ससुर ने बहू की गुलाबी बुर को अपना बना लिया, पति से चुदने में मजा नहीं आता | sasur bahu chudai story

ससुर की लालसा और बहू की गुलाबी बुर

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राहुल और उसकी पत्नी नेहा की शादी को सिर्फ एक साल हुआ था। राहुल 28 साल का था, अच्छी नौकरी करता था, लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर था। नेहा 24 साल की बेहद खूबसूरत, गोरी, नाजुक काया वाली युवती थी। उसकी छाती भरी हुई, कमर पतली और गुलाबी बुर बहुत टाइट थी। शादी के बाद नेहा को जल्दी ही पता चल गया कि राहुल से चुदने में उसे कोई मजा नहीं आता। राहुल का लंड छोटा और जल्दी झड़ जाता था। नेहा अंदर ही अंदर बहुत निराश और भूखी रहती थी।

घर में राहुल के पिता, 52 साल के रघुवीर भी रहते थे। रघुवीर एक स्वस्थ, मजबूत कद-काठी वाले ससुर थे। उनकी पत्नी गुजर चुकी थी। नेहा के आने के बाद से रघुवीर की नजरें अक्सर उसकी देह पर टिक जाती थीं, लेकिन उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा। नेहा भी ससुर की ताकत और मर्दानगी को महसूस करती थी।

एक दिन राहुल 4 दिन के लिए दिल्ली ऑफिस के काम से चला गया। घर में सिर्फ नेहा और रघुवीर रह गए। शाम को बारिश हो रही थी। नेहा रसोई में खाना बना रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, जिससे उसकी क्लीवेज दिख रही थी। रघुवीर वहीं बैठे चाय पी रहे थे।

रघुवीर ने गहरी सांस ली और बोले, “बहू, तुम आजकल बहुत उदास रहती हो। क्या बात है? राहुल से कोई समस्या तो नहीं?”

नेहा चौंक गई। उसने मुड़कर देखा। उसकी आंखें नम थीं। “ससुर जी… कुछ नहीं। बस… थोड़ी थकान है।”

रघुवीर उठकर पास आए। “बहू, मैं तुम्हारा ससुर हूं। तुम मुझसे कुछ भी छिपा सकती हो। राहुल मेरा बेटा है, लेकिन मैं जानता हूं कि वो तुम्हें खुश नहीं रख पा रहा।”

नेहा का दिल जोर से धड़का। शर्म और दर्द के मिश्रण से उसकी आवाज कांपी। “ससुर जी… राहुल… वो… वो मुझसे संभोग नहीं कर पाते ठीक से। उनका… छोटा है और जल्दी… मैं क्या करूं? मैं जवान हूं, मेरी इच्छाएं हैं।”

रघुवीर ने नेहा का कंधा पकड़ा। “बहू, तुम बहुत सुंदर हो। तुम्हारी यह गुलाबी बुर भूखी है। अगर तुम चाहो तो… मैं तुम्हें वो संतोष दे सकता हूं जो मेरे बेटे नहीं दे पा रहा।”

नेहा ने आंखें नीचे कर लीं। “ससुर जी… ये पाप है। आप मेरे ससुर हैं।”

“पाप तभी है जब मजा न आए बहू। मैं तुम्हें वो मर्दानगी दिखाऊंगा जो तुमने कभी नहीं देखी,” रघुवीर ने धीरे से नेहा की कमर पर हाथ फेरा।

नेहा का शरीर कांप उठा। लंबी बातचीत के बाद नेहा ने आंसू पोछते हुए कहा, “ससुर जी… मुझे बहुत अकेलापन लगता है। अगर आप मुझे खुश कर सकें तो… लेकिन धीरे से।”

रघुवीर ने नेहा को अपनी ओर खींचा और उसके माथे पर किस किया। नेहा ने विरोध नहीं किया। दोनों के बीच सस्पेंस भरी हवा थी — अपराधबोध, इच्छा और लालसा।

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ससुर नेहा को सोफे पर ही कपड़े उतारकर उसकी ब्रा-पैंटी निकालते हैं

रघुवीर ने नेहा को हॉल के सोफे पर धीरे से लिटा दिया। बारिश की आवाज बाहर हो रही थी। नेहा का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। ससुर की मजबूत देह देखकर उसकी गुलाबी बुर पहले से ही गीली हो चुकी थी।

“बहू… आज मैं तुम्हारी हर भूख मिटा दूंगा,” रघुवीर ने गहरी आवाज में कहा।

उन्होंने नेहा की साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी सरकते ही ब्लाउज में दबी भरी हुई छाती सामने आई। रघुवीर ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही काली लेस वाली ब्रा दिखी, जिसमें नेहा के गोरे, बड़े स्तन फटने को तैयार थे।

नेहा शर्म से बोली, “ससुर जी… धीरे… मुझे डर लग रहा है।”

रघुवीर ने ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा उतरते ही नेहा के दोनों गोल, भरे स्तन छूट पड़े। गुलाबी निप्पल सख्त हो चुके थे। रघुवीर ने एक स्तन को जोर से पकड़कर मसलना शुरू किया और दूसरे को मुंह में ले लिया। “आह्ह्ह… ससुर जी… उम्म्म… बहुत अच्छा लग रहा है…” नेहा की सिसकारी निकल गई। उसका चेहरा लाल हो गया, आंखें बंद थीं।

रघुवीर दूसरे स्तन को भी चूसते रहे, कभी हल्का काटते। नेहा की उंगलियां ससुर के बालों में फंस गईं।

फिर रघुवीर ने नेहा की साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया। सफेद लेस वाली पैंटी पहले से गीली थी। उन्होंने पैंटी को धीरे-धीरे जांघों तक उतारा। नेहा की साफ, गुलाबी बुर पूरी तरह नंगी हो गई — बहुत टाइट और छोटी।

“बहू… कितनी सुंदर और टाइट है तुम्हारी बुर,” रघुवीर ने कहा। उन्होंने उंगली से क्लिटोरिस सहलाया। नेहा ने कमर उठाई, “आह्ह्ह… ससुर जी… अंदर डालिए ना…”

रघुवीर ने दो उंगलियां अंदर डालीं और फिंगरिंग तेज कर दी। नेहा के मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं। “मुझे मजा आ रहा है… पहली बार इतना… आह्ह्ह!!!”

अब रघुवीर ने अपनी धोती उतारी। उनका मोटा, लंबा और खड़ा लंड बाहर आ गया। नेहा ने देखकर चौंक गई।

रघुवीर ने नेहा की जांघें फैलाईं और लंड का सिरा गुलाबी बुर पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डालते हुए अंदर डालने लगे।

“आआआह्ह्ह्ह!!! ससुर जी… बहुत मोटा है… फट जाएगी मेरी बुर…” नेहा ने जोर से चीख मारी। आंसू निकल आए। रघुवीर रुके नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। नेहा की टाइट बुर पूरी तरह फैल गई थी।

“अब दर्द कम हो जाएगा बहू… अब मजा लो,” रघुवीर ने धीमी गति से चोदना शुरू किया। नेहा के चेहरे पर दर्द के साथ आनंद आ रहा था। “और जोर से… ससुर जी… मुझे चोदिए… आह्ह्ह…”

रघुवीर ने नेहा को सोफे पर घुटनों के बल मोड़ दिया। डॉगी स्टाइल पोजीशन में नेहा की गुलाबी बुर पूरी तरह उठकर सामने थी। नेहा शर्म और इच्छा से कांप रही थी।

“ससुर जी… धीरे… मैं सह नहीं पाऊंगी,” नेहा ने कांपती आवाज में कहा।

रघुवीर ने नेहा की कमर को मजबूती से पकड़ा। उनका मोटा, गर्म लंड नेहा की अभी-अभी फटी बुर पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्का। “धड़ाक!” पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया।

“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! ससुर जी… फट गई मेरी बुर!!! आह्ह्ह्ह…” नेहा जोर से चीख पड़ी। उसकी आंखें उलटी हो गईं, मुंह खुला रहा। दर्द और अचानक आए मजा के मिश्रण से उसका पूरा शरीर कांप उठा।

रघुवीर ने रुकने की बजाय तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। “ले बहू… ले मेरी पूरी ताकत… अब मजा ले…” हर धक्के के साथ “धप धप धप” की आवाज हो रही थी। नेहा की गुलाबी बुर ससुर के मोटे लंड से पूरी तरह फैली हुई थी।

“आह्ह्ह… ससुर जी… और जोर से… चोदिए मुझे… मेरी बुर फाड़ दीजिए!!! आह्ह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है…” नेहा अब दर्द भूलकर जोर-जोर से चिल्ला रही थी। उसके भारी स्तन नीचे लटककर जोर-जोर से हिल रहे थे।

रघुवीर ने एक हाथ से नेहा के बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया। अब वे जानवरों की तरह तेजी से चोद रहे थे। “बहू… तुम्हारी बुर कितनी टाइट और गर्म है… मैं तुम्हें रोज चोदूंगा…”

नेहा का चेहरा सोफे पर दबा हुआ था। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन चेहरे पर अपार आनंद था। “हां ससुर जी… मुझे अपनी रखैल बना लीजिए… राहुल से कभी मजा नहीं आया… आपकी लंड ने मुझे जिंदा कर दिया… आह्ह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूं!!!”

रघुवीर की गति और तेज हो गई। वे नेहा की बुर में गहराई तक धक्के मार रहे थे। नेहा की चूत से रस निकलकर जांघों पर बह रहा था।

अचानक नेहा का शरीर सख्त हो गया। “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! ससुर जी… मैं आ गई… मर गई मैं!!! आह्ह्ह्ह…” नेहा ने बहुत जोर से ऑर्गेज्म किया। उसकी बुर ससुर के लंड को जोर से भींचने लगी।

रघुवीर भी रुक नहीं पाए। उन्होंने नेहा की कमर को और कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारते हुए पूरा गर्म वीर्य नेहा की गुलाबी बुर के अंदर छोड़ दिया। “ले बहू… ले मेरा बीज…”

दोनों थककर सोफे पर ही गिर पड़े। नेहा ससुर की छाती से लिपट गई और रो पड़ी। “ससुर जी… आज पहली बार मुझे असली चुदाई का मजा आया… आपने मुझे औरत बना दिया…”

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नेहा ससुर को ब्लो जॉब देती है और फिर ससुर उसे बालकनी में खड़े-खड़े चोदते हैं।

रघुवीर नेहा को उठाकर बेडरूम में ले गए। नेहा अभी भी थकी हुई थी, लेकिन उसकी आंखों में नई भूख थी।

“ससुर जी… आज मैं भी आपको खुश करना चाहती हूं,” नेहा ने शरमाते हुए कहा।

उसने रघुवीर को बिस्तर पर बैठाया और उनके सामने घुटनों के बल बैठ गई। रघुवीर का मोटा, गाढ़ा लंड अभी भी सख्त था। नेहा ने उसे दोनों हाथों से पकड़ा और पहले जीभ से टिप चाटी। “उम्म्म… कितना बड़ा और गर्म है…” फिर उसने मुंह खोलकर लंड को धीरे-धीरे मुंह में लिया।

नेहा आंखें बंद करके जोर-जोर से चूसने लगी। “ग्लप… ग्लप… ग्लप…” आवाजें हो रही थीं। रघुवीर ने नेहा के बाल पकड़कर उसका सिर आगे-पीछे किया। “बहू… बहुत अच्छा चूस रही हो… आह्ह…”

नेहा का मुंह पूरा भर गया था। वह कभी लंड को गले तक ले जाती, कभी बाहर निकालकर चाटती। उसके होंठ लंड के चारों ओर फैले हुए थे। रघुवीर के चेहरे पर आनंद था। “बहू… तुम्हारा मुंह स्वर्ग है…”

कुछ देर ब्लो जॉब के बाद रघुवीर ने नेहा को उठाया। “चलो बालकनी में… रात की हवा में चोदूंगा तुम्हें।”

दोनों नंगे ही बालकनी में गए। बाहर अंधेरा था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रघुवीर ने नेहा को बालकनी की रेलिंग पर झुकाया। नेहा खड़े-खड़े पीछे से तैयार हो गई। उसकी गुलाबी बुर फिर से गीली हो चुकी थी।

रघुवीर ने पीछे से लंड लगाया और एक जोरदार धक्का मारा। “धप्प!!!”

“आआआह्ह्ह्ह!!! ससुर जी… फिर से पूरा अंदर… आह्ह्ह…” नेहा जोर से चीखी। रेलिंग को पकड़े हुए उसका शरीर हिल रहा था।

रघुवीर ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। “धप धप धप धप…” की आवाज रात में गूंज रही थी। नेहा की बुर ससुर के लंड को चूस रही थी।

“चोदिए ससुर जी… जोर से चोदिए… कोई देख ले तो भी चोदिए… मैं आपकी हूं… आह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है!!!” नेहा बिना रुके चिल्ला रही थी। उसके स्तन रेलिंग पर दब रहे थे और नीचे लटक-लटककर हिल रहे थे।

रघुवीर ने नेहा के बाल खींचे और गति बढ़ा दी। “बहू… तुम्हारी बुर ने मुझे पागल कर दिया है… ले… ले मेरी पूरी शक्ति…”

नेहा का चेहरा आनंद से लाल था। आंखें बंद, मुंह खुला, जीभ बाहर। “मैं फिर से झड़ रही हूं ससुर जी… आह्ह्ह्ह्ह!!! आपका लंड जादू है…”

दोनों एक साथ झड़ गए। रघुवीर ने नेहा की बुर में गहराई तक वीर्य भर दिया। नेहा की टांगें कांप रही थीं।

दोनों बालकनी में ही लिपटकर खड़े रहे। नेहा ने ससुर का चेहरा चूम लिया। “ससुर जी… आपने मुझे नई जिंदगी दी है…”

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राहुल आने वाला है, लेकिन ससुर नेहा को जल्दबाजी में एक आखिरी राउंड

सुबह के 10 बजे थे। राहुल का फोन आया था — “मैं दोपहर 1 बजे तक घर पहुंच जाऊंगा।” नेहा का दिल जोर से धड़का। लेकिन ससुर रघुवीर ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहू… अभी एक घंटा है। आखिरी राउंड ले लूं तुम्हारा।”

नेहा शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी बुर पहले से ही तर हो चुकी थी। “ससुर जी… जल्दी… राहुल आने वाला है… लेकिन मुझे रोक मतिए… मुझे फिर से चाहिए।”

रघुवीर ने नेहा को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। नेहा ने जल्दी से अपनी नाइट सूट ऊपर किया। उसकी पैंटी पहले से गीली थी। रघुवीर ने पैंटी को घुटनों तक उतारा और अपना लंड बाहर निकाला।

बिना ज्यादा बात किए उन्होंने नेहा की जांघों को थोड़ा फैलाया और खड़े-खड़े ही लंड को गुलाबी बुर में ठेल दिया।

“आह्ह्ह्ह!!! ससुर जी… जल्दी… तेज… आह्ह्ह…” नेहा ने दीवार को पकड़कर कमर पीछे की।

रघुवीर ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। “धप धप धप…” की आवाज तेज हो गई। नेहा की बुर ससुर के मोटे लंड को चूस रही थी।

“बहू… राहुल आने वाला है… फिर भी मैं तुम्हें चोद रहा हूं… कितनी रंडी हो तुम मेरी…” रघुवीर ने नेहा के बाल खींचे और और जोर से पेला।

नेहा की सिसकारियां तेज हो गईं — “हां ससुर जी… मैं आपकी रंडी हूं… राहुल से पहले आपको चोदवाना है… आह्ह्ह्ह… फाड़ दीजिए मेरी बुर… जल्दी… आह्ह्ह्ह!!!”

उसका चेहरा दीवार पर दबा हुआ था। आंखें बंद, मुंह खुला, पसीना बह रहा था। स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। रघुवीर की गेंदें नेहा की जांघों से टकरा रही थीं।

“ससुर जी… मैं झड़ रही हूं… आआआह्ह्ह्ह!!! राहुल आने से पहले मुझे भर दीजिए…” नेहा ने जोर से चीख मारी और झड़ गई। उसकी टांगें कांप रही थीं।

रघुवीर ने भी तेजी बढ़ाई। “ले बहू… ले मेरा वीर्य…” उन्होंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और नेहा की गुलाबी बुर में गर्म-गर्म वीर्य उंडेल दिया।

दोनों जल्दी से कपड़े ठीक करने लगे। नेहा की बुर से वीर्य की कुछ बूंदें टपक रही थीं। नेहा ने ससुर को चूम लिया और बोली, “ससुर जी… राहुल के रहते भी हम ऐसा ही करेंगे… मैं अब आपकी बिना नहीं रह सकती।”

राहुल के आने से ठीक 20 मिनट पहले दोनों अलग हो गए। नेहा के चेहरे पर संतोष और डर का मिश्रण था।

राहुल घर आ गया। रात को ससुर नेहा को चुपके से अपने कमरे में बुलाकर चोदते हैं

राहुल शाम को घर पहुंच गया। थका हुआ होने के कारण वह जल्दी ही खाना खाकर सो गया। उसका कमरा बेडरूम के बगल में था। नेहा और रघुवीर रात के 12 बजे तक इंतजार करते रहे।

जब पूरा घर शांत हो गया, नेहा चुपके से अपने कमरे से निकली। उसने सिर्फ एक हल्की नाइट सूट पहनी थी। ससुर के कमरे का दरवाजा धीरे से खुला। रघुवीर बिस्तर पर लेटे इंतजार कर रहे थे।

नेहा अंदर घुसी और दरवाजा बंद किया। “ससुर जी… राहुल बगल वाले कमरे में सो रहा है… बहुत रिस्क है… लेकिन मुझे आपकी जरूरत है,” नेहा ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज में डर और इच्छा दोनों थे।

रघुवीर ने नेहा को खींचकर बिस्तर पर लिया। “बहू… डर मत… आज मैं तुम्हें चुपचाप लेकिन जोर से चोदूंगा।”

उन्होंने नेहा की नाइट सूट उतारी। ब्रा के हुक खोलकर नेहा के बड़े-बड़े स्तन बाहर निकाले। रघुवीर ने एक स्तन मुंह में लिया और जोर से चूसने लगे। नेहा ने मुंह दबाकर सिसकारी रोकी — “उम्म्म्म… ससुर जी… धीरे… राहुल जाग जाएगा… आह्ह्ह…”

रघुवीर ने नेहा की पैंटी भी उतार दी। नेहा की गुलाबी बुर पहले से गीली थी। रघुवीर ने उसे चारों खाने चित लिटाया और ऊपर चढ़ गए। मिशनरी पोजीशन में उन्होंने अपना मोटा लंड नेहा की बुर पर रखा और धीरे से अंदर डाला।

“आह्ह्ह्ह… ससुर जी… पूरा अंदर… बहुत मोटा है…” नेहा ने तकिए में मुंह दबाकर कहा।

रघुवीर धीमी लेकिन गहरी गति से चोदने लगे। हर धक्के के साथ बिस्तर हल्का-हल्का हिल रहा था। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “और गहरा… ससुर जी… मुझे भर दीजिए… राहुल बगल में है… फिर भी आप मुझे चोद रहे हैं… आह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…”

रघुवीर ने गति थोड़ी बढ़ाई। “बहू… तुम्हारी बुर अब मेरी हो गई है… राहुल कभी तुम्हें ऐसे नहीं चोद सकता… ले… ले मेरी पूरी ताकत…”

नेहा ने ससुर की पीठ पर नाखून गाड़ दिए। उसका चेहरा आनंद से लाल था, आंखें बंद, होंठ कांप रहे थे। “हां ससुर जी… आप ही मेरे असली मर्द हो… मुझे रोज चोदिए… चाहे राहुल बगल में ही सो रहा हो… आह्ह्ह्ह… मैं झड़ रही हूं…”

नेहा का शरीर अचानक सख्त हो गया। वह तकिए में मुंह दबाकर जोर से झड़ गई। उसकी बुर ससुर के लंड को जोर से भींच रही थी।

रघुवीर भी रुक नहीं पाए। उन्होंने नेहा को कसकर पकड़ लिया और गहराई तक वीर्य उंडेल दिया। “ले बहू… ले मेरा बीज…”

दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से चिपके रहे। नेहा ने ससुर के कान में फुसफुसाया, “ससुर जी… यह रिस्क मुझे और उत्तेजित कर रहा है… अब हम रोज ऐसा करेंगे।”

रघुवीर ने नेहा को चूम लिया। “जितनी बार चाहो… तुम अब मेरी हो।”

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