जवान बेटे को पाटकर चुद गई माँ | maa ne beta ko seduce kiya
मैं राहुल हूँ, 22 साल का जवान लड़का। पापा की मौत के दो साल बाद से मैं और मम्मी अकेले इस बड़े घर में रहते हैं। मम्मी सीमा 41 साल की हैं, लेकिन उनकी जवानी अभी भी ताज़ा है — गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, भरे हुए 36 साइज़ के स्तन, पतली कमर और भारी-भरी गांड़। पहले वो सादी साड़ी-ब्लाउज पहनती थीं, लेकिन पिछले छह महीनों से उनका अंदाज़ बदल गया था।
यह सब कैसे शुरू हुआ…
शुरू में सब नॉर्मल लगा। लेकिन एक शाम मम्मी किचन में खाना बना रही थीं। साड़ी कमर से नीचे बाँधी हुई थी, ब्लाउज थोड़ा टाइट। जब मैं पानी का गिलास लेने गया तो मम्मी का पैर फिसल गया और वो सीधे मेरे ऊपर गिर पड़ीं। उनके भारी स्तन मेरी छाती से दब गए। कुछ सेकंड हम ऐसे ही लिपटे रहे। मम्मी ने साँस रोकी और धीरे से मुस्कुराते हुए उठीं। “ओह बेटा… सॉरी। तू अब कितना मजबूत हो गया है।”
उस रात से मम्मी और खुलकर बात करने लगीं। रात को टीवी देखते हुए वो मेरे बिल्कुल पास बैठने लगीं। उनके कूल्हे मेरी जांघ से सटे रहते। एक दिन मम्मी ने अचानक पूछा, “राहुल, तुझे कोई लड़की पसंद है? या तू मम्मी के साथ ही खुश है?”
मैं शरमा गया। “मम्मी… आप क्या कह रही हैं?”
मम्मी हँसी और मेरे गाल पर हाथ फेरा। “कुछ नहीं बेटा। बस मम्मी को भी तो प्यार चाहिए। रातों को नींद नहीं आती। शरीर में जोश रहता है… समझती हूँ तुझे भी होता होगा।”
फिर मालिश वाला दिन आया। मम्मी ने कहा, “बेटा, मेरी पीठ और कमर में बहुत दर्द है। थोड़ा तेल लगा दे ना।” मैं मान गया। मम्मी ने ब्लाउज उतार दिया। सिर्फ ब्रा में थीं। मैंने तेल लगाना शुरू किया। हाथ उनके नरम स्तनों के किनारे से गुजरा। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं और धीमी साँस ली। “आह… बेटा, वहाँ थोड़ा और दबा… हाँ, ऐसे ही।”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था। मम्मी ने पीछे मुड़कर देखा और मेरे शॉर्ट्स में बने तंबू पर नज़र डाली। कुछ नहीं बोलीं, बस मुस्कुरा दीं।
उसके बाद मम्मी ने और आगे बढ़ना शुरू कर दिया। रात को पतली, लगभग transparent नाइटी पहनकर मेरे कमरे में आतीं। बातें करतीं, मेरे बाल सहलातीं, कभी-कभी मेरे सीने पर हाथ रख देतीं। “तू कितना गर्म है बेटा… मम्मी को अच्छा लगता है तेरे पास सोना।”
फिर वो रात आई जब बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरा। मम्मी डर गईं और सीधे मेरे कमरे में आ गईं। “बेटा… मुझे बहुत डर लग रहा है। तेरे पास सो जाऊँ?”
मैंने हाँ कहा। मम्मी मेरे बगल में लेट गईं। उनकी नाइटी बहुत पतली थी। अंदर ब्रा-पैंटी कुछ भी नहीं था। उनके बड़े स्तन हल्के से उभरे हुए दिख रहे थे। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और शॉर्ट्स में साफ तंबू बन गया।
मम्मी करवट लेकर मेरी तरफ मुड़ीं। अब आमने-सामने। उनके स्तन मेरी छाती से दब गए। उनकी गर्म साँस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। “राहुल… तू जाग रहा है ना?”
“हाँ मम्मी…” मैं घबरा रहा था।
मम्मी ने अपना हाथ मेरे पेट पर रखा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उनके नरम हाथ ने मेरे खड़े लंड को शॉर्ट्स के ऊपर से छुआ। “ये क्या है बेटा? इतना सख्त और बड़ा क्यों हो गया?”
मैं साँस रोककर रह गया। “मम्मी… sorry… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा। आप इतनी पास हो…”
मम्मी ने उंगली मेरे होंठों पर रखी। “शश… बेटा। मम्मी सब समझती है। तू जवां है… मम्मी भी अकेली है। कोई गलत बात नहीं है अगर हम एक-दूसरे की मदद करें।”
मम्मी ने अपना शरीर और दबा दिया। उनके कूल्हे मेरे लंड से रगड़ खा रहे थे। “अगर मम्मी तुझे relax कर दे तो? अगर हम इस रात को कुछ खास बना दें तो?”
मम्मी ने मेरे गाल पर kiss किया… फिर गर्दन पर… फिर अपने होंठ मेरे होंठों के बहुत पास ले आईं। उनकी साँस गर्म और तेज थी। “बोल बेटा… क्या मम्मी आगे बढ़े? क्या तू मम्मी को पाट लेगा? क्या तू मम्मी को चोदेगा?”
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मम्मी की आँखों में साफ lust था। उन्होंने अपना एक पैर मेरी जांघ पर रख दिया। उनकी नाइटी ऊपर सरक गई थी। मम्मी की गीली चूत मेरी जांघ से सट गई थी।
“मम्मी… ये… गलत है…” मैं कमजोर आवाज में बोला।
मम्मी ने मेरे होंठों पर हल्का सा kiss किया और फुसफुसाई, “कोई गलत नहीं बेटा… मम्मी चाहती है। तू भी चाहता है… देख, तेरा लंड कितना फड़क रहा है मम्मी के लिए।”
मम्मी ने मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से ही मेरे लंड को हल्के हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। “बोल… आगे बढ़ें? मम्मी तेरे लिए सब कुछ करेगी…”
मैं साँस नहीं ले पा रहा था। मम्मी की आँखें बंद थीं, होंठ काँप रहे थे, शरीर गर्म हो रहा था। suspense, डर, जोश और गुनाह — सब एक साथ।
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जवान बेटे को पाटकर चुद गई माँ PART 2
मम्मी ने मेरी आँखों में गहरी नजर डाली। उनकी साँस बहुत तेज चल रही थी। उन्होंने धीरे से फुसफुसाया, “तो बेटा… मम्मी आगे बढ़ रही है। तू तैयार है ना?”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। सिर्फ सिर हिला दिया।
मम्मी ने अपना एक हाथ मेरे शॉर्ट्स के इलास्टिक में डाला और धीरे-धीरे उसे नीचे खींचने लगीं। शॉर्ट्स मेरी जांघों तक सरक गया। मेरा लंड अचानक बाहर निकल आया — सख्त, मोटा, नसों से भरा हुआ, सिरा चमक रहा था। मम्मी की आँखें फट गईं। उन्होंने अपना निचला होंठ दाँतों से काट लिया। उनके गाल लाल हो गए। “ओह्ह्ह बेटा… इतना बड़ा… इतना मोटा… मम्मी की चूत के लिए बिल्कुल परफेक्ट है।” उनकी आवाज काँप रही थी। उन्होंने मेरे लंड को घूरते हुए लार निगली।
फिर मम्मी ने अपनी पतली नाइटी के हेम को दोनों हाथों से पकड़ा और बहुत धीरे-धीरे ऊपर खींचना शुरू किया। नाइटी उनके घुटनों से ऊपर, फिर जांघों तक, फिर कमर तक… और आखिरकार उनके सिर के ऊपर से निकल गई। अब मम्मी पूरी तरह नंगी मेरे ऊपर बैठी थीं।
उनके भारी-भरे स्तन आजाद होकर मेरे सीने के सामने लटक रहे थे। निप्पल सख्त और गहरे रंग के हो चुके थे। उनके पेट पर हल्का सा पसीना चमक रहा था। सबसे नीचे उनकी चूत — पूरी तरह गीली, चमकदार, थोड़ी सी बालों वाली लेकिन साफ-सुथरी। चूत के होठ फूल चुके थे और बीच से चमकदार रस टपक रहा था।
मम्मी ने मेरे लंड को अपने एक हाथ में लिया। दूसरा हाथ मेरे सीने पर रखा। उन्होंने अपना शरीर थोड़ा ऊपर उठाया, अपने घुटनों के बल खड़ी हुईं और मेरे लंड के सिरे को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगीं। “आह्ह्ह… beta… देख कितना गीला हो गया है मम्मी की चूत तेरे लंड के लिए…”
मैं साँस नहीं ले पा रहा था। मेरे हाथ अनजाने में मम्मी की कमर पर चले गए। मम्मी ने मेरे लंड को सीधा किया और धीरे-धीरे नीचे उतरने लगीं।
पहले सिर्फ सिरा अंदर गया। मम्मी की आँखें बंद हो गईं। “उउउउउफ्फ्फ… बेटा… इतना मोटा है… मम्मी की चूत फट रही है…” धीरे-धीरे और नीचे उतरीं। आधा लंड अंदर चला गया। मम्मी का मुंह खुल गया। उनकी साँस रुक गई। “आआआआह्ह्ह्ह… राहुल… धीरे… मम्मी को दर्द हो रहा है… पर अच्छा भी लग रहा है…”
मैं उनकी कमर को पकड़कर धीरे से ऊपर की तरफ धक्का दे रहा था। मम्मी ने और नीचे उतरना शुरू किया। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। उनकी गांड़ मेरी जांघों से टकरा गई। “आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… बेटा… पूरा अंदर… मम्मी की चूत भर गई तेरे लंड से…”
मम्मी की आँखें आधी बंद थीं। उनके होंठ काँप रहे थे। माथे पर पसीने की बूँदें आ गई थीं। उन्होंने मेरे सीने पर दोनों हाथ रखे और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होना शुरू किया।
पहले बहुत धीरे… धीरे… हर बार जब वो नीचे उतरतीं तो मेरा पूरा लंड उनकी गर्म, तंग चूत में घुस जाता। चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। गीला-गीला चट-चट की आवाज आ रही थी।
मम्मी के स्तन मेरे सामने उछल-उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथ ऊपर बढ़ाए और उनके भारी स्तनों को पकड़ लिया। मम्मी ने सिर पीछे झुकाया। “हाँ बेटा… मम्मी के स्तन दबा… चूस ले…”
मैं उनके एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। मम्मी की चूत और भी ज्यादा गीली हो गई। अब वो तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं।
चुदाई तेज हो गई।
मम्मी की गांड़ मेरी जांघों पर थप-थप की आवाज कर रही थी। उनकी चूत मेरे लंड को अंदर-बाहर कर रही थी। मम्मी की आँखें अब पूरी तरह बंद थीं। मुंह खुला हुआ था। हर धक्के के साथ वो जोर-जोर से चीख रही थीं — “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बेटा… और जोर से… मम्मी को चोद… मम्मी तेरी चूत बन गई है… आआआह्ह्ह!”
मैं भी नीचे से जोर-जोर से कमर उठा-उठाकर धक्के मार रहा था। मेरा लंड उनकी चूत में पूरी तरह घुस-घुस जाता। मम्मी के स्तन मेरे हाथों में उछल रहे थे। मैं उन्हें जोर से दबा रहा था।
मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें आंसुओं से भरी हुई थीं — लेकिन वो खुशी के आंसू थे। चेहरा लाल, पसीने से भीगा हुआ, बाल बिखरे हुए। वो मुस्कुरा रही थीं और साथ ही चीख भी रही थीं। “राहुल… मम्मी को बहुत अच्छा लग रहा है… तू मम्मी को इतना खुश कर रहा है… आह्ह्ह… और तेज… चोद मम्मी को बेटा!”
मैं भी जोश में आ गया था। मेरा चेहरा लाल हो चुका था। पसीना पूरे शरीर से बह रहा था। मैं मम्मी की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। “मम्मी… आपकी चूत… कितनी तंग और गर्म है… मैं… आह्ह्ह… मम्मी… मैं रुक नहीं पा रहा!”
मम्मी और तेज हो गईं। अब वो मेरे लंड पर पूरी तरह से उछल-उछल कर बैठ रही थीं। उनके स्तन मेरे चेहरे पर आ-जा रहे थे। मैं एक-एक करके दोनों स्तनों को चूस रहा था।
अचानक मम्मी का शरीर काँपने लगा। उनकी चूत मेरे लंड को और भी ज्यादा कसने लगी। “बेटा… मम्मी… मम्मी झड़ने वाली है… आआआआआह्हhhhh… राहुल… आआआह्ह्ह्ह!”
मम्मी का पूरा शरीर ऐंठ गया। आँखें पीछे की तरफ चली गईं। मुंह पूरा खुल गया। गला सूख गया। उन्होंने जोर से चीखा — “आआआआआआह्हhhhh… बेटा… मम्मी चुद गई… आह्ह्ह… चुद गई तेरे लंड से…!”
उनकी चूत फड़क रही थी। गर्म-गर्म रस मेरे लंड के चारों तरफ बह रहा था। मम्मी का शरीर बार-बार झटके खा रहा था।
मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “मम्मी… मैं भी… आ रहा हूँ… अंदर… अंदर ही…!” मैंने मम्मी की कमर को जोर से पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड उनकी चूत की सबसे गहराई तक पहुँच गया और मैं फूट पड़ा।
गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य मम्मी की चूत में भरता गया। मम्मी ने फिर से चीखा — “हाँ बेटा… मम्मी के अंदर ही निकाल… मम्मी को भर दे… आआआह्ह्ह!”
हम दोनों एक साथ झड़ रहे थे। मम्मी का शरीर मेरे ऊपर ढह गया। उनके भारी स्तन मेरे सीने पर दब गए। दोनों साँस लेने के लिए हाँफ रहे थे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था। वीर्य और चूत का रस दोनों मिलकर बाहर निकल रहा था।
मम्मी ने मेरे गाल पर kiss किया। उनकी साँस अभी भी तेज थी। “राहुल… मम्मी को इतना अच्छा कभी नहीं लगा… तूने मम्मी को सच में पाट लिया बेटा…”
मैंने मम्मी को अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में धड़क रहा था।
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अब Missionary वाली लंबी और बहुत गंदी चुदाई…
मम्मी मेरे सीने पर लेटी हुईं, दोनों साँस लेने के लिए हाँफ रहे थे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में आधा अंदर था और हमारा मिला हुआ रस बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था।
मम्मी ने मेरे होंठों पर धीरे से kiss किया और फुसफुसाई, “अभी मम्मी ने तेरा लंड साफ नहीं किया बेटा…”
वो धीरे-धीरे मेरे शरीर के नीचे सरकने लगीं। उनके भारी स्तन मेरे पेट से रगड़ते हुए नीचे गए। मम्मी मेरे लंड के सामने आ गईं। वो लंड अभी भी गीला, चमकदार और आधा खड़ा था — हमारे दोनों के रस से लिपटा हुआ।
मम्मी ने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उन्होंने ऊपर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें चमक रही थीं, चेहरा अभी भी लाल था। उन्होंने जीभ बाहर निकाली और मेरे लंड के सिरे से चिपका हुआ गाढ़ा वीर्य चाट लिया। “उम्म्म्म… बेटा का स्वाद… मम्मी को बहुत पसंद है।”
फिर मम्मी ने पूरा मुँह खोला और मेरा लंड धीरे-धीरे अपने गले तक ले गईं। उनकी गर्म, गीली जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी। वो जोर-जोर से चूस रही थीं, गाल अंदर की तरफ खिंच गए थे। आँखें ऊपर मेरी तरफ देख रही थीं — आधी बंद, lust से भरी हुई। हर चूसने पर “mmphh… mmphh…” की आवाज आ रही थी।
मैं सिर पीछे झुकाकर कराह रहा था। “मम्मी… आह्ह्ह… आपका मुंह… कितना गर्म है…”
मम्मी ने मेरे लंड को पूरा अंदर तक लिया, गला भीग गया, आँखों से आंसू आ गए लेकिन वो रुकीं नहीं। उन्होंने मेरे अंडकोष को भी चाटा और चूसा। पूरा लंड चमकदार और साफ हो गया था। आखिर में मम्मी ने जोर से चूसा और “पॉप” की आवाज के साथ मुंह से निकाला। लार और वीर्य की लकीर उनके होंठों से लटक रही थी।
मम्मी ने मुझे देखते हुए मुस्कुराया और बोली, “अब मम्मी को Missionary में चोद बेटा… गहरे… बहुत गहरे… मम्मी तेरी चूत बन चुकी है।”
मम्मी पीठ के बल लेट गईं। उन्होंने दोनों पैर फैला दिए। उनकी चूत अभी भी फूली हुई थी, अंदर से सफेद वीर्य टपक रहा था। मम्मी ने दोनों हाथ फैलाए और मुझे अपने ऊपर खींच लिया।
मैं उनके बीच में घुटनों के बल बैठ गया। मम्मी ने अपना एक हाथ नीचे डाला और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख दिया। “अंदर डाल बेटा… धीरे से…”
मैं आगे झुका। मेरा लंड आसानी से उनकी गीली, फिसलन भरी चूत में घुस गया। पूरा लंड अंदर जाने के बाद मम्मी ने जोर से साँस ली। “आआआह्ह्ह… बेटा… फिर से भर गया… मम्मी की चूत…”
मैं उनके ऊपर लेट गया। मम्मी ने अपनी टाँगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लीं और एड़ियाँ मेरी गांड़ में गड़ा दीं। मैंने उनके होंठों पर जोर से kiss किया। मम्मी ने भी मुझे कसकर चूमा। हमारी जीभें एक-दूसरे के मुंह में घूम रही थीं।
मैं धीरे-धीरे कमर हिलाने लगा। मेरा लंड उनकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। हर बार जब मैं बाहर निकालता तो चूत का रस और मेरा वीर्य लंड के साथ बाहर आता और जब अंदर धकेलता तो “चप-चप-चप” की गीली आवाज आती।
मम्मी मेरे कान में फुसफुसा रही थीं, “हाँ बेटा… ऐसे ही… गहरे… मम्मी को और गहरा चोद… आह्ह्ह… तेरा लंड मम्मी की चूत को फाड़ रहा है…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। मम्मी की भारी गांड़ बेड पर थप-थप की आवाज कर रही थी। उनके स्तन मेरे सीने से दब रहे थे और हर धक्के के साथ उछल रहे थे। मैंने एक स्तन को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। मम्मी ने सिर पीछे झुकाया।
“आआआह्ह्ह… बेटा… मम्मी के स्तन चूस… और जोर से काट… आह्ह्ह!”
मैं और तेज हो गया। बेड जोर-जोर से हिल रहा था। मम्मी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर धक्के के साथ मम्मी चीख रही थीं — “चोद मम्मी को… चोद… मम्मी तेरी रंडी बन गई है बेटा… आआआह्ह्ह… और मार… फाड़ दे मम्मी की चूत…!”
मैं मम्मी की दोनों टाँगें उठाकर उनके कंधों पर रख दिया। अब उनकी चूत और भी ज्यादा खुल गई थी। मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था। मम्मी की आँखें पूरी तरह पीछे की तरफ चली गई थीं। मुंह खुला हुआ था। जीभ बाहर निकली हुई थी। पसीना उनके पूरे चेहरे और स्तनों पर चमक रहा था।
“राहुल… मम्मी… मम्मी फिर झड़ने वाली है… आआआआआह्हhhhh… बेटा…!”
मम्मी का शरीर अचानक ऐंठ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतना जोर से कसा कि मैं भी रुक नहीं पाया। मम्मी चीखती हुई झड़ गईं। उनकी चूत फड़क रही थी और गर्म रस मेरे लंड के चारों तरफ बह रहा था।
मैंने भी आखिरी जोरदार धक्के मारे और फिर से मम्मी की चूत में वीर्य छोड़ दिया। “मम्मी… मैं भी… आ रहा हूँ… अंदर ही… आआआह्ह्ह!”
मम्मी ने मुझे और कसकर पकड़ लिया। “हाँ बेटा… मम्मी के अंदर ही निकाल… मम्मी को भर दे…!”
हम दोनों एक साथ झड़ रहे थे। मेरा लंड उनकी चूत में फड़क रहा था और वीर्य अंदर भर रहा था। मम्मी का शरीर बार-बार काँप रहा था।
आखिर में मैं उनके ऊपर ही ढह गया। मम्मी ने मुझे अपनी बाहों में कस लिया। दोनों के शरीर पसीने से तर थे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में धीरे-धीरे धड़क रहा था। बाहर से सफेद वीर्य टपक रहा था।
मम्मी ने मेरे बालों में हाथ फेरा और बहुत प्यार से बोली, “राहुल… आज मम्मी सच में तेरी हो गई… अब ये रोज होगा बेटा… समझा?”
मैंने मम्मी को और कसकर पकड़ लिया। “हाँ मम्मी… अब मैं आपको कभी नहीं छोड़ूंगा।”
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सुबह की रिस्की और बहुत तेज वाली बाथरूम चुदाई…
रात को हम दोनों पूरी तरह नंगे सो गए थे। मम्मी मेरी बाहों में थीं, उनकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई, मेरी एक जांघ उनकी गांड़ के बीच दबी हुई। मेरा लंड अभी भी आधा खड़ा उनकी नरम गांड़ से सटा हुआ था। हम दोनों थककर गहरी नींद में चले गए थे।
सुबह के करीब 5:15 बजे… अभी बाहर अंधेरा था, बस हल्का-हल्का उजाला आने लगा था।
मम्मी पहले जागीं। उन्होंने महसूस किया कि मेरा लंड उनकी जांघ से सटकर पूरा खड़ा हो चुका है। मम्मी ने धीरे से हाथ पीछे बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया। हल्के हाथ से ऊपर-नीचे करने लगीं। मैं नींद में कराह उठा।
मम्मी ने चुपके से मेरे कान में फुसफुसाया, “बेटा… उठ जा… मम्मी को फिर से चाहिए…”
मैं आँखें खोलने लगा। मम्मी ने कंबल हटाया और नीचे सरक गईं। अंधेरे में भी मैं देख सकता था कि मम्मी मेरे लंड के पास आ गई हैं। उन्होंने बिना कुछ बोले मेरा पूरा लंड मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगीं। गर्म, गीली जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। मैं कराह उठा, “मम्मी… आह्ह्ह… सुबह-सुबह…?”
मम्मी ने लंड को मुंह से निकालकर फुसफुसाया, “शश… बेटा… बाथरूम चल… दीवार से लगाकर मम्मी को चोद… जल्दी…”
मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बाथरूम की तरफ खींच लिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मम्मी ने बाथरूम का छोटा बल्ब जला दिया। हल्की रोशनी में मम्मी का नंगा शरीर चमक रहा था। बाल बिखरे हुए, स्तन अभी भी निशानों से भरे हुए, चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई।
मम्मी ने मुझे दीवार की तरफ धकेला और खुद दीवार से सटकर खड़ी हो गईं। उन्होंने दोनों हाथ दीवार पर टिका दिए, कमर पीछे की तरफ झुकाई और गांड़ बाहर की तरफ निकाल दी। “अब पीछे से खड़ा करके चोद बेटा… तेज… बहुत तेज… मम्मी को जल्दी चाहिए…”
मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। मेरा लंड उनकी चूत के ठीक पीछे था। मम्मी ने एक हाथ पीछे बढ़ाकर मेरा लंड पकड़ लिया और अपनी गीली चूत पर रगड़ने लगीं। “अंदर डाल… जल्दी…”
मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर से धक्का मारा। “आआआह्ह्ह… बेटा…!” मम्मी की चीख निकल गई।
मेरा पूरा लंड एक ही धक्के में उनकी चूत में घुस गया। मम्मी की चूत अभी भी कल रात के रस और वीर्य से गीली थी, इसलिए आसानी से अंदर चला गया। मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
बाथरूम में तेज चुदाई शुरू हो गई।
“थप-थप-थप-थप… चप-चप-चप…” हर धक्के के साथ गीली आवाज पूरे बाथरूम में गूँज रही थी। मम्मी दीवार से सटी हुई थीं, उनके स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। मैं उनकी कमर को पकड़कर इतनी जोर से चोद रहा था कि मम्मी की गांड़ मेरी जांघों पर थप्पड़ मार रही थी।
मम्मी सिर पीछे झुकाकर कराह रही थीं, “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बेटा… और जोर से… मम्मी की चूत फाड़ दे… आआआह्ह्ह… सुबह-सुबह ही मम्मी को चोद दिया…!”
मैं और तेज हो गया। एक हाथ से उनकी कमर पकड़ी हुई थी, दूसरा हाथ आगे बढ़ाकर उनके स्तन को जोर से दबा रहा था। मम्मी का चेहरा बाथरूम के छोटे शीशे में साफ दिख रहा था — आँखें आधी बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर, पसीना माथे पर। वो मुझे शीशे में देख रही थीं।
“देख… बेटा… शीशे में देख… मम्मी को तेरे लंड से चुदते हुए… आह्ह्ह… कितना गंदा लग रहा है ना…?”
मैंने उनकी एक टांग उठा दी और दीवार से और जोर से दबा दिया। अब मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था। मम्मी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर धक्के के साथ मम्मी की चीख निकल रही थी।
“बेटा… मम्मी झड़ने वाली है… आआआआआह्हhhhh… राहुल…!”
मम्मी का शरीर काँप उठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैंने भी आखिरी जोरदार धक्के मारे और फिर से मम्मी की चूत में वीर्य भर दिया। “मम्मी… मैं भी… आ रहा हूँ… अंदर…!”
दोनों एक साथ झड़ गए। मम्मी की टाँगें काँप रही थीं। मैंने उन्हें पीछे से कसकर पकड़ लिया ताकि गिर न जाएं। मेरा लंड उनकी चूत में फड़क रहा था और गाढ़ा वीर्य अंदर भर रहा था। कुछ वीर्य बाहर निकलकर मम्मी की जांघों पर बह रहा था।
हम दोनों कुछ सेकंड ऐसे ही खड़े रहे — साँस लेते हुए, पसीने से तर, लंड अभी भी अंदर। मम्मी ने पीछे मुड़कर मेरे होंठों पर kiss किया।
“बेटा… सुबह-सुबह ही मम्मी को दीवार से लगा दिया… मम्मी को बहुत अच्छा लगा…”
मैंने मम्मी को पीछे से गले लगाया, दोनों हाथ उनके स्तनों पर रखे। “मम्मी… अब तो रोज ऐसा ही होगा ना?”
मम्मी मुस्कुराईं, “हाँ बेटा… अब मम्मी तेरी है… पूरी तरह तेरी।”
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सुबह की नंगी किचन चुदाई…
बाथरूम वाली तेज चुदाई के बाद हम दोनों पसीने और वीर्य से तरबतर थे। मम्मी की जांघों से अभी भी मेरा गाढ़ा वीर्य टपक रहा था। मम्मी ने मुझे गले लगाया और फुसफुसाई, “चल बेटा… पहले नहा लेते हैं।”
हम दोनों नंगे ही बाथरूम में घुसे। गर्म पानी की बौछार शुरू हुई। मम्मी ने साबुन लिया और मेरे पूरे शरीर पर लगाने लगीं — खासकर मेरे लंड और अंडकोष को बहुत ध्यान से साफ किया। मैंने भी मम्मी के स्तनों पर साबुन लगाया, निप्पल्स को उंगलियों से घुमाया। मम्मी की साँस तेज हो गई।
मैंने मम्मी की चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मम्मी दीवार से सट गईं, “आह्ह्ह… बेटा… उंगलियाँ मत निकाल… मम्मी को और… आआह्ह्ह!”
मम्मी झड़ गईं — शॉवर में ही। उनका शरीर काँप रहा था। फिर मम्मी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर हल्के से मालिश की, लेकिन बोली, “अभी नहीं बेटा… किचन में जाकर पूरा लेंगे।”
हमने एक-दूसरे को अच्छे से धोया, तौलिए से रगड़-रगड़कर सुखाया और बिना कपड़े पहने ही किचन की तरफ चले गए।
सुबह की रोशनी किचन में आ रही थी। मम्मी ने चाय का पानी चढ़ाया और टोस्ट बनाने लगीं। वो काउंटर के सामने खड़ी थीं — पूरी तरह नंगी। उनके बाल अभी भी गीले थे, स्तन हल्के से हिल रहे थे, गांड़ बाहर की तरफ निकली हुई थी।
मैं उनके पीछे गया और उन्हें पीछे से गले लगा लिया। दोनों हाथ उनके स्तनों पर रख दिए। मम्मी ने सिर पीछे झुकाया और मेरे गाल पर kiss किया। “बेटा… ब्रेकफास्ट बनाते समय भी मम्मी को चोदना है क्या?”
मैंने जवाब में उनके एक स्तन को जोर से दबाया और फुसफुसाया, “हाँ मम्मी… अभी चाय ठंडी होने से पहले…”
मैंने मम्मी को उठा लिया और किचन काउंटर पर बिठा दिया। मम्मी ने पीछे की तरफ झुककर काउंटर पर लेटने की कोशिश की। ठंडे संगमरमर के काउंटर पर मम्मी का गर्म नंगा शरीर फैल गया। उनके स्तन ऊपर की तरफ उभरे हुए थे, टाँगें खुली हुईं।
मैं उनके बीच में खड़ा हो गया। मम्मी ने दोनों टाँगें उठाकर मेरी कमर पर रख दीं। उनकी चूत अभी भी गीली थी। मैंने अपना लंड पकड़ा और उनकी चूत पर रगड़ा।
“अंदर डाल बेटा… जल्दी…”
मैंने जोर से धक्का मारा। “आआआह्ह्ह… बेटा…!” मम्मी चीख पड़ीं।
पूरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया। किचन काउंटर पर मम्मी लेटी हुई थीं, मैं खड़ा होकर उन्हें चोद रहा था। हर धक्के के साथ काउंटर हिल रहा था। बर्तन थोड़े से खिसक रहे थे। “थप-थप-थप” की आवाज पूरे किचन में गूँज रही थी।
मम्मी के स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उन्हें जोर से दबा लिया। मम्मी ने सिर पीछे झुकाया, मुंह खुला हुआ था। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बेटा… किचन में ही चोद दिया… मम्मी को… आआआह्ह्ह… और जोर से…!”
मैं और तेज हो गया। मम्मी की टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं, एड़ियाँ मेरी गांड़ में गड़ रही थीं। मैं झुककर मम्मी के एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। मम्मी ने मेरे बालों में हाथ डाल दिया।
“हाँ बेटा… मम्मी के स्तन चूस… और चोद… मम्मी तेरी चूत बन गई है… आआआह्ह्ह!”
मैं सीधा हो गया और मम्मी की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मम्मी का पूरा शरीर काउंटर पर फिसल रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हर बार जब लंड बाहर निकलता तो चमकदार रस लिपटा रहता।
मम्मी की आँखें आधी बंद थीं। चेहरा लाल हो चुका था। पसीना उनके माथे, स्तनों और पेट पर चमक रहा था। वो बार-बार मेरी तरफ देख रही थीं — आँखों में प्यार और जोश दोनों था।
“राहुल… मम्मी… मम्मी फिर झड़ने वाली है… आआआआआह्हhhhh… बेटा…!”
मम्मी का शरीर अचानक ऐंठ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। मैंने भी आखिरी जोरदार धक्के मारे और फिर से मम्मी की चूत में वीर्य छोड़ दिया। “मम्मी… मैं भी… आ रहा हूँ…!”
दोनों एक साथ झड़ गए। मम्मी ने मुझे अपनी टाँगों से कस लिया। मेरा लंड उनकी चूत में फड़क रहा था और गाढ़ा वीर्य अंदर भर रहा था। कुछ वीर्य बाहर निकलकर काउंटर पर गिर रहा था।
हम दोनों कुछ देर ऐसे ही रहे — साँस लेते हुए। मम्मी ने मुझे अपनी तरफ खींचा और जोर से चूमा।
“बेटा… सुबह-सुबह नहाने के बाद किचन काउंटर पर चुद गई… मम्मी को बहुत अच्छा लगा।”
मैंने मम्मी को काउंटर से नीचे उतारा। दोनों नंगे ही खड़े होकर एक-दूसरे को गले लगाए। मम्मी ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और धीरे से सहलाते हुए बोली, “अब चाय पीते हैं… और फिर देखते हैं दिन भर में कितनी बार चोदता है मम्मी को।”
हम दोनों नंगे ही किचन में चाय पीने लगे। मम्मी मुझे टोस्ट खिलाने लगीं और बीच-बीच में मेरे लंड को छूती रहीं।