बारिश की रात में खेत के झोपड़े में साली की पहली चुदाई | Jija Sali Sex Kahani

मेरा नाम राहुल है। उम्र 31 साल। पंजाब के एक छोटे से गांव में रहता हूँ। शादी को तीन साल हो गए हैं। पत्नी का नाम अंजलि है। वो शहर की लड़की है लेकिन अब पूरी तरह गांव की बन गई है। उसकी छोटी बहन निधि 20 साल की है। शहर में बी.ए. कर रही है। लंबी, गोरी, फिगर 34-28-36। देखते ही लंड खड़ा हो जाए ऐसा माल।

निधि इस साल गर्मियों की छुट्टियों में हमारे गांव आ गई थी। पहले दो-तीन दिन तो सब नॉर्मल चला। लेकिन चौथे दिन अंजलि को अचानक उसके मायके फोन आया। कोई जरूरी काम था, उसे दो दिन के लिए जाना पड़ा।

घर पर अब मैं और निधि अकेले रह गए।

शाम के करीब 7 बजे निधि ने कहा, “जीजू, चलो ना खेत दिखाओ। रात को तारे बहुत सुंदर लगते हैं। मैंने कभी गांव में रात को खेत नहीं देखे।”

मैंने कहा, “ठीक है, ट्रैक्टर पर बैठ जा।”

हम ट्रैक्टर पर खेत की तरफ निकल पड़े। रास्ते में अचानक आसमान गरजा और तेज बारिश शुरू हो गई। इतनी तेज कि आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने ट्रैक्टर को पुराने ट्यूबवेल वाले झोपड़े की तरफ मोड़ दिया।

झोपड़ा छोटा सा था। अंदर एक पुरानी चारपाई, एक लालटेन और कुछ खाली बोरे पड़े थे। हम दोनों भीग चुके थे। निधि का हल्का सा सूट पूरा शरीर से चिपक गया था। उसके ब्रा के निशान और निप्पल के उभार साफ दिख रहे थे।

वह शरमा कर बोली, “जीजू… कपड़े तो पूरी तरह भीग गए।”

मैंने कहा, “कोई नहीं आएगा निधि। सूट उतार कर बोरे पर फैला दे। मैं भी अपनी कमीज़ और जींस उतार देता हूँ।”

वह थोड़ी देर शर्मा कर खड़ी रही, फिर धीरे-धीरे सूट उतारने लगी। अंदर सिर्फ ब्रा और पैंटी रह गई। मैंने भी ऊपर का कपड़ा उतार दिया। अब हम दोनों लगभग नंगे थे। ठंड लग रही थी।

मैंने उसे अपनी बांह में लिया। उसका गीला शरीर मेरे सीने से चिपक गया। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और उसकी जांघ से टकरा गया।

निधि ने महसूस किया। उसने शरमा कर सिर नीचे कर लिया और धीरे से बोली, “जीजू… मैं हमेशा से आपको पसंद करती थी। दीदी को बहुत अच्छा पति मिला है। पर मुझे भी कभी-कभी आपकी याद आती है…”

मैं हैरान रह गया। फिर मैंने उसके गाल पर किस किया। उसने आँखें बंद कर लीं। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। पहले वो थोड़ी हिचकिचाई, फिर धीरे-धीरे किस करने लगी।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला। उसके बड़े-बड़े गोरे दूध बाहर आ गए। मैंने एक दूध मुंह में लिया और चूसने लगा। निधि “आह्ह्ह…” करके सिसकने लगी। मैं दूसरे दूध को हाथ से दबा रहा था और निप्पल को उंगली से घुमा रहा था।

फिर मैंने उसे चारपाई पर लिटा दिया। उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। चूत पहले से ही गीली हो रही थी। मैंने उसके पैर फैलाए और चूत पर किस किया। फिर जीभ से चाटने लगा।

निधि ने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर से दबा दिया। “जीजू… ये क्या कर रहे हो… आह्ह्ह… मम्मा…”

मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाल दी। वो पहली बार किसी के मुंह से चूत चटवाई जा रही थी। उसका रस मेरी जीभ पर आ रहा था। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं। चूत बहुत टाइट थी।

निधि बोली, “जीजू… धीरे… मैं… पहली बार…”

मैं समझ गया कि वो वर्जिन है।

मैं उठा और अपनी जींस उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। निधि ने डरते हुए उसे हाथ में लिया।

“इतना बड़ा…” वो फुसफुसाई।

मैंने कहा, “डर मत। धीरे-धीरे डालूंगा।”

मैंने लंड उसकी चूत के होल पर रखा और धीरे से दबाया। सिर अंदर गया। निधि ने दर्द से आँखें बंद कर लीं। “हाय… जीजू… दर्द हो रहा है…”

मैं रुका रहा। उसके दूध चूसता रहा। दो मिनट बाद जब वो थोड़ी रिलैक्स हुई तो मैंने एक और झटका दिया। आधा लंड अंदर चला गया।

“आह्ह्ह्ह… मर गई…” वो चीख पड़ी।

मैंने फिर उसके दूध चूसते हुए धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुस गया। खून की कुछ बूंदें निकलीं।

निधि की आँखों में आंसू थे लेकिन वो बोली, “रुकना मत जीजू… अब अच्छा लग रहा है…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। चारपाई कड़कड़ाने लगी। निधि नीचे से गांड उछालने लगी। “जीजू… और जोर से… हाँ… चोदो मुझे… आह्ह्ह आह्ह्ह…”

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और जोर-जोर से चोदने लगा। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चमक रहा था।

10-12 मिनट बाद निधि का शरीर काँपने लगा। “जीजू… कुछ हो रहा है… आह्ह्ह्ह… मैं झड़ रही हूँ…”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया और उसकी चूत के अंदर ही गरम पानी छोड़ दिया।

हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे पर लेट गए।

निधि ने मेरे गाल पर किस किया और बोली, “ये हमारा राज रहेगा ना जीजू? दीदी को कभी पता नहीं चलेगा।”

मैंने कहा, “हाँ बेबी। लेकिन आज रात तो अभी खत्म नहीं हुई…”

बारिश रुक चुकी थी। हमने कपड़े पहने और ट्रैक्टर से घर लौट आए।

घर पहुंचकर निधि ने मेरे कान में फुसफुसाया, “कल फिर चलेंगे ना जीजू…?”

घर में खुलकर चुदाई

सुबह 8 बजे की बात है। अंजलि अभी भी मायके में थी। घर पर सिर्फ मैं और निधि अकेले।

रात को लौटने के बाद हम अलग-अलग कमरों में चले गए थे, लेकिन सुबह निधि ने नहा-धोकर हल्की सी नाइट ड्रेस पहन रखी थी। वो ड्रेस इतनी पतली थी कि उसके दूध और निप्पल साफ दिख रहे थे।

मैं किचन में चाय बना रहा था। निधि पीछे से आकर मेरी कमर में हाथ डालकर चिपक गई।

“जीजू… रात को नींद नहीं आई। बार-बार आपकी याद आ रही थी…” वो फुसफुसाई।

मैंने चाय का कप रखा और उसे अपनी तरफ घुमाया। उसने खुद ऊपर उठकर मेरे होंठों पर किस कर दिया। अब वो पहले जैसी शर्मा नहीं रही थी।

“निधि… दिन का वक्त है। कोई आ सकता है।” मैंने कहा।

वो मुस्कुराई और बोली, “दरवाजा बंद कर लो ना… आज घर में खुलकर चोदो मुझे।”

मैंने तुरंत बाहर का दरवाजा बंद किया और उसे अपनी बाहों में उठाकर सीधे मेरे बेडरूम में ले गया। बेड पर लिटाते ही मैंने उसकी नाइट ड्रेस ऊपर खींच दी। अंदर कुछ नहीं पहना था। उसकी चूत पहले से ही गीली थी।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी। मैंने उसके दोनों दूध हाथों में लेकर जोर-जोर से दबाए और एक के बाद एक चूसने लगा। निधि जोर-जोर से सिसक रही थी।

“जीजू… और जोर से चूसो… आह्ह्ह…”

फिर मैंने उठकर अपना लंड उसके मुंह के पास ले गया।

“चूसो इसे।” मैंने कहा।

निधि ने पहली बार लंड मुंह में लिया। पहले तो अजीब सा लगा, लेकिन 2 मिनट में वो अच्छे से चूसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड आगे-पीछे किया।

“बहुत अच्छा चूस रही है साली…” मैं बोला।

उसके मुंह से लार टपक रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और उसके पैर चौड़े करके लंड चूत पर रख दिया। एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह्ह… जीजूuuu!” निधि चीख पड़ी।

इस बार दर्द कम था। वो खुद नीचे से गांड उछालने लगी। मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और जोर-जोर से चोदने लगा। बेड जोर-जोर से कड़कड़ाने लगा।

“मजा आ रहा है ना साली?” “हाँ जीजू… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो आज… आह्ह्ह आह्ह्ह!”

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। निधि के दूध उछल-उछल रहे थे। मैं एक हाथ से उसके बाल पकड़कर खींचता और दूसरे हाथ से उसके गले पर हल्का सा दबाव देता। वो और भी गीली हो रही थी।

10 मिनट बाद मैंने उसे उठाया और doggy position में कर दिया। उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने एक बार उसकी चूत में लंड घुसाया और जोर-जोर से चोदने लगा।

“हाँ… जीजू… ऐसे ही… गांड मारो मेरी… आह्ह्ह!”

मैंने उसके बाल पकड़कर पीछे की तरफ खींचे और जोर-जोर से चोदता रहा। निधि का मुंह खुला था, आँखें बंद, लगातार आहें भर रही थी।

फिर मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया (cowgirl)। अब वो खुद ऊपर-नीचे होने लगी। उसके दूध मेरे मुंह के पास आ रहे थे, मैं चूसता रहा और वो मेरे लंड पर उछलती रही।

“जीजू… मेरा हो गया… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह्ह!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से दबाया। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया और उसकी चूत के अंदर ही गरम-गरम पानी छोड़ दिया।

हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से लिपट गए।

निधि मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू… घर में चुदाई करने का मजा ही कुछ और है। अब तो मुझे बार-बार चाहिए।”

मैंने उसके गाल पर किस किया और कहा, “अंजलि आज शाम तक आ जाएगी। तब तक हम जितना मर्जी चोद सकते हैं।”

निधि ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “तो फिर अभी एक और राउंड…?”

मैंने उसे फिर से पलटा और इस बार धीरे-धीरे, लंबे समय तक चोदा। इस बार वो खुद मुझे किस करती रही और गंदी-गंदी बातें बोलती रही।

दोपहर तक हमने तीन बार चुदाई की — बेड पर, फिर बाथरूम में शावर के नीचे, और आखिरी बार सोफे पर।

हर बार निधि पहले से ज्यादा खुलकर चुदवा रही थी।

शाम को अंजलि के आने से पहले हमने सारा कमरा साफ किया, शीट बदल दी और निधि ने फिर से अपनी नाइट ड्रेस पहन ली।

जब अंजलि आई तो निधि ने नॉर्मल व्यवहार किया, लेकिन मेरी तरफ देखते ही उसकी आँखें चमक जाती थीं।

अंजलि के बिस्तर पर चुदाई (रिस्की नाइट)

अंजलि शाम को लौट आई। निधि ने बिल्कुल नॉर्मल व्यवहार किया। खाना खाया, बातें कीं, हँसी-मजाक किया। लेकिन जब भी अंजलि मेरी तरफ देखती, निधि मेरी आँखों में देखकर शरारत से मुस्कुरा देती।

रात के 11 बजे अंजलि थकान के मारे मास्टर बेडरूम में चली गई और सो गई। निधि अपने कमरे में गई। मैं भी अपने कमरे में लेट गया।

देर रात के करीब 1 बजे मेरा फोन वाइब्रेट हुआ।

निधि का मैसेज: “दीदी सो गई है क्या? मैं आऊँ?”

मैंने तुरंत रिप्लाई किया: “हाँ, लेकिन सावधानी से।”

2 मिनट बाद निधि चुपके से मेरे कमरे में घुस आई। सिर्फ एक पतली नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। अंदर कुछ नहीं। उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे ऊपर चढ़ गई।

“जीजू… आज मुझे अंजलि दीदी के बिस्तर पर चोदो।” उसने कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैं चौंक गया। “पागल है क्या? अगर दीदी उठ गई तो?”

निधि ने मेरे लंड को हाथ में लेकर दबाते हुए बोली, “उसका डर ही तो मजा है… चलो ना जीजू।”

मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। मैं उठा, निधि का हाथ पकड़ा और दोनों चुपके से मास्टर बेडरूम की तरफ गए। अंजलि अंदर सो रही थी। उसकी साँसें धीमी आ रही थीं।

हम दोनों चुपचाप अंदर घुस गए। निधि ने अंजलि की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

मैंने उसे अंजलि के बिस्तर पर ही लिटा दिया। निधि की नाइट ड्रेस ऊपर खींच दी। उसकी चूत पहले से ही गीली टपक रही थी। मैंने तुरंत अपना लंड निकाला और बिना किसी तैयारी के एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह…” निधि के मुंह से आवाज निकली। मैंने तुरंत उसका मुंह अपने हाथ से दबा दिया।

“चुप… दीदी सो रही है!” मैंने कान में फुसफुसाया।

निधि की आँखें चमक रही थीं। वो डर और एक्साइटमेंट दोनों से भीग रही थी। मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर झटके के साथ बिस्तर हल्का सा हिल रहा था। अंजलि बस 3 फीट की दूरी पर सो रही थी।

निधि ने मेरे कान में फुसफुसाया, “जीजू… दीदी के बिस्तर पर मुझे चोद रहे हो… मुझे अच्छा लग रहा है…”

मैं और जोर से चोदने लगा। निधि के दूध उछल रहे थे। मैंने एक दूध मुंह में लिया और चूसते हुए चोदता रहा। निधि को जोर से चीखना था लेकिन वो अपने होठों को काट रही थी।

5 मिनट बाद मैंने उसे उठाया और doggy position में कर दिया। अब उसकी गांड मेरे सामने थी और सामने अंजलि सो रही थी। मैंने निधि के बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से चोदने लगा।

“श्श्श… चुप रह साली…” मैं फुसफुसाया।

निधि का मुंह खुला था, आँखें बंद, लेकिन वो बार-बार “आह्ह्ह… जीजू…” बोलने लगी। मैंने फिर उसका मुंह दबा दिया।

अचानक अंजलि करवट बदली। हम दोनों ठिठक गए। 10 सेकंड तक साँस भी नहीं ली। अंजलि फिर शांत हो गई।

जैसे ही खतरा टला, निधि ने खुद पीछे की तरफ धक्का दिया और बोली, “और जोर से… मुझे पकड़े जाने का डर अच्छा लग रहा है…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। निधि का शरीर काँप रहा था। 2 मिनट बाद उसने जोर से मेरी बाजू दबाई और फुसफुसाई, “जीजू… मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह्ह!”

उसकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया और उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म पानी अंदर भर दिया।

हम दोनों 1 मिनट तक उसी पोजीशन में रुके रहे। फिर मैंने लंड बाहर निकाला। निधि की चूत से मेरा पानी टपक रहा था।

अचानक अंजलि ने बड़बड़ाते हुए कहा, “पानी… पानी दो…”

हम दोनों घबरा गए। निधि तुरंत बिस्तर से उतरी और कमरे के कोने में छुप गई। मैंने जल्दी से लंड अंदर किया और पानी का गिलास लेकर अंजलि के पास गया।

अंजलि आधी नींद में उठी, पानी पिया और फिर लेट गई।

मैं इशारे से निधि को बाहर आने का संकेत किया। दोनों चुपके से कमरे से बाहर निकल आए।

मेरे कमरे में आकर निधि मेरे गले लग गई। “जीजू… आज का मजा ही कुछ और था। दीदी के बिस्तर पर चुदवाई… मैं अभी भी भीग रही हूँ।”

मैंने उसे चूम लिया और बोला, “कल फिर से करना है?”

निधि ने शैतानी से कहा, “हाँ… लेकिन इस बार दीदी के सामने ही करने का प्लान सोचते हैं।”

दिन में खुलकर चुदाई – किचन, बालकनी और अंजलि के बिस्तर पर

अगले दिन सुबह 9 बजे अंजलि ने कहा, “मुझे बाजार जाना है, कुछ सामान लाने हैं। दोपहर तक आ जाऊँगी।”

निधि ने तुरंत मेरी तरफ देखा और आँख मार दी। अंजलि के जाने के 10 मिनट बाद ही निधि मेरे पास आ गई।

“जीजू… आज पूरा दिन घर हमारा है। खुलकर चोदोगे ना मुझे?”

मैंने उसे दीवार से लगाकर जोर से किस किया। “आज तो तेरी चूत फाड़ दूंगा साली।”

पहला राउंड – किचन में

हम किचन में चाय बना रहे थे। निधि ने अचानक मेरी पैंट का जिप खोल दिया और लंड बाहर निकाल लिया।

“यहाँ?” मैंने कहा।

“हाँ… यहाँ पर।”

उसने मुझे किचन काउंटर पर बैठा दिया और खुद घुटनों के बल बैठकर लंड मुंह में ले लिया। आज वो बहुत अच्छे से चूस रही थी। लार टपक रही थी। 5 मिनट बाद मैंने उसे उठाया, उसकी नाइट ड्रेस ऊपर खींची और काउंटर पर ही लिटा दिया।

उसकी टाँगें फैलाईं और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह… जीजूuuu!” निधि जोर से चीख पड़ी। आज कोई डर नहीं था।

मैं खड़े होकर उसे जोर-जोर से चोदने लगा। किचन काउंटर हिल रहा था। बर्तन खनखना रहे थे। निधि के दूध उछल रहे थे।

“मजा आ रहा है ना साली?” “हाँ जीजू… और जोर से… किचन में ही चोद दो मुझे… आह्ह्ह!”

10 मिनट बाद मैंने उसकी चूत में झड़ दिया। गर्म पानी भर दिया। निधि मुस्कुराते हुए बोली, “अभी तो शुरूआत है… चलो बालकनी में।”

दूसरा राउंड – बालकनी में

हम बालकनी में गए। दिन का वक्त था। नीचे सड़क पर लोग आ-जा रहे थे। निधि ने बालकनी की रेलिंग पकड़ ली और झुक गई।

“यहाँ से चोदो मुझे जीजू… कोई देख ले तो और मजा आएगा।”

मैं उसके पीछे खड़ा हुआ। उसकी गांड को थोड़ा फैलाया और लंड चूत में घुसा दिया। अब मैं जोर-जोर से चोद रहा था। निधि की चीखें बाहर जा रही थीं।

“आह्ह्ह… जीजू… और जोर… लोग देख रहे होंगे… आह्ह्ह!”

मैंने उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और रफ्तार बढ़ा दी। नीचे से एक आदमी ने ऊपर देखा, लेकिन हम नहीं रुके। निधि का शरीर काँप रहा था।

“मैं झड़ रही हूँ जीजू… आह्ह्ह्ह!”

उसकी चूत ने फिर से मेरे लंड को निचोड़ा। मैंने भी दूसरी बार अंदर झड़ दिया।

तीसरा राउंड – अंजलि के बिस्तर पर (सबसे वाइल्ड)

हम पसीने से तर होकर अंदर आए। निधि ने सीधा अंजलि के बेडरूम में खींच लिया।

“अंजलि दीदी के बिस्तर पर फिर से चोदो मुझे… आज खुलकर।”

उसने खुद बिस्तर पर लेटकर टाँगें फैला दीं। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। इस बार धीरे-धीरे शुरू किया।

निधि बोली, “नहीं जीजू… आज जोर-जोर से। दीदी का बिस्तर गंदा कर दो मेरे रस से।”

मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर दबा दिए और जोर-जोर से चोदने लगा। बिस्तर की चादर उखड़ रही थी। निधि चिल्ला-चिल्ला कर चोदवा रही थी।

“हाँ… जीजू… दीदी के बिस्तर पर मुझे चोद रहे हो… मुझे अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह आह्ह्ह!”

फिर मैंने उसे घुमाया। Doggy position में किया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे हाथ से उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदता रहा।

“और मारो जीजू… थप्पड़ मारो… आह्ह्ह!”

उसके गांड पर लाल निशान पड़ गए। वो और भी गीली हो गई।

आखिरी बार मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया (cowgirl)। वो खुद ऊपर-नीचे होने लगी। उसके दूध मेरे मुंह में थे। मैं चूसता रहा और वो मेरे लंड पर उछलती रही।

“जीजू… मैं फिर झड़ रही हूँ… आह्हhhhh!”

इस बार भी मैंने अंदर ही झड़ दिया। तीसरी बार।

हम दोनों थककर अंजलि के बिस्तर पर ही लेट गए। निधि मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “आज का दिन सबसे अच्छा था जीजू… तीन जगह चुदवाई… किचन, बालकनी और दीदी के बिस्तर पर।”

मैंने उसे चूम लिया। “अंजलि दोपहर तक आ जाएगी। तब तक एक बार और कर लें?”

निधि हँस पड़ी, “हाँ… लेकिन इस बार शावर में।”

शावर में पकड़ी गई चुदाई और अंजलि का शक

दोपहर 12:30 बजे की बात है।

हम दोनों अभी भी नंगे थे। सुबह की तीनों चुदाइयों के बाद निधि ने कहा, “जीजू, चलो शावर में नहा लेते हैं… आखिरी बार आज।”

मैंने हाँ कर दिया। दोनों बाथरूम में गए। पानी गरम किया और अंदर घुस गए।

निधि ने मुझे दीवार से लगाकर किस किया। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। मैंने उसे उठाया, उसकी टाँगें मेरी कमर में लपेट दीं और सीधे खड़े होकर लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह्ह… जीजू… शावर में चोदना कितना अच्छा लगता है…” निधि जोर से चिल्लाई।

पानी की आवाज में उसकी चीखें और भी ज्यादा लग रही थीं। मैं जोर-जोर से उसे चोद रहा था। उसकी पीठ दीवार से टकरा रही थी। पानी उसके दूध पर गिर रहा था, मैं उनको चूसता रहा और चोदता रहा।

निधि के बाल भीग गए थे। वो मेरे गले में हाथ डालकर चिपकी हुई थी। “और जोर से… आह्ह्ह… मुझे फिर झड़ना है जीजू…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। निधि की चीखें अब और तेज हो गई थीं।

“हाँ… जीजू… चोदो… दीदी के घर में दीदी की बहन को चोद रहे हो… आह्हhhhh!”

मैं भी बहुत एक्साइटेड था। मैंने उसे और जोर से दबाया और चोदने लगा।

अचानक…

क्लिक! बाथरूम का दरवाजा खुला।

हम दोनों ने एक साथ सिर घुमाया।

अंजलि खड़ी थी।

उसके हाथ में शॉपिंग बैग था। मुंह खुला हुआ था। आँखें फटी हुई। वो हमें देख रही थी — मैं निधि को दीवार से लगाकर चोद रहा था, पानी बह रहा था, निधि के मुंह से आवाजें निकल रही थीं।

3 सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।

फिर अंजलि का बैग उसके हाथ से गिर गया।

“ये… ये क्या हो रहा है?!” उसकी आवाज काँप रही थी।

निधि ने मुझे नहीं छोड़ा। वो अभी भी मेरे लंड पर टिकी हुई थी। उसने सीधा अंजलि की तरफ देखा और बोली, “दीदी… माफ करना… लेकिन मुझे जीजू चाहिए था।”

अंजलि का चेहरा लाल हो गया। गुस्सा, सदमा और कुछ और भाव उसके चेहरे पर साफ दिख रहे थे।

“तुम दोनों… मेरे बिस्तर पर… किचन में… और अब शावर में?!” उसकी आवाज गुस्से से काँप रही थी।

मैंने लंड बाहर निकाला। निधि ने मुझे छोड़ दिया। हम दोनों नंगे खड़े थे। पानी अभी भी बह रहा था।

अंजलि ने निधि की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ। उसकी नजर मेरे खड़े लंड पर पड़ी जो अभी भी निधि के रस से चमक रहा था।

कुछ सेकंड के लिए वो चुप रही।

फिर उसने धीरे से कहा, “बाहर आओ… दोनों।”

हमने तौलिए लपेटे और बाहर आए। अंजलि लिविंग रूम में खड़ी थी।

वो निधि से बोली, “तुम्हें शर्म नहीं आती? मेरे पति के साथ… मेरे घर में?”

निधि ने सिर नीचे किए बिना जवाब दिया, “दीदी… मैंने खुद किया। जीजू ने मुझे फोर्स नहीं किया। मुझे पसंद था।”

अंजलि ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन साथ ही कुछ और भी था — शायद झुंझलाहट, शायद… कुछ और।

वो बोली, “तुम दोनों मेरे बिस्तर पर सोए थे… मैंने सुबह चादर देखी थी। मुझे शक हो रहा था।”

फिर वो चुप हो गई।

कुछ देर बाद अंजलि ने गहरी साँस ली और बोली, “अभी के लिए… कुछ मत बोलो। मुझे सोचने दो।”

वो अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

निधि मेरे पास आई और कान में फुसफुसाई, “जीजू… दीदी को शक था। अब क्या होगा?”

मैंने उसे गले लगाया। “पता नहीं… लेकिन लगता है अभी खत्म नहीं हुआ।”

अंजलि का सामना और थ्रीसम का प्रस्ताव

रात के 11 बजे थे।

अंजलि अभी तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थी। निधि और मैं लिविंग रूम में चुपचाप बैठे थे। निधि थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में शरारत भी थी।

अचानक अंजलि का कमरे का दरवाजा खुला।

वो सीधा हमारे पास आई और निधि के सामने खड़ी हो गई।

“निधि… मेरे साथ आ।” उसकी आवाज शांत लेकिन गंभीर थी।

निधि उठी और अंजलि के साथ उसके कमरे में चली गई। मैं बाहर ही बैठा रहा, लेकिन दरवाजा थोड़ा खुला था, इसलिए सब सुनाई दे रहा था।

अंदर अंजलि ने निधि से सीधा सवाल किया:

“सब कुछ सच-सच बता। कब से चल रहा है ये? और कितनी बार किया है?”

निधि ने बिना घबराए जवाब दिया, “दीदी… पहली बार खेत के झोपड़े में हुआ था। बारिश में भीग गए थे… फिर वहीं चुदाई हो गई। उसके बाद घर में — किचन में, बालकनी में, अंजलि दीदी के बिस्तर पर, और आज शावर में।”

अंजलि चुप रही।

निधि आगे बोली, “दीदी… मैं झूठ नहीं बोल रही। मुझे जीजू पसंद थे। और जब पहली बार हुआ तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उसके बाद रुक नहीं पाई।”

अंजलि की आवाज काँप रही थी, “मेरे बिस्तर पर…? मेरे शावर में…? और तू मुझे सब बता रही है?”

निधि ने आगे बढ़कर अंजलि का हाथ पकड़ लिया।

“दीदी… गुस्सा मत करो। मैं सच बता रही हूँ। जीजू बहुत अच्छे से चोदते हैं। पहले दर्द हुआ था… लेकिन अब तो मुझे हर रोज चाहिए। आज सुबह किचन में काउंटर पर चोदा… फिर बालकनी में खड़े होकर… लोग नीचे देख रहे थे… फिर तुम्हारे बिस्तर पर तीन बार… और शावर में दीवार से लगाकर…”

अंजलि का चेहरा लाल हो रहा था। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी।

निधि ने और आगे बढ़ाया, “दीदी… अगर तुम चाहो तो हम तीनों साथ कर सकते हैं। मैंने देखा है कि जब तुम जीजू के साथ चुदाई करती हो तो कितना मजा लेती हो। मैं भी वैसा ही मजा लेना चाहती हूँ… लेकिन तुम्हारे साथ।”

अंजलि ने अचानक निधि का हाथ छोड़ दिया।

“तू पागल हो गई है क्या? मैं अपने पति के साथ… अपनी बहन के साथ…? ये सब गंदगी है!”

निधि मुस्कुराई और बोली, “दीदी… गंदगी नहीं। मजा है। आज जब तुमने हमें शावर में देखा था… तुम्हारी आँखें कुछ और कह रही थीं। तुम गुस्से में थीं, लेकिन साथ ही… कुछ और भी।”

अंजलि चुप हो गई।

निधि ने आगे कहा, “कल रात को सोच लो दीदी। अगर तुम तैयार हो तो हम तीनों मिलकर करेंगे। अगर नहीं… तो मैं कल ही शहर चली जाऊँगी। लेकिन एक बात याद रखना… जीजू मुझे बहुत अच्छे से चोदते हैं। और अगर तुम भी ट्राई करोगी ना… तो पछताओगी नहीं।”

अंजलि ने निधि को देखा। उसकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन साथ ही कन्फ्यूजन और कुछ और भाव भी थे।

“बाहर जा… मुझे अकेले रहने दे।”

निधि बाहर आ गई।

वो मेरे पास आई और कान में फुसफुसाई, “दीदी को सब बता दिया… अब गेंद उनके कोर्ट में है।”

मैंने पूछा, “क्या लगता है? वो मान जाएगी?”

निधि ने शैतानी से मुस्कुराते हुए कहा, “दीदी की आँखें देखी थीं ना… जब मैं शावर वाली बात बता रही थी। वो एक्साइटेड हो रही थी। बस थोड़ा और धक्का चाहिए।”

मास्टर बेडरूम में

अंजलि बिस्तर पर बैठ गई। निधि और मैं बिस्तर के सामने खड़े थे।

अंजलि ने कहा, “शुरू करो… दोनों।”

निधि ने पहले मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। उसने घुटनों के बल बैठकर लंड मुंह में ले लिया। अंजलि चुपचाप देख रही थी।

निधि जोर-जोर से चूस रही थी। लार उसके गले से नीचे बह रही थी।

अंजलि की साँस तेज हो रही थी।

5 मिनट बाद निधि उठी और खुद की नाइट ड्रेस उतार दी। वो पूरी तरह नंगी हो गई। फिर उसने मुझे भी नंगा कर दिया।

अंजलि ने कहा, “अब… चोदो उसे।”

निधि बिस्तर पर लेट गई और टाँगें फैला दीं। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। एक झटके में लंड अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह… जीजू…” निधि चीख पड़ी।

मैं जोर-जोर से चोदने लगा। निधि के दूध उछल रहे थे। अंजलि बिस्तर के पास बैठी हुई सब कुछ देख रही थी। उसकी आँखें चौड़ी थीं।

निधि अंजलि की तरफ देखकर बोली, “दीदी… देखो ना… जीजू मुझे कितने जोर से चोद रहे हैं… आह्ह्ह…”

अंजलि कुछ नहीं बोली, लेकिन उसका हाथ धीरे-धीरे उसकी अपनी जांघ पर चला गया।

10 मिनट बाद निधि ने कहा, “दीदी… अब तुम भी आ जाओ ना…”

अंजलि ने पहले मना किया, फिर धीरे-धीरे बिस्तर पर आ गई।

निधि ने अंजलि का हाथ पकड़कर अपने दूध पर रख दिया। “छुओ… देखो कितने नरम हैं।”

अंजलि ने पहली बार निधि के दूध को छुआ। निधि सिसक उठी।

फिर निधि ने अंजलि को मेरे पास खींच लिया।

अंजलि ने मेरे लंड को हाथ में लिया। वो काँप रही थी।

निधि बोली, “दीदी… चूसो इसे।”

अंजलि ने झिझकते हुए लंड मुंह में लिया। निधि उसके बालों को सहला रही थी।

“बहुत अच्छा चूस रही हो दीदी…” निधि फुसफुसाई।

अंजलि ने 2 मिनट बाद लंड बाहर निकाला और बोली, “अब… मुझे भी चोदो।”

मैंने अंजलि को लिटाया। उसकी सलवार उतारी। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। मैंने लंड अंदर डाला।

अंजलि ने आँखें बंद कर लीं। “आह्ह्ह… राहुल…”

निधि अंजलि के पास लेट गई और उसके दूध चूसने लगी।

मैं अंजलि को चोद रहा था और निधि उसके दूध चूस रही थी।

अंजलि की साँसें बहुत तेज हो गई थीं।

निधि ने अंजलि के कान में कहा, “मजा आ रहा है ना दीदी? अब समझ आई कि मुझे क्यों इतना अच्छा लगता था…”

अंजलि ने सिर्फ सिर हिलाया।

दोनों बहनों का वाइल्ड थ्रीसम

अंजलि ने कहा, “अब… मैं भी शामिल होना चाहती हूँ।”

निधि की आँखें चमक उठीं। उसने अंजलि को अपनी तरफ खींचा और बिना कुछ बोले उसके होंठों पर किस कर दिया।

अंजलि पहले तो चौंकी, लेकिन फिर उसने भी निधि को किस करना शुरू कर दिया। दोनों बहनें एक-दूसरे को गहरे किस करने लगीं।

मैं हैरान और एक्साइटेड दोनों था।

निधि ने अंजलि की नाइट ड्रेस उतार दी। अब अंजलि भी पूरी तरह नंगी थी। निधि ने अंजलि के दूध मुंह में लिया और चूसने लगी। अंजलि सिसक उठी।

“दीदी… तुम्हारे दूध कितने नरम हैं…” निधि फुसफुसाई।

फिर निधि ने मुझे देखा और बोली, “जीजू… आओ। आज दोनों बहनें तुम्हें चोदवाएंगी।”


पहला राउंड – दोनों बहनों का मुंह

निधि और अंजलि दोनों घुटनों के बल बैठ गईं। निधि ने मेरा लंड पकड़ा और अंजलि के मुंह में डाल दिया।

अंजलि ने लंड चूसना शुरू किया। निधि उसके बाल सहला रही थी।

“बहुत अच्छा चूस रही हो दीदी…” निधि बोली।

फिर निधि ने भी लंड मुंह में लिया। अब दोनों बहनें बारी-बारी से और साथ में मेरा लंड चूस रही थीं। उनकी जीभें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। लार टपक रही थी।

मैंने अंजलि के बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड आगे-पीछे किया।

“आज दोनों बहनें एक साथ चूस रही हैं…” मैंने कहा।

निधि मुस्कुराई और बोली, “हाँ जीजू… आज तुम्हारी दो बीवियाँ हैं।”


दूसरा राउंड – अंजलि को चोदते हुए निधि

मैंने अंजलि को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

अंजलि “आह्ह्ह…” करके सिसक पड़ी।

निधि अंजलि के सिरहाने बैठ गई। उसने अंजलि के दूध चूसने शुरू कर दिए।

मैं अंजलि को जोर-जोर से चोद रहा था। निधि अंजलि के मुंह में किस कर रही थी।

“मजा आ रहा है ना दीदी?” निधि पूछ रही थी। “हाँ… आह्ह्ह… बहुत…” अंजलि कराह रही थी।

निधि ने अंजलि की टाँगें और फैलाईं ताकि मैं और गहरा चोद सकूँ।

“दीदी… जीजू का लंड अंदर तक जा रहा है ना? कैसा लग रहा है?”

अंजलि जवाब नहीं दे पा रही थी। सिर्फ आहें भर रही थी।


तीसरा राउंड – निधि का फेस सिटिंग

मैं लेट गया। निधि मेरे चेहरे पर बैठ गई। उसकी चूत मेरे मुंह पर थी। मैं उसकी चूत चाटने लगा।

दूसरी तरफ अंजलि मेरे लंड पर बैठ गई और चोदवाने लगी।

अब दोनों बहनें मेरे ऊपर थीं। एक मेरे मुंह पर चूत रगड़ रही थी, दूसरी मेरे लंड पर उछल रही थी।

निधि जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “जीजू… मेरी चूत चाटो… आह्ह्ह!”

अंजलि भी तेजी से उछल रही थी, “राहुल… और जोर से… आह्ह्ह!”

दोनों बहनें एक-दूसरे को किस कर रही थीं।


आखिरी राउंड – दोनों को एक साथ

मैं उठा और निधि को doggy position में कर दिया। उसके पीछे खड़ा होकर चोदने लगा।

अंजलि निधि के सामने लेट गई। निधि अंजलि की चूत चाटने लगी।

अब सीन कुछ ऐसा था — मैं निधि को पीछे से चोद रहा था, निधि अंजलि की चूत चाट रही थी।

निधि की चीखें और अंजलि की सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं।

“दीदी… मैं झड़ने वाली हूँ…” निधि चीख पड़ी।

उसका शरीर काँप उठा। उसी वक्त मैंने भी निधि की चूत में झड़ दिया।

अंजलि भी निधि के मुंह में झड़ गई।


हम तीनों थककर बिस्तर पर लेट गए।

निधि अंजलि के सीने पर सिर रखकर बोली, “कैसा लगा दीदी?”

अंजलि ने सिर सहलाते हुए कहा, “बहुत… गंदा… लेकिन बहुत अच्छा भी लगा।”

निधि हँस पड़ी, “अब तो ये रोज का प्रोग्राम हो जाएगा।”

अंजलि ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “अभी के लिए… सो जाओ। कल सुबह बात करेंगे।”

अंजलि का गिल्ट और निधि का मनाना

सुबह 7 बजे की बात है।

तीनों नंगे एक ही बिस्तर पर सोए थे। अंजलि सबसे पहले उठी। उसने चादर ओढ़ी और कमरे से बाहर चली गई।

10 मिनट बाद जब निधि और मैं उठे तो अंजलि लिविंग रूम में चाय बना रही थी। उसका चेहरा गंभीर था।

हम दोनों उसके पास गए।

अंजलि ने बिना कुछ बोले चाय दी। फिर उसने गहरी साँस ली और कहा:

“रात जो हुआ… वो आखिरी बार था।”

निधि चौंक गई। “दीदी? क्यों?”

अंजलि ने सिर झुकाकर कहा, “मुझे गिल्ट हो रहा है। तुम मेरी छोटी बहन हो निधि… और मैंने अपने पति के साथ… तुम्हारे साथ… ये सब होने दिया। ये गलत है।”

निधि ने अंजलि के पास जाकर बैठते हुए कहा, “दीदी… गलत क्यों? हम तीनों ने मजा लिया। तुमने भी तो बहुत चीख-चीख कर चुदवाई थी।”

अंजलि ने गुस्से से कहा, “मत बोल ऐसे! मुझे शर्म आ रही है।”

निधि ने अंजलि का हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली, “दीदी… शर्म की क्या बात है? तुम्हें अच्छा लगा था ना? जब मैं तुम्हारे दूध चूस रही थी और जीजू तुम्हें चोद रहे थे… तुम्हें बहुत अच्छा लग रहा था।”

अंजलि चुप रही।

निधि ने आगे बढ़ते हुए कहा, “दीदी… मैं शहर चली जाऊँगी तो क्या तुम भूल जाओगी? रात को अकेले लेटते वक्त याद नहीं आएगा कि कैसे दोनों बहनें एक साथ चुदवाई थीं? कैसे जीजू ने हमें बारी-बारी से चोदा था?”

अंजलि का चेहरा लाल हो रहा था।

निधि ने अंजलि के कान के पास आकर फुसफुसाया, “दीदी… कल रात तुमने खुद कहा था कि बहुत अच्छा लगा। अब अचानक गिल्ट क्यों? हम तीनों को मजा आ रहा था… तो क्या गलत है?”

अंजलि ने निधि को दूर धकेलने की कोशिश की, “निधि… बस कर। मुझे और कुछ नहीं सुनना।”

लेकिन निधि ने हार नहीं मानी। उसने अंजलि की चादर खींच ली। अंजलि अभी भी नंगी थी। निधि ने अंजलि के दूध पर हाथ रख दिया और धीरे से दबाया।

“दीदी… देखो ना… तुम्हारे दूध अभी भी खड़े हो रहे हैं। कल रात जितना मजा लिया था, उतना ही अब भी चाहिए ना?”

अंजलि की साँस तेज हो गई। वो निधि का हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कमजोर कोशिश थी।

निधि ने अंजलि के होंठों पर किस किया। पहले अंजलि ने मना किया, लेकिन 10 सेकंड बाद वो भी निधि को किस करने लगी।

निधि ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “जीजू… आओ। दीदी अभी भी मनाना बाकी है।”

गिल्ट के साथ वाइल्ड थ्रीसम

निधि ने अंजलि को जोर से किस किया। अंजलि पहले तो पीछे हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन निधि ने उसके दूध दबाते हुए कहा, “दीदी… एक बार और। आखिरी बार। फिर मैं चली जाऊँगी।”

अंजलि की आँखों में आँसू थे। वो बोली, “ये गलत है निधि… बहुत गलत है…”

निधि ने उसके कान में फुसफुसाया, “फिर भी अच्छा लग रहा है ना? देखो… तुम्हारी चूत पहले से गीली हो रही है।”

अंजलि ने नीचे देखा। सच में उसकी चूत चमक रही थी।

निधि ने मुझे देखा और बोली, “जीजू… आओ। दीदी को मनाना है।”


बेडरूम में

हम तीनों फिर से मास्टर बेडरूम में चले गए।

निधि ने अंजलि को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगें फैला दीं। मैं अंजलि के ऊपर चढ़ गया। लंड उसकी चूत पर रखा।

अंजलि ने आँखें बंद कर लीं और बोली, “राहुल… ये आखिरी बार है… समझ गए?”

मैंने लंड अंदर घुसा दिया। अंजलि “आह्ह्ह…” करके सिसक पड़ी।

निधि अंजलि के सिरहाने बैठ गई और उसके दूध चूसने लगी।

मैं अंजलि को जोर-जोर से चोद रहा था। अंजलि के मुंह से बार-बार निकल रहा था, “ये गलत है… आह्ह्ह… बहुत गलत है… लेकिन… और जोर से चोदो…”

निधि मुस्कुराते हुए बोली, “देखा दीदी? तुम्हें भी अच्छा लग रहा है। गिल्ट में भी मजा आ रहा है ना?”

अंजलि ने निधि के बाल पकड़कर अपने दूध पर दबा दिया। “चूस… जोर से चूस… आह्ह्ह!”


अंजलि का वाइल्ड साइड

10 मिनट बाद अंजलि ने मुझे धक्का देकर ऊपर कर दिया। अब वो मेरे ऊपर बैठ गई।

उसने खुद मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और जोर-जोर से उछलने लगी।

“आह्ह्ह… राहुल… मुझे चोदो… आह्ह्ह!” उसकी आवाज पहले से ज्यादा तेज और गंदी थी।

निधि अंजलि के पीछे बैठ गई और उसके बाल खींचते हुए बोली, “दीदी… और जोर से उछलो। जीजू का लंड अंदर तक लो।”

अंजलि और तेजी से उछलने लगी। उसके दूध उछल रहे थे। निधि उन्हें हाथों से दबा रही थी।

अंजलि चिल्ला रही थी, “ये आखिरी बार है… आह्ह्ह… समझ गए दोनों? आखिरी बार… लेकिन आज मुझे पूरा चोदना… आह्हhhhh!”


दोनों बहनों का साथ

मैंने अंजलि को नीचे लिटाया और निधि को उसके मुंह पर बैठा दिया। अब निधि मेरे मुंह पर चूत रगड़ रही थी और मैं अंजलि को चोद रहा था।

अंजलि निधि की चूत चाट रही थी और बार-बार बोल रही थी, “ये गलत है… बहुत गलत है… लेकिन रुक नहीं पा रही… आह्ह्ह!”

निधि अंजलि के दूध निचोड़ते हुए बोली, “दीदी… आज तुम सबसे ज्यादा wild हो। गिल्ट में चुदवाई का मजा ही कुछ और है ना?”

अंजलि ने सिर्फ जोर से सिर हिलाया।

आखिर में अंजलि ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोली, “अंदर झाड़ो… आज अंदर ही झाड़ो… आहhhhh!”

मैंने अंजलि की चूत में झड़ दिया। उसी वक्त निधि भी अंजलि के मुंह में झड़ गई।


हम तीनों फिर से थककर लेट गए।

अंजलि साँस लेते हुए बोली, “ये… सच में आखिरी बार था।”

निधि ने उसके गाल पर किस किया और कहा, “देखते हैं दीदी… कल सुबह तक क्या कहती हो।”

अंजलि ने आँखें बंद कर लीं। लेकिन उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी।

अंजलि का aggressive थ्रीसम

सुबह 6:30 बजे की बात है।

सूरज अभी ठीक से नहीं निकला था। अंजलि सबसे पहले उठी। वो कुछ देर तक चुपचाप लेटी रही और दोनों को देखती रही।

फिर वो धीरे से उठी, निधि के बालों में हाथ फेरा और मेरे लंड को हाथ में ले लिया।

निधि आँखें खोलकर देखने लगी। अंजलि ने उसे चुप रहने का इशारा किया।

अंजलि ने मेरे कान में फुसफुसाया, “जागो… दोनों। आज मैं चोदूंगी।”


अंजलि का कंट्रोल

अंजलि ने सबसे पहले निधि को उठाया और उसे अपने नीचे लिटा दिया। फिर वो निधि के ऊपर चढ़ गई। दोनों बहनें एक-दूसरे के सामने नंगी थीं।

अंजलि ने निधि के दूध मुंह में लिया और जोर से चूसने लगी। निधि सिसक उठी।

“दीदी… आह्ह्ह…”

अंजलि ने निधि के बाल खींचते हुए कहा, “चुप। आज मैं बोलूंगी।”

फिर अंजलि ने मेरी तरफ देखा और बोली, “राहुल… आओ। निधि की चूत चाटो।”

मैं निधि के पैरों के बीच बैठ गया और उसकी चूत चाटने लगा। निधि जोर से कराह रही थी।

अंजलि निधि के दूध निचोड़ते हुए बोली, “देख रही है ना… जीजू तेरी चूत चाट रहे हैं। कैसा लग रहा है?”

निधि सिर हिलाते हुए बोली, “बहुत… आह्ह्ह…”


अंजलि का वाइल्ड साइड

अंजलि ने मुझे उठाया और मेरे लंड को पकड़कर निधि की चूत पर रख दिया।

“अब चोदो इसे… लेकिन धीरे-धीरे। मैं देखूंगी।”

मैं निधि को धीरे-धीरे चोदने लगा। अंजलि पास बैठी हुई सब कुछ देख रही थी।

5 मिनट बाद अंजलि ने कहा, “अब रुक जाओ।”

मैं रुक गया। अंजलि ने खुद मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाल लिया और जोर से बैठ गई।

“आह्ह्ह्ह!” अंजलि चीख पड़ी।

अब वो खुद तेजी से उछलने लगी। उसके बाल उड़ रहे थे। वो निधि के दूध चूस रही थी और मेरे लंड पर उछल रही थी।

“आज मैं चोदूंगी… समझ गए दोनों?” अंजलि साँस फूलते हुए बोली। “निधि… आज तू मेरे नीचे रहेगी। और राहुल… तू मुझे चोदेगा जब तक मैं ना कहूँ।”

निधि हैरान होकर देख रही थी। अंजलि आज बहुत aggressive थी।


दोनों बहनों पर कंट्रोल

अंजलि ने निधि को doggy position में कर दिया। फिर उसने मुझे निधि के पीछे खड़ा किया।

“चोदो इसे… जोर से।”

मैं निधि को जोर-जोर से चोदने लगा। अंजलि निधि के बाल खींच रही थी और बोली, “बोल… जीजू को बोल कि और जोर से चोदे।”

निधि चीखते हुए बोली, “जीजू… और जोर से… आह्ह्ह!”

अंजलि मुस्कुरा रही थी।

फिर अंजलि ने खुद doggy position में आकर कहा, “अब मुझे चोदो… और निधि… मेरे नीचे आकर मेरी चूत चाट।”

अब सीन ये था — मैं अंजलि को पीछे से चोद रहा था, निधि नीचे लेटकर अंजलि की चूत चाट रही थी।

अंजलि जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “हाँ… ऐसे ही… आज दोनों बहनें मेरे लिए हैं… आहhhhh!”


आखिर में अंजलि ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोली, “अंदर झाड़ो… आज अंदर ही… आहhhhh!”

मैं अंजलि के अंदर झड़ गया। निधि अंजलि के दूध चूस रही थी।

तीनों थककर गिर पड़े।

अंजलि साँस लेते हुए बोली, “आज… मैंने सबसे ज्यादा मजा लिया।”

निधि ने मुस्कुराते हुए कहा, “दीदी… अब तो तुम सबसे आगे हो गई हो।”

अंजलि ने आँखें बंद कर लीं और बोली, “कल निधि को जाना है… आज रात आखिरी बार करेंगे।”

आखिरी रात – सबसे वाइल्ड थ्रीसम (निधि के जाने से पहले की आखिरी रात)

निधि अगले दिन शहर लौट रही थी। अंजलि ने खुद कहा, “आज रात… हम तीनों को याद रखने लायक बनाते हैं।”

उस रात से सुबह 8 बजे तक हमने घर के लगभग हर कोने में चुदाई की। ये सबसे लंबी और सबसे गंदी रात थी।


सुबह 8 बजे – मास्टर बेडरूम

अंजलि सबसे aggressive थी। उसने निधि को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर बैठ गई। दोनों बहनें एक-दूसरे की चूत रगड़ने लगीं।

मैं खड़ा होकर देख रहा था।

अंजलि ने मुझे देखा और बोली, “राहुल… आओ। निधि की चूत चाटो।”

मैं निधि के बीच में बैठ गया। अंजलि ऊपर बैठी हुई निधि के दूध चूस रही थी और मैं नीचे निधि की चूत चाट रहा था।

निधि जोर-जोर से चीख रही थी।

फिर अंजलि ने मुझे लिटाया और निधि को मेरे मुंह पर बैठा दिया। खुद मेरे लंड पर बैठ गई।

दोनों बहनें एक साथ उछल रही थीं — एक मेरे मुंह पर, दूसरी मेरे लंड पर।


दोपहर 12 बजे – किचन

हम किचन में चाय बनाने गए थे। अंजलि ने निधि को काउंटर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। दोनों बहनें एक-दूसरे को किस कर रही थीं।

मैं पीछे से अंजलि को चोदने लगा।

अंजलि चीख रही थी, “और जोर से… आज आखिरी दिन है… आह्ह्ह!”

निधि अंजलि के दूध चूसते हुए बोली, “दीदी… आज तुम सबसे ज्यादा पागल हो।”


शाम 5 बजे – बालकनी

बालकनी में तीनों नंगे खड़े थे। नीचे सड़क पर लोग आ-जा रहे थे।

अंजलि ने निधि को रेलिंग से पकड़वा दिया और मुझे उसके पीछे खड़ा किया।

“चोदो इसे… जोर से। लोग देख रहे होंगे।”

मैं निधि को जोर-जोर से चोद रहा था। अंजलि निधि के बाल खींच रही थी और गंदी बातें बोल रही थी।

निधि चीख-चीख कर चोदवा रही थी।


रात 9 बजे – शावर

आखिरी बार शावर में।

तीनों अंदर घुसे। पानी गिर रहा था।

अंजलि ने निधि को दीवार से लगाया और खुद उसके घुटनों के बीच बैठ गई। निधि की चूत चाटने लगी।

मैं पीछे से अंजलि को चोद रहा था।

अंजलि निधि की चूत चाटते हुए बोली, “आज आखिरी रात है निधि… याद रखना… आह्ह्ह!”

निधि अंजलि के बाल पकड़कर अपने चूत में दबा रही थी।


रात 11 बजे – आखिरी राउंड (मास्टर बेडरूम)

आखिरी बार हम मास्टर बेडरूम में आए।

अंजलि ने निधि को doggy position में कर दिया। मैं निधि को चोद रहा था। अंजलि नीचे लेटकर निधि की चूत चाट रही थी।

निधि चीख रही थी, “दीदी… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”

अंजलि ने कहा, “झड़… मेरे मुंह में झड़।”

निधि जोर से काँपी और अंजलि के मुंह में झड़ गई।

उसी वक्त मैंने भी निधि के अंदर झड़ दिया।


हम तीनों पसीने से तर, थके हुए बिस्तर पर लेट गए।

निधि अंजलि के सीने पर सिर रखकर बोली, “दीदी… ये रात कभी नहीं भूल पाऊँगी।”

अंजलि ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “मैं भी… लेकिन अब तू शहर जा रही है।”

निधि ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं आती रहूँगी दीदी… और जब भी आऊँगी… हम तीनों फिर से यही करेंगे।”

अंजलि ने मेरी तरफ देखा और बोली, “तुम दोनों ने मुझे बिगाड़ दिया है। अब मैं पहले जैसी नहीं रह पाऊँगी।”

मैंने दोनों को गले लगाया।

निधि कल सुबह चली गई।

लेकिन वो रात… वो आखिरी wild थ्रीसम… हम तीनों के लिए हमेशा यादगार रही।

Leave a Comment