माँ बेटे की असली चुदाई की कहानी | real maa beta chudai story

माँ बेटे की असली चुदाई कहानी

real maa beta chudai story

मैं राहुल हूँ, 21 साल का। मेरे पिता अक्सर लंबे बिजनेस टूर पर विदेश चले जाते हैं। इस बार भी वे दो महीने के लिए गए थे। घर में सिर्फ मैं और मेरी माँ प्रिया थीं। माँ की उम्र 39 साल थी, लेकिन वे आज भी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं। उनकी गोरी रंगत, भरे-भरे स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब देखकर कोई भी जवान लड़का आकर्षित हो सकता था।

एक शाम जब मैं कॉलेज से घर लौटा तो माँ हॉल में अकेली टीवी देख रही थीं। उन्होंने एक बहुत पतली, चिपकी हुई स्लीवलेस नाइटी पहन रखी थी। नाइटी का गला काफी गहरा था, जिससे उनकी छाती का ऊपरी हिस्सा साफ नजर आ रहा था। जैसे ही मेरी नजर उन पर पड़ी, मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने सोचा, “ये क्या सोच रहा हूँ? ये तो मेरी माँ हैं… ऐसे विचार मन में लाना गलत है।” लेकिन मेरी आँखें बार-बार उनकी छाती और जांघों की तरफ चली जा रही थीं।

डिनर के समय माँ ने खाना परोसा। हम टेबल पर बैठ गए।

माँ: बेटा, आज बहुत देर से आया है। थक गया होगा ना? मैं: हाँ माँ, कॉलेज में प्रोजेक्ट की डेडलाइन थी। आप ठीक हो ना? पापा की बहुत याद आती होगी… माँ: (उदास स्वर में) हाँ बेटा, अकेलापन बहुत सताता है। घर सूना लगता है। लेकिन जब तुम आते हो तो थोड़ा अच्छा लगता है। मैं: माँ, मैं हमेशा आपके साथ हूँ। अगर आपको कुछ चाहिए या कोई बात करनी हो तो बता देना। माँ: (मुस्कुराते हुए लेकिन आँखों में नमी) तुम अब बड़े हो गए हो बेटा। बहुत समझदार और तगड़े भी लगते हो। अपनी माँ की देखभाल कर पाओगे? मैं: बिल्कुल माँ। आप मेरे लिए सबसे खास हो।

डिनर खत्म होने के बाद हम सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगे। कोई रोमांटिक ड्रामा चल रहा था। माँ मेरे बिल्कुल पास बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से सटी हुई थी। मैं उनकी गर्म सांसें महसूस कर सकता था। मेरा शरीर तनावग्रस्त हो रहा था।

माँ: बेटा, ये सीरियल देखकर मुझे पापा की बहुत याद आ रही है। वो मुझे ऐसे ही पास बैठाकर बातें किया करते थे। मैं: माँ… (मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया) मैं आपके पास हूँ। आप अकेली नहीं हैं।

माँ ने मुझे देखा और अचानक मुझे गले लगा लिया। उनकी नरम, भरी हुई छाती मेरे सीने से जोर से दब गई। मैंने उनकी शरीर की खुशबू महसूसी — हल्का परफ्यूम और उनकी अपनी मादक खुशबू। इसी बीच मेरा लंड अचानक खड़ा हो गया और पैंट में तनाव महसूस होने लगा। मैंने कोशिश की कि माँ को पता न चले, लेकिन जब माँ ने थोड़ा सा हिलकर एडजस्ट किया तो शायद उन्हें भी अहसास हो गया।

माँ: (फुसफुसा कर) बेटा… तुम्हारा शरीर इतना गर्म क्यों हो रहा है? मैं: माँ… वो… कुछ नहीं… (मैं शर्म से लाल हो गया, लेकिन रुका नहीं।)

माँ उठकर किचन की तरफ गईं। जब वे उठीं तो उनकी नाइटी थोड़ी ऊपर खिसक गई और उनकी मोटी जांघें दिख गईं। मैंने देख लिया और जल्दी से नजरें हटा लीं।

रात के करीब 12 बजे मैं पानी पीने किचन गया। वहाँ माँ खड़ी थीं। अब उन्होंने साड़ी बदल ली थी, लेकिन ब्लाउज का एक हुक खुला हुआ था और पल्लू उनके कंधे से फिसल रहा था। उनकी छाती का कुछ हिस्सा साफ दिख रहा था।

मैं: माँ, आप अभी तक नहीं सोईं? माँ: नहीं बेटा, नींद नहीं आ रही। मन बहुत अशांत है।

हम किचन में खड़े-खड़े बात करने लगे। माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया।

माँ: बेटा, तुम्हें कभी लगता है कि माँ और बेटे के बीच सिर्फ माँ-बेटे वाला प्यार ही नहीं होना चाहिए? कभी-कभी औरत को एक पुरुष साथी की जरूरत पड़ती है… शारीरिक जरूरत भी… मैं: (गले सूखते हुए) माँ… आप क्या कह रही हैं? ये… माँ: कुछ नहीं बेटा… बस सोच रही थी।

उनकी आँखें मेरी आँखों में डूबी हुई थीं। हम दोनों की सांसें बहुत तेज हो चुकी थीं। माँ का हाथ मेरे हाथ से फिसलकर मेरी बांह पर आ गया। मैंने महसूस किया कि माँ की सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही हैं। मेरा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था और पैंट में साफ उभार दिख रहा था। माँ की नजरें उस तरफ गईं और वे कुछ पल के लिए चुप रहीं।

माँ: (धीरे से) बेटा… ये सब स्वाभाविक है। तुम एक जवान लड़के हो और मैं एक औरत…

हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। माँ की आँखें बंद हो गईं, फिर खुलीं। उनके होंठ थोड़े से खुले थे। मेरे मन में तूफान मचा हुआ था — ये गलत है, लेकिन मैं रुक नहीं पा रहा था। माँ भी कुछ बोल नहीं रही थीं, बस मेरी तरफ देख रही थीं। सिर्फ पंखे की आवाज और हमारी भारी सांसें भर रही थीं।

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real maa beta chudai story भाग 2

मैंने माँ की बात सुनी। मेरा गला सूख गया था। माँ सोफे की तरफ चली गईं, पेट के बल लेट गईं और साड़ी का पल्लू पूरी तरह हटा दिया। अब उनकी पीठ नंगी दिख रही थी, ब्लाउज की पीठ और कमर की नरम त्वचा साफ नजर आ रही थी। साड़ी की सिलवटें उनकी मोटी जांघों पर पड़ी थीं।

मैं उनके पास गया। घुटनों के बल बैठ गया। हाथ काँप रहे थे।

मैं: माँ… ठीक से मालिश करूँ? माँ: (आँखें बंद करके) हाँ बेटा… धीरे-धीरे… कंधों से शुरू कर… बहुत दर्द है।

मैंने उनके कंधों पर हाथ रखा। उंगलियाँ दबाने लगीं। माँ की त्वचा गर्म थी। जैसे-जैसे मैं दबाता गया, माँ की सांसें भारी होने लगीं। मैंने हाथ नीचे की तरफ बढ़ाए। ब्लाउज के नीचे तक पहुँच गए। माँ की कमर नरम और गोल थी। मैंने हल्के से दबाया। माँ ने “उफ्फ…” की आवाज निकाली।

मैं और बहादुर हो गया। हाथ ब्लाउज के अंदर डाल दिए। उनकी पीठ पर सीधे हाथ फेरने लगा। माँ चुप थीं, बस सांसें ले रही थीं। फिर मैंने हिम्मत करके ब्लाउज का हुक खोल दिया। एक-एक करके तीनों हुक खुल गए। ब्लाउज ढीला हो गया। माँ ने कुछ नहीं कहा, बस थोड़ा सा हिलीं।

मैंने ब्लाउज को कंधों से नीचे खिसका दिया। अब उनकी पीठ पूरी नंगी थी। मैंने तेल की जगह अपनी हथेलियों से मालिश जारी रखी। हाथ नीचे कमर तक गए। फिर और नीचे… साड़ी के ऊपर से उनकी गोल नितंबों पर हाथ रखा। माँ का शरीर हल्का सा काँपा।

माँ: (फुसफुसा कर) बेटा… और नीचे… वहाँ भी दर्द है…

मैंने साड़ी को ऊपर खिसकाना शुरू किया। साड़ी की लेयरें खुलती गईं। अब माँ सिर्फ ब्लाउज (जो पीछे से खुला था) और पेटीकोट में लेटी थीं। मैंने पेटीकोट का नाड़ा ढीला किया। हाथ अंदर डाला। उनकी चूत के पास तक पहुँच गया। माँ की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मेरी उँगलियाँ गीले बालों और नरम होंठों को छू गईं।

माँ: (आँखें बंद, मुंह से आह) आह… बेटा… क्या कर रहे हो… मैं: माँ… आपकी चूत गीली हो गई है… माँ: (शर्माते हुए लेकिन आवाज में कामुकता) हाँ बेटा… तुम्हारी मालिश से… अब रुक मत…

मैंने माँ को पीठ के बल कर दिया। ब्लाउज पूरी तरह उतार दिया। अब उनकी भारी, गोरी छातियाँ मेरे सामने थीं। ब्रा अभी भी पहनी हुई थी। मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला। ब्रा के कपड़े अलग हुए और माँ के बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन को दोनों हाथों से पकड़ा और मुँह में ले लिया। चूसने लगा।

माँ: (आँखें बंद, सिर पीछे झुकाकर) आह्ह्ह… बेटा… चूस… और जोर से चूस… उफ्फ… माँ की छातियाँ चूस ले… (माँ के चेहरे पर लालिमा आ गई थी। होंठ काँप रहे थे। आँखें आधी बंद। सांसें तेज।)

मैंने दूसरा स्तन भी चूसा। जीभ से निप्पल को चाटा। माँ का शरीर ऐंठ रहा था। मैंने पेटीकोट पूरी तरह खींचकर उतार दिया। अब माँ सिर्फ पेंटी में थीं। मैंने पेंटी का इलास्टिक पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे खींचा। पेंटी उनकी मोटी जांघों से गुजरती हुई घुटनों तक आई, फिर पैरों से निकाल दी। अब माँ पूरी तरह नंगी सोफे पर लेटी थीं। उनकी चूत साफ दिख रही थी — गीली, फूली हुई, छोटे-छोटे बालों के साथ।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई। माँ ने उसे देखा और आँखें फाड़कर देखने लगीं।

माँ: (हल्की आवाज में) बेटा… इतना बड़ा… मैं: माँ… अब मैं आपको चोदूँगा… माँ: (आँखें बंद करके सिर हिलाया) हाँ बेटा… चोद… अपनी माँ को चोद… आज रात मुझे अकेला मत छोड़ना…

मैं सोफे पर चढ़ गया। माँ की जांघें फैलाईं। अपना लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा। फिर धीरे-धीरे दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। माँ की चूत बहुत टाइट थी।

माँ: (दर्द और pleasure के मिश्रण से) आह्ह्ह… धीरे बेटा… उफ्फ… अंदर जा रहा है… मैं: माँ… आपकी चूत कितनी गर्म और गीली है… (मैंने जोर लगाया)

आधा लंड अंदर चला गया। माँ का शरीर काँप उठा। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। माँ की चूत ने मेरे लंड को कस लिया।

माँ: (मुंह खुला, आँखें बंद, सिर हिलाते हुए) आह्ह्ह्ह… बेटा… पूरा अंदर… माँ की चूत फट रही है… आह… आह… (माँ के चेहरे पर एक्सप्रेशन बदल रहे थे — दर्द, शर्म, फिर तीव्र pleasure। होंठ काट रही थीं, आँखें कभी बंद तो कभी आधी खुली। पसीना उनके माथे और छाती पर आ रहा था।)

मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। फिर रफ्तार बढ़ाई।

मैं: (पसीने से भीगा हुआ, सांसें फूलते हुए) माँ… आपकी चूत कितनी टाइट है… मैं आपको जोर-जोर से चोद रहा हूँ… देखो मेरा लंड आपकी चूत में कैसे घुस रहा है… माँ: (आवाज काँपती हुई) आह… आह… बेटा… और जोर से… माँ को चोद… अपनी माँ को अपनी चूत में भर दो… उफ्फ… आह्ह्ह…

मैंने माँ की जांघें अपने कंधों पर रख लीं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। सोफा हिल रहा था। माँ की छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी छाती दबाई, दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़ी।

माँ के एक्सप्रेशन:

  • आँखें पूरी तरह बंद, भौंहें सिकुड़ी हुई
  • मुंह खुला, जीभ कभी बाहर निकल आती
  • होंठ काट रही थीं, कभी “बेटा… बेटा…” चीख रही थीं
  • शरीर बार-बार ऐंठ रहा था, नितंब ऊपर उठा रही थीं
  • पसीना पूरे शरीर पर, खासकर छाती और पेट पर चमक रहा था

मेरे एक्सप्रेशन:

  • चेहरा लाल हो गया था, पसीना माथे से बह रहा था
  • दाँत किटकिटा रहा था, सांसें बहुत तेज
  • आँखें माँ की चूत और छातियों पर टिकी हुई थीं
  • मैं बार-बार “माँ… माँ…” बोल रहा था, शर्म और जोश दोनों एक साथ

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। लंड पूरी तरह बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर घुसा रहा था। चूत की आवाजें “पचक-पचक” कर रही थीं। माँ का शरीर काँप रहा था।

माँ: (चिल्लाते हुए) आह्ह्ह… बेटा… मैं झड़ने वाली हूँ… आह… आह… चोद… और चोद… माँ की चूत में निकाल दो… मैं: माँ… मैं भी… आ रहा हूँ… आपकी चूत में…

आखिरकार माँ का शरीर जोर से ऐंठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। माँ चीख पड़ी — “आह्ह्ह्ह… बेटा… आ गया… माँ झड़ गई…”

मैं भी रुक नहीं सका। जोर-जोर से धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया। लंड फड़क रहा था, वीर्य की धारें माँ की चूत में भर रही थीं। माँ का पेट भी काँप रहा था।

हम दोनों पसीने से भीगे हुए, सांसें फूलते हुए एक दूसरे से चिपके रहे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में अंदर था। माँ की आँखें बंद थीं, चेहरा शांति और संतुष्टि से भरा हुआ। मैं उनकी छाती पर सिर रखे हुए था।

माँ: (धीरे से) बेटा… आज रात… ये रात… हमारी है… मैं: माँ… मैं अभी और…

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real maa beta chudai story भाग 3 ( काउगर्ल राइड)

पहले राउंड के बाद मेरा लंड अभी भी माँ की चूत के अंदर अर्ध-खड़ा था। माँ की चूत से मेरा गरम वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था और उनकी जांघों पर बह रहा था। हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे। माँ की सांसें अभी भी भारी थीं।

अचानक माँ ने मेरे सीने पर हाथ रखा और मुझे धक्का देते हुए बोलीं —

माँ: (आँखें चमकती हुई) अब बेटा… तुम पीठ के बल लेट जाओ। माँ तुम्हें राइड करेगी… आज रात माँ तुम्हारे ऊपर चढ़कर अपनी प्यास बुझाएगी।

मैं सोफे पर पीठ के बल लेट गया। मेरा लंड अब फिर से पूरा खड़ा हो चुका था — मोटा, नसों से भरा, माँ के वीर्य और मेरे वीर्य से चमक रहा था। माँ मेरे ऊपर चढ़ गईं। घुटनों के बल बैठ गईं। उनकी भारी छातियाँ मेरे चेहरे के ठीक सामने लटक रही थीं। माँ ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा। उसे ऊपर-नीचे किया, फिर अपनी गीली चूत के मुंह पर रखा।

माँ: (फुसफुसाते हुए) देखो बेटा… माँ की चूत तुम्हारे लंड को कैसे निगल रही है…

माँ ने धीरे से कमर नीचे की। लंड का मोटा सिरा उनकी चूत के गीले होंठों को चीरता हुआ अंदर घुसा। माँ की चूत अभी भी पहले वाले वीर्य से फिसलन भरी थी। आधा लंड अंदर चला गया तो माँ ने “आह्ह्ह…” की लंबी आवाज निकाली। फिर उन्होंने और जोर लगाया। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। माँ की चूत ने मेरे लंड को कस लिया।

माँ: (आँखें बंद, सिर पीछे झुकाकर) उफ्फ्फ… बेटा… पूरा अंदर… माँ की चूत फिर से भर गई… आह…

माँ ने राइडिंग शुरू की। पहले धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूत मेरे लंड पर ऊपर आती और फिर नीचे बैठ जाती। हर बार जब वे नीचे बैठतीं, तो “पचक” की गीली आवाज आती। माँ की भारी छातियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। मैंने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उनकी छातियाँ पकड़ लीं। अंगूठे से निप्पल को दबाने लगा।

माँ: (राइड करते हुए) आह… आह… बेटा… तुम्हारे हाथ… मेरी छातियों पर… अच्छा लग रहा है… और जोर से दबाओ…

माँ की रफ्तार बढ़ने लगी। अब वे तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को पूरा निगल रही थी और फिर बाहर निकाल रही थी। हर बार जब लंड बाहर आता तो माँ की चूत का रस और पहले का वीर्य लंड पर चमकता। माँ की नितंब मेरी जांघों पर थप्पड़ मारते हुए बैठ रहे थे। “थप-थप-थप” की आवाजें पूरे हॉल में गूंज रही थीं।

माँ के एक्सप्रेशन:

  • आँखें आधी बंद, कभी-कभी पूरी तरह बंद हो जातीं, भौंहें सिकुड़ी हुई
  • मुंह खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई, लार की बूंदें गिर रही थीं
  • होंठ काँप रहे थे, कभी काट रही थीं तो कभी “बेटा… बेटा…” चीख रही थीं
  • चेहरा पूरी तरह लाल, पसीना माथे, गले और छाती पर चमक रहा था
  • शरीर बार-बार ऐंठ रहा था, कमर घुमा-घुमा कर मेरे लंड को अंदर ले रही थीं
  • जब गहरे अंदर जाता तो उनकी आँखें घूम जातीं और मुंह से लंबी आह निकलती

मेरे एक्सप्रेशन:

  • मैं नीचे लेटा उनकी छातियाँ चूस रहा था, एक-एक करके निप्पल मुँह में लेकर चूसता, कभी काटता
  • मेरे चेहरे पर पसीना बह रहा था, सांसें फूल रही थीं
  • आँखें माँ की उछलती छातियों और उनके चेहरे पर टिकी हुई थीं
  • मैं बार-बार “माँ… तेरी चूत कितनी गर्म और टाइट है…” बोल रहा था
  • हाथों से माँ की कमर पकड़कर नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था

मैंने माँ की कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और नीचे से जोर-जोर से ऊपर धक्के मारने लगा। अब माँ राइड कर रही थीं और मैं भी नीचे से चोद रहा था। हमारी चुदाई की आवाजें और तेज हो गईं — “पचक-पचक-थप-थप”। माँ की चूत से रस बह रहा था और मेरी जांघों पर गिर रहा था।

माँ: (चिल्लाते हुए) आह्ह्ह… बेटा… और जोर से… माँ को चोद… नीचे से धक्के मार… आह… आह… माँ झड़ने वाली है… मैं: (सांस फूलते हुए) माँ… तेरी चूत मेरा लंड निगल रही है… देखो कितना रस निकल रहा है… मैं भी आने वाला हूँ…

माँ ने रफ्तार और बढ़ा दी। अब वे पागलों की तरह ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी छातियाँ मेरे मुंह के पास आ-जा रही थीं। मैं एक स्तन मुँह में लेकर जोर से चूस रहा था। माँ का शरीर अचानक जोर से काँपा।

माँ: (चीखते हुए) आह्ह्ह्ह… बेटा… आ गया… माँ फिर झड़ गई… आह… आह… तेरे लंड पर… चूत का पानी निकल रहा है…

माँ का शरीर ऐंठ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को और भी जोर से कस लिया। मैं भी रुक नहीं सका। नीचे से आखिरी जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही दूसरी बार वीर्य छोड़ दिया। गरम-गरम धारें उनकी चूत में भर रही थीं। माँ ने मेरे सीने पर सिर रख लिया, सांसें ले रही थीं। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में धड़क रहा था।

हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। माँ मेरे ऊपर लेटी हुई थीं। उनकी छातियाँ मेरे सीने से सटी हुई थीं। पसीना दोनों के शरीर पर चमक रहा था। माँ की चूत से मेरा वीर्य बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था।

माँ: (धीरे से, मेरे कान में) बेटा… आज रात… ये रात… हमारी है… अभी और… मैं: माँ… मैं अभी भी… तुम्हारे अंदर…

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