मधु भाभी को होटल में ले जाकर जमकर चोदा
Bhabhi Devar Hotel Sex Story
मेरा नाम राहुल है। उम्र 26 साल। मेरे बड़े भाई अजय की शादी मधु भाभी से हुई थी। मधु भाभी की उम्र 29 साल थी। गोरा चिट्टा रंग, लंबे घने काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे-मोटे होंठ और शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाता। उनके स्तन इतने बड़े और भरे हुए थे कि ब्लाउज फटने को होता। कमर पतली और नितंब इतने गोल-मोटे और उभरे हुए कि साड़ी में भी लहराते रहते। मैं बचपन से ही मधु भाभी पर दीवाना था, लेकिन कभी कुछ जाहिर नहीं किया। वो मेरी भाभी थीं।
भैया अक्सर बिजनेस के लिए बाहर रहते। इस बार तो 15 दिन के लिए विदेश चले गए थे। घर पर मधु भाभी अकेली थीं। मैं उनके घर से सिर्फ 10 मिनट की दूरी पर रहता था।
एक शाम फोन आया। “हेलो राहुल… क्या कर रहे हो ?” भाभी की आवाज थोड़ी उदास लग रही थी। “कुछ नहीं भाभी, घर पर ही हूँ। आप बताओ।” “अरे यार, अकेली बोर हो रही हूँ। आ जाओ ना थोड़ी देर। बातें करनी हैं।”
मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैं तुरंत तैयार होकर उनके घर पहुँच गया। दरवाजा खोला तो भाभी ने लाल रंग की सिल्क साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज काफी गहरा था, उनकी सफेद छाती का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। बाल खुले हुए, थोड़े गीले। परफ्यूम की खुशबू पूरे घर में फैली हुई थी।
“आओ राहुल, बैठो।” हम सोफे पर बैठे। बातें शुरू हुईं।
भाभी: “राहुल, तुम्हारे भाई को सिर्फ पैसे की फिक्र है। मुझे समय ही नहीं देते। रात को आते हैं तो सीधे सो जाते हैं। मैं अकेली महसूस करती हूँ। कभी-कभी तो लगता है शादी ही क्यों की।”
मैं: “भाभी, आप इतनी खूबसूरत और सेक्सी हो… भाई को आपकी हर रात संभालनी चाहिए। अगर मैं उनकी जगह होता तो…”
भाभी मुस्कुराईं और मेरी तरफ देखा। “अगर तुम होते तो क्या करते?”
मैंने गहरी साँस ली। “मैं आपको हर रोज खुश रखता भाभी। आपकी हर इच्छा पूरी करता। आपकी हर रात… यादगार बनाता।”
भाभी चुप हो गईं। उनके गाल हल्के लाल हो गए। उन्होंने साड़ी का पल्लू थोड़ा और नीचे किया, शायद गर्मी लग रही थी।
मैंने आगे कहा, “भाभी, आज चलो बाहर घूमते हैं। डिनर करते हैं, थोड़ी सी मूवी देखते हैं। आपका मन बदल जाएगा।”
भाभी पहले तो मानी नहीं, लेकिन मैंने जोर दिया तो तैयार हो गईं। उन्होंने साड़ी उतारकर टाइट ब्लू जींस और व्हाइट टॉप पहना। टॉप इतना टाइट था कि उनके ब्रा के निशान और स्तनों का आकार साफ दिख रहा था।
हम मेरी कार में निकले। रास्ते में अचानक आसमान गरजा और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश इतनी भारी थी कि आगे कुछ दिख नहीं रहा था। सड़कें जलमग्न हो गईं। ट्रैफिक पूरी तरह जाम।
मैंने कहा, “भाभी, वापस जाना अब नामुमकिन है। पास में ही ‘ग्रैंड पैलेस’ नाम का अच्छा होटल है। चलो वहाँ रुक जाते हैं। सुबह बारिश रुकने पर निकलेंगे।”
भाभी थोड़ी घबराईं। “लेकिन राहुल… होटल में रात भर? अकेले हम दोनों?”
मैं: “भाभी, हम भाई-बहन हैं। कोई गलत बात नहीं होगी। बारिश देखिए, कितनी तेज है।”
आखिरकार भाभी मानीं। हम होटल पहुँचे। मैंने रिसेप्शन पर जाकर डबल बेड वाला रूम बुक किया। भाभी थोड़ी शर्मिंदा थीं, लेकिन चुप रहीं।
रूम में पहुँचे। कमरा बड़ा, खूबसूरत, बड़ी सी बेड, एसी चल रहा था और खिड़की से बारिश का नजारा दिख रहा था।
भाभी ने कहा, “मैं नहा कर आती हूँ।” वो बाथरूम में चली गईं। मैं बेड पर बैठा, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सोच रहा था – आज शायद मौका मिल जाए। मेरा लंड पहले से ही अर्ध-खड़ा हो चुका था।
10-12 मिनट बाद भाभी बाथरूम से निकलीं। उन्होंने नहाया था, बाल अभी भी थोड़े गीले थे। पहना हुआ था एक लाल रंग का स्लीवलेस नाइट गाउन जो घुटनों तक था। गाउन थोड़ा पतला और चमकदार था। अंदर ब्लैक ब्रा और पैंटी साफ दिख रही थी। उनके बड़े स्तन गाउन में लहरा रहे थे। जब वो चलीं तो गाउन उनके नितंबों पर चिपक रहा था।
“कैसी लग रही हूँ राहुल?” भाभी ने शरारत से पूछा।
मैंने गले से आवाज निकाली, “बहुत… बहुत खूबसूरत और सेक्सी भाभी।”
हम दोनों बड़ी बेड पर बैठ गए। टीवी ऑन किया लेकिन कोई ध्यान नहीं लगा। बारिश की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
भाभी: “राहुल, आज तुमने मुझे बहुत मदद की। अगर तुम न होते तो मैं अकेली फंस जाती।”
मैं: “भाभी, मैं हमेशा आपके लिए हूँ। आप मेरी भाभी हो… लेकिन आज कुछ और महसूस हो रहा है।”
भाभी: “क्या महसूस हो रहा है?”
मैंने उनकी जांघ पर धीरे से हाथ रख दिया। भाभी ने हाथ नहीं हटाया। “भाभी, आप बहुत सेक्सी हो। आपका शरीर देखकर मेरा कंट्रोल टूट जाता है। आज जब आप इस गाउन में आईं… तो मेरा लंड खड़ा हो गया।”
भाभी शर्मा गईं, लेकिन उनकी साँसें तेज हो गई थीं। उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में इच्छा साफ दिख रही थी।
“राहुल… मैं तुम्हारी भाभी हूँ।” “मुझे पता है भाभी… लेकिन आज रात कुछ और बनना चाहता हूँ।”
हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। हमारी जांघें छू रही थीं। मेरा हाथ अब उनकी जांघ पर था। भाभी की साँसें गर्म हो रही थीं। कमरे में सन्नाटा था। सिर्फ बारिश की आवाज और हमारे दिलों की धड़कन।
मैंने धीरे से कहा, “भाभी… आज कुछ मत सोचो। बस…”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं। उनके होंठ थोड़े खुले थे। गाउन का ऊपरी बटन थोड़ा खुला था, उनकी सफेद छाती का बड़ा हिस्सा दिख रहा था। मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ था और शायद भाभी को भी एहसास हो रहा था।
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होटल रूम में मधु भाभी की जमकर चुदाई
मैंने भाभी को धीरे से अपनी बाहों में भर लिया। उनकी नरम छाती मेरी छाती से सट गई। मैंने उनके गीले, गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले धीरे-धीरे चूमा, फिर उनकी निचली होंठ को चूसने लगा। भाभी ने भी गर्मजोशी से जवाब दिया। उनके होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में घुल-मिल गए। मैंने अपनी जीभ उनकी मुंह में डाली, वो भी अपनी जीभ मेरी मुंह में घुसा दीं। हम गहरे, गीले और लंबे किस में खो गए।
भाभी की साँसें तेज हो गई थीं। “हम्म्म्म… राहुल…” उन्होंने हल्का सा कराहा मेरे मुंह में। मैंने उनके गालों को चूमा, फिर गर्दन पर, फिर कान के पास। भाभी ने मेरी कमर को कसकर पकड़ लिया।
मैंने उनके लाल नाइट गाउन को ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। गाउन उनकी जांघों से ऊपर सरकता हुआ उनके पेट तक आ गया। भाभी ने हाथ ऊपर उठा दिए। मैंने गाउन को एक झटके में उनके सिर से निकाल दिया। अब भाभी सिर्फ ब्लैक ब्रा और ब्लैक पैंटी में मेरे सामने थीं।
उनके बड़े-बड़े स्तन ब्लैक ब्रा में बहुत टाइट लग रहे थे। ब्रा के कप से उनकी सफेद छाती बाहर निकलने को बेताब थी। मैंने दोनों हाथों से उनके स्तनों को दबाया। “आह्ह्ह… राहुल…” भाभी कराह उठीं।
मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा ढीली हो गई। मैंने ब्रा को आगे की तरफ खींचकर उनके स्तनों से अलग कर दिया। उनके दोनों स्तन बाहर आ गए – बड़े, गोल, सफेद, निप्पल्स गुलाबी और कड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा। दूसरा स्तन हाथ में लेकर दबा रहा था। भाभी ने सिर पीछे झुकाया, आँखें बंद कर लीं और जोर से कराहने लगीं।
“आह्ह्ह… हाँ… चूसो… और जोर से चूसो राहुल… भाभी के स्तन तुम्हारे हैं आज… उउउम्म्म्म…”
मैंने उनके दूसरे स्तन को भी चूसा, निप्पल को दाँतों से हल्का काटा। भाभी का शरीर काँप रहा था।
अब मैंने उनके ब्लैक पैंटी पर हाथ फेरा। पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर नीचे की तरफ खींचा। भाभी ने कमर उठा दी ताकि पैंटी आसानी से निकल जाए। पैंटी उनकी जांघों से घुटनों तक और फिर पैरों से निकाल दी।
अब मधु भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थीं। उनकी चूत साफ दिख रही थी – गुलाबी, फूली हुई, बालों से सजी हुई और चमकदार गीली। चूत के होठ थोड़े खुले हुए थे और अंदर से चमक रहा था।
भाभी ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। शर्ट उतार दी। फिर मेरी जींस का बटन और जिप खोली। मैंने खुद जींस और अंडरवियर दोनों एक साथ नीचे उतार दिए। मेरा मोटा, लंबा और तना हुआ लंड बाहर आ गया – 7 इंच से ज्यादा, नसें उभरी हुई, सिरा चमकदार।
भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लिया। “वाह… इतना मोटा और गरम… भाभी की चूत फट जाएगी आज…” उन्होंने धीरे से बोला और मेरे लंड को सहलाने लगीं।
मैंने भाभी को बेड पर लिटा दिया। उनकी टाँगें फैला दीं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। पहले तो मैंने अपने लंड को उनकी गीली चूत पर रगड़ना शुरू किया। चूत के होठों पर लंड का सिरा घुमाने लगा। भाभी बेचैन हो गईं।
“राहुल… अब मत तड़पाओ… डाल दो… अपनी भाभी की चूत में अपना लंड घुसा दो…”
मैंने धीरे से लंड का सिरा उनकी चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे धक्का लगाया। लंड का पहला हिस्सा अंदर घुस गया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। “आह्ह्ह्ह… धीरे… मोटा है तेरा… उउउम्म्म्म…”
मैंने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। भाभी ने मेरी पीठ को नाखूनों से खरोंच लिया। फिर एक जोरदार धक्का – पूरा लंड उनकी चूत में घुस गया। भाभी चीख पड़ीं, “आह्ह्ह्ह्ह… राहुल… पूरा भर गया… भाभी की चूत फूल गई…”
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ भाभी की चूत से “पुच-पुच” की आवाज आ रही थी। भाभी की आँखें बंद थीं, मुंह खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई।
“हाँ… और जोर से… चोदो मुझे… भाभी को अपनी रंडी बना लो आज… आह्ह्ह… और गहरा… उउउम्म्म्म…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। भाभी के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से उनका एक स्तन दबाया और दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़कर और जोर से चोदने लगा।
भाभी का चेहरा लाल हो गया था। पसीना निकल रहा था। बाल बिखर गए थे। वो बार-बार कराह रही थीं – “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… भाभी की चूत ले लो… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा लग रहा है… और जोर से मारो… फाड़ दो चूत को…”
मैं भी पसीने से भीग रहा था। “भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गर्म है… जैसे चूस रही हो मेरा लंड… आज रात भर चोदूंगा तुम्हें…”
मैंने पोजीशन बदली। भाभी को घुटनों के बल बिठाया (डॉगी स्टाइल)। उनके नितंब मेरे सामने थे। मैंने पीछे से लंड डाला। इस बार और गहरा घुसा। भाभी का सिर तकिये में दब गया।
“आह्ह्ह्ह… ये पोजीशन… बहुत गहरा जा रहा है… मर जाऊंगी… चोदो… जोर से चोदो देर तक…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाए। उनके नितंब लाल हो गए थे मेरे थप्पड़ों से। भाभी चीख-चीख कर बोल रही थीं, “राहुल… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह… हो गया… आ गया… उउउम्म्म्म…”
उनका शरीर काँप उठा। चूत ने मेरे लंड को और भी टाइट पकड़ लिया। मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। 10-15 जोरदार धक्कों के बाद मैं भी झड़ गया। मेरा गर्म-गर्म पानी भाभी की चूत में भर गया।
भाभी थककर बेड पर गिर पड़ीं। मैं भी उनके ऊपर गिर गया। हम दोनों पसीने से लथपथ, साँसें फूल रही थीं।
लेकिन लंड अभी भी उनकी चूत में था। थोड़ी देर बाद फिर खड़ा हो गया।
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ ना… फिर से चोदो मुझे…”
मैंने फिर से उनको चोदा – इस बार मिशनरी में, फिर साइड में, फिर उनको ऊपर बैठाकर। कुल मिलाकर हमने तीन बार चुदाई की। हर बार भाभी जोर-जोर से कराहती रहीं, गंदी-गंदी बातें बोलती रहीं और मैं उन्हें और जोर से चोदता रहा।
आखिर में दोनों पूरी तरह थक चुके थे। भाभी मेरी बाहों में सिर रखकर लेट गईं।
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सुबह की चुदाई – होटल रूम में मधु भाभी के साथ
रात भर की जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों थककर सो गए थे। भाभी मेरी छाती पर सिर रखकर नंगी लेटी हुई थीं। सुबह के 7 बजे की बात थी। कमरे में हल्की रोशनी आ रही थी। पर्दे से सूरज की किरणें आ रही थीं।
मैं सबसे पहले जागा। भाभी अभी भी सो रही थीं। उनकी नंगी पीठ मेरी तरफ थी। बाल बिखरे हुए, कमर पर हल्का पसीना सूख रहा था। उनके गोल नितंब सुबह की रोशनी में चमक रहे थे। मेरा लंड सुबह-सुबह ही खड़ा हो चुका था – सुबह का वो खास वाला तना हुआ लंड।
मैंने धीरे से भाभी को अपनी तरफ घुमाया। वो आधी नींद में थीं। उनकी आँखें अभी भी बंद थीं। मैंने उनके एक स्तन को हाथ में लिया और धीरे से दबाया। भाभी ने हल्का सा कराहा, “हम्म्म्म…” लेकिन सोती रही।
मैंने अपना तना हुआ लंड उनकी जांघ पर रगड़ना शुरू किया। भाभी की आँखें खुल गईं। उन्होंने नींद भरी आवाज में कहा, “राहुल… सुबह हो गई क्या? अभी तो नींद आ रही है…”
मैंने उनके होंठों पर चूम लिया और फुसफुसाया, “भाभी… सुबह का लंड देखो कितना खड़ा है। तुम्हारी चूत में डालना चाहता हूँ।”
भाभी ने नीचे देखा। मेरा मोटा लंड उनकी जांघ से सटा हुआ था। उन्होंने मुस्कुराते हुए हाथ बढ़ाया और लंड को पकड़ लिया। “वाह… सुबह-सुबह भी इतना गरम और तना हुआ… भाभी की चूत अभी भी कल रात का पानी महसूस कर रही है।”
मैंने भाभी को पीठ के बल लिटा दिया। उनकी टाँगें फैला दीं। सुबह की रोशनी में उनकी चूत साफ दिख रही थी – थोड़ी सूजी हुई, अभी भी गीली। मैं उनके ऊपर चढ़ गया।
पहले तो मैंने लंड को उनकी चूत पर रगड़ा। चूत के होठों पर लंड का सिरा घुमाने लगा। भाभी ने आँखें बंद कर लीं और सिर तकिये में दबा लिया। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे से… सुबह की चूत अभी नरम है…”
मैंने धीरे से धक्का लगाया। लंड आसानी से अंदर घुस गया क्योंकि चूत कल रात से ही गीली और खुली हुई थी। पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर चला गया। भाभी ने जोर से साँस ली, “उउउम्म्म्म… पूरा भर गया… सुबह-सुबह ही भाभी को चोद रहे हो…”
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ भाभी की चूत से हल्की “पुच-पुच” की आवाज आ रही थी। भाभी ने अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट लीं और मुझे और अंदर खींचने लगीं।
“हाँ… ऐसे ही… सुबह की चुदाई बहुत मस्त होती है… आह्ह्ह… और गहरा… उउउम्म्म्म…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। भाभी के स्तन मेरे हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा जबकि लंड जोर-जोर से उनकी चूत में घुस रहा था। भाभी का चेहरा सुबह की रोशनी में लाल हो रहा था। आँखें आधी बंद, होंठ काँप रहे थे।
“राहुल… तुम बहुत अच्छा चोदते हो… भाभी की चूत तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है… आह्ह्ह… जोर से… फाड़ दो सुबह वाली चूत को…”
मैंने भाभी को उठाया और उनको अपनी गोद में बैठा लिया (काउगर्ल पोजीशन)। भाभी ने खुद मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। उनके बाल खुले हुए थे, स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे। मैं एक-एक स्तन मुंह में लेकर चूस रहा था और भाभी जोर-जोर से कूद रही थीं।
“आह्ह्ह… हाँ… इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है… मेरा पेट तक छू रहा है तेरा लंड… उउउम्म्म्म… मैं झड़ने वाली हूँ…”
भाभी का शरीर काँपने लगा। उन्होंने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और जोर से चीख पड़ीं, “आह्ह्ह्ह्ह… हो गया… आ गया… चूत से पानी निकल रहा है… राहुल… आह्ह्ह…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को और टाइट पकड़ लिया। मैं भी रफ्तार बढ़ा दी। भाभी को पीठ के बल लिटाकर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
“भाभी… तुम्हारी चूत सुबह भी कितनी गर्म और टाइट है… आज सुबह तुम्हें दो बार चोदूंगा…”
10-12 जोरदार धक्कों के बाद मैं भी झड़ गया। मेरा गर्म पानी भाभी की चूत में भर गया। भाभी ने आँखें बंद करके मुस्कुराते हुए कहा, “सुबह का पानी… भाभी की चूत में भर दिया… अच्छा लगा…”
हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में लिया और बोलीं, “राहुल… आज से हर हफ्ते हमें होटल आना पड़ेगा। मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
मैंने फिर से उनके होंठ चूमे ”
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घर में चुदाई – मधु भाभी के साथ
होटल में सुबह की जोरदार चुदाई के बाद हमने ब्रेकफास्ट किया। भाभी का चेहरा अभी भी चमक रहा था। चेकआउट के समय भाभी ने रिसेप्शनिस्ट को देखते हुए मेरे कान में फुसफुसाया, “अब घर चलो… घर में और आराम से चोदना।”
हम होटल से निकले। कार में बैठते ही भाभी ने मेरा हाथ अपनी जांघ पर रख दिया। पूरा रास्ता हम बातें करते रहे – कल रात और सुबह की चुदाई के बारे में। भाभी बार-बार मुस्कुरा रही थीं।
घर पहुँचे। भाई साहब अभी भी विदेश में थे, इसलिए पूरा घर खाली था। जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया, भाभी ने मुझे दीवार से लगा लिया और गहरे किस करने लगीं।
“राहुल… घर में अब कोई नहीं है। आज जितना मरजी चोद लो मुझे…”
मैंने भाभी को गोद में उठा लिया और सीधे उनके बेडरूम में ले गया। भाभी ने आज नीली साड़ी पहनी हुई थी। मैंने साड़ी का पल्लू खींचा और फेंक दिया। फिर ब्लाउज के हुक खोले। ब्लाउज उतारते ही उनके बड़े स्तन बाहर आ गए – ब्रा पहनी हुई थी। मैंने ब्रा के हुक खोले और ब्रा फेंक दी।
भाभी ने खुद साड़ी की पेटी खोली और पेटीकोट नीचे गिरा दिया। अब सिर्फ पैंटी बची थी। मैंने पैंटी को एक झटके में नीचे खींच दिया। भाभी पूरी तरह नंगी हो गईं।
मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था।
भाभी बेड पर लेट गईं और टाँगें फैला दीं। “घर में चोदो मुझे… होटल से भी ज्यादा जोर से…”
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड को उनकी चूत पर रगड़ा और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया। भाभी चीख पड़ीं, “आह्ह्ह्ह… घर में और मस्त लग रहा है… चोदो… जोर से चोदो…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। भाभी की चूत कल रात और सुबह से ही खुली हुई थी, इसलिए लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ भाभी के स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर-जोर से दबाते हुए चोद रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन देखने लायक थे – आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर, चेहरा लाल, पसीना निकल रहा था। वो बार-बार बोल रही थीं, “आह्ह्ह… राहुल… घर में चोदना बहुत अच्छा लग रहा है… भाभी की चूत तुम्हारे लंड की हो गई है… और जोर से मारो… फाड़ दो चूत को… उउउम्म्म्म…”
मैं भी गंदी बातें बोल रहा था, “भाभी… घर में चोदने का मजा ही अलग है… तुम्हारी चूत आज और ज्यादा गीली है… मैं आज तुम्हें घर के हर कोने में चोदूंगा…”
मैंने पोजीशन बदली। भाभी को घुटनों के बल करवाया (डॉगी स्टाइल)। उनके नितंब मेरे सामने थे। मैंने पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। भाभी का सिर तकिये में दबा हुआ था।
“आह्हhhhh… ये पोजीशन घर में और शर्मनाक लग रही है… लेकिन बहुत मस्त… चोदो… थप्पड़ मारो नितंबों पर…”
मैंने उनकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। भाभी चीख-चीख कर बोल रही थीं।
फिर मैंने भाभी को उठाया और सोफे पर ले गया। भाभी सोफे के आर्मरेस्ट पर झुक गईं और मैंने पीछे से फिर चोदा।
“घर का सोफा… अब हमेशा याद आएगा जब भी बैठेंगे…” भाभी हँसते हुए बोलीं।
मैंने भाभी को सोफे पर लिटाया और मिशनरी में फिर से चोदा। इस बार बहुत रफ और तेज। भाभी के नाखून मेरी पीठ में गड़ गए थे।
“राहुल… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह… हो गया… चूत से पानी निकल रहा है… आह्ह्ह्ह्ह…”
भाभी का शरीर काँप उठा। मैंने भी अंतिम जोरदार धक्के मारे और उनकी चूत में ही झड़ गया।
हम दोनों सोफे पर नंगे लेट गए। भाभी ने मेरी छाती पर सिर रखा और कहा, “घर में चोदना होटल से भी ज्यादा मजेदार है… अब रोज चोदना मुझे।”
मैंने उनके होंठ चूमे और कहा, “जितना चाहो भाभी… घर खाली है 15 दिन तक।”
शाम की साड़ी वाली चुदाई – घर में खड़े-खड़े
दोपहर की चुदाई के बाद हम दोनों नंगे सोफे पर ही सो गए थे। शाम के 6 बजे के आसपास भाभी जाग गईं। उन्होंने मुझे चूमा और बोलीं, “राहुल, मैं नहा कर आती हूँ। आज शाम को साड़ी पहनूँगी… तुम्हें अच्छी लगती है ना?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत अच्छी लगती है भाभी… खासकर जब साड़ी में से तुम्हारी गांड और स्तन बाहर निकलते हैं।”
भाभी नहाने चली गईं। 20 मिनट बाद जब वो नहाकर निकलीं तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
भाभी ने लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज गहरा था, उनकी सफेद छाती का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। साड़ी कमर से नीचे बहुत नीचे बाँधी हुई थी, जिससे उनकी गोल-गोल गांड का आकार साड़ी में साफ उभर रहा था। बाल खुले हुए, थोड़े गीले, और होठों पर हल्का लिपस्टिक।
भाभी ने कमरे में घूमकर मुझे दिखाया, “कैसी लग रही हूँ?”
मैं उठकर उनके पास गया और सीधे उनकी कमर पकड़ ली। “बहुत सेक्सी लग रही हो भाभी… अब तो साड़ी उतारने का मन नहीं कर रहा।”
मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और गहरे किस करने लगा। भाभी ने भी गर्मजोशी से जवाब दिया। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में घुल रहे थे। मैंने एक हाथ से उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और फेंक दिया। अब उनका ब्लाउज और पेट साफ दिख रहा था।
भाभी ने मेरी शर्ट के बटन खोले और शर्ट उतार दी। मैंने उनकी साड़ी को कमर से ऊपर उठाना शुरू किया। साड़ी उनकी जांघों तक आ गई। मैंने हाथ अंदर डालकर उनकी पैंटी पर हाथ फेरा। पैंटी पहले से ही गीली थी।
“भाभी… साड़ी में ही चोद दूँ क्या?” मैंने फुसफुसाया।
भाभी ने आँखें बंद करके सिर हिलाया, “हाँ… साड़ी उठाकर… खड़े-खड़े चोदो मुझे…”
मैंने उनकी पैंटी को एक तरफ खिसका दिया और अपनी पैंट का जिप खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। लंड पहले से ही तना हुआ था। मैंने भाभी की एक टाँग उठाई और दीवार से टिका दिया। फिर लंड को उनकी गीली चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के में अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… राहुल… साड़ी में चोदना… बहुत गंदा लग रहा है… लेकिन मस्त…” भाभी चीख पड़ीं।
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। साड़ी उनकी कमर पर उलझी हुई थी, ब्लाउज अभी भी पहना हुआ था। हर धक्के के साथ भाभी की साड़ी हिल रही थी और उनके स्तन ब्लाउज में उछल रहे थे।
भाभी ने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया था। उनकी आँखें आधी बंद थीं, मुंह खुला हुआ, और वो बार-बार कराह रही थीं, “आह्ह्ह… ऐसे ही… साड़ी उठाकर चोदो… भाभी को खड़े-खड़े चोद रहे हो… उउउम्म्म्म… और जोर से… फाड़ दो चूत को…”
मैं भी गंदी बातें बोल रहा था, “भाभी… साड़ी में तुम्हारी गांड कितनी मोटी लग रही है… लंड और ज्यादा खड़ा हो गया… आज साड़ी फाड़कर चोदूंगा…”
मैंने भाभी को सोफे की तरफ घुमाया। अब भाभी सोफे के आर्मरेस्ट पर झुक गई थीं, साड़ी अभी भी कमर पर उलझी हुई। मैंने पीछे से साड़ी और ऊपर उठाई और फिर से लंड घुसा दिया। इस बार और गहरा जा रहा था।
भाभी का सिर आगे झुका हुआ था, बाल लटक रहे थे। वो जोर-जोर से चीख रही थीं, “आह्हhhhh… ये पोजीशन… बहुत गंदी लग रही है… साड़ी में गांड उठाकर चुदवा रही हूँ… राहुल… और जोर से मारो… भाभी की चूत ले लो…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। साड़ी के कपड़े पर थप्पड़ की आवाज आ रही थी। भाभी का शरीर काँप रहा था।
“राहुल… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह… हो गया… चूत से पानी निकल रहा है… उउउम्म्म्म…”
भाभी का शरीर झटके खाने लगा। मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। 8-10 जोरदार धक्कों के बाद मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।
हम दोनों साँसें फूलते हुए सोफे पर गिर पड़े। भाभी ने साड़ी को ठीक किया लेकिन अभी भी नंगी कमर के साथ लेटी हुई थीं।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “साड़ी में चोदना… सबसे मस्त लगा आज।”
मैंने उनके होंठ चूमे और बोला, “अभी रात बाकी है भाभी…”
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रात की गांड वाली चुदाई – साड़ी में मधु भाभी की पहली बार
शाम की साड़ी वाली जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेट गए थे। रात के 11 बजे के आसपास भाभी ने मुझे अपनी बाहों में लिया और धीरे से मेरे कान में फुसफुसाया,
“राहुल… आज रात कुछ नया करना है।”
मैंने पूछा, “क्या भाभी?”
भाभी शर्मा गईं, लेकिन फिर बोलीं, “अब मेरी गांड मारो… आज पहली बार… साड़ी में ही…”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने भाभी को और कसकर पकड़ लिया। “पक्का भाभी? पहली बार है ना? दर्द होगा…”
भाभी ने मेरी आँखों में देखा और बोलीं, “हाँ… पहली बार है। लेकिन आज मन कर रहा है। तुम धीरे से करना… लेकिन करना जरूर।”
मैंने भाभी को पीठ के बल लिटा दिया। अभी भी वो लाल साड़ी में थीं। साड़ी कमर तक उलझी हुई थी। मैंने साड़ी को और ऊपर उठाया। अब उनकी नंगी कमर और जांघें साफ दिख रही थीं। मैंने उनकी पैंटी को नीचे खींचकर उतार दिया।
भाभी ने टाँगें फैला दीं। मैंने उनके दोनों नितंबों को हाथों से अलग किया। उनकी गांड का गुलाबी छेद साफ दिख रहा था – अभी तक कभी छुआ भी नहीं गया था।
मैंने पहले अपनी उंगली पर थूक लगाया और धीरे से उनके गांड के छेद पर रगड़ना शुरू किया। भाभी ने साँस ली, “आह्ह्ह… अजीब सा लग रहा है…”
मैंने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। भाभी का शरीर काँप गया। “उउउम्म्म्म… दर्द हो रहा है… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है…”
मैंने दूसरी उंगली भी डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी की गांड धीरे-धीरे ढीली हो रही थी। मैंने और थूक लगाया और तीन उंगलियाँ अंदर डाल दीं। भाभी अब जोर-जोर से कराह रही थीं, “आह्ह्ह… राहुल… धीरे… गांड फट रही है… लेकिन मत रुको…”
मैंने अपनी उंगलियाँ निकालीं और अपना लंड थूक से गीला किया। फिर लंड का सिरा भाभी की गांड पर रखा।
“भाभी… अब डाल रहा हूँ… बहुत धीरे… अगर दर्द हो तो बता देना।”
भाभी ने तकिया मुंह में दबा लिया और सिर हिलाया।
मैंने बहुत धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा उनकी गांड में घुसने लगा। भाभी का शरीर तन गया। “आह्ह्ह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रुको… उउउम्म्म्म…”
मैंने रुककर उनकी कमर सहलाई और बोला, “Relax करो भाभी… साँस छोड़ो…”
थोड़ी देर बाद भाभी ने कहा, “अब धीरे से आगे बढ़ाओ…”
मैंने फिर से दबाव डाला। आधा लंड उनकी गांड में चला गया। भाभी के नाखून चादर में गड़ गए थे। आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन मुंह से कराह भी निकल रही थी। “आह्ह्ह… जल रहा है… लेकिन… अंदर भर रहा है… अच्छा लग रहा है… और डालो…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुसा दिया। भाभी की गांड अब मेरे लंड को पूरी तरह कसकर पकड़ रही थी।
“भाभी… तुम्हारी गांड कितनी टाइट है… मेरा लंड फटने वाला है…”
मैंने बहुत धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी का दर्द धीरे-धीरे pleasure में बदल रहा था। अब वो खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं।
“आह्ह्ह… अब और जोर से… दर्द कम हो गया… चोदो मेरी गांड… राहुल… आज मेरी गांड तोड़ दो…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। भाभी की गांड से “पच-पच” की आवाज आ रही थी। साड़ी अभी भी उनकी कमर पर उलझी हुई थी। मैंने साड़ी को और ऊपर खींचा और उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
भाभी का चेहरा तकिये में दबा हुआ था। बाल बिखर गए थे। पसीना निकल रहा था। वो चीख-चीख कर बोल रही थीं, “आह्हhhhh… मेरी गांड फट गई… लेकिन मस्त लग रहा है… और जोर से… गांड में लंड घुसा दो… उउउम्म्म्म… मैं झड़ने वाली हूँ…”
मैंने भाभी को घुटनों के बल करवाया (डॉगी स्टाइल)। साड़ी अभी भी पहनी हुई थी। मैंने पीछे से फिर से लंड गांड में डाला और इस बार और तेज चोदने लगा। भाभी की गांड लाल हो गई थी मेरे थप्पड़ों से।
“राहुल… गांड में चोदना… बहुत गंदा और मस्त है… आज से मेरी गांड भी तुम्हारी… चोदो… फाड़ दो… आह्ह्ह्ह्ह…”
भाभी का शरीर काँपने लगा। उनकी गांड ने मेरे लंड को और टाइट पकड़ लिया। मैंने भी अंतिम जोरदार धक्के मारे और भाभी की गांड में ही झड़ गया।
हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। भाभी की गांड से मेरा पानी बाहर निकल रहा था। भाभी ने मुझे गले लगाया और बोलीं, “राहुल… आज पहली बार गांड मरवाया… दर्द हुआ लेकिन… बहुत अच्छा लगा। अब रोज मारना मेरी गांड…”
मैंने उनके होंठ चूमे और कहा, “जितना मरजी भाभी… तुम्हारी गांड अब मेरी है।”
सुबह की देखभाल और गांड वाली चुदाई
रात भर की जोरदार गांड चुदाई के बाद भाभी पूरी तरह थक चुकी थीं। सुबह 8 बजे जब मैं जागा तो भाभी अभी भी सो रही थीं। लेकिन जब वो उठने की कोशिश करने लगीं तो उनका चेहरा दर्द से तन गया।
“आह्ह्ह… राहुल…” भाभी कराह उठीं। “क्या हुआ भाभी?” मैंने पूछा।
भाभी शर्मा गईं और धीरे से बोलीं, “गांड में बहुत दर्द हो रहा है… चलने में तकलीफ हो रही है… कल रात बहुत जोर से मारा था ना…”
मैं मुस्कुराया और उन्हें वापस बेड पर लिटा दिया। “चिंता मत करो भाभी। मैं अभी दवाई लाता हूँ और तेल भी लगाता हूँ। जल्दी ठीक हो जाएगी।”
मैं किचन से पेनकिलर की गोली और पानी लाया। भाभी ने गोली खा ली। फिर मैंने मसाज ऑयल की बोतल उठाई।
“भाभी… अब पीठ के बल लेट जाओ। मैं तुम्हारी गांड में प्यार से तेल लगाता हूँ।”
भाभी शर्मा गईं लेकिन मानीं। उन्होंने साड़ी को कमर तक ऊपर उठा लिया और टाँगें थोड़ी फैला दीं। उनकी गांड अभी भी लाल और सूजी हुई थी। कल रात के निशान साफ दिख रहे थे।
मैंने अपने हाथों में तेल लिया और धीरे से उनके दोनों नितंबों पर लगाना शुरू किया। भाभी ने हल्का सा कराहा, “आह्ह्ह… हल्का हाथ रखना… बहुत दर्द है…”
मैंने बहुत प्यार से, धीरे-धीरे मसाज करना शुरू किया। दोनों हाथों से उनके नितंबों को दबाते हुए तेल लगाया। फिर अपनी उंगलियों पर तेल लगाकर उनके गांड के छेद पर धीरे से रगड़ने लगा।
भाभी की साँसें तेज हो गईं। “उउउम्म्म्म… राहुल… ये क्या कर रहे हो… दर्द भी हो रहा है… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है…”
मैंने धीरे से एक उंगली उनके गांड के छेद में डाली और तेल के साथ अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी का शरीर काँप रहा था।
“भाभी… ये तेल लगाने से जल्दी ठीक हो जाएगी। और जब ठीक हो जाएगी… तब मैं फिर से तुम्हारी गांड मार सकूँगा।”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं। उनके चेहरे पर दर्द और pleasure का मिश्रण था। “आह्ह्ह… राहुल… तुम बहुत नालायक हो… दर्द हो रहा है फिर भी… उंगली अंदर डाल रहे हो… आह्ह्ह…”
मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी। अब दो उंगलियाँ तेल के साथ उनकी गांड में जा रही थीं। भाभी की गांड धीरे-धीरे ढीली हो रही थी। मैंने तीसरी उंगली भी डाल दी। भाभी अब जोर से कराह रही थीं।
“राहुल… बस… मत करो… दर्द बढ़ रहा है… लेकिन… रुक मत… और तेल लगाओ…”
मैंने उंगलियाँ निकालीं और अपना लंड भी तेल से अच्छे से गीला किया। भाभी अभी भी पीठ के बल लेटी थीं। मैंने उनकी एक टाँग उठाई और धीरे से लंड उनके गांड के छेद पर रखा।
“भाभी… बस एक बार और… बहुत धीरे… तेल लगाया है इसलिए आसानी से घुस जाएगा।”
भाभी ने सिर हिलाया। “धीरे… बहुत धीरे… दर्द है…”
मैंने बहुत धीरे से दबाव डाला। तेल की वजह से लंड आसानी से अंदर घुसने लगा। भाभी का मुँह खुल गया। “आहhhhh… राहुल… अभी भी दर्द हो रहा है… लेकिन… अंदर भर रहा है… उउउम्म्म्म…”
मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया और बहुत धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी की आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन मुंह से कराह भी निकल रही थी।
“आह्ह्ह… दर्द… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है… तुम्हारा लंड… गांड में… उउउम्म्म्म… और धीरे… प्यार से चोदो…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर बहुत धीरे और प्यार से धक्के लगाए। भाभी का दर्द धीरे-धीरे pleasure में बदल रहा था। अब वो खुद अपनी गांड हिला रही थीं।
“राहुल… अब और जोर से… दर्द कम हो गया… चोदो… मेरी गांड फिर से तोड़ दो… आह्ह्ह…”
मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। भाभी अब जोर-जोर से चीख रही थीं। “आहhhhh… हो गया… चूत और गांड दोनों से पानी निकल रहा है… राहुल… मैं झड़ गई… उउउम्म्म्म…”
भाभी का शरीर काँप उठा। मैंने भी अंतिम धक्के मारे और उनकी गांड में ही झड़ गया।
हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे गले लगाया और बोलीं, “राहुल… दर्द तो है… लेकिन… तुमने बहुत प्यार से संभाला… अब रोज सुबह तेल लगाना… और फिर चोदना…”
मैंने उनके होंठ चूमे और कहा, “जैसा तुम कहो भाभी… अब तुम्हारी गांड मेरी है।”
सुबह की चूत वाली चुदाई – दर्द के बावजूद
मैंने अभी-अभी भाभी की गांड में तेल लगाकर बहुत धीरे-धीरे चोदा था। भाभी की गांड अभी भी लाल और सूजी हुई थी। मेरा लंड उनकी गांड से निकला तो भाभी ने गहरी साँस ली।
लेकिन भाभी ने अचानक मेरी तरफ देखा और बोलीं, “राहुल… गांड में अभी दर्द है… लेकिन अब मेरी चूत में डालो… मुझे चूत से चुदवाना है…”
मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने भाभी को चूमा और कहा, “पक्का भाभी? गांड में दर्द है ना?” “हाँ… दर्द है… लेकिन चूत बहुत गीली हो गई है… अब चोदो मुझे… चूत में…”
मैंने भाभी को पीठ के बल आराम से लिटा दिया। उनकी टाँगें फैला दीं। उनकी चूत पूरी तरह गीली और फूली हुई थी। कल रात और आज सुबह की चुदाई से चूत के होठ थोड़े खुले हुए थे।
मैंने अपना लंड (जो अभी भी तेल से गीला था) उनकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर घुसा दिया। भाभी ने आँखें बंद कर लीं और कराह उठीं, “आह्ह्ह… राहुल… चूत में… बहुत अच्छा लग रहा है… उउउम्म्म्म…”
मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी की चूत कल रात से ही खुली हुई थी, इसलिए लंड आसानी से घुस रहा था। हर धक्के के साथ भाभी की चूत से “पुच-पुच” की आवाज आ रही थी।
भाभी ने अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट लीं और मुझे और अंदर खींचने लगीं। “आह्ह्ह… और जोर से… चोदो… चूत में जोर से… गांड का दर्द भूल जाए… उउउम्म्म्म…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। भाभी के बड़े स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसते हुए चोद रहा था। भाभी का चेहरा लाल हो रहा था। पसीना निकल रहा था।
“राहुल… तुम बहुत अच्छा चोदते हो… चूत में लंड… बहुत मस्त लग रहा है… आह्ह्ह… और गहरा… फाड़ दो चूत को…”
मैंने भाभी को उठाया और उनको अपनी गोद में बैठा लिया (काउगर्ल पोजीशन)। भाभी ने खुद मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। उनकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल रही थी।
भाभी के बाल खुले हुए थे, स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे। मैं एक-एक स्तन चूस रहा था और भाभी जोर-जोर से कूद रही थीं।
“आह्हhhhh… ये पोजीशन… बहुत गहरा जा रहा है… चूत फट रही है… लेकिन मस्त… उउउम्म्म्म… मैं झड़ने वाली हूँ…”
भाभी का शरीर काँपने लगा। उन्होंने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और जोर से चीख पड़ीं, “आह्ह्ह्ह्ह… हो गया… चूत से पानी निकल रहा है… राहुल… आह्ह्ह…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को और टाइट पकड़ लिया। मैंने भाभी को फिर से पीठ के बल लिटाया और मिशनरी पोजीशन में जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
“भाभी… तुम्हारी चूत कितनी गर्म और गीली है… आज सुबह तुम्हें दो बार चोद चुका हूँ… फिर भी चूत मांग रही हो…”
भाभी अब सिर्फ कराह रही थीं। उनकी आँखें आधी बंद थीं, मुंह खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई। “राहुल… चोदो… और जोर से… आज मुझे मत छोड़ना… चूत में ही झड़ जाना…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। भाभी की चूत से पानी निकल रहा था। 10-12 जोरदार धक्कों के बाद मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।
हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में लिया और बोलीं, “राहुल… गांड में दर्द है… लेकिन चूत में चोदने का मजा… अलग ही है… आज पूरा दिन चोदना मुझे…”
मैंने उनके होंठ चूमे और कहा, “जैसा तुम कहो भाभी… घर खाली है… आज पूरा दिन तुम्हारी चूत और गांड दोनों चोदूंगा।”
शाम की साड़ी में – गांड और चूत दोनों की चुदाई
दोपहर की चुदाई के बाद हम दोनों थोड़ा आराम कर रहे थे। शाम के 6 बजे भाभी नहाकर निकलीं। उन्होंने फिर से वही लाल रेशमी साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज गहरा, साड़ी कमर से बहुत नीचे बाँधी हुई। बाल खुले, होठों पर हल्का लिपस्टिक।
भाभी कमरे में घूमकर आईं और मेरे पास आकर बोलीं, “राहुल… आज रात साड़ी में ही चोदना मुझे।” फिर वो शरमा गईं और धीरे से बोलीं, “आज रात साड़ी में… गांड और चूत दोनों मारना… दोनों छेद भर दो मेरे…”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने भाभी को दीवार से लगा लिया और गहरे किस करने लगा। भाभी ने भी गर्मजोशी से जवाब दिया। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और फेंक दिया। फिर ब्लाउज के हुक खोले। ब्लाउज उतारते ही उनके बड़े स्तन बाहर आ गए। मैंने ब्रा उतारी और दोनों स्तनों को हाथों में लेकर दबाया।
भाभी कराह उठीं, “आह्ह्ह… आज रात दोनों छेद… चोदना…”
मैंने उनकी साड़ी को कमर से ऊपर उठाया। भाभी ने खुद पैंटी उतार दी। अब सिर्फ साड़ी कमर पर उलझी हुई थी। मैंने भाभी को सोफे के आर्मरेस्ट पर झुका दिया। साड़ी ऊपर उठी हुई, उनकी गांड और चूत दोनों साफ दिख रहे थे।
पहले मैंने उनकी चूत में लंड डाला। एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया। भाभी चीख पड़ीं, “आह्ह्ह्ह… चूत में… जोर से… साड़ी में चोद रहे हो…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। साड़ी हिल रही थी, उनके स्तन आगे-पीछे उछल रहे थे। भाभी अब जोर-जोर से बोल रही थीं, “आह्ह्ह… चूत फाड़ दो… साड़ी में चोदना… बहुत गंदा और मस्त लग रहा है… उउउम्म्म्म…”
10 मिनट तक मैंने उनकी चूत को अच्छे से चोदा। फिर मैंने लंड निकाला और थूक लगाकर उनकी गांड पर रखा।
“भाभी… अब गांड में डाल रहा हूँ…” “हाँ… डालो… आज दोनों छेद… भर दो… आह्ह्ह…”
मैंने धीरे से लंड उनकी गांड में घुसाना शुरू किया। तेल और चूत के पानी की वजह से आसानी से घुस गया। भाभी का शरीर तन गया। “आहhhhh… गांड में… दर्द… लेकिन… चोदो… साड़ी में गांड मार रहे हो…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर धीरे-धीरे फिर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। साड़ी अभी भी उनकी कमर पर उलझी हुई थी। भाभी की गांड लाल हो रही थी।
“राहुल… साड़ी में दोनों छेद… चोद रहे हो… आज रात मुझे मत छोड़ना… आह्ह्ह… चूत और गांड दोनों… उउउम्म्म्म…”
मैंने पोजीशन बदली। भाभी को घुटनों के बल करवाया। साड़ी अभी भी पहनी हुई। मैंने पीछे से पहले चूत में डाला, फिर निकालकर गांड में डाला। भाभी अब पागल हो रही थीं।
“आहhhhh… ये क्या कर रहे हो… एक के बाद एक… चूत… गांड… चूत… गांड… मर जाऊंगी… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और जोर-जोर से चोदने लगा। भाभी का सिर आगे झुका हुआ था, बाल लटक रहे थे। वो चीख-चीख कर बोल रही थीं, “राहुल… आज रात साड़ी फाड़ दो… दोनों छेद तोड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज… चोदो… फाड़ो… आह्ह्ह्ह्ह…”
मैंने फिर से चूत में डाला और इस बार बहुत तेज चोदा। भाभी का शरीर काँप रहा था। “आहhhhh… हो गया… दोनों से पानी निकल रहा है… राहुल… मैं झड़ गई… उउउम्म्म्म…”
मैंने भी अंतिम जोरदार धक्के मारे और भाभी की चूत में झड़ गया।
हम दोनों सोफे पर नंगे लेट गए। भाभी ने साड़ी को ठीक किया लेकिन अभी भी साड़ी पहने हुए थीं।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल… आज रात साड़ी में दोनों छेद मारना… सबसे मस्त लगा। अब रात भर चोदना मुझे… साड़ी उतारे बिना…”
साड़ी में मुँह और गांड वाली चुदाई
पिछली चुदाई के बाद हम दोनों सोफे पर लेटे थे। भाभी अभी भी लाल साड़ी पहने हुए थीं। साड़ी कमर तक उलझी हुई थी, उनके स्तन बाहर थे।
भाभी ने अचानक उठकर मुझे देखा और शरारत से मुस्कुराईं। “राहुल… अब तुम लेट जाओ।”
मैं सोफे पर पीठ के बल लेट गया। भाभी ने साड़ी को और ऊपर उठाया और मेरे दोनों तरफ घुटनों के बल बैठ गईं। उनकी साड़ी मेरे चेहरे के पास लटक रही थी।
फिर भाभी ने धीरे से झुककर मेरा लंड (जो अभी भी चूत और गांड के पानी से गीला था) मुंह में ले लिया।
“उउउम्म्म्म…” भाभी ने गहरे से चूसा। उनका मुंह गर्म था। उन्होंने लंड को पूरा मुंह में लिया और ऊपर-नीचे करने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी।
मैं सिर पीछे झुकाकर कराह उठा, “आह्ह्ह… भाभी… साड़ी में मुँह में ले रही हो… बहुत गंदा और मस्त लग रहा है…”
भाभी ने लंड को और गहरा लिया। उनका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था। साड़ी के कपड़े मेरे पेट पर गिर रहे थे। भाभी की लंबी बाल मेरे जांघों पर छू रहे थे। उन्होंने लंड को चूसते हुए आँखें ऊपर उठाकर मुझे देखा।
“आह्ह्ह… भाभी… तुम बहुत अच्छा चूस रही हो… उउउम्म्म्म…”
भाभी ने लंड को मुंह से निकाला। लंड चमक रहा था उनके थूक से। फिर उन्होंने मेरे ऊपर चढ़कर बैठने की कोशिश की।
“अब गांड में बैठती हूँ…” भाभी ने फुसफुसाया।
उन्होंने साड़ी को और ऊपर उठाया, एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी गांड के छेद पर रखा। फिर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।
लंड का सिरा उनकी गांड में घुसने लगा। भाभी का चेहरा तन गया। “आहhhhh… दर्द… लेकिन… अंदर ले रही हूँ… उउउम्म्म्म…”
मैंने उनकी कमर पकड़ ली। भाभी धीरे-धीरे नीचे बैठती गईं। पूरा लंड उनकी गांड में घुस गया। भाभी का मुँह खुल गया। “आह्ह्ह्ह्ह… पूरा भर गया… गांड में… साड़ी पहने हुए… बैठ गई हूँ…”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं और ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। साड़ी उनके कमर पर उलझी हुई थी। हर बार जब वो नीचे बैठतीं, लंड पूरी तरह अंदर जाता। भाभी की गांड मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
“आह्ह्ह… राहुल… साड़ी में गांड में बैठकर चोदवा रही हूँ… बहुत शर्म आ रही है… लेकिन… मस्त लग रहा है… उउउम्म्म्म…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर ऊपर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। भाभी अब जोर-जोर से कूद रही थीं। उनके स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे। मैं एक स्तन मुंह में लेकर चूस रहा था और भाभी गांड में चोदवा रही थीं।
“राहुल… गांड फट रही है… लेकिन… और जोर से… चोदो… साड़ी में गांड मार रहे हो… आह्ह्ह…”
भाभी का चेहरा लाल हो गया था। पसीना निकल रहा था। बाल बिखर गए थे। वो बार-बार कराह रही थीं, “आहhhhh… हो गया… गांड से… पानी… आह्ह्ह… मैं झड़ गई… उउउम्म्म्म…”
भाभी का शरीर काँप उठा। उन्होंने मेरी छाती पर सिर रख लिया। मैंने अभी भी उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाए।
“भाभी… तुम्हारी गांड कितनी टाइट है… साड़ी में बैठकर चोदवा रही हो… आज रात तुम्हें नहीं छोड़ूंगा…”
आखिर में मैं भी जोर से झड़ गया। मेरा गर्म पानी भाभी की गांड में भर गया।
भाभी थककर मेरी छाती पर गिर पड़ीं। साड़ी अभी भी उनके शरीर पर उलझी हुई थी।