बेटे ने माँ को होटल में चोदा | Beta Ne Maa Ko Choda Hotel Mein

होटल में बेटे ने माँ को चोदा Beta Ne Maa Ko Choda Hotel Mein

मेरा नाम राहुल है। उम्र २२ साल। मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ और जिम जाता हूँ, इसलिए बॉडी अच्छी बन गई है। मेरी माँ प्रिया, उम्र ४२ साल। गोरा रंग, लंबे काले बाल, भरे हुए ३६ डी वाले स्तन, पतली कमर और बड़ी-बड़ी गोल गांड। पापा बिजनेस के चक्कर में हमेशा बाहर रहते हैं। माँ अक्सर अकेली रहती हैं।

इस बार हम दोनों मुंबई गए थे। एक दूर के रिश्तेदार की शादी थी। पापा आखिरी वक्त पर नहीं आ पाए। होटल बुकिंग में गड़बड़ हो गई थी, इसलिए सिर्फ एक ही कमरा मिला — डबल बेड वाला। हमने सोचा दो-तीन रात कट जाएंगी, क्या फर्क पड़ता है।

रात के ११ बजे हम होटल पहुंचे। माँ बहुत थक गई थीं। उन्होंने कहा, “राहुल, पहले मैं नहा लेती हूँ। बहुत पसीना आया है।” मैं बिस्तर पर लेटा टीवी देख रहा था। माँ बाथरूम में चली गईं।

१५ मिनट बाद जब बाथरूम का दरवाजा खुला तो मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। माँ बाहर निकलीं तो उनकी बॉडी पर सिर्फ एक पतली सिल्क की लाल नाइटी थी। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके ब्रा का निशान और निप्पल्स की हल्की उभार साफ दिख रही थी। बाल खुले और गीले थे, पानी की बूंदें गर्दन से नीचे स्तनों के बीच जा रही थीं। नाइटी जांघों तक ही थी, इसलिए माँ की मोटी-सुंदर जांघें नंगी दिख रही थीं। जब वे चल रही थीं तो उनके स्तन हिल रहे थे और गांड थोड़ी-थोड़ी लहरा रही थी।

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने जल्दी से कंबल ओढ़ लिया ताकि तम्बू न दिखे।

माँ बिस्तर पर आईं और मेरे ठीक बगल में लेट गईं। कमरा छोटा था, इसलिए हम दोनों पास-पास थे। माँ की खुशबू — साबुन और उनके शरीर की महक — मुझे पागल कर रही थी।

“राहुल, आज बहुत थक गई हूँ बेटा। पापा से फोन पर बात की थी… वो कह रहे हैं कि दो-तीन दिन और लगेंगे।” मैंने उनकी तरफ करवट ली। “कोई बात नहीं माँ, मैं हूँ ना आपके साथ।”

माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें थोड़ी नम थीं। “तुम अच्छे बेटे हो। पापा की तरह नहीं।” फिर उन्होंने धीरे से कहा, “पापा मुझे छूते भी नहीं अब। जैसे मैं उनकी जिंदगी से बाहर हो गई हूँ। शादी के बाद पहले कुछ साल तो बहुत प्यार करते थे… अब तो बस काम, काम और काम।”

मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। “माँ, आप इतनी खूबसूरत हो कि कोई भी मर्द आप पर जान छिड़क दे। पापा की गलती है।”

माँ मुस्कुराईं। “तुम भी तो अब बड़ा हो गया है बेटा। देखो, कितनी ताकत आ गई है तुममें।” उन्होंने मेरी बांह पर हाथ फेरा। फिर मेरी छाती पर। “तुम्हारे पापा जब जवान थे तो ऐसे ही थे।”

हमारी बातें चलती रहीं। माँ ने अपनी शादी की पुरानी बातें बताईं। मैं उन्हें गले लगाकर सांत्वना दे रहा था। जब मैंने उन्हें गले लगाया तो उनकी नरम छाती मेरी छाती से सट गई। उनके भारी स्तन मेरे शरीर पर दब रहे थे। मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ था और पैंट में दर्द कर रहा था। माँ ने शायद महसूस कर लिया, लेकिन कुछ नहीं बोलीं।

“राहुल… आज रात इस होटल में हम दोनों पूरी तरह अकेले हैं। कोई नहीं देख रहा।” माँ की आवाज में कुछ अजीब-सी कसक थी।

“माँ… मैं आपको बहुत दिनों से… पसंद करता हूँ।” मैंने हिम्मत करके कहा।

माँ ने मेरी आँखों में देखा। शर्म भी थी, डर भी था, और कुछ और भी। “क्या कहा तुमने बेटा?”

“माँ, जब आप नहाकर इस नाइटी में निकलती हैं तो मेरा कंट्रोल नहीं रहता। आपकी बॉडी… आपके स्तन… आपकी गांड… सब मुझे दीवाना बना देती है।”

माँ शरमा गईं लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। “शरम आती है बेटा… लेकिन सच कहूँ तो मुझे भी तुम्हारी तरफ कुछ महसूस होता है। तुम अपने पापा जैसे लगते हो… जवान, तगड़े।”

मैंने धीरे से माँ को और पास खींच लिया। मेरा एक हाथ उनकी कमर पर था। नाइटी ऊपर सरक गई थी। मेरी उंगलियाँ उनकी नंगी कमर और फिर जांघ पर पहुँच गईं। माँ ने तेज सांस ली।

“बेटा… क्या कर रहे हो?” लेकिन उन्होंने मेरा हाथ नहीं हटाया।

“माँ, आज रात हम दोनों को कुछ नहीं रोक सकता। मैं आपको चोदना चाहता हूँ।”

माँ की आँखें बंद हो गईं। उनकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। “ये गलत है राहुल… लेकिन… आज मैं रुक नहीं पा रही।”

मेरा हाथ अब उनकी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर था। माँ ने अपनी टांग थोड़ी खोल दी। कमरे में सिर्फ हम दोनों की सांसों की आवाज थी। तनाव इतना था कि हवा भी भारी लग रही थी। माँ की आँखों में इच्छा और डर दोनों साफ दिख रहे थे।

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होटल रूम में माँ-बेटे की पहली चुदाई Beta Ne Maa Ko Choda Hotel Mein

मैंने माँ को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरी सख्त छाती से सट गई। माँ की सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने उनके गुलाबी, मुलायम और थोड़े गीले होंठों पर अपना मुंह रख दिया और गहरा, भूखा किस करने लगा। माँ ने पहले तो हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। हम दोनों एक-दूसरे के मुंह में सांस लेते हुए जोर-जोर से चूम रहे थे। किस करते-करते मेरा एक हाथ उनकी पतली लाल नाइटी के अंदर घुस गया।

मैंने उनके भारी-भरे, नरम स्तनों को जोर से निचोड़ा। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। माँ ने किस के बीच में ही “आआह्ह्ह… बेटा… धीरे से…” की लंबी सांस ली। उनकी आँखें आधी बंद हो गई थीं, चेहरा लाल हो रहा था। मैंने निप्पल को उंगली से घुमाया और फिर जोर से दबाया। माँ ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।

“माँ… आज रात तुम मेरी हो,” मैंने उनके कान में फुसफुसाया। माँ ने शरमाते हुए लेकिन भरी हुई आवाज में कहा, “हाँ बेटा… आज रात तुम मेरे पति हो… मुझे अपनी माँ को चोद दो…”

मैंने नाइटी को दोनों हाथों से ऊपर खींचा। माँ ने खुद हाथ ऊपर कर दिए। नाइटी उनके सिर से निकलकर बिस्तर पर गिर गई। अब माँ सिर्फ काली ब्रा और मैचिंग पैंटी में मेरे सामने लेटी थीं। उनके स्तन ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने ब्रा के हुक को पीछे से खोला। एक क्लिक की आवाज हुई और ब्रा ढीली हो गई। मैंने ब्रा को आगे की तरफ खींचकर पूरी तरह उतार दिया।

माँ के नंगे, भारी स्तन बाहर आ गए। गोल-गोल, सफेद, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से निचोड़ा। फिर मुंह नीचे करके दायाँ निप्पल मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। माँ का सिर पीछे की तरफ झुक गया। आँखें पूरी तरह बंद। मुंह खुला। “आआह्ह्ह… बेटा… चूस ले… और जोर से चूस… माँ के स्तन तेरे हैं आज…” उनके शरीर में हल्का सा कंपन आ रहा था। मैंने दूसरे स्तन को भी चूसा, निप्पल को दाँतों से हल्का काटा। माँ ने “उउउफ्फ्फ… बेटा… मर गई…” कहकर मेरे बालों में हाथ फेरा।

मैंने अपनी टी-शर्ट और पैंट भी उतार दी। अब मैं सिर्फ बॉक्सर में था। मेरा मोटा, सख्त लंड बॉक्सर में तम्बू बना रहा था। माँ ने उसे देखा और शरमा गईं, लेकिन उनकी आँखों में भूख साफ थी।

मैंने माँ की काली पैंटी के ऊपर हाथ फेरा। पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालकर उनकी चूत को रगड़ना शुरू किया। “आआह्ह्ह… राहुल… उँगलियाँ मत डाल… सीधा लंड डाल… माँ की चूत फट रही है…” माँ की आवाज काँप रही थी।

मैंने उनकी पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर नीचे की तरफ खींचा। माँ ने कमर उठाकर मदद की। पैंटी उनकी टखनों तक आ गई और फिर मैंने उसे पूरी तरह उतारकर फेंक दिया। अब माँ पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थीं। सफेद, चिकनी चूत, हल्की-हल्की बाल, और चूत के होठों से चमकता हुआ पानी टपक रहा था।

मैंने अपनी बॉक्सर भी उतार दी। मेरा ७ इंच का मोटा लंड बाहर आ गया, सिरा चमक रहा था। माँ ने उसे देखा और होंठ काट लिए। “बेटा… इतना बड़ा… माँ की चूत कैसे ले पाएगी…” “ले लेगी माँ… आज रात ये लंड तेरी चूत का मालिक है,” मैंने कहा।

मैं माँ के ऊपर चढ़ गया। माँ ने अपनी टांगें खोल दीं। मैंने लंड को उनकी गीली चूत पर रगड़ा। सिरा चूत के होठों पर घुमाया। माँ ने कमर ऊपर उठाई। “डाल दे बेटा… अब और मत तड़पा… अपनी माँ को चोद दे…”

मैंने लंड का सिरा चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे दबाया। “आआआह्ह्ह्ह्ह… बेटा… धीरे… उउउफ्फ्फ…” माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं। चेहरा दर्द और मजे के मिश्रण से लाल हो गया। मैंने और जोर लगाया। लंड आधा अंदर चला गया। माँ की चूत बहुत टाइट थी। “माँ… कितनी टाइट है तेरी चूत… आह्ह्ह…” मैंने दाँत पीसते हुए कहा।

धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुस गया। माँ की चूत ने मेरे लंड को पूरी तरह निगल लिया। माँ ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए। “आआह्ह्ह… राहुल… पूरा अंदर… माँ मर गई…” मैंने बाहर निकाला और जोर से एक धक्का मारा। “थाप!” की आवाज कमरे में गूंजी। माँ चिल्ला पड़ीं, “आआआह्ह्ह्ह… बेटा… और जोर से… अपनी माँ की चूत फाड़ दे…”

अब मैं तेजी से चोदने लगा। हर धक्के के साथ माँ के स्तन उछल रहे थे। माँ की आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई। “हाँ बेटा… हाँ… चोद… चोद अपनी माँ को… आआह्ह्ह… माँ तेरी गुलाम हो गई…” मैं उनकी गर्दन पर किस कर रहा था, स्तनों को निचोड़ रहा था, और जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। मेरी गेंदें माँ की गांड से टकरा रही थीं।

माँ ने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लीं और मुझे और अंदर खींचने लगीं। “और गहरा… और गहरा मार बेटा…” मैंने उनकी गांड के नीचे हाथ डालकर उन्हें ऊपर उठाया और और तेज चोदने लगा। कमरा माँ के moans से भर गया – “आह्ह्ह… उउफ्फ्फ… बेटा… माँ को चोद… माँ को चोद… आआआह्ह्ह्ह!”

मैं भी चिल्ला रहा था, “माँ… तेरी चूत मेरे लंड को निगल रही है… कितना मजा आ रहा है… आह्ह्ह माँ!” माँ का चेहरा पसीने से भीग रहा था। बाल बिखरे हुए। स्तन लाल हो गए थे मेरे निचोड़ने से।

मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। माँ का शरीर काँपने लगा। “बेटा… माँ झड़ने वाली है… आआआह्ह्ह्ह… चोद… चोद… आआआह्ह्ह्ह!” माँ का शरीर अकड़ गया। चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ा। माँ चीख पड़ीं orgasm के साथ।

मैं भी रुक न सका। “माँ… मैं भी… आआह्ह्ह… अंदर डाल दूँ?” “हाँ बेटा… माँ के अंदर ही झड़ जा… अपनी माँ को प्रेग्नेंट कर दे आज!” माँ ने आँखें बंद करके कहा।

मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य की धार माँ की चूत में भर गई। माँ ने मुझे और जोर से पकड़ लिया। “आआह्ह्ह… बेटा… कितना गरम… माँ को भर दिया…”

हम दोनों पसीने से लथपथ, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में था। माँ मेरे बाल सहला रही थीं। “राहुल… आज रात जो हुआ वो गलत था… लेकिन… माँ को इतना मजा कभी नहीं आया।” मैंने माँ के स्तन पर सिर रखा और कहा, “माँ… ये रात अभी खत्म नहीं हुई है…”

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माँ की काउगर्ल राइडिंग Beta Ne Maa Ko Choda Hotel Mein

पहली चुदाई के बाद हम दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे से चिपके लेटे थे। मेरा लंड अभी भी माँ की गीली चूत के अंदर आधा अंदर था। माँ मेरे बाल सहला रही थीं और धीरे-धीरे सांस ले रही थीं। लेकिन माँ की आँखों में अभी भी भूख बाकी थी।

अचानक माँ ने मुझे जोर से धक्का देकर पीठ के बल लिटा दिया। “अब माँ चलेगी बेटा…” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

माँ मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनके भारी स्तन मेरे चेहरे के ठीक सामने लटक रहे थे। माँ ने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर मेरा अभी भी सख्त लंड पकड़ लिया। वो थोड़ा सा ऊपर उठीं, मेरे लंड को अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।

“आआआह्ह्ह्ह… बेटा…” माँ की आँखें बंद हो गईं। चेहरा दर्द और मजे से तन गया। मेरे मोटे लंड ने फिर से उनकी टाइट चूत को चीरते हुए अंदर जाना शुरू किया। माँ धीरे-धीरे पूरी तरह नीचे बैठ गईं। मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर गायब हो गया।

“उउउफ्फ्फ… कितना गहरा… माँ की चूत भर गई…” माँ ने सिर पीछे झुकाया। उनके बाल खुले हुए मेरी जांघों पर गिर रहे थे।

माँ ने दोनों हाथ मेरी छाती पर रखे और ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। पहले धीरे-धीरे… फिर रफ्तार बढ़ाते हुए। हर बार जब वो नीचे बैठतीं तो “थाप-थाप” की आवाज कमरे में गूंजती। उनके भारी स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। निप्पल्स सख्त और लाल। माँ की आँखें आधी बंद, मुंह खुला, जीभ कभी-कभी बाहर निकल आती।

“आआह्ह्ह… बेटा… माँ को कितना मजा आ रहा है…” “हाँ माँ… और जोर से… अपनी चूत से मेरे लंड को निचोड़ो…” मैंने उनकी कमर पकड़कर ऊपर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

माँ अब तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी गांड मेरी जांघों पर जोर-जोर से टकरा रही थी। चूत से “पुच-पुच… चप-चप” की गीली आवाजें आ रही थीं। माँ के स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे, मैंने एक स्तन मुंह में लेकर जोर से चूस लिया। माँ चीख पड़ीं, “आआआह्ह्ह्ह… बेटा… चूस… चूस… माँ के स्तन चूसते हुए मुझे चोद…”

माँ की रफ्तार और बढ़ गई। अब वो मेरे लंड पर घुमा-घुमाकर भी बैठ रही थीं। कभी आगे झुककर मेरे होंठ चूम लेतीं, कभी पीछे झुककर अपनी चूत को और खोल देतीं। मैं उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए था और जोर-जोर से ऊपर धक्के लगा रहा था। “माँ… तेरी चूत आज पूरी तरह मेरी हो गई… कितनी गर्म और टाइट है…” माँ ने जवाब दिया, “हाँ बेटा… आज से ये चूत सिर्फ तेरे लंड के लिए है… आआह्ह्ह… और जोर से मार… माँ झड़ने वाली है…”

माँ का शरीर काँपने लगा। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से निचोड़ना शुरू कर दिया। “बेटा… आआआह्ह्ह्ह… माँ झड़ रही है… चोद… चोद… आआआह्ह्ह्ह!” माँ का सिर पीछे की तरफ झुक गया, आँखें बंद, मुंह खुला, और जोर-जोर से चीखते हुए उन्होंने दूसरा ऑर्गेज्म ले लिया। उनकी चूत से गरम पानी की तरह निकल रहा था और मेरे लंड पर बह रहा था।

मैं भी रुक न सका। माँ की चूत के अंदर ही झड़ने लगा। “माँ… आआह्ह्ह… फिर से अंदर डाल रहा हूँ…” मैंने उनकी कमर को जोर से पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के लगाए। मेरा गरम वीर्य फिर से माँ की चूत में भर गया। माँ ने मुझे और जोर से पकड़ लिया।

हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। माँ मेरी छाती पर सिर रखे लेटी थीं। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे नरम हो रहा था। माँ की सांसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं।

“राहुल… आज रात माँ को जन्नत दिखा दी तूने…” माँ ने धीरे से कहा। “माँ… ये रात अभी खत्म नहीं हुई… सुबह तक हम दोनों को और चोदना है,” मैंने उनकी गांड पर हाथ मारते हुए कहा।

माँ शरमा गईं लेकिन मुस्कुरा दीं।

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सुबह 6 बजे माँ की जोरदार मॉर्निंग चुदाई Beta Ne Maa Ko Choda Hotel Mein

पिछली दो चुदाई के बाद हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। माँ मेरी छाती पर सिर रखे नंगी लेटी थीं। मेरा लंड अभी भी उनकी गीली चूत के अंदर था। हमने एक-दूसरे को गले लगाकर आँखें बंद कर लीं। थकान और संतुष्टि के साथ हम दोनों गहरी नींद में चले गए।

रात के 3 बजे के आसपास मैंने आधा खुली आँखों से देखा कि माँ अभी भी मेरे ऊपर लेटी हैं। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। कमरे में सिर्फ एयर कंडीशनर की हल्की आवाज थी।

सुबह 6 बजे… अचानक मुझे कुछ गर्म और गीला महसूस हुआ। मैंने आँखें खोलीं। कमरे में हल्की सुबह की रोशनी आ रही थी। पर्दे के किनारे से सूरज की किरणें माँ के नंगे शरीर पर पड़ रही थीं।

माँ मेरे ऊपर चढ़ी हुई थीं। उनकी एक टांग मेरी जांघ पर थी। उन्होंने मेरे अभी भी सुबह के समय सख्त लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे सहला रही थीं। जब मैंने आँखें खोलीं तो माँ मुस्कुरा रही थीं।

“जाग गए बेटा?” माँ ने धीमी, भरी हुई आवाज में कहा। “माँ… सुबह हो गई…” मैंने नींद भरी आवाज में कहा।

माँ ने मेरे लंड को और जोर से पकड़ लिया। “हाँ बेटा… लेकिन माँ की चूत अभी भी भूखी है। कल रात जितना मजा आया, उतना कभी नहीं आया। अब सुबह भी माँ को चोद दो…”

माँ ने मेरे ऊपर बैठते हुए मेरे लंड को अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठ गईं। “आआह्ह्ह… बेटा…” माँ की आँखें आधी बंद हो गईं। सुबह की रोशनी में उनके नंगे स्तन और चमकदार चूत साफ दिख रहे थे। मेरा लंड फिर से उनकी गर्म चूत में घुस गया।

माँ ने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। इस बार उनकी रफ्तार पहले वाली तरह तेज नहीं थी, बल्कि धीमी और गहरी थी। हर बार जब वो नीचे बैठतीं तो पूरा लंड अंदर चला जाता और माँ “उउउफ्फ्फ… बेटा…” की आवाज निकालतीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ ली और ऊपर से धक्के लगाने लगा। “माँ… सुबह-सुबह इतनी जोर से… होटल वाले सुन लेंगे…” माँ ने मेरे होंठों पर उंगली रखी, “चुप… आज सुबह माँ को चोदने दो… आआह्ह्ह…”

माँ की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी। उनके स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से निचोड़ा। माँ ने सिर पीछे झुकाया। उनकी आँखें बंद, होंठ काटे हुए, चेहरा सुबह की रोशनी में चमक रहा था।

“बेटा… तेरे लंड से माँ की चूत आज भी फट रही है… आआह्ह्ह… और जोर से मार…” मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से ऊपर खींचा और नीचे धक्के लगाए। “माँ… तेरी चूत सुबह भी उतनी ही टाइट और गर्म है… आह्ह्ह…”

माँ अब तेजी से मेरे लंड पर राइड कर रही थीं। उनके स्तन उछल-उछल कर मेरे चेहरे पर लग रहे थे। माँ की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। “बेटा… माँ फिर से झड़ने वाली है… चोद… चोद अपनी माँ को… आआआह्ह्ह्ह!”

मैंने भी रफ्तार बढ़ा दी। माँ का शरीर काँपने लगा। उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रखे और जोर-जोर से चीखते हुए तीसरा ऑर्गेज्म ले लिया। “आआआह्ह्ह्ह… बेटा… माँ मर गई… चोद… चोद…”

मैं भी रुक न सका। माँ की चूत के अंदर ही सुबह का दूसरा वीर्य भर दिया। “माँ… आआह्ह्ह… फिर से अंदर…” माँ ने मुझे और जोर से पकड़ लिया। “हाँ बेटा… माँ के अंदर ही निकाल… माँ तेरी हो गई…”

हम दोनों फिर से पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे पर गिर पड़े। माँ मेरी छाती पर सिर रखे लेटी रहीं। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में था।

माँ ने धीरे से कहा, “राहुल… ये रात और सुबह… माँ कभी नहीं भूलेगी। लेकिन अब हमें तैयार होना चाहिए… चेकआउट का समय हो रहा है…”

मैंने माँ की गांड पर हाथ मारते हुए कहा, “माँ… एक बार और… बस एक बार और…”

माँ ने मुस्कुराते हुए मेरे होंठ चूम लिए।

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