माँ बेटे की होटल में चुदाई Maa Beta Hotel Sex Story
मैं राहुल हूँ, 21 साल का। मेरे पिता का बिजनेस बहुत व्यस्त है। इस बार माँ को डॉक्टर के चेकअप और कुछ रिश्तेदारों से मिलने के लिए दूसरे शहर जाना था। पापा नहीं आ सके, इसलिए मैं माँ के साथ होटल में रुका था।
हम शाम को होटल पहुँचे। होटल काफी अच्छा था। रिसेप्शन पर चेक-इन किया। क्लर्क ने कहा, “सर, आपके लिए किंग साइज बेड वाला कमरा 305 उपलब्ध है।” माँ ने हल्का सा देखा मुझे, लेकिन कुछ नहीं बोलीं। हम कमरा 305 में घुसे। कमरा बड़ा था, एक बहुत बड़ा बेड, बड़ा बाथरूम, और बालकनी से शहर का नजारा।
मैंने सूटकेस खोला। माँ ने भी अपना बैग खोला।
माँ: बेटा, कमरा अच्छा है ना? पापा होते तो और अच्छा लगता। मैं: हाँ माँ, बहुत अच्छा है। आप थक गई होंगी। नहा लो, फिर डिनर कर लेंगे।
माँ बाथरूम में चली गईं। मैंने टीवी ऑन किया। थोड़ी देर बाद माँ बाहर आईं। उन्होंने हल्की सी स्लीवलेस नाइटी पहन ली थी, जो घुटनों तक थी। नाइटी उनके शरीर पर चिपकी हुई थी। उनकी छाती और कमर का आकार साफ दिख रहा था। मैंने देखा तो तुरंत नजरें हटा लीं, लेकिन मन में कुछ अजीब सा हो रहा था।
माँ: बेटा, नहा लिया। अब डिनर करते हैं।
हम होटल के रेस्टोरेंट में गए। डिनर के दौरान बातें हुईं।
माँ: बेटा, पापा हमेशा बिजनेस में लगे रहते हैं। मुझे बहुत अकेलापन लगता है। तुम्हारे साथ आकर अच्छा लगा। मैं: माँ, मैं हमेशा आपके साथ हूँ। आप चिंता मत करो। अगर कुछ चाहिए तो बताना। माँ: (हल्की मुस्कान के साथ) तुम अब बड़े हो गए हो। बहुत देखभाल करते हो अपनी माँ की।
डिनर खत्म करके हम कमरे में लौटे। रात के 11 बजे के आसपास थे। माँ ने कहा कि थक गई हैं, सो जाएँ। लेकिन कमरे में सिर्फ एक बड़ा बेड था। माँ एक तरफ लेट गईं, मैं दूसरी तरफ। लाइटें बंद कर दीं, सिर्फ छोटी सी नाइट लैंप जल रही थी।
मैं सो नहीं पा रहा था। माँ की सांसें सुन रहा था। थोड़ी देर बाद माँ ने करवट ली और मेरी तरफ मुंह करके लेट गईं। उनकी नाइटी थोड़ी ऊपर खिसक गई थी। उनकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी।
माँ: (धीरे से) बेटा… नींद नहीं आ रही? मैं: नहीं माँ… थोड़ी बेचैनी है। माँ: मुझे भी… होटल का कमरा, नया शहर… और पापा नहीं हैं…
माँ ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। मैंने उनकी उँगलियाँ पकड़ लीं। कमरे में सन्नाटा था। सिर्फ AC की आवाज और हमारी सांसें। माँ की सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने महसूस किया कि माँ की नाइटी के अंदर कुछ नहीं पहना था। उनकी छाती का उभार साफ दिख रहा था। मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा।
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें नम थीं।
माँ: बेटा… तुम्हें कभी लगता है कि माँ को भी किसी की जरूरत पड़ती है? शारीरिक जरूरत… मैं: (गले सूखते हुए) माँ… आप क्या कह रही हैं? माँ: कुछ नहीं बेटा… बस… अकेलापन बहुत है।
हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। माँ का शरीर मेरे शरीर से छू रहा था। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था और पैंट में उभार साफ था। माँ की नजरें उस तरफ गईं। वे चुप रहीं।
माँ ने हाथ बढ़ाकर मेरे गाल पर रखा।
माँ: बेटा… तुम्हारा शरीर गर्म हो रहा है…
हम दोनों की सांसें बहुत तेज हो चुकी थीं। माँ की आँखें मेरी आँखों में डूबी हुई थीं। उनके होंठ थोड़े खुले थे। कमरे में सिर्फ हम दोनों थे। होटल का यह कमरा 305 अब हमारा राज रखने वाला था।
Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story |
माँ बेटे की चुदाई (भाग 2 ) Maa Beta Hotel Sex Story
बिजली अचानक चली गई। पूरा होटल अंधेरे में डूब गया। सिर्फ बाहर की हल्की स्ट्रीट लाइट खिड़की से कमरे में आ रही थी। एयर कंडीशनर बंद हो गया। कमरा एकदम सन्नाटे में डूब गया।
माँ डर गईं। “आह!” की आवाज निकाली और अचानक मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनकी पूरी बॉडी मेरे सीने से लग गई। उनकी भारी छातियाँ मेरी छाती पर दब रही थीं। नाइटी ऊपर खिसक गई थी। माँ की गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं।
माँ: (डरते हुए फुसफुसाईं) बेटा… अंधेरा… डर लग रहा है… मैं: माँ… मैं हूँ ना… (मैंने उन्हें अपनी बाहों में समेट लिया)
अंधेरे में हमारे शरीर एक दूसरे से रगड़ने लगे। माँ की जांघ मेरी जांघ पर थी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और अब माँ के पेट से सट रहा था। माँ ने महसूस किया। वे चुप रहीं, लेकिन शरीर नहीं हटाया।
मैंने धीरे से माँ की कमर पर हाथ फेरा। नाइटी के अंदर हाथ डाला। माँ की नरम कमर और पीठ पर हाथ घुमाने लगा। माँ का शरीर काँप रहा था।
माँ: (आह भरी हुई आवाज में) बेटा… क्या कर रहे हो… मैं: माँ… आप ठीक हो ना? (मैंने उन्हें और जोर से अपनी तरफ खींच लिया)
अंधेरे में माँ का होंठ मेरे होंठ से टकरा गया। हम दोनों रुक गए। फिर माँ ने खुद आगे बढ़कर मेरे होंठों पर अपना मुंह रख दिया। धीरे-धीरे किस करने लगीं। मैंने भी जवाब दिया। हमारी जीभें आपस में मिल गईं। माँ की सांसें बहुत गर्म थीं।
मैंने माँ की नाइटी को ऊपर खींचना शुरू किया। नाइटी उनकी कमर तक आ गई। मैंने और ऊपर खींचा। माँ ने हाथ उठा दिया। नाइटी पूरी तरह उतर गई। अब माँ सिर्फ ब्रा और पेंटी में मेरे ऊपर लेटी थीं।
मैंने माँ की पीठ पर हाथ घुमाया और ब्रा का हुक टटोला। अंधेरे में भी हुक खोल लिया। ब्रा ढीली हो गई। माँ ने ब्रा उतारकर फेंक दिया। अब उनकी भारी, नरम छातियाँ मेरे सीने से सीधे सट गईं। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने हाथ बढ़ाकर एक छाती पकड़ ली। दबाने लगा। माँ ने “उफ्फ…” की आवाज निकाली।
माँ: (फुसफुसाते हुए) बेटा… मेरी छाती… छू रहे हो… मैं: माँ… बहुत नरम है… (मैंने दूसरी छाती भी पकड़ ली)
मैंने माँ को नीचे लिटा दिया और खुद ऊपर आ गया। अंधेरे में माँ की पेंटी का इलास्टिक पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे खींचा। पेंटी उनकी जांघों से गुजरती हुई घुटनों तक आई। माँ ने पैर हिलाकर पेंटी उतार दी। अब माँ पूरी तरह नंगी होटल के बेड पर लेटी थीं।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैंने माँ की जांघें फैलाईं। हाथ से उनकी चूत टटोली। चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उँगलियाँ अंदर डालीं। माँ का शरीर ऐंठ गया।
माँ: (आवाज काँपती हुई) आह… बेटा… उँगली… अंदर… मैं: माँ… आपकी चूत बहुत गीली है…
मैंने अपना लंड माँ की चूत पर रखा। अंधेरे में सही जगह टटोली। फिर धीरे से दबाया। लंड का सिरा माँ की गीली चूत में घुसा। माँ ने जोर से सांस ली।
माँ: (दर्द और pleasure से) उफ्फ… बेटा… अंदर जा रहा है… धीरे… मैं: माँ… आपकी चूत कितनी टाइट है… (मैंने और जोर लगाया)
पूरा लंड अंदर चला गया। माँ की चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। अंधेरे में सिर्फ हमारी सांसें, चूत की गीली आवाजें “पचक-पचक” और बेड की हल्की चीख सुनाई दे रही थीं।
माँ के एक्सप्रेशन:
- आँखें बंद (अंधेरे में भी मैं महसूस कर रहा था), भौंहें सिकुड़ी हुई
- मुंह खुला, हर धक्के पर “आह… आह… बेटा…” निकल रहा था
- होंठ काँप रहे थे, कभी काट रही थीं
- शरीर बार-बार ऐंठ रहा था, नितंब ऊपर उठा रही थीं
- पसीना उनके पूरे शरीर पर आ रहा था, छाती और पेट गीले हो रहे थे
- जब गहरा जाता तो माँ की आवाज काँप जाती और “बेटा… और… और अंदर…” चीखतीं
मेरे एक्सप्रेशन:
- चेहरा पसीने से भीगा हुआ, सांसें बहुत तेज
- आँखें बंद करके माँ की चूत का एहसास ले रहा था
- दाँत किटकिटा रहे थे, “माँ… तेरी चूत…” बार-बार बोल रहा था
- हाथ माँ की कमर और छाती पर घूम रहे थे
- पसीना मेरे माथे से बहकर माँ के स्तनों पर गिर रहा था
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। माँ की चूत से रस बह रहा था और मेरी जांघों पर लग रहा था। अंधेरे में माँ ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
माँ: (चिल्लाते हुए) आह्ह्ह… बेटा… और जोर से… माँ की चूत फाड़ दो… आह… आह… मैं: माँ… मैं चोद रहा हूँ… देखो कितना लंड अंदर जा रहा है… (मैं और तेज हो गया)
माँ का शरीर अचानक जोर से काँपा।
माँ: (चीखते हुए) आह्ह्ह्ह… बेटा… आ गया… माँ झड़ गई… तेरे लंड पर… आह…
माँ की चूत ने मेरे लंड को और कस लिया। मैं भी रुक नहीं सका। आखिरी जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही वीर्य छोड़ दिया। गरम-गरम धारें उनकी चूत में भर रही थीं। माँ का पेट भी काँप रहा था।
हम दोनों पसीने से भीगे हुए, सांसें फूलते हुए एक दूसरे से चिपके रहे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में अंदर था। वीर्य बाहर निकलकर बेड पर गिर रहा था।
माँ: (धीरे से, मेरे कान में) बेटा… ये रात… होटल की… हमारी है… मैं: माँ… अभी और…
Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story |
- भाई के मोटे लंड से चुदते-चुदते चीख-चीखकर पानी छोड़ने लगी
- दीदी की मोटे लंड से चुदाई की चीखे निकाल दी
- बुआ की कुंवारी बेटी ने मुझे गर्म करके सील तुड़वाई – पहली चुदाई की पूरी कहानी
maa beta hotel sex, माँ बेटा होटल सेक्स, mother son hotel chudai, maa beta hotel room sex, real maa beta hotel story, माँ बेटा होटल चुदाई, mother son incest hotel, maa beta secret hotel sex
माँ बेटे की चुदाई (भाग 3 – बिजली आ गई) Maa Beta Hotel Sex Story
बिजली अचानक आ गई। कमरे में रोशनी फैल गई।
हम दोनों एकदम रुक गए।
मैं अभी भी माँ के ऊपर था। मेरा लंड उनकी चूत के अंदर अंदर था। माँ की जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ फैली हुई थीं। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे।
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने भी उन्हें देखा। माँ की भारी छातियाँ पसीने से चमक रही थीं। निप्पल अभी भी सख्त थे। उनकी कमर और पेट पर पसीना था। उनकी चूत में मेरा लंड घुसा हुआ था और बाहर से वीर्य की सफेद धारें बह रही थीं। माँ की जांघों पर भी मेरा वीर्य लगा हुआ था।
मुझे शर्म आ रही थी। मेरा चेहरा लाल हो गया। मैंने तुरंत नजरें हटा लीं।
माँ: (आवाज काँपती हुई) बेटा… हम… क्या कर रहे हैं… ये गलत है… मैं: (गले सूखते हुए) माँ… मुझे… माफ करना… मैं रुक नहीं पा रहा…
माँ की आँखों में गिल्ट साफ दिख रहा था। वे शर्म से पलकें झुकाने लगीं, लेकिन उनका शरीर अभी भी मेरे नीचे काँप रहा था। उनकी चूत अभी भी मेरे लंड को कस रही थी। मैंने भी हटने की कोशिश की, लेकिन मेरा लंड अंदर से और सख्त हो गया।
माँ: (आँखें बंद करके, लेकिन कमर हिलाते हुए) बेटा… निकालो… ये गलत है… मैं: माँ… मैं… नहीं निकाल पा रहा… (मैंने धीरे से एक धक्का मारा)
माँ ने “आह…” की आवाज निकाली। उनकी आँखें फिर खुल गईं। वे मुझे देख रही थीं। उनके चेहरे पर शर्म, गिल्ट और साथ ही तीव्र इच्छा का मिश्रण था।
माँ: (फुसफुसाते हुए) बेटा… ये आखिरी बार… बस एक बार और… फिर कभी नहीं… मैं: माँ… (मैंने उनकी छाती पर हाथ रखा) आपकी छाती… इतनी सुंदर है…
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। अब रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था। मेरा लंड माँ की चूत से बाहर निकलता और फिर पूरा अंदर घुसता। चूत का रस और मेरा वीर्य लंड पर चमक रहा था। माँ की चूत के होंठ मेरे लंड को कस रहे थे।
माँ के एक्सप्रेशन:
- आँखें कभी मुझे देखतीं, कभी शर्म से बंद हो जातीं
- होंठ काँप रहे थे, कभी काट रही थीं
- चेहरा लाल और पसीने से भीगा हुआ
- जब लंड गहरा जाता तो उनकी भौंहें सिकुड़ जातीं और मुंह से “आह… बेटा… गलत है…” निकलता
- शरीर ऐंठ रहा था, लेकिन कमर ऊपर उठा रही थीं
- आँखों में आँसू थे, लेकिन pleasure से भीगी हुई थीं
मेरे एक्सप्रेशन:
- चेहरा पूरी तरह लाल, पसीना माथे से बह रहा था
- आँखें माँ की छाती और चूत पर टिकी हुई थीं, लेकिन बार-बार शर्म से हटा लेता
- दाँत किटकिटा रहा था
- मैं बार-बार “माँ… माफ करना…” बोल रहा था, लेकिन धक्के और जोर से मार रहा था
- हाथ काँप रहे थे जब मैं माँ की छाती दबा रहा था
मैंने माँ की जांघें और फैलाईं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। अब रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था। माँ की चूत में मेरा लंड घुसता-निकलता दिख रहा था। माँ की छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
माँ: (आवाज में गिल्ट और मस्ती) आह… आह… बेटा… ये गलत है… लेकिन… और जोर से… माँ की चूत… फाड़ दो… मैं: माँ… आपकी चूत कितनी गीली है… देखो कितना वीर्य निकल रहा है… (मैं और तेज हो गया)
मैंने माँ की एक छाती मुँह में ले ली और चूसने लगा। दूसरा हाथ उनकी कमर पर रखा और जोर से खींचकर धक्के मार रहा था। माँ का शरीर बेड पर हिल रहा था।
माँ: (चीखते हुए) आह्ह्ह… बेटा… शर्म आ रही है… लेकिन रुक मत… आह… आह… माँ झड़ने वाली है… मैं: माँ… मैं भी… आपकी चूत में… फिर निकालूँगा…
माँ का शरीर अचानक जोर से काँपा। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
माँ: (आँखें बंद, आँसू बहते हुए) आह्ह्ह्ह… बेटा… आ गया… माँ फिर झड़ गई… गिल्ट हो रहा है… लेकिन… आह…
मैं भी रुक नहीं सका। आखिरी जोरदार धक्के मारे और दूसरी बार माँ की चूत के अंदर वीर्य छोड़ दिया। लंड फड़क रहा था। गरम वीर्य की धारें माँ की चूत में भर रही थीं। माँ का पेट भी काँप रहा था।
हम दोनों थक चुके थे। मैं माँ के ऊपर ही लेटा रहा। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था। वीर्य बाहर निकलकर बेड पर गिर रहा था।
माँ की आँखें बंद थीं। उनके चेहरे पर शर्म, संतुष्टि और गिल्ट तीनों साफ दिख रहे थे। मैं भी शर्म से उनका चेहरा नहीं देख पा रहा था।
माँ: (धीरे से) बेटा… ये… कभी किसी को पता नहीं चलेगा… मैं: माँ… मैं… (मैं कुछ बोल नहीं पाया)
Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story | Maa Beta Hotel Sex Story |
माँ बेटे की चुदाई (भाग 4 – गिल्ट और धीमी चुदाई) Maa Beta Hotel Sex Story
दूसरा राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों चुपचाप लेटे रहे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में अंदर था। कमरे में रोशनी थी। माँ की आँखें खुली थीं और वे छत की तरफ देख रही थीं।
अचानक माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।
माँ: (रोते हुए, आवाज काँपती हुई) बेटा… क्या कर दिया हमने… मैं तेरी माँ हूँ… ये इतना बड़ा गुनाह है… शर्म आ रही है… गिल्ट हो रहा है… (माँ का शरीर काँप रहा था)
माँ जोर-जोर से रोने लगीं। उनके आँसू गालों से बहते हुए मेरे सीने पर गिर रहे थे। मैंने तुरंत माँ को अपनी बाहों में लिया।
मैं: माँ… रो मत… (मैंने उनके आँसू पोंछे) माफ करना माँ… मैं रुक नहीं पाया…
माँ की आँखों में दर्द और गिल्ट साफ था। मैंने उनके माथे पर चूमा। फिर आँखों पर चूमा। फिर गालों पर। फिर धीरे से उनके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। माँ पहले तो रो रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे किस का जवाब देने लगीं।
माँ: (आँसू बहते हुए) बेटा… ये आखिरी बार… सच में आखिरी… मैं: माँ… (मैंने उन्हें और जोर से चूमा) मैं आपसे प्यार करता हूँ…
मैंने माँ को पीठ के बल लिटा दिया। अब हम मिशनरी पोजीशन में थे। रोशनी में माँ का पूरा नंगा शरीर मेरे सामने था। मैंने माँ की जांघें धीरे से फैलाईं। मेरा लंड अभी भी खड़ा था। मैंने उसे माँ की चूत पर रखा (जो पहले के वीर्य से गीली थी) और बहुत धीरे से अंदर घुसाया।
माँ: (आँसू बहते हुए) आह… बेटा… धीरे…
इस बार मैंने बहुत धीरे-धीरे, प्यार से चोदना शुरू किया। हर धक्का गहरा लेकिन धीमा था। मेरा लंड माँ की चूत में पूरा अंदर जाता और फिर धीरे बाहर आता। माँ की चूत अभी भी गर्म और गीली थी।
माँ के एक्सप्रेशन:
- आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन मुंह से आहें निकल रही थीं
- चेहरा लाल और शर्म से भरा हुआ
- कभी आँखें बंद कर लेतीं, कभी मुझे देखतीं और फिर शर्म से पलकें झुका लेतीं
- होंठ काँप रहे थे, “बेटा… गलत है…” फुसफुसातीं लेकिन कमर ऊपर उठा रही थीं
- शरीर काँप रहा था, लेकिन pleasure से भी
- जब गहरा जाता तो उनकी भौंहें सिकुड़ जातीं और आँसू और तेज बहते
मेरे एक्सप्रेशन:
- चेहरा गंभीर और गिल्ट से भरा हुआ
- आँखें माँ के चेहरे पर टिकी हुई थीं, बार-बार आँसू पोंछता
- धीरे-धीरे धक्के मारते हुए “माँ… मैं आपसे प्यार करता हूँ…” बार-बार बोल रहा था
- पसीना माथे पर था, लेकिन हाथ काँप रहे थे जब मैं माँ की छाती छूता
- चेहरा लाल था, लेकिन नजरों में कोमलता और लालच दोनों थे
मैंने माँ के होंठों पर फिर से किस किया। इस बार लंबा और गहरा। माँ ने भी जवाब दिया। मैंने एक हाथ माँ की छाती पर रखा और धीरे-धीरे दबाते हुए चोद रहा था। दूसरा हाथ उनके गाल पर था, आँसू पोंछ रहा था।
माँ: (आँसू बहते हुए, लेकिन आवाज में मस्ती) आह… बेटा… धीरे… बहुत गहरा… माँ की चूत… भर रही है… गिल्ट हो रहा है… लेकिन… आह… मैं: माँ… आपकी चूत… कितनी गर्म है… मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ… (मैंने एक और गहरा धक्का मारा)
हमारी चुदाई अब बहुत धीमी, गहरी और भावुक थी। हर धक्के के साथ माँ का शरीर काँपता। मैं माँ के होंठ चूमता, उनके गले पर चूमता, फिर वापस होंठों पर। माँ की छातियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थीं।
माँ: (रोते हुए लेकिन कमर हिलाते हुए) बेटा… ये आखिरी बार… सच में… आह… आह… माँ झड़ने वाली है… मैं: माँ… मैं भी… आपके अंदर… (मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई लेकिन फिर भी धीमी रखी)
माँ का शरीर अचानक जोर से ऐंठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।
माँ: (आँखें बंद, आँसू बहते हुए) आह्ह्ह… बेटा… आ गया… माँ झड़ गई… गिल्ट… लेकिन… आह…
मैं भी रुक नहीं सका। आखिरी गहरे धक्के मारे और तीसरी बार माँ की चूत के अंदर वीर्य छोड़ दिया। लंड फड़क रहा था। गरम वीर्य की धारें माँ की पहले से भरी चूत में और भर रही थीं। माँ का शरीर काँप रहा था।
हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। माँ अभी भी रो रही थीं, लेकिन अब हल्के-हल्के। मैं उनके आँसू चूम रहा था। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था।
माँ: (धीरे से) बेटा… ये… कभी नहीं… दोहराना… मैं: माँ… (मैं चुप रहा, क्योंकि मुझे भी गिल्ट हो रहा था)