बॉस ने हॉट सेक्रेटरी को ऑफिस केबिन में चोदा | boss secretary sex story

बॉस ने हॉट सेक्रेटरी को ऑफिस केबिन में चोदा

boss secretary sex story

मैं 38 साल का कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर हूं। नाम राहुल मेहरा। मेरी सेक्रेटरी का नाम अंजलि है। उम्र 25 साल। बहुत हॉट और खूबसूरत। गोरी चमड़ी, लंबे बाल, बड़ी आंखें और शरीर ऐसा कि ऑफिस में सबकी नजरें उस पर रहतीं। वो हमेशा टाइट ब्लाउज और पेंसिल स्कर्ट पहनती, जिससे उसकी कमर और गांड का शेप साफ दिखता।

शुरू में सब नॉर्मल था। लेकिन धीरे-धीरे अंजलि की तरफ मेरा आकर्षण बढ़ने लगा। वो भी मुझे घूरती रहती। कई बार जब वो मेरे केबिन में फाइलें लाती तो जानबूझकर मेरे बहुत करीब आ जाती। उसकी खुशबू और उसकी छाती का नजारा मुझे पागल कर देता।

एक दिन शाम के 7 बजे ऑफिस में सिर्फ हम दोनों बचे थे। बाकी सब चले गए थे। अंजलि मेरे केबिन में फाइलें लेकर आई।

“सर, ये साइन करने हैं।” उसने कहा।

मैंने फाइलें लीं। कुछ साइन करते हुए मैंने सीधा सवाल किया — “अंजलि, तू मुझे इतना क्यों घूरती रहती है?”

वो शरमा गई। “सर… आप बहुत हैंडसम हो। और… और आपकी पर्सनैलिटी बहुत आकर्षक है।”

मैंने कुर्सी छोड़ी और उसके पास खड़ा हो गया। “अंजलि, तू जानती है ना कि बॉस और सेक्रेटरी के बीच ये सब गलत है?”

उसने मेरी आंखों में देखा। “सर… मुझे पता है। लेकिन मैं… मैं आपको चाहती हूं। बहुत दिनों से।”

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

“अंजलि… तू क्या बोल रही है?”

उसने आगे बढ़कर मेरे हाथ पर हाथ रखा। “सर… मैं 25 साल की हूं। और… और मैं आपको पसंद करती हूं। अगर आप चाहें तो… मैं कुछ भी कर सकती हूं।”

मैंने केबिन का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। “अगर मैं शुरू कर दूं तो फिर रुकूंगा नहीं।”

अंजलि ने सिर हिलाया। “हां सर… मैं तैयार हूं। कोई नहीं आएगा।”

अब सस्पेंस चरम पर था। ऑफिस का केबिन। बाहर सब चले गए थे। अंदर सिर्फ हम दोनों। मेरी हॉट सेक्रेटरी अंजलि ने खुद कहा था कि वह चाहती है कि मैं उसे चोदूं — मेरे ऑफिस केबिन में।

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ऑफिस टेबल पर चुदाई

केबिन का दरवाजा बंद था। बाहर सब चले गए थे। सिर्फ हम दोनों थे।

मैंने अंजलि को अपनी बड़ी ऑफिस टेबल पर लिटा दिया।

मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खोले — पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा… सब खुल गए। मैंने ब्लाउज उसके कंधों से उतारा और टेबल के नीचे फेंक दिया।

अब अंजलि ऊपर से सिर्फ ब्रा में थी।

मैंने उसके पीछे हाथ डाला, ब्रा का हुक खोला और एक झटके में हुक खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई। मैंने स्ट्रैप्स उतारे और ब्रा को टेबल के ऊपर फेंक दिया।

अंजलि की गोरी, भारी छातियां सामने आ गईं। निप्पल्स पहले से ही खड़े हो चुके थे।

“सर… कोई आ गया तो?” अंजलि ने डरते हुए कहा।

मैंने उसके स्कर्ट का जिप खोला और स्कर्ट को नीचे खिसका दिया। स्कर्ट उसके पैरों तक आ गई। अंजलि ने पैर उठाए और स्कर्ट टेबल के नीचे गिरा दी। अब सिर्फ पैंटी बची थी।

मैंने पैंटी के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे उतारा। पैंटी उसकी जांघों से सरकती हुई निकल गई। अंजलि ने पैर उठाए और पैंटी टेबल के नीचे गिरा दी।

अब अंजलि पूरी तरह नंगी ऑफिस की टेबल पर लेटी थी। उसकी चूत साफ और गीली हो चुकी थी।

मैंने भी अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

मैं टेबल पर चढ़ गया और उसके बीच में आ गया। उसकी एक टांग उठाई और अपने कंधे पर रख दी। अब उसकी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुल गई थी।

उसकी आंखें डर और लालसा से भरी हुई थीं। मुंह खुला हुआ। शरीर थोड़ा कांप रहा था।

“सर… जल्दी कीजिए… कोई आ सकता है…”

मैंने लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।

पहला धक्का — आधा लंड अंदर गया। अंजलि चीख पड़ी — “आह्ह्ह सर!!! आह्ह…”

दूसरा जोरदार धक्का — पूरा लंड अंदर घुस गया।

उसका चेहरा सुख और थोड़े दर्द से बिगड़ गया था। आंखें बंद, मुंह खुला। दोनों हाथ टेबल को पकड़े हुए थे।

“आह्ह सर… इतना मोटा… आह्ह…”

मैंने रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया। ठप ठप ठप की तेज आवाज ऑफिस केबिन में गूंज रही थी। हर धक्के में अंजलि की छातियां उछल रही थीं। मैं एक हाथ से उसकी उठी हुई टांग पकड़े हुए था, दूसरा हाथ उसकी कमर पर था।

मैं उसके ऊपर झुका हुआ था। दांत भींचे हुए। आंखें उसकी उछलती छातियों और चेहरे पर टिकी हुई थीं।

“ले ले अंजलि… ऑफिस में तेरी चूत फाड़ रहा हूं… ले… ले मेरा लंड… आज से तू मेरी ऑफिस वाली रंडी है…”

वो बार-बार moans कर रही थी — “आह्ह सर… जोर से… आह्ह… कोई आ गया तो… आह्ह… लेकिन… और जोर से चोदो सर…”

मैंने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचे। उसका सिर ऊपर उठ गया। अब वो सीधा मेरी तरफ देख रही थी।

10 मिनट तक जोर-जोर से चोदने के बाद अंजलि का शरीर ऐंठ गया।

“सर… आ रहा है… आहhhhh सर!!!”

उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। मैं भी रुक नहीं पाया और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।

वो टेबल पर लेटी हुई, सांसें बहुत तेज, शरीर कांप रहा था। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी।

“सर… आपने मुझे ऑफिस में चोद दिया…”

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ऑफिस में मुंह से साफ करवाया

टेबल पर चोदाई के बाद मेरा लंड अभी भी अंजलि की चूत में था। मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा गर्म माल बह रहा था। लंड पूरा गीला, चमकदार और चिपचिपा हो गया था।

मैंने अंजलि के बाल पकड़े और उसे टेबल से नीचे खींच लिया।

“घुटनों पर बैठ जा।”

वो थकी हुई थी लेकिन मना नहीं कर रही थी। वो धीरे-धीरे घुटनों के बल बैठ गई। अब वो मेरे सामने घुटनों पर थी, ऑफिस केबिन में।

मैंने अपना गीला लंड उसके होंठों के पास ले जाकर सख्ती से कहा — “अब मुंह खोल। लंड साफ कर। अपना माल और अपनी चूत का रस सब चाट के साफ कर।”

उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। आंखें नीचे झुकी हुई थीं। लेकिन उसने मुंह खोल दिया।

मैंने लंड उसके मुंह में डाल दिया।

अंजलि ने पहले तो सिर्फ सिरा चूसा। मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे से आगे की तरफ धकेला। लंड उसके मुंह में और अंदर चला गया।

“ग्लक… ग्लक…” की आवाज ऑफिस केबिन में गूंज रही थी।

अंजलि ने जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे लंड पर लगे अपने रस और मेरे माल को चाट-चाट के साफ कर रही थी। उसकी जीभ लंड के नीचे से ऊपर तक घूम रही थी।

मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।

उसकी आंखें पानी से भर गई थीं। गाल फूल गए थे। वो कभी-कभी घुट-घुट कर खांस रही थी, लेकिन फिर भी चूस रही थी। उसके चेहरे पर साफ शर्म और अपमान का भाव था। आंखें कभी-कभी ऊपर मेरी तरफ उठतीं, फिर नीचे झुक जातीं।

मैंने उसके बाल और जोर से पकड़े और थोड़ा तेजी से उसके मुंह में चोदना शुरू कर दिया।

“अच्छे से चूस अंजलि… तेरे बॉस का लंड साफ कर… जो कुछ भी लगा है, सब मुंह में ले… ये तेरी सजा है…”

मैं नीचे देख रहा था। उसका छोटा मुंह मेरे मोटे लंड को चूस रहा था। उसके फूले हुए गाल, पानी भरी आंखें और मेरे लंड पर लगी चिपचिपाहट… ये सब देखकर मेरा लंड और सख्त हो रहा था।

“आंखें उठा के देख मुझे… अच्छे से चूस… तेरी चूत का स्वाद अब तेरे मुंह में है…”

5-6 मिनट तक अंजलि ने मेरे लंड को चूसा। उसने जीभ से अच्छे से साफ कर दिया। आखिर में मैंने लंड उसके मुंह से बाहर निकाला।

अंजलि ने खांसते हुए थूक दिया। उसके होंठ, ठोड़ी और गाल गीले हो गए थे।

वो घुटनों पर बैठी हुई, सांसें तेज, आंखें नीचे झुकी हुई। चेहरा पूरी तरह लाल। शर्म से वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। बस सिर झुकाए बैठी रही।

मैंने उसके बाल सहलाए और कहा — “अच्छा किया। अब उठ।”

ऑफिस टेबल पर डॉगी स्टाइल

अंजलि अभी भी घुटनों पर बैठी हुई थी। मैंने उसे उठाया और ऑफिस टेबल पर लिटा दिया। अब वो मुंह के बल लेट गई। मैंने उसके कूल्हे उठाए और उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया। उसकी मोटी गांड मेरी तरफ थी।

वो शरमा रही थी। उसने सिर टेबल में दबा लिया।

मैं उसके पीछे खड़ा हो गया। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया।

अंजलि चीख पड़ी — “आह्ह्ह सर!!! आह्ह… बहुत गहरा!!!”

मैंने रफ तरीके से चोदना शुरू कर दिया। ठप ठप ठप की तेज आवाज ऑफिस केबिन में गूंज रही थी। हर धक्के के साथ उसकी गांड लहरा रही थी और मेरे शरीर से टकरा रही थी।

मैंने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचे। उसका सिर ऊपर उठ गया। अब वो सीधा आगे देख रही थी।

उसका चेहरा दर्द और सुख के मिश्रण से बिगड़ गया था। मुंह खुला हुआ, आंखें आधी बंद। वो बार-बार चीख रही थी — “आह्ह सर… जोर से… आह्ह… मेरी गांड हिल रही है… और जोर से मारो सर…” “आह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन… चोदो मुझे… मैं आपकी ऑफिस वाली रंडी हूं…”

मैंने उसकी एक गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। थप की आवाज केबिन में गूंजी और लाल निशान पड़ गया। अंजलि ने और जोर से moan किया।

मैं और तेज हो गया। उसके बाल खींचे, कमर पकड़ी और जैसे पागल होकर चोद रहा था। उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी।

मैं पसीने से तर हो चुका था। दांत भींचे हुए, आंखें उसकी गांड और चूत पर टिकी हुई थीं। भारी-भारी सांसें ले रहा था।

“ले ले मेरी ऑफिस वाली रंडी… तेरी चूत आज फट जाएगी… देख ले कितना मोटा लंड ले रही है तू… तेरी गांड कितनी मोटी है…”

8-9 मिनट तक लगातार रफ डॉगी स्टाइल चोदने के बाद अंजलि का शरीर फिर से ऐंठ गया।

“सर… फिर आ रहा है… आहhhhh सर!!!”

उसकी चूत ने जोर से पानी छोड़ा। पूरा लंड और मेरी जांघें गीली हो गईं। अंजलि का चेहरा पूरी तरह बिगड़ गया था — आंखें पीछे की तरफ घूम गईं, मुंह खुला रहा, शरीर थर-थर कांप रहा था।

मैं भी रुक नहीं पाया। आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे और अंदर ही झड़ गया। गर्म माल उसकी चूत में भर दिया।

वो टेबल पर सिर रखकर लेट गई। सांसें बहुत तेज। शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थी।

मैंने लंड बाहर निकाला। उसकी चूत से मेरा माल बह रहा था।

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