भाभी ने देवर का लंड चूसा – अकेली रात का गुप्त राज
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गर्मियों की एक उमस भरी शाम थी। मैं (राहुल) कॉलेज से लौट रहा था। पूरा घर खाली था क्योंकि मम्मी-पापा शादी में गए थे और मेरे बड़े भाई (भाभी के पति) दो हफ्ते के लिए दिल्ली गए हुए थे। सिर्फ भाभी अकेली घर पर थीं।
जब मैंने दरवाजा खोला तो सामने भाभी खड़ी थीं। उन्होंने हल्की सी नीली नाइटी पहनी हुई थी, जो थोड़ी पारदर्शी थी। उनके बड़े स्तन नाइटी को तान रहे थे और निप्पल्स की हल्की सी आउटलाइन दिख रही थी। बाल खुले थे, चेहरा थोड़ा उदास लेकिन सुंदर।
“आ गया राहुल?” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उनकी आवाज में कुछ अलग था।
“हाँ भाभी।” मैंने जवाब दिया और अंदर आ गया।
बाहर अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। सिर्फ मोमबत्ती की हल्की रोशनी रह गई।
भाभी डर गईं। “अरे, बिजली चली गई… अकेले अंधेरा अच्छा नहीं लगता।”
मैंने उन्हें आश्वस्त किया। हम दोनों हॉल में बैठ गए। भाभी मेरे बगल में बैठी थीं। नाइटी थोड़ी ऊपर खिसक गई थी, उनकी गोरी जांघें दिख रही थीं। मैं कोशिश कर रहा था कि नजर न लगाऊँ, लेकिन भाभी की खुशबू और उनका शरीर मुझे बेचैन कर रहा था।
कुछ देर चुप्पी रही। फिर भाभी ने धीरे से कहा, “राहुल, तुम्हारा भाई मुझे समय ही नहीं देता। दो हफ्ते से बाहर है… घर खाली पड़ा है। मैं बहुत अकेली महसूस करती हूँ।”
मैं कुछ बोल न सका। भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में कुछ अलग चमक थी।
“तुम मुझे अच्छे लगते हो राहुल… बहुत अच्छे। कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि अगर तुम मेरे पति होते तो…” उन्होंने बात अधूरी छोड़ दी।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। “भाभी… ये क्या कह रही हैं आप?”
भाभी ने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया। “सच कह रही हूँ। तुम्हारा भाई मुझे छूता भी नहीं। मैं औरत हूँ राहुल… मुझे भी तो चाहिए।”
उनका हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरक रहा था। मेरे लंड में हल्का सा खिंचाव महसूस हुआ। भाभी ने देख लिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “देखो… तुम्हारा भी खड़ा हो गया। मतलब तुम भी चाहते हो ना?”
मैं घबरा गया। “भाभी… ये गलत है… आप मेरी भाभी हैं…”
भाभी ने करीब आकर मेरे कान में फुसफुसाया, “कोई नहीं देख रहा। सिर्फ हम दो। आज रात कोई रोक-टोक नहीं।”
उन्होंने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होठों पर हल्का सा किस किया। मैं स्तब्ध रह गया। भाभी ने फिर किस किया, इस बार गहरा। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई।
मेरे एक्सप्रेशन: आँखें खुली की खुली, शरीर कड़क, लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था और पैंट में उभर रहा था। चेहरा लाल हो गया था, सांसें तेज।
भाभी ने मेरे कान में फिर कहा, “राहुल… आज मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ। बहुत दिनों से मन कर रहा था।”
मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। भाभी ने मेरी पैंट के ऊपर हाथ रखा और धीरे से दबाया। “कितना सख्त हो गया है… चलो बेडरूम में चलते हैं।”
हम दोनों बेडरूम में आए। भाभी ने मोमबत्ती जलाई। कमरा हल्का रोशन था। भाभी ने मुझे बेड पर बैठाया।
अब आगे क्या होगा? | bhabhi ne devar ka lund chusa ya nahi
भाभी ने देवर का लंड चूसा – पूरी डिटेल
भाभी ने मुझे बेडरूम में घसीटते हुए बेड पर धक्का दिया। मैं पीठ के बल लेट गया। भाभी मेरे ऊपर झुक गईं। उनकी नाइटी की चेन थोड़ी खुल गई थी, अंदर से उनकी गोरी छाती दिख रही थी।
“आज मैं तुम्हारा लंड चूसूंगी राहुल… बहुत दिनों से मन कर रहा था,” भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया।
उन्होंने मेरी टी-शर्ट ऊपर खींचकर उतार दी। फिर मेरी पैंट का बटन खोला। जिप खींची। दोनों हाथों से पैंट को कूल्हों तक खिसकाया और फिर पूरी तरह उतार दिया। अब सिर्फ अंडरवीयर बची थी। भाभी ने अंडरवीयर के इलास्टिक को दोनों तरफ से पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे खिसकाया।
मेरा लंड बाहर आया — मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई, सिरा पहले से ही गीला हो चुका था। भाभी की आँखें चमक उठीं।
“वाह… कितना बड़ा और मोटा है तुम्हारा लंड… भाई से तो कहीं ज्यादा,” भाभी ने कहा और मेरे लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया।
उन्होंने पहले धीरे से ऊपर-नीचे किया। फिर झुक गईं और मेरे लंड के सिरे पर जीभ फेर दी। एक बार, फिर दूसरी बार। फिर पूरा सिरा मुंह में ले लिया। bhabhi ne devar ka lund chusa
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, मुंह फैला हुआ, गाल थोड़े अंदर धँसे हुए, सिर आगे-पीछे हो रहा था। कभी-कभी वे लंड को बाहर निकालकर उस पर लंबी जीभ फेरतीं, फिर फिर से मुंह में ले लेतीं। उनकी साँसें गर्म हो रही थीं।
मैं उनके बालों में हाथ डालकर उनका सिर पकड़े हुए था। भाभी अब तेजी से चूसने लगीं। “स्लurp… स्लurp… स्लurp…” की गीली आवाजें कमरे में भर गईं। वे पूरा लंड गले तक ले जा रही थीं, फिर बाहर निकालकर सिरे को चाट रही थीं।
मैंने भाभी की नाइटी का ऊपरी हिस्सा खींचा। नाइटी उनकी छाती तक आ गई। अंदर ब्रा थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनके दोनों स्तनों को जोर से दबाया। भाभी का मुंह और भी चौड़ा हो गया, लेकिन उन्होंने चूसना नहीं रोका।
भाभी ने एक हाथ से अपनी नाइटी पूरी ऊपर खींचकर उतार दी। अब वे सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। उन्होंने ब्रा का हुक पीछे से खोला — धीरे-धीरे। ब्रा के दोनों कप खुलते ही उनके बड़े, गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स सख्त और गुलाबी थे। मैं तुरंत उन पर हाथ मार दिया। दोनों स्तनों को मसलने लगा, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाने लगा।
भाभी अब और जोर से मेरा लंड चूस रही थीं। कभी गले तक ले जातीं, कभी सिर्फ सिरे को चूसतीं और जीभ से निचे से ऊपर तक चाटतीं।
मेरे एक्सप्रेशन: मेरा चेहरा लाल हो चुका था। आँखें आधी बंद, मुंह खुला, सांसें बहुत तेज। भाभी के बालों में उँगलियाँ फँसी हुई थीं। कभी-कभी मैं उनकी छाती पर हाथ मारता, कभी उनके सिर को नीचे दबाकर लंड और गहरा मुंह में डलवाता। मेरा शरीर हल्का काँप रहा था।
भाभी ने अब मेरे अंडकोष को भी चाटना शुरू कर दिया। एक हाथ से लंड को ऊपर-नीचे कर रही थीं, दूसरी तरफ अंडकोष चूस रही थीं। फिर वापस लंड मुंह में ले लिया।
कुछ देर बाद भाभी उठीं। उन्होंने अपनी पैंटी के दोनों तरफ उँगलियाँ डालीं और धीरे-धीरे नीचे खिसकाई। पैंटी जांघों से घुटनों तक आई तो उनकी चूत साफ दिख गई — पूरी तरह गीली, होंठ फूले हुए, अंदर से चमक रही थी।
भाभी ने पैंटी पूरी उतार दी और मेरे ऊपर चढ़ गई। उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा, अपनी गीली चूत के होठों पर रगड़ा और धीरे से नीचे बैठ गईं।
“आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारा लंड… मेरी चूत में…” भाभी की आँखें बंद हो गईं।
वे ऊपर-नीचे होने लगीं। हर बार जब पूरा लंड अंदर जाता, भाभी का मुंह खुल जाता। “आह्ह… उह्ह… राहुल… और जोर से…”
मैं नीचे से धक्के लगा रहा था। भाभी के स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उनकी छाती पकड़ ली और जोर-जोर से दबाने लगा।
भाभी के एक्सप्रेशन: सिर पीछे झुका, बाल खुले, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई, आँखें कभी बंद तो कभी मेरी तरफ देख रही थीं। “राहुल… तुम बहुत अच्छे हो… भाई से कहीं बेहतर चोदते हो…” उनकी आवाज काँप रही थी।
मेरे एक्सप्रेशन: मेरा चेहरा पसीने से भीग चुका था। दाँत कसे हुए, भौंहें सिकुड़ी हुई, आँखें भाभी के उछलते स्तनों और उनके चेहरे पर टिकी हुई। हर धक्के के साथ मैं उनकी कमर को जोर से पकड़े हुए था। “भाभी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है…” मेरे मुंह से निकल रहा था।
भाभी अब तेजी से राइड कर रही थीं। अचानक उनका शरीर अकड़ गया। “आह्ह्ह्ह… राहुल… मैं झड़ गई… आह्ह्ह!” उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैं भी रुक न सका। “भाभी… मैं भी…” मैंने भाभी को नीचे खींचा और जोर का आखिरी धक्का मारा। मेरा गाढ़ा वीर्य भाभी की चूत के अंदर भर गया। लंड फड़क-फड़क कर वीर्य उगल रहा था।
भाभी मेरे ऊपर ही लेट गईं। दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे। भाभी ने मेरे गाल पर किस किया।
“आज रात अभी खत्म नहीं हुई राहुल…” भाभी ने कान में फुसफुसाया।
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मिशनरी पोजीशन में भाभी की चुदाई – जोरदार और चीखों वाली
पहली राउंड के बाद भाभी मेरे ऊपर ही लेटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से तर थे। मेरा लंड अभी भी भाभी की चूत के अंदर आधा अंदर था। भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “राहुल… अब मुझे नीचे लिटा कर जोर-जोर से चोदो… मैं चीख-चीख कर बोलना चाहती हूँ…”
मैंने भाभी को धीरे से नीचे लिटा दिया। अब वे पीठ के बल लेट गईं। उनके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा लाल, स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं उनके बीच में घुटनों के बल बैठ गया। भाभी ने खुद अपनी जांघें फैला दीं।
मैंने अपना लंड पकड़ा — अभी भी गीला और खड़ा था। भाभी की चूत अभी भी मेरे वीर्य से भरी हुई थी। मैंने लंड का सिरा उनकी चूत पर रखा और एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड एक ही झटके में अंदर घुस गया।
“आह्ह्ह्ह्ह्ह… राहुल…!” भाभी जोर से चीख पड़ीं। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
मैंने रफ्तार पकड़ ली। अब मैं जोर-जोर से भाभी को चोद रहा था। हर धक्का इतना गहरा था कि लंड पूरी तरह अंदर जाता और बाहर निकलता। “थप… थप… थप…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। भाभी की चूत से “पुच… पुच… पुच…” की गीली आवाजें आ रही थीं।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें कभी बंद होतीं, कभी खुल जातीं। मुंह खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई। हर जोरदार धक्के पर उनका मुंह “आह्ह… उह्ह… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” चीखता जा रहा था। गर्दन पीछे झुकी हुई, बाल बिखरे हुए, स्तन मेरे हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। उनका शरीर बेड पर लहरा रहा था।
मैं नीचे झुक गया और भाभी के दाएँ स्तन को मुंह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाता, कभी दाँतों से हल्का काट लेता। साथ ही नीचे से लगातार जोरदार धक्के लगा रहा था।
“राहुल… मेरे स्तन चूसो… और जोर से चोदो ना… आह्ह्ह्ह!” भाभी चीख रही थीं।
मैंने बाएँ स्तन को भी मुंह में लिया और चूसने लगा। भाभी के दोनों स्तन अब मेरे मुंह और हाथों से भीग चुके थे। मैं एक हाथ से उनका दूसरा स्तन मसल रहा था और मुंह से एक को चूस रहा था।
मेरे एक्सप्रेशन: मेरा चेहरा पूरी तरह लाल हो चुका था। पसीना माथे, गर्दन और सीने से बह रहा था। दाँत कसे हुए, भौंहें सिकुड़ी हुई। आँखें भाभी के चेहरे और उछलते स्तनों पर टिकी हुई थीं। मैं भाभी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए था ताकि हर धक्का और गहरा लगे। मुंह से लगातार “भाभी… तुम्हारी चूत कितनी गीली और टाइट है… आज तो मैं तुम्हें फाड़ दूंगा…” निकल रहा था।
भाभी अब बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थीं। “राहुल… और जोर से… हाँ… हाँ… मेरी चूत को मारो… आह्ह्ह्ह… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह्ह्ह!” उनका शरीर अकड़ गया। आँखें पीछे की तरफ घूम गईं, मुंह खुला रह गया और वे जोर से चीख पड़ीं। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कस लिया कि मुझे भी होश आ गया।
मैंने और तेज होकर धक्के लगाए। भाभी की चीखें अब लगातार आ रही थीं — “आह्ह… आह्ह… राहुल… चोदो मुझे… जोर से चोदो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज… आह्ह्ह्ह!”
आखिरकार मैं भी रुक न सका। “भाभी… मैं झड़ रहा हूँ…” मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और दूसरी बार अपना गर्म वीर्य भाभी की चूत के अंदर छोड़ दिया। लंड फड़कता रहा और वीर्य अंदर भरता गया।
मैं भाभी के ऊपर ही लेट गया। दोनों की साँसें बहुत तेज थीं। भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं।
“राहुल… आज तुमने मुझे सच में संतुष्ट कर दिया…” भाभी ने धीरे से कहा।
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बाथरूम में शॉवर सेक्स – भाभी फिर से लंड चूसती है और दीवार से टिका कर चुदाई
पहली दो राउंड के बाद भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “राहुल… चलो बाथरूम चलते हैं। शॉवर में नहाते हुए फिर से मजे करते हैं।”
हम दोनों नंगे ही बाथरूम में गए। भाभी ने शॉवर ऑन किया। गर्म पानी हमारे शरीर पर गिरने लगा। पानी की बूँदें भाभी के गोरे स्तनों पर चमक रही थीं, उनके निप्पल्स और भी ज्यादा सख्त हो गए थे।
भाभी ने मुझे दीवार से टिका दिया। फिर घुटनों के बल बैठ गईं। पानी उनके बालों और शरीर पर बह रहा था। उन्होंने मेरा लंड दोनों हाथों में पकड़ लिया। पानी के कारण लंड और भी ज्यादा चमक रहा था।
भाभी ने पहले लंड के सिरे पर जीभ फेरी। फिर पूरा सिरा मुंह में ले लिया। पानी उनके मुंह से निकलकर लंड पर बह रहा था। “स्लurp… स्लurp…” की आवाजें शॉवर की आवाज के साथ मिल रही थीं।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें ऊपर की तरफ देख रही थीं (मेरी तरफ), मुंह फैला हुआ, गाल अंदर धँसे हुए, पानी उनके चेहरे और स्तनों पर बह रहा था। वे लंड को गले तक ले जा रही थीं, फिर बाहर निकालकर सिरे को चाट रही थीं। कभी-कभी वे लंड को बाहर निकालकर उस पर पानी गिरने देतीं और फिर से मुंह में ले लेतीं।
मैंने भाभी के गीले बालों में हाथ डाल दिया और उनका सिर आगे-पीछे करने लगा। भाभी अब और जोर से चूस रही थीं। पानी उनके मुंह से निकलकर मेरे अंडकोष पर बह रहा था।
मेरे एक्सप्रेशन: मेरा सिर दीवार से टिका हुआ था, आँखें आधी बंद, मुंह खुला। पानी मेरे चेहरे और शरीर पर गिर रहा था। भाभी के गीले बालों में मेरी उँगलियाँ फँसी हुई थीं। मैं कभी-कभी उनकी गर्दन और स्तनों पर हाथ फेरता। मेरा चेहरा pleasure से विकृत हो रहा था।
भाभी ने अब मेरे अंडकोष भी चाटने शुरू कर दिए। पानी के बीच उनकी जीभ बहुत गर्म लग रही थी। कुछ देर बाद उन्होंने लंड को मुंह से निकाला और ऊपर देखते हुए बोलीं, “राहुल… अब मुझे दीवार से टिका कर चोदो… जोर से…”
मैंने भाभी को उठाया और उन्हें शॉवर की दीवार से टिका दिया। भाभी ने अपनी एक टाँग उठा ली। मैंने उनका एक पैर अपनी कमर पर रख लिया। फिर अपना लंड उनकी गीली चूत पर रखा और एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया।
“आह्हhhhh… राहुल…!” भाभी जोर से चीख पड़ीं।
अब मैं भाभी को दीवार से टिका कर जोर-जोर से चोद रहा था। पानी हमारे शरीर के बीच से बह रहा था। हर धक्के के साथ भाभी की छातियाँ मेरे सीने से टकरा रही थीं। मैंने भाभी के दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से दबाते हुए चोद रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: सिर दीवार से टिका हुआ, मुंह खुला, आँखें कभी बंद तो कभी मेरी तरफ देख रही थीं। पानी उनके चेहरे पर बह रहा था। “आह्ह… उह्ह… राहुल… और जोर से… दीवार से टिका कर फाड़ दो मेरी चूत… आह्हhhhh!” उनकी चीखें शॉवर की आवाज में भी साफ सुनाई दे रही थीं।
मेरे एक्सप्रेशन: मेरा चेहरा पानी से भीगा हुआ, बाल गीले, आँखें भाभी के चेहरे और उछलते स्तनों पर टिकी हुईं। मैं भाभी की एक टाँग को कसकर पकड़े हुए था और दूसरा हाथ उनकी गांड पर रखा था। हर धक्के के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ झुक रहा था। मुंह से निकल रहा था — “भाभी… तुम्हारी चूत आज भीगकर और भी ज्यादा टाइट लग रही है…”
भाभी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। “राहुल… चोदो मुझे… जोर से चोदो… मैं तुम्हारी हूँ… आह्हhhhh…!”
आखिरकार भाभी का शरीर अकड़ गया। उन्होंने जोर से चीखकर झड़ने का एहसास कराया। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
मैं भी रुक न सका। मैंने भाभी को और जोर से दीवार से टिकाया और आखिरी जोरदार धक्के लगाए। फिर से मेरा वीर्य भाभी की चूत के अंदर भर गया।
हम दोनों शॉवर में ही कुछ देर खड़े रहे, पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। भाभी ने मुझे गले लगा लिया।
“राहुल… आज रात तुमने मुझे सच में संतुष्ट कर दिया…” भाभी ने कहा।
- भाई के मोटे लंड से चुदते-चुदते चीख-चीखकर पानी छोड़ने लगी
- दीदी की मोटे लंड से चुदाई की चीखे निकाल दी
- बुआ की कुंवारी बेटी ने मुझे गर्म करके सील तुड़वाई – पहली चुदाई की पूरी कहानी
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✅ अगले दिन की कहानी
रात भर की चुदाई के बाद हम दोनों थककर सो गए थे। भाभी मेरी बाहों में नंगी लेटी हुई थीं। सुबह करीब 8 बजे सूरज की रोशनी कमरे में आ रही थी।
मैं आँखें खोलकर देखता हूँ कि भाभी अभी भी मेरे पास लेटी हैं। उनकी नंगी पीठ मेरी तरफ थी। मैं उनके कूल्हे पर हाथ फेरने लगा। भाभी की नींद खुल गई। उन्होंने मुड़कर मुझे देखा और मुस्कुराते हुए कहा —
“राहुल… सुबह हो गई… और तुम अभी भी जाग गए हो?”
मैंने उन्हें अपनी तरफ खींच लिया और उनके स्तन पर हाथ रख दिया। भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया —
“कल रात के बाद आज सुबह भी मन कर रहा है… चलो, एक बार और कर लेते हैं।”
भाभी ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया। फिर वे नीचे की तरफ सरक गईं। सुबह की रोशनी में उनका नंगा शरीर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था। उन्होंने मेरी चादर हटाई। मेरा लंड सुबह के समय पहले से ही थोड़ा खड़ा था।
भाभी ने उसे हाथ में लिया और धीरे से ऊपर-नीचे करने लगीं। फिर झुक गईं और सीधे मुंह में ले लिया।
सुबह की ब्लोबज | bhabhi ne devar ka lund chusa
भाभी आज बहुत धीरे-धीरे चूस रही थीं। जीभ से लंड के नीचे की नस को चाट रही थीं, सिरे को चूस रही थीं और कभी-कभी पूरे लंड को गले तक ले जा रही थीं। पानी की जगह अब उनकी लार से लंड भीग रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें ऊपर देख रही थीं (मेरी तरफ), मुंह में लंड लेकर वे मुझे देख रही थीं। कभी-कभी वे लंड को बाहर निकालकर उस पर लंबी जीभ फेरतीं और फिर से मुंह में ले लेतीं। उनके बाल सुबह के उलझे हुए थे, चेहरा अभी भी कल रात की थकान से थोड़ा सुस्त था, लेकिन आँखों में चमक थी।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं सिर को तकिए पर टिकाए लेटा था। आँखें भाभी के मुंह और उनके उलझे बालों पर टिकी हुई थीं। सुबह की हल्की रोशनी में भाभी का नंगा शरीर देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो रहा था। मैं उनके बालों में हाथ डालकर उनका सिर आगे-पीछे कर रहा था।
भाभी ने काफी देर तक चूसा। फिर उन्होंने उठकर मेरे ऊपर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने उन्हें पकड़ लिया।
“भाभी… आज सुबह मैं आपको चोदना चाहता हूँ,” मैंने कहा।
भाभी मुस्कुराईं और पीठ के बल लेट गईं। मैं उनके बीच में आ गया। उन्होंने खुद अपनी जांघें फैला दीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर डाला।
“आह्ह…” भाभी की हल्की सी साँस निकली।
मैंने रफ्तार बढ़ाई। सुबह की रोशनी में भाभी के स्तन साफ दिख रहे थे। मैं झुककर उनके एक स्तन को मुंह में ले लिया और चूसते हुए जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें आधी बंद, मुंह खुला, “राहुल… सुबह-सुबह इतना जोर से… आह्ह… अच्छा लग रहा है…” उनकी आवाज अभी भी नींद भरी थी, लेकिन pleasure से काँप रही थी।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं भाभी के ऊपर झुका हुआ था, एक हाथ से उनका स्तन दबा रहा था, दूसरा हाथ उनकी कमर पकड़े हुए था। सुबह की रोशनी में भाभी का चेहरा देखकर मेरा मन और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।
कुछ देर बाद भाभी ने मुझे रुकने को कहा। उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। अब वे राइड करने लगीं।
“राहुल… आज सुबह तुम्हारा लंड और भी ज्यादा अच्छा लग रहा है…” भाभी ने कहा और तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं।
मैं नीचे से धक्के लगा रहा था। भाभी के स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे। मैं दोनों हाथों से उनकी छाती पकड़कर मसल रहा था।
आखिरकार भाभी का शरीर काँप उठा। “आह्हhhhh… राहुल… मैं झड़ गई…”
उनके झड़ते ही मैंने भी भाभी को नीचे खींच लिया और जोर से धक्का मारा। दूसरी बार सुबह का वीर्य भाभी की चूत में भर दिया।
भाभी मेरे ऊपर ही लेट गईं। दोनों साँसें तेज थीं।
“राहुल… आज दिन भर घर में सिर्फ हम दोनों हैं… मम्मी-पापा शाम को आएंगे। भाई भी कल लौटेंगे। आज पूरा दिन हमारा है…” भाभी ने मेरे सीने पर सिर रखते हुए कहा।
✅ दिन में किचन में चुदाई – काउंटर पर भाभी
सुबह की चुदाई के बाद हम दोनों नहा-धोकर तैयार हो गए। घर में अभी भी सिर्फ हम दोनों थे। भाभी ने कहा कि नाश्ता बना लेते हैं। हम दोनों किचन में चले गए।
भाभी ने हल्का सा सूट पहना हुआ था, लेकिन अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। उनके स्तन सूट में साफ उभर रहे थे। मैं उनके पीछे-पीछे किचन में गया। भाभी चूल्हे के पास खड़ी थीं। मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ ली और उनके कान में फुसफुसाया —
“भाभी… नाश्ता बाद में… पहले आप…”
भाभी मुस्कुराईं और मुड़कर मेरी तरफ देखा। फिर उन्होंने मुझे किचन काउंटर की तरफ खींच लिया। उन्होंने खुद काउंटर पर बैठने की कोशिश की। मैंने उन्हें उठाकर काउंटर पर बिठा दिया।
अब भाभी किचन काउंटर पर बैठी थीं, पैर नीचे लटक रहे थे। मैं उनके सामने खड़ा था। भाभी ने मेरी पैंट का बटन खोला और अंदर हाथ डाल दिया। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो रहा था।
“राहुल… दिन में किचन में… कितना गंदा लग रहा है ना?” भाभी ने कहा, लेकिन उनकी आँखों में चमक थी।
उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवीयर नीचे खिसका दी। मेरा लंड बाहर आ गया। भाभी ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं। फिर उन्होंने अपना सूट ऊपर खिसकाया। अंदर पैंटी थी। उन्होंने पैंटी को एक तरफ खिसका दिया। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
भाभी ने मेरी तरफ देखा और कहा — “आओ… खड़े होकर चोदो मुझे… काउंटर पर ही…”
मैं उनके करीब आ गया। भाभी ने अपनी जांघें फैला दीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड एक ही झटके में भाभी की चूत में घुस गया।
“आह्हhhhh… राहुल!” भाभी जोर से चीख पड़ीं। उनकी आवाज किचन में गूँज गई।
अब मैं खड़े होकर भाभी को चोद रहा था। काउंटर पर बैठी भाभी की ऊँचाई बिल्कुल सही थी। मैं उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। हर धक्के के साथ भाभी का शरीर पीछे की तरफ झुक रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें आधी बंद, मुंह खुला, “आह्ह… उह्ह… राहुल… दिन में किचन में… कितना अच्छा लग रहा है… और जोर से… आह्हhhhh!” उनकी चीखें तेज हो रही थीं। उनके स्तन सूट के अंदर उछल रहे थे।
मैंने भाभी का सूट ऊपर खिसकाया और ब्रा के बिना उनके दोनों स्तनों को हाथों में ले लिया। जोर से दबाते हुए चोद रहा था। भाभी ने मेरी गर्दन पकड़ ली और मुझे अपनी तरफ खींचा। हम दोनों गहरे किस करने लगे।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं खड़ा होकर भाभी को चोद रहा था। मेरा चेहरा भाभी के चेहरे के बहुत करीब था। आँखें उनकी आँखों में देख रहा था। पसीना निकल रहा था। भाभी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए था ताकि हर धक्का और गहरा लगे। मुंह से निकल रहा था — “भाभी… किचन में चोदने का मजा ही अलग है… तुम्हारी चूत आज और ज्यादा गीली है…”
भाभी अब जोर-जोर से चीख रही थीं। “राहुल… और जोर से… हाँ… हाँ… मुझे फाड़ दो… आह्हhhhh… कोई आ जाए तो क्या करोगे? फिर भी चोद रहे हो… आह्ह!”
मैं और तेज हो गया। किचन काउंटर हिल रहा था। भाभी के पैर मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गए थे।
आखिरकार भाभी का शरीर अकड़ गया। “राहुल… मैं झड़ रही हूँ… आह्हhhhh!”
उनके झड़ते ही मैंने भी जोर का आखिरी धक्का मारा और भाभी की चूत में वीर्य छोड़ दिया।
हम दोनों कुछ देर उसी हालत में रहे। भाभी ने मुझे गले लगा लिया। पानी की बोतल से दोनों ने मुँह धोया।
भाभी ने कहा, “राहुल… आज पूरा दिन हमारा है। शाम को सब लौटेंगे।”
लिविंग रूम में सोफे पर चुदाई
किचन में चुदाई के बाद भाभी ने मेरी पैंट ऊपर खींची और खुद भी सूट ठीक किया। उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा —
“राहुल… अब लिविंग रूम चलते हैं। सोफे पर लेटकर मुझे चोदो।”
हम दोनों लिविंग रूम में चले गए। दिन का उजाला कमरे में भर रहा था। पर्दे आधे खुले थे, लेकिन बाहर कोई नहीं था। भाभी ने मुझे सोफे पर धक्का दिया। मैं सोफे पर बैठ गया। भाभी ने खुद सोफे पर लेटने की जगह बनाई।
वे पीठ के बल लेट गईं। सूट ऊपर खिसकाया, पैंटी को एक तरफ खिसका दिया और दोनों जांघें फैला दीं। उनकी चूत अभी भी किचन वाली चुदाई से गीली और फूली हुई थी।
“आओ… सोफे पर ही चोदो मुझे… जोर से…” भाभी ने कहा।
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। भाभी ने खुद मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। मैंने एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड भाभी की चूत में घुस गया।
“आह्हhhhh… राहुल!” भाभी जोर से चीख पड़ीं। उनकी आवाज पूरे लिविंग रूम में गूँज गई।
अब मैं सोफे पर भाभी को जोर-जोर से चोद रहा था। हर धक्के के साथ सोफा हिल रहा था। भाभी के स्तन सूट के अंदर उछल रहे थे। मैंने भाभी का सूट और ऊपर खिसकाया और उनके दोनों स्तनों को हाथों में ले लिया। जोर से दबाते हुए चोद रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: आँखें आधी बंद, मुंह खुला हुआ, “आह्ह… उह्ह… राहुल… सोफे पर चोदने का मजा ही अलग है… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्हhhhh!” उनकी चीखें तेज और लगातार आ रही थीं। कभी-कभी वे अपनी जांघों को मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लेतीं।
मैंने भाभी के एक स्तन को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। साथ ही नीचे से लगातार तेज धक्के लगा रहा था। भाभी का शरीर सोफे पर लहरा रहा था।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं भाभी के ऊपर झुका हुआ था। मेरा चेहरा उनके चेहरे के बहुत करीब था। आँखें भाभी के चेहरे और उछलते स्तनों पर टिकी हुई थीं। पसीना निकल रहा था। भाभी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए था। मुंह से निकल रहा था — “भाभी… लिविंग रूम में सोफे पर चोदने का अलग ही मजा है… तुम्हारी चूत आज बहुत गीली है…”
भाभी अब बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थीं। “राहुल… जोर से… हाँ… हाँ… मुझे चोदो… सोफे पर ही फाड़ दो… आह्हhhhh… कोई आ जाए तो क्या करोगे? फिर भी चोद रहे हो ना… आह्ह!”
मैं और तेज हो गया। सोफे की चरमराहट की आवाज भी आ रही थी। भाभी के स्तन मेरे मुंह और हाथों से भीग चुके थे।
आखिरकार भाभी का शरीर अकड़ गया। “राहुल… मैं फिर झड़ रही हूँ… आह्हhhhh!”
उनके झड़ते ही मैंने भी जोर का आखिरी धक्का मारा और भाभी की चूत में तीसरी बार वीर्य छोड़ दिया।
हम दोनों सोफे पर ही कुछ देर लेटे रहे। भाभी ने मुझे गले लगा लिया।
“राहुल… आज दिन भर का मजा लेना है…” भाभी ने कहा।
✅ रात को दुल्हन की तरह सजी भाभी
शाम हो चुकी थी। दिन भर की चुदाई के बाद हम दोनों थोड़ा रेस्ट कर रहे थे। भाभी अचानक उठकर अपने कमरे में चली गईं। उन्होंने कहा — “राहुल, तुम इंतजार करना। मैं आती हूँ।”
लगभग आधे घंटे बाद भाभी कमरे से बाहर निकलीं।
मैं देखता रह गया।
भाभी ने लाल रंग की भारी ब्राइडल साड़ी पहनी हुई थी। चोली टाइट थी, जिसमें उनके बड़े स्तन साफ उभर रहे थे। गले में मंगलसूत्र, कानों में झुमके, नाक में नथ, हाथों में चूड़ियाँ और पायल। माथे पर सिंदूर और मांग में मंगलसूत्र की लाइन साफ दिख रही थी। चेहरा हल्का मेकअप किया हुआ था — लाल लिपस्टिक, काजल। बाल खुले थे और पीछे से चोटी में बंधे थे।
वे बिल्कुल दुल्हन लग रही थीं।
भाभी ने धीरे से दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ आईं। उन्होंने मुझे देखते हुए शरारत से मुस्कुराया।
“कैसी लग रही हूँ राहुल? आज रात मैं तुम्हारी दुल्हन हूँ…”
मेरा लंड सुनते ही खड़ा हो गया। भाभी ने मुझे बेड पर बैठाया और खुद मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं।
उन्होंने पहले मेरी पैंट का बटन खोला। पैंट और अंडरवीयर दोनों नीचे खिसका दीं। मेरा लंड बाहर आ गया। भाभी ने उसे दोनों हाथों में लिया और धीरे से ऊपर-नीचे करने लगीं।
“आज रात तुम्हारी दुल्हन तुम्हारा लंड चूसेगी…” भाभी ने कहा और सीधे मुंह में ले लिया।
भाभी के एक्सप्रेशन: दुल्हन के कपड़ों में भाभी का चेहरा और भी ज्यादा सेक्सी लग रहा था। आँखों में काजल, होंठों पर लाल लिपस्टिक। वे लंड को चूसते हुए मुझे ऊपर देख रही थीं। कभी-कभी लंड को बाहर निकालकर उस पर लिपस्टिक के निशान छोड़ रही थीं।
मैंने भाभी का पल्लू खींचा। उनकी चोली और ब्लाउज सामने आ गए। मैंने ब्लाउज के हुक खोले। दोनों स्तन बाहर आ गए। भाभी अभी भी मेरा लंड चूस रही थीं। मैं उनके स्तनों को मसलने लगा।
कुछ देर बाद भाभी उठीं। उन्होंने साड़ी का पल्लू और नीचे का हिस्सा खिसकाया। अंदर पेटीकोट और पैंटी थी। उन्होंने पेटीकोट का नाड़ा खोला और पैंटी नीचे उतार दी। अब वे सिर्फ चोली और खुली साड़ी में थीं।
भाभी ने मुझे लेटने को कहा। फिर वे मेरे ऊपर चढ़ गईं।
“आज रात दुल्हन ऊपर चढ़कर चोदेगी…” भाभी ने कहा और मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया।
वे ऊपर-नीचे होने लगीं। साड़ी का कपड़ा उनके शरीर पर लहरा रहा था। चूड़ियाँ और पायल की आवाज आ रही थी। भाभी के स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे। मैं उन्हें चूस रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: दुल्हन के रूप में भाभी का चेहरा लाल हो रहा था। आँखें pleasure से आधी बंद, मुंह खुला, “आह्ह… राहुल… आज रात तुम्हारी दुल्हन को चोदो… जोर से… आहhhhh!” उनकी चीखें और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं नीचे लेटा हुआ था। भाभी को दुल्हन के कपड़ों में देखकर मेरा दिमाग घूम रहा था। आँखें उनकी छाती, गले के मंगलसूत्र और चेहरे पर टिकी हुई थीं। मैं उनकी कमर पकड़कर ऊपर धक्के लगा रहा था। मुंह से निकल रहा था — “भाभी… दुल्हन बनकर तुम और भी खतरनाक लग रही हो… आज तो मैं तुम्हें फाड़ दूंगा…”
भाभी अब तेजी से राइड कर रही थीं। साड़ी का कपड़ा इधर-उधर हो रहा था। चूड़ियों की खनखनाहट और पायल की आवाजें कमरे में भर रही थीं।
आखिरकार भाभी का शरीर काँप उठा। “राहुल… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”
मैंने भी भाभी को नीचे खींच लिया और जोर से धक्का मारा। दुल्हन बनी भाभी की चूत में फिर से वीर्य भर दिया।
भाभी मेरे ऊपर ही लेट गईं। साड़ी अस्त-व्यस्त हो चुकी थी, चोली खुली थी, मंगलसूत्र उनके सीने पर पड़ा था।
“राहुल… आज रात अभी खत्म नहीं हुई…” भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया।
✅ दुल्हन बनकर डॉगी स्टाइल में चुदाई
भाभी मेरे ऊपर से उठीं। उनकी साड़ी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी थी। चोली खुली हुई थी, मंगलसूत्र सीने पर लटक रहा था। उन्होंने मुझे देखा और धीरे से बोलीं —
“राहुल… आज रात दुल्हन को पीछे से चोदो।”
भाभी बेड पर घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने आगे झुककर दोनों हाथ बेड पर टिका दिए। उनकी गांड ऊपर उठ गई। लाल साड़ी अभी भी उनके शरीर पर लिपटी हुई थी। भाभी ने खुद अपने हाथ से साड़ी और पेटीकोट को कमर तक ऊपर खिसका दिया। अब उनकी गोरी गांड और गीली चूत पूरी तरह सामने आ गई थी।
मैं उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। भाभी की लाल साड़ी उनकी कमर पर इकट्ठी हो गई थी। चूड़ियाँ और पायल की आवाज आ रही थी। मंगलसूत्र उनकी पीठ पर लटक रहा था।
मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रखा और एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड भाभी की चूत में घुस गया।
“आह्हhhhh… राहुल!” भाभी जोर से चीख पड़ीं।
अब मैं भाभी को डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से चोद रहा था। हर धक्के के साथ भाभी की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। “थप… थप… थप…” की आवाज कमरे में गूँज रही थी। साड़ी का कपड़ा भाभी की कमर पर लिपटा हुआ था। मैं एक हाथ से भाभी की कमर पकड़े हुए था और दूसरे हाथ से उनकी गांड थपथपा रहा था।
भाभी के एक्सप्रेशन: दुल्हन के कपड़ों में भाभी का चेहरा लाल हो रहा था। सिर नीचे झुका हुआ था, बाल खुले हुए थे। मुंह खुला हुआ, “आह्ह… उह्ह… राहुल… दुल्हन को पीछे से चोदो… जोर से… आहhhhh!” उनकी चीखें और भी ज्यादा गंदी और सेक्सी लग रही थीं। हर धक्के पर उनका शरीर आगे की तरफ झुक जाता था।
मैंने भाभी की साड़ी और ऊपर खिसकाई। अब उनकी पूरी पीठ नंगी दिख रही थी। मंगलसूत्र उनकी पीठ पर लटक रहा था। मैंने झुककर भाभी की पीठ पर किस किया और साथ ही जोर से धक्के लगाता रहा।
मेरे एक्सप्रेशन: मैं भाभी के पीछे घुटनों के बल बैठा था। आँखें भाभी की उठी हुई गांड, लाल साड़ी और उनकी पीठ पर टिकी हुई थीं। पसीना मेरे माथे और सीने से बह रहा था। भाभी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए था। हर धक्के के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ झुक रहा था। मुंह से निकल रहा था — “भाभी… दुल्हन बनकर तुम और भी ज्यादा खतरनाक लग रही हो… आज तो मैं तुम्हारी चूत फाड़ दूंगा…”
भाभी अब पीछे की तरफ धक्के खा रही थीं। “राहुल… और जोर से… हाँ… दुल्हन को मारो… आहhhhh… मेरी चूत को फाड़ दो… आह्ह!”
मैं और तेज हो गया। भाभी की पायल और चूड़ियों की आवाज हर धक्के के साथ आ रही थी। साड़ी का कपड़ा भाभी की कमर पर इकट्ठा हो चुका था।
आखिरकार भाभी का शरीर अकड़ गया। “राहुल… मैं झड़ रही हूँ… आहhhhh!”
उनके झड़ते ही मैंने भी जोर का आखिरी धक्का मारा और भाभी की चूत में वीर्य छोड़ दिया।
भाभी उसी हालत में घुटनों के बल पड़ी रहीं। साड़ी कमर पर लिपटी हुई थी, चोली खुली थी, मंगलसूत्र लटक रहा था। मैं उनके पीछे बैठा हुआ था, लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था।
भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और थकी हुई लेकिन संतुष्ट मुस्कान के साथ कहा —
“राहुल… आज रात की दुल्हन अभी थकी नहीं है…”