… आहhhhh!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी उसके अंदर झड़ गया।

हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से चिपक गए।

स्नेहा ने मेरे सीने पर सिर रखकर रोते हुए कहा, “पति जी… मैं नहीं जाना चाहती… लेकिन जाना पड़ेगा।”

मैंने उसे चुप कराते हुए कहा, “बीवी… ये पल हमेशा याद रखना।”

स्नेहा ने आखिरी बार मुझे जोर से किस किया और बोली, “पति जी… जब भी मौका मिलेगा, बीवी आएगी… और आप उसे चोदना।”


अगली सुबह

दीदी आने से पहले स्नेहा ने अपना सामान पैक कर लिया। जाने से पहले उसने आखिरी बार मुझे गले लगाया और कान में फुसफुसाया, “पति जी… बीवी आपको कभी नहीं भूलेगी।”

फिर वो चली गई।

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