भाभी ने पैर मालिश के बहाने देवर से जबरदस्ती चूत चुदवाई | bhabhi foot massage sex

भाभी और देवर की कहानी

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शहर के एक व्यस्त मोहल्ले में शर्मा परिवार रहता था। घर में तीन मंजिला बंगला था, जिसमें ऊपरी मंजिल पर बड़े भाई राजेश अपनी पत्नी रीना (भाभी) के साथ रहते थे। राजेश एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जिनकी नौकरी के कारण अक्सर बाहर रहना पड़ता था। नीचे मंजिल पर उनके छोटे भाई विक्रम (देवर) रहता था,

जो अभी कॉलेज के अंतिम साल में था। विक्रम 22 साल का, लंबा, स्वस्थ शरीर वाला लड़का था जो जिम जाता था और पढ़ाई में भी अच्छा था। रीना 28 साल की थी — गोरी, आकर्षक, घने काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वोह फिगर जो किसी को भी मोह ले। शादी को पाँच साल हो चुके थे, लेकिन राजेश की व्यस्तता के कारण रीना अकेलापन महसूस करती थी।

घर में एक पुरानी नौकरानी रमा भी थी, जो सुबह-शाम का काम संभालती थी। रमा चुपचाप रहने वाली औरत थी, लेकिन सब कुछ देखती रहती थी। राजेश के माता-पिता गाँव में रहते थे, इसलिए घर में मुख्य रूप से ये चार लोग ही थे।

एक शाम की बात है। राजेश फिर से दो हफ्ते के लिए दिल्ली गया हुआ था। रीना दिन भर अकेली थी। शाम को विक्रम कॉलेज से लौटा तो थका हुआ लग रहा था। उसने जूते उतारे और सोफे पर बैठ गया। रीना रसोई से चाय लेकर आई।

“विक्की, आज बहुत थका लग रहा है?” रीना ने पूछा, उसकी आवाज में ममता थी।

“हाँ भाभी, आज फुटबॉल मैच था। पैरों में दर्द हो रहा है।” विक्रम ने पैर रगड़ते हुए कहा।

रीना मुस्कुराई। उसने सोचा कि ये मौका अच्छा है। वोह पिछले कई महीनों से विक्रम की तरफ आकर्षित हो रही थी। उसकी जवानी, उसका फिट शरीर… रीना अंदर ही अंदर जलती रहती थी।

“आ जा, मैं पैर मालिश कर देती हूँ। राजेश भैया तो हैं नहीं, तुझे आराम तो करना ही चाहिए।” रीना ने कहा और विक्रम के पास बैठ गई।

विक्रम थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन भाभी की बात मान ली। रीना ने उसके पैर अपने गोद में रख लिए। उसकी नरम उँगलियाँ विक्रम के पैरों पर घूमने लगीं। धीरे-धीरे मालिश बढ़ती गई। रीना जानबूझकर विक्रम की पिंडलियों और जाँघों की तरफ उँगलियाँ ले जाती। विक्रम की साँसें भारी होने लगीं।

“भाभी… ये… बहुत अच्छा लग रहा है।” विक्रम ने कहा, उसकी आँखें बंद हो गईं।

रीना अंदर से मुस्कुराई। वोह जानती थी कि अब कंट्रोल उसके हाथ में है। उसने धीरे से विक्रम की जाँघ पर हाथ फेरा। “विक्की, तू तो बहुत टाइट है। थोड़ा और ऊपर मालिश करूँ?”

विक्रम की आँखें खुलीं। वोह कुछ समझ सका नहीं, लेकिन शरीर में गर्मी फैलने लगी थी। रीना ने अब अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका लिया, जिससे उसकी गहरी ब्लाउज वाली छाती दिखने लगी। उसकी उँगलियाँ अब विक्रम की जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर घूम रही थीं।

“भाभी… ये क्या कर रही हो?” विक्रम ने काँपती आवाज में पूछा।

रीना ने उसकी आँखों में देखा। “जो तुझे चाहिए, वो। मैं जानती हूँ तू भी चाहता है। राजेश तो कभी घर पर रहता ही नहीं। मैं अकेली हूँ… और तू मेरा देवर है, मेरा अपना।”

रीना ने अब विक्रम का हाथ पकड़कर अपनी जाँघ पर रख दिया। विक्रम का हाथ काँप रहा था, लेकिन वोह हटाने की हिम्मत नहीं कर सका। रीना ने खुद आगे बढ़कर विक्रम के होंठों पर किस किया। पहले हल्का, फिर गहरा। विक्रम भी अब झुक गया। दोनों की साँसें मिलने लगीं।

रीना ने विक्रम को उठाकर बेडरूम में ले गई। कमरे में हल्का लैंप जल रहा था। रीना ने दरवाजा बंद किया और विक्रम को बेड पर धकेल दिया। “आज मैं तुझे सब कुछ दूँगी, लेकिन पहले तू मुझे खुश कर।”

अब चुदाई का पूरा मज़ा शुरू हुआ…

रीना ने अपनी साड़ी उतार दी। उसका गोरा शरीर ब्लाउज और पेटीकोट में चमक रहा था। विक्रम की आँखें उसकी बड़ी-बड़ी छातियों पर अटक गईं। रीना ने ब्लाउज के हुक खोल दिए। दो बड़े, गोल, भरे हुए स्तन बाहर आ गए, जिनके गुलाबी चुचुक तने हुए थे। विक्रम ने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। रीना कराह उठी, “हाँ विक्की… जोर से दबा… चूस इन्हें।”

विक्रम ने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। रीना की उँगलियाँ उसके बालों में घुस गईं। दूसरी तरफ विक्रम का हाथ रीना की जाँघों के बीच चला गया। पेटीकोट ऊपर कर दिया। रीना ने कोई पैंटी नहीं पहनी थी। उसकी चूत पूरी तरह गीली और फूली हुई थी। विक्रम की उँगलियाँ उसकी क्लिटोरिस पर घूमने लगीं। रीना ने जोर से कराहा, “अह्ह्ह… विक्की… अंदर डाल उँगली…”

विक्रम ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। रीना का शरीर तड़पने लगा। उसकी चूत से पानी निकलने लगा। “और तेज… हाँ… बस ऐसे ही…”

रीना ने विक्रम की शर्ट उतारी और उसकी पैंट खोल दी। विक्रम का लंड पूरा तना हुआ था — मोटा, लंबा और नसों वाला। रीना ने उसे मुट्ठी में पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाने लगी। “वाह विक्की… कितना मोटा है तेरा… आज ये मेरी चूत फाड़ देगा।”

रीना ने विक्रम को लिटा दिया और ऊपर चढ़ गई। उसने लंड की नोक अपनी चूत पर रखी और धीरे-धीरे बैठ गई। “आआह्ह्ह… कितना मोटा… फट रही है मेरी चूत…” पूरा लंड अंदर चला गया। रीना ने कमर हिलानी शुरू की — ऊपर-नीचे, गोल-गोल। उसके स्तन उछल रहे थे। विक्रम नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था।

“चोद मुझे विक्की… जोर से चोद… तेरी भाभी की चूत फाड़ दे… हाँ… हाँ… और तेज…”

कमरे में चूत की चप-चप की आवाजें और दोनों की कराहें गूंज रही थीं। विक्रम ने रीना को नीचे लिटा दिया और मिशनरी पोजीशन में जोरदार धक्के मारने लगा। हर धक्के पर रीना चीख उठती, “मार… और मार… मेरी चूत में भर दे अपना माल…”

रीना कई बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत विक्रम के लंड पर कस रही थी। आखिर में विक्रम ने भी जोर से धक्का मारा और रीना की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। रीना ने विक्रम के कान में फुसफुसाया, “ये सिर्फ शुरुआत है… अब तू मेरा है।”

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रीना और विक्रम की रात भर की चुदाई

रीना ने विक्रम को चूमते हुए कहा, “ये सिर्फ शुरुआत है मेरे देवर… आज पूरी रात मैं तुझे अपनी चूत, मुंह और गांड सब कुछ दूंगी। तू तैयार है ना?” विक्रम की आँखों में भूख थी। उसने भाभी को जोर से गले लगाया और दोनों फिर से बेड पर गिर पड़े।

रीना ने विक्रम को लिटा दिया और उसके लंड को मुंह में ले लिया। “मैं पहले तुझे सिखाती हूँ…” उसने लंड की नोक चाटी, फिर पूरा मुंह में ले लिया। गला भर गया था, लेकिन वोह पीछे नहीं हटी। जोर-जोर से चूसने लगी, ऊपर-नीचे मुंह हिलाती हुई। विक्रम के मुंह से आहें निकल रही थीं। “भाभी… उफ्फ… कितना अच्छा…”

रीना ने लंड को चूसते हुए अपनी चूत विक्रम के मुंह पर रख दी। “चाट मेरी चूत… जीभ अंदर डाल…” विक्रम ने दोनों हाथों से उसके गोल नितंब पकड़े और जोर से चाटने लगा। रीना की चूत से रस टपक रहा था, जो विक्रम पी रहा था। दोनों 69 पोजीशन में पूरी तरह व्यस्त थे। रीना का मुंह विक्रम के लंड पर तेजी से चल रहा था, गले तक ले जा रही थी।

कुछ देर बाद रीना ने लंड छोड़ा और बोली, “अब मुझे चोद…”

विक्रम ने उसे कुत्ते की मुद्रा में कर दिया। रीना की कमर नीचे थी, गांड ऊपर। उसने लंड रीना की चूत में एक झटके में पूरा डाल दिया। “आआह्ह्ह… फाड़ डाला… जोर से मार विक्की…” विक्रम ने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह धक्के मारने लगा। हर धक्के पर रीना की चूत से चप-चप की आवाज आ रही थी। उसके स्तन लहरा रहे थे। विक्रम ने आगे झुककर उन्हें दबाया और चोदता रहा।

रीना पहली बार झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ रही थी। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने पोजीशन बदली और रीना को अपने ऊपर बिठा लिया। रीना ने कमर हिलानी शुरू की — तेज, गोल-गोल। “हाँ… गहरी चोद… तेरे लंड से मेरी चूत भर गई है…” दोनों पसीने से तर थे।

आधी रात के बाद रीना ने शरारत की। “अब मेरी गांड भी ले ले…” उसने लंड पर थूक लगाया और अपनी गांड की गांठ पर रखा। धीरे-धीरे बैठ गई। “उफ्फ… दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा है…” पूरा लंड गांड में चला गया। रीना ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। विक्रम नीचे से धक्के मार रहा था। रीना की कराहें कमरे में गूंज रही थीं — “चोद मेरी गांड… फाड़ डाल… हाँ… तेज…”

विक्रम ने रीना को पलटकर मिशनरी में गांड मारी। उसकी टांगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धकेलने लगा। रीना की आँखें उलट गईं। “मर जा रही हूँ… विक्की… और चोद…”

दोनों कई बार झड़ चुके थे। रीना ने विक्रम का लंड फिर मुंह में लिया और पूरा वीर्य पी लिया। “अब तू मेरा हो गया…”

पूरी रात चुदाई चलती रही — कभी चूत, कभी मुंह, कभी गांड। सुबह होते-होते दोनों थककर सो गए, एक-दूसरे की बाहों में।

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रीना, विक्रम और रमा की सुबह की चुदाई

सुबह के साढ़े आठ बजे थे। सूरज की किरणें कमरे में आ रही थीं। रीना और विक्रम नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो रहे थे। विक्रम का लंड अभी भी रीना की जाँघ से सटा हुआ था। रीना की चूत और गांड रात भर की चुदाई से लाल और सूजी हुई थी।

तभी दरवाजा धीरे से खुला। नौकरानी रमा चाय का ट्रे लेकर अंदर आई। वो रोज सुबह कमरे में चाय रखती थी। लेकिन आज का नजारा देखकर उसकी आँखें फैल गईं। रीना और विक्रम दोनों पूरी तरह नंगे, बेड पर बिखरे पड़े थे। रमा 45 साल की थी — मोटी-ताजी देह, बड़े-बड़े स्तन, चौड़ी कमर और मोटी गांड वाली औरत। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भाभी और देवर के बीच ऐसा कुछ चल रहा है।

रमा चुपचाप ट्रे रखकर देखती रही। उसकी सांसें तेज हो गईं। इतने सालों से वो भी अकेली थी। पति मर चुका था और काम के सिवा कुछ नहीं था।

रीना की आँख खुल गई। उसने रमा को देखा। पहले तो वो घबरा गई, लेकिन फिर उसकी आँखों में शरारत चमक उठी। रीना ने विक्रम को हल्का झकझोरा। “विक्की… उठो… हमारा नया मेहमान आ गया है।”

विक्रम चौंककर उठा। रमा को देखकर वो शर्म से लाल हो गया और चादर खींचने लगा। लेकिन रीना ने चादर खींच ली। “शर्मा मत। रमा सब देख चुकी है।”

रीना नंगी ही उठकर रमा के पास गई। उसकी आवाज मीठी थी, “रमा… तूने सब देख लिया ना? अब चुप रहना पड़ेगा… या फिर तू भी शामिल हो जाए?”

रमा ने शर्माते हुए कहा, “मेमसाब… ये क्या कह रही हो… मैं तो बस…”

रीना ने रमा का हाथ पकड़ा और अपने बड़े स्तन पर रख दिया। “छू… कितने सालों से तू भी अकेली है ना? विक्रम का लंड देख… कितना मोटा और तगड़ा है। आज तुझे भी मजा दिलाएगा।”

रमा का विरोध कमजोर पड़ गया। रीना ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। रमा के भारी-भारी स्तन बाहर आ गए। विक्रम की आँखें उन पर अटक गईं। रीना ने रमा को बेड पर बिठा दिया और विक्रम को इशारा किया।

विक्रम ने रमा के स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। रमा की सांसें फूल गईं। “अम्मा… धीरे…” रीना हँसते हुए रमा की चूत पर उँगलियाँ फेरने लगी। रमा की चूत पहले से गीली हो चुकी थी।

रीना ने विक्रम को कहा, “पहले रमा की चूत चाट… उसे तैयार कर।” विक्रम ने रमा की टांगें फैला दीं और उसकी काली, मोटी चूत पर जीभ फेरनी शुरू की। रमा जोर से कराह उठी, “हाय राम… कितना अच्छा…”

रीना ने रमा के मुंह में अपना स्तन ठूंस दिया। रमा चूसने लगी। विक्रम ने अब खड़ा होकर अपना लंड रमा की चूत पर रगड़ा और एक झटके में अंदर डाल दिया। “आआह्ह्ह… फट गई मेरी चूत… बड़ा लंड है बाबा…” रमा चीख पड़ी।

विक्रम ने रमा को जोर-जोर से चोदना शुरू किया। हर धक्के पर रमा के मोटे स्तन उछल रहे थे। रीना रमा के ऊपर बैठ गई और अपनी चूत रमा के मुंह पर रख दी। “चाट मेरी चूत रमा… साफ कर…” रमा जीभ से चाटने लगी।

तीनों का तालमेल बन गया। विक्रम रमा की चूत चोद रहा था, रीना रमा के मुंह पर बैठी हुई थी। कुछ देर बाद रीना ने विक्रम को रमा की गांड में डालने को कहा। रमा पहले हिचकिचाई, लेकिन रीना ने चूत चाटते हुए तैयार कर दिया।

विक्रम ने रमा की मोटी गांड में अपना लंड धीरे-धीरे घुसाया। “मर गई… फाड़ डाला…” रमा चीख रही थी, लेकिन मजा भी ले रही थी। रीना नीचे लेट गई और रमा उसकी चूत चाट रही थी। विक्रम रमा की गांड मार रहा था।

आखिर में विक्रम ने रमा की चूत में अपना वीर्य भर दिया। रमा भी झड़ गई। तीनों थककर बेड पर लेट गए। रीना ने रमा के गाल पर चुम्मा लिया, “अब से तू हमारी साथी है… रोज मजा करेंगे।”

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रीना, विक्रम और रमा का घर भर में चुदाई का दिन

तीनों ने नहा-धोकर नाश्ता किया। रीना ने रमा को आज का काम छोड़ने को कहा। “आज पूरा दिन हम तीनों का है। घर की हर जगह पर चुदाई करेंगे।” रमा शरमा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में भी भूख थी।

रसोई में चुदाई

सबसे पहले रसोई। रीना ने रमा को काउंटर पर झुकाया। रमा की साड़ी कमर तक ऊपर थी। विक्रम ने पीछे से अपना मोटा लंड रमा की चूत में ठोंक दिया। “आह्ह्ह… बाबा… सुबह से ही…” रमा कराह रही थी। विक्रम तेज-तेज धक्के मार रहा था। रीना काउंटर पर बैठ गई और रमा का सिर अपनी चूत पर दबा दिया। रमा चूत चाट रही थी जबकि विक्रम उसकी चूत फाड़ रहा था।

रीना ने विक्रम को रोका और खुद काउंटर पर लेट गई। “अब मुझे चोदो।” विक्रम ने रीना की टांगें फैलाकर रसोई के काउंटर पर जोरदार चुदाई शुरू कर दी। चप-चप… चप-चप की आवाजें पूरे किचन में गूंज रही थीं। रमा विक्रम के लंड को चाट रही थी जब वो रीना की चूत में जा रहा था। रीना पहले झड़ गई। विक्रम ने रमा को भी वहीं चोदा और दोनों के मुंह में वीर्य छोड़ दिया।

बाथरूम में चुदाई

नहाने का समय। तीनों नंगे बाथरूम में घुस गए। शावर जल रहा था। गीले शरीरों पर पानी बह रहा था। रीना ने विक्रम को दीवार से सटाया और उसके लंड को मुंह में ले लिया। रमा पीछे से विक्रम की गांड चाट रही थी। फिर विक्रम ने रीना को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। रीना की एक टांग उसके कंधे पर थी। “हाँ… गहरी… पानी के साथ चोद मुझे…”

रमा को भी बारी आई। विक्रम ने उसे शावर के नीचे घुटनों पर बिठाया और मुंह चोदा। फिर रमा को मोड़कर गांड मारी। पानी की धार के साथ रमा चीख रही थी, “फाड़ दो मेरी गांड… हाँ… और जोर से…” रीना रमा की चूत उँगलियों से चोद रही थी। बाथरूम में तीनों की चीखें और कराहें गूंज रही थीं।

बालकनी में चुदाई

दोपहर में बालकनी। ऊपर की बालकनी में कोई नहीं आता था, लेकिन थोड़ा रिस्क था। रीना ने कहा, “रिस्क में मजा ज्यादा है।” उसने विक्रम को कुर्सी पर बिठाया और उल्टा बैठकर चुदाई शुरू कर दी। उसकी कमर तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। रमा बालकनी की रेलिंग पकड़कर खड़ी थी, विक्रम का एक हाथ उसकी चूत में था।

विक्रम ने रीना को रेलिंग पर झुकाया और पीछे से चोदा। सामने पड़ोस का घर दिख रहा था। रीना दबी आवाज में चीख रही थी, “चोदो… किसी को दिख जाए तो भी चोदते रहो…” रमा नीचे बैठकर विक्रम की गांड चाट रही थी। फिर तीनों बालकनी के फर्श पर लेट गए। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — कभी रीना की चूत, कभी रमा की गांड। दोपहर की धूप में तीनों पसीने से तर थे।

शाम की लास्ट चुदाई (लिविंग रूम)

शाम होते-होते तीनों लिविंग रूम में आए। रीना ने कहा, “आज का अंत यादगार होना चाहिए।” उसने विक्रम को सोफे पर लिटाया और ऊपर बैठकर चूत में लंड ले लिया। रमा विक्रम के मुंह पर बैठ गई। दोनों महिलाएँ एक-दूसरे को चूम रही थीं जबकि विक्रम दोनों को चोद रहा था।

पोजीशन बार-बार बदली — डॉगी, राइडिंग, थ्रीसम सैंडविच। रमा और रीना दोनों एक साथ विक्रम के लंड को चूस रही थीं। आखिर में विक्रम ने रीना की चूत और रमा की गांड में बारी-बारी वीर्य छोड़ा। तीनों थककर एक-दूसरे से चिपककर लेट गए।

रीना ने मुस्कुराते हुए कहा, “घर अब हमारा चुदाई का मैदान बन गया है।”

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