बाथरूम में भाभी की गर्म चुदाई
bhabhi bathroom sex story in hindi
मेरा नाम राज है। उम्र 23 साल। मेरे बड़े भाई अंकित की पत्नी यानी मेरी भाभी प्रिया, 29 साल की हैं। भाभी बेहद खूबसूरत हैं — गोरी रंगत, लंबे घने काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ और शरीर ऐसा कि देखते ही मन करे छूने का। उनके स्तन बड़े, भरे हुए और भारी हैं, कमर पतली, गांड गोल-गोल और उभरी हुई। भाभी अक्सर घर में टाइट नाइट ड्रेस या पतले कपड़े पहनती हैं, जिससे उनका फिगर और भी ज्यादा आकर्षक लगता है।
हम दिल्ली के एक फ्लैट में रहते हैं। भाई अक्सर बाहर रहते हैं काम के सिलसिले में। आज भी भाई 4 दिनों के लिए बाहर गए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी अकेले थे।
जून का महीना था। गर्मी बहुत तेज। दोपहर बीत चुकी थी, शाम हो रही थी। मैं अपने कमरे में एसी के नीचे लेटा मोबाइल चला रहा था। भाभी किचन में खाना बना रही थीं।
अचानक भाभी ने आवाज लगाई — “राज… राज सुन रहे हो? बाथरूम का गीजर ऑन कर दो ना। मैं नहाने जा रही हूँ।”
मैं उठा और बाथरूम गया। गीजर ऑन किया। पानी गर्म होने लगा। भाभी ने कहा, “धन्यवाद राज, अब तुम बाहर जाओ। मैं नहा लूँ।”
मैं बाहर आया। लेकिन मुझे अचानक बहुत जोर से पेशाब आ गया। मैं इंतजार करने लगा। 10-15 मिनट बीत गए, भाभी अभी भी नहा रही थीं। शॉवर की फुहार की आवाज आ रही थी।
मैंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया — “भाभी, मुझे बहुत जोर से पेशाब आ रहा है। प्लीज जल्दी करो।”
भाभी ने अंदर से कहा — “अरे राज, अभी शॉवर ले रही हूँ। थोड़ा और इंतजार करो।”
मैंने कहा — “भाभी, कंट्रोल नहीं हो रहा। बहुत जरूरी है प्लीज!”
भाभी ने सोचा, फिर बोलीं — “ठीक है, अंदर आ जाओ। लेकिन आँखें बंद करके आना। मैं टॉवल लपेट लूँगी।”
मैंने दरवाजा खोला। अंदर गर्म भाप भरी हुई थी। शॉवर चल रहा था। मैंने आँखें बंद कर लीं और अंदर चला गया।
“भाभी, मैं अंदर आ गया हूँ।” मैंने कहा।
“हाँ आ जाओ… लेकिन इधर मत देखना।” भाभी की आवाज में थोड़ी काँप थी।
मैं अंधेरे में (आँखें बंद) खड़ा रहा। अचानक मेरे पैर पानी पर फिसल गए। मैं लड़खड़ाया।
“आह!” मैं चिल्लाया।
भाभी ने तुरंत मुझे पकड़ लिया। उनके हाथ मेरी बाहों पर थे — “राज, सावधान! गिर जाओगे।”
जब मैं संभला तो अनजाने में मेरी आँखें खुल गईं।
भाभी मेरे सामने खड़ी थीं। सिर्फ एक छोटा सा सफेद टॉवल उनके शरीर के चारों ओर लिपटा हुआ था। टॉवल उनके बड़े स्तनों को मुश्किल से कवर कर पा रहा था। ऊपर से पानी की बूंदें लगातार टपक रही थीं — गले से, क्लीवेज से, नाभि की तरफ बह रही थीं। उनके बाल पूरी तरह गीले थे, चेहरा गर्म पानी और शरम से लाल हो रहा था। टॉवल इतना छोटा था कि उनकी मोटी जांघें साफ दिख रही थीं।
मैं स्तब्ध रह गया। मेरी नजरें उनके गीले शरीर पर टिक गईं।
भाभी ने देखा कि मेरी आँखें खुली हैं — “राज! आँखें बंद करो ना!” उन्होंने कहा, लेकिन आवाज में गुस्सा नहीं था। बल्कि शरम और कुछ और भाव था।
मैंने कहा — “भाभी… माफ करना। लेकिन आप… आप इतनी सुंदर लग रही हो। मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।”
भाभी शरमा गईं। उन्होंने टॉवल को और ऊपर खींचने की कोशिश की, लेकिन इससे उनके स्तन और भी ज्यादा उभर आए। पानी की बूंदें उनके गले से नीचे बहकर टॉवल के अंदर जा रही थीं।
“राज, मैं तुम्हारी भाभी हूँ। ऐसे मत बोलो।” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आँखें मेरी तरफ से हट नहीं रही थीं।
मेरा लंड अचानक खड़ा हो गया। शॉर्ट्स में साफ तम्बू बन गया। भाभी की नजरें वहाँ चली गईं। वे चौंक गईं।
“राज… ये क्या हो गया?” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने कहा — “भाभी, आपकी वजह से। आपका गीला शरीर… आपकी ये हालत देखकर मैं रोक नहीं पा रहा।”
भाभी की सांस तेज हो गई। उनका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। टॉवल उनके स्तनों पर दब रहा था।
“राज, तुम पागल हो। अगर तुम्हारे भाई को पता चला…”
“भाभी, भाई बाहर हैं। कोई नहीं जान पाएगा। सिर्फ हम दोनों।” मैंने कहा।
भाभी ने मुझे देखा। उनकी आँखों में संघर्ष था — शरम, डर और उत्तेजना।
“राज… तुम बहुत बदमाश हो।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
फिर अचानक बिजली चली गई। पूरा बाथरूम अंधेरे में डूब गया। सिर्फ बाहर से थोड़ी रोशनी आ रही थी।
भाभी घबरा गईं — “ओह! लाइट चली गई। राज, डर लग रहा है।”
वे मेरे और करीब आ गईं। उनका गीला शरीर मेरे शरीर से सट गया। टॉवल में लिपटा उनका नरम और भारी स्तन मेरे सीने से दब गया। पानी मेरे टी-शर्ट पर गिरने लगा।
मैंने अनजाने में उनकी कमर पकड़ लिया। भाभी ने सांस रोकी।
“भाभी…” मैंने धीरे से कहा।
हम दोनों बहुत पास थे। अंधेरे में, गर्म भाप में, भाभी का गीला शरीर मेरे खिलाफ दबा हुआ। मेरा लंड उनके पेट के पास सख्त होकर दब रहा था। भाभी को महसूस हो रहा था।
भाभी ने फुसफुसाया — “राज… तुम्हारा ये… इतना सख्त हो गया है।”
मैंने कहा — “भाभी, आप मुझे इतना उत्तेजित कर रही हो।”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं। उनके होंठ काँप रहे थे।
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मैंने भाभी का टॉवल एक झटके से खींच लिया। टॉवल गिर गया और भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थीं।
मैंने भाभी का छोटा सा सफेद टॉवल एक झटके से खींच लिया। टॉवल उनके शरीर से अलग होकर फर्श पर गिर गया।
भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थीं।
उनका शरीर पानी की बूंदों से चमक रहा था। बड़े-बड़े भारी स्तन, गुलाबी-गुलाबी निप्पल, चिकनी पेट, गहरी नाभि, और नीचे पूरी तरह साफ चूत — हल्की सी बाल भी नहीं थीं। जांघें मोटी, गांड गोल और भारी। अंधेरे में भी उनका नंगा शरीर चमक रहा था।
भाभी ने शरम से दोनों हाथों से अपनी छाती ढकने की कोशिश की, लेकिन मैंने तुरंत उनकी कलाइयाँ पकड़ लीं और उन्हें दीवार से लगा दिया।
“राज… अह्ह्ह…” भाभी की सांस फूल गई।
मैंने उनका दाहिना स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। भाभी का शरीर काँप उठा। “आह्ह्ह… देवर जी… धीरे… उफ्फ्फ…” उनके निप्पल मेरी जीभ के नीचे सख्त हो गए। मैंने दाँतों से हल्का काटा तो भाभी की कमर झुक गई।
“राज… आह्ह्ह… तुम पागल हो गए हो क्या…” लेकिन उनकी आवाज में दर्द नहीं, सिर्फ उत्तेजना थी।
मैंने दूसरा स्तन भी मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। एक हाथ से उनकी गांड दबा रहा था। भाभी की साँसें तेज हो गईं।
“भाभी… तुम्हारे स्तन कितने मस्त हैं…” मैंने कहा और उनके निप्पल को चूसते-चूसते जीभ से घुमाने लगा।
भाभी ने मेरे बालों में उँगलियाँ डाल दीं और मुझे और जोर से अपनी छाती से दबा लिया। “आह्ह्ह… राज… चूसो… और जोर से चूसो…” उनकी आँखें आधी बंद हो गई थीं, होंठ काँप रहे थे।
मैंने अपना टी-शर्ट उतार फेंका। फिर शॉर्ट्स और अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, सख्त और नसों से भरा।
भाभी ने उसे देखा और उनकी आँखें चौड़ी हो गईं। “राज… इतना बड़ा…” उन्होंने फुसफुसाया।
मैंने भाभी की एक टाँग उठाकर अपनी कमर पर रख दी। उनकी चूत पूरी तरह खुल गई। पानी की बूंदें उनकी चूत के होठों पर चमक रही थीं। मैंने अपनी उँगली से उनकी चूत को छुआ — वो बहुत गीली और गर्म थी।
“भाभी… तुम्हारी चूत पानी छोड़ रही है…” “आह्ह्ह… राज… मत छेड़ो… अंदर डाल दो ना…” भाभी की आवाज काँप रही थी।
मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया।
“आह्ह्ह्ह्ह्ह… देवर जी… धीरे… उफ्फ्फ्फ…” भाभी चीख पड़ीं। उनकी आँखें बंद हो गईं, सिर दीवार से टकरा गया।
मैंने दूसरा धक्का मारा — पूरा लंड अंदर घुस गया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। गर्म, गीली और मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
“भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है… आह्ह…” मैंने दाँत भींच लिए।
मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ भाभी की आवाज निकल रही थी — “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… आह्ह्ह… राज… और जोर से… चोदो मुझे… देवर जी… मैं मर जाऊँगी…”
उनके स्तन मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे। पानी की फुहार दोनों के शरीर पर पड़ रही थी। भाप भरा अंधेरा बाथरूम, सिर्फ भाभी की सिसकारियाँ और मेरे लंड की चूत में घुसने की आवाज।
भाभी ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। “आह्ह्ह… राज… मैं… आह्ह्ह… आ रहा है…” उनका शरीर अचानक कड़क गया। चूत ने मेरे लंड को और जोर से कस लिया। भाभी जोर से काँपने लगीं — उनका पहला ऑर्गेज्म हो गया।
“आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… देवर जी… आह्ह्ह…” उनके मुँह से आवाज निकल रही थी, आँखें बंद, होंठ खुले, सिर पीछे झुका हुआ।
मैंने रुकना नहीं था। और तेज धक्के मारने लगा। “भाभी… मैं भी… आ रहा हूँ…” “अंदर ही छोड़ दो… राज… अंदर ही…” भाभी ने फुसफुसाया।
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना सारा माल भाभी की चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी…”
हम दोनों साँस ले रहे थे। भाभी की टाँग अभी भी मेरी कमर पर थी। मेरा लंड उनकी चूत में ही था। दोनों के शरीर पसीने और पानी से भीग चुके थे।
भाभी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा — “राज… तुमने मुझे आज पहली बार इतना चोदा…” उनकी आँखें अभी भी आधी बंद थीं, चेहरा लाल था, होंठ काँप रहे थे।
मैंने भाभी को दीवार से हटाया और उन्हें शॉवर के नीचे ले गया। गर्म पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था।
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भाभी ने खुद मुझे घुटनों के बल बिठाया और मेरा लंड मुँह में ले लिया
पहले राउंड के बाद भाभी की चूत से मेरा गर्म माल बह रहा था। हम दोनों अभी भी साँस ले रहे थे। शॉवर का गर्म पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था। भाभी की आँखें अभी भी आधी बंद थीं, चेहरा लाल था और होंठ काँप रहे थे।
अचानक भाभी ने मुझे धीरे से धक्का दिया। “राज… अब मेरी बारी…” उन्होंने फुसफुसाया।
उन्होंने मुझे शॉवर के नीचे घुटनों के बल बिठा दिया। मैं फर्श पर घुटनों के बल बैठ गया। मेरा लंड अभी भी अर्ध-खड़ा था — चमकदार, भाभी की चूत के रस और मेरे माल से भीगा हुआ।
भाभी मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं। पानी उनकी पीठ पर गिर रहा था। उनके गीले बाल कंधों पर लटक रहे थे। उन्होंने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
“भाभी… क्या कर रही हो…” मैंने कहा।
भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में भूख थी। “चुप रहो राज… अब तुम चुपचाप बैठो।”
उन्होंने मेरे लंड के सिरे पर जीभ फेर दी। आह्ह्ह… मेरे मुँह से आवाज निकल गई।
भाभी ने धीरे-धीरे पूरे लंड पर जीभ घुमाई — नीचे से ऊपर तक। फिर मेरे लंड के नीचे वाले हिस्से को चाटने लगीं। मेरे अंडकोष को भी जीभ से सहलाया।
“उफ्फ्फ… भाभी…” मैंने उनकी गीली बालों में हाथ डाल दिया।
भाभी ने मेरे लंड का सिरा मुँह में ले लिया और जोर से चूस लिया। “आह्ह्ह्ह…” मैं सिर पीछे झुका लिया।
उनके गाल अंदर की तरफ खिंच गए। उन्होंने आँखें उठाकर मेरी तरफ देखा — भूखी, चमकदार आँखें। फिर उन्होंने और गहराई तक लंड मुँह में ले लिया। मेरा आधा लंड उनकी गले तक चला गया।
“गग… गग…” भाभी की आवाज आ रही थी। लार उनके मुँह से निकलकर मेरे लंड पर बह रही थी।
मैंने उनकी सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे से आगे-पीछे करने लगा। भाभी ने भी साथ दिया। वे तेजी से मेरा लंड चूस रही थीं। उनकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। कभी सिरे को चूसतीं, कभी पूरा मुँह में ले लेतीं।
“भाभी… तुम्हारा मुँह… आह्ह्ह… कितना गर्म है…” मैं कराह रहा था।
भाभी ने लंड मुँह से निकाला। लार की लंबी लकीर उनके होंठों से मेरे लंड तक खिंच रही थी। “राज… तुम्हारा लंड कितना स्वादिष्ट है…” उन्होंने कहा और फिर से जोर से चूसने लगीं।
इस बार उन्होंने और गहराई तक लिया। गले में फँसने लगा तो भी नहीं रोकीं। आँखों से आँसू आ गए थे, लेकिन वे रुकी नहीं। “गग… गग… गग…”
मेरा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, सख्त और नसें उभरी हुई।
भाभी ने एक हाथ से मेरे अंडकोष दबाए और दूसरे हाथ से लंड को ऊपर-नीचे हिलाते हुए चूस रही थीं। उनके स्तन मेरे घुटनों से रगड़ खा रहे थे। पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था।
“भाभी… मैं… आह्ह्ह… फिर से आने वाला हूँ…” मैंने कहा।
भाभी ने और तेजी से चूसना शुरू कर दिया। उनकी सिर आगे-पीछे हो रहा था। गाल अंदर खिंच रहे थे। आँखें आधी बंद। “आह्ह्ह… भाभी… चूसो… और जोर से…”
अंत में मैंने उनकी सिर को कसकर पकड़ा और जोर से धक्का मारा। मेरा सारा गर्म माल भाभी के गले में उतर गया।
भाभी ने सब कुछ निगल लिया। फिर धीरे से लंड मुँह से निकाला। लार और माल उनके होंठों पर चिपका हुआ था। उन्होंने जीभ से होंठ चाटे और मुस्कुरा दीं।
“राज… तुम्हारा स्वाद… मिठास भरा है…” उन्होंने कहा।
मैं अभी भी साँस ले रहा था। भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाया। “देखो… फिर से खड़ा हो गया…”
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टाइटल: अगले दिन भाभी की चुदाई – सुबह से शाम तक
रात को बाथरूम में जो हुआ, उसके बाद हम दोनों थककर सो गए। भाभी ने मुझे अपने बेडरूम में ही सोने को कहा। पूरी रात भाभी मेरी बाहों में सोई रहीं। सुबह जब मैं उठा तो भाभी पहले से उठ चुकी थीं।
मैं किचन में गया। भाभी वहाँ खड़ी थीं। उन्होंने सिर्फ एक पतली सी नाइट ड्रेस पहन रखी थी — बिना ब्रा के। उनके बड़े-बड़े स्तन नाइट ड्रेस के अंदर से साफ दिख रहे थे। निप्पल हल्के से उभरे हुए थे। नीचे पैंटी भी नहीं पहनी थी, सिर्फ नाइट ड्रेस ही थी।
भाभी ने मुझे देखते ही मुस्कुरा दिया। “राज… कल रात जो हुआ… वो बहुत अच्छा लगा।” उनकी आवाज में अभी भी उत्तेजना थी।
मैं उनके पीछे गया और उनकी कमर पकड़ ली। “भाभी… आज भी मन कर रहा है।” भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा। उनकी आँखें चमक रही थीं।
“राज… भाई अभी भी बाहर हैं। आज पूरा दिन हमारा है।” उन्होंने खुद मेरी टी-शर्ट पकड़कर ऊपर खींच दी।
मैंने भाभी की नाइट ड्रेस के स्ट्रैप्स उतार दिए। नाइट ड्रेस उनके शरीर से नीचे गिर गई। भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थीं — सुबह की रोशनी में उनका शरीर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।
मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम में ले गया और बेड पर लिटा दिया। भाभी ने मेरी पैंट और अंडरवियर उतार दिए। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था।
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। सबसे पहले उनके दोनों स्तनों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। “आह्ह्ह… राज… आज और जोर से चूसो…” भाभी कराहने लगीं।
उनके निप्पल मेरी जीभ के नीचे सख्त हो गए। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी चूत को छुआ — वो पहले से ही गीली हो चुकी थी।
“भाभी… तुम्हारी चूत आज भी पानी छोड़ रही है।” “आह्ह्ह… राज… अंदर डाल दो ना… मुझे फिर से चोदो…”
मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया।
“आह्हhhhh… देवर जी… आज और मोटा लग रहा है…” भाभी की आँखें बंद हो गईं, मुँह खुल गया।
मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। बेड हिल रहा था। भाभी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर धक्के के साथ “पच… पच… पच…” की आवाज आ रही थी।
“भाभी… आज तुम्हारी चूत और भी टाइट लग रही है…” “आह्ह्ह… राज… और जोर से… चोदो मुझे… मैं तुम्हारी हूँ आज…”
मैंने भाभी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई से चोदने लगा। भाभी के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। उनकी आँखें आधी बंद, होंठ काट रही थीं, और बार-बार “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… चोदो… चोदो…” बोल रही थीं।
कुछ देर बाद मैंने उन्हें घुमाकर डॉगी स्टाइल में कर दिया। भाभी घुटनों के बल खड़ी हो गईं, गांड ऊपर उठा ली। मैंने पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से मारने लगा। उनकी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था।
“आह्ह्ह… राज… गांड मत मारो… आह्ह्ह… और जोर से चोदो…” भाभी का सिर तकिये में दबा हुआ था, बाल बिखरे हुए थे।
आखिर में मैंने उन्हें फिर से पीठ के बल लिटाया और मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा। “भाभी… मैं आने वाला हूँ…” “अंदर ही छोड़ दो राज… आज पूरा माल अंदर डाल दो…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना सारा गर्म माल भाभी की चूत में छोड़ दिया। भाभी भी जोर से काँप उठीं — उनका दूसरा ऑर्गेज्म हो गया।
“आह्ह्हhhhh… राज… आह्ह्ह…”
हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। “राज… आज दिन भर तुम मुझे चोदते रहना… भाई शाम को आएँगे।”
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दिन भर की चुदाई
सुबह बेड पर पहली चुदाई के बाद हम दोनों थोड़ी देर आराम कर रहे थे। भाभी मेरी बाहों में लेटी हुई थीं। लेकिन भाभी की चूत अभी भी गीली थी और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था।
पहला राउंड — किचन में (सुबह 10 बजे) bhabhi bathroom sex story in hindi
भाभी ने कहा, “राज, नाश्ता बना दें?” मैंने उन्हें उठाया और किचन में ले गया। भाभी अभी भी पूरी तरह नंगी थीं। मैंने भी कपड़े नहीं पहने थे।
किचन में भाभी चूल्हे के पास खड़ी थीं। मैं उनके पीछे गया और अपना लंड उनकी गांड के बीच में रगड़ने लगा। भाभी ने सांस ली — “राज… अभी-अभी तो चोदा… फिर से?”
“भाभी, तुम्हारी नंगी गांड देखकर कंट्रोल नहीं हो रहा।” मैंने भाभी को किचन काउंटर पर झुका दिया। उनकी गांड ऊपर उठ गई। मैंने पीछे से लंड डाला और जोर से धक्का मारा।
“आह्ह्ह… राज… किचन में मत करो… कोई आ गया तो…” लेकिन भाभी की चूत पहले से ही गीली थी। मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
“पच… पच… पच…” की आवाज पूरे किचन में गूँज रही थी। भाभी का सिर आगे झुका हुआ था, बाल बिखरे हुए थे। “आह्ह्ह… देवर जी… और जोर से… किचन में चोद रहे हो मुझे…”
मैंने उनकी एक टाँग उठा ली और और गहराई से मारने लगा। भाभी की चूत ने मेरे लंड को कस लिया। “आह्ह्ह… राज… मैं झड़ने वाली हूँ…”
भाभी जोर से काँपी और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने भी अंदर ही माल छोड़ दिया।
दूसरा राउंड — सोफे पर (दोपहर 1 बजे) bhabhi bathroom sex story in hindi
नाश्ते के बाद हम लिविंग रूम में सोफे पर बैठे थे। टीवी चल रहा था। भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया। “राज… फिर से खड़ा हो गया?”
मैंने भाभी को सोफे पर लिटा दिया। इस बार मिशनरी पोजीशन में। भाभी ने खुद अपनी टाँगें चौड़ी कर लीं। “आज दिन भर चोदते रहना मुझे…”
मैंने लंड अंदर डाला और धीरे-धीरे चोदने लगा। भाभी की आँखें मेरी आँखों में थीं। “राज… तुम्हारा लंड कितना अच्छा लगता है… आह्ह्ह…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। सोफे पर भाभी के स्तन उछल रहे थे। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… और जोर से चोदो… देवर जी…” भाभी ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए।
इस बार भाभी ने मुझे घुमाया और खुद ऊपर बैठ गई (काउगर्ल)। वे मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगीं। “आह्ह्ह… राज… मेरा लंड… पूरा अंदर ले रही हूँ…”
भाभी की गांड मेरे हाथों में थी। मैं उनकी गांड दबा रहा था। कुछ देर बाद भाभी फिर से काँपने लगीं और मैंने भी दूसरी बार अंदर माल छोड़ दिया।
तीसरा राउंड — बाथरूम में (शाम 5 बजे) bhabhi bathroom sex story in hindi
शाम को भाभी ने कहा, “राज, चलो नहा लेते हैं।” हम दोनों बाथरूम में गए। शॉवर ऑन किया। गर्म पानी गिरने लगा।
भाभी ने मुझे दीवार से लगा लिया और खुद घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरा लंड मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगीं। “गग… गग…” की आवाज पानी की फुहार के साथ आ रही थी।
“भाभी… तुम्हारा मुँह… आह्ह्ह…” भाभी ने लंड चूसते हुए मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें चमक रही थीं।
फिर भाभी खड़ी हुईं। मैंने उन्हें उठाकर दीवार से लगा दिया। एक टाँग उठाकर लंड अंदर डाल दिया। पानी दोनों के शरीर पर गिर रहा था।
“आह्ह्ह… राज… बाथरूम में फिर से चोद रहे हो…” “भाभी… तुम्हारी चूत आज भी गीली है…”
मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। भाभी की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। “आहhhhh… चोदो… चोदो… मैं आज तुम्हारी हूँ…”
इस बार भाभी ने मुझे और जोर से पकड़ लिया। दोनों एक साथ झड़ गए।
चौथा राउंड — फिर बेड पर (रात 8 बजे) bhabhi bathroom sex story in hindi
नहाने के बाद हम बेड पर लेटे थे। भाभी ने खुद मेरे ऊपर चढ़कर लंड अंदर ले लिया। इस बार धीरे-धीरे और प्यार से चुदाई हुई। भाभी बार-बार “राज… मैं तुम्हें प्यार करती हूँ…” बोल रही थीं।
हमने कुल 4 बार चुदाई की — किचन, सोफे, बाथरूम और बेड पर।
भाभी पूरी तरह संतुष्ट लग रही थीं। उनके शरीर पर कहीं-कहीं मेरे दाँतों के निशान थे।