रिया भाभी की चूत चोदी देवर ने | Bhabhi ki chut chodi devar ne
मेरा नाम रिया है। मैं 28 साल की हूँ। मेरी शादी राजेश से हुई थी, जो एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं। अक्सर उन्हें टूर पर जाना पड़ता है। हमारे घर में सास-ससुर भी रहते हैं और उनका छोटा बेटा, मेरा देवर विक्रम। विक्रम 25 साल का है — लंबा, तगड़ा शरीर, गोरा रंग, घनी दाढ़ी और गहरी आँखें। जब से मैं इस घर में आई थी, विक्रम की नजरें मुझे अलग तरह से देखती थीं। वो कभी-कभी मेरी साड़ी में कमर, मेरे स्तनों की तरफ देखता और मैं शर्मा जाती। लेकिन मन में एक अजीब सी गर्मी भी फैलती। मैं हमेशा सोचती — “वो मेरा देवर है, ये गलत है।”
राजेश 20 दिनों के लिए दिल्ली टूर पर गए। उसी हफ्ते सास-ससुर भी अपने भतीजे की शादी में दूसरे शहर चले गए। घर में सिर्फ मैं और विक्रम रह गए। बारिश का मौसम था। उस दिन शाम से ही तेज बारिश और आंधी चल रही थी। रात के 9:30 बजे बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। मैं अपने कमरे में अकेली काँप रही थी। अचानक विक्रम ने दरवाजा खटखटाया।
“भाभी… आप ठीक हैं? बिजली चली गई है। अगर डर लगे तो बोलना।” उसकी आवाज सुनकर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।
“हाँ विक्रम… मैं ठीक हूँ। तुम जाओ सो जाओ।” मैंने कमजोर आवाज में कहा।
लेकिन विक्रम ने मोमबत्ती जलाई और बिना पूछे मेरे कमरे में घुस आया। वो मेरे बिस्तर के पास खड़ा हो गया। मोमबत्ती की रोशनी में उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।
“भाभी, आप अकेली डर रही होंगी। मैं आपके पास बैठ जाता हूँ।” उसने कहा और मेरे बिस्तर पर बैठ गया। बाहर बिजली चमक रही थी, गड़गड़ाहट हो रही थी। अंदर का माहौल भी कुछ अजीब सा था।
“विक्रम, ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।” मैंने कहा।
विक्रम ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में कुछ अलग चमक थी। “भाभी, मैं जानता हूँ कि मैं आपका देवर हूँ। लेकिन मैं आपको बहुत दिनों से चाहता हूँ। जब आप साड़ी पहनकर घूमती हैं, जब आप नहाने के बाद बाल खुले छोड़ती हैं… मेरा लंड खड़ा हो जाता है। रात को आपकी कल्पना करके मैं हस्तमैथुन करता हूँ। आपकी चूत की कल्पना करता हूँ।”
मैं चौंक गई। “विक्रम! शर्म करो। ऐसे कैसे बोल सकते हो? मैं शादीशुदा हूँ।”
“भाभी, भैया तो 20 दिन बाद आएंगे। आज घर में सिर्फ हम दोनों हैं। कोई नहीं जान पाएगा।” उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ लिया। उसका स्पर्श गर्म था। मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं छोड़ा।
“छोड़ो विक्रम… ये गलत है।” मेरी आवाज काँप रही थी।
“भाभी, आप भी तो महसूस कर रही हैं ना? आपकी साँस तेज हो गई है।” विक्रम ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से मेरी पीठ पर घुमाने लगा। उसकी उँगलियाँ मेरी नंगी बाँह पर घूम रही थीं। मेरे शरीर में करंट दौड़ गया। मेरे स्तन तन गए थे और चूत में गीला पन महसूस हो रहा था।
“विक्रम… please रुक जाओ। अगर किसी को पता चल गया तो…” मैंने कहा।
“कोई नहीं जान पाएगा भाभी। ये हमारी गुप्त बात रहेगी।” उसने मुझे अपनी ओर थोड़ा खींच लिया। अब हम दोनों का चेहरा बहुत करीब था। उसकी साँस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। मेरे स्तन उसके सीने से छू रहे थे।
“भाभी, एक बार मुझे चूमने दो। बस एक बार।” उसने फुसफुसाया।
मैं चुप रही। दिल में भय और उत्तेजना दोनों थे। तूफान और तेज हो गया। मोमबत्ती की लौ हिल रही थी। विक्रम ने मेरे चेहरे को अपनी हथेली में लिया और धीरे-धीरे करीब लाया। हमारे होंठ अब सिर्फ एक इंच दूर थे। उसकी आँखों में साफ lust थी। मैं साँस रोककर बैठी थी। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
रिया भाभी की पूरी डिटेल वाली चुदाई की कहानी:
विक्रम ने जोर से मुझे अपनी मांसल बाहों में भर लिया। उसकी गर्म साँस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। उसका चुंबन बहुत जोरदार और भूखा था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मेरी जीभ से लिपटकर चूसने लगी। मैं भी अनजाने में उसका जवाब देने लगी। हम दोनों जोर-जोर से चूम रहे थे। उसकी एक हाथ मेरी कमर पर था और दूसरा मेरे बालों में उलझा हुआ था।
“भाभी… आज मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा…” वह फुसफुसाया और फिर से मेरे होंठ चूसने लगा।
फिर उसने मेरे साड़ी के पल्लू को जोर से खींचा। पल्लू फर्श पर गिर गया। उसने साड़ी का बाकी कपड़ा घुमाकर मेरे शरीर से उतार दिया। अब मैं सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। विक्रम ने मेरी कमर के नीचे हाथ डाला, पेटीकोट की नाड़ी खींची और पेटीकोट भी गिरा दिया। अब मेरे नंगे पैर और जांघें उसके सामने थीं।
उसने मेरे ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। हर हुक खुलते ही वह मेरे स्तनों को घूर रहा था। ब्लाउज उतारकर फेंक दिया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। विक्रम ने मेरी पीठ पर हाथ फेरा, ब्रा का हुक खोला और ब्रा को आगे की तरफ खींचकर उतार दिया। मेरे दोनों नंगे स्तन उसके सामने लटक गए — गोरे, भारी और निप्पल सख्त हो चुके थे।
“भाभी… कितने सुंदर और बड़े स्तन हैं तेरे…” उसने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से दबाया। फिर मुंह में लेकर चूसने लगा। एक स्तन चूसता, दूसरा हाथ से मसलता। उसकी जीभ मेरे निप्पल पर घूम रही थी। वह चूसते-चूसते हल्का सा काट भी रहा था।
उसके चेहरे पर साफ lust की लहर थी — आँखें आधी बंद, भौंहें तनी हुई, मुंह में मेरा स्तन दबा हुआ, और गाल लाल हो चुके थे। वह जोर-जोर से चूस रहा था जैसे भूखा हो।
मैं सिर पीछे झुकाकर moan करने लगी — “अह्ह्ह… विक्रम… चूसो… जोर से चूसो… उउउह्ह्ह…” मेरे शरीर में झटके आ रहे थे। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
फिर विक्रम ने मेरी पैंटी की इलास्टिक में दोनों हाथ डाले और पैंटी को नीचे खींच दिया। पैंटी मेरे घुटनों तक आ गई, फिर वह उसे पूरी तरह उतारकर फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह नंगी उसके सामने लेटी थी — मेरी चूत साफ नजर आ रही थी, गीली और फूली हुई।
उसने भी अपना टी-शर्ट और पैंट उतार दिया। उसका लंड खड़ा था — मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई और सिरा चमक रहा था। मैंने उसे हाथ में लिया। “विक्रम… इतना बड़ा… मेरी चूत में कैसे जाएगा?”
“जाएगा भाभी… आज तेरी चूत फाड़ दूंगा।” उसने कहा। उसके चेहरे पर जीत और उत्तेजना साफ थी — आँखें चमक रही थीं, होंठ कटे हुए, सांस तेज।
उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया, मेरी दोनों टांगें फैला दीं और अपने घुटनों के बल मेरे बीच में आ गया। उसने अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रखा और धीरे से दबाया। लंड का सिरा मेरी चूत के अंदर घुसने लगा।
“आह्ह्ह… विक्रम… धीरे… दर्द हो रहा है…” मैं चिल्लाई।
लेकिन वह रुका नहीं। एक जोरदार धक्का मारा और आधा लंड मेरी चूत में घुस गया। “तेरी चूत कितनी टाइट है भाभी… आह्ह्ह…” उसने आँखें बंद कर लीं, मुंह खुला था, पसीना माथे पर आ गया था। वह दूसरा धक्का मारने लगा। पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।
अब वह जोर-जोर से चोदने लगा। उसका लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ “प्लच… प्लच…” की आवाज आ रही थी। विक्रम के चेहरे पर एक्सप्रेशन बदल रहा था — कभी आँखें बंद करके मजा लेता, कभी मेरी आँखों में देखता, कभी मेरे स्तनों को दबाता। वह मुंह से बोल रहा था — “भाभी… तेरी चूत… आह्ह्ह… कितनी गर्म और टाइट है… मैं आज तुझे चोद-चोद के रुला दूंगा…”
मैं भी चीख रही थी — “विक्रम… जार से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… अह्ह्ह्ह… उउउउह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…” मेरे शरीर में झटके आ रहे थे। मेरी आँखें आधी बंद थीं, मुंह खुला था, जीभ बाहर निकल रही थी। मैं उसके कंधों को नाखूनों से नोच रही थी। मेरे स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे हर धक्के के साथ।
वह missionary पोजीशन में चोद रहा था। फिर उसने मुझे पलट दिया — doggy style में। मेरी गांड ऊपर उठ गई, वह पीछे से खड़ा होकर लंड घुसा रहा था। “भाभी तेरी गांड भी बहुत सुंदर है…” उसने मेरी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। फिर से चोदने लगा। इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था।
“विक्रम… अह्ह्ह… ये पोजीशन… बहुत गहरा जा रहा है… चोदो मुझे…” मैं चीख रही थी। मेरे बाल बिखरे हुए थे, चेहरा बिस्तर में दबा हुआ, आँखें बंद, मुंह से लगातार moans निकल रहे थे।
पहला orgasm आ गया। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह्ह… मैं झड़ रही हूँ… उउउउह्ह्ह…” मेरा शरीर काँप उठा, चूत सिकुड़ गई। लेकिन वह रुका नहीं। जोर-जोर से चोदता रहा।
फिर उसने मुझे वापस लिटाया और तेजी से चोदने लगा। “मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी… तेरी चूत में ही निकालूंगा…” उसका चेहरा पूरी तरह लाल हो चुका था, पसीने से भीग गया था, आँखें मेरी आँखों में गड़ी थीं, मुंह खुला था और वह जोर-जोर से सांस ले रहा था।
“हाँ विक्रम… अंदर ही निकाल दो… चोदो मुझे… अह्ह्ह…” मैं चिल्लाई।
आखिरकार उसने जोर से दबाया और गर्म-गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी… ले ले मेरा सारा माल…” उसका शरीर काँप रहा था, आँखें बंद, चेहरा संतुष्टि से भर गया।
मैं भी दूसरी बार झड़ चुकी थी। हम दोनों पसीने से लथपथ, सांस फूलते हुए एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था। वह मेरे स्तन चूम रहा था और मैं उसके बाल सहला रही थी।
थोड़ी देर बाद विक्रम ने फिर से मुझे चूमा और कहा, “भाभी… अभी रात बाकी है…”
रिस्की फोन वाली चुदाई
हम दोनों अभी भी नंगे एक-दूसरे से लिपटे पड़े थे। विक्रम का लंड अभी भी मेरी चूत में आधा अंदर था। मैं उसके सीने पर सिर रखे हुए सांस ले रही थी। अचानक मेरे मोबाइल पर घंटी बजी। स्क्रीन पर नाम दिखा — राजेश (पति)।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। विक्रम ने भी देखा और उसकी आँखों में शैतानी मुस्कान आ गई।
“उठा ले भाभी… बात कर ले… मैं तो चोदता रहूंगा…” विक्रम ने कान में फुसफुसाया। उसका चेहरा पहले से ही लाल था, पसीने से भीगा हुआ। उसकी आँखें चमक रही थीं — lust और मस्ती दोनों साथ में।
मैंने फोन उठा लिया। “ह-हेलो… राजेश…”
“अरे रिया! कैसी हो? घर में सब ठीक है ना?” पति की आवाज आई।
“हाँ… सब ठीक है…” मैंने कहा। उसी समय विक्रम ने जोर से धक्का मारा। उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। “आह्ह्ह…” मेरे मुंह से निकल गया।
“क्या हुआ? आवाज में दर्द लग रहा है?” पति ने पूछा।
“न-नहीं… बस… बिजली चली गई थी… थोड़ा डर लग रहा था…” मैंने झूठ बोला। विक्रम मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था। वह धीरे-धीरे लेकिन जोर-जोर से चोद रहा था। उसका लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ मेरे स्तन उसके सीने से रगड़ खा रहे थे।
विक्रम के चेहरे पर शैतानी एक्सप्रेशन था — होंठ कटे हुए, आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई, और मुंह से हल्की-हल्की साँसें निकल रही थीं। वह जानबूझकर जोर-जोर से चोद रहा था ताकि मुझे मुश्किल हो।
“राजेश… तुम कब आओगे?” मैंने पूछा। मेरी आवाज काँप रही थी।
“अभी 10-12 दिन और लगेंगे। तुम अकेली तो नहीं डर रही ना?” पति ने कहा।
उसी समय विक्रम ने मेरे कान में फुसफुसाया — “भाभी… तेरी चूत आज और भी गीली है… पति से बात करते हुए भी चुदवा रही है…” और उसने जोरदार धक्का मारा। “आह्ह्ह… उउउह्ह्ह…” फिर से मेरे मुंह से आवाज निकल गई।
“रिया? क्या हो गया? तुम ठीक हो?” पति की आवाज चिंतित थी।
“हाँ… हाँ… बस… बिजली की वजह से… थोड़ा घबराहट हो रही है…” मैंने कहा। मेरी आँखें आधी बंद थीं। मुंह खुला था। जीभ बाहर निकल रही थी। मैं विक्रम के कंधे को नाखूनों से नोच रही थी। मेरे शरीर में हर धक्के के साथ झटका लग रहा था।
विक्रम ने मेरे स्तन को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। साथ ही चोदता भी रहा। उसका चेहरा अब और भी लाल हो चुका था। पसीना मेरे शरीर पर गिर रहा था। वह मेरी आँखों में देखते हुए मुस्करा रहा था — जैसे कह रहा हो कि “तेरा पति बात कर रहा है और मैं तेरी चूत चोद रहा हूँ”।
“राजेश… मैं… सोने जा रही हूँ…” मैंने कहा। मेरी सांस फूल रही थी।
“ठीक है। कल सुबह बात करेंगे। सो जाओ।” पति ने कहा।
“हम्म… गुड नाइट…” मैंने फोन काटने की कोशिश की लेकिन विक्रम ने मेरी कलाई पकड़ ली। “अभी मत काटो…” उसने फुसफुसाया।
फोन अभी भी कनेक्टेड था। विक्रम ने मुझे पलट दिया — doggy style में। अब मैं घुटनों के बल थी, गांड ऊपर। वह पीछे से खड़ा होकर जोर-जोर से चोद रहा था। “प्लच… प्लच… प्लच…” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।
“रिया? अभी तक काटा नहीं?” पति की आवाज आई।
“हाँ… बस… अभी काट रही हूँ…” मैंने कहा। मेरी आवाज पूरी तरह काँप रही थी। विक्रम ने मेरी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह…” फिर से निकल गया।
“तुम्हारी आवाज बहुत अजीब लग रही है। क्या हो गया?” पति शक से बोले।
विक्रम ने कान में कहा — “बता दो भाभी… कि तुम्हारा देवर तुम्हारी चूत चोद रहा है…” और उसने और तेजी से चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड मेरी चूत में गहरा जा रहा था।
“न-नहीं राजेश… सब ठीक है… बस… थक गई हूँ… सोने दो…” मैंने किसी तरह कहा। मेरी आँखें बंद थीं, मुंह खुला था, लार निकल रही थी। मैं बिस्तर को मुट्ठी में दबा रही थी। मेरे स्तन नीचे लटक रहे थे और हर धक्के से हिल रहे थे।
आखिरकार पति ने कहा — “ठीक है। सो जाओ। गुड नाइट।”
“गुड नाइट…” मैंने कहा और फोन काट दिया।
जैसे ही फोन कटा, विक्रम ने मुझे जोर से पकड़ा और पूरी ताकत से चोदने लगा। “अब चिल्ला भाभी… अब कोई नहीं सुन रहा!” वह जोर-जोर से चिल्ला रहा था। “तेरी चूत… आह्ह्ह… कितनी टाइट है… पति से बात करते हुए भी चुदवा ली…”
“विक्रम… अह्ह्ह्ह… जार से… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… उउउउह्ह्ह…” मैं चीख रही थी। मेरे शरीर में तीसरा orgasm आ रहा था। मैं काँप रही थी। आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर, पूरे शरीर पर पसीना।
विक्रम का चेहरा पूरी तरह विकृत हो चुका था — आँखें बंद, मुंह खुला, दाँत किटकिटा रहे थे, पसीना बह रहा था। वह अंतिम जोरदार धक्के मार रहा था।
“भाभी… मैं फिर झड़ने वाला हूँ… तेरी चूत में ही…”
“हाँ… अंदर निकाल दो… चोदो मुझे…” मैं चिल्लाई।
वह जोर से दबा और फिर से गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी…” उसका शरीर काँप रहा था। चेहरा संतुष्टि और थकान से भरा हुआ था।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। फोन अभी भी मेरे हाथ में था।
अगले दिन — सुबह की चुदाई
रात भर की चुदाई के बाद हम दोनों थककर सो गए थे। विक्रम मेरे ऊपर लेटा हुआ था, उसका लंड अभी भी मेरी चूत में आधा अंदर था। सुबह 6 बजे जब हल्की रोशनी कमरे में आई, मैं आँखें खोलकर देखा तो विक्रम पहले से ही जाग चुका था। वह मेरे नंगे शरीर को घूर रहा था।
उसने देखा कि मैं जाग गई हूँ। उसकी आँखों में फिर वही lust चमक उठी। बिना कुछ बोले उसने मेरे ऊपर चढ़कर मेरे होंठ चूम लिए। उसका चुंबन सुबह की तरह ताजा और भूखा था।
“भाभी… सुबह हो गई… लेकिन मेरी प्यास अभी बाकी है…” वह फुसफुसाया।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “विक्रम… रात भर चोदा… अभी भी नहीं माना?”
“नहीं भाभी… तेरी चूत इतनी स्वादिष्ट है कि सुबह भी चोदना है।” उसने कहा और मेरे स्तनों को मुंह में लेकर चूसने लगा। उसका चेहरा सुबह की रोशनी में और भी खूबसूरत लग रहा था — आँखें चमकदार, होंठ मेरे निप्पल पर दबे हुए, गालों पर हल्की लाली। वह जोर-जोर से चूस रहा था।
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा। “अह्ह्ह… विक्रम… चूसो…”
वह मेरे दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसता रहा। फिर नीचे गया और मेरी चूत पर मुंह लगा दिया। उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस रही थी। वह चाट रहा था। “भाभी तेरी चूत अभी भी गीली है… रात का मेरा माल अभी भी अंदर है…”
“विक्रम… अह्ह्ह… मत चाट… चोद दो मुझे…” मैं moan करने लगी। मेरे शरीर में सुबह की गर्मी फैल रही थी।
विक्रम उठा और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें फैलाईं और अपना लंड मेरी चूत पर रखा। सुबह का लंड और भी सख्त और गर्म था। उसने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह… विक्रम… सुबह-सुबह… उउउह्ह्ह…” मैं चीख पड़ी।
वह missionary पोजीशन में धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के के साथ वह मेरे होंठ चूमता, मेरे स्तन दबाता। उसका चेहरा अब पूरी तरह lust से भरा था — आँखें आधी बंद, भौंहें तनी हुई, मुंह खुला और सांस तेज। वह मेरी आँखों में देखते हुए बोल रहा था — “भाभी… सुबह की चूत… कितनी टाइट और गर्म है… आह्ह्ह…”
मैं भी उसके कंधों को पकड़े हुए चीख रही थी — “विक्रम… जार से चोदो… सुबह का लंड… अह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… उउउउह्ह्ह…”
कुछ देर बाद उसने मुझे पलट दिया। अब doggy style में। मैं घुटनों के बल थी, सिर बिस्तर पर। वह पीछे से खड़ा होकर जोर-जोर से चोद रहा था। “प्लच… प्लच…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी। वह मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “भाभी तेरी गांड सुबह भी कितनी सुंदर लग रही है…”
“विक्रम… अह्ह्ह… ये पोजीशन… बहुत गहरा… चोदो… फाड़ दो…” मेरी आँखें बंद थीं, मुंह खुला था, लार निकल रही थी। मेरे स्तन नीचे लटककर हिल रहे थे। मैं बिस्तर को मुट्ठी में दबा रही थी।
विक्रम का चेहरा पसीने से भीग चुका था। वह जोर-जोर से सांस ले रहा था। आँखें मेरी गांड पर गड़ी हुई थीं। वह बार-बार बोल रहा था — “तेरी चूत… आह्ह्ह… सुबह भी इतनी गीली… मैं आज तुझे चोद-चोद के रुला दूंगा भाभी…”
मुझे पहला सुबह का orgasm आ गया। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह्ह… झड़ रही हूँ… उउउउह्ह्ह…” मेरा शरीर काँप उठा। चूत सिकुड़ गई।
लेकिन वह रुका नहीं। उसने मुझे फिर पलटकर missionary में लिटाया और तेजी से चोदने लगा। “मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी… सुबह का सारा माल तेरी चूत में डालूंगा…”
“हाँ… अंदर निकाल दो… चोदो मुझे… अह्ह्ह…” मैं चिल्लाई।
आखिरकार उसने जोर से दबाया और गर्म-गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी… ले ले…” उसका चेहरा पूरी तरह संतुष्टि से भर गया — आँखें बंद, मुंह खुला, शरीर काँप रहा था।
हम दोनों फिर से पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे से लिपट गए। विक्रम मेरे स्तन चूम रहा था और मैं उसके बाल सहला रही थी।
“भाभी… आज पूरा दिन हम अकेले हैं… कितनी बार चोदूंगा तुझे…” वह मुस्कराते हुए बोला।
दोपहर की रसोई वाली चुदाई
सुबह की चुदाई के बाद हम दोनों नहा-धोकर तैयार हो गए। मैंने हल्की सी नीली साड़ी पहन ली थी और विक्रम टी-शर्ट और ट्रैक पैंट में था। दोपहर के करीब 1 बजे मैं रसोई में खाना बनाने गई। मैं चूल्हे के पास खड़ी थी, सब्जी चला रही थी। अचानक विक्रम पीछे से आ गया।
उसने मेरी कमर के पीछे से हाथ डालकर मेरे स्तनों को जोर से दबा लिया। “भाभी… खाना बना रही हो? मैं तो तुम्हें खाना चाहता हूँ…” उसने मेरे कान में फुसफुसाया। उसकी साँस गर्म थी।
“विक्रम… अभी मत… खाना जल जाएगा…” मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज में कोई ताकत नहीं थी।
विक्रम ने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा और फेंक दिया। फिर उसने मेरी कमर पकड़कर मुझे अपनी ओर घुमा लिया। उसने मेरे होंठों पर मुंह लगा दिया। हम जोर से चूमने लगे। उसकी एक हाथ मेरे स्तन दबा रहा था और दूसरा मेरी गांड पर घूम रहा था।
“भाभी… तेरी साड़ी में भी तू बहुत सेक्सी लग रही है…” उसने कहा। उसका चेहरा पहले से ही लाल हो रहा था। आँखें lust से चमक रही थीं।
उसने मेरी साड़ी को कमर तक उठा दिया और पेटीकोट की नाड़ी खोल दी। पेटीकोट नीचे गिर गया। अब मैं सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थी। विक्रम ने ब्लाउज के हुक जल्दी-जल्दी खोले और ब्लाउज भी उतार दिया। अब मेरे नंगे स्तन उसके सामने थे। उसने ब्रा भी उतार दी।
“आह्ह्ह… विक्रम… रसोई में मत…” मैंने कहा, लेकिन मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
विक्रम ने मेरी पैंटी खींचकर उतार दी। अब मैं पूरी तरह नंगी रसोई में खड़ी थी। उसने भी अपनी ट्रैक पैंट और अंडरवीयर उतार दी। उसका लंड खड़ा हो चुका था — मोटा और सख्त।
उसने मुझे रसोई के काउंटर पर पीठ के बल लिटा दिया। मेरी टांगें हवा में लटक रही थीं। विक्रम मेरे बीच में खड़ा हो गया। उसने मेरा एक पैर अपने कंधे पर रखा और अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया।
“भाभी… आज रसोई में तेरी चूत चोदूंगा…” उसने कहा। उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कान और भूख दोनों थी। आँखें मेरी चूत पर गड़ी हुई थीं।
उसने जोर से धक्का मारा। लंड मेरी चूत में घुस गया। “आह्ह्ह… विक्रम… उउउह्ह्ह…” मैं चीख पड़ी।
वह खड़े-खड़े मुझे चोदने लगा। उसका लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ काउंटर हिल रहा था। विक्रम मेरे स्तनों को दोनों हाथों से दबा रहा था और जोर-जोर से चोद रहा था।
“तेरी चूत… आह्ह्ह… दोपहर में भी कितनी गर्म है भाभी…” वह बोल रहा था। उसका चेहरा पसीने से भीग चुका था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला, और वह लगातार मेरे स्तनों को मसल रहा था।
मैं काउंटर पर लेटी हुई चीख रही थी — “विक्रम… जार से चोदो… रसोई में… अह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… उउउउह्ह्ह…” मेरी आँखें बंद थीं, मुंह खुला था, जीभ बाहर निकल रही थी। मेरे स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे।
कुछ देर बाद विक्रम ने मुझे उठाया और काउंटर के किनारे पर झुका दिया — अब doggy style में। मैं काउंटर पर झुकी हुई थी, गांड बाहर। वह पीछे से खड़ा होकर लंड घुसा रहा था। “प्लच… प्लच…” की आवाज रसोई में गूंज रही थी।
“भाभी तेरी गांड… सुबह से अब तक… आह्ह्ह… कितनी सुंदर लग रही है…” वह जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था और चोद रहा था। उसका चेहरा पूरी तरह विकृत हो चुका था — आँखें बंद, दाँत किटकिटा रहे थे, पसीना बह रहा था। वह बार-बार बोल रहा था — “तेरी चूत… चोद-चोद के फुला दूंगा…”
“विक्रम… अह्ह्ह… ये पोजीशन… बहुत गहरा… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं चिल्ला रही थी। मेरे बाल बिखरे हुए थे, चेहरा काउंटर पर दबा हुआ, आँखें बंद, मुंह से लगातार moans निकल रहे थे।
मुझे orgasm आ गया। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह्ह… झड़ रही हूँ… उउउउह्ह्ह…” मेरा शरीर काँप उठा।
विक्रम ने मुझे फिर पीठ के बल लिटाया और तेजी से चोदने लगा। “मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी… तेरी चूत में ही निकालूंगा…”
“हाँ… अंदर निकाल दो… चोदो मुझे…” मैं चीखी।
आखिरकार उसने जोर से दबाया और गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी…” उसका चेहरा पूरी तरह संतुष्टि से भर गया — आँखें बंद, मुंह खुला, शरीर काँप रहा था।
हम दोनों पसीने से लथपथ होकर काउंटर पर ही लेट गए। विक्रम मेरे स्तन चूम रहा था।
“भाभी… खाना तो जल गया…” वह हँसते हुए बोला।
रात की गांड वाली चुदाई — विक्रम की डिमांड
दोपहर की रसोई वाली चुदाई के बाद हम दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। शाम के करीब 6 बजे विक्रम ने मुझे अपनी बाहों में लिया और मेरे कान में धीरे से बोला:
“भाभी… रात को मैं तेरी गांड मारूंगा। पार्लर में जाकर अच्छे से तैयार हो जाओ। भैया ने कभी तेरी गांड नहीं मारी होगी ना? आज रात मैं तेरी गांड चोद-चोद के फुला दूंगा।”
उसके चेहरे पर साफ शैतानी मुस्कान और भूख थी। आँखें चमक रही थीं। मैंने शरमा कर कहा, “विक्रम… गांड… दर्द होगा…”
“दर्द होगा तो मजा भी आएगा भाभी। तैयार होकर आना।” उसने मेरे स्तन दबाते हुए कहा।
मैंने नहाया, फिर पार्लर चली गई। मैंने पूरे शरीर की वैक्सिंग करवाई, खासकर गांड के आसपास साफ करवाई। जब घर लौटी तो विक्रम पहले से ही इंतजार कर रहा था। उसने मुझे देखते ही कहा, “अभी रात का इंतजार करो…”
रात के 11 बजे जब पूरा घर अंधेरा हो चुका था, विक्रम ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैंने हल्की सी लाल साड़ी पहनी थी। विक्रम ने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से चिपका लिया। उसने जोर से मुझे चूमा।
“भाभी… आज तेरी गांड मेरी है।” उसने कहा। उसका चेहरा पहले से ही लाल हो रहा था।
उसने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा और पूरी साड़ी उतार दी। पेटीकोट की नाड़ी खोली और पेटीकोट भी गिरा दिया। अब मैं ब्लाउज और पैंटी में थी। विक्रम ने ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा भी उतार दी। मेरे नंगे स्तन उसके सामने थे। उसने उन्हें जोर से दबाया और चूसा।
फिर उसने मेरी पैंटी उतार दी। अब मैं पूरी नंगी थी। विक्रम ने भी कपड़े उतार दिए। उसका लंड खड़ा था। उसने मुझे बिस्तर पर चारों हाथ-पैर के बल करवाया — doggy style में। मेरी गांड ऊपर उठ गई।
“भाभी… गांड कितनी सुंदर और गोरी है तेरी…” विक्रम ने मेरी गांड पर हाथ फेरा। उसने थोड़ा सा तेल लगाया और अपनी उंगली मेरी गांड में डाली। “आह्ह्ह… विक्रम…” मैं काँप गई।
उसने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर की। फिर दो उंगलियाँ डालीं। मैं दर्द से कराह रही थी। “विक्रम… धीरे… दर्द हो रहा है…”
“थोड़ा दर्द होगा भाभी… फिर मजा आएगा।” उसने कहा। उसका चेहरा lust से भरा था — आँखें मेरी गांड पर गड़ी हुई, मुंह खुला, सांस तेज।
कुछ देर बाद उसने अपना लंड मेरी गांड पर रखा। “ले भाभी… अब मैं तेरी गांड मारता हूँ।” उसने धीरे से दबाया। लंड का सिरा मेरी गांड में घुसने लगा।
“आह्ह्ह… विक्रम… दर्द… उउउह्ह्ह…” मैं चीख पड़ी। आँखें बंद हो गईं, मुंह खुला था, शरीर काँप रहा था।
विक्रम ने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। “तेरी गांड… कितनी टाइट है भाभी… आह्ह्ह…” उसका चेहरा संतुष्टि से भर गया। पसीना माथे पर आ गया था। वह धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा।
“विक्रम… अह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी… उउउह्ह्ह…” मैं रो रही थी। दर्द था लेकिन साथ में अजीब सा मजा भी आ रहा था। मेरे स्तन नीचे लटक रहे थे और हिल रहे थे।
विक्रम ने मेरे बाल पकड़े और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया। “आह्ह्ह… भाभी… तेरी गांड ले ली मैंने…” वह जोर-जोर से चोदने लगा। “प्लच… प्लच…” की आवाज आ रही थी।
उसका चेहरा पूरी तरह विकृत था — आँखें बंद, दाँत किटकिटा रहे थे, मुंह खुला और वह बार-बार बोल रहा था — “तेरी गांड… आह्ह्ह… भैया ने कभी नहीं मारी होगी… आज मैं फाड़ दूंगा… चोद-चोद के फुला दूंगा…”
मैं चीख रही थी — “विक्रम… अह्ह्ह… दर्द… लेकिन… और जोर से… उउउउह्ह्ह… गांड फाड़ दो…” मेरी आँखें आँसुओं से भरी थीं, मुंह खुला था, जीभ बाहर निकल रही थी। मैं बिस्तर को मुट्ठी में दबा रही थी।
विक्रम ने मेरी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे और तेजी से चोदता रहा। “भाभी… तेरी गांड… कितनी टाइट… आह्ह्ह… मजा आ रहा है…”
कुछ देर बाद मुझे अजीब सा orgasm आ गया। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह्ह… गांड से… उउउउह्ह्ह…” मेरा शरीर काँप उठा।
विक्रम ने और तेजी से चोदना शुरू कर दिया। “मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी… तेरी गांड में ही निकालूंगा…”
“हाँ… अंदर निकाल दो…” मैं चीखी।
आखिरकार उसने जोर से दबाया और गर्म वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी… ले ले मेरा सारा माल…” उसका चेहरा पूरी तरह संतुष्टि से भर गया — आँखें बंद, मुंह खुला, शरीर काँप रहा था।
वह धीरे से लंड बाहर निकाला। मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी। गांड में दर्द था लेकिन शरीर में अजीब सी संतुष्टि थी। विक्रम मेरे पास लेट गया और मेरे स्तन चूमने लगा।
“भाभी… आज तेरी गांड ले ली… कैसा लगा?” वह मुस्कराते हुए बोला।
पति का फोन और गांड का दर्द
रात भर विक्रम ने मेरी गांड चोदी थी। सुबह जब मैं उठी तो मेरी गांड में बहुत तेज दर्द हो रहा था। चलने-फिरने में भी तकलीफ हो रही थी। मैं बिस्तर पर ही लेटी थी। विक्रम पास बैठा हुआ मुझे देख रहा था।
मैंने उसे दूर से ही रोका — “विक्रम… आज मत आना पास… बहुत दर्द हो रहा है… रात से ही…”
विक्रम मुस्कुराया और बोला, “भाभी, एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा। पहले-पहले गांड मारने पर दर्द होता है। फिर रोज की आदत हो जाएगी। आज से ही तेरी गांड मेरी हो गई है।”
उसने मेरे हाथ में एक गोली दी और कहा, “ये दर्द की गोली है। और ये तेल भी लगा लेना अंदर… जल्दी ठीक हो जाएगा।” उसने एक छोटी सी बोतल तेल की भी दी। मैंने गोली खा ली और तेल लगाने के लिए बाथरूम चली गई।
दोपहर के करीब 12 बजे जब मैं रसोई में कुछ हल्का-फुल्का खाने की कोशिश कर रही थी, तभी मेरा फोन बज उठा। स्क्रीन पर नाम था — राजेश (पति)।
मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने फोन उठा लिया।
“हेलो… राजेश…”
“अरे रिया! सुबह से फोन क्यों नहीं उठा रही थी? सब ठीक है ना?” पति की आवाज आई।
“हाँ… ठीक है… बस… थोड़ी सी तबीयत खराब थी…” मैंने कहा। मेरी आवाज में दर्द साफ सुनाई दे रहा था। मैं धीरे-धीरे चल रही थी क्योंकि गांड में अभी भी तेज दर्द था।
“तबीयत खराब? क्या हुआ? बुखार है क्या?” पति चिंतित हो गए।
उसी समय विक्रम रसोई में आ गया। उसने मुझे देखा और धीरे से मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने मेरी कमर पर हाथ रखा और फुसफुसाया, “भाभी… दर्द हो रहा है ना? बैठ जाओ…”
मैंने उसे इशारे से रोका। लेकिन वह रुका नहीं। उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और धीरे से मेरी गांड पर हल्का सा दबाव डाला। “आह्ह्ह…” मेरे मुंह से निकल गया।
“रिया? क्या हुआ? आवाज में दर्द लग रहा है।” पति ने पूछा।
“न-नहीं… बस… पेट में हल्का दर्द है… कुछ खाया नहीं था…” मैंने झूठ बोला। विक्रम मेरे कान में फुसफुसा रहा था, “भाभी… तेरी गांड अभी भी सूजी हुई है… कितनी टाइट थी रात को…”
मैंने विक्रम को आँखों से डांटा। लेकिन वह मेरे स्तन पर हाथ रखकर दबा रहा था। मैं काँप गई।
“राजेश… तुम कब आओगे?” मैंने पूछा। मेरी सांस थोड़ी तेज हो रही थी।
“अभी 8-10 दिन और लगेंगे। तुम अकेली हो ना? कोई तकलीफ तो नहीं?” पति ने फिर पूछा।
“नहीं… कोई तकलीफ नहीं… बस… थोड़ी कमजोरी है…” मैंने कहा। विक्रम ने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को छुआ। मैं काँप गई। “आह्ह्ह…” फिर से निकल गया।
“रिया, तुम्हारी आवाज बहुत अजीब लग रही है। सच में सब ठीक है ना?” पति शक से बोले।
“हाँ राजेश… सच में ठीक है… बस… सोने दो मुझे…” मैंने जल्दी से कहा।
“ठीक है। कल सुबह फिर बात करेंगे। आराम करो।” पति ने कहा।
“हम्म… गुड नाइट…” मैंने फोन काट दिया।
जैसे ही फोन कटा, मैंने विक्रम को धक्का दिया — “आज मत छूना… बहुत दर्द है…”
विक्रम हँसा और बोला, “ठीक है भाभी… दो दिन आराम करो। फिर से शुरू करेंगे। रोज की आदत हो जाएगी ना?” उसने मुझे गोद में उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उसने मेरी गांड पर हल्का सा तेल लगाया और धीरे से मालिश की। “देखो… जल्दी ठीक हो जाएगा।”
मैं दर्द से कराह रही थी लेकिन विक्रम की देखभाल से मन में एक अजीब सा एहसास भी हो रहा था।
सास-ससुर लौट आए लेकिन चुपके से चुदाई
सास-ससुर दो दिन पहले ही लौट आए थे। घर में फिर से हलचल शुरू हो गई थी। मैं अभी भी गांड के दर्द से पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, लेकिन विक्रम की नजरें मुझे लगातार घूर रही थीं। वह मौका ढूंढ रहा था।
रात के 12 बजे के करीब सास-ससुर अपने कमरे में सो चुके थे। मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी। अचानक दरवाजा धीरे से खुला। विक्रम अंदर आया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
“विक्रम! क्या कर रहे हो? सास-ससुर आ गए हैं… पकड़े गए तो…” मैंने डरते हुए कहा।
“शश्श… भाभी… चुप रहो।” विक्रम ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया। उसका चेहरा lust से भरा हुआ था। “आज रात मुझे तेरी चूत चाहिए। दो दिन से तड़प रहा हूँ।”
उसने बिना समय गंवाए मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने विरोध किया लेकिन वह मजबूत था। उसने मेरी रात की साड़ी का पल्लू खींचा और तेजी से उतार दिया। पेटीकोट की नाड़ी खोली और पेटीकोट भी नीचे कर दिया। अब मैं ब्लाउज और पैंटी में थी।
“विक्रम… धीरे… आवाज मत निकलने देना…” मैं फुसफुसाई। मेरा दिल जोर से धड़क रहा था।
उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा भी उतार दी। मेरे स्तन नंगे हो गए। विक्रम ने एक स्तन मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। साथ ही मेरी पैंटी भी उतार दी। अब मैं पूरी नंगी थी।
“भाभी… तेरी चूत… दो दिन बाद फिर देख रहा हूँ…” उसने मेरी टांगें फैलाईं और अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया।
उसने धीरे से लंड अंदर डाला। “आह्ह्ह…” मैंने मुंह बंद करके moan किया। विक्रम ने मेरे मुंह पर हाथ रखा। “चुप… सास सुन लेंगी…”
वह धीरे-धीरे लेकिन गहराई से चोदने लगा। हर धक्के के साथ बिस्तर हल्का सा हिल रहा था। विक्रम के चेहरे पर रोमांच और डर दोनों थे — आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई, मुंह बंद, लेकिन सांस तेज। वह बार-बार मेरे कान में फुसफुसा रहा था — “भाभी… तेरी चूत… कितनी गीली है… सास-ससुर सोए पड़े हैं और मैं तेरी चूत चोद रहा हूँ…”
मैं डर और उत्तेजना दोनों से काँप रही थी। मेरी आँखें डरी हुई थीं लेकिन शरीर विक्रम के लंड का जवाब दे रहा था। “विक्रम… धीरे… अह्ह्ह… पकड़े गए तो… उउउह्ह्ह…” मैं फुसफुसा रही थी।
विक्रम ने मेरी एक टांग अपने कंधे पर रखी और और गहराई से चोदने लगा। उसका चेहरा पसीने से भीग रहा था। आँखें बंद करके वह मजा ले रहा था। “तेरी चूत… आह्ह्ह… आज और टाइट लग रही है…”
कुछ देर बाद उसने मुझे पलट दिया — doggy style में। मैं घुटनों के बल थी, गांड ऊपर। विक्रम पीछे से खड़ा होकर धीरे से लंड घुसा रहा था। “प्लच… प्लच…” की हल्की आवाज आ रही थी। वह मेरी गांड पर हाथ रखकर चोद रहा था।
“विक्रम… अह्ह्ह… ये पोजीशन… आवाज आएगी… रुक जाओ…” मैं डरते हुए बोली।
“शश्श… भाभी… चुप रहो…” उसने मेरे बाल पकड़े और धीरे-धीरे चोदता रहा। उसका चेहरा पूरी तरह lust और रोमांच से भरा था।
मुझे orgasm आने लगा। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह… मुंह बंद कर… उउउउह्ह्ह…” मैंने अपना मुंह तकिये में दबा लिया। मेरा शरीर काँप उठा।
विक्रम ने भी तेजी बढ़ा दी। “मैं भी झड़ने वाला हूँ भाभी… तेरी चूत में…”
“अंदर निकाल दो… जल्दी…” मैं फुसफुसाई।
उसने जोर से दबाया और गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी…” उसका चेहरा संतुष्टि से भर गया। आँखें बंद, मुंह खुला, लेकिन पूरी तरह सावधान।
वह जल्दी से लंड बाहर निकाला, कपड़े पहने और फुसफुसाते हुए बोला, “कल रात फिर आऊंगा…” फिर चुपके से कमरे से बाहर चला गया।
मैं नंगी लेटी हुई, पसीने से भीगी हुई, डर और उत्तेजना दोनों से काँप रही थी।
अगली रात गांड वाली जोखिम भरी चुदाई
सास-ससुर के लौटने के बाद घर का माहौल बदल गया था। रात को सब जल्दी सो जाते थे। अगली रात ठीक 12:30 बजे मेरे कमरे का दरवाजा फिर से धीरे से खुला। विक्रम अंदर आया, दरवाजा बंद किया और ताला लगा लिया।
“विक्रम… आज मत… सास-ससुर जाग सकते हैं…” मैं डरते हुए बोली।
“शश्श… भाभी… आज तेरी गांड भी मारनी है।” विक्रम ने मेरे मुंह पर हाथ रखा। उसका चेहरा पहले से ही लाल था। आँखों में भूख और रोमांच दोनों साफ थे।
उसने बिना देर किए मेरी रात की साड़ी का पल्लू खींचा और पूरी साड़ी उतार दी। पेटीकोट की नाड़ी खोली और पेटीकोट भी गिरा दिया। अब मैं ब्लाउज और पैंटी में थी। विक्रम ने ब्लाउज के हुक जल्दी खोले और ब्रा उतार दी। मेरे नंगे स्तन उसके सामने थे। उसने दोनों स्तनों को जोर से दबाया और एक को मुंह में लेकर चूसने लगा।
“आह्ह्ह…” मैंने मुंह बंद करके moan किया।
उसने मेरी पैंटी भी उतार दी। अब मैं पूरी नंगी थी। विक्रम ने भी कपड़े उतार दिए। उसका लंड खड़ा था। उसने मुझे बिस्तर पर चारों हाथ-पैर के बल करवाया — doggy style में। मेरी गांड ऊपर उठ गई।
“भाभी… आज गांड भी लेनी है…” उसने फुसफुसाया। उसने थोड़ा सा तेल लगाया और अपनी उंगली मेरी गांड में डाली। फिर दो उंगलियाँ। मैं दर्द से काँप गई।
“विक्रम… धीरे… दर्द होगा…” मैं फुसफुसाई।
“थोड़ा दर्द होगा तो मजा आएगा।” उसने कहा। उसका चेहरा lust से भरा था। आँखें मेरी गांड पर गड़ी हुई, मुंह बंद लेकिन सांस तेज।
उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे से अंदर डाला। “आह्ह्ह…” मैंने तकिये में मुंह दबा लिया। विक्रम धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के के साथ वह मेरे कान में फुसफुसा रहा था — “भाभी… तेरी चूत… सास-ससुर सोए हैं और मैं तेरी चूत चोद रहा हूँ…”
कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और मेरी गांड पर रख दिया। “अब गांड ले…” उसने धीरे से दबाया। लंड का सिरा मेरी गांड में घुसने लगा।
“आह्ह्ह… विक्रम… दर्द… उउउह्ह्ह…” मैंने तकिये को मुट्ठी में दबा लिया। आँखें बंद हो गईं, मुंह खुला था लेकिन कोई आवाज नहीं निकलने दे रही थी।
विक्रम ने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। “तेरी गांड… कितनी टाइट है भाभी… आह्ह्ह…” उसका चेहरा संतुष्टि से भर गया। पसीना माथे पर आ गया था। वह धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा।
“विक्रम… अह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी… उउउउह्ह्ह…” मैं फुसफुसा रही थी। मेरे शरीर में दर्द और उत्तेजना दोनों थे। मेरे स्तन नीचे लटककर हिल रहे थे।
विक्रम ने मेरे बाल पकड़े और धीरे-धीरे लेकिन गहराई से चोदने लगा। “भाभी… तेरी गांड… आज ले ली… सास के घर में…” उसका चेहरा पूरी तरह रोमांच से भरा था — आँखें आधी बंद, मुंह खुला, लेकिन पूरी सावधानी से सांस ले रहा था।
मुझे तीव्र अनुभूति हो रही थी। “विक्रम… अह्ह्ह… और जोर से… लेकिन… आवाज मत… उउउह्ह्ह…” मैं तकिये में मुंह दबाए चीख रही थी।
विक्रम ने गति बढ़ा दी। “मैं झड़ने वाला हूँ भाभी… तेरी गांड में ही…”
“अंदर निकाल दो…” मैं फुसफुसाई।
उसने जोर से दबाया और गर्म वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। “आह्ह्ह… भाभी…” उसका शरीर काँप रहा था। चेहरा पूरी तरह संतुष्टि और थकान से भरा था।
वह धीरे से लंड बाहर निकाला, मेरी गांड पर हल्का सा तेल लगाया और फुसफुसाते हुए बोला, “कल रात फिर आऊंगा… अब तेरी गांड भी मेरी हो गई।” फिर चुपके से कमरे से बाहर चला गया।
मैं नंगी लेटी हुई, गांड में दर्द और चूत में गीला पन लिए, डर और उत्तेजना से काँप रही थी
सास को शक हो गया और रात को चेक किया
पिछली रात विक्रम ने मेरी गांड मारी थी। सुबह से ही सास की नजरें मुझे अलग तरह से देख रही थीं। शायद उन्हें रात को कोई आवाज सुनाई दी हो या मेरे कमरे से कुछ शक हुआ हो। पूरे दिन सास मुझे बार-बार देख रही थीं।
रात के 1 बजे के करीब मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी। विक्रम फिर से अंदर आ चुका था। वह मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था और धीरे-धीरे मेरी चूत चोद रहा था। अचानक बाहर से सास की आवाज आई —
“रिया… बेटा… सो गई क्या?”
मेरा दिल धड़कना बंद हो गया। विक्रम भी रुक गया। उसका लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर था। हम दोनों बिल्कुल stillness में लेट गए।
सास ने फिर आवाज दी — “रिया? दरवाजा खोलो बेटा… थोड़ी सी बात करनी है।”
विक्रम ने मेरे मुंह पर हाथ रखा और कान में फुसफुसाया — “चुप… बिल्कुल मत बोलना।”
मैं डर से काँप रही थी। विक्रम ने लंड बाहर नहीं निकाला। वह मेरे ऊपर ही लेटा रहा। सास ने फिर से दरवाजा खटखटाया।
“रिया… उठो बेटा… खोलो ना…”
मैंने काँपती हुई आवाज में कहा — “हाँ … आ रही हूँ…”
विक्रम ने मुझे इशारा किया कि मैं बिस्तर पर ही लेटी रहूँ। उसने जल्दी से मेरे ऊपर चादर खींच ली और खुद चादर के नीचे मेरे नीचे छुप गया। उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था।
मैंने कमजोर आवाज में कहा — “आइए सास…”
सास ने दरवाजा खोला और अंदर आईं। कमरे में अंधेरा था। मैं चादर ओढ़े लेटी हुई थी। सास ने लाइट ऑन की।
“बेटा… तुम ठीक हो ना? रात को बहुत देर तक आवाजें आ रही थीं… नींद नहीं आ रही थी क्या?” सास ने पूछा।
मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। विक्रम चादर के नीचे मेरी चूत में लंड डाले पड़ा था। वह धीरे-धीरे हिलने लगा। “आह्ह्ह…” मेरे मुंह से निकलने वाला था लेकिन मैंने खुद को रोक लिया।
“न-नहीं सास… बस… थोड़ा बुखार सा था…” मैंने काँपती आवाज में कहा।
सास मेरे पास आईं और मेरे माथे पर हाथ रखा। “बुखार तो नहीं है… फिर भी आराम करो बेटा।”
उसी समय विक्रम ने चादर के नीचे से जोर से धक्का मारा। “उउउह्ह्ह…” मेरे मुंह से हल्की सी आवाज निकल गई।
“क्या हुआ रिया?” सास ने पूछा।
“न-नहीं… कुछ नहीं… बस… पेट में हल्का दर्द…” मैंने झूठ बोला। विक्रम चादर के नीचे मुस्करा रहा था और धीरे-धीरे चोद रहा था। उसका चेहरा मेरे स्तनों के बीच दबा हुआ था।
सास कुछ देर और बैठी रहीं। फिर बोलीं — “ठीक है बेटा… सो जाओ। कल सुबह बात करेंगे।”
जैसे ही सास बाहर गईं और दरवाजा बंद किया, विक्रम ने चादर हटाई और जोर से चोदना शुरू कर दिया।
“भाभी… सास के सामने ही चोद रहा था मैं…” उसका चेहरा रोमांच से भरा था। आँखें चमक रही थीं। वह जोर-जोर से चोद रहा था।
“विक्रम… अह्ह्ह… पागल हो गए हो… उउउउह्ह्ह…” मैं चीख पड़ी।
वह मेरी गांड पर थप्पड़ मारता हुआ चोद रहा था। “तेरी चूत… सास के सामने… कितनी गीली हो गई…”
मुझे तुरंत orgasm आ गया। “विक्रम… आ रहा है… अह्ह्ह्ह…” मेरा शरीर काँप उठा।
विक्रम ने भी जोर से दबाया और मेरी चूत में झड़ गया। “आह्ह्ह… भाभी…”
हम दोनों पसीने से भीगे हुए एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
आखिरी रात — सबसे खतरनाक चुदाई
आखिरी रात — सबसे खतरनाक चुदाई (पूरी रात चोदा)
सास-ससुर के शक के बाद भी विक्रम रुका नहीं। वह आखिरी रात (जब पति अगले दिन सुबह आने वाले थे) पूरी रात मेरे साथ बिताना चाहता था। रात के 11 बजे जब सास-ससुर अपने कमरे में सो चुके थे, विक्रम मेरे कमरे में आया।
“भाभी… आज आखिरी रात है। सुबह भैया आ जाएंगे। आज पूरी रात मैं तेरी चूत और गांड दोनों चोदूंगा।” उसने दरवाजा बंद करते हुए कहा। उसका चेहरा पहले से ही लाल था।
मैं डर गई — “विक्रम… सास शक कर रही हैं… पकड़े गए तो…”
“आज जोखिम उठाना पड़ेगा भाभी।” उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर मुंह लगा दिया।
उस रात हमने कपड़े बार-बार उतारे और पहने।
पहला राउंड (11:30 बजे) विक्रम ने मेरी साड़ी फाड़ते हुए उतारी। ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। ब्रा और पैंटी एक साथ उतार दी। मैं पूरी नंगी हो गई। उसने भी कपड़े उतारे। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और सीधा मेरी चूत में लंड घुसा दिया। वह जोर-जोर से चोद रहा था।
“आह्ह्ह… विक्रम… धीरे… सास सुन लेंगी…” मैं चीख रही थी। “चिल्ला भाभी… आज पूरी रात चोदूंगा…” उसका चेहरा lust से भरा था। वह मेरे स्तनों को दबाता हुआ चोद रहा था।
मुझे पहला orgasm आ गया। विक्रम ने भी मेरी चूत में झाड़ दिया।
दूसरा राउंड (12:30 बजे) थोड़ी देर बाद वह फिर से तैयार हो गया। इस बार उसने मुझे doggy style में किया। मेरी गांड ऊपर, वह पीछे से चोद रहा था। साथ ही मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहा था।
“भाभी तेरी गांड… आज आखिरी मौका है…” वह फुसफुसा रहा था। “विक्रम… अह्ह्ह… दर्द… लेकिन और जोर से…” मैं तकिये में मुंह दबा रही थी।
उसने तेल लगाकर मेरी गांड भी मारी। धीरे-धीरे लेकिन गहराई से। मैं दर्द और मजा दोनों से काँप रही थी।
तीसरा राउंड (2 बजे) हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे। विक्रम ने मुझे उठाया और दीवार से चिपका कर खड़े-खड़े चोदा। मेरी एक टांग उसके कंधे पर, वह जोर से धक्के मार रहा था।
“आह्ह्ह… विक्रम… खड़े-खड़े… उउउह्ह्ह…” उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था। आँखें बंद, मुंह खुला। वह बार-बार बोल रहा था — “तेरी चूत… तेरी गांड… दोनों मेरी हो गईं आज…”
चौथा राउंड (3:30 बजे) हम बाथरूम में गए। विक्रम ने मुझे बाथरूम के काउंटर पर लिटाया और फिर से चोदा। पानी की आवाज में हमारी चुदाई की आवाज छुप गई।
वह मेरी गांड में उंगली डालकर चोद रहा था। मैं दो जगह से मारी जा रही थी।
“विक्रम… अह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… उउउउह्ह्ह…” “मरना नहीं भाभी… आज पूरी रात चोदना है…”
पांचवां राउंड (5 बजे सुबह) सुबह होने वाली थी। विक्रम ने मुझे फिर से बिस्तर पर लिटाया। इस बार बहुत धीरे और गहरे धक्के मार रहा था। हम दोनों थक चुके थे लेकिन रुक नहीं रहे थे।
“आखिरी बार भाभी… तेरी चूत में झाड़ता हूँ…” “हाँ विक्रम… अंदर निकाल दो… पूरी रात चोदा तूने मुझे…”
वह जोर से दबा और आखिरी बार मेरी चूत में झाड़ गया। हम दोनों पूरी तरह थककर एक-दूसरे से लिपट गए।
पूरी रात में मैं कम से कम 6-7 बार झड़ चुकी थी। विक्रम ने मेरी चूत और गांड दोनों को पूरी रात चोदा था।
सुबह 6 बजे जब सास उठने वाली थीं, विक्रम चुपके से अपने कमरे में चला गया।
मैं नंगी लेटी हुई, पूरे शरीर में दर्द, चूत और गांड दोनों सूजे हुए, लेकिन मन में अजीब सी संतुष्टि लिए सोच रही थी — “आज आखिरी रात थी…”
- भाई के मोटे लंड से चुदते-चुदते चीख-चीखकर पानी छोड़ने लगी
- दीदी की मोटे लंड से चुदाई की चीखे निकाल दी
- बुआ की कुंवारी बेटी ने मुझे गर्म करके सील तुड़वाई – पहली चुदाई की पूरी कहानी
पति आते ही शक हो गया
सुबह 8 बजे पति राजेश आ गए। मैं अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई थी। पूरी रात विक्रम ने मुझे चोदा था — चूत और गांड दोनों। मेरी गांड अभी भी सूजी हुई थी और दर्द हो रहा था। चलने में भी तकलीफ थी।
पति कमरे में आए और मुझे देखकर मुस्कुराए।
“अरे रिया! कैसी हो? दो हफ्ते बाद मिल रहे हैं ना…” उन्होंने मुझे गले लगाया।
जैसे ही उन्होंने मुझे गले लगाया, मुझे दर्द हुआ। मैं हल्का सा कराह गई।
“क्या हुआ? दर्द है क्या?” पति ने तुरंत पूछा।
“न-नहीं… बस… थोड़ी सी कमर दर्द कर रही है…” मैंने झूठ बोला।
पति ने मुझे देखा। मेरी आँखें थकी हुई थीं, होंठ सूजे हुए थे, और गर्दन पर विक्रम के चूसने के निशान थे।
“तुम्हारी गर्दन पर ये निशान क्या हैं?” पति ने उंगली से छुआ।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। “कुछ नहीं… मच्छर काट गए होंगे…”
पति चुप रहे। फिर उन्होंने कहा — “चलो, नहा लो। मैं भी नहा के आता हूँ।”
मैं बाथरूम गई। जैसे ही मैं नहाने लगी, पति अंदर आ गए। उन्होंने मुझे नंगा देखा। मेरी गांड पर विक्रम के थप्पड़ के निशान थे। चूत और गांड दोनों सूजे हुए थे।
पति का चेहरा बदल गया।
“रिया… ये क्या हालत है तेरी? गांड क्यों सूजी हुई है? और ये निशान…?” उन्होंने सीधा पूछा।
मैं घबरा गई। “कुछ नहीं राजेश… बस…”
पति ने मुझे करीब खींचा और मेरी गांड को छुआ। मैं दर्द से काँप गई।
“बताओ रिया… क्या हुआ? विक्रम ने कुछ किया क्या?” पति की आवाज गंभीर थी।
मैं चुप रही। आँखें नीचे झुका लीं।
पति ने फिर पूछा — “सच बोलो। विक्रम ने तेरी गांड मारी है क्या?”
मेरी आँखों में आँसू आ गए। मैं धीरे से सिर हिला दिया।
पति चुप हो गए। कुछ देर तक कुछ नहीं बोले। फिर उन्होंने कहा —
“तो ये बात है… दो हफ्ते में ही देवर ने भाभी की गांड मार ली…”
उनकी आवाज में गुस्सा था, लेकिन साथ में कुछ और भी था। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी सूजी हुई गांड को देखा।
“दर्द हो रहा है ना?” उन्होंने धीरे से पूछा।
“हाँ…” मैं रोते हुए बोली।
पति ने मेरी गांड पर हाथ फेरा। “विक्रम ने कितनी बार मारी?”
“पूरी रात…” मैंने सच बता दिया।
पति चुप रहे। फिर उन्होंने कहा —
“अब क्या करे? शादीशुदा औरत होकर देवर से चुदवाई… और वो भी गांड…”
मैं रो रही थी। “माफ कर दो राजेश… मैं गलत हो गई…”
पति ने मुझे गले लगाया। “अब क्या माफ करना… हो चुका है। लेकिन अब आगे क्या?”
पति का गुस्सा और विक्रम को घर से निकालना
पति राजेश का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने मेरी बात सुनते ही बिस्तर से उठकर बाहर चले गए। मैं डरते हुए उनके पीछे-पीछे गई।
पति सीधा विक्रम के कमरे में गए। विक्रम अभी भी सो रहा था। पति ने जोर से दरवाजा खोला और चिल्लाए —
“विक्रम! उठ! बाहर निकल!”
विक्रम चौंककर उठा। “भैया… क्या हुआ?”
पति ने गुस्से में कहा — “तूने मेरी बीवी की गांड मारी है पूरी रात? शर्म नहीं आई तुझे? मैं तेरे भाई की तरह था और तूने ये किया?”
विक्रम चुप रहा। उसका चेहरा पीला पड़ गया।
पति ने फिर चिल्लाकर कहा — “अब एक मिनट भी इस घर में नहीं रहेगा तू! निकल बाहर! अभी!”
सास-ससुर भी आवाज सुनकर बाहर आ गए। सास ने पूछा — “क्या हुआ राजेश?”
पति ने गुस्से में कहा — “आपके बेटे ने रिया की गांड मारी है पूरी रात। अब मैं इसे एक पल भी इस घर में नहीं रख सकता!”
सास चौंक गईं। ससुर भी गुस्से में आ गए। विक्रम ने कुछ बहाना बनाने की कोशिश की लेकिन पति ने उसकी बात काट दी।
“बाहर निकल! अभी! और कभी इस घर के पास मत आना!” पति ने विक्रम का बैग फेंक दिया।
विक्रम ने आखिरी बार मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में पछतावा और गुस्सा दोनों था। वह बिना कुछ बोले घर से निकल गया।
पति ने दरवाजा बंद कर दिया और मेरे कमरे में आए। मैं बिस्तर पर बैठी रो रही थी।
पति ने मुझे देखा और गुस्से में बोले — “तू भी शर्म कर! शादीशुदा औरत होकर देवर से चुदवाई? और वो भी गांड? पूरी रात?”
मैं रोते हुए बोली — “माफ कर दो राजेश… मैं गलत हो गई… बहुत दर्द हो रहा है…”
पति चुप रहे। कुछ देर बाद उन्होंने कहा — “अब से तू आराम कर। मैं डॉक्टर के पास ले जाऊंगा। और विक्रम का नाम कभी मत लेना।”
उस दिन के बाद विक्रम कभी घर नहीं आया। पति ने उसे पूरी तरह काट दिया। सास-ससुर भी बहुत नाराज थे।
मैं बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी — “एक रात की गलती ने सब कुछ बदल दिया…”