प्रिया भाभी को जमकर चोदा | bhabi devar family sex story

जॉइंट फैमिली में भाभी की छुपी भूख

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मैं राहुल हूँ। उम्र 24 साल। हमारा परिवार जॉइंट फैमिली है। घर में पापा-मम्मी, मेरे बड़े भाई अंकित (28 साल) और उनकी पत्नी यानी मेरी भाभी प्रिया (28 साल) रहते हैं। भाई अक्सर बाहर जॉब के सिलसिले में रहते हैं। भाभी घर संभालती हैं और बहुत खूबसूरत हैं। गोरी रंगत, काले लंबे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ। शरीर देखकर कोई भी दीवाना हो जाए — बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और भारी, गोल गांड। घर पर वो अक्सर साड़ी या सलवार सूट पहनती हैं।

एक हफ्ते पहले पापा-मम्मी अपने गांव चले गए थे किसी रिश्तेदार के कार्यक्रम में। भाई भी 10 दिनों के लिए दिल्ली गए थे जॉब के काम से। घर में सिर्फ मैं और भाभी अकेले रह गए थे। बड़ा सा घर, ऊपर-नीचे कमरे, और रात को अक्सर अंधेरा और सन्नाटा रहता था।

कहानी कैसे शुरू हुई — पूरा सस्पेंस और डिटेल

वो रात… बारिश जोरों से हो रही थी। हवा में ठंडक थी। अचानक बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। मैं अपने कमरे में मोबाइल की लाइट से कुछ देख रहा था। तभी भाभी का फोन आया।

भाभी: “राहुल… तू कहाँ है? बिजली चली गई है… अकेले डर लग रहा है। आ जा मेरे कमरे में।”

मैं उठा और भाभी के कमरे की तरफ गया। भाभी बेड पर बैठी थीं। उन्होंने एक मोमबत्ती जला रखी थी। मोमबत्ती की रोशनी में भाभी का चेहरा बहुत खूबसूरत लग रहा था। भाभी ने पतला नीला नाइट सूट पहना हुआ था। सूट इतना पतला था कि उनकी छाती की गहरी दरार साफ दिख रही थी।

मैं बेड के पास जाकर बैठ गया।

भाभी: “राहुल… आज की रात बहुत डरावनी है। तू मेरे साथ यहीं सो जा।”

मैं: “ठीक है भाभी। मैं यहीं सो जाऊँगा।”

हम दोनों बेड पर लेट गए। कमरे में सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी और बाहर बारिश की आवाज। कुछ देर चुप रहे।

फिर भाभी ने बात शुरू की। उनकी आवाज थोड़ी भारी थी।

भाभी: “राहुल… तू अब बड़ा हो गया है। लेकिन भाभी को समय नहीं देता।”

मैं: “भाभी, ऐसा नहीं है। मैं तो हमेशा तुम्हारे पास रहता हूँ।”

भाभी ने मेरी तरफ देखा। “राहुल… तेरा भाई अक्सर बाहर रहता है। रात को आता भी है तो थका होता है। बात भी नहीं करता। मुझे बहुत अकेलापन लगता है। तू ही मेरा इकलौता साथी है इस घर में।”

मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया। “भाभी, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।”

भाभी ने मुझे अपने पास खींच लिया। “राहुल… मुझे गले लगा।”

मैंने भाभी को गले लगाया। उनका शरीर गर्म था। नाइट सूट पतला था, इसलिए उनके बड़े स्तन मेरी छाती से सटे हुए महसूस हो रहे थे। मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा।

भाभी ने भी मुझे कसकर गले लगाया। उनकी साँस मेरे गले पर पड़ रही थी।

अचानक भाभी ने मेरा सिर उठाया और मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया।

मैं चौंक गया। “भाभी… ये क्या कर रही हो?”

भाभी ने धीरे से कहा, “राहुल… माफ करना। लेकिन आज रात मुझे कुछ और चाहिए। तू बड़ी उम्र का हो गया है। भाभी को समझता है ना? तेरा भाई मुझे संतुष्ट नहीं करता। क्या तू भाभी की मदद करेगा?”

मैं घबराकर बोला, “भाभी… ये गलत है। लेकिन… तुम इतनी खूबसूरत हो। मैं कई बार तुम्हें नहाते हुए या कपड़े बदलते देख चुका हूँ। मन करता है… लेकिन डर लगता है।”

भाभी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा। “कोई नहीं देख रहा राहुल। सिर्फ हम दो। आज की रात हम जो चाहें वो कर सकते हैं। तू भाभी के स्तन छूना चाहता है? मेरी चूत में उंगली डालना चाहता है?”

मैंने साहस करके कहा, “हाँ भाभी… बहुत दिनों से मन में है। जब तुम साड़ी पहनकर चलती हो तो तुम्हारी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।”

भाभी मुस्कुराई। “तो आज सब कुछ देख ले और छू ले। लेकिन पहले बातें कर लेते हैं।”

हम बातें करते रहे। भाभी ने बताया कि रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर वो अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर हस्तमैथुन करती हैं और मेरे नाम से कराहती हैं। मैंने भी कबूल किया कि मैं उनकी तस्वीरें देखकर लंड हिलाता हूँ।

भाभी ने मेरे खड़े लंड पर कपड़े के ऊपर से हाथ रख दिया और दबाया। “वाह… कितना मोटा हो गया है तेरा लंड…”

मैंने भाभी की गांड पर हाथ रखा और निचोड़ा। “भाभी… तुम्हारी गांड बहुत सॉफ्ट है।”

भाभी ने कहा, “अब फैसला कर ले राहुल। क्या तू अपनी भाभी के साथ वो सब करना चाहता है जो दो प्रेमी करते हैं? क्या तू भाभी की चूत को चोदना चाहता है? कपड़े उतारकर मेरे ऊपर चढ़ना चाहता है?”

मैंने कहा, “हाँ भाभी… मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता। लेकिन कैसे शुरू करें?”

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प्रिया भाभी को जमकर चोदा

भाभी ने मेरी बात सुनकर धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, “तो चलो राहुल… आज रात भाभी तेरी हो गई। जो करना है कर ले।”

भाभी ने दोनों हाथों से मेरे गाल पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींचा और लिटा दिया अपने ऊपर। अब मैं सीधा भाभी के ऊपर लेट गया था। भाभी के बड़े स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। नाइट सूट पतला था, इसलिए उनके निप्पल की उभार मेरी छाती पर साफ महसूस हो रही थी।

भाग 1

भाभी ने मेरे होंठों पर गहरा किस किया। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे से लड़ने लगी। भाभी की साँस तेज हो गई। मैंने भी भाभी को कसकर गले लगाया। मेरे हाथ भाभी की कमर से नीचे जाकर उनकी मोटी गांड पर चले गए। मैंने गांड को जोर से निचोड़ा। भाभी कराह उठी, “आह… राहुल… गांड दबा रहा है…”

भाभी के हाथ मेरे बालों में घुस गए। वो मुझे और जोर से किस करने लगीं।

मैंने भाभी का नाइट सूट धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। सूट उनकी जांघों से ऊपर आया… फिर कमर के ऊपर… फिर छाती के ऊपर। भाभी ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। मैंने सूट पूरी तरह उतार दिया और बेड के बाहर फेंक दिया। अब भाभी सिर्फ काले रंग की ब्रा और पेंटी में मेरे नीचे लेटी थीं।

भाभी की ब्रा बहुत टाइट थी। उनके बड़े-बड़े स्तन ब्रा से बाहर आने को बेताब थे। ब्रा के नीचे से गोरी त्वचा और स्तनों की गहरी दरार साफ दिख रही थी।

भाभी ने कहा, “अब तू भी नंगा हो जा राहुल…”

मैं उठकर बैठ गया। भाभी ने मेरी टी-शर्ट दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर खींच दी। टी-शर्ट उतर गई। भाभी ने मेरी छाती पर हाथ फेरा। फिर भाभी ने मेरी पैंट का बटन खोला। जिप खींची। मैंने खुद पैंट नीचे उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। मेरा लंड अंडरवियर में तना हुआ खड़ा था।

भाभी ने मेरे अंडरवियर के ऊपर से लंड को हाथ से दबाया। “वाह… कितना गरम और मोटा हो गया है… निकाल इसे बाहर राहुल।”

मैंने अंडरवियर नीचे खींचा। मेरा लंड झटके से बाहर आ गया। 7 इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, लाल सिरा चमक रहा था। थोड़ा सा पानी निकल रहा था।

भाभी ने लंड को हाथ में लिया और धीरे से ऊपर-नीचे किया। “राहुल… भाभी की चूत में इतना मोटा लंड घुस जाएगा तो चूत फट जाएगी… पर आज फटने दो।”

मैंने भाभी की ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा ढीली हो गई। भाभी ने ब्रा उतार दी और फेंक दी। अब भाभी के दोनों स्तन पूरी तरह नंगे थे। बड़े, गोल, गोरे, निप्पल गुलाबी-भूरे रंग के और खड़े हो चुके थे।

मैंने दोनों हाथों से भाभी के स्तन पकड़े। इतने नरम और भारी कि हाथ में नहीं समा रहे थे। मैंने दबाए। भाभी कराह उठी, “आह… राहुल… स्तन दबा… जोर से दबा…”

मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। जीभ से चाटा। भाभी का शरीर काँप गया। “राहुल… आह… भाभी के निप्पल चूस… और जोर से…”

मैं दूसरे स्तन को भी चूसने लगा। भाभी के हाथ मेरे सिर पर थे। वो मुझे अपनी छाती से और दबा रही थीं।

फिर भाभी ने कहा, “अब पेंटी भी उतार दे राहुल… भाभी की चूत देख ले।”

मैं भाभी के पैरों के पास गया। भाभी ने दोनों टाँगें थोड़ी खोल दीं। मैंने भाभी की काली पेंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। पेंटी जांघों से नीचे आई… फिर घुटनों के पास… फिर टखनों से निकालकर फेंक दी।

अब भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उनकी चूत साफ दिख रही थी। चूत के ऊपर हल्का सा बाल था। चूत के होंठ मोटे और गुलाबी। बीच में से चमकदार रस निकल रहा था। चूत पूरी गीली हो चुकी थी।

मैंने अपनी उंगली चूत पर रखी और रस को फैलाया। भाभी काँप उठी, “आह… राहुल… उंगली मत डाल… सीधा लंड डाल… भाभी की चूत लंड के लिए तरस रही है।”

मैं भाभी के ऊपर आ गया। मेरा लंड भाभी की चूत के ठीक ऊपर था। मैंने लंड को चूत के होंठों पर रगड़ा। चूत का गर्म रस लंड के सिरे पर लग गया।

भाभी ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली। “डाल दे राहुल… अब और मत तड़पा… भाभी की चूत में अपना लंड घुसा दे…”

मैंने लंड का सिरा चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाया। लंड का मोटा सिरा चूत में घुसने लगा। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। “आह… राहुल… धीरे… भाभी की चूत फट रही है… आह…”

लंड आधा अंदर चला गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। मुँह खुल गया। “आह… राहुल… और डाल… पूरा लंड डाल भाभी की चूत में…”

मैंने जोर लगाया। पूरा लंड एक ही झटके में भाभी की चूत में घुस गया। भाभी चीख पड़ी, “आह… राहुल… भाभी मर गई… इतना मोटा लंड… चूत फट गई… आह…”

भाग 2

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। लंड अंदर-बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ भाभी के स्तन उछल रहे थे। भाभी के निप्पल खड़े थे। भाभी की आँखें आधी बंद, मुँह खुला, जीभ बाहर निकली हुई। “आह… आह… राहुल… भाभी की चूत… आह… जोर से चोद… भाभी तेरी रंडी बन गई… आह…”

मेरा चेहरा लाल हो गया था। पसीना निकल रहा था। मैं बोल रहा था, “भाभी… तुम्हारी चूत कितनी गर्म और टाइट है… आह… भाभी… लंड पूरा अंदर जा रहा है… भाभी… तुम बहुत सेक्सी हो…”

भाभी ने दोनों टाँगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लीं। “और गहरा… राहुल… भाभी की चूत के अंदर तक लंड मार… आह… आह…”

मैं और तेज हो गया। थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। चूत से “चप-चप” की गीली आवाज आ रही थी। भाभी के स्तन मेरे हाथों में थे। मैं दबा रहा था और चूस रहा था।

भाभी का शरीर काँप रहा था। “राहुल… आह… भाभी को कुछ हो रहा है… आह… भाभी झड़ने वाली है… जोर से… आह… आह…”

भाभी की चूत ने मेरे लंड को और कस लिया। भाभी चीख पड़ी, “आह… राहुल… भाभी झड़ गई… आह… आह… भाभी मर गई राहुल…”

मैं भी रुक नहीं सका। “भाभी… मैं भी… आह… भाभी… लंड अंदर ही निकालूँ क्या?”

भाभी ने कसकर मुझे पकड़ लिया, “अंदर ही निकाल… भाभी की चूत में अपना पानी भर दे… आह…”

मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा। लंड पूरी तरह अंदर था। मेरा लंड फड़कने लगा और गरम-गरम पानी भाभी की चूत में भरने लगा। भाभी ने आँखें बंद कर लीं, “आह… राहुल… भाभी के अंदर… गर्म पानी… आह… कितना गरम है…”

मैं भाभी के ऊपर ही लेट गया। हम दोनों साँस ले रहे थे। मेरा लंड अभी भी भाभी की चूत में था। चूत से मेरा पानी और भाभी का रस निकल रहा था।

भाभी ने मेरे बालों में हाथ फेरा। “राहुल… आज रात तूने भाभी को सच में अपनी बना लिया…”

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सुबह होते ही भाभी मुझे किचन में बुलाती है

रात भर हम दोनों नंगे बेड पर लिपटे रहे। भाभी मेरी बाहों में सो गई थीं। सुबह 7 बजे की धूप कमरे में आ रही थी। घर में अभी भी सिर्फ हम दोनों अकेले थे।

भाभी सबसे पहले उठीं। उन्होंने सिर्फ एक पतला सफेद नाइट सूट पहना। सूट इतना पतला था कि उनके निप्पल की उभार साफ दिख रही थी। चूत अभी भी रात के पानी से थोड़ी गीली थी। भाभी ने बाल बांधे और किचन की तरफ चली गईं।

मैं भी थोड़ी देर बाद उठा। नंगा ही था। लंड अभी भी थोड़ा खड़ा था।

तभी भाभी की आवाज आई किचन से — “राहुल… उठ गया? नाश्ता बना रही हूँ… आ जा थोड़ा मदद कर दे।”

भाग 1

मैं नंगा ही किचन की तरफ गया। किचन में भाभी चूल्हे के सामने खड़ी थीं। नाश्ता बना रही थीं — पराठे और चाय। गैस जल रही थी। भाभी की पीठ मेरी तरफ थी। नाइट सूट उनकी गांड तक आ रहा था। जब वो झुकतीं तो गांड का आकार साफ दिखता।

मैं चुपके से पीछे से भाभी के पास गया। भाभी को कुछ पता नहीं चला। मैंने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर भाभी के स्तन पकड़ लिए।

भाभी चौंक गई, “आह… राहुल… सुबह-सुबह… क्या कर रहा है?”

मैंने भाभी के कान में फुसफुसाया, “भाभी… रात को तो तूने कहा था जब चाहे चोद सकता हूँ… अब सुबह हो गई… भाभी की चूत फिर से मेरा लंड चाह रही है।”

मैंने भाभी के स्तन जोर से दबाए। नाइट सूट के ऊपर से ही निप्पल को उंगलियों से निचोड़ा। भाभी की साँस तेज हो गई। “राहुल… अभी नाश्ता बना रही हूँ… कोई आ गया तो… आह…”

मैंने भाभी की कमर पर हाथ रखा और नाइट सूट को ऊपर खींचा। सूट कमर तक आ गया। अब भाभी की नंगी गांड मेरे सामने थी। मैंने एक हाथ से भाभी की चूत पर हाथ रखा। चूत अभी भी थोड़ी गीली थी।

भाभी ने चूल्हे की तरफ मुंह करके कहा, “राहुल… मत कर… नाश्ता जल जाएगा… आह…”

लेकिन मैंने नहीं सुना। मैंने अपना लंड भाभी की गांड के बीच में रगड़ा। लंड तुरंत खड़ा हो गया। भाभी ने पराठे को पलटा और हाथ काँप रहे थे।

मैंने भाभी की चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं। चूत अंदर से गर्म और गीली थी। भाभी कराह उठी, “आह… राहुल… उंगली मत डाल… आह… चूल्हे के सामने…”

मैंने उंगलियाँ निकालीं और लंड को चूत पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा चूत में घुसने लगा। भाभी ने कमर थोड़ी झुकाई। “आह… राहुल… धीरे… नाश्ता… आह…”

पूरा लंड एक ही धक्के में भाभी की चूत में घुस गया। भाभी ने मुँह बंद करके कराहा, “आह… मम्म… राहुल… सुबह-सुबह… भाभी की चूत में लंड… आह…”

भाग 2

मैंने भाभी की कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। लंड चूत में घुसता और निकलता। भाभी पराठे बना रही थीं लेकिन उनका ध्यान बिल्कुल नहीं था। हाथ काँप रहे थे।

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। “थप-थप” की आवाज किचन में गूँजने लगी। भाभी ने एक हाथ चूल्हे पर रखा और दूसरा काउंटर पर। सिर नीचे झुकाया। बाल उनके चेहरे पर आ गए।

भाभी फुसफुसा रही थी, “आह… राहुल… जोर मत मार… आवाज आएगी… आह… भाभी की चूत… आह… पराठा जल जाएगा… आह…”

लेकिन मैं रुका नहीं। लंड पूरा अंदर घुसा रहा था। भाभी की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर भाभी के स्तन पकड़ लिए और जोर से दबाने लगा। दूसरे हाथ से भाभी की गांड पर थप्पड़ मारा।

भाभी का चेहरा लाल हो गया था। आँखें आधी बंद, होंठ काट रही थीं ताकि जोर से न चीख पड़े। “आह… आह… राहुल… चोद… लेकिन धीरे… आह… भाभी झड़ जाएगी… आह…”

मैंने कान में फुसफुसाया, “भाभी… तुम्हारी चूत सुबह-सुबह भी कितनी गर्म है… आह… भाभी… लंड पूरा अंदर है…”

भाभी का शरीर काँपने लगा। “राहुल… आह… भाभी… आह… भाभी झड़ गई… आह… आह…”

भाभी की चूत ने लंड को कस लिया। भाभी ने काउंटर को जोर से पकड़ लिया। मैं भी रुक नहीं सका। “भाभी… मैं भी… आह… अंदर ही निकालूँ?”

भाभी ने सिर हिलाया, “हाँ… भर दे… आह…”

मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा। लंड माँ की चूत में फड़कने लगा और गरम पानी भाभी के अंदर भर गया। भाभी ने मुँह बंद करके कराहा, “आह… राहुल… फिर से… गर्म पानी… आह… भाभी की चूत भर गई…”

हम दोनों कुछ सेकंड ऐसे ही खड़े रहे। मेरा लंड अभी भी भाभी की चूत में था। चूत से पानी और मेरा वीर्य दोनों बह रहे थे। पराठा थोड़ा जल गया था लेकिन हमें परवाह नहीं थी।

भाभी ने साँस लेते हुए कहा, “राहुल… सुबह-सुबह किचन में… तूने भाभी को फिर से झड़ा दिया…”

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नाश्ते के बाद भाभी मुझे बेडरूम में ले जाती है और मुझे अपनी चूत चाटने को मजबूर करती है, फिर राइडिंग करती है।

किचन में चुदाई के बाद हम दोनों थोड़ा साफ हो गए। भाभी ने पराठा थोड़ा जलने दिया था, लेकिन दोनों ने खा लिया। खाना खत्म होते ही भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें अभी भी चमक रही थीं।

भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और फुसफुसाते हुए कहा, “राहुल… चल बेडरूम में। अभी मेरा मन नहीं भरा। तू भाभी की चूत चाटेगा… फिर भाभी तुझे चोदेगी।”

भाग 1

हम दोनों बेडरूम में गए। भाभी ने दरवाजा बंद किया। कमरा अभी भी थोड़ा अंधेरा था। भाभी ने मुझे बेड पर धक्का देकर लिटा दिया।

भाभी ने अपना नाइट सूट उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। उनके बड़े स्तन और गीली चूत साफ दिख रही थी। भाभी बेड पर चढ़ी और मेरे चेहरे के ऊपर आ गई।

“अब भाभी की चूत चाट राहुल… जोर से चाट… भाभी को मजे दे।”

भाभी ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी। चूत अभी भी किचन वाली चुदाई से गीली और फूली हुई थी। मैंने जीभ बाहर निकाली और भाभी की चूत चाटने लगा।

भाभी का शरीर काँप गया। “आह… राहुल… जीभ अंदर डाल… आह… भाभी की चूत चाट… जोर से… आह…”

मैंने भाभी की चूत के होंठ अलग किए और जीभ अंदर घुसा दी। भाभी का स्वाद नमकीन-मीठा था। मैं जीभ घुमाने लगा। भाभी ने मेरे सिर पर दोनों हाथ रख दिए और अपनी चूत मेरे चेहरे पर और जोर से दबा दी।

“आह… राहुल… उंगली भी डाल… आह… भाभी मर गई… चाट… चाट… आह…”

मैंने एक उंगली भाभी की चूत में डाली और जीभ से क्लिटॉरिस चाटने लगा। भाभी जोर-जोर से कराह रही थी। “आह… आह… राहुल… भाभी झड़ जाएगी… आह… जीभ मत निकाल… आह…”

भाभी का शरीर हिल रहा था। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं। “आह… राहुल… भाभी आ गई… आह… आह… भाभी झड़ गई…”

भाभी का रस मेरे मुँह में आ गया। भाभी थोड़ी देर मेरे चेहरे पर बैठी रहीं, साँस ले रही थीं।

भाग 2

भाभी नीचे उतरीं। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। भाभी ने लंड को हाथ में लिया और ऊपर-नीचे किया।

“अब भाभी तुझे चोदेगी राहुल…”

भाभी मेरे ऊपर आ गई। उन्होंने लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे से बैठ गईं। लंड चूत में घुसने लगा। भाभी की आँखें बंद हो गईं। “आह… राहुल… लंड अंदर जा रहा है… आह…”

पूरा लंड अंदर चला गया। भाभी ने मेरी छाती पर हाथ रखा और ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। उनकी गांड मेरे लंड पर उठती और गिरती। स्तन आगे-पीछे हिल रहे थे।

भाभी की आँखें आधी बंद थीं। मुँह खुला। “आह… आह… राहुल… भाभी की चूत… आह… लंड कितना मोटा है… आह…”

मैंने भाभी की कमर पकड़ ली और ऊपर से धक्का देने लगा। भाभी और तेज हो गईं। “आह… राहुल… जोर से… भाभी को चोद… आह… भाभी तेरी रंडी है… आह…”

भाभी झुक गईं और मेरे होंठों पर किस करने लगीं। उनके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने भाभी की गांड दोनों हाथों से पकड़ ली और जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगा।

“भाभी… तुम्हारी चूत कितनी गर्म है… आह… भाभी… राइडिंग करके चोद रही हो… आह…”

भाभी का चेहरा लाल हो गया था। पसीना निकल रहा था। “राहुल… आह… भाभी झड़ने वाली है… आह… जोर से… आह… आह…”

भाभी ने जोर से चीखा, “आह… राहुल… भाभी झड़ गई… आह… आह…”

भाभी की चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी रुक नहीं सका। “भाभी… मैं भी… आह…”

मैंने भाभी की कमर कसकर पकड़ा और लंड अंदर ही छोड़ दिया। गरम पानी भाभी की चूत में भर गया। भाभी ने सिर पीछे झुकाया, “आह… राहुल… फिर से गर्म पानी… आह… भाभी की चूत भर गई…”

भाभी मेरे ऊपर ही लेट गईं। हम दोनों साँस ले रहे थे। लंड अभी भी भाभी की चूत में था।

भाभी ने मेरे गाल पर किस किया। “राहुल… आज सुबह तूने भाभी को दो बार झड़ा दिया…”

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