जेठालाल ने दया और बबीता के साथ किया थ्रीसम सेक्स | jethalal daya babita threesome story

जेठालाल की छुपी इच्छा पूरी हुई – दया और बबीता के साथ थ्रीसम

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गोकुलधाम सोसाइटी में शाम के सात बज रहे थे। जेठालाल अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान से थककर, पसीने से भीगे कपड़ों के साथ घर लौट रहे थे। पूरा दिन बबीता की यादों ने उन्हें परेशान किया था – वो हल्की सी मुस्कान, वो गहरी क्लीवेज वाली ब्लाउज, वो चलते वक्त हिलती हुई गांड। लेकिन वो शादीशुदा थे, दया उनकी पत्नी थीं। मन में गुनाह का एहसास था, फिर भी लंड हर बार खड़ा हो जाता था।

जब उन्होंने अपने फ्लैट का दरवाजा खोला तो अंदर का माहौल देखकर उनकी सांस अटक गई। हॉल की लाइटें बंद थीं, सिर्फ दो मोमबत्तियां जल रही थीं। हल्की-हल्की संगीत की आवाज आ रही थी। “दया! मैं आ गया रे!” उन्होंने जोर से आवाज लगाई।

कोई जवाब नहीं। सिर्फ बेडरूम से फुसफुसाहट और हल्की हंसी की आवाजें आ रही थीं। दो औरतों की आवाजें। एक दया की, दूसरी… बबीता की? जेठालाल का दिल जोरों से धड़कने लगा। पसीना माथे पर आ गया। “ये बबीता यहां शाम के इस वक्त क्या कर रही है? और लाइटें क्यों बंद हैं?” मन में हजार सवाल उठे।

उन्होंने धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ कदम बढ़ाए। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। उन्होंने झांककर देखा।

बेड पर दया और बबीता बैठी थीं। दया लाल रंग की सिल्की नाइटी पहने थी, जिसमें उनकी गोरी छाती का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। बबीता गहरे नीले रंग की टाइट नाइटी में थी, जिससे उनके बड़े-बड़े स्तन नाइटी को खींच रहे थे। दोनों के गालों पर हल्की लाली थी। दया के हाथ में एक गिलास जूस था, बबीता के हाथ में भी। लेकिन माहौल बिल्कुल सेक्सी था।

दया ने बबीता का हाथ पकड़ा और बोलीं, “बबीता, आप जानती हैं ना कि जेठालाल आपको कितना पसंद करते हैं। हर बार आपकी तरफ देखते रहते हैं। जब आप झुकती हैं तो उनकी नजरें आपकी छाती पर अटक जाती हैं। जब आप चलती हैं तो उनकी आंखें आपकी गांड पर जाती हैं। आज मैंने सोचा… क्यों ना उनकी इस फैंटसी को पूरा कर दूं।”

बबीता शरमा गई लेकिन उसकी आंखों में चमक थी। “सच में दया? आपको गुस्सा नहीं आया? मैं तो डर रही थी कि अगर आपको पता चला तो आप मुझे घर से निकाल देंगे।”

दया हंस पड़ीं, “नहीं बबीता। हमारी शादी में सब ठीक है। जेठालाल मुझे बहुत प्यार करते हैं। लेकिन उनकी यह इच्छा मैंने देख ली। उन्हें खुश रखना मेरा फर्ज है। और आप भी तो अकेली हो… अय्यर जी पूरे हफ्ते बाहर गए हैं ना? आज रात हम तीनों मिलकर मजे करेंगे। कोई रोक-टोक नहीं। सिर्फ शुद्ध मजा। क्या आप तैयार हो?”

बबीता ने सांस गहरी ली और मुस्कुराते हुए कहा, “हां दया… सच में मैं भी जेठालाल जी को आकर्षक मानती हूं। उनका वो मोटा बदन, वो आवाज, वो स्टाइल… और आपकी इजाजत है तो मैं भी पूरी तरह तैयार हूं। आज हम उन्हें ऐसा सरप्राइज देंगे कि वो भूल ही जाएंगे।”

दोनों हंस पड़ीं। दया बोलीं, “प्लान ये है – जब जेठालाल आएंगे तो हम दोनों उन्हें बेड पर लिटा देंगे। पहले मैं उन्हें किस करूंगी, फिर बबीता। फिर हम दोनों मिलकर उनके कपड़े उतारेंगे। बबीता उनके लंड को मुंह में लेगी, मैं उनकी गांड सहलाऊंगी। फिर जेठालाल बारी-बारी से हमें चोदेंगे। आप ऊपर चढ़कर राइड करेंगी या मैं?”

बबीता ने आंख मारते हुए कहा, “मैं पहले ऊपर चढ़ूंगी। जेठालाल जी का लंड मेरी चूत में डालकर जोर-जोर से धक्के लगाऊंगी। आप उनके मुंह पर बैठकर चूत चटवाइएगा। फिर हम तीनों एक साथ झड़ेंगे।”

जेठालाल बाहर खड़े, सब सुन रहे थे। उनका लंड पैंट के अंदर इतना सख्त हो चुका था कि दर्द हो रहा था। चेहरा लाल हो गया था, पसीना निकल रहा था, आंखें फैल गई थीं, मुंह खुला का खुला रह गया। “क्या यह सपना है? दया मुझे इतना प्यार करती है कि मेरी इस गंदी फैंटसी को पूरा करने को तैयार है? और बबीता भी राजी है?” मन में गुनाह और लस्ट दोनों लड़ रहे थे। लस्ट जीत गया।

उन्होंने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर घुस गए। jethalal daya babita threesome story

दोनों महिलाओं ने उन्हें देखा और सेक्सी मुस्कान दी। दया बोलीं, “अरे जेठालाल, आप आ गए? हम दोनों आपका ही इंतजार कर रही थीं।”

बबीता ने उठकर उनके पास आई और उनकी बांह पकड़ ली। “हेलो जेठालाल जी… आज रात कोई शर्म नहीं, कोई डर नहीं। सिर्फ मजा। दया ने सब प्लान किया है।”

जेठालाल हकलाते हुए बोले, “ये… ये क्या हो रहा है दया? बबीता यहां? तुम दोनों… ये सब… मैं… मैं सपना तो नहीं देख रहा?”

दया ने उन्हें बेड के पास खींचा और गंभीरता से कहा, “जेठालाल, मैंने आपकी आंखों में देख लिया था। आप बबीता को कितना चाहते हो। मैं नाराज नहीं हुई। मैंने सोचा – क्यों ना हम सब मिलकर खुश रहें? बबीता भी अकेली है, वो भी आपमें इंटरेस्टेड है। आज रात कोई पति-पत्नी वाला रिश्ता नहीं… सिर्फ तीन दोस्त जो एक दूसरे को पूरा मजा देंगे। आप राजी हो?”

जेठालाल ने दया की तरफ देखा – उनकी आंखों में प्यार था। फिर बबीता की तरफ – उनकी आंखों में लस्ट। उन्होंने गहरी सांस ली, “अगर दया को कोई दुख नहीं… और बबीता भी मान गई है… तो… मैं भी चाहता हूं। लेकिन… कैसे शुरू करें?”

दया ने उन्हें बेड पर लिटा दिया। बबीता उनके दाईं तरफ, दया बाईं तरफ बैठ गईं। दया ने झुककर जेठालाल के गाल पर लंबा किस किया। बबीता ने उनके कान के पास मुंह रखा और फुसफुसाई, “जेठालाल जी… आज हम आपकी हर इच्छा पूरी करेंगे।”

जेठालाल के हाथ कांप रहे थे। उनका लंड पैंट में उछल रहा था। दया और बबीता दोनों उनकी तरफ झुक गईं। हवा में सेक्स की गंध फैल रही थी। jethalal daya babita threesome story

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जेठालाल, दया और बबीता की पहली चुदाई

जेठालाल बेड पर पीठ के बल लेटे हुए थे। उनका दिल धड़क रहा था, लंड पैंट में फड़फड़ा रहा था। दया ने झुककर उनके शर्ट के सबसे ऊपरी बटन को धीरे से खोला। फिर दूसरा, फिर तीसरा… हर बटन खोलते हुए वे जेठालाल के होठों पर गहरा, गीला किस कर रही थीं। उनकी जीभ जेठालाल के मुंह के अंदर घुस गई और दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं। “उम्म्म्म… जेठालाल…” दया की सांस गर्म थी।

उनका एक हाथ नीचे सरक गया। पैंट के ऊपर से ही उन्होंने जेठालाल के सख्त, मोटे लंड को पकड़ लिया और ऊपर-नीचे सहलाने लगीं। लंड इतना खड़ा था कि कपड़ा फटने वाला था।

बबीता ने जेठालाल के कान के बिल्कुल पास मुंह लगाया और धीमी, गंदी आवाज में फुसफुसाई — “जेठालाल जी… आज हम दोनों आपकी रंडी बन जाएंगी। आपकी ये मोटी लंड हमारी दोनों चूतों को फाड़ देगी… देखिए ना, दया कैसे आपके लंड को छू रही है… वो भीग रही है आपके लिए…”

बबीता ने अपनी नाइटी का ऊपरी हिस्सा धीरे-धीरे नीचे खिसकाया। पहले एक कंधा, फिर दूसरा। नाइटी उनकी छाती के नीचे समा गई। उनके बड़े, गोरे, भारी स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स सख्त, गुलाबी और खड़े हो चुके थे। बबीता ने झुककर अपना दायाँ स्तन जेठालाल के मुंह के पास ले आई।

जेठालाल ने तुरंत मुंह खोला और चूची को अंदर ले लिया। उन्होंने जोर से चूसना शुरू कर दिया। जीभ से निप्पल को घुमाया, कभी काट लिया, कभी चूसा। जेठालाल के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, भौंहें सिकुड़ी हुई, गाल फूले हुए, मुंह से “उम्म्म… स्लurp… स्लurp” की आवाजें निकल रही थीं। एक हाथ बबीता की कमर को कसकर पकड़े हुए था, दूसरा दया के हाथ को पकड़े हुए था जो उनके लंड को सहला रही थी। उनका चेहरा लाल हो चुका था, पसीना माथे पर चमक रहा था।

दया ने जेठालाल का पूरा शर्ट उतार दिया। अब उनका ऊपरी शरीर नंगा था। दया ने उनके चेस्ट पर किस किया, निप्पल को चूसा, फिर नीचे की तरफ बढ़ी। उन्होंने जेठालाल की पैंट का बटन खोला, जिप खींची और पैंट को नीचे खिसकाते हुए अंडरवीयर के साथ ही उतार दिया।

जेठालाल का लंड बाहर आया — मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार, प्री-कम की बूँद टपक रही थी। दया ने उसे दोनों हाथों में पकड़ा और ऊपर-नीचे करने लगीं।

बबीता अब अपने दोनों स्तन जेठालाल के मुंह में दे रही थी। जेठालाल बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूस रहे थे। उनकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी। बबीता के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, सिर पीछे की तरफ झुका, मुंह खुला, “आह्ह… जेठालाल जी… और जोर से चूसिए… मेरा दूध पीजिए…” उनकी साँसें तेज हो गई थीं।

अब दया ने भी अपनी नाइटी ऊपर खींचकर उतार दी। अंदर ब्रा और पैंटी थी। उन्होंने ब्रा का हुक पीछे से खोला — धीरे-धीरे। ब्रा के कप खुलते ही उनके गोरे, गोल स्तन बाहर आ गए। निप्पल्स सख्त। फिर उन्होंने पैंटी के दोनों तरफ से उँगलियाँ डालीं और धीरे-धीरे नीचे खिसकाई। पैंटी जांघों से घुटनों तक आई तो उनकी चूत साफ दिख गई — हल्की सी बाल, लेकिन ज्यादातर साफ, और पूरी तरह गीली। चूत के होंठ फूल चुके थे, अंदर से चमक रही थी।

बबीता ने भी अपनी नाइटी पूरी उतार दी, फिर ब्रा उतारी (जेठालाल ने खुद हुक खोला), और आखिर में पैंटी। बबीता की चूत और भी ज्यादा गुलाबी और टाइट दिख रही थी।

अब तीनों पूरी तरह नंगे थे।

दया ने जेठालाल के लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रखा। लंड का सिरा उनकी गीली चूत के होठों पर रगड़ने लगा। “जेठालाल… अब अंदर डालो ना…” दया की आवाज काँप रही थी।

उन्होंने लंड को सही जगह पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठ गईं। पहला धक्का — लंड आधा अंदर चला गया। दया का मुंह खुल गया। “आह्ह्ह्ह… जेठालाल… कितना मोटा है… मेरी चूत फट रही है…” दया के एक्सप्रेशन: आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई, गर्दन पीछे झुकी, दोनों हाथ जेठालाल के सीने पर टिके हुए, शरीर हल्का काँप रहा था।

जेठालाल ने कमर ऊपर उठाई और जोर का धक्का मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। “आह्ह्ह… दया… तेरी चूत कितनी टाइट और गर्म है रे…” जेठालाल के दाँत किटकिटा रहे थे, आँखें दया के उछलते स्तनों पर टिकी हुई थीं, चेहरा pleasure से विकृत हो रहा था।

दया ऊपर-नीचे होने लगीं। हर बार जब लंड पूरा अंदर जाता, दया की चूत से “पुच… पुच… पुच…” की गीली आवाजें निकल रही थीं। उनके स्तन उछल-उछल रहे थे। जेठालाल ने दोनों हाथों से दया की गांड पकड़ी और जोर-जोर से ऊपर धक्के लगाने लगे।

बबीता ने जेठालाल के मुंह के पास आकर अपनी चूत रख दी। “चाटो जेठालाल जी… मेरी चूत चाटो…” जेठालाल ने जीभ बाहर निकाली और बबीता की गीली चूत को चाटना शुरू कर दिया। बबीता की चूत का स्वाद उनके मुंह में फैल रहा था।

बबीता के एक्सप्रेशन: दोनों हाथ दीवार पर टिकाए, कमर आगे-पीछे कर रही थीं, आँखें बंद, “आह्ह… आह्ह… जेठालाल जी… आपकी जीभ… अंदर डालो… चूसो मेरी चूत…” उनके शरीर में सिहरन दौड़ रही थी।

दया अब तेजी से राइड कर रही थीं। “जेठालाल… और जोर से… मेरी चूत को फाड़ दो… मैं झड़ने वाली हूँ…” उनकी आवाज चीख में बदल रही थी।

जेठालाल ने और जोर लगाया। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। दया की चूत से सफेद चिकनाई निकल रही थी और लंड पर लग रही थी।

कुछ देर बाद दया का शरीर अकड़ गया। “आह्ह्ह्ह्ह… जेठालाल… मैं झड़ गई… आह्ह्ह…” उनकी चूत ने जेठालाल के लंड को कस लिया। दया का चेहरा लाल, पसीने से भीगा, आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर — पूरा शरीर काँप रहा था।

जेठालाल ने दया को नीचे उतारा। अब बारी बबीता की थी।

बबीता ने जेठालाल को पीठ के बल लिटाया और खुद उनके ऊपर चढ़ गई। उन्होंने लंड को पकड़ा, अपनी चूत के होठों पर रगड़ा और धीरे से बैठ गईं। “आह्ह… जेठालाल जी… आपका लंड… मेरी चूत में… कितना बड़ा…” बबीता की आँखें फटी की फटी रह गईं।

जेठालाल ने बबीता की कमर पकड़ी और जोर-जोर से ऊपर धक्के लगाने लगे। बबीता की भारी छातियाँ जेठालाल के चेहरे के सामने उछल रही थीं। जेठालाल ने एक चूची मुंह में ले ली और चूसते हुए बबीता को चोद रहे थे।

बबीता के एक्सप्रेशन: सिर पीछे झुका, बाल खुले, मुंह से लगातार “आह्ह… उह्ह… जेठालाल जी… और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…” निकल रहा था। आँखें आधी बंद, शरीर पसीने से भीगा।

दया अब जेठालाल के पास बैठ गईं और बबीता के स्तनों को चूसने लगीं। तीनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे।

आखिरकार जेठालाल का शरीर अकड़ गया। “दया… बबीता… मैं झड़ने वाला हूँ…” बबीता ने जल्दी से उठकर लंड बाहर निकाला। जेठालाल का मोटा लंड फड़का और गाढ़ा सफेद वीर्य दोनों लड़कियों की छातियों और पेट पर गिरने लगा।

दया और बबीता दोनों ने जेठालाल का वीर्य अपनी उँगलियों से लेकर मुंह में डाला और एक-दूसरे को किस किया।

जेठालाल के एक्सप्रेशन (आखिरी में): आँखें बंद, मुंह खुला, सांसें बहुत तेज, शरीर ढीला पड़ गया, चेहरा पूरी तरह satisfaction से भरा, पसीने से तर, लंड अभी भी हल्का खड़ा और चमक रहा था। jethalal daya babita threesome story

डॉगी स्टाइल में बबीता की चुदाई + दया नीचे से लंड चूसती और चूत चाटती है

पहली राउंड खत्म होने के बाद भी तीनों की साँसें अभी भी तेज थीं। जेठालाल का लंड अभी भी आधा खड़ा था, चमक रहा था। बबीता और दया दोनों नंगी बेड पर लेटी थीं, उनके शरीर पसीने से भीगे हुए थे।

बबीता ने घुटनों के बल बैठते हुए जेठालाल की तरफ देखा और ललचाई आवाज में बोली — “जेठालाल जी… अब मुझे पीछे से चोदो ना… डॉगी स्टाइल में… मैं आपकी रंडी हूँ आज…”

जेठालाल का लंड सुनते ही फिर से सख्त हो गया। उन्होंने बबीता को घुटनों के बल करवाया। बबीता आगे झुक गई, दोनों हाथ बेड पर टिकाए, गांड ऊपर उठा ली। उनकी गोरी, नरम गांड पूरी तरह सामने आ गई। चूत के होंठ अभी भी पहली चुदाई से गीले और फूले हुए थे।

जेठालाल उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गए। उन्होंने बबीता की कमर पकड़ी, गांड को दोनों हाथों से फैलाया और अपना मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगे। लंड का सिरा गीली चूत के होठों पर फिसल रहा था।

दया तुरंत एक्शन में आ गईं। वे बबीता के नीचे लेट गईं — सिर जेठालाल की तरफ, ताकि जेठालाल जब बबीता को चोदें तो उनका लंड दया के मुंह तक आसानी से पहुँचे। दया ने ऊपर देखा — बबीता की चूत उनके ठीक ऊपर लटक रही थी, और जेठालाल का लंड उसके पास। jethalal daya babita threesome story

जेठालाल ने एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड बबीता की चूत में घुस गया। “आह्ह्ह्ह्ह… जेठालाल जी…!” बबीता चीख पड़ी। उनका शरीर आगे की तरफ झुक गया।

जेठालाल ने रफ्तार पकड़ ली। अब वे जोर-जोर से बबीता को पीछे से चोद रहे थे। हर धक्के के साथ “थप… थप… थप…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। बबीता की भारी छातियाँ नीचे लटककर झूल रही थीं। जेठालाल एक हाथ से बबीता की गांड थपथपा रहे थे, दूसरा हाथ उनकी कमर पकड़े हुए था।

बबीता के एक्सप्रेशन: सिर नीचे झुका हुआ, बाल बिखरे हुए, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई, आँखें आधी बंद। हर धक्के पर उनका मुंह “आह्ह… उह्ह… जेठालाल जी… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” चीखता जा रहा था। उनकी गांड लाल हो रही थी थप्पड़ों से। शरीर काँप रहा था।

नीचे दया ने जेठालाल के लंड को पकड़ लिया जो बबीता की चूत में जा रहा था। उन्होंने लंड के नीचे वाले हिस्से को चूसना शुरू कर दिया। जब भी जेठालाल बाहर निकालते, दया पूरा लंड मुंह में ले लेतीं, चूसतीं, फिर जब अंदर जाता तो दया ऊपर उठकर बबीता की चूत के होठों और क्लिट को जीभ से चाटने लगतीं।

दया के एक्सप्रेशन: उनका चेहरा बबीता की चूत और जेठालाल के लंड के रस से भीग चुका था। आँखें ऊपर की तरफ देख रही थीं, मुंह खुला, जीभ बाहर निकाली हुई, “स्लurp… स्लurp… स्लurp…” की गीली आवाजें निकाल रही थीं। कभी-कभी वे जेठालाल के अंडकोष को भी चूस लेतीं। उनका चेहरा pleasure और excitement से चमक रहा था।

जेठालाल का एक्सप्रेशन बिल्कुल अलग था। जेठालाल के एक्सप्रेशन: उनका चेहरा लाल हो चुका था, पसीना माथे, गर्दन और सीने पर बह रहा था। दाँत कसे हुए, भौंहें सिकुड़ी हुई, आँखें बबीता की हिलती हुई गांड और झूलती छातियों पर टिकी हुई थीं। मुंह से लगातार “हम्म्म… बबीता… तेरी चूत पीछे से कितनी टाइट लग रही है रे… दया… तू भी नीचे से मेरा लंड चूस रही है…” की आवाजें निकल रही थीं। उनके हाथ बबीता की कमर को इतनी जोर से पकड़े हुए थे कि उँगलियों के निशान पड़ रहे थे। हर धक्के के साथ उनकी कमर जोर से आगे बढ़ रही थी।

बबीता अब पीछे की तरफ धक्के खा रही थीं। “जेठालाल जी… और तेज… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह्ह!” उनका शरीर अकड़ गया। चूत ने जेठालाल के लंड को कस लिया। बबीता जोर से चीखी और झड़ गई। उनकी चूत से सफेद रस निकलकर जेठालाल के लंड पर और दया के मुंह पर गिरने लगा।

दया ने वो रस चाट लिया और जेठालाल के लंड को और जोर से चूसने लगीं।

जेठालाल अब और तेज हो गए। उन्होंने बबीता की गांड दोनों हाथों से पकड़ा और पागलों की तरह धक्के लगाने लगे। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। बबीता की चूत से “पुच… पुच… पुच…” की आवाजें आ रही थीं।

आखिरकार जेठालाल भी रुक न सके। “बबीता… मैं झड़ रहा हूँ…” उन्होंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य बबीता की चूत के अंदर छोड़ दिया। लंड फड़क-फड़क कर वीर्य उगल रहा था। बबीता की चूत में इतना वीर्य भर गया कि कुछ बाहर निकलकर दया के मुंह पर गिरने लगा।

दया ने तुरंत जेठालाल का लंड मुंह में ले लिया और बाकी वीर्य चूस लिया। फिर ऊपर उठकर बबीता की चूत से बहते वीर्य को भी चाट लिया।

जेठालाल थककर बबीता के ऊपर गिर पड़े। उनका चेहरा बबीता की पीठ पर टिका हुआ था, साँसें बहुत तेज, शरीर पसीने से तर, लंड अभी भी बबीता की चूत के अंदर हल्का हिल रहा था। चेहरा पूरी तरह संतुष्टि से भरा हुआ था।

बबीता और दया दोनों भी थक चुकी थीं। तीनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। कमरे में सिर्फ तेज साँसों की आवाजें थीं।

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