किचन में भाभी की गर्म चुदाई
kitchen mein bhabhi chudai
मेरा नाम राज है। उम्र 24 साल। मेरे बड़े भाई विक्रम की शादी को दो साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी यानी मेरी भाभी अंजलि, 27 साल की हैं। भाभी बहुत खूबसूरत हैं — गोरी रंगत, लंबे बाल, भरे हुए स्तन और सबसे खास बात उनकी मोटी-मोटी गांड। भाभी अक्सर घर में साड़ी या सलवार सूट पहनती हैं।
आज भाई ऑफिस के काम से बाहर गए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी अकेले थे। दोपहर का समय था। गर्मी बहुत तेज थी। मैं बाहर खेलने गया था और पसीने से भीगकर घर लौटा।
जैसे ही मैं अंदर आया, किचन से खाने की महक आ रही थी। भाभी खाना बना रही थीं। मैं पानी पीने के लिए किचन में गया।
दरवाजे के पास खड़ा होकर मैंने भाभी को देखा।
भाभी पीठ की तरफ मुंह करके खड़ी थीं। उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी की पल्लू कमर में दबा हुआ था, जिससे उनकी पीठ और कमर साफ दिख रही थी। जब वे चूल्हे के पास झुकतीं तो उनकी मोटी गांड हिलती हुई नजर आती थी। पसीने की बूंदें उनकी कमर से नीचे बह रही थीं।
मेरा लंड अचानक खड़ा होने लगा।
“भाभी…” मैंने आवाज दी।
भाभी ने मुड़कर देखा। उनके चेहरे पर पसीना था। बाल कुछ बिखरे हुए थे। “अरे राज, आ गया? बाहर बहुत गर्मी है ना? पानी पी ले।”
मैं किचन में अंदर आ गया। भाभी फिर चूल्हे की तरफ मुड़ गईं। मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। पानी की बोतल उठाई, लेकिन मेरी नजरें उनकी गांड पर टिकी हुई थीं।
“भाभी, आज खाना बहुत अच्छा बन रहा है।” मैंने कहा।
“हाँ, तेरे भाई पसंद करते हैं।” भाभी ने बिना मुड़े जवाब दिया।
मैं थोड़ा और करीब चला गया। अब मेरी सांसें उनकी पीठ पर पड़ रही थीं। भाभी को महसूस हो गया। वे थोड़ा सा घबरा गईं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
अचानक भाभी ने तेल का बर्तन उठाया और झुक गईं। उनकी गांड मेरे लंड से टकरा गई।
“ओह!” भाभी चौंक गईं और सीधी हो गईं।
मैं भी चौंक गया। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था और शॉर्ट्स में साफ तम्बू बन गया था।
भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी नजरें मेरे शॉर्ट्स पर चली गईं। वे शरमा गईं।
“राज… ये क्या हो गया?” उन्होंने धीरे से कहा।
मैंने कहा, “भाभी, माफ करना… लेकिन आप इतनी खूबसूरत लग रही हो। पसीने में… साड़ी में…”
भाभी ने साड़ी का पल्लू ठीक किया। लेकिन उनकी सांसें तेज हो गई थीं। “राज, मैं तुम्हारी भाभी हूँ। ऐसे मत बोलो।”
लेकिन उनकी आवाज में कोई गुस्सा नहीं था। बल्कि एक अजीब सी कांप थी।
मैंने पानी की बोतल रख दी और एक कदम और आगे बढ़ गया। अब हम दोनों बहुत करीब थे। किचन में सिर्फ हम दोनों। चूल्हे पर खाना बन रहा था। भाप और मसालों की खुशबू फैली हुई थी।
“भाभी… भाई तो बाहर हैं।” मैंने कहा।
भाभी ने मुझे देखा। उनकी आँखों में शरम और कुछ और था। “राज… अगर कोई जान गया तो…?”
“कोई नहीं जानेगा भाभी। सिर्फ हम दोनों।”
भाभी ने सिर झुका लिया। लेकिन उन्होंने पीछे हटकर भी नहीं। मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने सांस रोकी।
“राज… मत करो…” उन्होंने कहा, लेकिन हाथ नहीं छुड़ाया।
मैंने उनका हाथ अपनी तरफ खींचा। अब भाभी मेरे सामने थीं। उनकी साड़ी की ब्लाउज में से उनके स्तन साफ उभर रहे थे। पसीना उनके गले से नीचे बह रहा था।
भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें मेरे लंड पर अटक गईं।
“राज… तुम्हारा ये… इतना बड़ा क्यों हो गया?” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने कहा, “भाभी, आपकी वजह से। आपकी गांड… आपका शरीर… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।”
भाभी शरमा गईं। लेकिन उन्होंने मेरे सीने पर हाथ रख दिया। “राज… तुम बहुत नटखट हो।”
हम दोनों किचन में एक-दूसरे के बहुत करीब खड़े थे। चूल्हे की आग जल रही थी। हमारी सांसें तेज थीं। मेरा लंड भाभी के पेट के पास सख्त होकर दब रहा था।
भाभी ने आँखें बंद कर लीं।
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किचन में चुदाई शुरू | kitchen mein bhabhi chudai
मैंने भाभी को पीछे से कसकर पकड़ लिया। मेरी छाती उनकी पीठ से सट गई। मैंने उनकी गर्दन पर जोर से किस किया।
“आह्ह्ह…” भाभी की सांस निकल गई। उन्होंने सिर पीछे झुका दिया और अपनी गर्दन मेरे मुँह के सामने कर दी।
मैंने उनकी गर्दन और कान के पीछे किस करते हुए कहा, “भाभी… आज मैं तुम्हें किचन में ही चोद दूंगा।”
भाभी की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। “राज… मत करो… कोई आ गया तो…” लेकिन उनकी आवाज में कोई रोक नहीं थी। बल्कि उत्तेजना थी।
मैंने भाभी की साड़ी का पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया। अब उनकी कमर और पीठ पूरी तरह खुल गई थी। मैंने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़कर उन्हें और जोर से अपने शरीर से दबा लिया। मेरा खड़ा लंड उनकी गांड से रगड़ खा रहा था।
भाभी ने “उफ्फ्फ…” की आवाज निकाली।
मैंने उनकी साड़ी को कमर से ऊपर उठाना शुरू कर दिया। साड़ी उनकी जांघों तक चढ़ गई। अब उनकी नंगी जांघें मेरे हाथों में थीं। भाभी ने शरम से दोनों हाथ काउंटर पर रख दिए।
“राज… धीरे…” उन्होंने कहा।
मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए। एक-एक करके सभी हुक खोल दिए। ब्लाउज खुल गया। भाभी के बड़े-बड़े स्तन अब सिर्फ ब्रा में थे। मैंने ब्रा का हुक भी पीछे से खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई।
भाभी ने खुद ब्रा उतारकर काउंटर पर रख दी। अब उनके नंगे स्तन बाहर आ गए थे।
मैंने आगे हाथ बढ़ाकर उनके दोनों स्तनों को मसल लिया। “आह्ह्ह… राज…” भाभी कराह उठीं।
मैंने उनके निप्पल को उँगलियों से दबाया। भाभी की कमर झुक गई।
फिर मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट दोनों को एक साथ नीचे खींच दिया। साड़ी और पेटीकोट उनकी टखनों तक आ गए। भाभी ने पैर उठाकर उन्हें पूरी तरह उतार दिया। अब भाभी सिर्फ पैंटी में थीं।
मैंने उनकी पैंटी को भी दोनों तरफ से पकड़कर नीचे खींच दिया। पैंटी उनके पैरों से निकल गई।
अब भाभी पूरी तरह नंगी किचन में खड़ी थीं।
मैंने भी अपनी शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार फेंके। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा और सख्त।
भाभी ने पीछे मुड़कर मेरे लंड को देखा। उनकी आँखें चौड़ी हो गईं।
“राज… इतना बड़ा…” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने भाभी को किचन काउंटर पर झुका दिया। उनकी गांड मेरी तरफ हो गई। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा। भाभी की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
“आह्ह्ह…” भाभी ने सिर नीचे झुका लिया।
मैंने एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया।
“आह्हhhhh… देवर जी…” भाभी चीख पड़ीं। उनकी आवाज किचन में गूँज गई।
मैंने दूसरा धक्का मारा — पूरा लंड अंदर चला गया।
भाभी की चूत बहुत टाइट थी। गर्म और गीली। मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
“भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है…” मैंने कराहते हुए कहा।
मैंने भाभी की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “पच… पच… पच…” की आवाज किचन में भर गई।
भाभी का सिर आगे-पीछे हो रहा था। उनके बाल बिखर गए थे। “आह्ह्ह… राज… और जोर से… चोदो मुझे… किचन में चोद रहे हो मुझे…” उनकी आँखें बंद थीं, मुँह खुला हुआ था, जीभ बाहर निकल रही थी।
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह…” भाभी और जोर से चीखीं।
मैंने उनकी एक टाँग उठाकर काउंटर पर रख दी। अब उनकी चूत और ज्यादा खुल गई थी। मैं और गहराई से चोदने लगा।
भाभी के स्तन काउंटर पर दब रहे थे। हर धक्के के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… देवर जी… मैं मर जाऊँगी… और जोर से…” भाभी की आवाज काँप रही थी। उनके शरीर में पसीना आ गया था।
मैं भी पसीने से भीग चुका था। “भाभी… आज मैं तुम्हें पूरा किचन में चोद दूंगा…” मैंने और तेज रफ्तार से धक्के मारे।
भाभी का शरीर अचानक कड़क गया। “आह्ह्हhhhh… राज… आ रहा है…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से कस लिया। भाभी जोर से काँपने लगीं। उनका पहला ऑर्गेज्म हो गया।
मैंने रुकना नहीं था। और जोर से चोदता रहा।
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किचन में ब्लोजॉब kitchen mein bhabhi chudai
पहले राउंड के बाद भाभी अभी भी काउंटर पर झुकी हुई थीं। उनकी साँसें बहुत तेज चल रही थीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला। भाभी का शरीर हिल रहा था।
अचानक भाभी ने सीधा होकर मुझे घुमा दिया। अब मैं किचन काउंटर की तरफ मुंह करके खड़ा था। भाभी ने मुझे देखा — उनकी आँखें अभी भी चमक रही थीं।
“राज… अब मेरी बारी…” उन्होंने फुसफुसाया।
भाभी ने मेरे कंधों पर हाथ रखा और मुझे धीरे से नीचे की तरफ धकेला। मैं समझ गया। मैं किचन के फर्श पर घुटनों के बल बैठ गया।
भाभी भी मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उनका नंगा शरीर अभी भी पसीने से चमक रहा था। उनके बड़े स्तन आगे को झूल रहे थे। बाल बिखरे हुए थे।
भाभी ने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। मेरा लंड अभी भी भाभी की चूत के रस से भीगा हुआ था।
“भाभी…” मैंने कहा।
भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में भूख थी। “चुप रहो राज… अब तुम चुपचाप बैठो।”
उन्होंने मेरे लंड के सिरे पर जीभ फेर दी। “आह्ह्ह…” मेरे मुँह से आवाज निकल गई।
भाभी ने धीरे-धीरे पूरे लंड पर जीभ घुमाई — नीचे से ऊपर तक। फिर मेरे अंडकोष को भी चाटने लगीं। मैंने उनकी गीली बालों में हाथ डाल दिया।
भाभी ने मेरे लंड का सिरा मुँह में ले लिया और जोर से चूस लिया। उनके गाल अंदर की तरफ खिंच गए। उन्होंने आँखें उठाकर मेरी तरफ देखा — भूखी, चमकदार आँखें।
“उफ्फ्फ… भाभी…” मैं कराह उठा।
भाभी ने और गहराई तक लंड मुँह में ले लिया। मेरा आधा लंड उनकी गले तक चला गया। “गग… गग…” की आवाज किचन में आ रही थी।
लार उनके मुँह से निकलकर मेरे लंड पर बह रही थी। कुछ लार उनके स्तनों पर भी गिर रही थी। भाभी रुकी नहीं। उन्होंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया। उनकी सिर आगे-पीछे हो रही थी।
“आह्ह्ह… भाभी… तुम्हारा मुँह… कितना गर्म है…” मैंने कहा।
भाभी ने लंड मुँह से निकाला। लार की लंबी लकीर उनके होंठों से मेरे लंड तक खिंच रही थी। “राज… तुम्हारा लंड कितना स्वादिष्ट है…” उन्होंने कहा और फिर से मुँह में ले लिया।
इस बार उन्होंने और गहराई तक लिया। गले में फँसने लगा तो भी नहीं रोकीं। आँखों से आँसू आ गए थे, लेकिन वे चूसती रहीं। “गग… गग… गग…”
मैंने उनकी सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे से आगे-पीछे करने लगा। भाभी ने भी साथ दिया। वे बहुत तेजी से मेरा लंड चूस रही थीं। उनकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। कभी सिरे को चूसतीं, कभी पूरा मुँह में ले लेतीं।
भाभी के स्तन मेरे घुटनों से रगड़ खा रहे थे। किचन का फर्श ठंडा था, लेकिन हम दोनों के शरीर से गर्मी निकल रही थी।
“भाभी… मैं… आह्ह्ह… फिर से आने वाला हूँ…” मैंने कहा।
भाभी ने और तेजी से चूसना शुरू कर दिया। उनके गाल अंदर खिंच रहे थे। आँखें आधी बंद। “आह्ह्ह… भाभी… चूसो… और जोर से…”
अंत में मैंने उनकी सिर को कसकर पकड़ा और जोर से धक्का मारा। मेरा सारा गर्म माल भाभी के गले में उतर गया।
भाभी ने सब कुछ निगल लिया। फिर धीरे से लंड मुँह से निकाला। लार और माल उनके होंठों और ठोड़ी पर चिपका हुआ था। उन्होंने जीभ से होंठ चाटे और मुस्कुरा दीं।
“राज… तुम्हारा स्वाद… बहुत अच्छा है…” उन्होंने कहा।
मैं अभी भी साँस ले रहा था। भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाया। “देखो… फिर से खड़ा हो गया…”