माँ और बेटे का गुप्त अफेयर maa beta secret affair story
मैं रोहन हूँ, 24 साल का। मुंबई के एक छोटे से 2BHK फ्लैट में अकेले माँ के साथ रहता हूँ। पापा का तीन साल पहले हार्ट अटैक से निधन हो गया था। माँ सुनीता, 42 साल की, बेहद खूबसूरत औरत हैं। गोरी चमड़ी, काले लंबे बाल, बड़ी-बड़ी काली आँखें, मोटे गुलाबी होंठ, विशाल और भारी स्तन जो ब्लाउज में समा नहीं पाते, पतली कमर और गोल-गोल मोटी, नरम गांड। जब वो साड़ी पहनती हैं तो उनकी कमर की नाभि और गांड के उभार साफ दिखते हैं। रात को जब वो नाइटी पहनती हैं बिना ब्रा के, तो उनके बड़े-बड़े निप्पल कपड़े से बाहर निकलने को बेताब रहते हैं।
यह सब कैसे शुरू हुआ…
शुरुआत हुई करीब छह महीने पहले से। मैं ऑफिस से लौटता तो माँ किचन में खाना बना रही होतीं। एक दिन शाम को मैं जल्दी आ गया। माँ ने हल्की सी नीली साड़ी पहनी थी, ब्लाउज बहुत टाइट था। जब वो झुककर बर्तन उठा रही थीं तो उनकी गहरी सफेद cleavage पूरी दिख रही थी। मैं पीछे से आया और अचानक उन्हें गले लगा लिया। “मम्मी, मैं आ गया!”
मेरे दोनों हाथ उनकी कमर पर थे। अचानक मेरे हाथ ऊपर सरक गए और मेरी उंगलियाँ उनके भारी स्तनों के नीचे फिसल गईं। माँ का शरीर थोड़ा सा काँप गया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस हल्के से मुस्कुराई और बोलीं, “अरे बेटा… थक गए हो? जाओ नहा लो, खाना तैयार है।”
उस रात डिनर के बाद हम दोनों सोफे पर टीवी देख रहे थे। माँ मेरे बिल्कुल पास बैठी थीं। उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया था। ब्लाउज का ऊपरी बटन खुला हुआ था। माँ ने देख लिया कि मैं उनकी छाती की तरफ देख रहा हूँ।
“रोहन… क्या देख रहे हो बेटा?” उन्होंने धीरे से पूछा। आवाज में कोई गुस्सा नहीं था।
मैं शरमा गया। “कुछ नहीं मम्मी… बस आप आज बहुत सुंदर लग रही हो।”
माँ हँसीं। “अरे बेटा, मैं तो बूढ़ी हो गई हूँ। तुझे कोई अच्छी लड़की ढूंढनी चाहिए।”
“नहीं मम्मी,” मैंने गंभीरता से कहा। “कोई लड़की आप जैसी नहीं हो सकती। आपकी खुशबू, आपका शरीर… सब कुछ अलग है।”
माँ चुप हो गईं। उनकी साँस थोड़ी तेज हो गई। हम दोनों चुपचाप टीवी देखते रहे, लेकिन हवा में कुछ नया तनाव था।
उसके बाद के हफ्तों में चीजें धीरे-धीरे बदलने लगीं। माँ अब घर पर ज्यादा रिवीलिंग कपड़े पहनने लगीं। कभी-कभी सिर्फ नाइटी में बिना ब्रा के घूमतीं। एक बार मैंने उन्हें नहाते हुए देख लिया। बाथरूम का दरवाजा अधूरा बंद था। मैंने अंदर झाँका तो माँ पूरी नंगी खड़ी थीं। पानी उनके भारी स्तनों पर बह रहा था, निप्पल खड़े थे। उनकी मोटी गांड पानी से चमक रही थी। मैं तुरंत अपने कमरे में भागा और लंड निकालकर माँ को याद करके हिलाने लगा। “मम्मी… तुम्हारी चूत… तुम्हारे स्तन…” मैं बड़बड़ा रहा था।
माँ को भी मेरी नजरों का अहसास होने लगा था। एक रात वो मेरे कमरे में दूध लेकर आईं। नाइटी पहनी हुई थी, नीचे कुछ नहीं। जब वो झुकीं तो उनके दोनों स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक गए। “लो बेटा, दूध पी लो।”
मैंने दूध का गिलास लिया लेकिन मेरी नजरें उनकी छाती पर टिकी थीं। माँ ने भी देख लिया। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस मेरे बाल सहलाए और चली गईं।
फिर वो रात आई…
बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा फ्लैट अंधेरे में डूब गया। माँ डर गईं। “रोहन… अंधेरा हो गया है बेटा।”
मैंने उन्हें गले लगा लिया। “डरो मत मम्मी, मैं हूँ ना।”
हम दोनों सोफे पर बैठे थे। माँ मेरी गोद में सिमट गईं। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरे शरीर से पूरी तरह सटी हुई थी। उनके भारी स्तन मेरी छाती पर दब रहे थे। मेरे लंड ने तुरंत खड़ा होकर उनकी जांघ को छू लिया। माँ ने महसूस किया, लेकिन उन्होंने हटने की कोशिश नहीं की।
“बेटा…” उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हारी माँ अकेली है। रातों को नींद नहीं आती।”
“मम्मी, मैं हूँ ना। मैं आपकी हर रात संभालूँगा।”
मैंने उनकी गर्दन पर हल्का सा किस किया। माँ की साँस रुक गई। “आह… बेटा मत करो… यह गलत है।”
लेकिन उनकी आवाज में कोई रोक नहीं थी। मैंने उनकी कमर पर हाथ फिराया। उनकी साड़ी ऊपर चढ़ गई थी। मेरी उंगलियाँ उनकी नंगी कमर और नाभि पर घूम रही थीं। माँ ने आँखें बंद कर लीं।
“मम्मी… आपकी त्वचा बहुत नरम है।”
“रोहन… हम दोनों पागल हो रहे हैं।”
हमारे होंठ अब सिर्फ दो इंच की दूरी पर थे। माँ की साँस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उनकी आँखें आधी बंद थीं, होंठ थोड़े काँप रहे थे। मेरे लंड ने उनकी जांघ को और जोर से दबा दिया। माँ ने हल्का सा करवट लिया, जिससे मेरे लंड का सिरा उनकी चूत के पास पहुँच गया (कपड़ों के ऊपर से)।
हम दोनों साँस रोककर बैठे थे। अंधेरा, बारिश की आवाज, और हमारे शरीरों के बीच सिर्फ एक पतली सी लाइन बाकी थी…
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माँ और बेटे की गुप्त चुदाई – भाग 2
माँ की आँखों में आँसू भर आए। उनकी साँस रुक-रुक कर आ रही थी। “रोहन… बेटा… यह गलत है… मैं तुम्हारी माँ हूँ… हम दोनों पागल हो रहे हैं…”
उनके गालों से आँसू बहने लगे। मैंने तुरंत उनके दोनों गालों पर होंठ रख दिए और एक-एक आँसू चूम लिया। आँसू नमकीन थे, लेकिन उनकी त्वचा बहुत नरम। मैंने धीरे से फुसफुसाया, “मम्मी… आँसू मत बहाओ। आज हम दोनों को जो चाहिए, वो एक-दूसरे से मिलेगा। मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें लाल हो गई थीं, लेकिन उनमें इच्छा भी थी। मैंने उन्हें गोद में उठा लिया। उनकी भारी बॉडी मेरी बाहों में थी। मैं उन्हें सीधे बेडरूम में ले गया। बिजली अभी भी नहीं आई थी, सिर्फ बारिश की आवाज और कभी-कभी बिजली की चमक से कमरा रोशन हो रहा था।
मैंने माँ को बेड पर लिटा दिया।
कपड़े उतारने की शुरुआत…
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू धीरे-धीरे खींचा। पल्लू नीचे गिरा और उनकी गोरी छाती का ऊपरी हिस्सा खुल गया। फिर मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक हुक खुलता गया। ब्लाउज के अंदर काला ब्रा था। जब आखिरी हुक खुला तो मैंने ब्लाउज दोनों तरफ से खींचकर उतार दिया।
माँ के विशाल, भारी स्तन अब सिर्फ काले ब्रा में थे। ब्रा बहुत टाइट थी, स्तन बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने उनके पीछे हाथ डाला और ब्रा का हुक खोला। “क्लिक” की आवाज हुई। ब्रा ढीली हो गई। मैंने ब्रा के स्ट्रैप्स खींचे और माँ के दोनों स्तन आजाद हो गए।
दोनों स्तन भारी, गोरे, नरम और थोड़े झुके हुए थे। गहरे भूरे रंग के बड़े-बड़े निप्पल खड़े हो चुके थे। बिजली की चमक में वे चमक रहे थे। मैंने तुरंत एक निप्पल मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा।
माँ का शरीर काँप उठा। “आआआह… बेटा… धीरे से… मम्मी के स्तन… आह्ह्ह…”
उनकी आँखें बंद हो गईं, सिर पीछे की तरफ झुक गया, होंठ काट लिए। चेहरा लाल हो गया था। पसीना उनकी गर्दन पर चमक रहा था।
मैं एक स्तन चूसता रहा और दूसरे को हाथ से दबाता रहा। माँ की साँसें तेज हो गईं।
फिर मैंने उनकी पेटीकोट की नाड़ी खोली। पेटीकोट ढीला हो गया। मैंने उसे नीचे की तरफ खींचा। अब माँ सिर्फ काली पैंटी में बेड पर लेटी थीं। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे खींचा।
पैंटी उतरते ही माँ की चूत सामने आ गई। सफेद, मोटी जांघों के बीच एक गुलाबी, थोड़ी सी बालों वाली चूत। होंठ फूले हुए थे और बीच से चमकदार रस बह रहा था।
मैंने अपनी पैंटी और शर्ट उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, लंबा, नसों से भरा। माँ ने उसे देखा और शरमा गईं, लेकिन उनकी आँखें लंड पर टिकी रहीं।
चुदाई की शुरुआत…
मैं माँ के ऊपर चढ़ गया। मेरे दोनों हाथों ने उनकी जांघें खोलीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत के ऊपर रगड़ा। गीला सिरा उनकी चूत के होठों पर घूम रहा था।
माँ की आँखें आधी खुली थीं। उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनका चेहरा डर, शर्म और तीव्र इच्छा का मिश्रण था। “बेटा… धीरे से… मम्मी की चूत… बहुत दिनों बाद… आह…”
मैंने लंड का सिरा उनकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे दबाया।
“उउउउह्ह्ह…” माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं। मुंह खुल गया। “बेटा… बहुुुत बड़ा है तेरा… धीरे… आह्ह्ह… मर जाएगी मम्मी…”
मैंने और दबाया। आधा लंड अंदर चला गया। माँ की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। माँ का शरीर एक बार काँप उठा।
“आआआह्ह्ह… रोहन… पूरा अंदर… आह्ह्ह…”
उनका चेहरा पूरी तरह बदल गया था। आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई, पसीना पूरे चेहरे पर। गर्दन पीछे झुकी हुई। दोनों हाथ मेरी पीठ पर थे, नाखून गड़ रहे थे।
मैंने धीरे-धीरे बाहर निकाला और फिर जोर से अंदर धकेला।
“थप… थप… थप…”
हर धक्के के साथ माँ की भारी स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैं झुककर एक स्तन मुंह में लेता और चूसता, साथ ही चोदता जाता।
माँ के एक्सप्रेशन:
- आँखें कभी बंद, कभी आधी खुली, पुतलियाँ ऊपर की तरफ घूम रही थीं।
- होंठ काट रही थीं, फिर खोलकर जोर-जोर से चीख रही थीं — “आह… बेटा… और जोर से चोद… मम्मी की चूत फाड़ दे… आआआह्ह्ह…”
- चेहरा लाल, पसीने से भीगा, जीभ बाहर, सिर बेड पर इधर-उधर घुमा रही थीं।
- जब मैं गहरा धक्का मारता तो उनकी आँखें फटी रह जातीं और मुंह से सिर्फ “उउउह्ह्ह…” निकलता।
मेरे एक्सप्रेशन:
- मैं उनकी आँखों में देख रहा था, लाल आँखें, पसीना मेरे माथे पर।
- मैं मुस्कुरा रहा था और गंदी बातें बोल रहा था — “मम्मी… तुम्हारी चूत कितनी टाइट और गर्म है… आज मैं तुम्हें पूरा चोद दूँगा…”
- जब माँ चीखतीं तो मेरा चेहरा और विकृत हो जाता, दाँत किटकिटाते, “ले… ले मम्मी… अपना बेटा चोद रहा है तुझे…”
- मैं उनकी जांघें पकड़े हुए था, उंगलियाँ गड़ी हुईं, सांसें तेज।
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। बेड हिल रहा था। “थप-थप-थप-थप…” की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। माँ के स्तन मेरे चेहरे पर उछल रहे थे। मैं उन्हें चूसता और काटता भी।
माँ का शरीर अचानक कड़क गया। “बेटा… मैं… मैं… आआआह्ह्ह… मर गई… चूत से… आआआह्ह्ह…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से कस लिया। पूरा शरीर काँप रहा था। आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर, दोनों हाथ मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। पहला ऑर्गेज्म था पापा के बाद।
मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। आखिरी जोरदार धक्के मारे और अपना गरम-गरम पानी उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। “मम्मी… ले… सब अंदर… उउउह्ह्ह…”
मैं उनके ऊपर ही गिर पड़ा। दोनों साँसें तेज। माँ की चूत अभी भी मेरे लंड को कस रही थी। मैंने उनके होंठों पर लंबा किस किया।
हम दोनों नंगे, पसीने से लथपथ, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। बारिश अभी भी हो रही थी।
माँ ने धीरे से मेरे बाल सहलाए और फुसफुसाई, “बेटा… आज के बाद… हम दोनों… हमेशा के लिए… एक हो गए…”
लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई…
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- भाई के मोटे लंड से चुदते-चुदते चीख-चीखकर पानी छोड़ने लगी
- दीदी की मोटे लंड से चुदाई की चीखे निकाल दी
- बुआ की कुंवारी बेटी ने मुझे गर्म करके सील तुड़वाई – पहली चुदाई की पूरी कहानी
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माँ और बेटे की गुप्त चुदाई – भाग 3
हम दोनों नंगे बेड पर लेटे थे। मेरी माँ सुनीता की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। उनकी चूत से मेरा गरम पानी धीरे-धीरे बह रहा था। मेरी छाती पर उनका एक भारी स्तन दबा हुआ था। अचानक बिजली आ गई। कमरे में हल्की रोशनी फैल गई।
माँ ने मुझे देखा। मैंने उन्हें देखा। दोनों पूरी तरह नंगे। पसीने से लथपथ। माँ के स्तन लाल हो चुके थे मेरे चूसने से। उनकी चूत फूली हुई और चमकदार थी। मेरे लंड पर भी उनका रस और मेरा पानी लगा हुआ था।
माँ शरमा गईं, लेकिन उन्होंने खुद को ढकने की कोशिश नहीं की। उन्होंने मेरे चेहरे को हाथ से छुआ और धीरे से बोलीं:
“बेटा… अब सब कुछ सामने आ गया ना? बिजली भी आ गई… और हम दोनों नंगे लेटे हैं।”
मैंने उन्हें और पास खींच लिया। मेरी उंगलियाँ उनकी नरम जांघ पर घूम रही थीं। “मम्मी… बताओ ना। पापा के जाने के बाद तुम्हें कैसा लगा? सच में… तुम्हारे मन में क्या चल रहा था?”
माँ की आँखें नम हो गईं। उन्होंने मेरी छाती पर सिर रखा और धीरे-धीरे बोलना शुरू किया:
“बेटा, पापा के जाने के बाद मैं बिल्कुल अकेली हो गई थी। रात को अकेले बेड पर सोती थी। शरीर में अजीब सी बेचैनी होती। कभी-कभी मैं खुद को छूती… अपनी चूत को उंगलियों से सहलाती… लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती थी। फिर धीरे-धीरे तुम्हारी नजरें बदलने लगीं। जब तुम ऑफिस से आते और मुझे देखते… मेरे स्तन, मेरी गांड… तुम्हारी आँखों में वो भूख दिखती। एक दिन मैंने तुम्हें बाथरूम के बाहर खड़े होकर मुझे नहाते हुए देखा। उस दिन से मैं भी… सोचने लगी कि मेरा बेटा मुझे… चोदना चाहता है।”
जब वो ये सब बता रही थीं, मेरी उंगलियाँ उनकी चूत पर पहुँच गईं। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। माँ की बात बीच में रुक गई। “आआह… बेटा… उंगलियाँ मत डाल… बात कर रही हूँ ना…”
लेकिन उनकी चूत फिर से गीली हो रही थी। मैंने उंगलियाँ अंदर-बाहर करना शुरू किया। माँ की साँसें फिर तेज हो गईं।
“मम्मी… आगे बोलो।” मैंने कान में फुसफुसाया।
माँ ने मेरे लंड को हाथ में ले लिया। वो धीरे-धीरे हिला रही थीं। “फिर एक रात… मैंने सोचा कि अगर तू मुझे चोदे… तो शायद ये अकेलापन खत्म हो जाए। आज जब तूने मुझे गले लगाया… और लंड मेरी जांघ से टकराया… मुझे लगा कि अब रुक नहीं सकता।”
मैंने माँ को पीठ के बल लिटा दिया। उनकी जांघें खोलीं। मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था — मोटा और सख्त। मैंने लंड का सिरा उनकी चूत पर रखा। अंदर अभी भी मेरा पहले वाला पानी भरा हुआ था, इसलिए बहुत फिसलन थी।
मैंने धीरे से दबाया। लंड फिर से अंदर घुसने लगा।
माँ की आँखें आधी बंद हो गईं। मुंह खुल गया। “उउउह्ह्ह… बेटा… फिर से… आआह… मम्मी की चूत अभी भी तेरे पानी से भरी हुई है…”
पूरा लंड अंदर चला गया। माँ ने मेरी पीठ पर हाथ रखा और नाखून गाड़ दिए।
दूसरी चुदाई – धीरे और गहरी…
मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। “थप… थप…” की हल्की आवाज आ रही थी। माँ की भारी स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
माँ के एक्सप्रेशन:
- आँखें आधी बंद, लेकिन कभी-कभी मेरी आँखों में देखतीं। चेहरा प्यार और शर्म का मिश्रण।
- होंठ काँप रहे थे। कभी-कभी वे “आह… बेटा…” बोलतीं, कभी सिर्फ साँस छोड़तीं।
- जब मैं गहरा धक्का मारता तो उनकी आँखें फटी रह जातीं और मुंह से लंबी साँस निकलती — “हाँ… और अंदर… मम्मी तेरी हो गई…”
- पसीना उनकी गर्दन, स्तनों और पेट पर चमक रहा था।
मेरे एक्सप्रेशन:
- मैं उनकी आँखों में देख रहा था, चेहरा गंभीर और भूखा।
- मैं मुस्कुरा रहा था और धीरे-धीरे बोल रहा था — “मम्मी… अब तू मेरी है। ये चूत अब सिर्फ मेरी है।”
- पसीना मेरे माथे पर था। मैं उनकी एक टांग उठाकर और गहरा चोद रहा था।
मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। माँ की चूत “चप-चप” की आवाज कर रही थी। “बेटा… जोर से… लेकिन धीरे… मम्मी को महसूस हो रहा है हर इंच…”
मैं झुक गया और उनके होंठों पर किस किया। जीभ अंदर डाली। माँ ने भी अपनी जीभ मेरी जीभ से लपेट ली। हम दोनों चूमते हुए चोद रहे थे।
माँ का शरीर फिर से कड़कने लगा। “बेटा… मैं… फिर से… आआआह्ह्ह… मर गई… चूत फट गई… आआआह्ह्ह…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया। पूरा शरीर काँप रहा था। आँखें बंद, सिर बेड पर इधर-उधर, मुंह खुला, जीभ बाहर। दूसरा ऑर्गेज्म और भी जोरदार था।
मैंने भी आखिरी जोरदार धक्के मारे और फिर से उनकी चूत के अंदर अपना पानी छोड़ दिया। “मम्मी… ले… सब कुछ… उउउह्ह्ह…”
हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था। दोनों साँसें एक हो गई थीं।
माँ ने मेरे बाल सहलाए और धीरे से बोलीं, “बेटा… आज रात के बाद… हम दोनों कभी अलग नहीं होंगे। ये हमारा सीक्रेट… हमेशा रहेगा।”