दीदी के सामने जीजा ने जबरदस्ती तोड़ी मेरी कुँवारी सील | Jija Sali Forced Sex Story

दीदी के सामने जीजा ने जबरदस्ती तोड़ी मेरी कुँवारी सील

ये कहानी दो साल पहले की है जब मेरी उम्र 21 साल थी। मैं मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रही थी, टॉपर थी, कभी किसी लड़के का हाथ तक नहीं छुआ था। सेक्स शब्द सुनते ही शर्मा जाती थी। मेरे पापा-मम्मी अपने सबसे बड़े दोस्त की बेटी की शादी में अमेरिका गए हुए थे। पूरा महीना घर खाली। इसलिए मेरी बड़ी दीदी सुनीता और जीजा सुरेश हमारे घर आ गए। दीदी 24 साल की थी, शादी को दो साल हो चुके थे। जीजा 30 साल के, तगड़े बदन वाले, थोड़े गुस्से वाले।

पहली रात को मैं अपने कमरे में पढ़ रही थी। अचानक दीदी के कमरे से आवाजें आने लगीं। “आह्ह्ह… सुरेश… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” दीदी की आवाजें दीवारें फाड़ रही थीं। मैं डरते-डरते उठी। दरवाजा अधखुला था। अंदर झाँका तो साँस रुक गई। Jija Sali Forced Sex Story

दीदी पूरी नंगी बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई थी। जीजा उनके पीछे खड़े थे, अपना मोटा ९ इंच का लंड दीदी की गांड में घुसाए हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे। दीदी की भरी-भरी चुचियाँ हिल रही थीं, निप्पल्स सख्त। जीजा दीदी की गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहे थे।

“रंडी… तेरी चूत तो ढीली हो गई है… शादी से पहले कितनों ने चोदा था तुझे?” दीदी कराहते हुए बोली, “हाँ… तेरे दोस्तों ने… लेकिन आज मेरी छोटी बहन की टाइट सील तोड़… वो अभी तक कुँवारी है… उसकी चूत इतनी तंग होगी कि तेरा लंड फट जाएगा…”

मेरा नाम मीरा है। जीजा बोले, “सच में? वो मेडिकल पढ़ने वाली टॉपर? अगर वो भी तेरी तरह पहले से चुद चुकी हो तो…” दीदी हँसी, “नहीं रे… वो तो किताबों में ही लगी रहती है। बाल भी नहीं काटे उसने चूत के। पूरा जंगल है। तू चोद के देख, खून निकलेगा… ताजा माल है।”

मैं वहीं खड़ी काँप रही थी। पैरों में जान नहीं थी। धीरे से अपने कमरे में लौट आई। पूरी रात नींद नहीं आई।

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अगले दिन दीदी सुबह मेरे पास आई। प्यार से बाल सहलाते हुए बोली, “मीरा… आज रात तुझे अपने जीजा के साथ सोना है।” मैं चौंक गई, “दीदी… क्या बोल रही हो?” दीदी ने सारी बात खोल के बता दी। उसने शादी से पहले ही जीजा के दोस्तों और अपने देवर अनिल से चुदवा लिया था। जीजा को जब पता चला तो उन्होंने शर्त रख दी — “अगर तू मुझे अपनी बहन की कुँवारी चूत नहीं दिलवाएगी तो शादी तोड़ दूंगा।” दीदी बोली, “मीरा… तेरे लिए ही तो कर रही हूँ। एक बार चुदवा लेगी तो खुद मजा लेने लगेगी। मैं भी साथ रहूंगी… कोई डर नहीं।”

मैं रोने लगी, “नहीं दीदी… मुझे डर लगता है… मैं नहीं करूंगी…” दीदी ने जबरदस्ती मुझे बाजार ले गई। एक पारदर्शी लाल नेग्लीजी, काली ब्रा और चड्डी खरीदी। शाम को बोली, “जा नहा ले… और ये पहन ले। बाल मत काटना चूत के… जीजा को विश्वास हो जाएगा कि तू सिल पैक है।”

मैं नहाने गई तो दीदी बाथरूम में घुस आई। उसने मेरे कपड़े उतार दिए। मेरी गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें चमक रही थीं। दीदी ने मेरी चुचियाँ दबाईं, “वाह… कितनी कड़क हैं… जीजा का लंड इन पर रख के मजे लेगा।” फिर मेरी चूत के घने बालों को उंगलियों से खींचा, “ये जंगल देख के जीजा पागल हो जाएगा।”

मैं शर्मा के मरने लगी। दीदी ने मुझे नेग्लीजी पहनाई। कपड़ा इतना पतला था कि निप्पल्स और चूत की फांक साफ दिख रही थी।

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रात 11 बजे जीजा और उनके छोटे भाई अनिल (मेरा देवर) दोनों आए। दोनों के हाथ में शराब की बोतलें थीं। जीजा मुझे देखते ही बोले, “अरे वाह… मेरी साली आज तो माल लग रही है! आज तेरी सुहाग रात मनाऊंगा मीरा रानी…” अनिल भी हँस पड़ा, “भाभी… ये तो बहुत ताजा है… आज दोनों भाई मिल के इसकी सील तोड़ेंगे।”

मैं डर के मारे काँप रही थी। “जीजा जी… प्लीज… मत कीजिए… मैं चिल्ला दूंगी…” जीजा ने जोर से दो थप्पड़ मेरे गाल पर मारे। “चिल्ला… आज कोई नहीं सुनेगा।” दीदी ने मेरे हाथ पकड़ लिए। जीजा ने मेरी नेग्लीजी फाड़ दी। ब्रा और चड्डी भी एक झटके में उतार दी। मैं पूरी नंगी हो गई। मेरी गोरी त्वचा, भरी चुचियाँ, घनी चूत के बाल — सब उनके सामने थे।

जीजा ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया। मेरी टांगें फैलाईं। अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। “बहुत टाइट है रे… आज खून निकलेगा…” मैं चिल्लाई, “नहीं… दर्द होगा… छोड़ दो…” दीदी ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया। जीजा ने एक जोरदार धक्का मारा। लंड का सिरा अंदर घुसा तो मैं तड़प उठी। दूसरा जोरदार धक्का — मेरी कुँवारी झिल्ली फट गई। चूत से गर्म खून बहने लगा।

“आह्ह्ह… मर गई… जीजा जी… निकालो… खून निकल रहा है…” अनिल नीचे झुका और मेरी चूत से बहता खून चाटने लगा। “वाह भाई… ताजा खून… मीरा की सील तो सच में टूट गई…”

जीजा जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे। हर धक्के के साथ चूत से खून और रस की आवाजें आ रही थीं — चप्पाक… चप्पाक… दीदी मेरे मुंह में अपना एक निप्पल डाल कर बोली, “चूस ले बहन… मजा ले… देख कैसे चोद रहा है तेरा जीजा…”

20 मिनट बाद जीजा ने मेरी चूत में गरम-गरम रस छोड़ दिया। फिर अनिल ने बारी ली। उसका लंड थोड़ा पतला लेकिन लंबा था। उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से चोदना शुरू किया। दीदी जीजा का लंड चूस रही थी।

रात भर चला। कभी जीजा मेरे मुंह में लंड डालते, कभी अनिल मेरी चूत में। दीदी मुझे दारू पिलाती रही। धीरे-धीरे दारू का नशा चढ़ा तो दर्द कम होने लगा। मेरे मुंह से अनजाने में आह निकलने लगी।

“आह्ह… जीजा जी… धीरे… आह्ह…” जीजा हँसे, “देख… अब मजा आने लगा… रंडी बन गई मेरी साली…”

सुबह 6 बजे तक तीनों ने मुझे 5 बार चोदा। मेरी चूत सूज गई थी, खून और रस से लथपथ। आखिर में दीदी ने मुझे जीजा के ऊपर बिठा दिया। मैं खुद उनके लंड पर बैठ गई और हिलने लगी।

“मीरा… अब तू भी रंडी बन गई… रोज चुदेगी ना?” दीदी बोली। मैं नशे में बोली, “हाँ दीदी… अब मुझे भी लंड चाहिए…”

अगले दिन जब होश आया तो शर्म से मरने लगी। लेकिन शरीर में अजीब सी भूख थी। दीदी ने फिर से कपड़े उतारे और कहा, “आज दोनों भाई मिल के तेरी गांड भी मारेंगे…”

ये कहानी एक महीने तक चली। आखिर में मैं खुद जीजा और अनिल दोनों से चुदवाने लगी। दीदी की तरह मैं भी “रंडी” बन गई।

अगले दिन से शुरू हुआ असली खेल…

पहली रात के बाद मेरी चूत सूज गई थी, खून और रस से लथपथ। सुबह उठते ही दर्द हो रहा था। लेकिन दीदी सुनीता ने मुझे नहलाया, दवा लगाई और बोली, “आज से रोज चोदेंगे तुझे जीजा और अनिल दोनों। आदत डाल ले मीरा… एक बार लंड का स्वाद लग जाए तो तू खुद मांगेगी।”

दूसरा दिन – सुबह जीजा सुरेश ऑफिस जाने से पहले मेरे कमरे में आए। मैं अभी भी नंगी लेटी थी। उन्होंने बिना कुछ बोले मेरी टांगें खोलीं और अपना सुबह का खड़ा लंड सीधा मेरी चूत में घुसा दिया। “आह्ह… जीजा जी… दर्द हो रहा है…” “चुप रंडी… रोज चोदेंगे तो आदत हो जाएगी।”

वे धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के लगा रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी चूत से “पुच… पुच…” की आवाज आ रही थी। १० मिनट बाद उन्होंने मेरी चूत में गरम रस छोड़ दिया और बोले, “शाम को अनिल के साथ दोनों मिल के और जोर से चोदेंगे। तैयार रहना।”

दूसरा दिन – शाम जैसे ही दोनों भाई घर आए, दीदी ने मुझे नंगी कर दिया। लिविंग रूम के सोफे पर लिटा दिया। अनिल पहले मेरे मुंह में लंड डाल के चूसवाने लगा। जीजा मेरी चूत चाट रहे थे और दांतों से क्लिट को काट रहे थे। मैं कराह रही थी।

फिर जीजा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और खड़े-खड़े मेरी चूत में लंड घुसा दिया। अनिल पीछे से मेरी गांड में उंगली डालने लगा। “आज गांड भी शुरू कर देंगे तेरी…” अनिल बोला। मैं डर गई, “नहीं… गांड मत मारना… दर्द होगा…” लेकिन जीजा ने मुझे जोर से चोदते हुए बोला, “चुप… आज से तेरी गांड भी हमारी है।”

उन्होंने मुझे सोफे पर घोड़ी बनाया। जीजा आगे से चूत में लंड घुसाए हुए थे, अनिल पीछे से धीरे-धीरे गांड में उंगली घुसा रहा था। दर्द और मजा दोनों हो रहा था।

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तीसरा दिन – पूरा दिन जीजा ऑफिस से जल्दी आ गए। दीदी ने मुझे रसोई में खाना बनाते समय पकड़ लिया। जीजा ने मेरी सलवार नीचे खींची और खड़े-खड़े पीछे से चोद दिया। अनिल आया तो उसने मेरे मुंह में लंड डाल दिया। दोनों भाई रसोई में ही मुझे चोद रहे थे।

चौथा दिन – रात का गैंगबैंग आज दोनों ने मुझे बेड पर लिटाया। जीजा मेरे ऊपर चढ़े और जोर-जोर से चोदने लगे। अनिल मेरे सिर के पास बैठ गया और लंड मेरे मुंह में ठूंस दिया। दीदी पास बैठी मुस्कुरा रही थी, “देख मेरी बहन कैसे दोनों लंड एक साथ ले रही है… अब तो पूरी रंडी बन गई।”

जीजा ने मेरी चूत में रस छोड़ा। फिर अनिल ने बारी ली। इस बार उन्होंने मुझे रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में बिठाया। मैं खुद उनके लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी। मेरा मुंह खुला था, आहें निकल रही थीं।

“मीरा… बोल… तुझे चुदना पसंद आ रहा है ना?” जीजा ने पूछा। मैं शर्मा के बोली, “हाँ… जीजा जी… अब मजा आने लगा है…”Jija Sali Forced Sex Story

पांचवां दिन से आगे अब रोज का रूटीन बन गया था:

  • सुबह: जीजा मुझे चोद के ऑफिस जाते।
  • दोपहर: कभी अनिल आ जाता और मुझे चोदता।
  • शाम: दोनों मिलकर २-३ घंटे लगातार चोदते। कभी दीदी भी शामिल हो जाती।

मेरी चूत अब सूजती नहीं थी। बल्कि रोज चुदने से और ज्यादा गीली और लाल हो जाती। गांड में भी अब उंगली आसानी से घुसने लगी। एक हफ्ते बाद अनिल ने पहली बार मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश की। दर्द बहुत हुआ लेकिन धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। Jija Sali Forced Sex Story

दसवें दिन मैं खुद दीदी से बोली, “दीदी… आज दोनों को एक साथ चूत और गांड में डालने को बोलो ना…” दीदी हँस पड़ी, “अब तो मेरी बहन भी असली रंडी बन गई!”

उस रात जीजा सोफे पर लेटे। मैं उनके ऊपर बैठ गई। अनिल पीछे से आया और धीरे-धीरे मेरी गांड में लंड घुसाने लगा। दोनों लंड एक साथ मेरे अंदर थे। मैं चिल्ला रही थी, “आह्ह… दोनों… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत और गांड…”

रस निकलते समय मैं खुद जीजा के मुंह में किस कर रही थी और अनिल की गांड थपथपा रही थी।

अब मैं खुद उनसे चुदवाने के लिए तरसने लगी थी। सुबह उठते ही चूत गीली हो जाती। अगर कोई एक दिन नहीं चोदता तो मैं खुद उनके पास जाकर लंड पकड़ लेती।

दीदी बोली, “देखा… मैंने कहा था ना… एक बार सील टूट जाए तो लंड की भूख लग जाती है। अब तू भी मेरी तरह रोज चुदेगी।”

अभी भी 14 दिन बाकी थे जब पापा-मम्मी लौटने वाले थे। हर रोज जीजा और अनिल मुझे जमकर चोदते — सुबह, शाम, रात… कभी रसोई में, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में।

मैं अब पूरी तरह उनकी हो चुकी थी।

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