32 साल की आंटी ने 21 साल के कॉलेज स्टूडेंट से जमकर चुदवाया | aunty student sex story

32 साल की आंटी ने 21 साल के कॉलेज स्टूडेंट से जमकर चुदवाया

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मैं राहुल, 21 साल का कॉलेज स्टूडेंट। इंजीनियरिंग की तीसरी साल पढ़ रहा था। शहर में पढ़ाई के लिए आया था तो एक छोटे से दो मंजिला घर में PG का कमरा ले लिया। घर की मालकिन थीं सीमा आंटी — उम्र 32 साल, गोरी चमड़ी, काले घने बाल, भरी-भरी काया। उनके स्तन बड़े और भारी थे, कमर पतली और गांड इतनी मोटी और आकर्षक कि चलते वक्त हिलती रहती थी। उनके पति राजेश अंकल बिजनेस के सिलसिले में ज्यादातर महीने भर बाहर रहते थे। घर में सिर्फ आंटी अकेली रहती थीं।

शुरुआत में सब सामान्य लगा। लेकिन धीरे-धीरे आंटी की तरफ मेरा ध्यान जाने लगा। रोज सुबह जब वे पतली नाइटी पहनकर घूमतीं, तो उनके स्तनों के निप्पल हल्के से उभरते दिखते। शाम को जब साड़ी पहनकर आतीं, तो ब्लाउज की टाइट फिटिंग में उनकी छाती का पूरा आकार नजर आता। मैं चुपके से उन्हें देखता और रात को अकेले लेटकर उनके बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करता। कई बार खिड़की से झांकता, उन्हें नहाते हुए या कपड़े बदलते देखने की कोशिश करता, लेकिन पकड़े जाने का डर भी रहता।

सस्पेंस की असली शुरुआत उस शाम हुई जब बारिश बहुत तेज हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा इलाका अंधेरा था। मैं अपने कमरे में मोमबत्ती जलाकर किताब पढ़ रहा था। अचानक दरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई। मैंने खोला तो सामने सीमा आंटी खड़ी थीं।

वे एक बहुत पतली, हल्की नीली नाइटी पहने हुए थीं। बारिश में थोड़ी भीग गई थी, इसलिए नाइटी उनके शरीर से चिपक गई थी। अंदर ब्रा नहीं थी — उनके बड़े स्तनों के गोल आकार और खड़े निप्पल साफ नजर आ रहे थे। नाइटी घुटनों से ऊपर तक थी, जांघें भी थोड़ी दिख रही थीं।

“राहुल बेटा, बिजली चली गई है ना? अकेले अंधेरे में मत बैठो। आओ मेरे साथ लिविंग रूम में चाय पी लो।” आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी आवाज में एक अजीब सी गर्माहट और नमी थी।

मैं हिचकिचाते हुए उनके पीछे हो लिया। लिविंग रूम में दो-तीन मोमबत्तियां जल रही थीं। माहौल रोमांचक और थोड़ा डरावना भी लग रहा था। आंटी ने मुझे सोफे पर बैठाया और खुद चाय लेकर आईं। जब वे झुककर मेरे सामने चाय का कप रख रही थीं, तो नाइटी का गला खुल गया और उनके दोनों स्तन पूरी तरह मेरे सामने आ गए — गोरे, भारी, निप्पल गुलाबी और खड़े हुए। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने जल्दी से एक कुशन लेकर अपनी गोद पर रख लिया।

आंटी मेरे बगल में बैठ गईं। उनकी नंगी जांघ मेरी जांघ से छू गई। गर्माहट सी फैल गई।

“राहुल, तुम इतने शांत क्यों हो आज? कुछ परेशानी है?” आंटी ने पूछा और अपनी उंगलियां मेरे हाथ पर घुमाने लगीं।

“नहीं आंटी… बस पढ़ाई का स्ट्रेस…” मैंने झूठ बोला, लेकिन मेरी आवाज कांप रही थी।

आंटी हंस पड़ीं। “झूठ मत बोलो बेटा। मैं जानती हूं तुम क्या सोचते हो। रोज मुझे घूरते रहते हो। जब मैं नाइटी पहनकर घूमती हूं तो तुम्हारी नजरें मेरे स्तनों पर अटक जाती हैं।”

मैं शर्मा गया, सर झुका लिया। “आंटी… वो… मैं…”

“कोई बात नहीं राहुल। तुम्हारी उम्र है, हॉर्मोन चलते हैं। मैं भी तो 32 साल की औरत हूं। पति महीने भर से बाहर हैं। रातें बहुत लंबी और सूनी लगती हैं।” आंटी ने कहा और धीरे से मेरे कंधे पर हाथ रखा।

फिर बातें और गहरी हुईं।

आंटी: “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” मैं: “नहीं आंटी…” आंटी: “अरे वाह! इतने हैंडसम, जवान लड़के की कोई गर्लफ्रेंड नहीं? शायद तुम्हें कोई समझदार औरत चाहिए जो तुम्हें प्यार दे, तुम्हारी प्यास बुझाए।” मैं: “आंटी… ये सब…” आंटी: “डरो मत। यहां कोई नहीं है। सिर्फ तुम और मैं।”

उन्होंने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ाने लगीं। मेरे लंड का उभार अब साफ दिख रहा था। आंटी ने उसे देख लिया।

“ओह… ये क्या हो रहा है राहुल? मेरी वजह से?” उन्होंने सीधे मेरे उभार पर हाथ रख दिया और हल्के से दबाया।

मैं चौंक गया। “आंटी… ये गलत है… अगर अंकल को पता चला…” आंटी: “अंकल को क्या पता चलेगा? वे तो महीनों बाहर रहते हैं। और ये गलत नहीं है। दोनों अकेले हैं, दोनों को जरूरत है।”

उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा, “आज रात हम दोनों अपनी प्यास बुझा सकते हैं… अगर तुम चाहो तो।”

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर भी था, लेकिन एक्साइटमेंट उससे ज्यादा था। आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी बेडरूम की तरफ ले गईं। बेडरूम में सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी। अंधेरा, गर्म और सनसनी भरा माहौल था। आंटी ने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया।

वे मेरी तरफ मुड़ीं। उनकी सांसें तेज थीं। नाइटी अभी भी उनके शरीर से चिपकी हुई थी।

“राहुल… आज से तुम मेरे नहीं हो। मैं तुम्हारी हूं।” आंटी ने कहा और मेरे गाल पर हाथ फेरा।

मैं उनके बहुत करीब आ गया। उनकी सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उन्होंने मुझे गले लगा लिया। मेरी छाती उनके नरम, भारी स्तनों से दब गई। मैंने भी उन्हें कसकर पकड़ लिया। उनकी गांड पर मेरे हाथ चले गए।

आंटी ने मेरे कान में फुसफुसाया, “अब डर मत… बस महसूस करो।”

वे धीरे-धीरे अपने होंठ मेरे होंठों की तरफ ले गईं। हमारी सांसें मिल रही थीं। लंड पूरी तरह खड़ा होकर पैंट में तड़प रहा था। आंटी की जांघ मेरे लंड से रगड़ खा रही थी।

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सीमा आंटी को चोदा

हमारे होंठ मिलते ही आंटी ने जोर से मुझे चूमा। उनकी गर्म, नरम जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मेरी जीभ से लड़ने लगी। हम दोनों सांस फूलते हुए, जोर-जोर से चूम रहे थे। आंटी की सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उनकी नाइटी अभी भी उनके शरीर से चिपकी हुई थी, लेकिन अब कुछ नहीं रुकने वाला था।

आंटी ने अचानक मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया। “अब चुपचाप लेट जाओ राहुल… आज रात मैं तुम्हें वो सब दूंगी जो तुम सालों से सोचते हो।” उनकी आवाज में लालच और हुकूमत दोनों थी।

उन्होंने पहले मेरी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले। शर्ट उतारते ही मेरी छाती नंगी हो गई। आंटी ने मेरी छाती पर हाथ फेरा, निप्पल्स को उंगली से दबाया और मुस्कुराई। फिर मेरी अंडरशर्ट को ऊपर खींचकर उतार दिया।

अब मेरी पैंट की बारी थी। आंटी ने बटन खोला, जिप खींची और दोनों तरफ से पैंट खींचकर नीचे उतार दी। अब सिर्फ अंडरवीयर बचा था। मेरा लंड अंदर फड़क रहा था, कपड़े को तानकर बड़ा उभार बना रहा था।

आंटी ने अंडरवीयर का इलास्टिक दोनों हाथों से पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे खींचा। जैसे ही अंडरवीयर घुटनों तक पहुंचा, मेरा लंड छलांग मारकर बाहर आ गया — 7 इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और पहले से ही चमकदार। लंड फड़क रहा था।

“वाह… कितना मोटा, काला और खड़ा लंड है तेरा बेटा…” आंटी ने कहा और लंड को हाथ में लेकर हल्के से ऊपर-नीचे हिलाया। “आज ये मेरी चूत को फाड़ देगा।”

मैं शर्मा रहा था, लेकिन लंड और भी सख्त हो गया था।

अब आंटी ने खुद की बारी ली। उन्होंने नाइटी को दोनों हाथों से पकड़कर सिर के ऊपर से उतार दिया। जैसे ही नाइटी निकली, उनके दोनों बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए — गोरे, भारी, नरम और निप्पल पूरी तरह खड़े और गुलाबी। बिना ब्रा के थे। स्तन हिल रहे थे। फिर आंटी ने अपनी पैंटी के दोनों तरफ इलास्टिक पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे उतारा। पैंटी घुटनों तक पहुंचते ही उनकी चूत सामने आ गई — पूरी साफ शेव्ड, गुलाबी, चमकदार और पहले से ही गीली। चूत के होठ थोड़े फूल गए थे और बीच से चमक रही थी।

“देख राहुल… तेरे लंड को देखते ही मेरी चूत कितनी गीली हो गई है।” आंटी ने कहा।

आंटी ने मुझे पूरी तरह नंगा लिटा दिया और खुद मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरा लंड दोनों हाथों से पकड़ा, ऊपर-नीचे हिलाया, फिर सिरे पर जीभ फेरा। “उम्म्म…” उन्होंने लंड का सिरा मुंह में लिया और जोर से चूसने लगीं।

ब्लोजॉब की डिटेल: आंटी की गर्म, गीली जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। उन्होंने मुंह में अंदर तक लिया, गाल अंदर की तरफ खींचे और जोर से चूसने लगीं। लार उनकी ठोड़ी से टपक रही थी। वे आंखें बंद करके चूस रही थीं, फिर कभी-कभी आंखें खोलकर मेरी तरफ देखतीं — आंखों में पूरी लालसा। “mmm… राहुल… तेरा लंड… कितना स्वादिष्ट है…” वे बोलीं और फिर गला तक ले गईं। लंड उनके गले में जा रहा था, वे हल्का सा घुट रही थीं लेकिन रुक नहीं रही थीं। लार मेरे लंड और उनके स्तनों पर गिर रही थी।

मैं बिस्तर पर लेटा, हाथों से चादर पकड़े हुए, “आह्ह्ह आंटी… क्या कर रही हो… मेरा लंड फट जाएगा… उउउम्म्म…” मेरे मुंह से निकल रहा था। लंड में जोर-जोर से झटके लग रहे थे।

फिर आंटी ने पोजीशन बदली। वे मुड़ गईं, अपनी मोटी गांड मेरे चेहरे की तरफ करके मेरे मुंह पर बैठ गईं। 69 पोजीशन। उनकी गीली, गर्म चूत मेरे मुंह के ठीक ऊपर थी। चूत से महक आ रही थी।

“अब तुम भी मेरी चूत चाटो… और मैं तुम्हारा लंड चूसूंगी।” आंटी ने कहा।

69 की पूरी डिटेल:

मैंने उनकी मोटी, नरम गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और फैलाया। उनकी चूत मेरे मुंह के सामने थी — गुलाबी, गीली, चमकदार। मैंने जीभ निकाली और पहले ऊपर से नीचे तक एक लंबा चाटा मारा। स्वाद खारा-मीठा, गर्म। आंटी का शरीर कांप गया।

“आह्ह्ह्ह… राहुल… तेरी जीभ… मेरी चूत पर…” आंटी चीख पड़ीं।

मैं और जोश में आ गया। मैंने उनकी चूत के होठों को अलग किया और जीभ अंदर घुसा दी। फिर क्लिट को मुंह में लेकर चूसने लगा। जीभ को अंदर-बाहर कर रहा था। आंटी की चूत से लगातार रस निकल रहा था जो मेरे मुंह में जा रहा था। मैं उनकी गांड को कसकर पकड़े हुए था ताकि वे भाग न सकें।

आंटी ने झुककर फिर से मेरा लंड मुंह में लिया और अब और जोर-जोर से चूसने लगीं। उनका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था। लंड उनके गले में जा रहा था। वे “गग… गग…” की आवाजें निकाल रही थीं लेकिन रुक नहीं रही थीं।

दोनों के एक्सप्रेशन:

आंटी के एक्सप्रेशन: आंखें आधे बंद, मुंह में मेरा मोटा लंड फंसा हुआ, गाल अंदर खिंचे, लार उनकी ठोड़ी और मेरे लंड पर बह रही थी। कभी-कभी वे लंड से मुंह हटाकर जोर से चीखतीं — “आह्ह्ह्ह राहुल… तेरी जीभ मेरी चूत को फाड़ रही है… और गहराई से चाटो… उउउउम्म्म… मैं पागल हो जाऊंगी…” फिर वापस लंड मुंह में लेकर जोर से चूसतीं। उनका शरीर कांप रहा था, गांड मेरे चेहरे पर दब रही थी, वे अपनी चूत मेरे मुंह पर रगड़ रही थीं। उनके स्तन मेरे पेट पर दब रहे थे और हिल रहे थे।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं उनकी गीली चूत चाटते हुए पागल हो रहा था। आंखें उनकी चूत और गांड पर टिकी हुईं। मुंह में उनकी चूत का स्वाद और गर्माहट मुझे दीवाना बना रही थी। लंड आंटी के मुंह में फंसकर फड़क रहा था। मैं “आंटी… आपकी चूत… बहुत स्वादिष्ट… मैं झड़ने वाला हूं…” बोल रहा था। मेरे हाथ उनकी मोटी गांड को कसकर दबा रहे थे, कभी-कभी उनके स्तनों को पीछे से पकड़ लेता। सांस लेना मुश्किल हो रहा था लेकिन मजा इतना था कि रुक नहीं पा रहा था।

हम दोनों तेज हो गए। आंटी मेरे लंड को और जोर से चूस रही थीं, मैं उनकी चूत को जीभ से फाड़ रहा था। आंटी का शरीर अचानक जोर से कांपने लगा।

“आह्हhhhhhhhh राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह… तेरी जीभ… मेरी चूत में… आह्ह्ह्ह!” उनकी चूत से गर्म रस निकला और मेरे मुंह में भर गया। आंटी जोर-जोर से कांप रही थीं, गांड हिला रही थीं।

मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “आंटी… मैं भी… आह्ह्ह्ह!” मेरा लंड फड़का और गर्म मोटा वीर्य आंटी के मुंह में छूटने लगा। आंटी ने सब कुछ निगल लिया, कुछ लार और वीर्य उनके मुंह से निकलकर मेरे लंड पर गिर रहा था।

हम दोनों थककर, पसीने से लथपथ, एक-दूसरे के ऊपर लेट गए। सांसें तेज चल रही थीं। आंटी ने मुड़कर मुझे गले लगा लिया। उनके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे।

“राहुल… ये तो बस शुरुआत थी… रात अभी लंबी है।” आंटी ने फुसफुसाया।

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काउगर्ल में जमकर चुदाई

69 के बाद हम दोनों पसीने से लथपथ, सांस फूलते हुए बिस्तर पर लेटे थे। आंटी मेरे ऊपर आधा लेटी हुई थीं। उनके भारी स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मेरे मुंह में अभी भी उनकी चूत का स्वाद था और उनका मुंह अभी भी मेरे वीर्य से गीला था।

लेकिन आंटी अभी रुकने वाली नहीं थीं।

वे धीरे से उठीं, मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गईं और मेरे लंड को देखकर मुस्कुराईं। लंड अभी भी आधा खड़ा था, चमक रहा था।

“अभी तो रात शुरू हुई है राहुल… तेरा लंड फिर से खड़ा करना होगा।”

आंटी ने झुककर मेरा लंड मुंह में लिया। रिवाइवल ब्लोजॉब: वे पहले धीरे से चूसने लगीं, फिर जोर से। जीभ लंड के नीचे घुमा रही थीं, सिरे को चूस रही थीं। लार फिर से बहने लगी। उन्होंने एक हाथ से मेरे अंडकोष को सहलाया और दूसरे हाथ से लंड के बेस को पकड़कर ऊपर-नीचे हिलाया। कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से पूरा खड़ा और सख्त हो गया — नसें उभर आईं, सिरा लाल और फड़क रहा था।

“अब तैयार है… अब मेरी चूत में घुसने के लिए तैयार है।” आंटी ने कहा।

आंटी ने मेरे ऊपर चढ़कर बैठने का पोजीशन लिया — काउगर्ल। उन्होंने मेरे दोनों तरफ घुटने रखे, मेरे लंड को हाथ में लिया और अपनी गीली चूत के ऊपर रखा। चूत से अभी भी रस टपक रहा था।

घुसाने की डिटेल: आंटी ने लंड के सिरे को अपनी चूत के होठों पर रगड़ा। “उम्म्म…” उन्होंने धीरे से नीचे बैठना शुरू किया। लंड का सिरा उनकी चूत में घुसा। चूत बहुत टाइट और गर्म थी। जैसे ही पहला इंच अंदर गया, आंटी की आंखें बंद हो गईं।

“आह्ह्ह… राहुल… तेरा मोटा लंड… मेरी चूत फाड़ रहा है…”

वे और नीचे बैठीं। लंड धीरे-धीरे अंदर जाता गया। आंटी की चूत लंड को कसकर पकड़ रही थी। जब आधा लंड अंदर गया तो आंटी रुक गईं, सांस लेने लगीं। फिर एक झटके में पूरी तरह बैठ गईं। मेरा पूरा 7 इंच लंड उनकी चूत में समा गया। चूत के होठ लंड के बेस तक पहुंच गए।

“आह्हhhhhhhhh… पूरा घुस गया… तेरे लंड ने मेरी चूत भर दी…” आंटी चीख पड़ीं।

काउगर्ल चुदाई शुरू:

आंटी ने ऊपर उठना शुरू किया। लंड बाहर आता गया, सिर्फ सिरा अंदर बचा। फिर वे जोर से नीचे बैठ गईं। “प्लाप!” की आवाज आई। चूत और लंड की टक्कर की गीली आवाज।

वे धीरे-धीरे शुरू में ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके भारी स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। निप्पल खड़े थे। आंटी की आंखें आधी बंद, मुंह खुला।

“आह्ह्ह… आह्ह्ह… राहुल… तेरा लंड… मेरी चूत में… कितना मोटा है…”

धीरे-धीरे वे तेज हो गईं। अब ऊपर-नीचे की रफ्तार बढ़ गई। स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। आंटी अपने बाल पीछे करतीं, फिर मेरे सीने पर हाथ रखकर जोर से राइड करने लगीं।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं बिस्तर पर लेटा, आंटी को नीचे से देख रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर निगल रही थी और छोड़ रही थी। हर बार जब वे नीचे बैठतीं, लंड पूरी तरह अंदर जाता और “आह्ह्ह…” की आवाज मेरे मुंह से निकलती। मैंने उनकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए। “आंटी… आपकी चूत… कितनी गर्म और टाइट है… मैं पागल हो रहा हूं…”

मेरे हाथ उनकी मोटी गांड पर चले गए। मैं उनकी गांड को दबाता और ऊपर धक्का लगाता। कभी-कभी उनके उछलते स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ लेता और निप्पल्स को उंगलियों से दबाता।

आंटी के एक्सप्रेशन: आंखें कभी बंद, कभी मेरी तरफ देखतीं — आंखों में पूरी लालसा और दर्द-मिश्रित मजा। मुंह खुला, जीभ कभी बाहर निकल आती। “आह्ह्ह्ह राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… उउउउम्म्म… तेरा लंड मेरी चूत को मार रहा है…” वे जोर-जोर से चीख रही थीं। शरीर पसीने से भीग रहा था। स्तन उछल-उछलकर मेरे चेहरे पर लग रहे थे। कभी-कभी वे आगे झुक जातीं, मेरे मुंह में अपना निप्पल डाल देतीं और मैं चूस लेता।

जमकर चुदाई: अब दोनों तरफ से एक्शन तेज हो गया। आंटी ऊपर-नीचे जोर-जोर से राइड कर रही थीं। “थप-थप-थप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। चूत से लंड निकलते समय गीली आवाज आ रही थी। मैं नीचे से जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। आंटी की चूत लंड को कसकर पकड़ रही थी।

आंटी का शरीर कांपने लगा। “आह्हhhhhhhhh राहुल… मैं फिर झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह… तेरे लंड से… आह्ह्ह्ह!” वे जोर से कांपीं, चूत ने लंड को और कस लिया। गर्म रस उनके चूत से निकलकर मेरे लंड और अंडकोष पर बहने लगा।

मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “आंटी… मैं भी… आह्ह्ह्ह!” मेरा लंड फड़का और अंदर ही गर्म वीर्य छूटने लगा। आंटी ने लंड को पूरा अंदर रखा और बैठी रहीं। वीर्य उनकी चूत में भर रहा था। कुछ वीर्य बाहर निकलकर लंड के आसपास बह रहा था।

आंटी थककर मेरे ऊपर गिर गईं। उनके स्तन मेरी छाती पर दब गए। हम दोनों भारी सांस ले रहे थे। लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था, धीरे-धीरे नरम हो रहा था। आंटी ने मेरे गाल पर किस किया।

“राहुल… आज रात तूने मुझे सच में जीने का मजा दे दिया…”

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अगले दिन की चुदाई… (सुबह 5:30 बजे बाथरूम में स्टैंडिंग चुदाई)

रात भर की जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों थककर सो गए थे। आंटी मेरे ऊपर लेटी हुई थीं, उनके स्तन मेरी छाती पर दबे हुए, लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर। सुबह करीब 5:30 बजे अंधेरा था। अचानक मुझे हल्का सा झटका लगा। आँखें खोलीं तो आंटी मेरे बगल में खड़ी थीं — सिर्फ एक छोटा सा टॉवल कमर के नीचे लपेटे हुए। बाल अभी भी थोड़े गीले, शरीर से हल्की-हल्की खुशबू आ रही थी।

“राहुल… उठो बेटा। सुबह हो गई। चलो, साथ में नहा लेते हैं।” आंटी ने फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज में फिर से वो ही लालसा थी।

मैं उठा। आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने बाथरूम में ले गईं। बाथरूम में उन्होंने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। फिर टॉवल को खोलकर फेंक दिया। उनके नंगे शरीर के सामने मैं खड़ा था — बड़े स्तन, पतली कमर, मोटी गांड और चमकदार चूत।

“तुम भी कपड़े उतारो।” आंटी ने कहा।

मैंने अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स उतार दिए। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो रहा था। आंटी ने शॉवर ऑन किया। गुनगुना पानी दोनों के शरीर पर गिरने लगा। पानी की बूंदें उनके स्तनों पर टपक रही थीं, निप्पल खड़े हो गए थे।

आंटी ने मुझे दीवार से लगाया और जोर से चूम लिया। पानी के बीच हमारी जीभें लड़ रही थीं। फिर आंटी ने मुड़कर दीवार पर दोनों हाथ रख दिए। उनकी मोटी गांड मेरी तरफ थी। पानी उनकी गांड पर बह रहा था।

“अब पीछे से चोदो मुझे… सुबह-सुबह मेरी चूत को फिर से फाड़ दो।” आंटी ने कहा, थोड़ा झुककर।

स्टैंडिंग चुदाई की पूरी डिटेल:

मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। एक हाथ से उनकी कमर पकड़ी, दूसरे हाथ से लंड को पकड़कर उनकी चूत पर रगड़ा। चूत अभी भी रात की चुदाई से गीली और फूली हुई थी। लंड का सिरा उनकी चूत के होठों पर लगाया।

आंटी ने कमर पीछे की। “घुसा दो… जल्दी…”

मैंने जोर का धक्का मारा। लंड का आधा हिस्सा एक ही झटके में अंदर चला गया। “आह्ह्ह्ह… राहुल…” आंटी चीख पड़ीं।

मैंने दूसरा धक्का लगाया। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। चूत गर्म, टाइट और पानी से और भी फिसलन भरी थी। मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ ली और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

“थप-थप-थप-थप!” की आवाज पानी की आवाज के साथ मिलकर गूंज रही थी। लंड पूरी तरह बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर घुसता। आंटी की गांड हिल रही थी। पानी उनकी पीठ पर बह रहा था और मेरे पेट से टकरा रहा था।

आंटी के एक्सप्रेशन: दीवार से सिर टिकाए, आँखें बंद, मुंह खुला। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… सुबह सुबह तेरा लंड… मेरी चूत में… और जोर से… उउउउम्म्म… राहुल… मेरी चूत फट रही है…” वे बार-बार चीख रही थीं। कभी-कभी एक हाथ पीछे लाकर मेरी जांघ पकड़ लेतीं। उनके स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। शरीर कांप रहा था।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं उनकी कमर कसकर पकड़े हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। “आंटी… आपकी चूत… अभी भी इतनी गर्म और टाइट है… रात भर चोदने के बाद भी… आह्ह्ह…” मेरे मुंह से निकल रहा था। लंड उनकी चूत में घुसते समय जोर का झटका लग रहा था। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके स्तन पकड़ लिए और निप्पल दबाने लगा। दूसरा हाथ उनकी गांड पर मार रहा था।

पानी दोनों के शरीर को और ज्यादा फिसलन भरा बना रहा था। मैंने आंटी का एक पैर उठाकर अपनी कमर पर रख दिया। अब लंड और गहराई से घुस रहा था। आंटी की चूत लंड को कसकर निगल रही थी।

“आह्हhhhhhhhh राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह… तेरे लंड से… सुबह-सुबह… आह्ह्ह्ह!” आंटी का शरीर जोर से कांपा। चूत ने लंड को कस लिया। गर्म रस निकला और पानी के साथ बहने लगा।

मैं भी रुक नहीं पाया। “आंटी… मैं भी… आह्ह्ह्ह!” लंड फड़का और अंदर ही वीर्य छूटने लगा। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर रहा था। कुछ बाहर निकलकर पानी के साथ बह गया।

हम दोनों वहीं खड़े रहे, लंड अभी भी अंदर, सांसें तेज। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था। आंटी ने पीछे मुड़कर मुझे चूमा।

“राहुल… अगले दिन की चुदाई भी कमाल की थी… अब नहा लेते हैं।”

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अंकल की कॉल के दौरान चुपके से चुदाई

सुबह की बाथरूम वाली जोरदार चुदाई के बाद दिन भर हमने नॉर्मल व्यवहार किया। आंटी खाना बनाती रहीं, मैं पढ़ाई करता रहा। लेकिन दोनों की नजरें एक-दूसरे पर अटकी रहती थीं। रात करीब 8 बजे की बात है। आंटी लिविंग रूम में सोफे पर बैठीं, टेलीविजन देख रही थीं। मैं उनके पास ही बैठा था।

अचानक आंटी का मोबाइल बज उठा। स्क्रीन पर नाम था — राजेश (अंकल)।

आंटी ने फोन उठाया।

“हाँ जी… कैसे हो? सब ठीक है ना?” आंटी ने नॉर्मल आवाज में कहा।

अंकल बाहर से बात कर रहे थे — बिजनेस, काम, कब लौटेंगे… आंटी हाँ-हाँ कर रही थीं। लेकिन उनकी नजरें मेरी तरफ थीं। उन्होंने हाथ से मुझे इशारा किया — पास आओ।

मैं उनके पास खिसक गया। आंटी ने फोन एक कंधे पर दबा लिया और दूसरे हाथ से मेरी पैंट का बटन खोल दिया। जिप खींची। अंदर से मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो रहा था। आंटी ने अंडरवीयर नीचे खींचा और मेरा लंड बाहर निकाल लिया।

“हाँ जी… कल का मीटिंग कैसा रहा?” आंटी अंकल से बात कर रही थीं, लेकिन उसी समय मेरे लंड को हाथ में लेकर धीरे से हिला रही थीं।

फिर आंटी ने फोन को कान से लगाए रखा और झुककर मेरे लंड को मुंह में ले लिया।

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फोन पर बात करते हुए ब्लोजॉब:

आंटी धीरे-धीरे चूसने लगीं। जीभ लंड के सिरे पर घुमा रही थीं। “उम्म्म…” की हल्की आवाज निकली, लेकिन उन्होंने तुरंत कंट्रोल किया।

अंकल: “तुम घर में अकेली हो ना? कोई परेशानी तो नहीं?”

आंटी (लंड मुंह में लेकर): “न… नहीं जी… मैं बिल्कुल ठीक हूँ… बस टीवी देख रही थी…”

वे लंड को गाल के अंदर दबा रही थीं ताकि आवाज न निकले। लार उनके होंठों से टपक रही थी। वे आँखें बंद करके चूस रही थीं, लेकिन फोन पर बात जारी रखे हुए थीं। कभी-कभी लंड को गले तक ले जातीं, फिर बाहर निकालकर “हाँ जी… बोलो…” कहतीं।

मैं बैठा हुआ, हाथ आंटी के बालों में डाले हुए, धीरे से उनकी सिर हिला रहा था। लंड उनके गले में जा रहा था।

आंटी ने फोन पर बात करते हुए मुझे इशारा किया — पीछे से चोदो

चुपके से चुदाई:

आंटी सोफे पर थोड़ी सी लेट गईं, एक पैर सोफे पर रखा, दूसरा नीचे। नाइटी को कमर तक ऊपर खींच लिया। अंदर पैंटी पहनी हुई थी। मैंने पैंटी को एक तरफ खिसकाया। उनकी चूत पहले से गीली हो चुकी थी।

मैं उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। लंड को पकड़कर चूत पर लगाया और धीरे से अंदर घुसाया।

“आह्ह्ह…” आंटी के मुंह से निकला, लेकिन उन्होंने तुरंत फोन पर जोर से कहा — “हाँ जी… मैं सुन रही हूँ… आगे बोलो…”

मैंने लंड पूरा अंदर घुसा दिया। आंटी की चूत गर्म और टाइट थी। मैं धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा — ताकि आवाज न आए। लेकिन धीरे-धीरे तेज हो गया।

आंटी के एक्सप्रेशन (फोन पर बात करते हुए):

  • आँखें आधी बंद, मुंह खुला लेकिन फोन के पास लाया हुआ।
  • कभी-कभी होंठ काट रही थीं ताकि moans न निकलें।
  • “हाँ… हाँ जी… सब ठीक है घर में…” बोलते हुए उनकी आँखें pleasure से घूम रही थीं।
  • लंड जब गहराई से जाता, तो वे “उउउम्म्म…” की आवाज दबा लेतीं।
  • एक हाथ से फोन पकड़े हुए, दूसरा हाथ सोफे को कसकर पकड़े हुए।

मेरे एक्सप्रेशन:

  • जोखिम का मजा मुझे और ज्यादा एक्साइट कर रहा था। लंड उनकी चूत में घुसते समय जोर का झटका लग रहा था।
  • मैं धीरे से लेकिन जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। “आंटी… अंकल बात कर रहे हैं… फिर भी आपकी चूत इतनी गीली…” मैं फुसफुसाया।
  • हाथ उनकी कमर और गांड पर थे। कभी-कभी आगे बढ़कर उनके स्तन दबा लेता।

आंटी अंकल से बात कर रही थीं — “कल कब आ रहे हो…? हाँ… मैं इंतजार करूंगी…”

लेकिन नीचे से उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैं तेज हो गया। सोफे हल्का-हल्का हिल रहा था। आंटी की चूत से गीली आवाज आ रही थी, लेकिन फोन की आवाज में दब रही थी।

आंटी का शरीर कांपने लगा। वे फोन पर “हाँ जी… ठीक है…” बोल रही थीं, लेकिन उनकी चूत ने लंड को और कस लिया।

“आह्ह्हhhhh… मैं झड़ रही हूँ…” आंटी ने फुसफुसाया (फोन को थोड़ा दूर करके)। चूत से गर्म रस निकला और मेरे लंड पर बहने लगा।

मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “आंटी… मैं भी…” लंड फड़का और अंदर ही वीर्य छूटने लगा। आंटी ने फोन पर जोर से कहा — “हाँ जी… मैं ठीक हूँ… बस हिचकी आ गई थी…”

अंकल ने कुछ और बातें कीं, फिर कॉल काट दी।

आंटी ने फोन रखा, मुड़ी और मुझे जोर से चूमा।

“राहुल… ये जोखिम… मुझे और ज्यादा गीला कर गया था…”

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अंकल की कॉल के बाद लिविंग रूम में जोरदार काउगर्ल चुदाई)

अंकल की कॉल कटते ही आंटी का पूरा मूड बदल गया।

वे फोन टेबल पर रखकर मुड़ीं और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में अब कोई डर नहीं था — सिर्फ भूख और पागलपन था।

“अब कोई फोन नहीं है… अब मैं पूरी तरह से तेरी हूँ।” आंटी ने कहा।

उन्होंने मेरी टी-शर्ट को जोर से खींचकर ऊपर उतार दिया। मैं पूरी तरह नंगा हो चुका था। आंटी ने भी अपनी नाइटी को सिर के ऊपर से उतार फेंका। उनके दोनों बड़े स्तन बाहर आ गए। उन्होंने अपनी पैंटी को भी एक झटके में नीचे उतार दिया। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे।

आंटी ने मुझे सोफे पर धक्का देकर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गया। मेरा लंड अभी भी खड़ा था, चमक रहा था (वीर्य और चूत के रस से)।

आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं — काउगर्ल पोजीशन। उन्होंने मेरे दोनों तरफ घुटने रखे, एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और अपनी गीली चूत के ऊपर रखा।

“अब चुपके से नहीं… अब जोर-जोर से चोदूंगी।”

जोरदार काउगर्ल चुदाई की पूरी डिटेल:

आंटी ने लंड का सिरा अपनी चूत पर लगाया और एक ही झटके में नीचे बैठ गईं। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया।

“आह्हhhhhhhhh… राहुल… अब पूरा अंदर है… अब कोई रोकने वाला नहीं!” आंटी चीख पड़ीं।

वे ऊपर उठीं। लंड बाहर निकला, सिर्फ सिरा अंदर बचा। फिर जोर से नीचे बैठ गईं। “प्लाप!” की तेज आवाज आई।

आंटी अब बिना रुके ऊपर-नीचे होने लगीं। तेज, जोरदार और बेरोक-टोक। उनके भारी स्तन उछल-उछलकर मेरे चेहरे पर लग रहे थे। निप्पल खड़े थे। पसीना उनके शरीर पर चमक रहा था।

“आह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह्ह… तेरे लंड ने मेरी चूत को फाड़ दिया… उउउउम्म्म… और जोर से… चोद मेरी चूत को!”

आंटी चीख-चीखकर बोल रही थीं। अब कोई फोन नहीं था, कोई डर नहीं था। वे पूरी ताकत से राइड कर रही थीं। हर बार जब वे नीचे बैठतीं, लंड पूरी गहराई तक जाता और चूत से गीली “थप-थप-थप” की आवाज पूरे लिविंग रूम में गूंज रही थी।

आंटी के एक्सप्रेशन: आँखें आधी बंद, मुंह पूरा खुला, जीभ कभी बाहर निकल आती। वे बार-बार चीख रही थीं — “आह्ह्ह राहुल… अब और जोर से… मेरी चूत फट रही है… तेरा मोटा लंड… मेरी चूत को मार रहा है…” कभी-कभी वे आगे झुक जातीं, मेरे मुंह में अपना निप्पल डाल देतीं और मैं जोर से चूस लेता। उनके बाल बिखर गए थे। शरीर पसीने से भीग चुका था।

मेरे एक्सप्रेशन: मैं सोफे पर लेटा, आंटी को ऊपर से देख रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर निगल रही थी और छोड़ रही थी। हर बार जब वे नीचे बैठतीं, मुझे जोर का झटका लगता। “आंटी… आपकी चूत… कितनी गर्म और टाइट है… अब तो चीखो जितना जी चाहे…” मैं भी जोर-जोर से बोल रहा था। मेरे हाथ उनकी कमर और मोटी गांड पर थे। मैं उन्हें नीचे खींचता और ऊपर से धक्का लगाता। कभी-कभी उनके उछलते स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ लेता और जोर से दबाता।

आंटी अब और तेज हो गईं। वे मेरे सीने पर हाथ रखकर जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रही थीं। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। चूत से रस बह रहा था और मेरे अंडकोष पर गिर रहा था। सोफे हिल रहा था।

“आह्हhhhhhhhh राहुल… मैं फिर झड़ने वाली हूं… आह्ह्ह… तेरे लंड से… आह्ह्ह्ह!” आंटी का शरीर जोर से कांपा। चूत ने लंड को कस लिया। गर्म रस निकला और मेरे लंड पर बहने लगा।

मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया। “आंटी… मैं भी… आह्ह्ह्ह!” लंड फड़का और अंदर ही गर्म वीर्य छूटने लगा। आंटी ने लंड को पूरा अंदर रखा और बैठी रहीं। वीर्य उनकी चूत में भर रहा था। कुछ बाहर निकलकर लंड के आसपास बह रहा था।

आंटी थककर मेरे ऊपर गिर गईं। उनके स्तन मेरी छाती पर दब गए। हम दोनों भारी सांस ले रहे थे। लंड अभी भी उनकी चूत में अंदर था।

आंटी ने मेरे गाल पर किस किया और फुसफुसाई — “राहुल… ये वाली चुदाई सबसे अच्छी थी… अब तो और भी गंदी चुदाई करनी है।”

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