कार में भाभी की चुदाई | car mein desi bhabhi sex

कार में भाभी की चुदाई

car mein desi bhabhi sex

मेरा नाम राज है। उम्र 23 साल। मेरे बड़े भाई की पत्नी यानी मेरी भाभी नेहा, 28 साल की हैं। भाभी बहुत सुंदर हैं — गोरी रंगत, लंबे बाल, भरे हुए स्तन और मोटी-मोटी गांड। भाभी अक्सर साड़ी पहनती हैं, जिससे उनका फिगर और भी आकर्षक लगता है।

आज रात का समय था। भाई शहर से बाहर गए थे। भाभी को अचानक रात में अपने मायके जाना था। चूंकि भाई नहीं थे, इसलिए भाभी ने मुझे कार में छोड़ने के लिए कहा। मैं गाड़ी चला रहा था। बाहर बारिश हो रही थी। सड़क पर अंधेरा था और बहुत कम गाड़ियाँ चल रही थीं।

कार में सिर्फ हम दोनों थे। भाभी मेरे बगल वाली सीट पर बैठी थीं। उन्होंने नीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी की पल्लू थोड़ी ढीली हो गई थी, जिससे उनका ब्लाउज और क्लीवेज साफ दिख रहा था। बारिश की वजह से कार की खिड़कियाँ धुंधली हो गई थीं।

कुछ देर तक हम दोनों चुप थे। फिर भाभी ने बात शुरू की।

“राज, आज बहुत देर हो गई ना? बारिश भी हो रही है।” “हाँ भाभी, सड़क भी खाली है।” मैंने जवाब दिया।

मैं गाड़ी चला रहा था, लेकिन मेरी नजरें बार-बार भाभी की तरफ जा रही थीं। उनकी साड़ी की ब्लाउज में से स्तन उभर रहे थे। बारिश की वजह से कार के अंदर थोड़ी ठंडक थी, जिससे भाभी के निप्पल हल्के से उभर आए थे।

भाभी ने देख लिया कि मैं उन्हें देख रहा हूँ। “राज, क्या देख रहे हो?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

“कुछ नहीं भाभी… आप बहुत खूबसूरत लग रही हो आज।” मैंने कहा।

भाभी शरमा गईं। “राज, मैं तुम्हारी भाभी हूँ। ऐसे मत बोलो।”

लेकिन उनकी आवाज में कोई गुस्सा नहीं था। बल्कि एक हल्की सी कांप थी।

बारिश और तेज हो गई। मैंने गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोक दी। चारों तरफ अंधेरा था। सिर्फ कार की लाइटें जल रही थीं। कोई और गाड़ी नहीं दिख रही थी।

“भाभी, बारिश बहुत तेज हो गई है। थोड़ी देर रुकते हैं।” मैंने कहा।

भाभी ने हाँ कर दी। अब हम दोनों कार में अकेले थे। बाहर बारिश की तेज आवाज आ रही थी। अंदर सिर्फ हमारी सांसें थीं।

भाभी ने साड़ी का पल्लू ठीक किया, लेकिन वो फिर से खिसक गया। अब उनका क्लीवेज और साफ दिख रहा था।

मैंने धीरे से कहा, “भाभी… आपकी साड़ी खिसक गई है।”

भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं। कुछ सेकंड तक हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

“राज…” भाभी ने धीरे से कहा।

“हाँ भाभी?”

“तुम मुझे… ऐसे क्यों देख रहे हो?”

मैंने साहस करके कहा, “क्योंकि आप बहुत आकर्षक लग रही हो। भाई के जाने के बाद से… मैं सोचता रहता हूँ।”

भाभी ने सिर झुका लिया। लेकिन उन्होंने पीछे हटकर भी नहीं। “राज… ये गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।”

“भाभी, आज रात सिर्फ हम दोनों हैं। कोई नहीं देख रहा।”

भाभी ने गहरी सांस ली। उनकी साँसें तेज हो गई थीं। कार के अंदर की हवा गर्म हो रही थी।

मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी जांघ पर रख दिया। भाभी ने सांस रोकी, लेकिन हाथ नहीं हटाया।

“राज… मत करो…” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आवाज बहुत कमजोर थी।

मैंने हाथ और ऊपर बढ़ाया। अब मेरा हाथ उनकी जांघ के ऊपर था। भाभी ने आँखें बंद कर लीं।

“भाभी… अगर आप मना कर दो तो मैं रुक जाऊँगा।” मैंने कहा।

भाभी ने कुछ देर चुप रही। फिर धीरे से बोलीं — “राज… तुम बहुत नटखट हो।”

उनकी आवाज में अब कोई रोक नहीं थी। बल्कि उत्तेजना थी।

मैंने और करीब होकर उनकी कमर पर हाथ रख दिया। भाभी ने सिर पीछे झुका लिया। बारिश की आवाज के बीच सिर्फ हमारी सांसें सुनाई दे रही थीं।

भाभी ने आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा।

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✅ कार में चुदाई शुरू

मैंने भाभी को अपनी तरफ खींच लिया और उनके होंठों पर जोर से किस किया। भाभी ने भी मेरा साथ दिया। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठ चूसने लगीं। हम दोनों की साँसें बहुत तेज हो गई थीं। बारिश की तेज आवाज के बीच सिर्फ हमारी सिसकारियाँ सुनाई दे रही थीं।

भाभी ने मेरे बालों में उँगलियाँ डाल दीं और मुझे और जोर से किस करने लगीं। “उम्म्म्म… राज…” उन्होंने कराहा।

मैंने भाभी को पीछे की सीट की तरफ खींच लिया। हम दोनों पीछे की सीट पर चले गए। कार के अंदर जगह कम थी, लेकिन अंधेरा और बारिश की वजह से कोई हमें देख नहीं सकता था। खिड़कियाँ पूरी तरह धुंधली हो चुकी थीं।

भाभी अब मेरे ऊपर आ गई थीं। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया। अब उनकी कमर और ब्लाउज साफ दिख रहे थे। मैंने भाभी को पीछे की सीट पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया।

“राज… कार में मत करो… कोई देख लेगा…” भाभी ने कहा, लेकिन उनकी आवाज में कोई रोक नहीं थी।

“भाभी, बारिश हो रही है। कोई नहीं देख रहा।” मैंने कहा और फिर से उनके होंठों पर किस किया।

मैंने भाभी की साड़ी को कमर से ऊपर उठाना शुरू कर दिया। साड़ी उनकी जांघों तक चढ़ गई। अब उनकी नंगी जांघें मेरे हाथों में थीं। भाभी ने शरम से आँखें बंद कर लीं।

मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए। एक-एक करके सभी हुक खोल दिए। ब्लाउज खुल गया। भाभी के बड़े-बड़े स्तन अब सिर्फ ब्रा में थे। मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा उतारकर सीट पर फेंक दी।

अब भाभी के नंगे स्तन मेरे सामने थे। मैंने उनका एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। “आह्ह्ह… राज…” भाभी कराह उठीं। उन्होंने मेरे सिर को अपनी छाती से दबा लिया।

मैंने दूसरा स्तन भी चूसा और निप्पल को दाँतों से हल्का काटा। भाभी का शरीर काँप गया।

“उफ्फ्फ… देवर जी… धीरे…” भाभी ने कहा।

फिर मैंने भाभी की साड़ी और पेटीकोट दोनों को एक साथ नीचे खींच दिया। भाभी ने पैर उठाकर उन्हें पूरी तरह उतार दिया। अब भाभी सिर्फ पैंटी में थीं।

मैंने उनकी पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर नीचे खींच दिया। पैंटी उनके टखनों से निकल गई। अब भाभी पूरी तरह नंगी पीछे की सीट पर लेटी हुई थीं।

मैंने भी अपनी पैंट और अंडरवियर उतार फेंके। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

भाभी ने मेरे लंड को देखा और उनकी आँखें चौड़ी हो गईं। “राज… इतना बड़ा…” उन्होंने फुसफुसाया।

मैंने भाभी की टाँगें चौड़ी कर दीं और अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा। भाभी की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।

“आह्ह्ह…” भाभी ने सिर पीछे झुका लिया।

मैंने एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। “आह्हhhhh… देवर जी…” भाभी चीख पड़ीं। उनकी आवाज कार के अंदर गूँज गई।

मैंने दूसरा धक्का मारा — पूरा लंड अंदर चला गया।

भाभी की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। “भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है…” मैंने कराहते हुए कहा।

मैंने भाभी की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। कार हिल रही थी। बारिश की आवाज के साथ “पच… पच… पच…” की आवाज आ रही थी।

भाभी की आँखें बंद थीं, मुँह खुला हुआ था। “आह्ह्ह… राज… और जोर से… चोदो मुझे… कार में चोद रहे हो मुझे…” उनके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। हर धक्के के साथ भाभी की सिसकारियाँ निकल रही थीं।

“उफ्फ्फ… देवर जी… मैं मर जाऊँगी…” भाभी ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए।

मैंने और तेज रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। भाभी का शरीर पसीने से भीग रहा था।

“भाभी… आज मैं तुम्हें कार में पूरा चोद दूंगा…” मैंने कहा।

भाभी का शरीर अचानक कड़क गया। “आह्ह्हhhhh… राज… आ रहा है…”

उनकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से कस लिया। भाभी जोर से काँपने लगीं। उनका पहला ऑर्गेज्म हो गया।

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कार में डॉगी स्टाइल

पहले राउंड के बाद भाभी अभी भी पीछे की सीट पर लेटी हुई थीं। उनकी साँसें बहुत तेज चल रही थीं। मैंने भाभी को घुमा दिया। अब वे घुटनों के बल सीट पर बैठ गईं और दोनों हाथ आगे की सीट पर रख दिए।

भाभी अब डॉगी स्टाइल में थीं। उनकी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। बारिश की वजह से कार के अंदर अंधेरा था, लेकिन भाभी का नंगा शरीर अभी भी साफ दिख रहा था।

“राज… इस पोजीशन में मत करो… शर्म आती है…” भाभी ने कहा, लेकिन उन्होंने अपनी गांड और ऊपर उठा दी।

मैंने भाभी की कमर पकड़ ली और अपना लंड उनकी चूत पर रखा। चूत अभी भी गीली थी। मैंने एक जोर का धक्का मारा।

पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया।

“आह्हhhhh… देवर जी…” भाभी जोर से चीख पड़ीं। उनकी आवाज कार के अंदर गूँज गई।

मैंने भाभी की कमर दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “पच… पच… पच…” की आवाज बारिश की आवाज के साथ मिल रही थी।

भाभी का सिर आगे झुका हुआ था। उनके बाल बिखर गए थे। “आह्ह्ह… राज… पीछे से मत मारो… उफ्फ्फ… बहुत गहरा जा रहा है…” भाभी की आवाज काँप रही थी।

मैंने भाभी की एक गांड पर थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह…” भाभी और जोर से चीखीं।

“भाभी… तुम्हारी गांड कितनी मस्त है…” मैंने कहा और और जोर से चोदने लगा।

भाभी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें आधी बंद थीं, होंठ काँप रहे थे। “राज… आह्ह्ह… तुम मुझे आज कार में बर्बाद कर दोगे…” उनकी आँखों में आँसू आ गए थे, लेकिन वो मजे से काँप रही थीं।

मैंने भाभी के बाल पकड़कर उनकी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी और और तेज धक्के मारने लगा। कार हिल रही थी। खिड़कियाँ पूरी तरह धुंधली हो चुकी थीं। बाहर बारिश जोरों से हो रही थी।

“आह्ह्ह… देवर जी… और जोर से… चोदो मुझे… कार में चोद रहे हो मुझे…” भाभी बार-बार यही बोल रही थीं। उनके स्तन आगे-पीछे हिल रहे थे।

मैंने भाभी की कमर और जोर से पकड़ लिया और रफ्तार बढ़ा दी। “भाभी… तुम्हारी चूत आज भी बहुत टाइट है… आह्ह…” मैं भी पसीने से भीग चुका था।

भाभी का शरीर अचानक कड़क गया। “आह्ह्हhhhh… राज… फिर से आ रहा है…”

उनकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से कस लिया। भाभी जोर से काँपने लगीं। उनका दूसरा ऑर्गेज्म हो गया।

मैंने भी रुकना नहीं था। और तेज धक्के मारता रहा।

“भाभी… मैं भी… आ रहा हूँ…” “अंदर ही छोड़ दो राज… कार में ही अंदर छोड़ दो…” भाभी ने फुसफुसाया।

आखिर में मैंने भाभी की कमर कसकर पकड़ा और जोर से धक्का मारा। मेरा सारा गर्म माल भाभी की चूत में छूट गया।

भाभी का शरीर अभी भी हिल रहा था। वे सिर नीचे झुकाए सीट पर टिकी हुई थीं।

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अगले दिन भाभी की चुदाई – घर पर

रात को कार में जो हुआ, उसके बाद हम दोनों चुपचाप घर लौट आए। भाभी थक गई थीं। पूरी रात भाभी मेरे कमरे में ही सोई रहीं। सुबह जब मैं उठा तो भाभी अभी भी नंगी मेरी बाहों में सो रही थीं।

सुबह के 8 बजे थे। भाई अभी भी बाहर थे। घर में सिर्फ हम दोनों अकेले थे।

भाभी की आँखें खुल गईं। उन्होंने मुझे देखा और शरमा गईं। “राज… कल रात जो हुआ… वो बहुत गलत था।” लेकिन उनकी आवाज में कोई पछतावा नहीं था।

मैंने भाभी को और जोर से अपनी बाहों में खींच लिया। “भाभी, कल रात जो हुआ वो दोनों को अच्छा लगा। आज भी मन कर रहा है।”

भाभी ने मेरे सीने पर हाथ रखा। “राज… दिन में मत करो… शर्म आती है।”

लेकिन मैंने भाभी को पीठ के बल लिटा दिया। सुबह की रोशनी कमरे में आ रही थी। भाभी का नंगा शरीर बिस्तर पर साफ दिख रहा था।

मैंने भाभी के दोनों स्तनों को मसलते हुए कहा, “भाभी, आज पूरा दिन हमारा है।”

भाभी ने आँखें बंद कर लीं। “राज… धीरे-धीरे करो ना…”

मैंने भाभी की टाँगें चौड़ी कर दीं और अपना लंड उनकी चूत पर रखा। कल रात की चुदाई के बाद भी भाभी की चूत थोड़ी सूजी हुई थी।

मैंने धीरे से लंड अंदर डाला। “आह्ह्ह…” भाभी कराह उठीं।

मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। भाभी ने मेरी पीठ पर हाथ रखा और मुझे और करीब खींच लिया। “राज… कल रात कार में जितना जोर से चोदा… आज भी वैसा ही करो…”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। बिस्तर हिलने लगा। भाभी के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। “आह्ह्ह… देवर जी… और जोर से… चोदो मुझे…” भाभी की आँखें आधी बंद थीं, होंठ काँप रहे थे।

मैंने भाभी को घुमा दिया। अब वे डॉगी स्टाइल में थीं। मैंने पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “पच… पच… पच…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।

“आह्ह्ह… राज… पीछे से बहुत अच्छा लग रहा है…” भाभी बार-बार बोल रही थीं।

मैंने भाभी की गांड पर थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह…” भाभी चीख पड़ीं।

“भाभी… तुम्हारी चूत आज सुबह भी बहुत गीली है…” “आह्ह्ह… राज… बंद मत करो… चोदते रहो मुझे…”

मैंने भाभी के बाल पकड़कर उनकी गर्दन पीछे झुका दी और और तेज चोदने लगा। भाभी का शरीर काँप रहा था।

“राज… मैं… आह्ह्ह… फिर से आ रहा है…” भाभी जोर से काँपी और उनका ऑर्गेज्म हो गया।

मैंने भी रुकना नहीं था। कुछ देर और चोदने के बाद मैंने भी भाभी की चूत में माल छोड़ दिया।

हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। “राज… आज दिन भर मुझे ऐसे ही चोदते रहना…”

दोपहर की लंबी और धीमी चुदाई

दोपहर के 2 बजे थे। भाई अभी भी बाहर थे। घर में सिर्फ हम दोनों अकेले थे।

भाभी नहाकर आई थीं। उन्होंने सिर्फ एक पतला सा नाइट गाउन पहना हुआ था। बाल खुले हुए थे। मैं सोफे पर लेटा हुआ था। भाभी मेरे पास आकर बैठ गईं।

“राज… दोपहर में मन कर रहा है?” भाभी ने धीरे से कहा।

मैंने भाभी को अपनी तरफ खींच लिया। “हाँ भाभी… आज धीरे-धीरे करना है।”

भाभी ने मेरे ऊपर चढ़कर बैठ गईं। मैंने उनकी नाइट गाउन के स्ट्रैप्स उतार दिए। गाउन उनके कंधों से नीचे गिर गया। अब भाभी पूरी तरह naked मेरे ऊपर बैठी थीं।

मैंने भाभी के दोनों स्तनों को धीरे से मसलते हुए कहा, “भाभी, तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

भाभी ने आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठों पर किस किया। हम दोनों धीरे-धीरे और गहरे किस करने लगे। भाभी की जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।

मैंने भाभी को सोफे पर लिटा दिया। अब मैं उनके ऊपर था। मैंने धीरे से उनका एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। भाभी ने मेरे बालों में उँगलियाँ डाल दीं।

“आह्ह्ह… राज… धीरे…” भाभी की आवाज बहुत नरम थी।

मैंने भाभी की टाँगें धीरे से खोलीं और अपना लंड उनकी चूत पर रखा। चूत अभी भी गीली थी। मैंने बहुत धीरे से लंड अंदर डाला।

“उम्म्म्म…” भाभी ने सिर पीछे झुका लिया।

मैंने धीरे-धीरे और गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्का बहुत धीमा और गहरा था। भाभी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।

“राज… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…” भाभी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।

मैंने भाभी के होंठों पर किस किया और साथ ही धीरे-धीरे चोदता रहा। हमारी साँसें एक-दूसरे से मिल रही थीं। भाभी ने मेरी पीठ पर हाथ रखा और मुझे और करीब खींच लिया।

“भाभी… तुम्हारी चूत आज कितनी गर्म है…” मैंने धीरे से कहा।

“आह्ह्ह… राज… और गहरा… धीरे-धीरे…” भाभी की आँखें आधी बंद थीं। उनके होंठ काँप रहे थे।

मैंने भाभी को घुमा दिया। अब वे सोफे पर पीठ के बल लेटी थीं और मैं उनके ऊपर था। मैंने उनकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई से चोदने लगा।

हर धक्के के साथ भाभी की सिसकारी निकल रही थी। “आह्ह्ह… देवर जी… आज बहुत प्यार से चोद रहे हो… उफ्फ्फ…”

भाभी ने मेरी गर्दन पकड़कर मुझे किस किया। हम दोनों एक-दूसरे को देखते हुए चोद रहे थे। कोई जल्दी नहीं थी। सिर्फ धीमी, गहरी और लंबी चुदाई।

कुछ देर बाद भाभी का शरीर धीरे-धीरे काँपने लगा। “राज… आह्ह्ह… मैं… आ रहा है…” भाभी की आँखें बंद हो गईं और उनका शरीर हिलने लगा। उनका ऑर्गेज्म बहुत लंबा और गहरा था।

मैंने भी रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। कुछ देर बाद मैंने भी भाभी की चूत में माल छोड़ दिया।

हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए सोफे पर लेटे रहे। भाभी ने मेरे सीने पर सिर रखा।

“राज… आज बहुत अच्छा लगा…” भाभी ने धीरे से कहा।

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