कार में टीचर ने 20 साल की स्टूडेंट की सील तोड़ी | teacher student car sex story

कार में टीचर ने 20 साल की स्टूडेंट की सील तोड़ी

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मैं 35 साल का कॉलेज प्रोफेसर हूं। नाम अर्जुन मल्होत्रा। मेरी क्लास में स्नेहा नाम की लड़की पढ़ती है। उम्र 20 साल। दूसरी साल की स्टूडेंट।

स्नेहा बहुत खूबसूरत है — गोरी, लंबी, बड़ी आंखें और शरीर कमाल का। वो हमेशा क्लास में फर्स्ट बेंच पर बैठती और मुझे घूरती रहती। मैं भी उसे घूरता। कई बार जब वो झुकती तो उसकी छाती का नजारा दिल को छू लेता।

एक दिन क्लास खत्म होने के बाद तेज बारिश शुरू हो गई। सब स्टूडेंट्स निकल गए। स्नेहा अकेली खड़ी थी, भीग रही थी।

मैं अपनी कार में बैठा हुआ था। मैंने गाड़ी उसके पास रोकी।

“स्नेहा, अंदर बैठ जा। मैं ड्रॉप कर दूंगा।”

वो घबराते हुए अंदर बैठ गई। गाड़ी में सिर्फ हम दोनों थे। बारिश बहुत तेज हो रही थी।

“सर… शुक्रिया।” उसने कहा।

मैंने गाड़ी स्टार्ट की। “घर जाऊं या पहले कहीं रुकें? बारिश बहुत तेज है।”

स्नेहा ने मेरी तरफ देखा। “सर… जहां आप कहें।”

मैंने गाड़ी कॉलेज के पीछे वाली खाली सड़क पर ले गया। बारिश की वजह से आसपास कोई नहीं था। गाड़ी रोक दी।

कुछ देर चुप्पी रही। फिर स्नेहा ने धीरे से कहा — “सर… आप मुझे क्लास में क्यों घूरते रहते हो?”

मैंने सीधा जवाब दिया — “क्योंकि तू बहुत खूबसूरत है। और तू भी मुझे घूरती है।”

वो शरमा गई। “सर… मैं… मैं सोचती रहती हूं कि अगर आप मुझे छू लें तो कैसा लगेगा।”

मैंने गाड़ी की सीट पीछे की तरफ झुकाई और उसकी तरफ मुड़ा। “स्नेहा, तू जानती है ना कि ये कितना गलत है? मैं तेरा टीचर हूं।”

उसने मेरे हाथ पर हाथ रखा। “सर… मुझे पता है। लेकिन मैं 20 साल की हूं। और… और मैं अभी तक कुंवारी हूं।”

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

“स्नेहा… तू क्या बोल रही है?”

उसने मेरी आंखों में देखा। “सर… मैं चाहती हूं कि आप मेरी सील तोड़ो। आज। इस कार में।”

बारिश की आवाज के अलावा गाड़ी में सिर्फ हम दोनों की सांसें थीं। स्नेहा मेरी तरफ देख रही थी — डर, शर्म और लालसा का मिश्रण उसके चेहरे पर था।

मैंने गाड़ी का एसी बंद कर दिया। अब अंदर सिर्फ हम दोनों की गर्म सांसें थीं।

“अगर मैं मान जाऊं तो… तू चुप रहेगी?” मैंने पूछा।

उसने सिर हिलाया। “हां सर… कोई नहीं जानेगा। बस… आप मुझे चोदो। इस कार में।”

अब सस्पेंस चरम पर था। बारिश में खड़ी कार। अंदर सिर्फ हम दोनों। 20 साल की वर्जिन स्टूडेंट स्नेहा ने खुद कहा था कि वह चाहती है कि मैं उसकी सील इस कार में तोड़ूं।

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कार की पिछली सीट पर चुदाई

बारिश बहुत तेज हो रही थी। गाड़ी के शीशे धुंधले हो चुके थे। मैंने स्नेहा को आगे की सीट से पीछे की सीट पर खींच लिया।

पीछे की सीट पर:

मैं भी पीछे आ गया। स्नेहा बिस्तर की तरह लेट गई। गाड़ी थोड़ी तंग थी, लेकिन जगह काफी थी।

मैंने उसके कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए।

एक-एक करके बटन खोले — पहला, दूसरा, तीसरा… सब खुल गए। मैंने कुर्ता उसके कंधों से उतारा और सीट के नीचे फेंक दिया।

अब स्नेहा ऊपर से सिर्फ ब्रा में थी।

मैंने उसके पीछे हाथ डाला, ब्रा का हुक खोला और एक झटके में हुक खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई। मैंने स्ट्रैप्स उतारे और ब्रा को सीट के ऊपर फेंक दिया।

स्नेहा की गोरी छातियां सामने आ गईं। निप्पल्स डर से सिकुड़े हुए थे।

“सर… यहां? कार में?” स्नेहा ने डरते हुए कहा।

मैंने उसके लेगिंग का इलास्टिक पकड़ा और नीचे खिसका दिया। लेगिंग उसके पैरों तक आ गई। स्नेहा ने पैर उठाए और लेगिंग निकाल दी। अब सिर्फ पैंटी बची थी।

मैंने पैंटी के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे उतारा। पैंटी उसकी जांघों से सरकती हुई निकल गई। स्नेहा ने पैर उठाए और पैंटी सीट के नीचे गिरा दी।

अब स्नेहा पूरी तरह नंगी कार की पिछली सीट पर लेटी थी। उसकी चूत बिल्कुल सील पैक थी।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। गाड़ी में जगह कम थी, इसलिए मैं उसके ऊपर चढ़ गया।

मैंने उसकी एक टांग उठाई और अपने कंधे पर रख दी। अब उसकी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुल गई थी।

उसकी आंखें डर से फटी हुई थीं। मुंह खुला हुआ। शरीर कांप रहा था।

“सर… दर्द होगा ना? …पहली बार है…”

मैंने लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।

पहला धक्का — आधा लंड अंदर गया। स्नेहा चीख पड़ी — “आह्ह्ह सर!!! दर्द हो रहा है!!!”

दूसरा जोरदार धक्का — पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी सील टूट गई। थोड़ा सा खून निकला।

उसका चेहरा दर्द से बिगड़ गया था। आंखें बंद, मुंह खुला, आंसू आ गए। दोनों हाथ मेरे कंधों को पकड़े हुए थे।

“सर… आह्ह… फट गई… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने चोदना शुरू कर दिया। गाड़ी में जगह कम थी, इसलिए धक्के छोटे लेकिन बहुत गहरे और तेज थे। ठप ठप ठप की आवाज कार के अंदर गूंज रही थी। बारिश की आवाज के साथ मिलकर और भी तेज लग रही थी।

मैं उसके ऊपर झुका हुआ था। दांत भींचे हुए। आंखें उसकी उछलती छातियों और दर्द भरे चेहरे पर टिकी हुई थीं।

“ले ले स्नेहा… तेरी सील तोड़ दी… कार में तेरी कुंवारी चूत फाड़ दी… ले… ले मेरा लंड…”

दर्द के साथ अब हल्का सा सुख भी आने लगा था। वो बार-बार moans कर रही थी — “आह्ह सर… दर्द… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है… आह्ह… सर… और जोर से… चोदो मुझे…”

गाड़ी के शीशे पूरी तरह धुंधले हो चुके थे। बाहर बारिश हो रही थी और अंदर मैं स्नेहा को जोर-जोर से चोद रहा था।

8-9 मिनट तक चोदने के बाद स्नेहा का शरीर ऐंठ गया।

“सर… आ रहा है… आहhhhh सर!!!”

उसकी चूत ने पानी छोड़ा। मैं भी रुक नहीं पाया और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।

वो कार की सीट पर लेटी हुई, सांसें बहुत तेज, शरीर कांप रहा था। चेहरे पर दर्द और थकान थी, लेकिन मुंह पर हल्की सी मुस्कान भी आ गई थी।

“सर… आपने मुझे कार में चोद दिया… मेरी सील तोड़ दी…”

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कार में लंड मुंह से साफ करवाया

पहली बार चोदने के बाद मेरा लंड अभी भी स्नेहा की चूत में था। मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा गर्म माल और थोड़ा खून बह रहा था। लंड पूरा गीला, चमकदार और चिपचिपा हो गया था।

मैंने स्नेहा के बाल पकड़े और उसे पीछे की सीट पर घुटनों के बल बिठा दिया।

“घुटनों पर बैठ जा।”

वो अभी भी सांस ले रही थी। आंखें डर और शर्म से भरी हुई थीं। लेकिन उसने बिना कुछ बोले घुटनों के बल बैठ गई। अब वो मेरे सामने घुटनों पर थी, कार की पिछली सीट पर।

मैंने अपना गीला लंड उसके होंठों के पास ले जाकर सख्ती से कहा — “अब मुंह खोल। लंड साफ कर। अपना माल और अपनी चूत का रस सब चाट के साफ कर।”

उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। आंखें नीचे झुकी हुई थीं। लेकिन उसने मुंह खोल दिया।

मैंने लंड उसके मुंह में डाल दिया।

स्नेहा ने पहले तो सिर्फ सिरा चूसा। मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे से आगे की तरफ धकेला। लंड उसके मुंह में और अंदर चला गया।

“ग्लक… ग्लक…” की आवाज कार के अंदर गूंज रही थी।

स्नेहा ने जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे लंड पर लगे अपने रस और मेरे माल को चाट-चाट के साफ कर रही थी। उसकी जीभ लंड के नीचे से ऊपर तक घूम रही थी।

मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। गाड़ी में जगह कम थी, इसलिए उसके सिर को ज्यादा नहीं हिला पा रहा था।

उसकी आंखें पानी से भर गई थीं। गाल फूल गए थे। वो कभी-कभी घुट-घुट कर खांस रही थी, लेकिन फिर भी चूस रही थी। उसके चेहरे पर साफ शर्म और अपमान का भाव था। आंखें कभी-कभी ऊपर मेरी तरफ उठतीं, फिर नीचे झुक जातीं।

मैंने उसके बाल और जोर से पकड़े और थोड़ा तेजी से उसके मुंह में चोदना शुरू कर दिया।

“अच्छे से चूस स्नेहा… तेरे टीचर का लंड साफ कर… जो कुछ भी लगा है, सब मुंह में ले… ये तेरी सजा है…”

मैं नीचे देख रहा था। उसका छोटा मुंह मेरे मोटे लंड को चूस रहा था। उसके फूले हुए गाल, पानी भरी आंखें और मेरे लंड पर लगी चिपचिपाहट… ये सब देखकर मेरा लंड और सख्त हो रहा था।

“आंखें उठा के देख मुझे… अच्छे से चूस… तेरी चूत का स्वाद अब तेरे मुंह में है…”

5-6 मिनट तक स्नेहा ने मेरे लंड को चूसा। उसने जीभ से अच्छे से साफ कर दिया। आखिर में मैंने लंड उसके मुंह से बाहर निकाला।

स्नेहा ने खांसते हुए थूक दिया। उसके होंठ, ठोड़ी और गाल गीले हो गए थे।

वो घुटनों पर बैठी हुई, सांसें तेज, आंखें नीचे झुकी हुई। चेहरा पूरी तरह लाल। शर्म से वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। बस सिर झुकाए बैठी रही।

मैंने उसके बाल सहलाए और कहा — “अच्छा किया। अब कपड़े पहन ले।”

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कार में डॉगी स्टाइल

स्नेहा अभी भी घुटनों पर बैठी हुई थी। मैंने उसे फिर से पीछे की सीट पर लिटा दिया। अब वो मुंह के बल लेट गई। मैंने उसके कूल्हे उठाए और उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया। उसकी मोटी गांड मेरी तरफ थी।

गाड़ी में जगह कम थी, लेकिन काफी थी।

वो शरमा रही थी। उसने सिर सीट में दबा लिया।

मैं उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया।

स्नेहा चीख पड़ी — “आह्ह्ह सर!!! आह्ह… बहुत गहरा!!!”

मैंने रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया। ठप ठप ठप की तेज आवाज कार के अंदर गूंज रही थी। हर धक्के के साथ उसकी गांड लहरा रही थी और मेरे शरीर से टकरा रही थी।

मैंने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचे। उसका सिर ऊपर उठ गया। अब वो सीधा आगे देख रही थी।

उसका चेहरा दर्द और सुख के मिश्रण से बिगड़ गया था। मुंह खुला हुआ, आंखें आधी बंद। वो बार-बार चीख रही थी — “आह्ह सर… जोर से… आह्ह… मेरी गांड हिल रही है… और जोर से मारो सर…” “आह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन… चोदो मुझे… मैं आपकी रंडी हूं…”

मैंने उसकी एक गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। थप की आवाज कार में गूंजी और लाल निशान पड़ गया। स्नेहा ने और जोर से moan किया।

मैं और तेज हो गया। उसके बाल खींचे, कमर पकड़ी और जैसे पागल होकर चोद रहा था। उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी।

मैं पसीने से तर हो चुका था। दांत भींचे हुए, आंखें उसकी गांड और चूत पर टिकी हुई थीं। भारी-भारी सांसें ले रहा था।

“ले ले मेरी चुदक्कड़ रंडी… तेरी चूत आज फट जाएगी… देख ले कितना मोटा लंड ले रही है तू… तेरी गांड कितनी मोटी है…”

8-9 मिनट तक लगातार रफ डॉगी स्टाइल चोदने के बाद स्नेहा का शरीर फिर से ऐंठ गया।

“सर… फिर आ रहा है… आहhhhh सर!!!”

उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। पूरा लंड और मेरी जांघें गीली हो गईं। स्नेहा का चेहरा पूरी तरह बिगड़ गया था — आंखें पीछे की तरफ घूम गईं, मुंह खुला रहा, शरीर थर-थर कांप रहा था।

मैं भी रुक नहीं पाया। आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।

वो सीट पर सिर रखकर लेट गई। सांसें बहुत तेज। शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी।

मैंने लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा माल बह रहा था।

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