पड़ोसन भाभी ने किचन में लंड चूसा | neighbor bhabhi kitchen lund

पड़ोसन भाभी ने किचन में लंड चूसा

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यह कहानी मेरे (राहुल) और मेरी पड़ोसन भाभी प्रिया की है। मैं 23 साल का हूं, अकेला फ्लैट में रहता हूं। मेरे माता-पिता गांव में रहते हैं। अगले फ्लैट में प्रिया भाभी रहती हैं। उनकी उम्र 28 साल है। वो बहुत खूबसूरत हैं — गोरी, भरे हुए स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब। उनके पति अमित जॉब के सिलसिले में अक्सर 10-15 दिन बाहर रहते हैं।

शुरुआत में सब बिल्कुल नॉर्मल था। मैं कभी-कभी उनके घर जाता, अमित भाई से बातें करता, भाभी चाय-नाश्ता देतीं। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बदलने लगीं।

जब भी अमित भाई बाहर जाते, भाभी मुझे ज्यादा बुलाने लगीं। “राहुल, ये बल्ब बदल दो ना”, “ये पंखा ठीक कर दो”, “ये जार नहीं खुल रहा”। मैं जाता और वो मुझे अकेले में ज्यादा देर तक रोक लेतीं।

एक शाम चाय पीते हुए:

प्रिया भाभी: “राहुल, तुम्हारा बॉडी तो बहुत अच्छा है। जिम जाते हो ना?”

मैं: “हां भाभी, थोड़ा बहुत।”

प्रिया भाभी (मुस्कुराते हुए): “अमित तो बिल्कुल नहीं जाते। तुम्हारी उम्र में तो लड़के बहुत एनर्जेटिक होते हैं… है ना?”

मैं शर्मा गया, लेकिन मन में कुछ अजीब सा हुआ।

फिर अगले हफ्ते, रात को अचानक बिजली चली गई। प्रिया भाभी डर के मारे मेरे फ्लैट पर आ गईं। उन्होंने पतली सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। अंधेरे में उनकी छाती का उभार साफ दिख रहा था।

प्रिया भाभी: “राहुल, बहुत डर लग रहा है… अकेले रहने में।”

मैं: “कोई बात नहीं भाभी, मैं हूं ना।”

हम दोनों सोफे पर बैठे बातें करने लगे। बातें धीरे-धीरे व्यक्तिगत होती गईं।

प्रिया भाभी: “अमित अक्सर बाहर रहते हैं। रात को बहुत अकेलापन लगता है। कभी-कभी मन करता है कि कोई पास बैठे, बात करे… छुए भी…”

मैं चुप रहा।

प्रिया भाभी (धीरे से): “तुम्हें कभी ऐसा लगता है राहुल? कि कोई औरत तुम्हें छुए तो कैसा लगेगा?”

मैं: “भाभी… ये…”

प्रिया भाभी: “माफ करना… लेकिन तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। तुम्हारी उम्र, तुम्हारा शरीर… मैं सोचती रहती हूं।”

उस रात के बाद हमारी बातें और खुल गईं। जब भी अमित बाहर जाते, भाभी मुझे बुलातीं। एक दिन उन्होंने मुझे व्हाट्सएप पर अपनी तस्वीर भेजी — नाइट ड्रेस में, थोड़ी सी क्लेवेज दिख रही थी।

“कैसी लग रही हूं?”

मैंने लिखा: “बहुत अच्छी लग रही हो भाभी।”

प्रिया भाभी: “अकेले में और अच्छी लगूंगी… आओ ना कभी शाम को।”

फिर वो दिन आ गया।

अमित भाई 4 दिन के टूर पर गए थे। शाम को प्रिया भाभी ने मुझे बुलाया — “राहुल, किचन में एक जार नहीं खुल रहा। आ जाओ ना जल्दी।”

मैं उनके फ्लैट पर गया। प्रिया भाभी किचन में थीं। उन्होंने लाल रंग की स्लीवलेस नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, जो उनके शरीर पर चिपक रही थी। ब्रा नहीं पहनी थी, निप्पल हल्के से उभर रहे थे। बाल खुले थे।

जैसे ही मैं किचन में दाखिल हुआ, भाभी ने दरवाजा बंद कर दिया।

प्रिया भाभी: “राहुल… आज कोई नहीं है घर में। सिर्फ हम दोनों।”

मैं: “भाभी… क्या बात है?”

प्रिया भाभी मेरे करीब आ गई। उसकी सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं।

प्रिया भाभी: “तुम जानते हो ना कि मैं तुम्हें कितने दिनों से चाहती हूं? जब भी तुम आते हो, मेरी नजर तुम्हारे लंड पर जाती है। आज मैं और नहीं रुक सकती।”

उसने सीधे मेरे पैंट पर हाथ रख दिया। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो रहा था।

प्रिया भाभी: “देखो… कितना सख्त हो गया है।”

मैं कुछ बोल नहीं पाया। भाभी घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरी पैंट का बटन खोला, जिप खींची और अंदर हाथ डालकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया।

मेरा 7 इंच का मोटा लंड उनके सामने खड़ा था। प्रिया भाभी ने ऊपर देखा, मेरी आंखों में आंखें डालीं और बोलीं:

“आज मैं तुम्हारा लंड चूसूंगी… किचन में… और फिर जो करना है करोगे।”

उन्होंने मेरे लंड के सिरे पर जीभ फेर दी।

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प्रिया भाभी ने मेरे लंड के सिरे पर जीभ फेरी। फिर उन्होंने मुंह खोला और धीरे-धीरे मेरा पूरा मोटा लंड अपने गले तक अंदर ले लिया।

“आह… भाभी…” मैं सांस रोककर बोला।

प्रिया भाभी की आंखें ऊपर उठीं और मेरी आंखों में देखते हुए उन्होंने जोर से चूसना शुरू कर दिया। उनका मुंह गर्म और गीला था। उन्होंने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जब लंड उनके गले तक जाता, उनकी आंखें पानी से भर जातीं। लार उनके मुंह से बहकर मेरे लंड पर और अंडकोष पर गिर रही थी।

मैंने उनके खुले बालों में दोनों हाथ डाल दिए और धीरे से उनके सिर को आगे-पीछे करने लगा।

“भाभी… और जोर से चूसो…”

प्रिया भाभी ने और तेजी से चूसना शुरू कर दिया। “गल-गल-गल” की आवाजें किचन में गूंज रही थीं। कभी-कभी लंड उनके गले में अटक जाता और वो हल्का सा खांस लेतीं, लेकिन फिर भी रुकती नहीं थीं। उनकी जीभ नीचे से मेरे लंड को चाट रही थी। मैंने उनके बाल खींचकर उनका मुंह और तेजी से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। अब मैं उनका मुंह चोद रहा था।

प्रिया भाभी के एक्सप्रेशन: आंखें लाल हो गई थीं, पानी बह रहा था। मुंह पूरा खुला हुआ था, लार ठोड़ी से टपक रही थी। वो ऊपर देखकर मुझे देख रही थीं — जैसे कह रही हों “और जोर से चोदो मेरा मुंह”। उनके गाल अंदर की तरफ खिंच रहे थे।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं दांत भींचे हुए था, पसीना माथे पर आ गया था। मैं उनकी आंखों में देख रहा था और जोर-जोर से उनके बाल खींच रहा था। “हां भाभी… बस ऐसे ही… तेरे मुंह में लंड डालकर मजा आ रहा है…”

लगभग 5-6 मिनट तक प्रिया भाभी ने मेरा लंड चूसा। फिर मैंने उन्हें उठाया।

“अब काफी हुआ भाभी… अब मैं तुम्हें चोदूंगा।”

मैंने उन्हें किचन के स्लैब (काउंटर) पर उठा लिया। प्रिया भाभी ने खुद अपनी लाल नाइट ड्रेस को ऊपर खींच लिया और सिर के ऊपर से उतार दिया। अब वो पूरी तरह ऊपर से नंगी थीं। उनके बड़े-बड़े गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल सख्त खड़े थे।

मैंने उनकी पेंटी के दोनों तरफ हाथ डाला और एक झटके में नीचे खींच दिया। प्रिया भाभी ने एक पैर उठाकर पेंटी को पूरी तरह उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थीं।

मैंने उन्हें स्लैब पर लिटा दिया। उनकी टांगें खुल गईं। उनकी चूत पूरी तरह गीली और चमक रही थी। मैंने अपनी पैंट और टी-शर्ट उतार दी। अब मैं भी पूरी तरह नंगा था।

मैंने प्रिया भाभी की टांगें अपने कंधों पर रख दीं और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया। एक जोरदार धक्का मारा।

“आआआह… राहुल…!” प्रिया भाभी चीख पड़ीं।

मेरा पूरा लंड उनकी तंग चूत में घुस गया। मैंने उनकी कमर पकड़ ली और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।

“थप-थप-थप-थप…”

प्रिया भाभी के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं एक हाथ से उनका एक स्तन जोर से दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़े हुए था।

प्रिया भाभी के एक्सप्रेशन: आंखें आधी बंद थीं, मुंह खुला हुआ था। हर धक्के पर वो “आह… आह… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” चिल्ला रही थीं। कभी-कभी उनकी आंखें घूम जातीं और जीभ बाहर निकल आती। उनके चेहरे पर पूरा pleasure साफ दिख रहा था। वो बार-बार मेरे कंधे काट रही थीं।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं पसीने से भीग गया था। दांत भींचे हुए थे। मैं उनकी आंखों में देखकर बोल रहा था — “ले… ले भाभी… ले मेरा लंड… तेरी चूत कितनी गरम और तंग है… आज मैं तुझे अच्छे से चोदूंगा…”

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। स्लैब पर उनकी गांड जोर-जोर से टकरा रही थी। किचन में सिर्फ हमारी सांसें, चीखें और “पचक-पचक” की आवाजें आ रही थीं।

“राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… आआआह…!”

प्रिया भाभी का शरीर अचानक अकड़ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। वो जोर-जोर से कांपने लगीं और चीखती रहीं। मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी।

कुछ सेकंड बाद मैं भी रुक नहीं सका।

“भाभी… मैं भी… आह…!”

मैंने अपना पूरा गरम वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। दोनों एक साथ कांप रहे थे। मैं उनके ऊपर झुक गया, उनके स्तनों को चूम रहा था और सांसें ले रहा था।

प्रिया भाभी ने मुझे अपनी बाहों में कस लिया। दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में था और वीर्य बाहर बह रहा था।

कुछ देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला। प्रिया भाभी की चूत से वीर्य की धार बह रही थी।

लेकिन हम दोनों की भूख अभी पूरी नहीं हुई थी।

स्लैब पर चोदने के बाद मेरा लंड अभी भी प्रिया भाभी की चूत में था। दोनों सांसें ले रहे थे। प्रिया भाभी के स्तन मेरे सीने से सटे हुए थे और उनकी चूत से मेरा वीर्य बह रहा था।

मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। प्रिया भाभी “आह…” की आवाज निकालकर कांप गईं।

मैंने उन्हें स्लैब से उठा लिया। प्रिया भाभी ने तुरंत अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं। मैं उन्हें किचन की दीवार के पास ले गया और उनकी पीठ दीवार से टिका दी। अब प्रिया भाभी दीवार से सटी हुई थीं और मैं उनके सामने खड़ा था। उनकी टांगें मेरी कमर में लिपटी हुई थीं।

मैंने एक हाथ से उनकी गांड को नीचे से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़कर उनकी चूत पर रख दिया।

“राहुल… फिर से डालो ना…” प्रिया भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने एक जोरदार धक्का मारा।

“आआआह… राहुल…!”

पूरा लंड फिर से उनकी गीली चूत में घुस गया। अब मैं खड़े-खड़े उन्हें जोर-जोर से चोदने लगा।

“थप-थप-थप-थप…”

हर धक्के के साथ प्रिया भाभी की गांड दीवार से टकरा रही थी। मैं उनकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर-नीचे कर रहा था। उनका पूरा वजन मेरे ऊपर था। प्रिया भाभी ने अपनी टांगें और कसकर मेरी कमर में लपेट लीं और मेरे कंधे पर दांत गड़ा दिए।

प्रिया भाभी के एक्सप्रेशन: उनकी आंखें आधी बंद थीं। मुंह खुला हुआ था और लगातार जोर-जोर से चीख रही थीं — “आह… आह… राहुल… और जोर से… दीवार से टकरा रहा है… मेरा पूरा शरीर हिल रहा है…” कभी-कभी वो मेरे कंधे और गर्दन को जोर से काट लेतीं। उनके चेहरे पर दर्द और मजे का मिश्रण साफ दिख रहा था। आंखें कभी-कभी घूम जातीं और जीभ बाहर निकल आती।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं पसीने से पूरी तरह भीग चुका था। दांत भींचे हुए थे। मैं प्रिया भाभी की गांड को जोर से दबाए हुए था और उन्हें ऊपर-नीचे कर रहा था। “ले… ले भाभी… खड़े-खड़े चोद रहा हूं तुझे… तेरी चूत आज मेरे लंड की गुलाम बन गई है…” मैं उनकी आंखों में देखकर गंदी बातें बोल रहा था।

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अब मैं बहुत तेज और गहरे धक्के मार रहा था। प्रिया भाभी की चूत से “पचक-पचक” की आवाजें आ रही थीं। उनकी गांड दीवार से जोर-जोर से टकरा रही थी।

प्रिया भाभी ने मेरे बालों में हाथ डाल दिए और मेरे मुंह को अपने मुंह से चिपका लिया। हम दोनों जोर-जोर से किस कर रहे थे जबकि मैं उन्हें चोद रहा था।

“राहुल… मैं फिर झड़ने वाली हूं… आआआह… मत रुको… चोदते रहो…!”

प्रिया भाभी ने मेरे कंधे को और जोर से काट लिया। उनका शरीर अचानक अकड़ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया और वो जोर-जोर से कांपने लगीं।

“राहुल… आआआआह…!”

उनका दूसरा ऑर्गेज्म बहुत तीव्र था। वो मेरे कंधे काटती हुई और मेरी पीठ नोचती हुई झड़ गईं।

मैं भी ज्यादा देर नहीं टिक सका।

“भाभी… मैं भी…!”

मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और अपना लंड पूरी तरह अंदर घुसा दिया। फिर से गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में छोड़ने लगा। प्रिया भाभी ने मुझे और कसकर अपनी टांगों में जकड़ लिया। दोनों एक साथ कांप रहे थे।

कुछ देर तक हम उसी हालत में रहे — प्रिया भाभी दीवार से सटी हुई, टांगें मेरी कमर में लिपटी हुई, मेरा लंड उनकी चूत में और दोनों सांसें ले रहे थे।

धीरे-धीरे मैंने उन्हें नीचे उतारा। प्रिया भाभी के पैर लड़खड़ा रहे थे। वो दीवार से टिककर खड़ी रहीं। उनकी जांघों से मेरा वीर्य बह रहा था।

प्रिया भाभी ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोलीं — “राहुल… आज तो तूने मुझे सच में तोड़ दिया… लेकिन अभी भी मन नहीं भरा है…”

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