बारिश की रात में माँ की छिपी हुई भूख
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मैं रोहन हूँ। उम्र 22 साल। मैं शहर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक कर रहा हूँ। हमारे परिवार में पापा, माँ और मैं। पापा का अपना बिजनेस है, जिसकी वजह से वो अक्सर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में रहते हैं। इस बार पापा 4 दिनों के लिए मुंबई गए थे।
घर पर सिर्फ मैं और मेरी माँ प्रिया अकेले थे। माँ की उम्र 41 साल है, लेकिन शरीर देखकर कोई भी 30 साल से कम ही बताएगा। गोरी रंगत, काले घने बाल, बड़ी-बड़ी काली आँखें, मोटे होंठ। स्तन इतने बड़े और भरे हुए कि साड़ी में भी उनकी दरार साफ दिखती। कमर पतली, नाभि गहरी, और गांड इतनी गोल और भारी कि चलते वक्त हिलती रहती। माँ जिम भी जाती हैं, योग करती हैं, इसलिए शरीर टाइट है। घर पर वो अक्सर पतले नाइट सूट या साड़ी पहनती हैं।
वो रात… बारिश जोरों से हो रही थी। हवा में ठंडक थी। अचानक बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। मैं अपने कमरे में लैपटॉप पर प्रोजेक्ट कर रहा था। मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई तो देखा माँ का कमरा भी अंधेरा।
तभी माँ की आवाज आई, “रोहन… बेटा! कहाँ है तू? बिजली चली गई है… अकेले डर लग रहा है। आ जा मेरे कमरे में!”
मैं उठा, लैपटॉप बंद किया और माँ के कमरे की तरफ गया। दरवाजा खोला तो माँ बेड पर बैठी थीं। उन्होंने एक मोमबत्ती जला रखी थी। मोमबत्ती की पीली रोशनी में माँ का चेहरा बहुत खूबसूरत लग रहा था। माँ ने हल्का नीला पतला नाइट गाउन पहना हुआ था। गाउन इतना पतला था कि उनकी छाती की गहरी दरार और निप्पल की हल्की उभार साफ दिख रही थी।
मैं बेड के पास जाकर बैठ गया।
माँ ने कहा, “बेटा, आज की रात बहुत डरावनी लग रही है। तू मेरे साथ यहीं सो जा।”
मैं बोला, “ठीक है माँ। मैं यहीं सो जाऊँगा।”
हम दोनों बेड पर लेट गए। कमरे में सिर्फ मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी और बाहर बारिश की तेज आवाज। कुछ देर चुप रहे।
फिर माँ ने बात शुरू की। उनकी आवाज थोड़ी भारी थी।
माँ: “रोहन… तू अब बड़ा हो गया है। कॉलेज जाता है, दोस्त बनाता है, पार्टी करता है… लेकिन माँ को समय नहीं देता।”
मैं: “माँ, ऐसा नहीं है। मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूँ। लेकिन पापा अक्सर बाहर रहते हैं… तुम अकेली रहती हो।”
माँ ने मेरी तरफ मुड़कर देखा। उनकी आँखों में नमी थी। उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया। हाथ गर्म था।
माँ: “बेटा, पापा मुझे कोई महत्व नहीं देते। रात को आते हैं तो थके-हारे होते हैं। बात भी नहीं करते। मुझे लगता है जैसे मैं इस घर में अकेली हूँ। तू ही मेरा इकलौता सहारा है।”
मैंने माँ का हाथ पकड़ लिया। “माँ, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। तुम मेरी सबसे प्यारी माँ हो।”
माँ ने मुझे अपने पास खींच लिया। “रोहन… मुझे गले लगा।”
मैंने माँ को गले लगाया। उनका शरीर गर्म था। पतला नाइट गाउन पहने होने की वजह से उनकी नरम, भारी छाती मेरी छाती से सटी हुई थी। मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा और माँ के पेट से सट गया। माँ ने भी मुझे कसकर गले लगाया। उनकी साँस मेरे कान और गले पर पड़ रही थी।
अचानक माँ ने मेरा सिर थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे होंठों पर हल्का सा, गीला किस किया।
मैं चौंक गया। “माँ… ये क्या कर रही हो?”
माँ ने धीरे से, शर्माते हुए कहा, “बेटा… माफ करना। लेकिन आज रात मुझे कुछ और चाहिए। तू बड़ी उम्र का हो गया है। माँ को समझता है ना? मैं तेरी माँ हूँ… लेकिन एक औरत भी हूँ। पापा मुझे संतुष्ट नहीं करते। क्या तू माँ की मदद करेगा?”
मैं घबराकर बोला, “माँ… ये गलत है। लेकिन… तुम इतनी सेक्सी हो। मैं कई बार तुम्हें नहाते हुए या कपड़े बदलते देख चुका हूँ। मन करता है… लेकिन डर लगता है।”
माँ ने मेरे गाल पर हाथ फेरा। उनकी उंगलियाँ गर्म थीं। “कोई नहीं देख रहा बेटा। सिर्फ हम दो। आज की रात हम जो चाहें वो कर सकते हैं। तू माँ के स्तन छूना चाहता है? मेरी चूत में उंगली डालना चाहता है? माँ की गांड दबाना चाहता है?”
मैंने साहस करके कहा, “हाँ माँ… बहुत दिनों से मन में है। जब तुम साड़ी पहनकर चलती हो तो तुम्हारी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है। जब तुम ब्रा पहनकर आती हो तो स्तन देखने को जी चाहता है।”
माँ मुस्कुराई। उनकी आँखें चमक रही थीं। “तो आज सब कुछ देख ले और छू ले। लेकिन पहले बातें कर लेते हैं।”
हम बातें करते रहे। माँ ने बताया कि रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर वो अपनी चूत में दो उंगलियाँ डालकर हस्तमैथुन करती हैं और मेरे नाम से कराहती हैं। मैंने भी कबूल किया कि मैं उनकी पुरानी तस्वीरें देखकर या कल्पना करके लंड हिलाता हूँ।
माँ ने मेरे खड़े लंड पर कपड़े के ऊपर से हाथ रख दिया और धीरे से दबाया। “अरे वाह बेटा… कितना मोटा और लंबा हो गया है तेरा लंड। पापा से भी ज्यादा मोटा लग रहा है।”
मैंने माँ की गांड पर हाथ रखा और जोर से निचोड़ा। “माँ… तुम्हारी गांड बहुत सॉफ्ट और भारी है।”
माँ कराह उठी, “आह… बेटा… अब फैसला कर लो। क्या तू अपनी माँ के साथ वो सब करना चाहता है जो दो प्रेमी करते हैं? क्या तू माँ की चूत को चोदना चाहता है? कपड़े उतारकर मेरे ऊपर चढ़ना चाहता है? माँ की चूत में अपना गरम लंड घुसाना चाहता है?”
मैंने कहा, “हाँ माँ… मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता। लेकिन कैसे शुरू करें?”
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माँ मुझे अपने ऊपर लिटा लेती हैं,
माँ ने मेरी बात सुनकर धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, “तो चलो बेटा… आज रात से माँ पूरी तरह तेरी हो गई। जो करना है कर ले।”
माँ ने दोनों हाथों से मेरे गाल पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींचा और लिटा दिया अपने ऊपर। अब मैं सीधा माँ के ऊपर लेट गया था। माँ के भारी स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। नाइट गाउन पतला था, इसलिए माँ के निप्पल की उभार मेरी छाती पर साफ महसूस हो रही थी।
माँ ने मेरे होंठों पर गहरा किस किया। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे से लड़ने लगी। माँ की साँस तेज हो गई। मैंने भी माँ को कसकर गले लगाया। मेरे हाथ माँ की कमर से नीचे जाकर उनकी मोटी, नरम गांड पर चले गए। मैंने गांड को जोर से निचोड़ा। माँ कराह उठी, “आह… बेटा… गांड दबा रहा है…”
माँ के हाथ मेरे बालों में घुस गए। वो मुझे और जोर से किस करने लगीं।
मैंने माँ का नाइट गाउन धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। गाउन उनकी जांघों से ऊपर आया… फिर कमर के ऊपर… फिर छाती के ऊपर। माँ ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। मैंने गाउन पूरी तरह उतार दिया और फेंक दिया बेड के बाहर। अब माँ सिर्फ काले रंग की ब्रा और पेंटी में मेरे नीचे लेटी थीं।
माँ की ब्रा बहुत टाइट थी। उनके बड़े-बड़े स्तन ब्रा से बाहर आने को बेताब थे। ब्रा के नीचे से गोरी त्वचा और स्तनों की दरार साफ दिख रही थी।
माँ ने कहा, “अब तू भी नंगा हो जा बेटा…”
मैं उठकर बैठ गया। माँ ने मेरी टी-शर्ट दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर खींच दी। टी-शर्ट उतर गई। माँ ने मेरी छाती पर हाथ फेरा। फिर माँ ने मेरी पैंट का बटन खोला। जिप खींची। मैंने खुद पैंट नीचे उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। मेरा लंड अंडरवियर में तना हुआ खड़ा था, साफ उभार दिख रहा था।
माँ ने मेरे अंडरवियर के ऊपर से लंड को हाथ से दबाया। “वाह… कितना गरम और मोटा हो गया है… निकाल इसे बाहर बेटा।”
मैंने अंडरवियर नीचे खींचा। मेरा लंड झटके से बाहर आ गया। 7 इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, लाल सिरा चमक रहा था। थोड़ा सा प्री-कम निकल रहा था।
माँ ने लंड को हाथ में लिया और धीरे से ऊपर-नीचे किया। “रोहन… माँ की चूत में इतना मोटा लंड घुस जाएगा तो चूत फट जाएगी… पर आज फटने दो।”
मैंने माँ की ब्रा के हुक पीछे से खोले। ब्रा ढीली हो गई। माँ ने ब्रा उतार दी और फेंक दी। अब माँ के दोनों स्तन पूरी तरह नंगे थे। बड़े, गोल, गोरे, नीचे की तरफ थोड़े झुके हुए। निप्पल गुलाबी-भूरे रंग के, खड़े हो चुके थे।
मैंने दोनों हाथों से माँ के स्तन पकड़े। इतने नरम और भारी कि हाथ में नहीं समा रहे थे। मैंने दबाए। माँ कराह उठी, “आह… बेटा… स्तन दबा… जोर से दबा…”
मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। जीभ से चाटा। माँ का शरीर काँप गया। “रोहन… आह… माँ के निप्पल चूस… और जोर से…”
मैं दूसरे स्तन को भी चूसने लगा। माँ के हाथ मेरे सिर पर थे। वो मुझे अपनी छाती से और दबा रही थीं।
फिर माँ ने कहा, “अब पेंटी भी उतार दे बेटा… माँ की चूत देख ले।”
मैं माँ के पैरों के पास गया। माँ ने दोनों टाँगें थोड़ी खोल दीं। मैंने माँ की काली पेंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। पेंटी जांघों से नीचे आई… फिर घुटनों के पास… फिर टखनों से निकालकर फेंक दी।
अब माँ पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उनकी चूत साफ दिख रही थी। चूत के ऊपर हल्का सा बाल था, ट्रिम किया हुआ। चूत के होंठ मोटे और गुलाबी। बीच में से चमकदार रस निकल रहा था। चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
मैंने अपनी उंगली चूत पर रखी और रस को फैलाया। माँ काँप उठी, “आह… बेटा… उंगली मत डाल… सीधा लंड डाल… माँ की चूत लंड के लिए तरस रही है।”
मैं माँ के ऊपर आ गया। मेरा लंड माँ की चूत के ठीक ऊपर था। मैंने लंड को चूत के होंठों पर रगड़ा। चूत का गर्म रस लंड के सिरे पर लग गया।
माँ ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली। “डाल दे बेटा… अब और मत तड़पा… माँ की चूत में अपना लंड घुसा दे…”
मैंने लंड का सिरा चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाया। लंड का मोटा सिरा चूत में घुसने लगा। माँ की चूत बहुत टाइट थी। “आह… रोहन… धीरे… माँ की चूत फट रही है… आह…”
लंड आधा अंदर चला गया। माँ की आँखें बंद हो गईं। मुँह खुल गया। “आह… बेटा… और डाल… पूरा लंड डाल माँ की चूत में…”
मैंने जोर लगाया। पूरा लंड एक ही झटके में माँ की चूत में घुस गया। माँ चीख पड़ी, “आह… रोहन… माँ मर गई… इतना मोटा लंड… चूत फट गई… आह…”
मैं रुक गया। माँ की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी। गर्म, गीली और टाइट।
मैंने धीरे-धीरे बाहर निकाला और फिर जोर से अंदर धकेला। “थप” की आवाज हुई। माँ कराह उठी, “आह… जोर से… रोहन… माँ को चोद…”
भाग 2
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। लंड अंदर-बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ माँ के स्तन उछल रहे थे। माँ के निप्पल खड़े थे। माँ की आँखें आधी बंद, मुँह खुला, जीभ बाहर निकली हुई। “आह… आह… रोहन… माँ की चूत… आह… जोर से चोद… माँ तेरी रंडी बन गई… आह…”
मेरा चेहरा लाल हो गया था। पसीना निकल रहा था। मैं बोल रहा था, “माँ… तुम्हारी चूत कितनी गर्म और टाइट है… आह… माँ… लंड पूरा अंदर जा रहा है… माँ… तुम बहुत सेक्सी हो…”
माँ ने दोनों टाँगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लीं। “और गहरा… बेटा… माँ की चूत के अंदर तक लंड मार… आह… आह…”
मैं और तेज हो गया। थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। चूत से “चप-चप” की गीली आवाज आ रही थी। माँ के स्तन मेरे हाथों में थे। मैं दबा रहा था और चूस रहा था।
माँ का शरीर काँप रहा था। “रोहन… आह… माँ को कुछ हो रहा है… आह… माँ झड़ने वाली है… जोर से… आह… आह…”
माँ की चूत ने मेरे लंड को और कस लिया। माँ चीख पड़ी, “आह… रोहन… माँ झड़ गई… आह… आह… माँ मर गई बेटा…”
मैं भी रुक नहीं सका। “माँ… मैं भी… आह… माँ… लंड अंदर ही निकालूँ क्या?”
माँ ने कसकर मुझे पकड़ लिया, “अंदर ही निकाल… माँ की चूत में अपना पानी भर दे… आह…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा। लंड पूरी तरह अंदर था। मेरा लंड फड़कने लगा और गरम-गरम पानी माँ की चूत में भरने लगा। माँ ने आँखें बंद कर लीं, “आह… रोहन… माँ के अंदर… गर्म पानी… आह… कितना गरम है…”
मैं माँ के ऊपर ही लेट गया। हम दोनों साँस ले रहे थे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में था। चूत से मेरा पानी और माँ का रस निकल रहा था।
माँ ने मेरे बालों में हाथ फेरा। “रोहन… आज रात तूने माँ को सच में अपनी बना लिया…”
मैंने माँ के गाल पर किस किया। “माँ… ये रात अभी खत्म नहीं हुई…”
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माँ मुझे नहाने के लिए बाथरूम ले जाती हैं और शावर के नीचे फिर से चुदाई होती है
हम दोनों अभी भी बेड पर लेटे थे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में था। चूत से मेरा गरम पानी और माँ का रस दोनों बाहर निकल रहे थे। माँ की साँस अभी भी तेज चल रही थी।
माँ ने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए कहा, “रोहन… बेटा… अभी तो रात शुरू हुई है। चल… बाथरूम चलते हैं। पसीना और पानी दोनों साफ कर लेते हैं… और शायद वहाँ भी कुछ हो जाए।”
माँ ने मुझे ऊपर से हटाया। मेरा लंड चूत से निकला। चूत से सफेद पानी बह रहा था। माँ उठीं। उनके स्तन अभी भी हिल रहे थे। चूत से पानी टपक रहा था।
हम दोनों नंगे ही बाथरूम की तरफ गए। माँ ने लाइट ऑन की और शावर खोल दिया। ठंडा पानी पहले आया, फिर गर्म पानी। पूरा बाथरूम भाप से भर गया।
भाग 1
माँ शावर के नीचे खड़ी हो गईं। पानी उनके बालों पर, चेहरे पर, बड़े-बड़े स्तनों पर, नाभि पर और चूत पर बह रहा था। पानी की बूँदें माँ के निप्पल से टपक रही थीं। माँ ने मुझे भी अंदर खींच लिया।
पानी हम दोनों पर गिर रहा था। माँ ने मुझे गले लगाया। उनके गीले स्तन मेरी छाती से सट गए। हम दोनों गहरे किस करने लगे। पानी हमारे मुँह में जा रहा था लेकिन हम रुके नहीं। माँ की जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।
मैंने माँ के गीले स्तन दोनों हाथों से पकड़े और जोर से दबाए। पानी के कारण स्तन और भी फिसलन भरे लग रहे थे। माँ कराह उठी, “आह… बेटा… शावर में स्तन दबा रहा है… माँ की चूत फिर से गीली हो रही है…”
माँ ने मेरा लंड हाथ में लिया। पानी के कारण लंड चिकना हो गया था। माँ ने लंड को ऊपर-नीचे किया। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। माँ ने कहा, “अब पीछे से चोद मुझे बेटा… शावर में खड़ी-खड़ी… माँ की गांड पकड़कर लंड अंदर डाल…”
माँ शावर की दीवार की तरफ मुड़ गईं। दोनों हाथ दीवार पर रख दिए। कमर झुका दी। उनकी गीली, भारी गांड मेरी तरफ थी। चूत के होंठ अभी भी फूले हुए थे और पानी के साथ-साथ रस भी बह रहा था।
मैं माँ के पीछे खड़ा हो गया। मेरा लंड माँ की गांड के बीच में था। मैंने दोनों हाथ माँ की गीली कमर पर रखे। फिर हाथ नीचे ले जाकर माँ की मोटी गांड को जोर से निचोड़ा। पानी की बूँदें उछल रही थीं।
मैंने लंड को माँ की चूत पर रगड़ा। चूत गर्म थी। पानी के कारण और भी फिसलन भरी। माँ ने कमर और झुकाई। “डाल दे बेटा… अब और मत तड़पा… पीछे से माँ की चूत फाड़ दे…”
मैंने लंड का सिरा चूत के छेद पर रखा और जोर से धक्का मारा। “थप!” की आवाज हुई। पूरा लंड एक ही झटके में माँ की चूत में घुस गया। माँ चीख पड़ी, “आह… रोहन… आह… माँ मर गई… पीछे से इतना मोटा लंड… चूत फट गई… आह…”
भाग 2
मैंने माँ की कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और रफ्तार शुरू कर दी। लंड अंदर-बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ माँ की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। “थप-थप-थप” की आवाज शावर के पानी की आवाज के साथ मिल रही थी। पानी हम दोनों पर गिर रहा था। माँ के बाल भीगकर पीठ पर चिपक गए थे।
माँ का चेहरा दीवार की तरफ था। आँखें बंद, मुँह खुला। पानी उनके मुँह में जा रहा था लेकिन वो कराह रही थीं, “आह… आह… रोहन… पीछे से… और जोर से चोद… माँ की चूत… आह… माँ तेरी रंडी है… जोर से मार… आह… आह…”
मैंने माँ के गीले बाल पकड़ लिए और पीछे की तरफ खींचे। माँ का सिर ऊपर उठ गया। “आह… बेटा… बाल मत खींच… आह… लेकिन और जोर से चोद…”
मैं और तेज हो गया। लंड पूरा बाहर निकालता और फिर जोर से अंदर घुसा देता। माँ की चूत से “चप-चप” की गीली आवाज आ रही थी। पानी के कारण लंड और चूत दोनों चिकने हो गए थे। माँ के स्तन दीवार से टकरा रहे थे और हिल रहे थे।
मेरा चेहरा लाल हो चुका था। पसीना और पानी दोनों मिल गए थे। मैं बोल रहा था, “माँ… तुम्हारी गांड और चूत दोनों कितनी मोटी और सेक्सी हैं… आह… माँ… लंड पूरा अंदर जा रहा है… माँ… तुम्हारी चूत पानी की तरह गीली है… आह…”
माँ का शरीर काँप रहा था। “रोहन… आह… माँ फिर से झड़ने वाली है… आह… जोर से… आह… माँ मर गई बेटा… चोद… चोद… आह…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। माँ की गांड लाल हो गई थी मेरे धक्कों से। अचानक माँ चीख पड़ी, “आह… रोहन… माँ झड़ गई… आह… आह… माँ की चूत… आह…”
माँ की चूत ने मेरे लंड को कस लिया। माँ का शरीर हिल रहा था। मैं भी रुक नहीं सका। “माँ… मैं भी… आह… माँ… अंदर ही निकालूँ?”
माँ ने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली, “अंदर ही… माँ की चूत में भर दे… आह…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा। लंड पूरा अंदर था। मेरा लंड फड़कने लगा और दूसरी बार गरम पानी माँ की चूत में भर गया। माँ ने सिर पीछे झुकाया, “आह… रोहन… फिर से गर्म पानी… आह… माँ की चूत भर गई…”
हम दोनों थककर शावर की दीवार से सट गए। पानी अभी भी हम पर गिर रहा था। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में था। चूत से पानी और मेरा वीर्य दोनों बह रहे थे।
माँ ने साँस लेते हुए कहा, “रोहन… आज रात तूने माँ को दो बार झड़ा दिया…”
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सुबह होते ही माँ मुझे किचन में बुलाती है और नाश्ता बनाते वक्त पीछे से चुपके से चुदाई करते हैं।
रात भर हम दोनों नंगे बेड पर लिपटे रहे। माँ मेरी बाहों में सो गई थीं। सुबह 7 बजे की धूप कमरे में आ रही थी। पापा अभी भी बाहर थे।
माँ सबसे पहले उठीं। उन्होंने सिर्फ एक पतला सफेद नाइट गाउन पहना। गाउन इतना पतला था कि उनके निप्पल की उभार साफ दिख रही थी। चूत अभी भी रात के पानी से थोड़ी गीली थी। माँ ने बाल बांधे और किचन की तरफ चली गईं।
मैं भी थोड़ी देर बाद उठा। नंगा ही था। लंड अभी भी थोड़ा खड़ा था।
तभी माँ की आवाज आई किचन से, “रोहन बेटा… उठ गया? नाश्ता बना रही हूँ… आ जा थोड़ा मदद कर दे।”
भाग 1
मैं नंगा ही किचन की तरफ गया। किचन में माँ चूल्हे के सामने खड़ी थीं। नाश्ता बना रही थीं — पराठे और चाय। गैस जल रही थी। माँ की पीठ मेरी तरफ थी। गाउन उनकी गांड तक आ रहा था। जब वो झुकतीं तो गांड का आकार साफ दिखता।
मैं चुपके से पीछे से माँ के पास गया। माँ को कुछ पता नहीं चला। मैंने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर माँ के स्तन पकड़ लिए।
माँ चौंक गई, “आह… रोहन… सुबह-सुबह… क्या कर रहा है बेटा?”
मैंने माँ के कान में फुसफुसाया, “माँ… रात को तो तूने कहा था जब चाहे चोद सकता हूँ… अब सुबह हो गई… माँ की चूत फिर से मेरा लंड चाह रही है।”
मैंने माँ के स्तन जोर से दबाए। नाइट गाउन के ऊपर से ही निप्पल को उंगलियों से निचोड़ा। माँ की साँस तेज हो गई। “रोहन… अभी नाश्ता बना रही हूँ… कोई आ गया तो… आह…”
मैंने माँ की कमर पर हाथ रखा और गाउन को ऊपर खींचा। गाउन कमर तक आ गया। अब माँ की नंगी गांड मेरे सामने थी। मैंने एक हाथ से माँ की चूत पर हाथ रखा। चूत अभी भी थोड़ी गीली थी।
माँ ने चूल्हे की तरफ मुंह करके कहा, “बेटा… मत कर… नाश्ता जल जाएगा… आह…”
लेकिन मैंने नहीं सुना। मैंने अपना लंड माँ की गांड के बीच में रगड़ा। लंड तुरंत खड़ा हो गया। माँ ने पराठे को पलटा और हाथ काँप रहे थे।
मैंने माँ की चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं। चूत अंदर से गर्म और गीली थी। माँ कराह उठी, “आह… रोहन… उंगली मत डाल… आह… चूल्हे के सामने…”
मैंने उंगलियाँ निकालीं और लंड को चूत पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा चूत में घुसने लगा। माँ ने कमर थोड़ी झुकाई। “आह… बेटा… धीरे… नाश्ता… आह…”
पूरा लंड एक ही धक्के में माँ की चूत में घुस गया। माँ ने मुँह बंद करके कराहा, “आह… मम्म… रोहन… सुबह-सुबह… माँ की चूत में लंड… आह…”
भाग 2
मैंने माँ की कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। लंड चूत में घुसता और निकलता। माँ पराठे बना रही थीं लेकिन उनका ध्यान बिल्कुल नहीं था। हाथ काँप रहे थे।
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। “थप-थप” की आवाज किचन में गूँजने लगी। माँ ने एक हाथ चूल्हे पर रखा और दूसरा काउंटर पर। सिर नीचे झुकाया। बाल उनके चेहरे पर आ गए।
माँ फुसफुसा रही थी, “आह… रोहन… जोर मत मार… आवाज आएगी… आह… माँ की चूत… आह… पराठा जल जाएगा… आह…”
लेकिन मैं रुका नहीं। लंड पूरा अंदर घुसा रहा था। माँ की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर माँ के स्तन पकड़ लिए और जोर से दबाने लगा। दूसरे हाथ से माँ की गांड पर थप्पड़ मारा।
माँ का चेहरा लाल हो गया था। आँखें आधी बंद, होंठ काट रही थीं ताकि जोर से न चीख पड़े। “आह… आह… बेटा… चोद… लेकिन धीरे… आह… माँ झड़ जाएगी… आह…”
मैंने कान में फुसफुसाया, “माँ… तुम्हारी चूत सुबह-सुबह भी कितनी गर्म है… आह… माँ… लंड पूरा अंदर है…”
माँ का शरीर काँपने लगा। “रोहन… आह… माँ… आह… माँ झड़ गई… आह… आह…”
माँ की चूत ने लंड को कस लिया। माँ ने काउंटर को जोर से पकड़ लिया। मैं भी रुक नहीं सका। “माँ… मैं भी… आह… अंदर ही निकालूँ?”
माँ ने सिर हिलाया, “हाँ… भर दे… आह…”
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा। लंड माँ की चूत में फड़कने लगा और तीसरी बार गरम पानी माँ के अंदर भर गया। माँ ने मुँह बंद करके कराहा, “आह… रोहन… फिर से… गर्म पानी… आह… माँ की चूत भर गई…”
हम दोनों कुछ सेकंड ऐसे ही खड़े रहे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत में था। चूत से पानी टपक रहा था। पराठा थोड़ा जल गया था लेकिन हमें परवाह नहीं थी।
माँ ने साँस लेते हुए कहा, “रोहन… सुबह-सुबह किचन में… तूने माँ को फिर से झड़ा दिया…”
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