ससुर और बहू की गुप्त चुदाई | sasur bahu family sex story

ससुर और बहू की गुप्त चुदाई sasur bahu family sex story

मेरा नाम प्रिया है। उम्र 24 साल। मेरे पति रोहन (26 साल) बैंक में जॉब करते हैं और अक्सर बाहर टूर पर रहते हैं। सासु माँ का देहांत हो चुका है। अब घर में सिर्फ मैं, मेरे पति और ससुर जी (52 साल) रहते हैं। ससुर जी रिटायर्ड हैं, घर संभालते हैं।

यह कहानी शुरू हुई जब रोहन को 2 महीने का लंबा टूर मिला। वो दिल्ली चले गए। घर में सिर्फ मैं और ससुर जी रह गए।

पहले कुछ दिन नॉर्मल गुजरे। लेकिन धीरे-धीरे सस्पेंस शुरू हुआ।

एक शाम बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरा। मैं डर गई। ससुर जी मेरे कमरे में आए।

ससुर जी: “प्रिया बेटा… डर लग रहा है? आ जा, मेरे पास बैठ।”

मैं उनके पास बैठ गई। अंधेरे में उनका हाथ मेरी कमर पर था। उनका शरीर गर्म था। मैंने नाइटी पहनी हुई थी, ब्रा नहीं थी। मेरे स्तन हल्के से उनके हाथ से टकरा रहे थे।

ससुर जी: “तू अकेली रहती है ना… रोहन अक्सर बाहर रहता है। तुझे कोई तकलीफ तो नहीं होती?”

मैं: (थोड़ी शरमा कर) “हाँ ससुर जी… कभी-कभी बहुत अकेलापन लगता है। रोहन भी… ज्यादा समय नहीं देते।”

ससुर जी चुप रहे। फिर बोले, “मैं भी अकेला हूँ बेटा… सासु माँ चली गईं… अब घर में सिर्फ तू और मैं।”

बिजली आई। लेकिन हम अलग नहीं हुए। ससुर जी मेरी तरफ देख रहे थे। उनकी नजर मेरे क्लिवेज पर थी। मैंने नोटिस किया लेकिन कुछ नहीं बोली।

अगले दिन से चीजें बदलने लगीं।

ससुर जी मुझे ज्यादा मदद करने लगे। किचन में, कपड़े धोने में। एक दिन मैं नहा रही थी। दरवाजा थोड़ा खुला था। जब मैं तौलिए से खुद को पोंछ रही थी, ससुर जी अचानक कमरे में आ गए। उन्होंने मुझे नंगी देख लिया।

ससुर जी: (घबराते हुए) “सॉरी बेटा… मैं… मैंने सोचा तू नहीं है…”

मैं जल्दी तौलिया लपेट लिया। लेकिन उनकी आँखें मेरे शरीर पर अटकी हुई थीं। मेरे बड़े स्तन, पतली कमर, गोल गांड… सब कुछ उन्होंने देख लिया था।

उस रात से सस्पेंस बढ़ गया।

रात को ससुर जी मेरे कमरे में आए। बैठ गए। बातें करने लगे।

ससुर जी: “प्रिया… तू बहुत सुंदर है। रोहन भाग्यशाली है। लेकिन वो तुझे समय नहीं देता… तुझे सेक्स की जरूरत नहीं लगती?”

मैं हैरान हुई। लेकिन दिल तेज धड़क रहा था।

मैं: “ससुर जी… ये क्या बातें कर रहे हैं…”

ससुर जी: (पास आते हुए) “बेटा… मैं बूढ़ा नहीं हूँ। मैं समझता हूँ। तू अकेली है। मैं भी अकेला हूँ। अगर तू चाहे तो… हम दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं। कोई जान नहीं पाएगा।”

मैं चुप रही। लेकिन मेरा शरीर गर्म हो रहा था। ससुर जी ने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया।

ससुर जी: “देख… तू कितनी जवां है। तेरे स्तन… तेरी गांड… सब कुछ देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।”

मैं: (सांस तेज करते हुए) “ससुर जी… ये गलत है… आप मेरे पति के पिता हैं…”

ससुर जी: “गलत है… लेकिन मजा भी आएगा। तू अकेली है… मैं तुझे खुश कर सकता हूँ।”

उन्होंने मुझे गले लगाया। उनके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे। मैंने विरोध नहीं किया। उन्होंने मेरी नाइटी के अंदर हाथ डाला और मेरे स्तन दबा दिए।

मैं: (आह भरते हुए) “आह… ससुर जी… क्या कर रहे हैं…”

ससुर जी: “तू भी तो गीली हो रही है प्रिया… देख… तेरी चूत गीली हो गई है।”

उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से चूत सहलाई। मैं काँप गई।

हम दोनों बहुत करीब आ गए थे। ससुर जी ने मुझे किस किया। लंबा, गहरा किस। उनकी जीभ मेरे मुंह में थी। मेरे हाथ उनके लंड पर चले गए – पजामे के ऊपर से। वो बहुत मोटा और सख्त था।

ससुर जी: “देख… तेरा ससुर कितना हार्ड हो गया है तेरे लिए… अब बता… हम इसे आगे बढ़ाएँ?”

मैं उनकी आँखों में देख रही थी। लस्ट से भरी आँखें। मेरा चेहरा लाल हो चुका था। स्तन उछल रहे थे। चूत पूरी गीली हो चुकी थी। ससुर जी का लंड मेरे हाथ में था।

ससुर जी: “प्रिया… अब और इंतजार नहीं… लेकिन पहले बता… तू क्या चाहती है? कैसे शुरू करें हमारी चुदाई?”

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ससुर जी और बहू की पहली चुदाई (मिशनरी)

ससुर जी ने मुझे धीरे से बेड पर लिटा दिया। मेरी सांसें बहुत तेज थीं। नाइटी के अंदर मेरे स्तन उछल रहे थे। ससुर जी मेरे ऊपर चढ़ गए। उन्होंने पहले मुझे जोर से किस किया। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी। मैं भी उनकी जीभ चूस रही थी।

फिर ससुर जी ने मेरी नाइटी के दोनों कंधों से स्ट्रैप नीचे खींचा। नाइटी को ऊपर की ओर खींचते हुए उन्होंने मेरे दोनों भारी स्तनों को बाहर निकाल लिया। मेरे निप्पल्स पहले से ही सख्त खड़े थे। ससुर जी ने दोनों स्तनों को हाथों से दबाया।

ससुर जी: (आँखें लाल करके) “प्रिया… तेरे स्तन कितने बड़े और मुलायम हैं… आज से ये मेरे हैं…”

मैं: (आह भरते हुए) “आह… ससुर जी… क्या कर रहे हैं…”

उन्होंने मेरी नाइटी पूरी तरह ऊपर खींचकर उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी। ससुर जी ने मेरी पैंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। पैंटी उतरते ही मेरी चूत सामने आ गई – पूरी गीली, फूली हुई, पानी टपक रहा था।

ससुर जी: “वाह… प्रिया… तेरी चूत कितनी गीली हो गई है… देख… पानी टपक रहा है…”

उन्होंने मेरी टांगें फैलाईं और अपना मुंह मेरी चूत के पास ले गए। पहले तो उन्होंने एक लंबी चाट मारी। मैं काँप उठी।

मैं: (जोर से आह भरते हुए) “आह्ह्ह्ह… ससुर जी… क्या कर रहे हैं… आह्ह्ह…”

ससुर जी मेरी चूत चाटने लगे। जीभ अंदर-बाहर कर रहे थे। मेरी क्लिट को चूस रहे थे। मैं दोनों हाथों से चादर पकड़कर कस रही थी। मेरी कमर ऊपर उठ रही थी।

मैं: (आँखें बंद करके, मुंह खुला) “आह्ह्ह… ससुर जी… मेरा… आह्ह्ह… ससुर जी… मम्मी… नहीं… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”

ससुर जी: (चाटते हुए) “प्रिया… तेरी चूत का स्वाद… कितना मीठा है… आज से ये चूत मेरी है…”

उन्होंने 5-6 मिनट तक मेरी चूत चाटी। मैं दो बार झड़ चुकी थी। मेरी चूत से पानी निकल रहा था। ससुर जी ने सब कुछ चाट लिया।

फिर ससुर जी ऊपर आए। उन्होंने अपना पजामा और अंडरवियर उतार दिया। उनका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार। वो बहुत हार्ड था।

ससुर जी ने मेरी टांगें और फैलाईं। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया।

ससुर जी: “प्रिया… अब मेरा लंड तेरी चूत में जाएगा… तैयार है ना बेटा?”

मैं: (डर और excitement से) “हाँ ससुर जी… धीरे से…”

उन्होंने जोर लगाया। लंड का सिरा अंदर चला गया। मैं दर्द से चीख पड़ी।

मैं: “आह्ह्ह्ह… ससुर जी… दर्द हो रहा है… आह्ह्ह…”

ससुर जी: “थोड़ा और… बस…”

उन्होंने और दबाया। आधा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत उनकी मोटाई से फट रही थी। ससुर जी का चेहरा pleasure से तन गया था। आँखें बंद, दांत किटकिटा रहे थे।

ससुर जी: “आह… प्रिया… तेरी चूत कितनी टाइट है… मेरा लंड अंदर जा रहा है…”

उन्होंने और जोर लगाया। पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं जोर से चीखी।

मैं: “आह्ह्हhhhh… ससुर जी… पूरा… आह्ह्ह… मेरा पेट फट रहा है…”

ससुर जी मिशनरी पोजीशन में चोदने लगे। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। हर धक्के पर मेरा शरीर हिल रहा था। मेरे स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। ससुर जी एक हाथ से मेरे स्तन दबा रहे थे।

ससुर जी: (हर धक्के पर) “प्रिया… तेरी चूत… मेरे लंड को कस रही है… आह… आज से तू मेरी बहू नहीं… मेरी चूत है…”

मैं: (आँखें आधी बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर) “आह… आह… ससुर जी… जोर से… आह्ह्ह… मेरा ससुर मुझे चोद रहा है… आह्ह्ह…”

ससुर जी का चेहरा पूरी तरह विकृत हो गया था। पसीना आ रहा था। वे जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे। बेड हिल रहा था।

ससुर जी: “प्रिया… देख… तेरा ससुर तुझे चोद रहा है… तेरी चूत में लंड डालकर… आह… कितना मजा आ रहा है…”

मैं: (चीखते हुए) “आह्ह्ह… ससुर जी… और जोर से… मेरा… आह्ह्ह… मैं मर गई… ससुर जी… आपका लंड… बहुत मोटा है…”

ससुर जी और तेज हो गए। मेरी टांगें उनके कंधों पर थीं। वे गहरे धक्के लगा रहे थे। हर बार लंड पूरा बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर घुसा रहे थे।

मैं झड़ चुकी थी। मेरी चूत बार-बार कस रही थी। ससुर जी का चेहरा लाल हो गया था। वे भी अंतिम सीमा पर थे।

ससुर जी: “प्रिया… मैं आने वाला हूँ… तेरी चूत में निकाल दूँ?”

मैं: (हाँफते हुए) “हाँ ससुर जी… अंदर ही… आह्ह्ह… मेरा ससुर… मुझमें निकालो…”

ससुर जी ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और मेरी चूत के अंदर ही झड़ गए। गरम-गरम पानी मेरी चूत में भर गया। ससुर जी का शरीर काँप रहा था। उनका चेहरा पूरी तरह pleasure से भरा था।

हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर गए। ससुर जी का लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर था।

ससुर जी: (मेरे कान में फुसफुसाते हुए) “प्रिया… आज से तू मेरी है…”

मैं: (संतुष्ट होकर) “हाँ ससुर जी… अब मैं आपकी बहू नहीं… आपकी चूत हूँ…”

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डॉगी स्टाइल में दूसरी राउंड

पहली चुदाई के बाद ससुर जी का लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर था। हम दोनों सांसें ले रहे थे। ससुर जी ने मेरे बाल सहलाए और कान में फुसफुसाया।

ससुर जी: “प्रिया… अभी खत्म नहीं हुआ… अब तुझे डॉगी स्टाइल में चोदूंगा… तेरी गांड थप्पड़ मारते हुए…”

मैं थकी हुई थी लेकिन फिर से जोश आ गया। ससुर जी ने अपना लंड धीरे से बाहर निकाला। मेरी चूत से उनका पानी और मेरा रस टपक रहा था।

ससुर जी: “घुटनों के बल हो जा प्रिया… गांड ऊपर उठा…”

मैं धीरे से उठी और घुटनों के बल हो गई। मेरी गांड ऊपर उठा दी। ससुर जी मेरे पीछे आ गए। उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली। मेरी गांड उनके सामने थी – गोल, सफेद, अभी भी लाल निशान पड़ रहे थे।

ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्का मारा।

मैं: (जोर से चीखते हुए) “आह्ह्हhhhh… ससुर जी… फिर से… आह्ह्ह…”

पूरा लंड एक ही धक्के में मेरी चूत में घुस गया। ससुर जी ने मेरी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा।

ठप्प्प्प्प!

मैं: “आह्ह्ह… ससुर जी… थप्पड़ मत मारो… आह्ह्ह…”

ससुर जी: (हँसते हुए) “चुप… तेरी गांड लाल कर दूंगा…”

वे जोर-जोर से चोदने लगे। हर धक्के पर उनकी जांघें मेरी गांड से टकरा रही थीं। “पच-पच-पच” की तेज आवाज कमरे में गूंज रही थी। ससुर जी एक हाथ से मेरी कमर पकड़े हुए थे, दूसरे हाथ से मेरी गांड पर लगातार थप्पड़ मार रहे थे।

ठप्प्प! ठप्प्प! ठप्प्प!

मैं: (मुंह बेड में दबाकर, चीखते हुए) “आह्ह्ह… ससुर जी… जोर से… आह्ह्ह… मेरी गांड लाल हो गई… आह्ह्ह… मेरा ससुर मुझे डॉगी में चोद रहा है…”

ससुर जी का चेहरा पूरी तरह lust से भरा था। आँखें लाल, दांत बाहर निकले हुए, पसीना टपक रहा था। वे बहुत जोर से धक्के लगा रहे थे।

ससुर जी: “प्रिया… तेरी गांड कितनी मोटी और मुलायम है… आह… थप्पड़ मारने का मजा आ रहा है… तेरी चूत फिर से टाइट हो गई…”

मैं: (आँखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर निकली हुई) “आह्ह्ह… ससुर जी… और थप्पड़ मारो… आह्ह्ह… मेरा ससुर… मुझे मारो… आह्ह्ह… मैं आपकी हूँ…”

ससुर जी ने मेरे बाल पकड़ लिए और सिर पीछे खींच लिया। अब मेरी पीठ झुक गई थी। वे और भी गहरे धक्के लगा रहे थे। हर थप्पड़ के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ झटका खा रहा था।

ठप्प्प! ठप्प्प! ठप्प्प!

मैं: “आह्ह्ह… आह्ह्ह… ससुर जी… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”

ससुर जी: “हाँ प्रिया… झड़… तेरी चूत को और भी गीला कर… आह… मेरा लंड तेरी चूत में घुसा हुआ है…”

मैं जोर से काँपी और दूसरी बार झड़ गई। मेरी चूत ने ससुर जी के लंड को कस लिया। ससुर जी का चेहरा और भी विकृत हो गया।

ससुर जी: “आह… प्रिया… मैं भी आने वाला हूँ… तेरी चूत में फिर से निकाल दूँ?”

मैं: (हाँफते हुए) “हाँ ससुर जी… अंदर ही… आह्ह्ह… मेरा ससुर… मुझे भर दो…”

ससुर जी ने आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे और फिर से मेरी चूत के अंदर झड़ गए। गरम पानी मेरी चूत में भर गया। ससुर जी का शरीर काँप रहा था। उन्होंने मेरी गांड पर आखिरी थप्पड़ मारा।

ठप्प्प!

हम दोनों थककर बेड पर गिर गए। ससुर जी मेरे पीछे लेट गए और मुझे गले लगाया। उनका लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर था।

ससुर जी: (मेरे कान में) “प्रिया… आज से तू मेरी रखैल है… जब चाहे चोदूंगा…”

मैं: (संतुष्ट होकर) “हाँ ससुर जी… मैं आपकी हूँ… आप जब चाहें मुझे चोद सकते हैं…”

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अगले दिन की चुदाई – किचन में

रात भर ससुर जी ने मुझे दो बार चोदा था। सुबह जब मैं उठी तो मेरी चूत अभी भी दर्द कर रही थी और ससुर जी का सूखा हुआ पानी मेरी जांघों पर लगा हुआ था।

सुबह 8 बजे मैं किचन में नाश्ता बना रही थी। मैंने हल्की सी नाइटी पहनी हुई थी – बिना ब्रा और पैंटी के। नाइटी थोड़ी छोटी थी, इसलिए जब मैं झुकती तो मेरी गांड और चूत साफ दिख जाती।

ठीक उसी वक्त ससुर जी किचन में आए। उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।

ससुर जी: (पीछे से आकर मेरी कमर पकड़ते हुए) “प्रिया… सुबह-सुबह तू कितनी सेक्सी लग रही है…”

मैं: (घबराते हुए) “ससुर जी… क्या कर रहे हैं… कोई आ जाएगा…”

ससुर जी ने मेरी नाइटी ऊपर खींच दी। मेरी नंगी गांड उनके सामने आ गई। उन्होंने एक हाथ से मेरी चूत सहलाई – अभी भी गीली थी।

ससुर जी: “देख… तेरी चूत अभी भी गीली है… रात का असर है ना?”

उन्होंने अपना पजामा उतार दिया। उनका लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। उन्होंने मुझे किचन के काउंटर पर झुका दिया। मेरे स्तन काउंटर पर दब गए। नाइटी पूरी तरह ऊपर चढ़ गई थी।

ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा और एक जोरदार धक्का मारा।

मैं: (जोर से आह भरते हुए) “आह्ह्ह… ससुर जी… धीरे… आह्ह्ह…”

पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। ससुर जी ने मेरी कमर पकड़ ली और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के पर मेरी गांड उनके पेट से टकरा रही थी।

पच-पच-पच-पच!

मैं: (मुंह काउंटर पर दबाकर) “आह्ह्ह… ससुर जी… सुबह-सुबह… आह्ह्ह… कोई देख लेगा… आह्ह्ह…”

ससुर जी: (मेरी गांड थप्पड़ मारते हुए) “कोई नहीं देखेगा… तू चुपचाप चुद… तेरी चूत सुबह-सुबह कितनी टाइट है…”

ठप्प्प! ठप्प्प! ठप्प्प!

ससुर जी लगातार मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे। मेरी गांड लाल हो चुकी थी। वे बहुत तेजी से चोद रहे थे।

ससुर जी: “प्रिया… तेरी गांड कितनी मोटी है… आह… थप्पड़ मारने का मजा आ रहा है… तेरी चूत मेरा लंड कस रही है…”

मैं: (आँखें बंद, मुंह खुला) “आह्ह्ह… ससुर जी… जोर से… आह्ह्ह… मेरा ससुर मुझे किचन में चोद रहा है… आह्ह्ह… मैं आपकी हूँ…”

ससुर जी ने मेरे बाल पकड़ लिए और सिर पीछे खींच लिया। अब वे और भी गहरे धक्के लगा रहे थे।

पच-पच-पच! ठप्प्प! पच-पच!

मैं: “आह्ह्ह… आह्ह्ह… ससुर जी… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…”

ससुर जी: “हाँ प्रिया… झड़… तेरी चूत को और गीला कर… आह… मैं भी आने वाला हूँ…”

मैं जोर से काँपी और झड़ गई। मेरी चूत ने ससुर जी के लंड को कस लिया। ससुर जी ने भी आखिरी जोरदार धक्का मारा और मेरी चूत के अंदर ही झड़ गए।

हम दोनों कुछ देर उसी हालत में खड़े रहे। ससुर जी का लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर था। उनका गरम पानी मेरी जांघों से टपक रहा था।

ससुर जी ने मेरी नाइटी नीचे की और मेरे गाल पर किस किया।

ससुर जी: “अब से हर सुबह किचन में तुझे चोदूंगा प्रिया…”

मैं: (शरमाते हुए लेकिन मुस्कुराते हुए) “हाँ ससुर जी… मैं तैयार रहूंगी…”

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पति का जल्दी आना और तीनों की सेक्स

शाम के 6 बजे की बात है। ससुर जी मुझे बेडरूम में चोद रहे थे। मैं नंगी थी, घुटनों के बल, और ससुर जी पीछे से मुझे डॉगी स्टाइल में चोद रहे थे।

ठप्प्प! ठप्प्प! ठप्प्प!

मैं: (मुंह बेड में दबाकर) “आह्ह्ह… ससुर जी… जोर से… आह्ह्ह… मेरी चूत फट रही है…”

ससुर जी: “प्रिया… तेरी चूत आज और भी टाइट लग रही है… आह…”

ठीक उसी वक्त कमरे का दरवाजा खुला।

मेरा पति रोहन अंदर आया। वह जल्दी घर आ गया था। जैसे ही उसने सीन देखा – मैं नंगी, घुटनों के बल, ससुर जी मेरे पीछे से लंड घुसाए हुए, मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए – उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

रोहन: (शॉक में) “ये… ये क्या हो रहा है?! पापा… प्रिया… तुम दोनों…!!”

ससुर जी रुके नहीं। उन्होंने एक और जोरदार धक्का मारा।

ससुर जी: “रोहन… बेटा… अब छुपाने की जरूरत नहीं… प्रिया अब मेरी भी है…”

मैं डर से काँप रही थी। लेकिन मेरी चूत अभी भी ससुर जी के लंड को कस रही थी।

रोहन का चेहरा पहले गुस्से से लाल हुआ, फिर उसकी नजर मेरे नंगे शरीर पर पड़ी – मेरे झूलते स्तन, लाल गांड, और ससुर जी का लंड मेरी चूत में घुसा हुआ। उसका लंड भी पैंट में खड़ा हो गया।

रोहन: (गुस्से में लेकिन आवाज काँप रही थी) “पापा… ये… ये गलत है… प्रिया मेरी पत्नी है…”

ससुर जी: (धीरे से चोदते हुए) “रोहन… तू भी तो उसे समय नहीं देता… देख… प्रिया कितनी प्यासी है… आ जा… आज से हम तीनों मिलकर रखेंगे…”

रोहन कुछ देर खड़ा रहा। फिर उसने दरवाजा बंद किया और कमरे में आया।

मैं: (शरमाते हुए, लेकिन चूत में लंड लिए) “रोहन… माफ कर दो… मुझे अकेलापन लग रहा था… ससुर जी ने…”

रोहन मेरे पास आया। उसने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया (पैंट उतारकर)।

रोहन: (गुस्से और lust में) “चूस… तेरी चूत तो पापा ले रहे हैं… अब तू मेरा लंड चूस…”

मैं रोहन का लंड चूसने लगी जबकि ससुर जी मुझे पीछे से चोद रहे थे।

अब तीनों की सेक्स शुरू हो गई

ससुर जी डॉगी में मुझे चोद रहे थे। मैं रोहन का लंड चूस रही थी।

ससुर जी: “रोहन… देख… तेरी पत्नी कितनी अच्छी चूसती है… आह… तेरी चूत भी बहुत टाइट है प्रिया…”

रोहन: (मेरे बाल पकड़कर) “प्रिया… आज से तू हम दोनों की है… आह… चूस… जोर से…”

10 मिनट बाद ससुर जी ने मुझे लिटाया। अब रोहन मेरे ऊपर आ गए और मिशनरी में चोदने लगे। ससुर जी मेरे मुंह में लंड डालकर चूसवा रहे थे।

रोहन: “प्रिया… तेरी चूत आज और भी गीली है… पापा के लंड से… आह…”

मैं: (दोनों लंड लेते हुए) “आह्ह्ह… रोहन… ससुर जी… दोनों… मुझे चोद रहे हो… आह्ह्ह… मैं दोनों की हूँ…”

फिर पोजीशन बदली। ससुर जी मेरे नीचे लेट गए। मैं उनके ऊपर बैठ गई (काउगर्ल)। रोहन मेरे पीछे आ गए और मेरी गांड में उंगली डालने लगे।

रोहन: “आज तेरी गांड भी मारेंगे प्रिया…”

मैं: (डर और excitement से) “आह्ह्ह… रोहन… धीरे…”

रोहन ने धीरे से अपना लंड मेरी गांड में घुसाया। अब दोनों लंड मेरे अंदर थे – एक चूत में, एक गांड में।

मैं: (जोर से चीखते हुए) “आह्हhhhh… दोनों… फट गई… आह्ह्ह… ससुर जी… रोहन… मुझे मार रहे हो…”

ससुर जी और रोहन दोनों मिलकर मुझे चोद रहे थे। मैं उनके बीच सैंडविच हो गई थी।

ससुर जी: “प्रिया… आज से तू हमारी कॉमन चूत है…”

रोहन: “हाँ पापा… अब हम तीनों एक साथ रहेंगे… आह… प्रिया… तेरी गांड और चूत दोनों टाइट हैं…”

हम तीनों एक साथ झड़े। ससुर जी मेरी चूत में, रोहन मेरी गांड में।

हम तीनों थककर बेड पर गिर गए।

रोहन ने मुझे गले लगाया और कहा, “अब से कोई राज नहीं… हम तीनों मिलकर सेक्स करेंगे…”

ससुर जी: “हाँ बेटा… अब प्रिया हम दोनों की है।”

मैं: (दोनों के बीच लेटकर) “हाँ… अब मैं दोनों की हूँ…”

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